Adharam Madhuram Lyrics: मधुराष्टकम् – अधरं मधुरं वदनं मधुरं

यह मधुराष्टकम (Adharam Madhuram) एक बहुत ही सुन्दर भजन है। जिसे भगवान श्री कृष्ण की उपासना करने के लिए गाया है। इस मधुराष्टकम (Adharam Madhuram) भजन में भगवान श्री कृष्ण के बालक रूप का वर्णन किया जाता है।

मधुराष्टकम (Adharam Madhuram) भजन में भगवान श्री कृष्ण के प्रत्येक अंग, उनकी क्रीडाओं, तथा गतिविधियों के बारे में भी बताया गया है।

Madhurashtakam Lyrics

इस मधुर भजन मधुराष्टकम (Adharam Madhuram) की रचना भगवान श्री कृष्ण के सबसे परम प्रिय भक्त श्री वल्लभाचार्य जी के द्वारा की गई है।

इस मधुर भजन का गान करने से भक्तों को श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइये जानते है मधुराष्टकम् (Adharam Madhuram) भजन तथा इसके हिंदी अर्थ के बारे में।

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे शिव तांडव स्तोत्रम [Shiv Tandav Stotram], दुर्गा कवच [Durga Kavach], या कनकधारा स्तोत्र [Kanakdhara Stotra] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है।



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मधुराष्टकम् भजन हिंदी अर्थ सहित – Adharam Madhuram Lyrics with Hindi Meaning

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥1॥

हिंदी अर्थ – श्रीमधुरापति जी का सब कुछ मधुर है| उनके होंठ मधुर है, नेत्र मधुर है, मुख मधुर है, हास्य मधुर है, हृदय मधुर है गति भी मधुर है|

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥2॥

हिंदी अर्थ – उनके वचन मधुर है, चरित्र मधुर है, अंगभंगी मधुर है, चाल मधुर है तथा भ्रमण भी मधुर है| श्रीमधुराधिपति जी का सब कुछ मधुर है|

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥3॥

हिंदी अर्थ – उनका वेणु मधुर है, चरण की धूल भी मधुर है, करकमल मधुर है, चरण मधुर है, नृत्य मधुर है, सख्य भी बहुत मधुर है| श्रीमधुराधिपति का सब कुछ बहुत मधुर है|

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥4॥

हिंदी अर्थ – उनका गान मधुर है, पान मधुर है, भोजन भी मधुर है, रूप मधुर है, तिलक भी मधुर है| श्रीमधुराधिपति का सभी कुछ मधुर है|

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥5॥

हिंदी अर्थ – उनका कार्य मधुर है, तैरना मधुर है, हरण मधुर है, रमण मधुर है, उद्धार मधुर है तथा शांति भी अति मधुर है| श्रीमधुराधिपति का सब कुछ बहुत मधुर है|

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥6॥

हिंदी अर्थ – श्रीमधुराधिपति की गूंजा मधुर है, माला मधुर है, यमुना मधुर है, उनकी तरंगे मधुर है, उनका जल भी मधुर है तथा कमल भी मधुर है| उनका सभी कुछ बहुत मधुर है|

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥7॥

हिंदी अर्थ – गोपियाँ मधुर है, उनकी लीलाएँ मधुर है, उनका संयोग मधुर है, वियोग मधुर है, नि रिक्षण मधुर है, तथा शिष्टाचार भी मधुर है| श्रीमधुराधिपति का सब कुछ मधुर है|

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥8॥

हिंदी अर्थ – गौप मधुर है, गौए मधुर है, लकुटी मधुर है, रचना मधुर है, दलन मधुर है तथा उसका फल भी बहुत मधुर है| श्रीमधुराधिपति का सभी कुछ बहुत मधुर है|

Madhurashtakam Lyrics

Madhurashtakam Lyrics in English | अधरं मधुरं वदनं मधुरं

Adharam madhuram vadnam madhuram,
Nayanam madhuram hasitam madhuram.
Hridayam madhuram gamanam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Vachanam Madhuram Charitam Madhuram,
Vasanam madhuram valitam madhuram.
Chalitam madhuram bhramitam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Venur madhuro renur madhurah,
Panir madhurah padau madhurau.
Nrityam madhuram sakhyam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Geetam Madhuram Peetam Madhuram,
Bhuktam Madhuram suptam madhuram.
Roopam madhuram tilakam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Karanam madhuram taranam madhuram,
Haranam madhuram ramanam madhuram.
Vamitam madhuram shamitam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.



Gunja madhura mala madhura,
Yamuna Madhura vichi Madhura.
Salilam madhuram kamalam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Gopi madhura leela madhura,
Yuktam madhuram muktam madhuram.
Drishtam Madhuram Srishtam Madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Gopa Madhura gavo Madhura,
Yastir Madhura srishtir Madhura.
Dalitam madhuram phalitam madhuram,
Madhuradhipate rakhilam madhuram.

Swasti Vachan Mantra: स्वस्ति वाचन मंत्र अर्थ सहित

Swasti Vachan Mantra: हिंदू धर्म में मंत्रो का बहुत महत्व है। किसी भी शुभ काम से पहले भगवान को याद किया जाता है जिसके लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। यूं तो हिंदू धर्म में अनगिनत मंत्र है, लेकिन स्वस्ति वाचन मंत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र को स्वस्तिक मंत्र भी कहा जाता है। हिंदू धर्म को सभी धर्मों से प्राचीन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अमर वेदों और मंत्रों का उच्चारण करने से दिव्य शक्तियों की प्राप्ति होती है।

स्वस्ति वाचन मंत्र

स्वस्ति वाचन मंत्र का उच्चारण करने से मन को शांति प्राप्त होती है, और हम किसी भी कार्य में ध्यान लगा सकते हैं।

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे इसी महत्वपूर्ण मंत्र के बारे में। स्वस्तिवाचन मंत्र के लिरिक्स (Swasti Vachan Mantra Lyrics with Meaning) के साथ इसका हिंदी अर्थ भी जानेंगे। इसी के साथ बिना किसी देरी के 99Pandit के साथ जानते हैं इस प्राचीन मंत्र के बारे में।

What is Swasti Vachan Mantra? – स्वस्ति वाचन मंत्र क्या है?

स्वस्ति वाचन मंत्र जिसे स्वस्ति वाचन भी कहा जाता है, वैदिक मंत्रों का एक समूह है जिसे आमतौर पर किसी भी धार्मिक समारोह की शुरुआत में समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हुए गाया जाता है। सु+अस्ति=स्वस्ति का अर्थ है कल्याण।

इस मंत्र का उच्चारण शांति पाठ के 11 मंत्रों के साथ किया जाता है। इस सेट के मंत्रों का उच्चारण हाथ के इशारों से किया जाता है। इस मंत्र का उच्चारण करने से मन अत्यंत शांत, स्थिर और स्थिर हो जाता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र

किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, शगुन आदि के आरंभ में पवित्र वेदों से स्वस्तिवाचन का उच्चारण पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है।

साथ ही हम जब भी कोई शुभ कार्य करते हैं, तो वैदिक स्वस्तिवाचन का उच्चारण करने की परंपरा रही है। यह एक गहन विज्ञान है जिसे समझना आवश्यक है।

Swasti Vachan Mantra lyrics

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अर्थ: महान कीर्ति वाले इन्द्र हमारा कल्याण करो, विश्व के ज्ञानस्वरूप पूषादेव हमारा कल्याण करो। जिसका हथियार अटूट है, ऐसे गरुड़ भगवान हमारा मंगल करो। बृहस्पति हमारा मंगल करो।

संपूर्ण स्वस्ति वाचन मंत्र अर्थ सहित /शांति पाठ मंत्र सहित

मंत्र 1

ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद्वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे-दिवे॥ (1)

अर्थ – हमारे समीप चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न प्रभावित हों, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रगति को न बाधित करने वाले तथा सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिये तत्पर रहें।

मंत्र 2

ॐ देवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवानां रातिरभि नो निवर्तताम्।
देवानां सख्यमुपसेदिमा वयं देवा न आयुः प्रतिरन्तु जीवसे॥ (2)

अर्थ – यजमान की इच्छा रखने वाले देवताओं की कल्याणकारिणी श्रेष्ठ बुद्धि सदा हमारे सम्मुख रहे, देवताओं का दान हमें प्राप्त हो, हम देवताओं की मित्रता प्राप्त करें, देवता हमारी आयु में जीवन के निमित्त वृद्धि करें।

मंत्र 3

ॐ तान् पूर्वया निविदा हूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम्।
अर्यमणं वरुणं सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत्॥ (3)

अर्थ – हम वेदरुप सनातन वाणी के द्वारा अच्युतरुप भग, मित्र, अदिति, प्रजापति, अर्यमण, वरुण, चन्द्रमा एवं अश्विनीकुमारों का आवाहन करते हैं। ऐश्वर्यमयी सरस्वती महावाणी हमें सभी प्रकार का सुख प्रदान करें।

मंत्र 4

ॐ तन्नो वातो मयो भुवातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः।
तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम्॥ (4)

अर्थ – वायुदेवता हमें सुखकारी औषधियाँ प्राप्त करायें। माता पृथ्वी एवं पिता स्वर्ग भी हमें सुखकारी औषधियाँ प्रदान करें। सोम का अभिषव करने वाले सुखदाता ग्रावा उस औषधरुप अदृष्ट को प्रकट करें। हे अश्विनी-कुमारों! आप दोनों सभी के आधार हैं, हमारी प्रार्थना स्वीकार करें।

मंत्र 5

ॐ तमीशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियञ्जिन्वमवसे हूमहे वयम्।
पूषा नो यथा वेदसामसद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये॥ (5)

अर्थ – हम स्थावर-जंगम के स्वामी, बुद्धि को सन्तोष प्रदान करने वाले रुद्रदेवता का रक्षा के निमित्त आवाहन करते हैं। वैदिक ज्ञान एवं धन की रक्षा करने वाले, पुत्र आदि के पालक, अविनाशी पुष्टि-कर्ता देवता हमारी वृद्धि एवं कल्याण के निमित्त हों।

मंत्र 6

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ (6)

अर्थ – महती कीर्ति वाले ऐश्वर्यशाली इन्द्र हमारा कल्याण करें, जिसको संसार का ज्ञान है तथा जिसका सब पदार्थों में स्मरण है, समस्त प्राणियों के पोषणकर्ता वे पूषा (सूर्य) हमारा कल्याण करें। जिनकी चक्रधारा के समान गति को कोई रोक नहीं सकता, वे गरुड़देव हमारा कल्याण करें। वेदवाणी के स्वामी बृहस्पति हमारा कल्याण करें।

मंत्र 7

ॐ पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभं यावानो विदथेषु जग्मयः।
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसा गमन्निह॥ (7)

अर्थ – चितकबरे वर्ण के घोड़ों वाले, अदिति माता से उत्पन्न, सभी का कल्याण करने वाले, यज्ञशालाओं में जाने वाले, अग्निरुपी जिह्वा वाले, सर्वज्ञ, सूर्यरुप नेत्र वाले मरुद्गण एवं विश्वेदेव देवता हविरुप अन्न को ग्रहण करने के लिये हमारे इस यज्ञ में पधारें।

मंत्र 8

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागं सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥ (8)

अर्थ – हे यजमान के रक्षक देवताओं! हम दृढ़ अङ्गों वाले शरीर से पुत्र आदि के साथ मिलकर आपकी स्तुति करते हुये कानों से कल्याणपूर्ण वचनों का श्रवण करें, नेत्रों से कल्याणमयी वस्तुओं का दर्शन करें, देवताओं की उपासना-योग्य आयु को प्राप्त करें।

