Shri Dadhimati Mata Aarti Lyrics: दधिमथी माता जी की आरती

दधिमथी माता जी को दधिचक ब्राह्मणों की कुलदेवी के रूप में जाना जाता है| दधिमथी माता जी की आरती (Dadhimati Mata Aarti) का जाप करने से दधिमथी माता अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होती है तथा उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान करती है|

दधिमथी माता का मंदिर नागौर जिले की जायल नामक तहसील में जिला मुख्यालय से करीब 40 कि.मी दूर उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है| अनेक समाजों में श्री दधिमथी माता को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है|

दधिमथी माता जी की आरती

जिस स्थान पर दधिमथी माता का मंदिर स्थित है, उस स्थान को माता जी के ही नाम से दधिमथ भी कहा जाता है| दधिमथी माता जी की आरती (Dadhimati Mata Aarti) का जाप करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते है तथा उनके जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है| तो आइये जानते है इस आरती के बारे में|

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श्री दधिमथी माता जी की आरती – Dadhimati Mata Aarti Lyrics in Hindi

|| दधिमथी माता जी की आरती ||

ॐ जय दधिमथी माता, ए मैया जय दधिमथी माता।

सुख करणी दुख हरणी, ईश्वरी अन्नदाता।। ॐ जय

आदि शक्ति महारानी, त्रिभुवन जय गाता।

प्रणत पाल जय करणी, सुर नर मुनि ध्याता।। ॐ जय

विष्णु पति तिहारो, शांति है माता।

पिता अथर्वा ऋषि, दधीचि मुनि भ्राता।। ॐ जय

सार चुरा विकटासुर, दधि बिच खो जाता।

दधिमथी विकट विडार्यो, कर जग सुख साता।। ॐ जय

प्रकट भई भू लोक में, मांगलोद माता।

अटल ज्योति जगती है, दर्शन मन भाता।। ॐ जय

शीश छत्र सोना का, बसन सुरख राता।

रूप अनूप देखकर, रति पति सकुचाता।। ॐ जय

देश देश के यात्री, दर्शन हित आता।

देख छवि माता की, चित्त है सुख पाता।। ॐ जय

हुए निरजंन विधि से, वेद स्तुति गाता।

चूरमा भोग लगत है, आचमन करवाता।। ॐ जय

चैत आसोज में मेला, यात्री बहुत आता।

महिमा बरनी न जावे, पार नहीं पाता।। ॐ जय

श्री दधिमथी मां की आरती, जो कोई नर गाता।

कहे गणेश कर जोड़े, भक्तिमुक्तिपाता।। ॐ जय

दधिमथी माता जी की आरती

Dadhimati Mata Aarti Lyrics in Hindi – ॐ जय दधिमथी माता

|| Dadhimati Mata Aarti ||

Om Jay Dadhimathi Mata, Hey Maiya Jay Dadhimathi Mata।

Sukh Karani Dukh Harani, Ishwari Annadata।। Om Jay

Adi Shakti Maharani, Tribhuvan Jay Gaata।

Pranat Paal Jay Karani, Sur Nar Muni Dhyaata।। Om Jay

Vishnu Pati Tiharo, Shaanti Hai Mata।

Pita Atharva Rishi, Dadhichi Muni Bhrata।। Om Jay

Saar Chura Vikatasur, Dadhi Bich Kho Jaata।

Dadhimathi Vikat Vidaaryo, Kar Jag Sukh Saata।। Om Jay

Prakat Bhai Bhu Lok Mein, Mangalod Mata।

Atal Jyoti Jagati Hai, Darshan Man Bhaata।। Om Jay

Sheesh Chatra Sona Ka, Basan Surakh Raata।

Roop Anoop Dekhkar, Rati Pati Sakuchata।। Om Jay

Desh Desh Ke Yatri, Darshan Hit Aata।

Dekh Chhavi Mata Ki, Chitt Hai Sukh Paata।। Om Jay

Huye Nirjan Vidhi Se, Ved Stuti Gaata।

Churma Bhog Lagat Hai, Aachaman Karvata।। Om Jay

Chait Aaso Mein Mela, Yatri Bahut Aata।

Mahima Barni Na Jaave, Paar Nahin Paata।। Om Jay

Shri Dadhimathi Maan Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaata।

Kahe Naath Kar Jode, Bhakti Mukti Paata।। Om Jay

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics: माँ दुर्गा जी की आरती हिंदी में

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार माँ दुर्गा जी की आरती (Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics) सामान्यतः शाम के समय तथा माँ दुर्गा की पूजा के शुभ समय पर की जाती है|

कभी – कभी प्रारंभिक पूजा के पश्चात भी एक बार माँ दुर्गा जी की आरती (Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics) की जाती है| देवी दुर्गा को शक्ति का रूप माना जाता है|

इस वजह से इन तक पहुँचाना बहुत ही कठिन है| माँ दुर्गा इस सम्पूर्ण सृष्टि की सुरक्षा के लिए बुराई को नष्ट करती है| धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माँ दुर्गा को ऊर्जा तथा शक्ति का परम स्रोत माना जाता है|

दुर्गा जी की आरती

माँ दुर्गा जी की आरती (Durga Ji Ki Aarti) व्यक्ति के जीवन में सुकून तथा शांति लाने का बहुत ही अच्छा स्त्रोत है| दुर्गा माँ की आरती शुभ उत्सव तथा नकारात्मक ऊर्जा के अंत का ही प्रतीक मानी जाती है|

माँ दुर्गा जी की आरती करने के बहुत सारे लाभ बताये जाते है| इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है माँ दुर्गा जी की आरती (Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics) का पूर्ण श्रद्धा के साथ जाप करने व्यक्ति मानसिक शांति की अनुभूति होती है|

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माँ दुर्गा जी की आरती – Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in Hindi

|| दुर्गा जी की आरती  ||

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रवदन नीको॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे।
रक्त पुष्प गलमाला कंठन पर साजै॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुःख हारी॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

कानन कुंडल शोभित नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योति॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

शुंभ निशंभु बिदारे महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

चण्ड मुण्ड संहारे शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

ब्रम्हाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

चौसंठ योगिनी गावत नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा अरु डमरु॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता |
भक्तन की दुख हरता सुख संपति करता॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

