Harivarasanam Lyrics In Hindi: हरिवरासनम गीत लिरिक्स

हरिवरासनम एक ऐसा संस्कृत मलयालम शिवाष्टक है जिसे भगवान शिव की स्तुति के लिए गाया जाता है| लेकिन भारत देश के केरल में सबरीमाला श्री धर्म संस्था मंदिर में भगवान अय्यप्पन के लिए इस गीत को लोरी के रूप में गाया जाता है| इस हरिवरासनम गीत (Harivarasanam Lyrics) को पारंपरिक संस्करण तथा दैनिक मंदिर समापन समारोह के दौरान मंदिरों के भीतर मौखिक रूप से बजाया जाता है| यह हरिवरासनम गीत (Harivarasanam Lyrics) सम्पूर्ण दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय हो गया है| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको इस हरिवरासनम गीत (Harivarasanam Lyrics) के लिरिक्स विभिन्न भाषाओँ जैसे हिंदी, अंग्रेजी, मलयालम, तमिल आदि में बताएँगे|

हरिवरासनम गीत

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे खाटू श्याम चालीसा [Khatu Shyam Chalisa], सरस्वती आरती [Saraswati Aarti], या जया एकादशी व्रत कथा [Jaya Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

हरिवरासनम गीत लिरिक्स हिंदी में | Harivarasanam Lyrics in Hindi

|| हरिवरासनम गीत ||

हरिहरात्मज अष्टकम्

हरिवरासनं विश्वमोहनम्
हरिदधीश्वरं आराध्यपादुकम् ।
अरिविमर्दनं नित्यनर्तनम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

शरणकीर्तनं भक्तमानसम्
भरणलोलुपं नर्तनालसम् ।
अरुणभासुरं भूतनायकम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

प्रणयसत्यकं प्राणनायकम्
प्रणतकल्पकं सुप्रभांचितम् ।
प्रणवमंदिरं कीर्तनप्रियम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

तुरगवाहनं सुंदराननम्
वरगदायुधं वेदवर्णितम् ।
गुरुकृपाकरं कीर्तनप्रियम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

त्रिभुवनार्चितं देवतात्मकम्
त्रिनयनप्रभुं दिव्यदेशिकम् ।
त्रिदशपूजितं चिंतितप्रदम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

भवभयापहं भावुकावकम्
भुवनमोहनं भूतिभूषणम् ।
धवलवाहनं दिव्यवारणम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

कलमृदुस्मितं सुंदराननम्
कलभकोमलं गात्रमोहनम् ।
कलभकेसरीवाजिवाहनम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

श्रितजनप्रियं चिंतितप्रदम्
श्रुतिविभूषणं साधुजीवनम् ।
श्रुतिमनोहरं गीतलालसम्
हरिहरात्मजं देवमाश्रये

शरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पा ।
शरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पा ॥

हरिवरासनम गीत

Harivarasanam Lyrics in English | हरिहरात्मज अष्टकम्

|| Harivarasanam Lyrics ||

Hariharamj Ashtakam

Harivarasanam Vishwamohanam
Haridadhishvaram Aaradhyapadukam.
Arivimardanam Nityanartanam
Hariharamj Devamashraye.

Sharanakeertanam Bhaktamansasam
Bharanlolupam Nartanalasam.
Arunabhasuram Bhootanayakam
Hariharamj Devamashraye.

Pranayasatyakam Prannayakam
Pranatakalkam Suprabhamchitam.
Pranavmandiram Keertanpriyam
Hariharamj Devamashraye.

Turagvahanam Sundarananam
Vargadayudham Vedavarnitam.
Gurukripakaram Keertanpriyam
Hariharamj Devamashraye.

Tribhuvanarchitam Devatamakam
Trinayanprabhum Divyadeshikam.
Tridashapoojitam Chintitpradam
Hariharamj Devamashraye.

Bhavabhayapaham Bhavukavakam
Bhuvanmohanam Bhutibhushanam.
Dhavalvahanam Divyavarannam
Hariharamj Devamashraye.

Kalamridusmitam Sundarananam
Kalabhakomalam Gatramohanam.
Kalabhakesarivajivahanam
Hariharamj Devamashraye.

Shritajanpriyam Chintitpradam
Shrutivibhushanam Sadhujivanam.
Shrutimanoharam Geetalalsam
Hariharamj Devamashraye.

Sharanam Ayyappa Swami Sharanam Ayyappa
Sharanam Ayyappa Swami Sharanam Ayyappa

हरिवरासनम गीत

Harivarasanam Lyrics in Malayalam | മലയാളത്തിലെ ഹരിവരാസനം ഗാനത്തിൻ്റെ വരികൾ

|| ഹരിവരാസനം വരികൾ ||

ഹരിഹരാത്മജ അഷ്ടകമ്

ഹരിവരാസനം വിശ്വമോഹനമ്
ഹരിദധീശ്വരം ആരാധ്യപാദുകമ് ।
അരിവിമര്ദനം നിത്യനര്തനമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

ശരണകീര്തനം ഭക്തമാനസമ്
ഭരണലോലുപം നര്തനാലസമ് ।
അരുണഭാസുരം ഭൂതനായകമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