मंत्र 9

ॐ शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्रा नश्चक्राजरसं तनूनां।
पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मानो मध्यारीरिषतायुर्गन्तोः॥ (9)

अर्थ – हे देवताओं! आप सौ वर्ष की आयु-पर्यन्त हमारे समीप रहें, जिस आयु में हमारे शरीर को जरावस्था प्राप्त हो, जिस आयु में हमारे पुत्र पिता अर्थात् पुत्रवान् बन जायें, हमारी उस गमनशील आयु को आप लोग मध्य में खण्डित न होने दें।

मंत्र 10

ॐ अदितिर्द्यौरदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः।
विश्वेदेवा अदितिः पञ्च जना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम्॥ (10)

अर्थ – अखण्डित पराशक्ति स्वर्ग है, वही अन्तरिक्ष-रुप है, वही पराशक्ति माता-पिता एवं पुत्र भी है। समस्त देवता पराशक्ति के ही स्वरुप हैं, अन्त्यज सहित चारों वर्णों के सभी मनुष्य पराशक्तिमय हैं, जो उत्पन्न हो चुका है तथा जो उत्पन्न होगा, सब पराशक्ति के ही स्वरुप हैं।

मंत्र 11

पृथिवी शान्तिरन्तरिक्षगं शान्तिर्द्यौश्शान्तिर्दिशः शान्तिरवान्तरदिशाश्शान्तिरग्निश्शान्तिर्वायुः
शान्तिरादित्यश्शान्तिश्चन्द्रमाश्शान्तिर्नक्षत्राणि शान्तिरापश्शान्तिरोषधयश्शान्तिर्वनस्पतयश्शान्तिर्गौः
शान्तिरजा शान्तिरश्वश्शान्तिः पुरुषश्शान्तिर्ब्रह्म शान्तिर्ब्राह्मणश्शान्तिः शान्तिरेव शान्तिश्शान्तिर्मे अस्तु शान्तिः। (11)

अर्थ – पृथ्वीलोक शान्तिदायक हो, अन्तरिक्षलोक शान्तिदायक हो, द्युलोक शान्तिदायक हो। समस्त दिशायें शान्तिदायक हों, अग्नि एवं वायु शान्तिदायक हो। सूर्य, चन्द्र एवं सम्पूर्ण नक्षत्र मण्डल शान्तिदायक हो, जल, औषधियाँ एवं वनस्पतियाँ शान्तिदायक हों। गौ, अश्व आदि पशु शान्तिदायक हों। पुरुष शान्तिदायक हो। ब्रह्म अर्थात् महान परमेश्वर हमें शान्ति प्रदान करने वाले हों। ब्राह्मण शान्तिदायक हों, उनका दिया हुआ ज्ञान एवं वेद शान्ति प्रदान करने वाले हों। सम्पूर्ण चराचर जगत शान्ति पूर्ण हो अर्थात् सर्वत्र शान्ति ही शान्ति हो। ऐसी शान्ति मुझे प्राप्त हो तथा उसमें सदा वृद्धि ही होती रहे। अभिप्राय यह है कि सृष्टि का कण-कण हमें शान्ति प्रदान करने वाला हो। समस्त पर्यावरण ही सुखद व शान्तिप्रद हो।

स्वस्ति वाचन मंत्र

Complete Swasti Vachan Mantra in English – संपूर्ण स्वस्ति वाचन मंत्र अंग्रेजी में

Mantra 1

Om Aa No Bhadrah Kratavo Yantu Vishvatoadabdhaso Aparitasa Udbhidah।
Deva No Yatha Sadamidvridhe Asannaprayuvo Rakshitaro Dive-Dive॥ (1)

Meaning – May powers auspicious come to us from every side, never deceived, unhindered, and victorious. The Gods may ever be with us for our gain, our guardians day by day, unceasing in their care.

Mantra 2

Om Devanam Bhadra Sumatirrijuyatam Devanam Ratirabhi No Nivartatam।
Devanam Sakhyamupasedima Vayam Deva Na Ayuh Pratirantu Jivase॥ (2)

Meaning: May the auspicious favor of the Gods be ours. On us descends the bounty of the righteous Gods. We have devoutly sought the friendship of the Gods, so may the Gods extend our lives that we may live.

Mantra 3

Om Tan Purvaya Nivida Humahe Vayam Bhagam Mitramaditim Dakshamasridham।
Aryamanam Varunam Somamashvina Saraswati Nah Subhaga Mayaskarat॥ (3)

Meaning– We call them hither with a hymn of olden time, Bhaga, the friendly Daksha, Mitra, Aditi, Aryaman, Varuna, Soma, and the Ashvins. May Saraswati, auspicious, grant felicity.

Mantra 4

Om Tanno Vato Mayo Bhuvatu Bheshajam Tanmata Prithivi Tatpita Dyauh।
Tad Gravanah Somasuto Mayobhuvastadashvina Shrinutam Dhishnya Yuvam॥ (4)

Meaning – May Vayu waft to us the felicitous medicament, May Mother Earth, Father Heaven, bring it; May the felicitous Stones distilling Soma secure it. May ye Ashvins, with understanding, hearken to our prayers.

Mantra 5

Om Tamishanam Jagatastasthushaspatim Dhiyanjinvamavase Humahe Vayam।
Pusha No Yatha Vedasamasad Vridhe Rakshita Payuradabdhah Swastaye॥ (5)

Meaning – We worship Him, the Lord of the universe of the inanimate and animate creation, for He is the blesser of our intellect and our protector. He dispenses life and good among all. Him do we worship, for as He is our preserver and benefactor, so is He our way to bliss and happiness also.

Mantra 6

Om Swasti Na Indro Vriddhashravah Swasti Nah Pusha Vishwavedah।
Swasti Nastarkshyo Arishtanemih Swasti No Brihaspatirdadhatu॥ (6)

Meaning – May Indra, who is provided with great speed, do well to us; May Pushan, the knower of the world, do good to us, and May Tarkshya, who devastates enemies, do good to us! May Brihaspati, the Lord of the Vedic knowledge or speech, give us spiritual delight from the light of knowledge and wisdom.

Mantra 7

Om Prishadashva Marutah Prishnimatarah Shubham Yavano Vidatheshu Jagmayah।
Agnijihva Manavah Surachakshaso Vishve No Deva Avasa Gamanniha॥ (7)

Meaning – The Maruts, sons of Prishni, with spotted steeds, of happy gait, frequenters of sacrifices, the Gods whose tongue is Agni, knowers, radiant as the Sun, May all come hither for our protection.

Mantra 8

Om Bhadram Karnebhih Shrinuyama Devah Bhadram Pashyemakshabhiryajatrah।
Sthirairangaistushtuva Sastanubhirvyashema Devahitam Yadayuh॥ (8)

Meaning – Gods, May we with our ears listen to what is good, and with our eyes see what is good, ye Holy Ones. With firm limbs and bodies, May we extol you to attain the term of life appointed by the Gods.

Mantra 9

Om Shataminnu Sharado Anti Deva Yatra Nashchakrajarasam Tanunam।
Putraso Yatra Pitaro Bhavanti Mano Madhyaririshatayurgantoh॥ (9)

Meaning – A hundred autumns stand before us, O ye Gods, within whose space ye bring our bodies to decay; Within whose space our sons become fathers in turn. Break ye not in the midst our course of fleeting life.

Mantra 10

Om Aditirdyauraditirantarikshamaditirmata Sa Pita Sa Putrah।
Vishvedeva Aditih Pancha Jana Aditirjatamaditirjanitvam॥ (10)

Meaning: Aditi is Heaven; Aditi is mid-air; Aditi is the Mother, the Father, and the Son. She is all the Gods, she is the five-classed men, and Aditi is all that hath been born and shall be born.

Mantra 11

Prithivi Shantirantarikshagam Shantirdyaushshantirdishah
Shantiravantara Dishashshantir Agnishshantirvayuh
Shantiradityashshantish Chandramashshantir Nakshatrani
Shantirapashshantir Oshadhayashshantir Vanaspatayashshantirgauh
Shantiraja Shantirashvashshantih Purushashshantirbrahma
Shantirbrahmanashshantih Shantireva Shantishshantirme Astu Shantih। (11)

Meaning – May the Prithviloka be peaceful, may the Antarikshaloka be peaceful. May the Dyuloka be peaceful. May all directions be peaceful, and may fire and air be peaceful. May the Surya, Chandra, and the entire Nakshatra Mandala provide peace, and may water, medicines, and plants provide peace. Animals like cows, horses, etc., should be peaceful. Men should be peaceful. May Brahma, i.e., the great God, grant us peace. The knowledge given by Brahmins should give peace, and Vedas should give peace. The entire living world should be filled with peace; there should be peace everywhere. May I attain such peace, and may it always increase. The intention is that every particle of the universe should provide us with peace. The entire environment should be pleasant and peaceful.

स्वस्ति वाचन मंत्र के नियम: Rules for Swasti Vachan Mantra

  1. किसी भी पूजा की शुरुआत में स्वस्ति वाचन करना चाहिए।
  2. स्वस्ति वाचन के बाद, पूजा में प्रयुक्त जल या पवित्र जल को दसों दिशाओं में छिड़कना चाहिए।
  3. नए घर में प्रवेश करते समय भी स्वस्ति वाचन करना शुभ होता है।
  4. विवाह समारोह में भी स्वस्ति वाचन का महत्व है।

स्वस्ति वाचन मंत्र के लाभ – Benefits of Swasti Vachan Mantra

  1. व्यापार शुरू करते समय स्वास्तिक मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। इससे व्यापार में आर्थिक लाभ अधिक होता है और नुकसान की संभावना कम होती है।
  2. बच्चे के जन्म के समय भी स्वास्तिक मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे बच्चा स्वस्थ रहता है और उस पर आलौकिक बाधाएं नहीं आती हैं।
  3. घर बनवाते समय, घर की नींव रखते समय या खेत में बीज बोते समय स्वास्तिक मंत्र का जाप किया जाता है। पशुओं को बीमारियों से बचाने और उन्हें समृद्ध बनाने के लिए भी इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है।
  4. किसी भी तरह की यात्रा पर निकलते समय भी स्वास्तिक मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से यात्रा शुभ होती है और किसी तरह की परेशानी नहीं आती।
  5. शरीर की हर तरह की सुरक्षा और घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए स्वास्तिक मंत्र का जाप करना चाहिए।

निष्कर्ष

अंत में, चाहे कोई शुभ कार्य हो, गृह प्रवेश पूजा हो, सत्यनयन पूजा हो, शादी हो या कोई हवन का आयोजन, अपना एक मंत्र जरूर सुना होगा। ऊं स्वस्ति न इंद्रो…, यह मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं है, अपितु इसमें अपार शक्तियां हैं तथा यह शुभ कार्यों में नकारात्मक ऊर्जाओं को प्रवेश करने से रोकता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मंत्र है। इसके जाप का सबसे महत्पूर्ण लाभ यह है कि यह इच्छा पूरी करने में मदद करता है।

इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य से पहले अगर इस मंत्र का जाप किया जाए तो यह शुभता, सकारात्मकता और लाभ लाता है।

इस विशेष मंत्र के वक्त पंडित और पुरोहित एक अलग ही ऊर्जा के साथ पाठ करते हैं। स्वस्ति वाचन मंत्र को हमारे हिंदू शास्त्र में बहुत ही फलकारी बताया गया है।

जरूरी नहीं कि इस मंत्र का जाप किसी बड़े अनुष्ठान पर किया जाए, आप रोजाना भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं, जिस से आप के घर में हमेशा सुख शांति बनी रहेगी।