श्री अंबे जी की आरती,जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥

ॐ जय अम्बे गौरी।

दुर्गा जी की आरती

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in English – जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी

|| Durga Ji Ki Aarti ||

Jai Ambe Gauri Maiya,
Jai Shyama Gauri,

Nishdin Tumko Dhyaavat,
Hari Brahma Shivri ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Mang Sindur Viraajat,
Tiko Mrigmadko,

Ujjvalse Se Dou Naina,
Chandravadan Niko ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Kanak Saman Kalevar,
Raktambar Raje,

Rakta Pushpa Galmala,
Kanthan Par Saje ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Kehari Vahan Rajat,
Khadg Khappar Dhari,
Sur Nar Munijan Sevat,
Tinke Dukhahari ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Kanan Kundal Shobhit,
Nasagre Moti,
Kotik Chandra Divakar,
Samrajat Jyoti ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Shumbh – Nishubh Bidare,
Mahishasur Ghati,
Dhumra – Vilochan Naina,
Nishdin Madmati ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Chanda Munda Sanhaare,
Shonit Beej Hare,
Madhu Kaitabh Dou Mare,
Sur Bhayahin Kare ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Brahmani Rudrani,
Tum Kamala Rani,
Aagam Nigam Bakhani,
Tum Shiv Patrani ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Chaunsath Yogini Gavat,
Nritya Karat Bhairon,
Bajat Taal Mridanga,
Aur Bajat Damru ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Tum Hi Jag Ki Mata,
Tum Hi Ho Bharta,
Bhaktan Ki Dukh Harta,
Sukh Sampati Karta ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Bhuja Char Ati Shobhit,
Var Mudra Dhari,
Manvanchhit Phal Pavat,
Sevat Nar Nari ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Kanchan Thal Virajat,
Agar Kapur Bati,
Shri Malketu Me Rajat,
Kotiratan Jyoti ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Shri Ambe Ji Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaave,
Kahat Shivanand Swami,
Sukh Sampatti Paave ||

|| Jai Ambe Gauri ||

Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi: शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

भगवान गणेश जी को बाधाओं को दूर करने वाला और सौभाग्य लाने वाला, कला व विज्ञान का संरक्षक और बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। आज हम भगवान गणेश की आरती यानि “शेंदुर लाल चढ़ायो” (Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi) के बारें में जानेंगे।

भगवान गणेश और पार्वती के पुत्र हैं और वह युद्ध के देवता कार्तिकेय (या सुब्रह्मण्य) के भाई हैं । माना जाता है कि भगवान गणेश की पूजा करने के पश्चात भगवान गणेश जी की आरती (Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi) की जाती है।

शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

धार्मिक ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार व्रत तथा त्योहारों के अलावा भी सुबह – शाम भगवान गणेश जी की आरती करनी चाहिए। अगर आप रोज़ नहीं कर सकते तो बुधवार के दिन भी भगवान गणेश जी की आरती की जा सकती है।

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शेंदुर लाल चढ़ायो आरती क्या है? – What is Shendur Lal Chadhayo Aarti?

हिंदू पौराणिक कथाओं में आरती का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। हर देवी-देवता के लिए एक अलग आरती होती है, जिसे देवता के सामने गाया जाता है।

शेंदुर लाल चढायो आरती भगवान गणेश जी के सम्मान में गाई जाने वाली एक अलग आरती है। नीचे मूल आरती और उसके बोलों का अर्थ दिया गया है।

“शेंदुर लाल चढ़ायो” भगवान गणेश को समर्पित एक भक्तिपूर्ण हिंदी गीत है। यह आरती लोगों के बीच इतनी मशहूर है कि लोग नियमित रूप से सुबह और शाम इसका जाप करते हैं।

यह भगवान गणेश जी को सिन्दूर लगाने की क्रिया को दर्शाता है, जो श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यह आरती अक्सर गणेश चतुर्थी के त्योहार के दौरान गायी जाती है, जो उनके जन्म का जश्न मनाता है।

भक्त गणेश जी की महिमा की प्रशंसा करते हैं और समृद्ध और बाधा मुक्त जीवन के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। आरती की जीवंत और उत्सवपूर्ण प्रकृति इस अवसर की खुशी को दर्शाती है।

शेंदुर लाल चढ़ायो आरती हिंदी में – Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi

|| शेंदुर लाल चढ़ायो आरती ||

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको
महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको
जय देव जय देव (1)

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता
जय देव जय देव (2)

भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतत संपत सबही भरपूर पावे (3)

ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे
जय देव जय देव (4)

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता
जय देव जय देव (5)

घालिन लोटांगण वंदिन चरण
डोलयाणी पाहीन रूप तुझे
प्रेमए आलिंगीं आनन्दे पूजीं
भावे ओवालिन म्हाने नामा (6)



त्वामेव माता पिता त्वामेव
त्वामेव बंधूषछ सखा त्वामेव
त्वामेव विद्या द्रविन्म त्वामेव
त्वामेव सर्वाँ माँ देव देव (7)

काएँ वाच मानसेंद्रियायरवा
बुद्धयातमाना वा प्राकृतिस्वभावा
करोमी यद्यत सकलम पारासमै
नारायनायेटी समरपायमी (8)

अच्युत केशवम् रामनारायनाँ
कृष्णदामोदराम वासुदेवं हरी
श्रीधरम माधवाँ गोपीकवल्लभं
जानकिनायकम रमचंड्रम भजे (9)

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे

 

शेंदूर लाल चढायो आरती: हिंदी अर्थ

श्लोक 1 –

मैं हाथी के सिर वाले भव्य और सुन्दर भगवान को लाल सिन्दूर चढ़ाता हूँ।
मैं उन गौरीपुत्र को प्रणाम करता हूँ, जो बड़े पेट वाले, वैभव से विराजमान हैं।
उनके हाथों में गुड़ का लड्डू है।
उनकी महिमा ऐसी है कि उसका वर्णन करते समय शब्द कम पड़ जाते हैं।
गणों के राजा आपकी जय हो। (1)

श्लोक 2 –

हे ज्ञान और सुख के दाता श्री गणेश, आपकी जय हो।
जब मैं आपका स्मरण करता हूँ, तो मेरा मन पूरी तरह से आपमें लीन हो जाता है। आपके दर्शन से मुझे बहुत आनंद मिलता है।
आपकी जय हो हे प्रभु! आपकी जय हो हे प्रभु! (2)