പ്രണയസത്യകം പ്രാണനായകമ്
പ്രണതകല്പകം സുപ്രഭാംചിതമ് ।
പ്രണവമംദിരം കീര്തനപ്രിയമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

തുരഗവാഹനം സുംദരാനനമ്
വരഗദായുധം വേദവര്ണിതമ് ।
ഗുരുകൃപാകരം കീര്തനപ്രിയമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

ത്രിഭുവനാര്ചിതം ദേവതാത്മകമ്
ത്രിനയനപ്രഭും ദിവ്യദേശികമ് ।
ത്രിദശപൂജിതം ചിംതിതപ്രദമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

ഭവഭയാപഹം ഭാവുകാവകമ്
ഭുവനമോഹനം ഭൂതിഭൂഷണമ് ।
ധവലവാഹനം ദിവ്യവാരണമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

കലമൃദുസ്മിതം സുംദരാനനമ്
കലഭകോമലം ഗാത്രമോഹനമ് ।
കലഭകേസരീവാജിവാഹനമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

ശ്രിതജനപ്രിയം ചിംതിതപ്രദമ്
ശ്രുതിവിഭൂഷണം സാധുജീവനമ് ।
ശ്രുതിമനോഹരം ഗീതലാലസമ്
ഹരിഹരാത്മജം ദേവമാശ്രയേ

ശരണം അയ്യപ്പാ സ്വാമി ശരണം അയ്യപ്പാ ।
ശരണം അയ്യപ്പാ സ്വാമി ശരണം അയ്യപ്പാ ॥

हरिवरासनम गीत

Harivarasanam Lyrics in Tamil | ஹரிஹராத்மஜ அஷ்டகம்

|| ஹரிவராசனம் பாடல் வரிகள் ||

ஹரிவராஸனம் விஶ்வமோஹனம்
ஹரித³தீ⁴ஶ்வரம் ஆராத்⁴யபாது³கம் ।
அரிவிமர்த³னம் நித்யனர்தனம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

ஶரணகீர்தனம் ப⁴க்தமானஸம்
ப⁴ரணலோலுபம் நர்தனாலஸம் ।
அருணபா⁴ஸுரம் பூ⁴தனாயகம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

ப்ரணயஸத்யகம் ப்ராணனாயகம்
ப்ரணதகல்பகம் ஸுப்ரபா⁴ஞ்சிதம் ।
ப்ரணவமன்தி³ரம் கீர்தனப்ரியம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

துரக³வாஹனம் ஸுன்த³ரானநம்
வரக³தா³யுத⁴ம் வேத³வர்ணிதம் ।
கு³ருக்ருபாகரம் கீர்தனப்ரியம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

த்ரிபு⁴வனார்சிதம் தே³வதாத்மகம்
த்ரினயனப்ரபு⁴ம் தி³வ்யதே³ஶிகம் ।
த்ரித³ஶபூஜிதம் சின்திதப்ரத³ம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

ப⁴வப⁴யாபஹம் பா⁴வுகாவகம்
பு⁴வனமோஹனம் பூ⁴திபூ⁴ஷணம் ।
த⁴வல்த³வாஹனம் தி³வ்யவாரணம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

கல்த³ம்ருது³ஸ்மிதம் ஸுன்த³ரானநம்
கல்த³ப⁴கோமலம் கா³த்ரமோஹனம் ।
கல்த³ப⁴கேஸரீவாஜிவாஹனம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

ஶ்ரிதஜனப்ரியம் சின்திதப்ரத³ம்
ஶ்ருதிவிபூ⁴ஷணம் ஸாது⁴ஜீவனம் ।
ஶ்ருதிமனோஹரம் கீ³தலாலஸம்
ஹரிஹராத்மஜம் தே³வமாஶ்ரயே

ஶரணம் அய்யப்பா ஸ்வாமி ஶரணம் அய்யப்பா ।
ஶரணம் அய்யப்பா ஸ்வாமி ஶரணம் அய்யப்பா ॥

Surya Dev Chalisa Lyrics: सूर्य चालीसा पाठ

सूर्य चालीसा (Surya Chalisa) का जाप भगवान सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| प्रतिदिन भगवान सूर्य देव की पूजा, अर्घ्य देने तथा सूर्य चालीसा (Surya Chalisa) का जाप करने का एक ख़ास महत्व बताया गया है| प्रत्येक रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करने तथा सूर्य चालीसा (Surya Chalisa) का पाठ करने से भगवान सूर्य देव प्रसन्न होते है| रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया जाता है| सूर्य देव प्रत्यक्ष देव माने जाते है| पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी भगवान सूर्य देव की पूजा तथा सूर्य चालीसा (Surya Chalisa) का पाठ करता है| उसे भगवान सूर्य की कृपा से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है|

सूर्य चालीसा

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे संतोषी माता चालीसा [Santoshi Mata Chalisa], सरस्वती आरती [Saraswati Aarti], या जया एकादशी व्रत कथा [Jaya Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

सूर्य देव चालीसा का पाठ | Surya Chalisa Lyrics in Hindi

|| सूर्य चालीसा ||

॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग,
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