आशा है कि आपका आज का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। अगर आप भी अपने घर में स्वस्ति वाचन मंत्र या फिर शांति पाठ का जाप करना चाहते हैं तो आज ही 99Pandit से अपने लिए पंडित बुक (Book a Pandit) करें।

Ekadashi Mata Ki Aarti: एकादशी माता की आरती (ओम जय एकादशी माता)

एकादशी माता की आरती, एकादशी माता को समर्पित एक भक्ति अनुष्ठान है, जो एकादशी के दिन मनाया जाता है। भक्त भजन गाते हैं, दीप जलाते हैं और प्रार्थना करते हैं, आध्यात्मिक उत्थान और धार्मिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। इस शुभ दिन पर आरती ईश्वर के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार माता एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई थीं।

इस कारण इनका नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। आज हम इस आर्टिकल के साथ जानेंगे एकादशी माता की आरती।

एकादशी माता की आरती

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Ekadashi Mata Ki Aarti in Hindi – एकादशी माता की आरती इन हिंदी

।। एकादशी माता की आरती ।।

ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।।
ओम जय एकादशी माता।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।।
ओम जय एकादशी…।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।।
ओम जय एकादशी…।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।।
ओम जय एकादशी…।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।।
ओम जय एकादशी…।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।।
ओम जय एकादशी…।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।।
ओम जय एकादशी…।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।।
ओम जय एकादशी…।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।।
ओम जय एकादशी…।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।।
ओम जय एकादशी…।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।।
ओम जय एकादशी…।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।।
ओम जय एकादशी…।।

एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti in English – एकादशी माता की आरती इन इंग्लिश

॥ Ekadashi Mata Ki Aarti ॥

Om Jai Ekadashi, Jai Ekadashi,Jai Ekadashi Mata।
Vishnu Puja Vrat Ko Dharan Kar,Shakti Mukti Pata॥
Om Jai Ekadashi…॥

Tere Naam Ginau Devi,Bhakti Pradan Karni।
Gan Gaurav Ki Deni Mata,Shashtro Mein Varni॥
Om Jai Ekadashi…॥

Margashirsha Ke Krishnapaksha KiUtapanna Vishvatarini Janmi।
Shukla Paksha Mein Hui Mokshada,Muktidata Ban Aayi॥
Om Jai Ekadashi…॥

Paush Ke Krishnapaksha Ki Saphala Naamak Hai।
Shuklapaksha Mein Hoye Putrada,Anand Adhik Rahe॥
Om Jai Ekadashi…॥

Naam Shattila Magh Maas Mein,Krishnapaksha Aave।
Shuklapaksha Mein Jaya Kahave,Vijay Sada Pave॥
Om Jai Ekadashi…॥

Vijaya Phalguna Krishnapaksha MeinShukla Amalaki।
Papmochani Krishna Paksha MeinChaitra Mahabali Ki॥
Om Jai Ekadashi…॥

Chaitra Shukla Mein Naam Kamada,Dhan Dene Wali।
Naam Varuthini Krishna Paksha Mein,Vaishakha Maah Wali॥
Om Jai Ekadashi…॥

Shukla Paksha Mein HoyeMohini Apara Jyeshtha Krishnapakshi।
Naam Nirjala Sab Sukha Karni,Shuklapaksha Rakhi॥
Om Jai Ekadashi…॥

Yogini Naam Ashadha Mein Jano,Krishnapaksha Karni।
Devshayani Naam Kahayo,Shuklapaksha Dharani॥
Om Jai Ekadashi…॥

Kamika Shravan Maas Mein Aave,Krishnapaksha Kahiye।
Sharvan Shukla HoyePavitra Anand Se Rahiye॥
Om Jai Ekadashi…॥

Aja Bhadrapada Krishnapaksha Ki,Parivartini Shukla।
Indra Aashwin Krishnapaksha Mein,Vrat Se Bhavsagar Nikla॥
Om Jai Ekadashi…॥

Papankusha Hai Shukla Paksha Mein,Aap Haranahari।
Rama Maas Kartik Mein Aave,Sukhdayak Bhari॥
Om Jai Ekadashi…॥

Devotthani Shukla Paksha Ki,Dukhnashak Maiya।
Paavan Maas Mein Karu VinitiPaar Karo Naiya॥
Om Jai Ekadashi…॥

Parama Krishna Paksha Mein Hoti,Jana Mangal Karni।
Shukla Maas Mein hoye Padmini,Dukh Daridra Harni॥
Om Jai Ekadashi…॥

Jo Koi Aarti Ekadashi Ki,Bhakti Sahita Gaave।
Jan Gurdita Swarga Ka Vasa,Nishchay Vah Paave॥
Om Jai Ekadashi…॥

Mythological Story of Ekadashi Mata – एकादशी माता की पौराणिक कथा

सतयुग में ‘मुर‘ नामक एक बहुत शक्तिशाली दैत्य ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवराज इंद्र और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया गया और वे पृथ्वी पर रहने लगे।

अपनी पराजय और अपमान से निराश होकर देवता भगवान शिव की शरण में गए। वहां पहुंचकर उन्होंने अपना दुखड़ा सुनाया। इंद्र की करुण प्रार्थना सुनकर भगवान शंकर ने उन्हें भगवान विष्णु के पास जाने को कहा।

यह सुनकर इंद्र आदि सभी देवता क्षीरसागर पहुंच गए। वहां वे भगवान विष्णु को अत्यंत शक्तिशाली और क्रूर राक्षस ‘मुर’ के आतंक की कथा सुनाते हैं। तथा भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

भगवान विष्णु देवताओं को आश्वासन देते हैं कि वे शीघ्र ही मुर का वध कर देंगे और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे।

भगवान विष्णु और राक्षस मुर के बीच बहुत बड़ा युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान भगवान विष्णु को नींद आ जाती है, इसलिए वे विश्राम करने के लिए एक गुफा में सो जाते हैं।

विष्णु भगवान को सोया हुआ देखकर मुर उन पर आक्रमण कर देता है। लेकिन इसी बीच भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या उत्पन्न होती है।

वह कन्या मुर से युद्ध करती है और उसका वध कर देती है। जब भगवान विष्णु की नींद खुलती है, तो उन्हें पता चलता है कि किस प्रकार कन्या ने मुर को मारकर उसकी रक्षा की है।

यह जानकर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और कहते हैं कि चूंकि तुम मेरे गर्भ से एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम ‘उत्पन्ना एकादशी’ के नाम से प्रसिद्ध होओगी।

जो कोई इस तिथि को तुम्हारा व्रत करेगा और मेरा नाम लेते हुए तुम्हारी पूजा करेगा, उसके सभी दुख दूर हो जाएंगे और उसे मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रकार सभी उत्पन्ना देवी को एकादशी माता के रूप में पूजने लगे।

निष्कर्ष

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए एकादशी का दिन सबसे अच्छा माना जाता है। भगवान विष्णु से उत्पन्न हुए देवी उत्पन्ना का भी उत्पन्ना एकादशी के रूप में व्रत और पूजन किया जाता है।

देवी उत्पन्ना को एकादशी माता के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata ki Aarti), भक्ति में डूबने का एक अनमोल साधन है|

इस एकादशी माता की आरती का गान करने से भक्तों के मन को शांति प्राप्त होती है| एकादशी माता की आरती और पूजा करने से पहले भक्त अन्न का त्याग करते हैं और सात्विक भोजन खाते हैं।

हम आशा करते हैं आपको यह जानकारी अच्छी लगेगी। ऐसे और भी आरती के लिरिक्स पढ़ने के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ।

Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics: शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी

शिव मानस पूजा स्तोत्र (Shiv Manas Puja Stotra) भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने भगवान शिव की मानसिक पूजा के लिए की थी।

यह स्तोत्र पांच शक्तिशाली श्लोकों का एक समूह है। पांच शक्तिशाली श्लोकों में भगवान शिव की मानसिक पूजा की एक विशेष विधि का विस्तार से वर्णन किया गया है।

ऐसा माना जाता है कि साधारण पूजा जो धूपबत्ती, थाली, आदि बाहरी वास्तुओं का उपयोग करके की जाती है, वह इतनी शक्तिशाली नहीं होती जितनी अपने मन से की जाने वाली पूजा होती है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

यह शिव मानस पूजा स्तोत्र दर्शाता है कि भगवान शिव की पूजा और अर्चना के लिए विश्वास और इरादे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

भगवान शिव को समर्पित इस पूजा स्तोत्र की जानकारी हर किसी को मालूम नहीं होती। इसीलिये 99Pandit पर आज आपको इस पूजा स्तोत्र के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी।

चलिए फिर 99Pandit के साथ जानते हैं शिव मानस पूजा स्तोत्र की हिंदी लिरिक्स (Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics) तथा, इस स्तोत्र का अर्थ और इसको पढ़ने के लाभ।

What is Shiv Manas Puja Stotra? – शिव मानस पूजा स्तोत्र क्या है?

शिव मानस पूजा स्तोत्र पांच शक्तिशाली श्लोक से मिलकर बना एक अनोखा स्तोत्र है। इन पाँच शक्तिशाली श्लोकों में भगवान शिव की मानसिक पूजा की एक विशेष विधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। श्री आदि शंकराचार्य ने भगवान शिव की मानसिक पूजा के लिए इस स्तोत्र की रचना की थी।

यह स्तोत्र एक भक्त द्वारा की गई प्रार्थना के रूप में है जो अपने मन में पूजा में निर्धारित सभी प्रसाद और अनुष्ठानों की कल्पना करता है और उन्हें विश्वास और भक्ति के साथ भगवान शिव को अर्पित करता है।

यह स्तोत्र उन लोगों के लिए एक आँख खोलने वाला है जो अनुष्ठानों के बारे में कट्टर हैं क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विश्वास और इरादे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

कोई भी साधना अधिक शक्तिशाली होती है यदि उसे करने के लिए उपयोग किए जाने वाले साधन भी अधिक शक्तिशाली हों।

चूँकि मन भौतिक शरीर से बहुत अधिक शक्तिशाली है, इसलिए मानसिक आराधना भी बाह्य आराधना से कहीं अधिक शक्तिशाली है… और इसे कहीं भी, कभी भी किया जा सकता है।

Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics – शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी लिरिक्स

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदांकितं चन्दनम् ।
जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा दीपं देव दयानिधे पशुपते हत्कल्पितं गृहाताम् ।।1।।

सौवर्णे नवरत्नखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम् ।
शाकानामयुतं जलं रूचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु ।।2।।

छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं वीणाभेरिमृदंगकाहल कला गीतं च नृत्यं तथा ।
साष्टांग प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा होतत्समस्तं मया संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ।।3।।

आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः ।
संचारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो यघत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।।4।।

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ।।5।।

शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी मीनिंग – Shiv Manas Puja Stotra Hindi Meaning

हे देव! हे दया के सागर! मैंने रत्नों से निर्मित आसन,हिमालय के शीतल जल से स्नान, नाना रत्नों से सुशोभित दिव्य वस्त्र, मृगमद कस्तूरी की सुगंध से अंकित चन्दन, चमेली, चमेली, चम्पाक, बिल्वपत्र आदि से पुष्पों की बनाई माला पको अर्पित है। सभी प्रकार की सुगंधित धूप और दीपक मानसिक प्रकार से आपको दर्शित करवा रहा हूं, आप ग्रहण कीजिए। (1)

मैंने भक्तिपूर्वक नवीन स्वर्णपात्र, जिसमें विविध प्रकार के रत्न जड़ित हैं, में खीर, दूध और दही सहित पांच प्रकार के स्वाद वाले व्यंजनों के संग कदलीफल, शर्बत, शाक, कपूर से सुवासित और स्वच्छ किया हुआ मृदु जल एवं ताम्बूल आपको मानसिक भावों द्वारा बनाकर प्रस्तुत किया है। हे कल्याण करने वाले ! मेरी इस भावना को स्वीकार करें। (2)