श्लोक 3 –

आप आठ प्रकार की शक्तियों को प्रदान करने वाले तथा सभी प्रकार के संकटों और संकटों को दूर करने वाले हैं।
आप सभी शुभ अधिकारी हैं तथा सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं।
आपका स्वरूप ऐसा है जैसे लाखों सूर्य एक साथ चमक रहे हों।
आपके गाल और माथा चंद्रमा के समान ही दैदीप्यमान हैं।
गणों के राजा, आपकी जय हो। (3)

श्लोक 4 –

ज्ञान और सुख के दाता श्री गणेश, आपकी जय हो।
जब मैं आपके बारे में सोचता हूँ, तो मेरा मन पूरी तरह से आप में लीन हो जाता है, और आपके दर्शन से मुझे बहुत खुशी मिलती है।
आपकी जय हो हे प्रभु! आपकी जय हो हे प्रभु! (4)

श्लोक 5 –

आप इतने दयालु हैं कि यदि कोई सच्चे मन और उद्देश्य से आपकी शरण में आता है, तो उसे धन-संपत्ति या वंश सब कुछ प्राप्त होता है,
जो उसकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक है। हे राजाओं के राजा, आपका व्यक्तित्व ऐसा है कि मैं आपके रूप पर मोहित हो गया हूँ।
और यह आप ही हैं, जिनकी स्तुति में गोसाविनंदन प्रतिदिन गीत गाते हैं। (5)

श्लोक 6 –

हे प्रभु! आपके चरणों में लेटकर प्रणाम करूंगा!
अपनी आंखों से देखूंगा सुंदर रूप तेरा और
तुम्हें अपने सारे प्यार से गले लगाऊंगी और सारी खुशियों के साथ तुम्हारी पूजा करूंगी!
और ऐसा करके, पूरी भक्ति के साथ आपकी पूजा करूँगा और अपने आप को आपको अर्पित करूँगा! नामा (संत नामदेव) कहते हैं, मैं पूरे मन (भक्ति, भावना) से आपकी पूजा करता हूँ। (6)

श्लोक 7 –

आखिर आप ही मेरी माता हैं, आप ही मेरे पिता हैं;
तुम मेरे सहोदर और मेरे साथी हो;
तुम वह ज्ञान हो जिसकी मुझे तलाश है और वह धन हो जिसकी मुझे लालसा है!
आप ही मेरे सबकुछ हैं, आप ही मेरे सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं !! (7)

श्लोक 8 –

ऐसा जानकर, अपने शरीर के द्वारा तथा इस सीमित बुद्धि और इन्द्रियों के द्वारा प्रयत्न करके,
इसी प्रकार बुद्धि से, स्वयं से, स्वभाव से और व्यवहार से,
उपरोक्त सभी के साथ मैं जो कुछ भी करता हूं,
हे भगवान नारायण, मैं वह सब आपको अर्पित करता हूँ !! (8)

श्लोक 9 –

हे अचूक आपको मैं नमस्कार करता हूँ, हे केशव आपको नमस्कार है,
हे नारायण के अवतार राम आपको नमस्कार है
हे कृष्ण, जिन्हें दामोदर के नाम से जाना जाता है आपको नमस्कार है,
हे वासुदेव आपको नमस्कार है, हे हरि आपको नमस्कार है,
हे श्रीधर आपको नमस्कार है, हे माधव आपको नमस्कार है,
मैं आपको नमस्कार करता हूँ जानकी के प्रभु !! (9)

शेंदुर लाल चढ़ायो: गणेश आरती का महत्व

किसी भी पूजा या धार्मिक समारोह को करने से पहले भगवान गणेश की आरती- शेंदुर लाल चढ़ायो गाई जाती है। इसे प्रेम और भक्ति के साथ गाने से व्यक्ति को दिव्य आनंद का अनुभव हो सकता है।

प्राचीन ऋषियों का मानना ​​था कि उचित अनुष्ठानों के साथ इस आरती का नियमित जाप करने से आध्यात्मिक ज्ञान और दिव्य आनंद की प्राप्ति हो सकती है।



भगवान गणेश के प्रति पूरी श्रद्धा के साथ इस आरती का जाप करने से शरीर में एक खास कंपन पैदा होता है जिससे सात चक्र खुलते हैं और भगवान और भक्त के बीच एक दिव्य मिलन होता है।

इसके अलावा, चक्रों के खुलने से मन को बहुत स्पष्टता मिलती है और सही निर्णय लेने में मदद मिलती है जो अंततः समृद्धि, सफलता और प्रचुरता की ओर ले जाती है।

शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

इसके अलावा, आरती का जाप घर से नकारात्मकता को दूर करता है और आसपास के वातावरण में सकारात्मकता और शांति लाता है। गणेश आरती गाने से शाश्वत आनंद का अनुभव होता है।

शेंदुर लाल चढ़ायो गणेश आरती कैसे करें? 

यहाँ बताया गया है कि पारंपरिक शेंदुर लाल चढ़ायो गणेश आरती कैसे की जाती है। इसे प्रतिदिन करने से आपको भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

1. भगवान गणेश की मूर्ति तैयार करें 

गणेश आरती शेंदुर लाल चढ़ायो करने से पहले, ज़रूरी तैयारियाँ कर लें। मूर्ति के पुराने फूल और मालाएँ हटाएँ, उसे साफ करें और उसे एक-एक तरह के कपड़े पहनाएँ।

यह एक साधारण कपड़े से लेकर शॉल जैसा दिखने वाला कोई भी कपड़ा हो सकता है या मूर्तियों के पहनने के लिए खास तौर पर बनाया गया एक बहुत ही विस्तृत कस्टम-मेड डिज़ाइनर पहनावा भी हो सकता है।

इस अनुष्ठान को करने वाले व्यक्ति को भी उचित कपड़े पहनने चाहिए जो इस अवसर के प्रति सम्मानजनक हों, जैसे धोती या साड़ी।



भगवान गणेश को वस्त्र (विशेष कपड़ा) अर्पित करने के बाद, कुछ अगरबत्ती (धूपबत्ती) जलानी चाहिए। ओम गणेशाय नमः जैसे मंत्रों का जाप करते हुए मूर्ति के माथे पर चंदन (चंदन का लेप) या तिलक लगाया जा सकता है।