॥ चौपाई ॥

जय सविता जय जयति दिवाकर,
सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥

भानु पतंग मरीची भास्कर,
सविता हंस सुनूर विभाकर॥

विवस्वान आदित्य विकर्तन,
मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥

अम्बरमणि खग रवि कहलाते,
वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,
मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥

अरुण सदृश सारथी मनोहर,
हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

मंडल की महिमा अति न्यारी,
तेज रूप केरी बलिहारी॥

उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते,
देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर,
सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥

पूषा रवि आदित्य नाम लै,
हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं,
मस्तक बारह बार नवावैं॥

चार पदारथ जन सो पावै,
दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

नमस्कार को चमत्कार यह,
विधि हरिहर को कृपासार यह॥

सेवै भानु तुमहिं मन लाई,
अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते,
सहस जनम के पातक टरते॥

उपाख्यान जो करते तवजन,
रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है,
प्रबल मोह को फंद कटतु है॥

अर्क शीश को रक्षा करते,
रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत,
कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥

भानु नासिका वासकरहुनित,
भास्कर करत सदा मुखको हित॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे,
रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा,
तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर,
त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥

युगल हाथ पर रक्षा कारन,
भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर,
कटिमंह, रहत मन मुदभर॥

जंघा गोपति सविता बासा,
गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

विवस्वान पद की रखवारी,
बाहर बसते नित तम हारी॥

सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै,
रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

अस जोजन अपने मन माहीं,
भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥

दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै,
जोजन याको मन मंह जापै॥

अंधकार जग का जो हरता,
नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही,
कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

मंद सदृश सुत जग में जाके,
धर्मराज सम अद्भुत बांके॥

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा,
किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों,
दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥

परम धन्य सों नर तनधारी
हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन,
मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥

भानु उदय बैसाख गिनावै,
ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

यम भादों आश्विन हिमरेता,
कातिक होत दिवाकर नेता॥

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं,
पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥

॥ दोहा ॥

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

सूर्य चालीसा

Surya Chalisa Lyrics in English | जय सविता जय जयति दिवाकर

|| Surya Chalisa ||

॥ Doha ॥

Kanak badan kundal makar,
mukta mala ang,
padmasan sthit dhyaaiye,
shankh chakra ke sang॥

॥ Chaupai ॥

Jay savita jay jayati divakar, sahastransh saptashv timirahar॥

Bhaanu patang marichi bhaaskar, savita hans sunoor vibhakar॥

Vivaswaan aaditya vikartan, maartand harirup virochan॥

Ambarmani khag ravi kahlatae, ved hiranyagarbh kah gaate॥

Sahastransh pradyotan, kahikahi, munigan hot prasann modalahi॥

Arun sadrish saarthi manohar, haankat hay saataa chadhi rath par॥

Mandal ki mahima ati nyaari, tej roop keri balihari॥

Uchchhaishrava sadrish hay jote, dekhi purandar lajjit hote॥

Mitr marichi, bhaanu, arun, bhaaskar, savita soory arka kalikar॥

Poosha ravi aaditya naam lai, hiranyagarbhaay namah kahikai॥

Dwaadas naam prem so gavaein, mastak baarah baar navaavein॥

Chaara padaarth jan so paavain, dukh daaridra agh punj nasaavain॥

Namaskaar ko chamatkaar yah, vidhi harihar ko kripasaar yah॥

Sevai Bhanu tumahin man laai, Ashtasiddhi navnidhi tehin paai॥

Baarah naam uchaaran karte, sahas janam ke paatak tarte॥

Upaakhyaan jo karte tavajan, ripu so jamalhate sotehi chhan॥

Dhan sut jut parivaar badhatu hai, prabal moh ko phand katatu hai॥

Arka sheesh ko Raksha karte, ravi lalaat par nitya biharate॥

Soorya netra par nitya viraajat, karn des par dinakar chhaajat॥

Bhaanu naasika vaasakar hunait, bhaaskar karat sada mukhko hit॥

Oanth rahain parjanya hamaare, rasnaa beech teekshn bas pyaare॥

Kanth suvarn ret ki shobha, tigm tejashah kaandhe lobha॥

Pooshaam baahu mitr peethhim par, tvastaa varun rahat suushnkar॥

Yugal haath par raksha kaaran, bhaanumaan urasarm suudarachan॥

Basat naabhi aaditya manohar, katimanh, rahat man mudbhar॥

Jangha gopati savita baasa, gupt divakar karat hulaasa॥

Vivaswaan pad ki rakhwaari, baahar basate nit tam haari॥

Sahastransh sarvaang samhaare, raksha kavach vichitr vichaare॥

As jojan apne man maahin, bhay jagabeich karahun tehi naahi॥

Dadru kusht tehin kabahu na vyaapai, jojan yaako man manh jaapai॥

Andhakaar jag ka jo hartaa, nav prakaash se aanand bharata॥

Grah gan grasi na mitaavat jaahi, koti baar main pranavon taahi॥

Mand sadrish sut jag mein jaake, dharmaraj sam adbhut baanke॥

Dhany-dhany tum dinamani deva, kiya karat suramuni nar seva॥

Bhakti bhaavyut poorn niyam so, door hattats o bhavke bhram so॥

Param dhany so nar tandhaari, hain prasann jehi par tam haari॥

Arun maagh maham soory falgun, madhu vedaang naam ravi udayan॥

Bhaanu uday baisaakh ginaavai, jyeshth indra aashaadh ravi gaavai॥

Yam bhaadon aashvin himreta, kaatik hot divakar neta॥

Agahan bhinna vishnu hain poosahin, purush naam ravihain malamaasahin॥

॥ Doha ॥

Bhaanu chaalisa prem yut,
gaavahin je nar nitya,
sukh sampatti lahi bibidh,
hohnahi sadaa kritakritya॥

