Annapurna Mata Chalisa Lyrics: अन्नपूर्णा चालीसा पाठ

अन्नपूर्णा चालीसा हिन्दू धर्म की ही एक मान्य देवी अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| यह माता अन्नपूर्णा माँ जगदम्बा का ही रूप मानी जाती है| हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि माता जगदम्बा के रूप (अन्नपूर्णा माता) के कारण ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भरण पोषण होता है| अन्नपूर्णा शब्द का अर्थ है – अन्न की अधिष्ठात्री देवी यानी अन्न प्रदान करने वाली| माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अन्नपूर्णा चालीसा का पूर्ण भक्ति भाव से जाप करता है| उस व्यक्ति पर हमेशा ही माता अन्नपूर्णा की कृपा बना रहती है| तो आइये जानते है माँ अन्नपूर्णा चालीसा के लिरिक्स के बारे में|

अन्नपूर्णा चालीसा

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अन्नपूर्णा माता चालीसा पाठ | Annapurna Mata Chalisa Lyrics In Hindi

|| अन्नपूर्णा चालीसा ||

|| दोहा ||

विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय ।
अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय ।

|| चौपाई ||

नित्य आनंद करिणी माता,
वर अरु अभय भाव प्रख्याता ॥

जय ! सौंदर्य सिंधु जग जननी,
अखिल पाप हर भव-भय-हरनी ॥

श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि,
संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि ॥

काशी पुराधीश्वरी माता,
माहेश्वरी सकल जग त्राता ॥

वृषभारुढ़ नाम रुद्राणी,
विश्व विहारिणि जय ! कल्याणी ॥

पतिदेवता सुतीत शिरोमणि,
पदवी प्राप्त कीन्ह गिरी नंदिनि ॥

पति विछोह दुःख सहि नहिं पावा,
योग अग्नि तब बदन जरावा ॥

देह तजत शिव चरण सनेहू,
राखेहु जात हिमगिरि गेहू ॥

प्रकटी गिरिजा नाम धरायो,
अति आनंद भवन मँह छायो ॥

नारद ने तब तोहिं भरमायहु,
ब्याह करन हित पाठ पढ़ायहु ॥ 10 ॥

ब्रहमा वरुण कुबेर गनाये,
देवराज आदिक कहि गाये ॥

सब देवन को सुजस बखानी,
मति पलटन की मन मँह ठानी ॥

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या,
कीहनी सिद्ध हिमाचल कन्या ॥

निज कौ तब नारद घबराये,
तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये ॥

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ,
संत बचन तुम सत्य परेखेहु ॥

गगनगिरा सुनि टरी न टारे,
ब्रहां तब तुव पास पधारे ॥

कहेउ पुत्रि वर माँगु अनूपा,
देहुँ आज तुव मति अनुरुपा ॥

तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी,
कष्ट उठायहु अति सुकुमारी ॥

अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों,
है सौगंध नहीं छल तोसों ॥

करत वेद विद ब्रहमा जानहु,
वचन मोर यह सांचा मानहु ॥ 20 ॥

तजि संकोच कहहु निज इच्छा,
देहौं मैं मनमानी भिक्षा ॥

सुनि ब्रहमा की मधुरी बानी,
मुख सों कछु मुसुकाय भवानी ॥

बोली तुम का कहहु विधाता,
तुम तो जगके स्रष्टाधाता ॥

मम कामना गुप्त नहिं तोंसों,
कहवावा चाहहु का मोंसों ॥

दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा,
शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा ॥

सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये,
कहि तथास्तु विधि धाम सिधाये ॥

तब गिरिजा शंकर तव भयऊ,
फल कामना संशयो गयऊ ॥

चन्द्रकोटि रवि कोटि प्रकाशा,
तब आनन महँ करत निवासा ॥

माला पुस्तक अंकुश सोहै,
कर मँह अपर पाश मन मोहै ॥

अन्न्पूर्णे ! सदापूर्णे,
अज अनवघ अनंत पूर्णे ॥ 30 ॥

कृपा सागरी क्षेमंकरि माँ,
भव विभूति आनंद भरी माँ ॥

कमल विलोचन विलसित भाले,
देवि कालिके चण्डि कराले ॥

तुम कैलास मांहि है गिरिजा,
विलसी आनंद साथ सिंधुजा ॥

स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी,
मर्त्य लोक लक्ष्मी पदपायी ॥

विलसी सब मँह सर्व सरुपा,
सेवत तोहिं अमर पुर भूपा ॥

जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा,
फल पाइंहहि शुभ साखी ईसा ॥

प्रात समय जो जन मन लायो,
पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अघिकायो ॥

स्त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत,
परमैश्रवर्य लाभ लहि अद्भुत ॥

राज विमुख को राज दिवावै,
जस तेरो जन सुजस बढ़ावै ॥

पाठ महा मुद मंगल दाता,
भक्त मनोवांछित निधि पाता ॥ 40 ॥

॥ दोहा ॥

जो यह चालीसा सुभग,
पढ़ि नावैंगे माथ ।
तिनके कारज सिद्ध सब,
साखी काशी नाथ ॥

अन्नपूर्णा चालीसा

Annapurna Chalisa Lyrics In English | नित्य आनंद करिणी माता

|| Annapurna Chalisa ||

|| Doha ||

Vishweshwar padpadam ki raj Nij sheesh Lagai.
Annapurne, taw Suyash Barnaun kavi matilay

|| Chaupai ||

Nitya aanand karini mata,
Var aru abhay bhav prakhyata.