इसके बाद, भगवान गणेश की मूर्ति के चारों ओर माला और फूल चढ़ाने चाहिए और दूर्वा (एक विशेष प्रकार की घास जो पारंपरिक रूप से भगवान गणेश को चढ़ाई जाती है) चढ़ाई जानी चाहिए।

अपने दिल की गहराई से उन्हें अपने घर आमंत्रित करें, उनका आशीर्वाद और वरदान मांगें। अंत में, उनके सामने मोदक (भगवान गणेश की पसंदीदा मिठाई) की एक प्लेट रखें।

2. आरती थाल तैयार करें

हमेशा आरती की थाली के बीच में एक पवित्र हिंदू प्रतीक के रूप में एक स्वस्तिक बनाएं और उस पर एक तेल का दीपक रखें जिसे “आरती दीपक” कहा जाता है। दीपक जलाने के लिए शुद्ध घी का उपयोग करें और थाली में कुछ ताजे फूल डालें।

आप महत्वपूर्ण आध्यात्मिक लाभ के लिए गणेश चतुर्थी या गणेश जयंती जैसे विशेष त्योहारों पर धूप (सुगंध बनाने के लिए संभरणी, लुबान या कपूर के साथ) के साथ पंचरती (पांच दीयों के साथ आरती), महा-आरती (कई दीयों के साथ आरती) भी कर सकते हैं।

कपूर, लौंग, संभरणी और लुबान जैसी सामग्री डालने से जीवन से बुराइयों और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में मदद मिलती है।

3. आरती शुरू करें

भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा के साथ शेंदुर लाल चढ़ायो आरती गाना शुरू करें। गाते समय अपने दाहिने हाथ में आरती की थाल और बाएं हाथ में घंटी पकड़ें।

आरती की थाली को घड़ी की दिशा में घुमाएँ और घंटी बजाएँ। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शेंदुर लाल चढ़ायो आरती करते समय घंटी बजाने का अपना महत्व है।

शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

इससे कुछ खास कंपन और आवृत्तियाँ पैदा होती हैं जो घर में सकारात्मकता को बढ़ाती हैं और बुराइयों को दूर भगाती हैं।

इसके अलावा, घंटी बजाने से ओम की दिव्य ध्वनि निकलती है जो मन, शरीर और आत्मा को ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गणेश जी की आरती करने के लाभ

1. भगवान को प्रसन्न करता है

आरती में भगवान गणेश की स्तुति में भजन गाए जाते हैं और उनकी कृपा पाने के लिए ईमानदारी से प्रार्थना की जाती है।

इसमें शामिल मंत्र भगवान के दिल को प्रसन्न करने के लिए हैं, और प्रार्थनाएँ हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायता करने के लिए श्रद्धांजलि के रूप में की जाती हैं।

2. आस्था को मजबूत करता है

जैसे ही भक्त भगवान गणेश की पूजा करता है और उनकी उपस्थिति को महसूस करता है, उसे एक आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है जो विश्वास के लिए उसकी भावनात्मक आवश्यकता को प्रभावित करता है। यह व्यक्ति को ईश्वर के करीब ले जाता है।

3. मन से नकारात्मक विचार दूर होते हैं

भक्ति भाव से आरती का जाप करने से मन शांत होता है, उसमें आनंद आता है और नकारात्मक विचारों से छुटकारा मिलता है।

कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने साबित किया है कि आरती का जाप करने से चिंता, तनाव और अवसाद के लक्षण कम हो सकते हैं। इसके अलावा, यह सकारात्मक मनोदशा, केंद्रित ध्यान और आराम की भावना को भी बढ़ाता है।

4. सात चक्र खुलते हैं

आरती को ज़ोर से और स्पष्ट रूप से करने से कुछ ऐसी आवृत्तियाँ पैदा होती हैं जो शरीर के ऊर्जा चक्रों से अशुद्धियों को साफ करती हैं और उन्हें पूरी तरह से खोलती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे अधिक आत्म-नियंत्रण का अभ्यास होता है, खुद को बेहतर ढंग से व्यक्त करना, खुद के लिए खड़े होने की आपकी क्षमता में वृद्धि होती है, और संपत्ति, रिश्तों और भौतिक दुनिया के प्रति अत्यधिक लगाव से छुटकारा मिलता है।

5. रिश्तों को मजबूत बनाना

माना जाता है कि अगर परिवार के साथ मिलकर भगवान गणेश की आरती की जाए तो इससे रिश्तों में सुधार होता है। यह आध्यात्मिक हृदय केंद्र और भौतिक हृदय केंद्र दोनों को ठीक करता है और खुद को बिना शर्त करुणा और प्रेम के लिए खोलता है।

किसी व्यक्ति में भावनात्मक बुद्धिमत्ता बढ़ने से बेहतर रिश्ते विकसित होते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश स्वयं एक पारिवारिक व्यक्ति थे और हमेशा अपने प्रियजनों के साथ बहुत अच्छे संबंध रखते थे।

निष्कर्ष

भगवान गणेश की आरती शेंदुर लाल चढ़ायो में शक्तिशाली (Shendur Lal Chadhayo Lyrics in Hindi) भजन शामिल हैं जो आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

इसके लिए, शेंदुर लाल चढ़ायो आरती को इस भाव से किया जाना चाहिए कि भगवान स्वयं भक्त के सामने खड़े हैं।

आध्यात्मिक भक्ति के साथ आरती का जाप करने से प्रत्येक व्यक्ति में सर्वश्रेष्ठता सामने आती है, और वे अविश्वसनीय रूप से उत्साहित महसूस करते हैं।



शेंदुर लाल चढ़ायो आरती गाने में जितनी अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा लगाई जाती है, उतना ही अधिक वे अपने भीतर के देवत्व को जगाने और चेतना को जगाने का इरादा रखते हैं।

ऐसी आरती भगवान गणेश तक बहुत तेजी से पहुँचती है, और जो लोग इसे गाते हैं वे समय के साथ जमा हुए नकारात्मक कर्मों से खुद को शुद्ध करने के साधन के रूप में ऐसा करते हैं और साथ ही आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।

भगवान गणेश की आरती करना सिर्फ़ एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि अपने भीतर से जुड़ने का एक तरीका भी है।

यह भगवान का आशीर्वाद पाने और आस-पास की सभी नकारात्मकता को दूर करने का एक तरीका है। पूरी लगन के साथ आरती करना शुरू करें और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।