Tulsi Chalisa Lyrics: तुलसी चालीसा लिरिक्स हिंदी में

हिन्दू धर्म में तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) की पूजा तथा तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है| ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी माता की पूजा तथा साथ ही तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) का जाप करता है, उस पर सदैव ही भगवान श्रीहरि विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है| इसलिए यदि आप प्रतिदिन तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) का पाठ करते है तो आपको अद्भुद लाभ प्राप्त होगा|

तुलसी चालीसा

तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) का जाप करने से भगवान विष्णु के साथ ही जातक माता लक्ष्मी जी की भी कृपा प्राप्त होती है| जिससे घर में धन-समृद्धि सदा बनी रहती है| तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) के नियमित जाप से नवग्रहों को भी शांति प्राप्त होती है| आइये जानते है तुलसी चालीसा (Tulsi Chalisa) पाठ के बारे में|

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तुलसी चालीसा लिरिक्स हिंदी में | Tulsi Chalisa Lyrics in Hindi

|| तुलसी चालीसा ||

॥ दोहा ॥

जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी ।
नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी ॥

श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब ।
जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब ॥

॥ चौपाई ॥

धन्य धन्य श्री तलसी माता ।
महिमा अगम सदा श्रुति गाता ॥

हरि के प्राणहु से तुम प्यारी ।
हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी ॥

जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो ।
तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो ॥

हे भगवन्त कन्त मम होहू ।
दीन जानी जनि छाडाहू छोहु ॥

सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी ।
दीन्हो श्राप कध पर आनी ॥

उस अयोग्य वर मांगन हारी ।
होहू विटप तुम जड़ तनु धारी ॥

सुनी तुलसी हीँ श्रप्यो तेहिं ठामा ।
करहु वास तुहू नीचन धामा ॥

दियो वचन हरि तब तत्काला ।
सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला ॥

समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा ।
पुजिहौ आस वचन सत मोरा ॥

तब गोकुल मह गोप सुदामा ।
तासु भई तुलसी तू बामा ॥

कृष्ण रास लीला के माही ।
राधे शक्यो प्रेम लखी नाही ॥

दियो श्राप तुलसिह तत्काला ।
नर लोकही तुम जन्महु बाला ॥

यो गोप वह दानव राजा ।
शङ्ख चुड नामक शिर ताजा ॥

तुलसी भई तासु की नारी ।
परम सती गुण रूप अगारी ॥

अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ ।
कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ ॥

वृन्दा नाम भयो तुलसी को ।
असुर जलन्धर नाम पति को ॥

करि अति द्वन्द अतुल बलधामा ।
लीन्हा शंकर से संग्राम ॥

जब निज सैन्य सहित शिव हारे ।
मरही न तब हर हरिही पुकारे ॥

पतिव्रता वृन्दा थी नारी ।
कोऊ न सके पतिहि संहारी ॥

तब जलन्धर ही भेष बनाई ।
वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई ॥

शिव हित लही करि कपट प्रसंगा ।
कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा ॥

भयो जलन्धर कर संहारा ।
सुनी उर शोक उपारा ॥

तिही क्षण दियो कपट हरि टारी ।
लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी ॥

जलन्धर जस हत्यो अभीता ।
सोई रावन तस हरिही सीता ॥

अस प्रस्तर सम ह्रदय तुम्हारा ।
धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा ॥

यही कारण लही श्राप हमारा ।
होवे तनु पाषाण तुम्हारा ॥

सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे ।
दियो श्राप बिना विचारे ॥

लख्यो न निज करतूती पति को ।
छलन चह्यो जब पारवती को ॥

जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा ।
जग मह तुलसी विटप अनूपा ॥

धग्व रूप हम शालिग्रामा ।
नदी गण्डकी बीच ललामा ॥

जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं ।
सब सुख भोगी परम पद पईहै ॥

बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा ।
अतिशय उठत शीश उर पीरा ॥

जो तुलसी दल हरि शिर धारत ।
सो सहस्त्र घट अमृत डारत ॥

तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी ।
रोग दोष दुःख भंजनी हारी ॥

प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर ।
तुलसी राधा में नाही अन्तर ॥

व्यन्जन हो छप्पनहु प्रकारा ।
बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा ॥

सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही ।
लहत मुक्ति जन संशय नाही ॥

कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत ।
तुलसिहि निकट सहसगुण पावत ॥