हे भगवन, आपके ऊपर छत्र लगाकर चंवर और पंखा झल रहा हूँ। निर्मल दर्पण, जिसमें आपका स्वरूप सुंदरतम व भव्य दिखाई दे रहा है, भी प्रस्तुत है। वीणा, भेरी, मृदंग, दुन्दुभि आदि की मधुर ध्वनियां आपको प्रसन्नता के लिए की जा रही हैं। स्तुति का गायन, आपके प्रिय नृत्य को करके मैं आपको साष्टांग प्रणाम करते हुए संकल्प रूप से आपको समर्पित कर रहा हूं। हे सर्वव्यापी और शक्तिशाली (ईश्वर), मैं मानसिक रूप से यह सब आपको अर्पित करता हूँ! हे प्रभु! मेरी पूजा स्वीकार करो! (3)

हे शंकरजी, आप मेरी आत्मा हैं। मेरी बुद्धि आपकी शक्ति पार्वतीजी हैं। मेरे प्राण आपके गण हैं। मेरा यह पंच भौतिक शरीर आपका मंदिर है। संपूर्ण विषय भोग की रचना आपकी पूजा ही है। मैं जो सोता हूं, वह आपकी ध्यान समाधि है। मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा है। मेरी वाणी से निकला प्रत्येक उच्चारण आपके स्तोत्र व मंत्र हैं। इस प्रकार मैं आपका भक्त जिन-जिन कर्मों को करता हूं, वह आपकी आराधना ही है। (4)

हे परमेश्वर! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मन से अभी तक जो भी अपराध किए हैं। वे विहित हों अथवा अविहित, उन सब पर आपकी क्षमापूर्ण दृष्टि प्रदान कीजिए। हे दया के सागर, हे देवों के देव, हे भगवान शंभो, यह सब क्षमा करें, श्री महादेवजी, आपकी जय हो। जय हो। (5)

Shiv Manas Puja Stotra English Lyrics – शिव मानस पूजा स्तोत्र इंग्लिश लिरिक्स

Ratnaih Kalpitam Aasanam Hima Jalaih Snaanam Cha Divya Ambaram
Naanaa Ratna Vibhuussitam Mraga Madaa Moda Angkitam Candanam |
Jaatii Campaka Bilva Patra Rachitam Pusspam Cha Dhuupam Tathaa
Diipam Deva Dayaa Nidhe Pashupate Hrt Kalpitam Grhyataam ||1||

Sauvarnne Nava Ratna Khanndda Racite Paatre Ghrtam Paayasam
Bhakssyam Pancha Vidham Payo Dadhi Yutam Rambhaa Phalam Paanakam |
Shaakaanaam Ayutam Jalam Ruchikaram Karpuura-Khannddoa U]jjvalam
Taambuulam Manasaa Mayaa Viracitam Bhaktyaa Prabho Sviikuru ||2||

Chatram Chaamarayor Yugam Vyajanakam Cha Adarshakam Nirmalam
Viinnaa Bheri Mrdangga Kaahala Kalaa Giitam Cha Nrtyam Tathaa |
Saassttaanggam Prannatih Stutir Bahu Vidhaa Hyetat Samastam Mayaa
Sangkalpena Samarpitam Tava Vibho Puujaam Grhaanna Prabho ||3||

Aatmaa Tvam Girijaa Matih Sahacaraah Praannaah Shariiram Grham
Puujaa Te Vissayopabhoga Rachanaa Nidraa Samaadhi-Sthitih |
Sanchaarah Padayoh Pradakssinna Vidhih Stotraanni Sarvaa Giro
Yadyat Karma Karomi Tat-Tad-Akhilam Shambho Tava Araadhanam ||4||

Kara Charanna Krtam Vaak Kaaya- am Karma Jam Vaa
Shravanna Nayana Jam Vaa Maanasam Va Aparaadham |
Vihitam Avihitam Vaa Sarvam-Etat-Kssamasva
Jaya Jaya Karunna Abdhe Shrii Mahaadeva Shambho ||5||

Shiv Manas Puja Stotra English Meaning – शिव मानस पूजा स्तोत्र इंग्लिश मीनिंग

O Lord! O ocean of mercy! I offer you a seat made of gems, a bath in the cool waters of the Himalayas, divine clothes adorned with various gems, sandalwood imbued with the fragrance of deer musk, and a garland made of flowers such as jasmine, champak, bilvapatra, etc. I am mentally showing you all types of fragrant incense and lamps; please accept them. (1)

I have prepared and presented to you in a new golden vessel studded with various gems five types of dishes, including kheer, mil,k and curd, along with bananas, sherbet, vegetables, and sand oft water purified and scented with camphor and betel leaves, through my mental feelings. O benefactor! Please accept this sentiment of mine. (2)

O Lord, I am placing an umbrella over you and fanning you with a fan. A clean mirror is also presented in which your form appears most beautiful and grand. Sweet sounds of Veena, Bheri, Mridang, Dundubhi, etc., are being played to please you. By singing praises and performing your favourite dance, I am prostrating before you and dedicating myself to you in the form of a resolution. Prabhu! Please accept this worship of my praise in various ways. (3)

O Shankarji, you are my soul. My intellect is your power, Parvatiji. My life is your followers. This five-physical body of mine is your temple. The creation of all sensual pleasures is your worship. The sleep I do is your meditation and samadhi. My walking and moving around is your circumambulation. Every utterance that comes out of my mouth is your hymn and mantra. Thus, whatever I, your devotee, do is your worship. (4)

O God! Whatever sins I have committed till now with my hands, feet, speech, body, deeds, ears, eyes, or mind, whether they are prescribed or not, please bestow your forgiving glance on all of them. O ocean of mercy, O God of gods, O Lord Shambhu, forgive all this, Shri Mahadevji, victory to you. Victory to you. (5)

शिव मानस पूजा स्तोत्र का महत्व हिंदी में

“शिव मानस पूजा स्तोत्र” को एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सुंदर पाठ और पूजा का रूप माना जाता है, जो न केवल योगी को भगवान शिव को समर्पित करने के तरीके का वर्णन और निर्देश देता है, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने के लाभ और अनुभव को भी समझाता है।

यह ईश्वर के करीब जाने और उससे जुड़ने का एक शक्तिशाली तरीका है। ” शिव मनसा पूजा ” के मामले में, योगी जिस देवता से जुड़ रहा है, वह भगवान शिव हैं।

यह सुंदर भावनात्मक स्तुति द्वारा हम मानसिक शांति के साथ-साथ ईश्वर की कृपा बिना किसी साधन संपन्न कर सकते हैं। मानसिक पूजा का शास्त्रों में श्रेष्ठतम पूजा के रूप में वर्णित है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

इसमें कहा गया है कि एक बार जब भगवान शिव का रूप योगी के हृदय में स्थापित हो जाता है, तो हृदय से यह जुड़ाव बना रहेगा, और शिव के प्रति भक्ति निरंतर जीवंत और अधिक जीवंत होती जाएगी।

यह स्तोत्र, आम तौर पर, पूजा और भक्ति या भक्ति योग का एक मानसिक रूप है। इसे विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि योगी जहाँ भी हो और जो भी कर रहा हो, तुरंत मनसा पूजा शुरू करना संभव है क्योंकि इसके लिए केवल मन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।

चूँकि पूजा मन में एकाग्रता के साथ और भक्त के सामने भगवान की उपस्थिति की भावना के साथ की जाती है, इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण, पवित्र और पावन है।

कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन मानस पूजा करके अपनी इच्छानुसार कुछ भी प्राप्त कर सकता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र का जाप करने के लाभ

1. यह शिव मनसा पूजा स्तोत्र भक्ति का प्रत्यक्ष रूप है और यह व्यक्ति को भौतिक प्रसाद के बिना भी भगवान शिव के साथ गहराई से जुड़ने की अनुमति देता है।

2. ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से की गई भगवान शिव की मानसिक पूजा पिछले कर्मों को निष्प्रभावी करने और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है।

3. इसकी रचना अद्वैत वेदांत के समर्थक आदि शंकराचार्य ने की थी, इसलिए यह मन को सूक्ष्मता से अद्वैत बोध और मुक्ति की ओर ले जाता है।

4. यह शिव स्तोत्र उन लोगों के लिए आंख खोलने वाला है जो कर्मकांडों के प्रति कट्टर हैं, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आस्था और इरादे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

5. नियमित शिव मनसा पूजा स्तोत्र का जप करने से एकाग्रता बढ़ती है और मन को अंतर्मुखी होने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो आध्यात्मिक और दैनिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।

6. कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन मानस पूजा करके अपनी इच्छानुसार कुछ भी प्राप्त कर सकता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

7. ये श्लोक भौतिक अर्पण की अपेक्षा भक्ति पर जोर देते हैं, तथा संतोष और वैराग्य विकसित करने में सहायता करते हैं। स्तोत्र सिखाता है कि भौतिक संसाधनों से ज़्यादा दिल की इच्छा और भक्ति मायने रखती है।

8. पांच शक्तिशाली श्लोकों से निर्मित यह स्तोत्र बाधाओं को दूर करता है – किसी मंदिर, पैसे या वस्तुओं की ज़रूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति सिर्फ़ मन से शिव की पूजा कर सकता है।

निष्कर्ष

शिव मानस पूजा स्तोत्र भगवान शिव की आराधना करने के लिए सबसे सुंदर पूजा स्तोत्र हैं। इस भक्तिपूर्ण स्तुति का प्रतिदिन पाठ कर के हम मानसिक शांति के साथ-साथ भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं।

मानसिक पूजा का शास्त्रों में श्रेष्ठतम पूजा के रूप में वर्णित है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिव मानस पूजा स्तोत्र का जाप करने से कई आध्यात्मिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ मिलते हैं।

यह शक्तिशाली स्तोत्र भगवान शिव को एक हार्दिक भेंट है, जो बिना किसी भौतिक अनुष्ठान के भी आपकी भगवान शिव के प्रति भक्ति को दर्शाता है। इस शिव मानस पूजा कृपा का दिव्य साक्षात् प्रसाद मनुष्य को निरंतर ग्रहण करते रहने की आवश्यकता है।

भगवान शिव के इस शक्तिशाली स्तोत्र का उच्चारण प्रति सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में करना बहुत फलदायी माना जाता है। आज के ब्लॉग में बस इतना ही।

ऐसी ही और जानकारी पढ़ने के लिए 99Pandit से जुड़े रहें। अगर आपको किसी भी तरह की पूजा या हवन के लिए पंडित की जरूरत है, तो आज ही 99Pandit से कुशल पंडित बुक करें।

Bajrang Baan Path Lyrics: श्री बजरंग बाण पाठ हिंदी लिरिक्स

बजरंग बाण पाठ: हिन्दू धर्म मे सप्ताहों के सातो दिनों को ग्रहों के हिसाब से रखा गया है| ज्योतिषियों का कहना है कि सप्ताह के सातो दिन अलग – अलग भगवान को समर्पित है|

यदि इन दिनों के हिसाब के भगवानो की पूजा की जाए तो आपको उनके आशीर्वाद के साथ ही उनकी असीम कृपा भी प्राप्त होगी|

हिन्दू धर्म के सबसे बलशाली के नाम से प्रसिद्ध भगवान हनुमान जी है| आज हम हनुमान जी के सबसे शक्तिशाली पाठ के बारे में यानी बजरंग बाण पाठ के बारे में बात करेंगे|