Jai! Saundarya sindhu jag janani,
Akhil paap har bhav-bhay-harani.

Shwet badan par shwet basan puni,
Santan tuv pad sevat rishi-muni.

Kashi Puradhishwari mata,
Maheshwari sakal jag trata.

Vrishabharudh naam Rudrani,
Vishwa viharini Jai! Kalyani.

Pati devata sutiit shiromani,
Padvi praapt kinha Giri Nandini.

Pati vichoh dukh sahi nahi paava,
Yog agni tab badan jaraava.

Deh tajat Shiva charan snehu,
Rakhehu jaat Himagiri gehu.

Prakati Girija naam dharayo,
Ati aanand bhavan man me chhaya.

Narad ne tab toh bharamaaya,
Byah karan hit path padhaya.

Brahma Varun Kubera ganaaye,
Devaraj aadik kahi gaaye.

Sab devan ko sujas bakhaani,
Mati palatan ki man man me thaani.

Achal rahi tum pran par dhanya,
Kahi ni Siddh Himachal kanya.

Nij ko tab Narad ghabraaye,
Tab pran pooran mantra padhaaye.

Karan hetu tap toh upadeshau,
Sant bachan tum satya parekheu.

Gaganagira suni tari na taare,
Brahma tab tuv paas padhaare.

Kaheu putri var maangu Anupa,
Dehu aaj tuv mati anurupa.

Tum tap kiin alaukik bhari,
Kasht uthaayahu ati sukumari.

Ab sandeh chhadi kachu moso,
Hai saugandh nahi chhal toso.

Karat ved vid Brahma jaanahu,
Vachan mor yeh saancha maanahu.

Taji sankoch kahaahu nij ichha,
Dehau main manmaani bhiksha.

Suni Brahma ki madhuri baani,
Mukh son kachu musukay Bhavani.

Boli tum ka kaha ho vidhaata,
Tum to jag ke srashtadhata.

Mam kaamna gupt nahi toso,
Kahawa chaahu ka moso.

Daksh yagya manh marti baara,
Shambhunath puni hohin humara.

So ab milahin mohin man bhaye,
Kahi tathaastu vidhi dhaam sidhaaye.

Tab Girija Shankar tav bhayau,
Phal kaamna sanshayo gayau.

Chandrakoti Ravi koti prakaasha,
Tab aanan man karat nivaasa.

Maala pustak ankush sohai,
Kar manh apar paash man mohai.

Annapurne! Sadaapurne,
Aja Anagh Anant Poorn.

Kripa saagari Kshemkari Ma,
Bhav vibhuti aanand bhari ma.

Kamal vilochan vilasit bhaale,
Devi Kaalike Chandike Karaale.

Tum Kailas maahi hai Girija,
Vilasi aanand saath Sindhuja.

Swarg Mahalakshmi kahalaayi,
Martya lok Laxmi pad paayi.

Vilasi sab manh sarv roopa,
Sevat tohi amar pur bhoopa.

Jo padhihin yeh tav chaaleesa,
Phal paaihin shubh saakhi Eesa.

Pratah samay jo jan man laayo,
Padhihin bhakti suruchi adhikaayo.

Stri kalatr pati mitra putra yut,
Parmaishwarya labh lahi adbhut.

Raj vimukh ko raj divaave,
Jas tero jan sujas badhaave.

Paath maha mud mangal daata,
Bhakt manovanchhit nidhi paata.

|| Doha ||

Jo yeh chaaleesa subhag,
Padhi naavein maath.
Tinke kaaraj siddh sab,
Saakhi Kaashi Nath

Jayati Jay Jay Bajrang Bala: सालासर बालाजी की आरती

सालासर बालाजी की आरती का जाप करने बालाजी अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होता है| भगवान हनुमान जी को ही सालासर बालाजी के नाम से जाना जाता है| यह बालाजी का मंदिर राजस्थान के सालासर नामक गाँव में स्थित है| माना जाता है कि इस मंदिर में बालाजी की प्रतिमा दाढ़ी – मुछों के साथ स्थित है| कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी ने मोहनदास को इसी रूप में दर्शन प्रदान किये थे| यह मंदिर राजस्थान का सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है| इस मंदिर में भक्तों के द्वारा विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किये जाते है तो आइये जानते है सालासर बालाजी की आरती के बारे में|