बसत निकट दुर्बासा धामा ।
जो प्रयास ते पूर्व ललामा ॥

पाठ करहि जो नित नर नारी ।
होही सुख भाषहि त्रिपुरारी ॥

॥ दोहा ॥

तुलसी चालीसा पढ़ही तुलसी तरु ग्रह धारी ।
दीपदान करि पुत्र फल पावही बन्ध्यहु नारी ॥

सकल दुःख दरिद्र हरि हार ह्वै परम प्रसन्न ।
आशिय धन जन लड़हि ग्रह बसही पूर्णा अत्र ॥

लाही अभिमत फल जगत मह लाही पूर्ण सब काम ।
जेई दल अर्पही तुलसी तंह सहस बसही हरीराम ॥

तुलसी महिमा नाम लख तुलसी सूत सुखराम ।
मानस चालीस रच्यो जग महं तुलसीदास ॥

तुलसी चालीसा

Tulsi Chalisa Lyrics in English | धन्य धन्य श्री तलसी माता

|| Tulsi Chalisa ||

॥ Doha ॥

Jai Jai Tulsi Bhagwati Satyavati Sukhdaani।
Namo Namo Hari Preyasi Shri Vrinda Gun Khaani॥

Shri Hari Shish Birajini, Dehu Amar Var Amb।
Janhit He Vrindavani Ab Na Karahu Vilamb॥