हनुमान जी की पूजा के लिए जो दिन निश्चित किया गया है वो मंगलवार रखा गया है और मान्यता यह है कि जो भी भक्त इस दिन हनुमान जी के मंदिर जाता है और हनुमान चालीसा का पाठ करता है| उनपर हनुमान जी की विशेष कृपा होती है|

बजरंग बाण पाठ

इस पाठ को मंगलवार या शनिवार के दिन करना काफी शुभ माना जाता है| जिस भी व्यक्ति के जीवन में संकट हो और वह उससे बाहर नहीं निकल पा रहा हो तो उसे यह पाठ करना चाहिए|

हिन्दू धर्म में बजरंग बाण का बहुत महत्व है| इस पाठ को करने से हनुमान जी अपने भक्तों को सारी परेशानियों और कष्टों से मुक्त करते है|

बजरंग बाण का पाठ आपके अंदर के भय को समाप्त कर देता है| हनुमानजी का आशीर्वाद पाने के लिए बजरंग बाण के साथ ही हनुमान चालीसा का भी पाठ करे| आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएँगे कि यह पाठ कब और कैसे करना चाहिए|

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बजरंग बाण पाठ – Bajrang Baan Lyrics in Hindi

|| दोहा ||

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
बिनय करें सनमान |
तेहि के कारक सकल शुभ,
सिद्ध करें हनुमान ||

|| चौपाई ||

जय हनुमंत संत हितकारी |
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ||

जन के काज बिलंब न कीजै |
आतुर दौरि महा सुख दीजे ||

जैसे कूदि सिंधु महिपारा |
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ||

आगे जाय लंकिनी रोका |
मारेहु लात गई सुरलोका ||

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा |
सीता निरखि परमपद लीन्हा ||

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा |
अति आतुर जमकातर तौरा ||

अक्षय कुमार मारि संहारा |
लूम लपेटी लंक को जारा ||

लाह समान लंक जरि गई |
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ||

अब बिलंब केहि कारन स्वामी |
कृपा करहु उर अन्तरयामी ||

जय जय लखन प्रान के दाता |
आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता ||

जै हनुमान जयति बल – सागर |
सुर – समूह – समरथ भट – नागर ||

ॐ हनुं हनुं हनुं हनुमंत हठीले |
बैरिही मारू ब्रज की कीले ||

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीशा |
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीशा ||

जय अंजनि कुमार बलवंता |
शंकर स्वयं बीर हनुमंता ||

बदन कराल काल – कुल – घालक |
राम सहाय सदा प्रतिपालक ||

भुत, प्रेत, पिशाच निशाचर |
अगिन बेताल काल मारी मर ||

इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की |
राखु नाथ मरजाद नाम की |

सत्य होहु हरि सपथ पाई  कै |
राम दूत धरु धाई  कै ||

जय जय जय हनुमंत अगाधा |
दुःख पावत जन केहि अपराधा ||

पूजा जप तप नेम अचारा |
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ||

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं |
तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ||

जनकसुता हरि दास कहावौ |
ताकी सपथ बिलंब न लावौ ||

जै जै जै धुनि होत अकासा |
सुमिरत होय दुसह दुःख नासा ||

चरन पकरि, कर जोरि मानवौ |
यहि औसर अब केहि गोहरावौ ||

उठु, उठु,,चलु तोहि राम दुहाई |
पायँ परों, कर जोरि मनाई ||

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता |
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ||

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता |
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ||

ॐ हं हं हॉंक देत कपि चंचल |
ॐ सं सं सहमि पराने खल – दल ||

अपने जन को तुरत उबारौ |
सुमिरत होय आनंद हमारौ ||

यह बजरंग बाण जेहि मारै |
ताहि कहौ फिरि कवन उबारै ||

पाठ करै बजरंग – बाण की
हनुमत रक्षा करै प्रान की ||

यह बजरंग बाण जो जापैं |
तासों भूत – प्रेत सब काँपैं ||

धूप देय जो जपैं हमेसा |
ताकें मन नहीं रहै कलेसा ||

|| दोहा ||

उर प्रतीति दृढ़ सरन ह्वै
पाठ करै धरि ध्यान |
बाधा सब हर,
करै सब काम सफल हनुमान ||

बजरंग बाण की रचना – Creation of Bajrang Baan Path

श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है| उन्होंने रामचरितमानस को लिखने से पहले हनुमान चालीसा की रचना की थी जब अकबर ने इन्हें कारावास में बंद कर दिया था|

तब कारावास में ही उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की थी| कहते है कि गोस्वामी तुलसीदास ने ही बजरंग बाण की भी रचना की थी|

ऐसा कहा जाता है कि जब तुलसीदास काशी में थे| तब उनपर किसी तांत्रिक के द्वारा मारण मंत्र का उपयोग किया गया था जिससे उनके शरीर पर फोड़े निकल आये थे| तब उन्होंने बजरंग बाण का पाठ किया और हनुमान जी से सहायता के लिए प्रार्थना की|

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कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ करने के कुछ क्षण पश्चात ही तुलसीदास जी के शरीर पर से सभी फोड़े गायब हो गए थे|

तब से माना जाता है कि बजरंग बाण का पाठ शत्रुओ पर काफी ज्यादा असरदार है और अचूक वार करता है|

बजरंग बाण पाठ करने की विधि – Procedure of reciting Bajrang Baan Path

बजरंग बाण का पाठ करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के कार्यों के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कीजिये| मंगलवार का दिन शिव जी के रूद्र अवतार हनुमान जी को समर्पित किया गया है जो कि भगवान श्री राम के परम भक्त है|

सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य भगवान को जल अर्पित करें तथा भगवान हनुमान जी की पूजा करें| पूजा के बाद में हनुमान जी को लाल फुल, अक्षत, मिठाई, फल और चंदन अर्पित करते है| फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें|

बजरंग बाण पाठ

यदि आप मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा के साथ बजरंग बाण का पाठ करते है तो आपको हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और आपके सभी संकट दूर होते जाएंगे|

  • बजरंग बाण का पाठ करने से पहले सिद्धि विनायक गणेश जी की पूजा करते है|
  • इसके बाद आँख बंद करके भगवान राम और माँ सीता का मन ही मन स्मरण करें|
  • ध्यान करने के बाद हनुमान जी से आपका अनुरोध स्वीकार करने के लिए कहे|
  • इसके बाद बजरंग बाण का पाठ करने का संकल्प लीजिए|
  • निर्णय लेते समय लाल रंग के आसन पर बैठे और बजरंग बाण का पाठ करें|
  • सबसे पहले हनुमान जी की पूजा करे और फूल,धूप और दिया जलाएं|
  • यदि आपने बजरंग बाण का पाठ करने का निर्णय लिया है तो जितनी भी बार इसे दोहरा सकते है दोहराए|
  • जितनी भी बार अपने पाठ करने का निर्णय लिया हो, गिनती को ध्यान में रखकर पाठ करें|
  • बजरंग बाण का पाठ करते समय शब्दों के सही उच्चारण पर जरूर ध्यान दे|
  • पूजा करते समय हनुमान जी को चूरमा व गुड – चने का प्रसाद चढ़ाए|

बजरंग बाण पाठ से होने वाले लाभ – Benefit of Reciting Bajrang Baan Path

हिन्दू धर्म में मंगलवार और शनिवार दो दिन हनुमान जी को समर्पित है| इनकी पूजा करने के लिए किसी भी नियम की आवश्यकता नहीं है|

जब भी आप हनुमान जी के मंदिर जाए तो हनुमान जी को लाल कपड़ा अवश्य चढ़ाए| इससे आपको काफी लाभ मिलेगा|

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  •  बजरंग बाण का पाठ करने वाले व्यक्ति को सभी चिंताओं, बीमारियों तथा समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है|
  • कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ करना  बहुत फायदेमंद है| खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन बहुत शुभ माना जाता है|
  • हनुमान चालीसा और बजरंग बाण को एक साथ पढ़ना बहुत ही शुभ माना जाता है|
  • बजरंग बाण का पाठ करने से घर में सुख – समृद्धि बनी रहती है और कभी धन की कमी नहीं होती है|
  • यदि आप बजरंग बाण का पाठ करते हो तो आप के मन से डर पूर्णत: ख़त्म हो जाएगा और हनुमान जी बुरी शक्तियों से आपकी रक्षा करेंगे|
  • बजरंग बाण का पाठ करने से आपके सभी रुके हुए कार्य फिर से सही से चलने लग जाएँगे| हनुमान जी आपके सभी कार्यो को सिद्ध करेंगे|

बजरंग बाण का पाठ करते समय ध्यान देने योग्य बातें – Things to Keep in Mind While Reciting Bajrang Baan Path

  • जब भी आप पूजा के लिए बैठे तो लाल रंग के कपड़े जरूर पहने|
  • जब तक भी आप बजरंग बाण का संकल्प लेते है| तब तक के लिए आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए|
  • ध्यान रखें कि बजरंग बाण का पाठ करते समय शब्दों का सही उच्चारण आवश्यक है|
  • बजरंग बाण का पाठ रोजाना नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें हनुमान जी को श्री राम की कसम दी जाती है|
  • संकल्प के दौरान आपको नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए|
  • आपकी जो भी मन्नत है उसे संकल्प लेते समय हनुमान जी कहे और प्रार्थना करें|

बजरंग बाण से सिद्ध होने वाले काम

विवाह में किसी भी तरह की कठिनाइयाँ आ रही हो तो कदली के पेड़ के नीचे बैठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए| इससे हनुमान जी का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन संतुष्ट होगा|

आपकी कुंडली ने किसी तरह का ग्रह या दोष हो तो सुबह जल्दी उठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए और आटे से बनी चीजों को जलाना चाइये| इससे आपकी कुंडली के सारे दोष ख़त्म हो जाएँगे|

बजरंग बाण पाठ

यदि आप किसी भी गंभीर बीमारी से परेशान है तो आपको राहुकाल में 21 पान के पत्तो की माला हनुमान जी को चढ़ानी चाहिए और बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए|

यदि आपको आपके कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह की परेशानी आ रही है तो मंगलवार का व्रत करके हनुमान जी की पूजा करने के बाद बजरंग बाण का पाठ करे और लाल रंग के कपड़े में नारियल श्री हनुमान जी को चढ़ाए|

बजरंग बाण पाठ का महत्व – Importance of Bajrang Baan Path

बजरंग बाण पाठ भगवान हनुमान जी की एक बहुत ही शक्तिशाली प्रार्थना है जिसकी मदद से हम हनुमान जी से हमारी सभी मुश्किलो को दूर करने के लिए प्रार्थना करते है और हमें सभी कठिनाईयो से बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते है।

इस मंत्र को प्रभावी बनाने के लिए, इसे करने वाले व्यक्ति को भगवान राम, जो हनुमान जी के गुरु हैं, में भी विश्वास होना अवश्य जरुरी है। यदि आप भगवान राम पर विश्वास नहीं करते हैं, तो हनुमान जी आपकी सहायता नहीं कर पाएंगे।

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यह जप उस व्यक्ति को करना चाहिए जो किसी समस्या, बीमारी या अलौकिक समस्या से पीड़ित है। कलियुग में हनुमान जी ही सबसे प्रसिद्ध, कुशल और शीघ्र फल देने वाले हैं। हनुमान जी की पूजा करते समय दिशानिर्देशों का पालन करना और संयम रखना काफी महत्वपूर्ण है।

आपको स्वयं पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि यदि आप नियम तोड़ेंगे तो हनुमान आपको दंड देंगे, इसलिए जब आप हनुमान जी की पूजा करें तो सावधान रहें।

हनुमान जी कई प्रकार से संकट दूर करते हैं। बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए बजरंग बाण का पाठ करें।

निष्कर्ष – Conclusion

बजरंग बाण पाठ हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, खासकर जब इसका पाठ मंगलवार या शनिवार को किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी इस शक्तिशाली पाठ को करने से आपके जीवन के सभी दुःख और पीड़ा समाप्त हो जाएंगी और आपकी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।

परोपकारी देवता भगवान हनुमान अपने भक्तों के जीवन से बाधाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए जाने जाते हैं।

आज के इस लेख में बजरंग बाण पाठ का पालन करते समय भगवान राम में विश्वास के महत्व और वांछित लाभ प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया गया है|

वास्तविकता में यह पाठ भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद और सुरक्षा पाने का एक शक्तिशाली साधन है, जिन्हें शक्ति और सांत्वना का स्रोत माना जाता है।

इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – Frequently Asked Questions

Q.बजरंग बाण पाठ का पाठ क्यों करें?