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सालासर बालाजी की आरती

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सालासर बालाजी की आरती हिंदी में | Salasar Balaji Aarti Lyrics in Hindi

|| सालासर बालाजी आरती ||

जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन ख़ुशी मन में ।

प्रकट भय सुर वानर तन में, विदित यस विक्रम त्रिभुवन में ॥

दूध पीवत स्तन मात के, नजर गई नभ ओर ।

तब जननी की गोद से पहुंचे, उदयाचल पर भोर ॥

॥ अरुण फल लखि रवि मुख डाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

तिमिर भूमण्डल में छाई, चिबुक पर इन्द्र बज बाए ।

तभी से हनुमत कहलाए, द्वय हनुमान नाम पाये ॥

उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास ।

इधर हो गयो अन्धकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास ॥

॥ भये ब्रह्मादिक बेहाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

देव सब आये तुम्हारे आगे, सकल मिल विनय करन लागे ।

पवन कू भी लाए सागे, क्रोध सब पवन तना भागे ॥

सभी देवता वर दियो, अरज करी कर जोड़ ।

सुनके सबकी अरज गरज, लखि दिया रवि को छोड़ ॥

॥ हो गया जगमें उजियाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

रहे सुग्रीव पास जाई, आ गये बनमें रघुराई ।

हरिरावणसीतामाई, विकलफिरतेदोनों भाई ॥

विप्ररूप धरि राम को, कहा आप सब हाल ।

कपि पति से करवाई मित्रता, मार दिया कपि बाल ॥

॥ दुःख सुग्रीव तना टाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

आज्ञा ले रघुपति की धाया, लंक में सिन्धु लाँघ आया ।

हाल सीता का लख पाया, मुद्रिका दे बनफल खाया ॥

बन विध्वंस दशकंध सुत, वध कर लंक जलाया।

चूड़ामणि सन्देश त्रिया का, दिया राम को आय ॥

॥ हुए खुश त्रिभुवन भूपाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

जोड़ कपि दल रघुवर चाला, कटक हित सिन्धु बांध डाला ।

युद्ध रच दीन्हा विकराला, कियो राक्षस कुल पैमाला ॥

लक्ष्मण को शक्ति लगी, लायौ गिरी उठाय।

देई संजीवन लखन जियाये, रघुवर हर्ष सवाय ॥

॥ गरब सब रावन का गाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

रची अहिरावन ने माया, सोवते राम लखन लाया ।

बने वहाँ देवी की काया, करने को अपना चित चाया ॥

अहिरावन रावन हत्यौ, फेर हाथ को हाथ ।

मन्त्र विभीषण पाय आप को, हो गयो लंका नाथ ॥

॥ खुल गया करमा का ताला, कृपा कर सालासर वाला ॥

अयोध्या राम राज्य कीना, आपको दास बना लीना ।

अतुल बल घृत सिन्दूर दीना, लसत तन रूप रंग भीना ॥

चिरंजीव प्रभु ने कियो, जग में दियो पुजाय।

जो कोई निश्चय कर के ध्यावै, ताकी करो सहाय ॥

॥ कष्ट सब भक्तन का टाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

भक्तजन चरण कमल सेवे, जात आय सालासर देवे ।

ध्वजा नारियल भोग देवे, मनोरथ सिद्धि कर लेवे ॥

कारज सारो भक्त के, सदा करो कल्यान ।

विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के, बालकृष्ण धर ध्यान ॥

॥ नाम की जपे सदा माला, कृपा कर सालासर वाला ॥

सालासर बालाजी की आरती

Salasar Balaji Aarti Lyrics In English | जयति जय जय बजरंग बाला

|| Salasar Balaji Aarti ||

Jai Jai Bajrang Bala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Chait Sudhi Poonam Ko Janme, Anjani Pavan Khushi Man Mein।

Prakat Bhay Sur Vanar Tan Mein, Vidit Yash Vikram Tribhuvan Mein॥

Doodh Peevat Stan Maat Ke, Nazar Gayi Nabhoor।

Tab Janani Ki God Se Pahunchhe, Udayachal Par Bhor॥

॥ Arun Phal Lakhi Ravi Mukh Daala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Timir Bhoomandal Mein Chhaai, Chibuk Par Indra Bajaye।

Tabhi Se Hanumat Kahlaaye, Dvay Hanuman Naam Paaye॥

Us Avsar Mein Ruk Gayo, Pavan Sarv Unchaas।

Idhar Ho Gayo Andhkaar, Ut Rukyo Vishv Ko Shwaas॥

॥ Bhaye Brahmaadik Behaala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Dev Sab Aaye Tumhare Aage, Sakal Mil Vinay Karan Lage।

Pavan Ko Bhi Laaye Saage, Krodh Sab Pavan Tana Bhage॥

Sabhi Devta Var Diyo, Arj Kari Kar Jod।

Sunke Sabki Arj Garj, Lakhi Diya Ravi Ko Chhod॥

॥ Ho Gaya Jag Mein Ujiyala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Rahe Sugreev Paas Jaai, Aa Gaye Ban Mein Raghu Rai।