॥ Chaupai ॥

Dhany Dhany Shri Tulsi Mata।
Mahima Agam Sada Shruti Gaata॥

Hari Ke Pranhu Se Tum Pyaari।
Harihin Hetu Keenho Tap Bhari॥

Jab Prasann Hai Darshan Deenhyo।
Tab Kar Jori Vinay Us Kinhyo॥

He Bhagavant Kant Mam Hohoo।
Deen Jaani Jani Chhaadahoo Chhohoo॥

Suni Lakshmi Tulsi Ki Baani।
Deenho Shraap Kadha Par Aani॥

Us Ayogya Var Maangan Haari।
Hohoo Vitap Tum Jad Tanu Dhaari॥

Suni Tulsi He Shrapyo Tehim Thaama।
Karahu Vaas Tuhoo Neechan Dhaama॥

Diyo Vachan Hari Tab Tatkaala।
Sunhu Sumukhi Jani Hohoo Bihaala॥

Samay Paai Vhau Rau Paati Tora।
Pujihau Aas Vachan Sat Mora॥

Tab Gokul Mah Gop Sudama।
Taasu Bhaee Tulsi Tu Baama॥

Krishna Raas Leela Ke Maahi।
Radhe Shakyu Prem Lakhi Naahi॥

Diyo Shraap Tulsahi Tatkaala।
Nar Lokahi Tum Janmahu Baala॥

Yo Gop Vah Daanav Raaja।
Shankh Chud Naamak Shir Taaja॥

Tulsi Bhaee Taasu Ki Naari।
Param Sati Gun Roop Agaari॥

As Dvai Kalp Beet Jab Gayou।
Kalp Triteey Janm Tab Bhayou॥

Vrinda Naam Bhayo Tulsi Ko।
Asur Jaladhar Naam Pati Ko॥

Kari Ati Dvand Atul Baladhaama।
Leenha Shankar Se Sangraama॥

Jab Nij Sainya Sahit Shiv Haare।
Marahi Na Tab Har Harih Pukaare॥

Pativrata Vrinda Thi Naari।
Koou Na Sake Patihi Sanhaari॥

Tab Jaladhar He Bheesh Banaai।
Vrinda Dheeg Hari Pahuchyo Jaai॥

Shiv Hit Lahee Kari Kapat Prasanga।
Kiyo Satitva Dharm Tohee Bhanga॥

Bhayo Jaladhar Kar Sanhaara।
Suni Ur Shok Upaara॥

Tihi Kshan Diyo Kapat Hari Taari।
Lakhi Vrinda Dukh Gira Uchaari॥

Jaladhar Jas Hatyo Abhita।
Soee Raavan Tas Harih Sita॥

As Prastar Sam Hriday Tumhaara।
Dharm Khandi Mam Patihi Sanhaara॥

Yahi Kaaran Lahee Shraap Hamaara।
Hove Tanu Paashaan Tumhaara॥

Suni Hari Turatahi Vachan Uchaare।
Diyo Shraap Bina Vichaare॥

Lakhyo Na Nij Karatooti Pati Ko।
Chhalan Chahyo Jab Paarvati Ko॥

Jadmati Tuhu As Ho Jadaroopa।
Jag Mah Tulsi Vitap Anoopa॥

Dhagv Roop Ham Shaaligraama।
Nadi Gandaki Beach Lalaama॥

Jo Tulsi Dal Hamahi Chadh Ihai।
Sab Sukh Bhogi Param Pad Paihai॥

Binu Tulsi Hari Jalat Shareera।
Atishay Uthat Sheesh Ur Peera।

Jo Tulsi Dal Hari Shir Dhaarat।
So Sahasr Ghat Amrit Daarat॥

Tulsi Hari Mann Ranjani Haari।
Rog Dosh Dukh Bhanjani Haari॥

Prem Sahit Hari Bhajan Nirantar।
Tulsi Radha Mein Naahi Antar॥

Vyanjan Ho Chhappanhu Prakaara।
Binu Tulsi Dal Na Harihi Pyaara॥

Sakal Teerth Tulsi Taru Chhaahi।
Lahat Mukti Jan Sanshay Naahi॥

Kavi Sundar Ik Hari Gun Gaavat।
Tulsahi Nikat Sahasgun Paavat॥

Basat Nikat Durbasa Dhaama।
Jo Prayaas Te Poorv Lalaama॥

Paath Karahi Jo Nit Nar Naari।
Hohi Sukh Bhashahi Tripuraari॥

॥ Doha ॥

Tulsi Chalisa Padhihi Tulsi Taru Grah Dhaari।
Deepdaan Kari Putra Phal Paavahi Bandhyahu Naari॥

Sakal Dukh Daridra Hari Haar Hvai Param Prasann।
Aashiy Dhan Jan Ladahi Grah Basahi Poorna Atra॥

Laahi Abhimat Phal Jagat Mah Laahi Poorna Sab Kaam।
Jee Dal Arpahi Tulsi Tanh Sahas Basahi Hariraam॥

Tulsi Mahima Naam Lakh Tulsi Soot Sukhram।
Maanas Chalisa Rachyo Jag Mahan Tulsidas॥

Shivashtak Mantra Lyrics: श्री शिवाष्टक स्तोत्र हिंदी में

इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का पाठ भगवान शंकर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप करने से भगवान शिवजी अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते है| भगवान शिव की कृपा पाने के लिए उनके भक्तों द्वारा इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप किया जाता है| जैसा कि आप सभी को ज्ञात है भगवान शिव को सोमवार का दिन समर्पित किया गया है| इसी वजह से सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा करने तथा शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप करने से भगवान शंकर अपने भक्तो के जीवन से सभी कष्ट दूर कर देते है तो आइये जाप करते है शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का|

शिवाष्टक स्तोत्र

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे कनकधारा स्तोत्र [Kanakdhara Strota], ओम जय जगदीश हरे आरती [Om Jai Jagdish Hare Aarti], या सत्यनारायण व्रत कथा [Satyanarayan Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

शिवाष्टक स्तोत्र लिरिक्स हिंदी में | Shivashtak Stotra Lyrics in Hindi

|| शिवाष्टक स्तोत्र ||

आदि अनादि अनंत अखंङ, अभेद अखेद सुबेद बतावैं ।
अलख अगोचर रुप महेस कौ, जोगि जती मुनि ध्यान न पावैं ॥

आगम निगम पुरान सबै, इतिहास सदा जिनके गुन गावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

सृजन सुपालन लय लीला हित, जो विधि हरि हर रुप बनावैं ।
एकहि आप विचित्र अनेक, सुबेष बनाइ कैं लीला रचावैं ॥

सुंदर सृष्टि सुपालन करि, जग पुनि बन काल जु खाय पचावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

अगुन अनीह अनामय अज, अविकार सहज निज रुप धरावैं ।
परम सुरम्य बसन आभूषण, सजि मुनि मोहन रुप करावैं ॥

ललित ललाट बाल बिधु विलसै, रतन हार उर पै लहरावैं ।
बङभागी नर-नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

अंग विभूति रमाय मसान की, विषमय भुजगनि कौं लपटावैं ।
नर कपाल कर मुंङमाल गल, भालु चरम सब अंग उढावैं ॥

घोर दिगंबर लोचन तीन, भयानक देखि कैं सब थर्रावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

सुनतहि दीन की दीन पुकार, दयानिधि आप उबारन धावैं ।
पहुँच तहाँ अबिलंब सुदारुन, मृत्यु को मर्म विदारि भगावैं ॥

मुनि मृकंङु सुत की गाथा, सुचि अजहुँ बिग्यजन गाइ सुनावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

चाउर चारि जो फूल धतूर के, बेल के पात औ पानि चढावैं ।
गाल बजाय कै बोल जो, ‘हर हर महादेव’ धुनि जोर लगावैं ॥

तिनहिं महाफल देय सदासिव, सहजहि भुक्ति मुक्ति सो पावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

बिनसि दोष दुख दुरित दैन्य, दारिद्रय नित्य सुख सांति मिलावैं ।
आसुतोष हर पाप ताप सब, निरमल बुध्दि चित्त बकसावैं ॥

असरन सरन काटि भव बंधन, भव निज भवन भव्य बुलवावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

औढरदानि उदार अपार जु, नैकु सी सेवा तें ढुरि जावैं ।
दमन असांति समन सब संकट, विरद बिचार जनहि अपनावैं ॥

ऐसे कृपालु कृपामय देब के, क्यों न सरन अबहीं चलि जावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

शिवाष्टक स्तोत्र

Shivashtak Stotra Lyrics in English | आदि अनादि अनंत अखंङ

|| Shivashtak Stotra ||

Aadi anadi anant akhang, abhed akhed subhed batawein.
Alakh agochar roop Mahesh ko, yogi jati muni dhyan na paavein.