इसी के साथ हम आपसे विदा लेते हैं। आगे और भी ऐसे ही आरती के लिरिक्स, पूजा, और पंडित संबंधित जानकारी के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ।

Jai Ganesh Jai Ganesh Jai Ganesh Deva Lyrics: गणेश जी की आरती

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti) को हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार किसी कार्य या भगवान गणेश जी पूजा को शुरू करने से पूर्व  गाया जाता है|

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti) के बहुत ही सारे संस्करण है| जिनकी रचना अलग – अलग कवियों तथा भक्तों के द्वारा की गई है|

भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है| किसी भी प्रकार का कार्य या कोई भी पूजा गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti) के बिना अधूरी मानी जाती है|

गणेश जी की आरती

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti) को प्रेम तथा भक्ति के भाव से गाने से यह भक्त को दिव्य आनंद की अनुभूति करवाती है|

प्राचीन समय में ऋषियों का मानना यह था कि उचित अनुष्ठानों के साथ नियमित गणेश जी आरती करने से दिव्य आनंद तथा अध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है|

पूर्ण भक्ति के साथ भगवान गणेश जी की आरती को करने से व्यक्ति के शरीर में एक अद्भुत कंपन उत्पन्न होता है जो कि व्यक्ति के शरीर में उपस्थित सात चक्रों को सक्रिय करने में सहायता करती है|

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti) करने से हमारे आस – पास का वातावरण सकारात्मक होता है| इस आरती को  गणेश चतुर्थी के दिन गाना बहुत ही शुभ माना जाता है|

अब आगे हम इस लेख के माध्यम से हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे| 99Pandit एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है जिसकी सहायता से आप हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी पूजा जैसे – धनतेरस पूजा (Dhanteras Puja), दिवाली पूजा (Diwali Puja) तथा करवा चौथ (Karwa Chauth) के लिए ऑनलाइन पंडित बुक कर सकते है| यहाँ बुकिंग प्रक्रिया बहुत ही आसान है|

गणेश जी की आरती – Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| गणेश जी की आरती ||

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

गणेश जी की आरती

Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics in English: जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा

॥ Ganesh Ji Ki Aarti ॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Ek dant daya want
Char bhuja dhari।
Mathe sindur sohe
Muse ki sawari॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Pan chadhe phool chadhe
Aur chadhe Mewa।
Ladduan ka Bhog Lage
Sant kare seva॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Andhan ko aankh det
Kodhin ko kaya।
Banjhan ko putra det
Nirdhan ko maya॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Sur Shyam sharan aaye
Safal kije seva
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

Deenan ki laaj rakho
Shambhu sutkari।
Kamana ko purn karo
Jaoon balihari॥

Jai Ganesh Jai Ganesh,
Jai Ganesh Deva।
Mata Jaki Parvati,
Pita Maha Deva॥

निष्कर्ष

आज इस लेख में हमने आपको गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics) के बारे जानकरी दी। साथ ही हमे आपको आरती के लिरिक्स भी बताये। गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना जाता है तथा किसी भी शुभ कार्य करने से पहले उनकी पूजा की जाती है।

इस गणेश जी की आरती का जाप करने से भक्तों को सद्बुद्धि प्राप्त होती है तथा भक्तों के सभी रुके हुए कार्य भी पूर्ण होते है। गणेश जी की पूजा हेतु आप 99Pandit के माध्यम से अनुभवी पंडित बुक कर सकते है।

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Satyanarayan Aarti Lyrics: सत्यनारायण आरती – ॐ जय लक्ष्मी रमणा

सत्यनारायण आरती (Satyanarayan Aarti Lyrics) भगवान विष्णु के रूप भगवान सत्यनारायण को समर्पित मानी जाती है। यदि आप घर में भगवान सत्यनारायण कथा का आयोजन करते है तो आपको कथा के पूर्ण होने के पश्चात सत्यनारायण आरती का जाप अवश्य करना चाहिए।

बिना सत्यनारायण आरती के सत्यनारायण कथा को अधुरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सत्यनारायण आरती का पूर्ण भक्ति के साथ जाप करने से जीवन की परेशानियां, संकट व दुःख दूर हो जाते है। साथ ही इस सत्यनारायण आरती का जाप करने से घर में हमेशा ही सुख-शांति बनी रहती है।

सत्यनारायण आरती

भगवान सत्यनारायण की विशेष कृपा पाने के लिए पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने के पश्चात सत्यनारायण आरती का गान करने से भगवान सत्यनारायण बहुत प्रसन्न होते है तथा अपने भक्तों को सुख – समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते है।

शास्त्रों में बताया गया है कि सत्यनारायण आरती (Satyanarayan Aarti Lyrics) का जाप घर में करने से घर के वास्तु दोष दूर हो जाते है। भगवान सत्यनारायण की इस आरती को प्रतिदिन भी गाया जा सकता है लेकिन इसका भगवान सत्यनारायण पूजा के पश्चात जाप करना शुभ माना जाता है।

सत्यनारायण आरती हिंदी में – Satyanarayan Ji Ki Aarti in Hindi

|| सत्यनारायण आरती ||

जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

रत्‍‌न जड़ित सिंहासन,
अद्भुत छवि राजै ।
नारद करत निराजन,
घण्टा ध्वनि बाजै ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

प्रकट भये कलि कारण,
द्विज को दर्श दियो ।
बूढ़ा ब्राह्मण बनकर,
कंचन महल कियो ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

दुर्बल भील कठारो,
जिन पर कृपा करी ।
चन्द्रचूड़ एक राजा,
तिनकी विपत्ति हरी ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

वैश्य मनोरथ पायो,
श्रद्धा तज दीन्ही ।
सो फल भोग्यो प्रभुजी,
फिर-स्तुति कीन्हीं ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

भाव भक्ति के कारण,
छिन-छिन रूप धरयो ।
श्रद्धा धारण कीन्हीं,
तिनको काज सरयो ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

ग्वाल-बाल संग राजा,
वन में भक्ति करी ।
मनवांछित फल दीन्हों,
दीनदयाल हरी ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

चढ़त प्रसाद सवायो,
कदली फल, मेवा ।
धूप दीप तुलसी से,
राजी सत्यदेवा ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।

श्री सत्यनारायण जी की आरती,
जो कोई नर गावै ।
ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति,
सहज रूप पावे ॥

जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा ।
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा ॥