Hari Raavan Sitaamai, Vikal Firte Dono Bhai॥

Vipraroop Dhari Ram Ko, Kaha Aap Sab Haal।

Kapi Pati Se Karvai Mitra, Maar Diya Kapi Baal॥

॥ Dukh Sugreev Tana Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Aajna Le Raghu Pati Ki Dhaaya, Lank Mein Sindhu Laangh Aaya।

Haal Sita Ka Lakh Paaya, Mudrika De Banphal Khaya॥

Ban Vidhvans Dashakandh Sut, Vadha Kar Lank Jalaaya।

Choodamani Sandesh Triya Ka, Diya Ram Ko Aaya॥

॥ Huye Khush Tribhuvan Bhupala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Jod Kapi Dal Raghuvar Chala, Katak Hit Sindhu Baandh Daala।

Yudh Rach Diinha Vikrala, Kiyo Raakshas Kul Paimaala॥

Lakshman Ko Shakti Lagi, Laayo Giri Uthaaya।

Dei Sanjeevan Lakhan Jiye, Raghuvar Harsha Svaaya॥

॥ Garb Sab Raavan Ka Gaala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Rachi Ahiravan Ne Maya, Sovate Ram Lakhan Laaya।

Bane Waha Devi Ki Kaaya, Karne Ko Apna Chit Chaaya॥

Ahiravan Raavan Hatyau, Pher Haath Ko Haath।

Mantra Vibhishan Paaye Aap Ko, Ho Gayo Lankanaath॥

॥ Khul Gaya Karama Ka Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Ayodhya Ram Rajya Keena, Aapko Daas Bana Leena।

Atul Bal Ghrit Sindoor Deena, Lasat Tan Roop Rang Bheena॥

Chiranjivi Prabhu Ne Kiyo, Jag Mein Diyo Pujaya।

Jo Koi Nishchay Kar Ke Dhyaave, Taaki Karo Sahaay॥

॥ Kasht Sab Bhaktan Ka Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Bhaktjan Charan Kamal Seve, Jaat Aaya Salasar Deve।

Dhwaja Nariyal Bhog Deve, Manorath Siddhi Kar Leve॥

Kaary Saro Bhakt Ke, Sada Karo Kalyan।

Vipra Nivaasi Lakshman Gad Ke, Balakrishna Dhar Dhyaan॥

॥ Naam Ki Jape Sada Mala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Aarti Harji Nandan Ki Lyrics: दादाजी की आरती

दादाजी की आरती का जाप प्रतिदिन लाखों भक्तों के द्वारा किया जाता है| दादाजी हिन्दू धर्म के दाधिच समाज में पूजे जाने वाले बहुत ही प्रसिद्ध देवता है| माना जाता है कि दादाजी हनुमान जी के बहुत ही बड़े भक्त थे| दादाजी का जन्म राजस्थान के चुरू जिले में दाधिच ब्राह्मण श्री हरजीराम जी के घर में हुआ था| इनका नाम अखाराम जी था| कहा जाता था कि इनके चिमटे के स्पर्श करने तथा इनकी धुनी की भभूती मिलाने से जो कलवानी तैयार होती है| उसे अमृत के समान माना जाता है| इस दादाजी की आरती का जाप करने दादाजी अखाराम जी अपने भक्तों से बहुत प्रसन्न होते है तो आइये पढ़ते है दादाजी अखाराम जी यह पवित्र आरती |

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दादाजी की आरती

दादाजी की आरती | Dadaji Aarti Lyrics In Hindi

|| दादाजी की आरती ||

आरती हरजी नंदन की,
दधीचि कुल गौरव संतन की ||

गले में तुलसी की माला |
चिमटा रतन जडित वाला |
भाल पर तिलक गंध आला |
खडाऊ चन्दन, काटते फंदन, करे हम वंदन,
पितामह कष्टनिकंदन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||1 ||

रेशमी पीताम्बर सोहे |
इंदु सम मुख मंडल मोहे |
कमल सम नेत्र धनुष भोंहे |
प्रभु का भजन, ध्यान में मगन, मरुत सुत लगन,
पवन सुत किंकर संतन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||2 ||

शोभित ब्रह्मसूत्र दाता |
नाम अखाराम सुखदाता |
स्मरण से नवनिधिया पाता |
जीवू के भ्रात, सुमिरते प्रात, आप पितुमात,
तुम्हारे सेवक भक्तन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||3 ||

परसाने सिगड़ी ज्योत दादा |
कटे विष भुत प्रेत व्याधा |
कलवाणी अमृत जो पाता |
तांती है नीकी, बभूति अमीसी, प्राण में रमीसी,
काटती भवभय बंघन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||4 ||

पंचमी कृष्ण पक्ष सेवे |
मिठाई श्री फल ध्वजा मेवे |
झडूला युगल जात देवे |
हुकम का तनय, चंपा करे विनय, पौत्र की सुनिए,
श्री राम के पूजन वंदन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||5 ||