Aagam nigam puran sabai, itihaas sada jinke gun gaavein.
Badbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiv ko nit dhyaavein.

Srujan supalan lay leela hit, jo vidhi Hari Har roop banaavein.
Ekahi aap vichitr anek, subhesh banai kain leela rachavein.

Sundar srishti supaaln kari, jag puni ban kaal ju khaay pachavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Agun aneeh anaamay aj, avikaar sahaj nij roop dharaavein.
Param surmya basan aabhooshan, saji muni Mohan roop karaavein.

Lalit lalaat baal bidhu vilasai, ratan haar ur pai lehraavein.
Banbhagi nar-nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Ang vibhuti ramaay masaan ki, vishmay bhujagni kaun lapataavein.
Nar kapal kar mungmaal gal, bhaalu charam sab ang udhaavein.

Ghor digambar lochan teen, bhayaanak dekhi kain sab tharraavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Sunatahi deen ki deen pukaar, dayaanidhi aap ubaran dhyaavein.
Pahunch tahaa abilamb sudaarun, mrityu ko marm vidaari bhagaavein.

Muni mrikanghu sut ki gaatha, suchi ajahun bigyajan gaai sunaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Chaur chaari jo phool dhatuur ke, bel ke paat aur paani chadhaavein.
Gaale bajaay ke bol jo, ‘Har Har Mahadev’ dhuni jor lagaavein.

Tinahin mahaphal dey sadashiv, sahajahi bhukti mukti so paavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Binasi dosh dukh durit dainya, daaridray nitya sukh shaanti milaavein.
Aasutosha har paap taap sab, nirmal buddhi chitt bakshaavein.

Asaran saran kaati bhav bandhan, bhav nij bhavan bhavy bulavaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Audhardaani udaar apaar ju, naiku si seva te dhur jaavein.
Daman asaanti saman sab sankat, virdad bichaar janhi apnaavein.

Aise kripalu kripaamay deb ke, kyon na saran abahi chali jaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki Lyrics: श्री राधा जी की आरती

श्री राधा जी कृपा पाने के लिए सभी भक्तों को राधा जी की आरती (Radha Ji Ki Aarti) का जाप निश्चित रूप से करना चाहिए| माँ राधा रानी की पूजा करते समय जो भक्त राधा चालीसा के साथ-साथ राधा जी की आरती (Radha Ji Ki Aarti) का जाप भी करते है| उन भक्तों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है|

राधा जी की आरती

जो भी राधा जी की आरती (Radha Ji Ki Aarti) का जाप करता है, उस व्यक्ति के जीवन में कभी भी किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है| माना जाता है राधा जी की आरती (Radha Ji Ki Aarti) का जाप करने से भक्तों के कष्ट दूर होते है तथा व्यक्ति तेजस्वी बनता है आइये जानते है श्री राधा जी की आरती (Radha Ji Ki Aarti) के बारे में |

इसी के साथ यदि आप ऑनलाइन माध्यम से किसी भी पूजा जैसे विवाह पूजन [Marriage Puja], या गृह प्रवेश पूजा [Griha Pravesh Puja] के लिए पंडित जी को बुक करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| यहाँ बुकिंग प्रक्रिया बहुत ही आसान है| बस आपको “Book a Pandit” विकल्प का चुनाव करना होगा और अपनी सामान्य जानकारी जैसे कि अपना नाम, मेल, पूजा स्थान, समय,और पूजा का चयन के माध्यम से आप अपना पंडित बुक कर सकेंगे|

राधा जी की आरती हिंदी में | Radha Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| राधा जी की आरती ||

आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,
विमल विवेकविराग विकासिनि ।

पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,
सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,
मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।

अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,
प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

संतत सेव्य सत मुनि जनकी,
आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।

आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,
अति अमूल्य सम्पति समता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

। आरती श्री वृषभानुसुता की ।

कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,
चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।

जगजननि जग दुखनिवारिणि,
आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

राधा जी की आरती

Radha Ji Ki Aarti Lyrics in English | आरती श्री वृषभानुसुता की

|| Radha Ji Ki Aarti ||

Aarti Shri Vrishabhanusuta ki,
Manjul moorti Mohan mamta ki.

Trividh tapayut sansriti nashini,
Vimal vivek-virag vikasini.

Pavan Prabhu pad Preeti Prakashini,
Sundartam chhavi sundarta ki.
Aarti Shri Vrishabhanusuta ki…

Muni man Mohan Mohan Mohani,
Madhur manohar moorti sohani.

Aviral prem amiy ras dohani,
Priya ati sada sakhi Lalita ki.
Aarti Shri Vrishabhanusuta ki..

Santat sevya sat muni janaki,
Aakar amit divyagun ganaki.

Aakarshini Krishna tan man ki,
Ati amulya sampati samata ki.
Aarti Shri Vrishabhanusuta ki..

Aarti Shri Vrishabhanusuta ki.

Krishnatmika, Krishna sahacharini,
Chinmayavrida vipin viharini.

Jagjanani jag dukh-nivari ni,
Adi anadi shakti vibhuta ki.
Aarti Shri Vrishabhanusuta ki..

Aarti Shri Vrishabhanusuta ki,
Manjul moorti Mohan mamta ki.