A.बजरंग बाण पाठ भगवान हनुमान जी से जुड़ने के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली पाठ है जो उनसे जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है और हमें किसी भी नुकसान से बचाने के लिए कहता है। इस मंत्र को प्रभावी बनाने के लिए इसे करने वाले व्यक्ति को भगवान राम, जो कि हनुमान जी के गुरु हैं, में भी विश्वास होना चाहिए।

Q.बजरंग बाण पाठ कैसे करें?

A.सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं और हनुमान जी की पूजा करें। बाद में भगवान को लाल फूल, अक्षत, गंध, मिठाई, फल और चंदन आदि चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का जाप करें।

Q.बजरंग बाण का निर्माण कैसे हुआ?

A.श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है | उन्होंने रामचरित मानस को लिखने से हनुमान चालीसा की रचना की थी जब अकबर ने उन्हें कारावास में बंद कर दिया था | तब कारावास में ही उन्होने हनुमान चालीसा की रचना की थी | कहते है कि गोस्वामी तुलसीदास ने ही बजरंग बाण की भी रचना की थी|


Ram Raksha Stotra in Hindi: राम रक्षा स्तोत्र संस्कृत तथा हिंदी में

Ram Raksha Stotra in Hindi: क्या आप भगवान श्री राम के सबसे प्रिय स्तोत्र राम रक्षा स्तोत्र के बारे में जानते है? आज हम इस लेख के माध्यम से भगवान श्री राम के इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) के बारे में जानेंगे| “श्री राम रक्षा स्तोत्र का अर्थ – भगवान श्री राम के द्वारा सुरक्षा है|”

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) की रचना ऋषि बुध कौशिक के द्वारा की गई थी|

मान्यता है कि एक दिन भगवान श्री राम ऋषि बुध के सपने में आये तथा उनके साथ मिलकर राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) गाया|

इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) में कुल 38 श्लोक है तथा ऐसा माना जाता है कि इस राम रक्षा स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक का प्रत्येक शब्द हमारे जीवन के सभी पापों को नष्ट कर सकता है|

राम रक्षा स्तोत्र

राम रक्षा स्तोत्र को सबसे पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है| इस राम रक्षा स्तोत्र में ऐसी शक्तियां है जो भगवान श्री राम के भक्तों को बुराई से मुक्ति दिलाती है|

जब इस स्तोत्र को 1,300 बार पढ़ा जाता है तो यह व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी कष्टों तथा समस्याओं को दूर करता है|

नवजात शिशु तथा नई माँ के लिए भी इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) को बहुत ही अच्छा माना जाता है|

आइये इस लेख के द्वारा जानते है राम रक्षा स्तोत्र के बारे में हिंदी अर्थ के साथ| इस राम रक्षा स्तोत्र के साथ ही हम आपको बताते है 99Pandit के बारे में|

यदि आप हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी तरह की पूजा जैसे  त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा, नवरात्रि पूजा करवाना चाहते है तो 99Pandit आपके लिए एक बहुत ही अच्छा विकल्प होगा|

श्री राम रक्षा स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित – Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi

॥ अथ ध्यानम् ॥

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं ।
पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥
वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं ।
नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥

अर्थ – जिन्होंने धनुष धारण कर रखा है| जो बद्ध पद्मासन में विराजित है तथा पीताम्बर धारण किये हुए है| जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ी के समान सुन्दर है, जो बहुत ही प्रसन्नचित्त है| जिनके बाएँ ओर माता सीता विराजमान है जिनका मुख कमल के फुल के समान सुशोभित है| जिनका रंग बादलों की भांति श्यामवर्णीय है, विभिन्न आभूषणों से सुसज्जित मैं भगवान श्री राम का वंदन करता हूँ| 

॥ इति ध्यानम् ॥

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥

अर्थ – भगवान श्री राम के चरित्र को सौ करोड़ विस्तार के समान माना गया है| उनका एक – एक अक्षर महापातकों को नष्ट करने वाला माना जाता है| 

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌ ।
जानकीलक्ष्मणॊपेतं जटामुकुटमण्डितम्‌ ॥२॥ 

अर्थ – जिनके नेत्र कमल के समान है, नील कमल के समान श्याम वर्ण वाले, जो जटाओं के मुकुट से सुशोभित है, मैं जानकी तथा लक्ष्मण सहित ऐसे भगवान श्री राम का स्मरण करके,

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्‌ ।
स्वलीलया जगन्नातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥३॥ 

अर्थ – जो अजन्मे हो अर्थात जिनका जन्म ना हुआ हो एवं सर्वव्यापक, अपने हाथों में तलवार, तुणीर तथा धनुष – बाण धारण किये हुए तथा अपनी लीलाओं के माध्यम से जगत की रक्षा हेतु अवतरित हुए ऐसे प्रभु श्री राम को स्मरण करके, 

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः॥४॥

अर्थ – मैं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले तथा सभी पापों को नष्ट करने वाले राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता हूँ| हे दशरथ पुत्र राघव मेरे ललाट की रक्षा करें| 

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ।।५।।

अर्थ – हे कौशल्या नंदन आप मेरे नेत्रों की, ऋषि विश्वामित्र के सबसे प्रिय मेरे कानों की, यज्ञ के रक्षक मेरे नाक की, तथा सुमित्रा के वत्सल मेरे मुख की रक्षा करें| 

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कंठ भरतवंदितः।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः।।६।।

अर्थ – हे विधानिधि मेरी जिह्वा की रक्षा करें, भरत वन्दित मेरे कंठ की रक्षा करें, दिव्यायुध मेरे कन्धों की और भगवान महादेव का धनुष तोड़ने वाले प्रभु श्री राम मेरे भुजाओं को रक्षा करें|

करौ सीतपति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌ ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥

अर्थ – सीता पति श्री राम मेरे हाथों की रक्षा करेंगे, परशुराम जी को जीतने वाले मेरे हृदय की तथा नाभि की जांबवान के आश्रयदाता रक्षा करें| 

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु: ।
ऊरू रघुत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्‌ ॥८॥

अर्थ – सुग्रीव के स्वामी मेरे कमर की, हनुमान जी के प्रभु हड्डियों की और सभी रघुओं में उत्तम तथा सम्पूर्ण राक्षस कुल का संहार करने वाले भगवान श्री राम जांघों की रक्षा करें| 

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्‌घे दशमुखान्तक: ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥९॥

अर्थ – सेतु का निर्माण करने वाले मेरे घुटनों की, दशानन (रावण) का वध करने वाले मेरी अग्रजंघा, विभीषण को ऐश्वर्य देने वाले प्रभु श्री राम मेरे चरणों तथा सम्पूर्ण शरीर की रक्षा करें| 

राम रक्षा स्तोत्र

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌ ॥१०॥

अर्थ – शुभ कार्य करने वाला जो भक्त पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा के साथ रामबल से संयुक्त होकर इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता है| वह व्यक्ति दीर्घायु, सुखी, विनयशील, पुत्रवान और विजयी हो जाता है| 

पातालभूतलव्योम चारिणश्छद्‌मचारिण: ।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि: ॥११॥ 

अर्थ – जो भी जीव आकाश, पाताल तथा पृथ्वी पर भ्रमण करते रहते है अथवा अपना वेश बदल कर कर घूमते रहते है| वह राम नाम से सुरक्षित व्यक्तियों को देख भी नहीं पाते है|

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्‌ ।
नरो न लिप्यते पापै भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥१२॥

अर्थ – राम, रामभद्र तथा रामचंद्र जैसे नाम का स्मरण करने वाले राम भक्त पापों से लिप्त नहीं होते है तथा वह व्यक्ति निश्चित रूप से भक्ति तथा मोक्ष को प्राप्त करता है|

जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्‌ ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥१३॥

अर्थ – जो इस राम नाम से सुरक्षित जगत पर विजय पाने वाले इस राम रक्षा स्तोत्र(Ram Raksha Stotra) को अपने कंठ में धारण करता है| उस व्यक्ति को संपूर्ण सिद्धियां प्राप्त होती है|

वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌ ।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। ॥१४॥

अर्थ – जो भी मनुष्य वज्रपंजर इस राम कवच का स्मरण करता है| माना जाता है कि कहीं भी उस व्यक्ति की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया जाता है तथा उस व्यक्ति को हमेशा विजय एवं मंगल की ही प्राप्ति होती है| 

आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर: ।
तथा लिखितवान्‌ प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक: ॥१५॥

अर्थ – ऋषि बुद्ध कौशिक को स्वप्न के माध्यम से भगवान राम का आदेश होने पर ऋषि बुद्ध कौशिक ने प्रात: उठकर इस राम रक्षा स्तोत्र की रचना की| 

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्‌ ।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान्‌ स न: प्रभु: ॥१६॥

अर्थ – जो कल्पवृक्ष के बगीचे के समान आराम देने वाले, जो सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने वाले है तथा जो तीनों लोकों में सबसे सुन्दर है, वही हमारे प्रभु श्री राम है| 

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥

अर्थ – जो युवा महाबली, सुन्दर, सुकुमार तथा कमल के समान नेत्रों वाले है, मुनियों की भांति वस्त्र तथा काले हिरण का चर्म धारण करते है| 

फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

अर्थ – जो कंद तथा फल का भोजन ग्रहण करते है, जो तपस्वी तथा ब्रह्मचारी है| हे दशरथ पुत्र राम और लक्ष्मण दोनों भाई हमारी रक्षा करें| 

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌ ।
रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ ॥१९॥

अर्थ – ऐसे महाबली रघु श्रेष्ठ मर्यादा पुरुषोत्तम समस्त प्राणियों के शरणदाता, सभी धनुर्धारियों में सबसे श्रेष्ठ, संपूर्ण राक्षसकुलों का सर्वनाश करने वाले भगवान श्री राम हमारी रक्षा करें| 

आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशा वक्षया शुगनिषङ्ग संगिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा वग्रत: पथि सदैव गच्छताम्‌ ॥२०॥

अर्थ – संघान किये, धनुष धारण किये हुए, बाण को स्पर्श कर रहे है, अक्षय बाणों से स्थित तूणीर धारण किये हुए राम और लक्ष्मण मेरे रक्षा के लिए आगे चले| 

संनद्ध: कवची खड्‌गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन् मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥२१॥

अर्थ – हमेशा तत्पर, हाथ में तलवार, कवचधारी, धनुष बाण धारण किए हुए भगवान श्री राम सहित लक्ष्मण हमारे आगे – आगे चलकर रक्षा करें| 

रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघुत्तम: ॥२२॥

अर्थ – भगवान शिव का कथन है कि श्री राम, दशरथी, शूर, लक्ष्मनाचुर, बली, काकुत्स्थ, पुरुष, पूर्ण, कौसल्येय, रघुत्तम,