सत्यनारायण आरती

Satyanarayan Aarti Lyrics In English |  Om Jai Lakshmi Ramna

|| Satyanarayan Aarti ||

Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |
Satyanarayan Swami,
Jan Paatak Harana ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Ratna Jadit Singhasan,
Adbhut Chhavi Raaje |
Naarad Karat Nirajan,
Ghanta Dhwani Baaje ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Prakat Bhaye Kali Kaaran,
Dwij Ko Darsh Diyo |
Budha Brahman Bankar,
Kanchan Mahal Kiyo ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Durbal Bheel Kathaaro,
Jin Par Kripa Kari |
Chandrachud Ek Raja,
Tinki Vipatti Hari ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Vaishya Manorath Paayo,
Shraddha Taj Dinhi |
Sau Phal Bhogyo Prabhuji,
Phir- Stuti Kinhi ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Bhaav Bhakti Ke Kaaran,
Chhin-Chhin Roop Dharayo |
Shraddha Dhaaran Kinhi,
Tinko Kaaj Sarayo ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Gwal-Bal Sang Raja,
Van Me Bhakti Kari |
Manvanchhit Phal Dinho,
Deendayal Hari ||

Om Jai Lakshmi Ramna,
Swami Jai Lakshmi Ramna |

Chadhat Prasad Savayo,
Kadali Phal, Meva |
Dhup Deep Tulsi Se,
Raaji Satyadeva ||

Om Jai Lakshmi Ramana,
Swami Jai Lakshmi Ramana.

Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaave.
Riddhi-Siddh Sukh-Sampatti,
Sahaj Roop Paave.

Jai Lakshmi Ramana,
Swami Jai Lakshmi Ramana.
Satyanarayan Swami,
Jan Paatak Harana

निष्कर्ष

आज इस लेख में हमने सत्यनारायण आरती (Satyanarayan Aarti Lyrics) के बारे में पढ़ा। यह आरती भगवान विष्णु के रूप सत्यनारायण भगवान की उपासना गाई जाती है। भगवान विष्णु को सम्पूर्ण जगत के पालनकर्ता के रूप में भी जाना जाता है।

आपको बता दे कि हिंदू धर्म में एकादशी का दिन भगवान विष्णु को ही समर्पित होता है। इस दिन भक्तों के द्वारा भगवान सत्यनारायण को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इसी के साथ सत्यनारायण व्रत कथा व आरती भी की जाती है।

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Ekadashi Mata Ki Aarti: एकादशी माता की आरती (ओम जय एकादशी माता)

एकादशी माता की आरती, एकादशी माता को समर्पित एक भक्ति अनुष्ठान है, जो एकादशी के दिन मनाया जाता है। भक्त भजन गाते हैं, दीप जलाते हैं और प्रार्थना करते हैं, आध्यात्मिक उत्थान और धार्मिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। इस शुभ दिन पर आरती ईश्वर के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार माता एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई थीं।

इस कारण इनका नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा। आज हम इस आर्टिकल के साथ जानेंगे एकादशी माता की आरती।

एकादशी माता की आरती

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Ekadashi Mata Ki Aarti in Hindi – एकादशी माता की आरती इन हिंदी

।। एकादशी माता की आरती ।।

ओम जय एकादशी माता, मैया जय जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।।
ओम जय एकादशी माता।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।।
ओम जय एकादशी…।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।।
ओम जय एकादशी…।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।।
ओम जय एकादशी…।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।।
ओम जय एकादशी…।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।।
ओम जय एकादशी…।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।।
ओम जय एकादशी…।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।।
ओम जय एकादशी…।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।।
ओम जय एकादशी…।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।।
ओम जय एकादशी…।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।।
ओम जय एकादशी…।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्रय हरनी ।।
ओम जय एकादशी…।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।।
ओम जय एकादशी…।।

एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti in English – एकादशी माता की आरती इन इंग्लिश

॥ Ekadashi Mata Ki Aarti ॥

Om Jai Ekadashi, Jai Ekadashi,Jai Ekadashi Mata।
Vishnu Puja Vrat Ko Dharan Kar,Shakti Mukti Pata॥
Om Jai Ekadashi…॥

Tere Naam Ginau Devi,Bhakti Pradan Karni।
Gan Gaurav Ki Deni Mata,Shashtro Mein Varni॥
Om Jai Ekadashi…॥

Margashirsha Ke Krishnapaksha KiUtapanna Vishvatarini Janmi।
Shukla Paksha Mein Hui Mokshada,Muktidata Ban Aayi॥
Om Jai Ekadashi…॥

Paush Ke Krishnapaksha Ki Saphala Naamak Hai।
Shuklapaksha Mein Hoye Putrada,Anand Adhik Rahe॥
Om Jai Ekadashi…॥

Naam Shattila Magh Maas Mein,Krishnapaksha Aave।
Shuklapaksha Mein Jaya Kahave,Vijay Sada Pave॥
Om Jai Ekadashi…॥

Vijaya Phalguna Krishnapaksha MeinShukla Amalaki।
Papmochani Krishna Paksha MeinChaitra Mahabali Ki॥
Om Jai Ekadashi…॥

Chaitra Shukla Mein Naam Kamada,Dhan Dene Wali।
Naam Varuthini Krishna Paksha Mein,Vaishakha Maah Wali॥
Om Jai Ekadashi…॥

Shukla Paksha Mein HoyeMohini Apara Jyeshtha Krishnapakshi।
Naam Nirjala Sab Sukha Karni,Shuklapaksha Rakhi॥
Om Jai Ekadashi…॥

Yogini Naam Ashadha Mein Jano,Krishnapaksha Karni।
Devshayani Naam Kahayo,Shuklapaksha Dharani॥
Om Jai Ekadashi…॥

Kamika Shravan Maas Mein Aave,Krishnapaksha Kahiye।
Sharvan Shukla HoyePavitra Anand Se Rahiye॥
Om Jai Ekadashi…॥

Aja Bhadrapada Krishnapaksha Ki,Parivartini Shukla।
Indra Aashwin Krishnapaksha Mein,Vrat Se Bhavsagar Nikla॥
Om Jai Ekadashi…॥

Papankusha Hai Shukla Paksha Mein,Aap Haranahari।
Rama Maas Kartik Mein Aave,Sukhdayak Bhari॥
Om Jai Ekadashi…॥