दादाजी की आरती

Dadaji Aarti Lyrics In English | आरती हरजी नंदन की

|| Dadaji Ki Aarti ||

Aarti Harji Nandan Ki,
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||

Gale Mein Tulsi Ki Mala |
Chimta Ratan Jaddit Wala |
Bhaal Par Tilak Gandh Ala |
Khadau Chandan, Kaatte Fandan, Kare Hum Vandana,
Pitamah Kasht Nikandan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||1 ||

Reshami Peetambar Sohe |
Indu Sam Mukh Mandal Mohe |
Kamal Sam Netra Dhanush Bhonkhe |
Prabhu Ka Bhajan, Dhyan Mein Magn, Marut Sut Lagan,
Pavan Sut Kinkar Santan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||2 ||

Shobhit Brahmasutra Data |
Naam Akhaaram Sukhdata |
Smran Se Navanidhiya Pata |
Jeevu Ke Bhrat, Sumirate Praat, Aap Pitumaat,
Tumhare Sevak Bhaktan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||3 ||

Parasane Sigri Jyot Dada |
Kate Vish Bhoot Pret Vyadha |
Kalvani Amrit Jo Pata |
Taanti Hai Neeki, Babhooti Ameesi, Pran Mein Ramesi,
Kaatti Bhavbhay Banghan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||4 ||

Panchami Krishna Paksha Seve |
Mithai Shri Phal Dhvaja Meve |
Jhadoola Yugala Jaat Deve |
Hukam Ka Tanay, Champa Kare Vinay, Pautr Ki Suniye,
Shri Ram Ke Pujan Vandana Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||5 ||

Gayatri Mata Ji Ki Aarti Lyrics : गायत्री माता आरती

गायत्री माता आरती का जाप ज्ञान की देवी माता गायत्री को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गायत्री देवी एक ऐसी शक्ति है जिसकी कृपा यदि किसी मनुष्य के ऊपर हो तो वह अपनी जिंदगी में हमेशा सफलता को प्राप्त करता है| इस गायत्री माता चालीसा का जाप करने से मनुष्य को सद्बुद्धि की प्रेरणा मिलती है| जो भी मनुष्य गायत्री माता की शरण में आता है| उस व्यक्ति के जीवन में सदैव के लिए अंधकार मिट जाता है| आइये जानते है गायत्री माता आरती के बारे में |

गायत्री माता आरती

इसके आलवा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे नामकरण पूजा (Namkaran Puja), सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), तथा ऑफिस उद्घाटन पूजा (Office Opening Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| इसी के साथ हमसे जुड़ने के लिए आप हमारे Whatsapp Channel – “Hindu Temples, Puja and Rituals” को भी Follow कर सकते है|

माँ गायत्री जी की आरती | Gayatri Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| गायत्री माता आरती ||

जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक क‌र्त्री ।
दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।
भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।
अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।
सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।
जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।
विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥

गायत्री माता आरती

Gayatri Mata Aarti Lyrics In English | जयति जय गायत्री माता

|| Gayatri Mata Aarti ||

Jayati Jay Gayatri Mata,
Jayati Jay Gayatri Mata.
Sat marg par hamein chalao,
Jo hai sukhadata.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Aadi Shakti tum alakh niranjan jagpalak kartri,
Dukh shok, bhay, klesh kalash daridra dainya hatri.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Brahm rupini, pranaat paalin jagat dhatra ambe,
Bhav bhayahari, jan-hitkari, sukhda jagadambe.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Bhay haarini, bhavtarini, anagheaj anand rashi,
Avikari, akhahari, avichalit, amale, avinashi.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Kaamdhenu satchit anand Jay Ganga Gita,
Savita ki shasvati, shakti tum savitri sita.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Ṛig, Yaju saam, Atharva pranyani, pranav mahamahime,
kundalini sahastra sudhuman shobha guna garime.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Swaha, swadha, shachi brahmani radha rudrani,
Jay satrupa, vaani, vidhya, kamla kalyani.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Janani ham hain din-hin, dukh-daridra ke ghere,
Yadapi kutila, kapati kaput tau balak hain tere.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Snehasani karunamay mata charan sharan dije,
Vilakh rahe ham shisu sut tere daya drishti kije.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Kam, krodh, mad, lobh, dambha, durbhav dvesha hariye,
Suddha buddhi nishpap hriday mana ko pavitra kariye.

Jayati Jay Gayatri Mata,
Jayati Jay Gayatri Mata.
Sat marg par hamein chalao,
Jo hai sukhdata.