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम: ।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेय पराक्रम: ॥२३॥

अर्थ – वेदांतवेद्यं, यज्ञेश, पुराण, पुरुषोत्तम, जानकी वल्लभ, श्रीमान तथा श्री अपरिमेय पराक्रम

इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्‌भक्त: श्रद्धयान्वित: ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं संप्राप्नोति न संशय: ॥२४॥

अर्थ – इत्यादि नामों का नियमित रूप से जप करने से अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक फल प्राप्त होता है| इस बात में किसी भी प्रकार कोई संशय नहीं है|  

रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
स्तुवन्ति नामिभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणौ नरः ॥२५॥

अर्थ – दूर्वादल के समान श्याम वर्ण, कमल नयन तथा पिताम्बरधारी भगवान श्री राम के सभी दिव्य नामों की स्तुति करने वाला व्यक्ति संसार चक्र में नहीं पड़ता है| 

रामं लक्ष्मण पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं ।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ॥
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्‌ ।
वन्दे लोकभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌ ॥२६॥

अर्थ – लक्ष्मण जी के बड़े भाई, सीता माता के पति, काकुत्स्थ राजा के वंशज, करुणा के सागर, ब्राह्मणों के प्रिय, परम धार्मिक, सत्यनिष्ठ, राजा दशरथ के पुत्र, श्यामवर्ण, सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर, रघुकुल तिलक, रावण के शत्रु भगवान राम मैं वंदना करता हौं| 

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥२७॥

अर्थ – भगवान श्री राम, रामभद्राय, रामचन्द्राय, विधात स्वरूप, रघुनाथ प्रभु तथा सीता माता के स्वामी भगवान श्री राम की मैं वंदना करता हूँ| 

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥

अर्थ – हे रघुनंदन श्री राम! हे भरत के बड़े भाई भगवान राम! हे रणधीर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम! कृपया मुझे शरण प्रदान कीजिये| 

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥

अर्थ – मैं अपने सम्पूर्ण एकाग्र मन से भगवान श्री राम से चरणों का स्मरण करता हूँ और भगवान श्री राम के चरणों का वाणी से गुणगान करता हूँ| मैं वाणी के द्वारा तथा सम्पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान श्री राम के चरणों को प्रणाम करता हूँ तथा उनकी शरण लेता हूँ| 

माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥ 

अर्थ – भगवान श्री राम मेरे माता, मेरे पिता, मेरे सखा तथा मेरे स्वामी है| इसी प्रकार भगवान श्री राम मेरे सर्वस्व है| भगवान श्री राम के अलावा में किसी अन्य को नहीं जानता हूँ|

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम्‌ ॥३१॥

अर्थ – जिनके दक्षिण की ओर माता लक्ष्मी, बाईं ओर माता जानकी तथा सामने हनुमान जी विराजमान है, मैं उन रघुनाथ जी की वंदना करता हूँ| 

लोकाभिरामं रनरङ्‌गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्‌ ।
कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये ॥३२॥

अर्थ – मैं संपूर्ण लोकों में सबसे सुन्दर तथा युद्ध कला में धीर, कमल के समान नयन वाले, करुणा की मूर्ति तथा करुणा के भंडार भगवान श्री राम की शरण ग्रहण करता हूँ| 

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌ ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥

अर्थ – मन के समान गति तथा वायु के समान वेग वाले, जो परम जितेंद्रिय तथा बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ है, वायु के पुत्र, वानर दल के अधिनायक तथा भगवान श्री राम के दूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ| 

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌ ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥३४॥

अर्थ – मैं इस कवितामयी डाली पर बैठकर इस मधुर अक्षरों वाले राम – राम नाम को जपते हुए वाल्मीकि रूपी कोयल की वंदना करता हूँ| 

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्‌ ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥३५॥

अर्थ – मैं इन सभी लोकों में सबसे सुन्दर भगवान श्री राम को बार बार प्रणाम करता हूँ| जो सभी आपदाओं को दूर करने वाले तथा सुख संपत्ति प्रदान करने वाले है| 

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम्‌ ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्‌ ॥३६॥

अर्थ – ‘राम – राम’ जप करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते है| वह व्यक्ति सुख सम्पति तथा ऐश्वर्य प्राप्त करता है| राम नाम की गर्जना से यमदूत भयभीत रहते है| 

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे ।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् ।
रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥३७॥

अर्थ – राजाओं में सबसे श्रेष्ठ भगवान श्री राम सदा विजय को ही प्राप्त करते है| मैं लक्ष्मी पति श्री राम का भजन करता हूँ| पूरी राक्षस सेना का अंत करने वाले भगवान श्री राम को मैं नमस्कार करता हूँ| भगवान श्री राम के अलावा कोई आश्रय दाता नहीं है| मैं हमेशा ही भगवान राम में लीन रहूँ| हे प्रभु श्रीराम! आप मेरा उद्धार करें| 

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥

अर्थ – हे सुमुखी! भगवान श्री राम का नाम भगवान विष्णु के एक हजार नाम लेने के समान माना गया है| मैं सदा भगवान श्री राम का स्तवन करता हूँ तथा हमेशा ही भगवान श्री राम के नाम में ही रमण रहता हूँ| 

इति श्रीबुद्धकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रम संपूर्णम्‌ ॥

राम रक्षा स्तोत्र का जप किस प्रकार करेंHow To Chant Ram Raksha Stotra

भगवान श्री राम को प्रसन्न करने के लिए किया जाने वाला रामरक्षा स्तोत्र बहुत सरल है| इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) का जप करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना होता है| जिसके बारे में हम आपको इस लेख के माध्यम से ही बताएंगे|

राम रक्षा स्तोत्र

  • इस रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर पीठ करके बैठना चाहिए| आप इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किसी नजदीकी राम मंदिर में, अपने कक्ष में तथा भगवान श्री राम की छवि के सामने भी कर सकते है|
  • माना जाता है कि रामरक्षा स्तोत्र का पाठ कभी भी खाली जमीन पर बैठकर नहीं करना चाहिए| इसके लिए आप किसी भी आसन का इस्तेमाल कर सकते है| जिस पर आप सहज महसूस कर सके| ज्यादातर पूजा – पाठ करने के लिए कुशा घास से बना हुआ आसन पसंद किया जाता है| 
  • विद्वानों के द्वारा बताया गया है कि इस श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ यदि ब्रह्म मुहूर्त में किया जाएँ तो यह जातक के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है| इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने की सलाह नित्यकर्म से मुक्त होकर ही करने की सलाह दी जाती है| 
  • इस रामरक्षा स्तोत्र को करने से पूर्व अनुलोम – विलोम व्यायाम करने की सलाह दी जाती है| इस व्यायाम को कम से कम 3 बार करने के लिए बताया जाता है| इसके पश्चात रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए|
  • इस पाठ को शुरू करने से पहले भगवान शंकर, श्री गणेश, माता पार्वती या हनुमान जी में से किसी एक भगवान की पूजा करना अनिवार्य माना जाता है| राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से पहले आप भगवान श्री राम के प्रिय भक्त हनुमान जी की हनुमान चालीसा का जाप भी कर सकते है| 

राम रक्षा स्तोत्र पाठ करने के लाभ – Benefits of Ram Raksha Stotra in Hindi

  • यह रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति हमेशा ही सभी प्रकार के संकट से दूर रहता है| 
  • इस पाठ को किसी भी तरह की बीमारी या किसी आपदा के दुष्परिणाम को रोकने के लिए किया जाता है| 
  • इस राम रक्षा स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के सभी दुःख दूर होते है| 
  • इसका पाठ करने से जातक की कुंडली में शनि तथा मंगल का कुप्रभाव कम होता है| 
  • राम रक्षा स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के मन से भय दूर हो जाता है| 
  • माना जाता है कि राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra In Hindi) का जाप करने से व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण हो जाता है| 

निष्कर्ष – Conclusion

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99Pandit के साथ|

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हालांकि, किसी भी समय भगवान की पूजा करना आपको कठिनाइयों, समस्याओं, तनाव और नकारात्मक ऊर्जाओं से हमेंशा बचाता है। जैसा कि आज आपने इस लेख के माध्यम से रामरक्षा स्तोत्र पाठ के हिंदी अर्थ तथा लाभ के बारे में जाना| 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

A.इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन 11 बार करना चाहिए|

Q.राम रक्षा स्तोत्र पाठ करने से क्या होता है?

A.इसका पाठ करने से मनुष्य भय रहित हो जाता है|

Q.राम रक्षा स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

A.इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने की सलाह नित्यकर्म से मुक्त होकर ही करने की सलाह दी जाती है|

Q.राम रक्षा स्तोत्र को कैसे सिद्ध करें?

A.नवरात्रि के समय प्रतिदिन 11 बार इस स्तोत्र का जप करके इस राम रक्षा स्तोत्र को सिद्ध किया जा सकता है|

Ram ko Dekh Kar Janak Nandini Lyrics: राम को देखकर जनक नंदिनी भजन

Ram ko Dekh Kar Janak Nandini Lyrics: भगवान श्री राम की स्तुति करने हेतु भगवान श्री राम के इस भजन – राम को देखकर जनक नंदिनी, का जाप किया जाता है|

यह राम को देखकर जनक नंदिनी भजन (Ram ko Dekh Kar Janak Nandini Lyrics), भगवान श्री राम बहुत प्रसिद्ध एवं भक्तों के द्वारा पसंद किया जाने वाला भजन है|

यह भजन प्रसिद्ध गायक प्रकाश गाँधी जी ने गाया है तो आइये गान करते है इस मधुर भजन – राम को देखकर जनक नंदिनी का|

राम को देखकर जनक नंदिनी

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Ram ko Dekh kar Janak Nandini Lyrics in Hindi – राम को देखकर जनक नंदिनी भजन हिंदी में

राम को देख कर के जनक नंदिनी,
बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ।
राम देखे सिया को सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी ॥

थे जनक पुर गये देखने के लिए,
सारी सखियां झरोखों से झाँकन लगे ।
देखते ही नजर मिल गयी प्रेम की,
जो जहाँ थी खड़ी की खड़ी रह गयी ॥
राम को देख कर के जनक नंदिनी…॥

बोली एक सखी राम को देखकर,
रच गयी है विधाता ने जोड़ी सुघर ।
फिर धनुष कैसे तोड़ेंगे वारे कुंवर,
मन में शंका बनी की बनी रह गयी ॥
राम को देख कर के जनक नंदिनी…॥

बोली दूसरी सखी छोटन देखन में है,
फिर चमत्कार इनका नहीं जानती ।
एक ही बाण में ताड़िका राक्षसी,
उठ सकी ना पड़ी की पड़ी रह गयी ॥
राम को देख कर के जनक नंदिनी…॥

राम को देख कर के जनक नंदिनी,
बाग में वो खड़ी की खड़ी रह गयी ।
राम देखे सिया को सिया राम को,
चारो अँखिआ लड़ी की लड़ी रह गयी ॥

राम को देख कर जनक नंदिनी

Ram ko Dekh kar Janak Nandini Lyrics in English – राम को देख कर के जनक नंदिनी

Ram ko dekh kar ke Janak Nandini,
Baag mein vo khadi ki khadi reh gayi.
Ram dekhe Siya ko, Siya Ram ko,
Chaaro ankhiya ladi ki ladi reh gayi…॥

The Janakpur aaye dekhne ke liye,
Saari sakhiyaan jharokho se jhaankne lage.
Dekhte hi nazar mil gayi prem ki,
Jo jahan thi khadi ki khadi reh gayi.
Ram ko dekh kar ke Janak Nandini…॥