Devotthani Shukla Paksha Ki,Dukhnashak Maiya।
Paavan Maas Mein Karu VinitiPaar Karo Naiya॥
Om Jai Ekadashi…॥

Parama Krishna Paksha Mein Hoti,Jana Mangal Karni।
Shukla Maas Mein hoye Padmini,Dukh Daridra Harni॥
Om Jai Ekadashi…॥

Jo Koi Aarti Ekadashi Ki,Bhakti Sahita Gaave।
Jan Gurdita Swarga Ka Vasa,Nishchay Vah Paave॥
Om Jai Ekadashi…॥

Mythological Story of Ekadashi Mata – एकादशी माता की पौराणिक कथा

सतयुग में ‘मुर‘ नामक एक बहुत शक्तिशाली दैत्य ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवराज इंद्र और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया गया और वे पृथ्वी पर रहने लगे।

अपनी पराजय और अपमान से निराश होकर देवता भगवान शिव की शरण में गए। वहां पहुंचकर उन्होंने अपना दुखड़ा सुनाया। इंद्र की करुण प्रार्थना सुनकर भगवान शंकर ने उन्हें भगवान विष्णु के पास जाने को कहा।

यह सुनकर इंद्र आदि सभी देवता क्षीरसागर पहुंच गए। वहां वे भगवान विष्णु को अत्यंत शक्तिशाली और क्रूर राक्षस ‘मुर’ के आतंक की कथा सुनाते हैं। तथा भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

भगवान विष्णु देवताओं को आश्वासन देते हैं कि वे शीघ्र ही मुर का वध कर देंगे और देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाएंगे।

भगवान विष्णु और राक्षस मुर के बीच बहुत बड़ा युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान भगवान विष्णु को नींद आ जाती है, इसलिए वे विश्राम करने के लिए एक गुफा में सो जाते हैं।

विष्णु भगवान को सोया हुआ देखकर मुर उन पर आक्रमण कर देता है। लेकिन इसी बीच भगवान विष्णु के शरीर से एक कन्या उत्पन्न होती है।

वह कन्या मुर से युद्ध करती है और उसका वध कर देती है। जब भगवान विष्णु की नींद खुलती है, तो उन्हें पता चलता है कि किस प्रकार कन्या ने मुर को मारकर उसकी रक्षा की है।

यह जानकर वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और कहते हैं कि चूंकि तुम मेरे गर्भ से एकादशी तिथि को उत्पन्न हुई हो, इसलिए तुम ‘उत्पन्ना एकादशी’ के नाम से प्रसिद्ध होओगी।

जो कोई इस तिथि को तुम्हारा व्रत करेगा और मेरा नाम लेते हुए तुम्हारी पूजा करेगा, उसके सभी दुख दूर हो जाएंगे और उसे मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रकार सभी उत्पन्ना देवी को एकादशी माता के रूप में पूजने लगे।

निष्कर्ष

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए एकादशी का दिन सबसे अच्छा माना जाता है। भगवान विष्णु से उत्पन्न हुए देवी उत्पन्ना का भी उत्पन्ना एकादशी के रूप में व्रत और पूजन किया जाता है।

देवी उत्पन्ना को एकादशी माता के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata ki Aarti), भक्ति में डूबने का एक अनमोल साधन है|

इस एकादशी माता की आरती का गान करने से भक्तों के मन को शांति प्राप्त होती है| एकादशी माता की आरती और पूजा करने से पहले भक्त अन्न का त्याग करते हैं और सात्विक भोजन खाते हैं।

हम आशा करते हैं आपको यह जानकारी अच्छी लगेगी। ऐसे और भी आरती के लिरिक्स पढ़ने के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ।

Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi: कुंजबिहारी जी की आरती

आपको बता दे कि भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को ही कुंजबिहारी जी के रूप में भी जाना जाता है| कुंजबिहारी जी को प्रसन्न करने के लिए कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) का जाप किया जाता है|

ऐसे तो कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) कभी भी की जा सकती है लेकिन अधिकतर इस कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) का जाप जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भक्तों के द्वारा घरों तथा मंदिरों में किया जाता है|

कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) का जप करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होने लगता है|

कुंजबिहारी जी की आरती

यह कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) भगवान श्री कृष्ण का सम्मान करने वाले समारोह का एक बड़ा हिस्सा है|

इस कुंजबिहारी जी की एक खास बात यह भी है कि जब भी आप इस आरती का जप करेंगे तो आप भगवान श्री कृष्ण को अपने समीप ही महसूस करेंगे|

इस कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) का जाप करते समय भक्त भगवान श्री कृष्ण का भक्त भगवान श्री कृष्ण से प्रेम और आशीर्वाद पाने की कामना करते है|

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आरती श्री कुंजबिहारी की – Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi

|| आरती श्री कुंजबिहारी की ||

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुँ दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कुंजबिहारी जी की आरती

Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in English – Kunj Bihari Ji Ki Aarti

|| Aarti Kunj Bihari Ki ||

Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||
Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

Gale Me Baijanti Mala,
Bajave Murali Madhur Bala |
Shravan Me Kundal Jhalakala,
Nand Ke Anand Nandlala |
Gagan Sam Ang Kanti Kali,
Radhika Chamak Rahi Aali |
Latan Me Thade Banmali
Bhramar Si Alak,
Kasturi Tilak,
Chandra Si Jhalak,
Lalit Chhavi Shyama Pyaari Ki,
Shri Girdhar Krishan Murari Ki ||

Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishan Murari Ki ||

Kanak May Mor Mukut Bilsai,
Devta Darshan Ko Tarse |
Gagan Sau Suman Rasi Barse |
Baje Murchang,
Madhur Mirdang,
Gwalin Sang,
Atul Rati Gop Kumari Ki,
Shri Girdhar Krishan Murari ||

Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

Jahan Te Prakat Bhayi Ganga,
Sakal Man Harini Shree Ganga |
Smaran Te Hot Moh Bhanga
Basi Shiv Sis,
Jata Ke Beech,
Hare Agha Keech,
Charan Chhavi Shri Banwari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

Chamakti Ujjawal Tat Renu,
Baaj Rahi Vrindavan Benu |
Chahun Disi Gopi Gwal Dhenu
Hasat Mridu Mand,
Chandani Chand,
Katat Bhav Fand,
Ter Sun Deen Dukhari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