Narmada Aarti Lyrics : नर्मदा आरती

नर्मदा आरती का जाप करने से माता नर्मदा अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होती है| नर्मदा नदी मध्यप्रदेश राज्य की सबसे पवित्र नदी के रूप में जाना जाता है| हिन्दू धर्म के लोगो के द्वारा इस नदी को पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा जाता है तथा नर्मदा चालीसा का भी जाप किया जाता है| जिससे माता नर्मदा आशीर्वाद उन्हें मिल सके| मान्यताओ के अनुसार सम्पूर्ण भारत में ऐसी बहुत सी धार्मिक नदियाँ है लेकिन सबसे नदी गंगा व नर्मदा को ही माना जाता है| आइये जानते है इस नर्मदा आरती के लिरिक्स के बारे में |

नर्मदा आरती

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नर्मदा जी की आरती | Narmada Aarti Lyrics In Hindi

|| नर्मदा आरती ||

ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी नारद सारद तुम वरदायक,
अभिनव पदण्डी ।
सुर नर मुनि जन सेवत,
सुर नर मुनि…
शारद पदवाचन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी धूमक वाहन राजत,
वीणा वाद्यन्ती।
झुमकत-झुमकत-झुमकत,
झननन झमकत रमती राजन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी बाजत ताल मृदंगा,
सुर मण्डल रमती ।
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,
तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत,
निशदिन आनन्दी ।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा
शंकर तुम भट मेटन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैयाजी को कंचन थार विराजत,
अगर कपूर बाती ।
अमर कंठ में विराजत,
घाटन घाट बिराजत,
कोटि रतन ज्योति ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

मैयाजी की आरती,
निशदिन पढ़ गा‍वरि,
हो रेवा जुग-जुग नरगावे,
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हर‍ि नंद स्वामी मनवांछित पावे।

ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥

नर्मदा आरती

Narmada Aarti Lyrics In English | ॐ जय जगदानन्दी

|| Narmada Aarti ||

Om Jay Jagdanandi,
Maiya Jay Anand Kandi.
Brahma Harihar Shankar, Reva
Shiv Hari Shankar, Rudrao Palanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Narad Sarad Tum Varadayak,
Abhinav Padandi.
Sur Nar Muni Jan Sevat,
Sur Nar Muni…
Sharad Padavachanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Dhoomak Vahan Rajat,
Veena Vadyanti.
Jhumakat-Jhumakat-Jhumakat,
Jhannan Jhamakat Ramati Rajanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Bajat Taal Mridanga,
Sur Mandal Ramati.
Toditan-Toditan-Toditan,
Turadan Ramati Suravanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Sakal Bhuvan Par Aap Virajat,
Nishadin Anandi.
Gavat Ganga Shankar, Sevat Reva
Shankar Tum Bhat Metanti.
॥ Om Jay Jagdanandi…॥

Maiyaji Ko Kanchan Thar Virajat,
Agar Kapoor Bati.
Amar Kanth Mein Virajat,
Ghatan Ghat Birajat,
Koti Ratan Jyoti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Maiyaji Ki Aarti,
Nishadin Padh Gavari,
Ho Reva Jug-Jug Nargaave,
Bhajat Shivanand Swami
Japat Hari Nand Swami Manvaanchit Paave.

Om Jay Jagdanandi,
Maiya Jay Anand Kandi.
Brahma Harihar Shankar, Reva
Shiv Hari Shankar, Rudrao Palanti

Shri Chitragupt Ji Ki Aarti : श्री चित्रगुप्त आरती लिरिक्स

चित्रगुप्त जी की आरती का जाप भगवान चित्रगुप्त को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है| भगवान चित्रगुप्त जी को पुण्य तथा पाप के लेखक के रूप में भी जाना जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा भाई दूज के दिन पंचामृत स्नान, शृंगार, हवन तथा आरती के साथ की जाती है| माना जाता कि यदि आपके पास भगवान चित्रगुप्त जी की कोई प्रतिमा नहीं हो तो आप कलश को ही भगवान चित्रगुप्त का स्वरुप मानकर उसकी पूजा कर सकते है| भगवान चित्रगुप्त की पूजा तथा आरती करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है|

चित्रगुप्त जी की आरती

इसके आलवा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे गृह प्रवेश पूजा (Griha Pravesh Puja), रुद्राभिषेक पूजा (Rudrabhishek Puja), तथा ऑफिस उद्घाटन पूजा (Office Opening Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| इसी के साथ हमसे जुड़ने के लिए आप हमारे WhatsApp Channel – “Hindu Temples, Puja and Rituals” को भी Follow कर सकते है

चित्रगुप्त जी की आरती | Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi

|| श्री चित्रगुप्त आरती ||

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फलको पूर्ण करे॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,
सन्तनसुखदायी ।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवनयश छायी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बरराजै ।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वामअंग साजै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक,
प्रभुअंतर्यामी ।
सृष्टि सम्हारन, जन दु:ख हारन,
प्रकटभये स्वामी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कलम, दवात, शंख, पत्रिका,
करमें अति सोहै ।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवनमन मोहै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला,
ब्रम्हाहर्षाये ।
कोटि कोटि देवता तुम्हारे,
चरणनमें धाये ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

नृप सुदास अरू भीष्म पितामह,
यादतुम्हें कीन्हा ।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं,
इच्छितफल दीन्हा ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

दारा, सुत, भगिनी,
सबअपने स्वास्थ के कर्ता ।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी,
तुमतज मैं भर्ता ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरणगहूँ किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
आसकरूँ जिसकी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं ।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी,
पापपुण्य लिखते ।
‘नानक’ शरण तिहारे,
आसन दूजी करते ॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फलको पूर्ण करे ॥

चित्रगुप्त जी की आरती

Shri Chitragupt Aarti Lyrics In English | ॐ जय चित्रगुप्त हरे

|| Shri Chitragupt Aarti ||

Om Jai Chitragupta Hare,
Swamiji Jai Chitragupta Hare.
Bhakto ke Ichhit,
Falko poorn kare.