Boli ek sakhi Ram ko dekh kar,
Rach gayi hai vidhata ne jodi sughar.
Phir dhanush kaise todenge vaare kunwar,
Man mein shanka bani ki bani reh gayi.
Ram ko dekh kar ke Janak Nandini…॥

Boli doosri sakhi, chhotan dekhne mein hai,
Phir chamatkar inka nahin jaanti.
Ek hi baan mein Taadika rakshasi,
Uth saki na, padi ki padi reh gayi.
Ram ko dekh kar ke Janak Nandini…॥

Ram ko dekh kar ke Janak Nandini,
Baag mein vo khadi ki khadi reh gayi.
Ram dekhe Siya ko, Siya Ram ko,
Chaaro ankhiya ladi ki ladi reh gayi…॥

Duniya Chale na Shri Ram ke Bina Lyrics: दुनिया चले ना श्री राम के बिना

दुनिया चले ना श्री राम के बिना लिरिक्स भगवान राम और भगवान हनुमान पर एक लोकप्रिय भक्ति गीत है। इस मधुर भजन को श्री जय शंकर चौधरी ने गाया था।

इस भजन में गायक जय शंकर चौधरी ने भगवान राम का नाम लेकर यह बताया है कि कैसे भगवान राम के बिना कोई भी काम होना मुमकिन नहीं है।

इसके साथ ही इस भजन में भगवान राम के अलावा उनके प्रिय भक्त हनुमान जी के बारे में भी बताया गया है, क्योंकि बिना हनुमान के भगवान राम जी अधूरे हैं। इस भजन के लिरिक्स कुछ ऐसे हैं: दुनिया चले ना श्री राम के बिना, श्री राम ना चले हनुमान के बिना।

दुनिया चले ना श्री राम के बिना

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99Pandit एक ऐसा मंच है जिसकी सहायता से आप अपने घर बैठे ही किसी भी प्रकार की पूजा, पाठ, हवन, जाप, आदि के लिए पंडित बुक कर सकते हैं।

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Duniya Chale na Shri Ram ke Bina Lyrics in Hindi – दुनिया चले ना श्री राम के बिना हिंदी लिरिक्स

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

जब से रामायण पढ़ ली है, एक बात मैंने समझ ली है,
लंका का राजा रावण माँ सीता को हर ले गया
प्रभु श्री राम के हाथों मारा गारा, लेकिन

रावण मरे ना श्री राम के बिना,
लंका जले ना हनुमान के बिना॥

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

लक्ष्मण का बचना मुश्किल था, कौन बूटी लाने के काबिल था,
प्रभु श्री राम के छोटे भाई, लखन लाल मूर्छित अवस्था में पड़े थे

लक्ष्मण बचे ना श्री राम के बिना,
बूटी मिले ना हनुमान के बिना ॥

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

सीता हरण की कहानी सुनो, ‘बनवारी’ मेरी जुबानी सुनो,
प्रभु श्री राम की लाख कोशिश के बाद, माँ सीता वापस मिली, लेकिन

वापिस मिले ना श्री राम के बिना,
पता चले ना हनुमान के बिना ॥

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

बैठे सिंघासन पे श्री राम जी, चरणों में बैठे हैं हनुमान जी,
मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना, भक्ति मिले ना हनुमान के बिना॥

प्रभु श्री राम सिंहासन पर बैठे हैं और हनुमान उनके चरणों में
जो सिंहासन पर बैठे हैं वो क्या देते हैं, और जो चरणों में बैठे हैं वो क्या देते हैं?

मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना
भक्ति मिले ना हनुमान के बिना

दुनिया चले ना श्री राम के बिना,
राम जी चले ना हनुमान के बिना।

दुनिया चले ना श्री राम के बिना

Duniya Chale na Shri Ram ke Bina Lyrics in English – दुनिया चले ना श्री राम के बिना भजन

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

Jab Se Ramayan Padh Li Hai
Ek Baat Maine Samajh Li Hai

Lanka Ka Raja Ravan Maa Sita Ko Har Le Gaya
Prabhu Shri Ram Ke Haathon Maara Gara, Lekin

Ravan Mare Na Shri Ram Ke Bina
Lanka Jale Na Hanuman Ke Bina

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

Lakshmana Ka Bachana Mushkil Tha,
Kaun Booti Laane Ke Kaabil Tha

Prabhu Shri Ram ke Chhote Bhai
Lakhan Laal Moorchhit Avasthaa Mein Pade The

Lakshmana Bache Na Shri Ram Ke Bina
Booti Mile Na Hanuman Ke Bina

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

Sita-haran Ki Kahani Suno, Banavari Meri Jubani Suno
Prabhu Shri Ram Ki Lakh Koshish Ke Baad, Maa Sita Vapas Mili, Lekin

Vapas Mile Na Shri Ram Ke Bina,
Pata Chale Na Hanuman Ke Bina

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

Baithe Singhaasana Pe Shri Ram Ji,
Charnon mein Baithe Hai Hanuman Ji

Prabhu Shri Ram Singhasana Pe Baithe Hain Aur Hanuman Unke Charanon Mein
Jo Singhasana Pe Baithe Hain Vo Kya Dete Hain, Aur Jo Charanon Mein Baithe Hain Vo Kya Dete Hain

Mukti Mile Na Shri Ram Ke Bina
Bhakti Mile Na Hanuman ke Bina

Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina
Ram Ji Chale Na Hanuman Ke Bina

निष्कर्ष

श्री जय शंकर चौधरी द्वारा लिखित ‘दुनिया चले ना श्री राम के बिना’ मधुर गीत बहुत ही प्रसिद्ध है। चाहे रामनवमी हो या कोई साधारण दिन यह भजन हर घर, हर मंदिर में आपको सुनाई दे जाता है। इस भजन की लोकप्रियता न केवल भारत में है बल्कि देश-विदेश में है।

आज के ब्लॉग “Duniya Chale Na Shri Ram Ke Bina Lyrics in Hindi” में इतनी ही। आशा है आपको यह ब्लॉग पसंद आया होगा। ऐसे ही हमारे ब्लॉग, आरती के लिरिक्स, भजन लिरिक्स पढ़ने के लिए जुड़े रहिए 99Pandit के साथ।

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Ram Aayenge Bhajan Lyrics: राम आएँगे – भगवान श्री राम का प्रसिद्ध भजन

Meri Jhopdi Ke Bhag Aaj Khul Jayenge Ram Aayenge Lyrics: राम आएँगे – वर्तमान में भगवान श्री राम का बहुत ही प्रसिद्ध भजन है| 22 जनवरी के दिन अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा की गई| विभिन्न स्थानों से लोग श्री राम की भक्ति में चूर उनके दर्शन हेतु अयोध्या नगरी में आए|

इस समय भजन गायकों ने श्री राम के प्रति कई भजन गाए| जिनमे से सबसे प्रसिद्ध भजन था – राम आएंगे (Ram Aayenge Lyrics) तो अंगना सजाऊंगी| यह भजन प्लेलिस्ट में सबसे ऊपर आता है तो आइये जानते है इस भजन – राम आएँगे (Ram Aayenge Lyrics), के बोल|

राम आएंगे

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Ram Aayenge Lyrics in Hindi – राम आएंगे भजन हिंदी में

|| राम आएँगे भजन ||

मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे,
राम आएँगे आएँगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

राम आएँगे तो,
आंगना सजाऊंगी,
दीप जलाके,
दिवाली मनाऊंगी,
मेरे जन्मों के सारे,
पाप मिट जाएंगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

राम झूलेंगे तो,
पालना झुलाऊँगी,
मीठे मीठे मैं,
भजन सुनाऊँगी,
मेरी जिंदगी के,
सारे दुःख मिट जाएंगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

मैं तो रूचि रूचि,
भोग लगाऊंगी,
माखन मिश्री मैं,
राम को खिलाऊंगी,
प्यारी प्यारी राधे,
प्यारे श्याम संग आएंगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

मेरा जनम सफल,
हो जाएगा,
तन झूमेगा और,
मन गीत गाएगा,
राम सुन्दर मेरी,
किस्मत चमकाएंगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे,
राम आएँगे आएँगे,
राम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
राम आएँगे ॥

मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे,
श्याम आएँगे आएँगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

श्याम झूलेंगे तो,
पालना झुलाऊँगी,
मीठे मीठे मैं,
भजन सुनाऊँगी,
मेरी जिंदगी के,
सारे दुःख मिट जाएंगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

श्याम आएँगे तो,
आंगना सजाऊंगी,
दीप जलाके,
दिवाली मनाऊंगी,
मेरे जन्मों के सारे,
पाप मिट जाएंगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

मैं तो रूचि रूचि,
भोग लगाऊंगी,
माखन मिश्री मैं,
श्याम को खिलाऊंगी,
प्यारी प्यारी राधे,
प्यारे श्याम संग आएंगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

मेरा जनम सफल,
हो जाएगा,
तन झूमेगा और,
मन गीत गाएगा,
श्याम सुंदर मेरी,
किस्मत चमकाएंगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे,
श्याम आएँगे आएँगे,
श्याम आएँगे,
मेरी झोपड़ी के भाग,
आज खुल जाएंगे,
श्याम आएँगे ॥

राम आएंगे

Ram Aayenge Lyrics in English – मेरी झोपड़ी के भाग,आज खुल जाएंगे

|| Ram Aayenge Bhajan ||

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge,
Ram aayenge aayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Ram aayenge to,
Aangana sajaaungi,
Deep jalaake,
Diwali manaungi,
Mere janmo ke saare,
Paap mit jaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Ram jhoolege to,
Paala na jhulaungi,
Meethe meethe main,
Bhajan sunaungi,
Meri zindagi ke,
Saare dukh mit jaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Main to ruchi ruchi,
Bhog lagaungi,
Makhan mishri main,
Ram ko khilaungi,
Pyaari pyaari Radhe,
Pyaare Shyam sang aayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Mera janam safal,
Ho jaayega,
Tan jhoomega aur,
Mann geet gaayega,
Ram sundar meri,
Kismat chamkaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge,
Ram aayenge aayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge,
Ram aayenge aayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Ram aayenge to,
Aangana sajaaungi,
Deep jalaake,
Diwali manaungi,
Mere janmo ke saare,
Paap mit jaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Ram jhoolege to,
Paala na jhulaungi,
Meethe meethe main,
Bhajan sunaungi,
Meri zindagi ke,
Saare dukh mit jaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Main to ruchi ruchi,
Bhog lagaungi,
Makhan mishri main,
Ram ko khilaungi,
Pyaari pyaari Radhe,
Pyaare Shyam sang aayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Mera janam safal,
Ho jaayega,
Tan jhoomega aur,
Mann geet gaayega,
Ram sundar meri,
Kismat chamkaayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge,
Ram aayenge aayenge,
Ram aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Ram aayenge ॥

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge,
Shyam aayenge aayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥

Shyam jhoolege to,
Paala na jhulaungi,
Meethe meethe main,
Bhajan sunaungi,
Meri zindagi ke,
Saare dukh mit jaayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥

Shyam aayenge to,
Aangana sajaaungi,
Deep jalaake,
Diwali manaungi,
Mere janmo ke saare,
Paap mit jaayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥

Main to ruchi ruchi,
Bhog lagaungi,
Makhan mishri main,
Shyam ko khilaungi,
Pyaari pyaari Radhe,
Pyaare Shyam sang aayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥

Mera janam safal,
Ho jaayega,
Tan jhoomega aur,
Mann geet gaayega,
Shyam sundar meri,
Kismat chamkaayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥

Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge,
Shyam aayenge aayenge,
Shyam aayenge,
Meri jhopdi ke bhaag,
Aaj khul jaayenge,
Shyam aayenge ॥