Aarti Kunjbihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ||

निष्कर्ष

कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics), भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबने का एक अनमोल साधन है| इस कुंजबिहारी जी की आरती का गान करने से भक्तों के मन को शांति प्राप्त होती है|

इस आरती को किसी भी दिन गाया जा सकता है किन्तु कुंजबिहारी जी की आरती (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics) को श्री कृष्ण जन्माष्ठमी के दिन गाने से जातक पर भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा होती है| कृष्ण जन्माष्ठमी के दिन इस आरती जाप करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है|

इसी के साथ यदि आप अपने घर में किसी भी प्रकार की पूजा करवाना चाहते है तो आप 99Pandit की वेबसाइट पर जाकर या दिए गए नंबर “8005663275” पर संपर्क करके भी पंडित जी बुक कर सकते है|

Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics: खाटू श्याम जी की आरती

खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti) का जाप करने से भगवान खाटू श्याम जिन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है, वह अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है|

इनके भक्त खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti) का जाप करके खाटू श्याम जी से अपने जीवन में सुख – समृद्धि बनाए रखने की कामना करते है|

Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics

इस कलयुग के समय में सभी भक्त अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए भगवान खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते है तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti) का भी जाप करते हैं|

निरंतर भगवान खाटू श्याम जी का नाम जपने से भक्त के मन में सकारात्मक भाव उत्पन्न होते है| खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti) का पाठ करने से भक्त मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है|

खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Ki Aarti) का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति प्रत्येक जगह पर सफलता मिलने लगती है| अब हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे|

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खाटूश्याम जी की आरती – Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| खाटू श्याम आरती ||

ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

रतन जड़ित सिंहासन,
सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो,
कुण्डल श्रवण पड़े॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

गल पुष्पों की माला,
सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर,
दीपक ज्योति जले॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

मोदक खीर चूरमा,
सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत,
सेवा नित्य करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

झांझ कटोरा और घडियावल,
शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे,
जय-जयकार करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

जो ध्यावे फल पावे,
सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से,
श्री श्याम-श्याम उचरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती,
जो कोई नर गावे।
कहत भक्त-जन,
मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

जय श्री श्याम हरे,
बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने,
पूरण काज करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।

Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics

Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics in English – ॐ जय श्री श्याम हरे

|| Khatu Shyam Aarti ||

Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|
Khatu Dham Virajat,
Anupam Roop Dhare||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Rajat Jadit Singhasan,
Sir Par Chanvar Dhure|
Tan Kesariya Baago,
Kundal Shravan Pade||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Gal Pushpon Ki Mala,
Sir Par Mukut Dhare|
Khevat Dhup Agni Par,
Deepak Jyoti Jale||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Modak Kheer Churma,
Suvarn Thaal Bhare|
Sevak Bhog Lagavat,
Seva Nitya Kare||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare |

Jhaanjh Katora Aur Ghadiyaal,
Shankh Mridang Ghure|
Bhakt Aarti Gaave,
Jai – Jaikar Kare||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Jo Dhyave Fal Paave,
Sab Dukh Se Ubare|
Sevak Jan Nij Mukh Se,
Shree Shyam Shyam Uchare||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Shree Shyam Bihari Ji Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaave|
Kahat Bhakt – Jan,
Manovanchit Fal Paave||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|
Nij Bhakto Ke Tumne,
Puran Kaaj Kare||
Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Om jai shree shyam hare,
Baba jai shree shyam hare|

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi: ॐ जय जगदीश हरे आरती

‘ॐ जय जगदीश हरे ’ (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics) आरती का उच्चारण हिन्दू धर्म के प्रत्येक घर में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के बाद किया जाता है|

पिछले 150 साल से यह ‘ॐ जय जगदीश हरे’ की सभी पूजा तथा अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है|

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi
भगवान विष्णु की सबसे ज्यादा प्रचलित आरती ‘ॐ जय जगदीश हरे’ (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics) की रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी के द्वारा की गई थी|

जिसकी रचना आज से लगभग 150 वर्ष पूर्व सन् 1870 ईस्वी में की गई थी| भगवान विष्णु की इस आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी का जन्म 30 सितंबर 1837 में पंजाब के लुधियाना में फुल्लौरी नामक एक गाँव में हुआ तथा उनका निधन 24 जून 1881 में हुआ था|

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार होने के साथ साथ सनातन धर्म के प्रचारक व स्वतंत्रता सेनानी भी थे| अब हम इस लेख के माध्यम से हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे|

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ॐ जय जगदीश हरे आरती: Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi 

|| ॐ जय जगदीश हरे आरती ||

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम्ही सब के स्वामी ॥॥ॐ जय….॥

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥ ॥ ॐ जय….॥

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥ ॥ ॐ जय….॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥ ॥ ॐ जय….॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वामी पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥ ॥ ॐ जय….॥

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in English: भगवान विष्णु जी की आरती

|| Om Jai Jagdish Hare ||

Om Jai Jagdish Hare
Swami jai jagdish hare
Bhakta janon ke sankat
Daas janon ke sankat
Shan me door kare
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Jo dhyave phal paave
Dukh bin se man ka
Swami dukh bin se man ka |
Sukh sampatti ghar aave
Sukh sampatti ghar aave
Kasht mite tan ka
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Mat pita tum mere
Sharan gahun me kiski
Swami sharan gahun me kiski |
Tum bin aur na dooja
Prabhu bin aur na dooja
Aas karu me jiski
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum pooran parmatma
Tum antaryami
Swami Tum Antaryami |
Para Brahma Parameshwara
Para Brahma Parameshwara
Tum sab ke swami
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum karuna ke sagar
Tum palan karta
Swami tum palan karta |
Main moorakh khal kami
Main sevak tum swami
Kripa karo bharta
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum ho ek agochar
Sab ke pranpati
Swami sab ke pranpati |
Kis vidhi miloon dayamaya
Kis vidhi miloon dayamaya
Tumko main kumati
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Deen Bandhu dukh harta
Thakur tum mere
Swami rakshak tum mere |
Apne hath uthao
Apni sharan lagao
Dawar pada main tere
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Vishay vikar mitao
Paap haro deva
Swami paap haro deva |
Shraddha bhakti badhao
Shraddha bhakti badhao
Santan ki seva
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Om Jai Jagdish Hare
Swami jai jagdish hare
Bhakta janon ke sankat
Daas janon ke sankat
Shan me door kare