Vighna vinashak mangalkarta,
Santan sukhadayi.
Bhakton ke pratipalak,
Tribhuvanayash chhayi.
Om Jai Chitragupta Hare…

Roop chaturbhuj, shyamal moorti,
Peetambararajai.
Maa Iravati, Dakshina,
Vamang sajai.
Om Jai Chitragupta Hare…

Kasht nivarak, dushth sanharak,
Prabhuantaryami.
Srishti samharan, jan du:kha haran,
Prakatbhaye Swami.
Om Jai Chitragupta Hare…

Kalam, davat, shankh, patrika,
Karmen ati sohai.
Vaijayanti vanamala,
Tribhuvanaman mohai.
Om Jai Chitragupta Hare…

Vishwa nyay ka kary Sambhala,
Brahmarshaye.
Koti koti devta tumhare,
Charan mein dhaye.
Om Jai Chitragupta Hare…

Nrip Sudas aur Bheeshm Pitamah,
Yad tumhein kinha.
Veg, vilamb na kinha,
Ichhit phal diya.
Om Jai Chitragupta Hare…

Dara, sut, bhagini,
Sab apne swasth ke karta.
Jao kahan sharan mein kiski,
Tumtaj main bharta.
Om Jai Chitragupta Hare…

Bandhu, pita tum Swami,
Sharan gahun kiski.
Tum bin aur na duja,
Aaskarun jiski.
Om Jai Chitragupta Hare…

Jo jan Chitragupta Ji ki aarti,
Prem sahit gaave.
Chaurasi se nischit chhute,
Ichhit phal paave.
Om Jai Chitragupta Hare…

Nyayadhish Bankunth nivasi,
Paap-punya likhte.
‘Nanak’ sharan tihare,
Aasan dooji karte.

Om Jai Chitragupta Hare,
Swamiji Jai Chitragupta Hare.
Bhakto ke ichhit,
Falko poorn kare

Annapurna Mata Aarti Lyrics : अन्नपूर्णा आरती

अन्नपूर्णा आरती हिन्दू धर्म की ही एक मान्य देवी अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है| यह माता अन्नपूर्णा माँ जगदम्बा का ही रूप मानी जाती है| हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि माता जगदम्बा के रूप (अन्नपूर्णा माता) के कारण ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भरण पोषण होता है| अन्नपूर्णा शब्द का अर्थ है – अन्न की अधिष्ठात्री देवी यानी अन्न प्रदान करने वाली| माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अन्नपूर्णा आरती का पूर्ण भक्ति भाव से जाप करता है| उस व्यक्ति पर हमेशा ही माता अन्नपूर्णा की कृपा बना रहती है| तो आइये जानते है माँ अन्नपूर्णा आरती के लिरिक्स के बारे में|

अन्नपूर्णा आरती

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माँ अन्नपूर्णा आरती लिरिक्स | Annapurna Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| अन्नपूर्णा आरती ||

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
कहां उसे विश्राम ।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
लेत होत सब काम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
कालान्तर तक नाम ।
सुर सुरों की रचना करती,
कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
चारु चक्रधर श्याम ।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
शोभा लखहि ललाम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

देवि देव! दयनीय दशा में,
दया-दया तब नाम ।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
शरण रूप तब धाम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
श्री क्लीं कमला काम ।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
वर दे तू निष्काम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥

अन्नपूर्णा आरती

Annapurna Aarti Lyrics In English | बारम्बार प्रणाम

|| Annapurna Aarti ||

Baaram baaram pranam,
Maiya baaram baaram pranam.

Jo nahi Dhyaave tumhe Ambike,
Kahaan use vishram.
Annapurna Devi naam tiharo,
Let hot sab kaam.

Baaram baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Pralay yugaantar aur janmaantar,
Kaalantar tak naam.
Sur suro ki rachna karti,
Kahaan Krishna kahaan Ram.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Chumahi charan chatur chaturaanan,
Charu chakradhar shyam.
Chandrachood chandraanan chakar,
Shobha lakhahi lalaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Devi Dev! Dayaniya dasha mein,
Daya-daya tab naam.
Trahitrahi sharanagat vatsal,
Sharan roop tab dhaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Shreem, Hreem Shradhaa Shree A Vidya,
Shree Kleem Kamala Kaam.
Kaanti, Bhraantimayi, Kaanti Shaantimayi,
Var de tu nishkaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

|| Mata Annapurna ki jai ||

सूर्य देव की आरती : Om Jai Surya Bhagwan

सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का जाप भगवान सूर्य को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म में भगवान सूर्य देव को रविवार का दिन समर्पित किया गया है| इस सूर्य देव की पूजा करके सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का जाप करना सूर्य भगवान अर्घ्य देना बहुत ही शुभ माना जाता है| सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] करने से जातक को कई प्रकार के लाभ होते है| सूर्य देव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है| इसलिए जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य बलवान होता है| उस व्यक्ति के सभी बिगड़े काम सुधरने लगते है व उसके उन्नति के सभी द्वार खुलने लगते है|

सूर्य देव की आरती

सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का पूर्ण श्रद्धा के साथ जाप करने से आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है| सूर्य देव की पूजा तथा आरती करने से सभी प्रकार की बीमारियों का नाश होता है| सूर्य ग्रह की स्थिति कुंडली में मजबूत होने पर व्यक्ति को नौकरी तथा व्यवसाय में भी सफलता प्राप्त होती है| सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] करने से भक्त का भाग्य उज्जवल होता है| इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव की उपासना तथा आरती करना चाहिए|

यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे शिवपुराण पूजा [Shiv Puran Puja], गृह प्रवेश पूजा [Grah Pravesh Puja], तथा काल सर्प दोष पूजा [Kaal Sarp Dosh Puja] के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| इसी के साथ हमसे जुड़ने के लिए आप हमारे WhatsApp Channel – “Hindu Temples, Puja and Rituals” को भी Follow कर सकते है|

सूर्य देव की आरती | Surya Dev Ki Aarti Lyrics In Hindi

|| सूर्य देव की आरती ||

ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी ॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे ।
तुम हो देव महान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते ॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा ।
करे सब तब गुणगान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में,
हर घर हर आंगन में ।
हो तव महिमा गान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते ॥
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी ।
दे नव जीवनदान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार ।
महिमा तब अपरम्पार ॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते ।
बल बृद्धि और ज्ञान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने ।
तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

पूजन करती दिशाएं,
पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी ।
शुभकारी अंशुमान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान ॥

सूर्य देव की आरती

Surya Dev Ki Aarti Lyrics In English | ॐ जय सूर्य भगवान

|| Surya Dev Ki Aarti ||

Om Jai Surya Bhagwan,
Jai Ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netra swaroopa,
Tum ho trigun swaroopa.
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Saarthi Arun hain Prabhu tum,
Shwet Kamaldhari.
Tum chaar bhujadhari.
Ashwa hain saat tumhare,
Koti kirana pasaare.
Tum ho Dev Mahan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Usha kaal mein jab tum,
Udayachal aate.
Sab tab darshan Paate.
Phailate ujiyara,
Jagata tab jag saara.
Kare sab tab gun gaana.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Sandhya mein Bhuvaneshwar,
Astachal Jaate.
Godhan tab ghar aate.
Godhuli bela mein,
Har ghar har aangan mein.
Ho taw mahima gaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Dev danuj nar naari,
Rishi munivar bhajate.
Aditya hriday japate.
Strot ye mangalkari,
Iski hai rachna nyaari.
De nav Jeevanadaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Tum ho trikaal rachiyata,
Tum jag ke aadhaar.
Mahima tab aparmpaar.
Pranon ka sinchan karke,
Bhakton ko apne dete.
Bal vridhi aur gyaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Bhoochar jal char khechar,
Sab ke ho praan tumhi.
Sab jeevon ke praan tumhi.
Ved puran bakhaane,
Dharm sabhi tumhe maane.
Tum hi sarv shaktimaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Poojan karti dishaayein,
Pooje dash dikpaal.
Tum bhuvanon ke pratipaal.
Rituyen tumhari daasi,
Tum shashwat avinaashi.
Shubhkaari Anshuman.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Om Jai Surya Bhagwan,
Jai Ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netr roop,
Tum ho trigun swaroop.
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan.

Sita Mata Aarti Lyrics : सीता माता आरती

सीता माता आरती का जाप माता जानकी की कृपा पाने तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| माना जाता है कि जानकी माता की पूर्ण श्रद्धा से पूजा – अर्चना करने से सीता माता की अपार कृपा प्राप्त होती है| सीता माता की पूजा करते समय सीता माता आरती का जप करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है| बिना आरती का जाप किये सीता माता की पूजा भी अधूरी मानी जाती है| हिन्दू धर्म में सीता माता को भगवान श्री राम जी धर्मपत्नी के रूप में जाना जाता है|

सीता माता आरती

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सीता माता जी की आरती | Sita Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| सीता माता आरती ||

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सीता माता आरती

Sita Mata Aarti Lyrics In English | आरती श्री जनक दुलारी की

|| Sita Mata Aarti ||

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Jagat Janani Jag Ki Vistarin,
Nitya Satya Saaket Vihaarini,
Param Dayamayi Dinodharini,
Sita Maiya Bhakton Hitkaari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Sati Shromani Pati Hit Kaarini,
Pati Seva Vitta Van Charini,
Pati Hit Pati Viyog Sveekaarini,
Tyag Dharma Moorti Dhari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Vimal Kirti Sab Lokan Chhaai,
Naam Let Pavan Mati Aayi,
Sumirat Kaatat Kasht Dukh Daai,
Sharanagat Jan Bhay Hari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.