Jai Jai Jai Shree Bagla Mata Chalisa Lyrics: माँ बगलामुखी चालीसा पाठ

बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa) का पाठ माता बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| बगलामुखी माता को हिन्दू धर्म की एक प्रसिद्ध देवी के रूप में जाना जाता है| बगलामुखी माता के सभी भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa) पाठ का करते है| माता बगलामुखी का पूजन अधिकांश रूप से तंत्र-मंत्र की विद्या के लिए किया जाता है| यह बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa) पाठ शत्रुओं से रक्षा के लिए भी किया जाता है| बगलामुखी माता को युद्ध की देवी भी कहा जाता है| प्राचीन समय में कई सारे योद्धा युद्ध में जाने पूर्व माँ बगलामुखी की आराधना करते थे तो आइये जानते है बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa) लिरिक्स के बारे में |

बगलामुखी चालीसा

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे बजरंग बाण [Bajrang Baan], खाटूश्याम जी की आरती [Khatu Shyam Ji Ki Aarti], या सफला एकादशी व्रत कथा [Saphala Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे ऐप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के अध्यायों को हिंदी अर्थ सहित समझाया गया है|

बगलामुखी चालीसा पाठ हिंदी में | Baglamukhi Chalisa Lyrics in Hindi

|| बगलामुखी चालीसा ||

॥ दोहा ॥

सिर नवाइ बगलामुखी,
लिखूं चालीसा आज ॥
कृपा करहु मोपर सदा,
पूरन हो मम काज ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय श्री बगला माता ।
आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥

बगला सम तब आनन माता ।
एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥

शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी ।
असतुति करहिं देव नर-नारी ॥

पीतवसन तन पर तव राजै ।
हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥

तीन नयन गल चम्पक माला ।
अमित तेज प्रकटत है भाला ॥

रत्न-जटित सिंहासन सोहै ।
शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥

आसन पीतवर्ण महारानी ।
भक्तन की तुम हो वरदानी ॥

पीताभूषण पीतहिं चन्दन ।
सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥

एहि विधि ध्यान हृदय में राखै ।
वेद पुराण संत अस भाखै ॥

अब पूजा विधि करौं प्रकाशा ।
जाके किये होत दुख-नाशा ॥

प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै ।
पीतवसन देवी पहिरावै ॥

कुंकुम अक्षत मोदक बेसन ।
अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥

माल्य हरिद्रा अरु फल पाना ।
सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥

धूप दीप कर्पूर की बाती ।
प्रेम-सहित तब करै आरती ॥

अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे ।
पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥

मातु भगति तब सब सुख खानी ।
करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥

त्रिविध ताप सब दुख नशावहु ।
तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥

बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं ।
अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥

पूजनांत में हवन करावै ।
सा नर मनवांछित फल पावै ॥

सर्षप होम करै जो कोई ।
ताके वश सचराचर होई ॥

तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै ।
भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥

दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई ।
निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥

फूल अशोक हवन जो करई ।
ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥

फल सेमर का होम करीजै ।
निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥

गुग्गुल घृत होमै जो कोई ।
तेहि के वश में राजा होई ॥

गुग्गुल तिल संग होम करावै ।
ताको सकल बंध कट जावै ॥

बीलाक्षर का पाठ जो करहीं ।
बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥

एक मास निशि जो कर जापा ।
तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥

घर की शुद्ध भूमि जहं होई ।
साध्का जाप करै तहं सोई ॥

सेइ इच्छित फल निश्चय पावै ।
यामै नहिं कदु संशय लावै ॥

अथवा तीर नदी के जाई ।
साधक जाप करै मन लाई ॥

दस सहस्र जप करै जो कोई ।
सक काज तेहि कर सिधि होई ॥

जाप करै जो लक्षहिं बारा ।
ताकर होय सुयशविस्तारा ॥

जो तव नाम जपै मन लाई ।
अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥

सप्तरात्रि जो पापहिं नामा ।
वाको पूरन हो सब कामा ॥

नव दिन जाप करे जो कोई ।
व्याधि रहित ताकर तन होई ॥

ध्यान करै जो बन्ध्या नारी ।
पावै पुत्रादिक फल चारी ॥

प्रातः सायं अरु मध्याना ।
धरे ध्यान होवैकल्याना ॥

कहं लगि महिमा कहौं तिहारी ।
नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥

पाठ करै जो नित्या चालीसा ।
तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥

॥ दोहा ॥

सन्तशरण को तनय हूं,
कुलपति मिश्र सुनाम ।
हरिद्वार मण्डल बसूं ,
धाम हरिपुर ग्राम ॥

उन्नीस सौ पिचानबे सन् की,
श्रावण शुक्ला मास ।
चालीसा रचना कियौ,
तव चरणन को दास ॥

बगलामुखी चालीसा

Baglamukhi Chalisa Path Lyrics in English | जय जय जय श्री बगला माता

|| Baglamukhi Chalisa ||

॥ Doha ॥

Sir navaai bagalamukhi,
Likhu chalisa aaj.
Kripa karhu mopar sada,
Puran ho mam kaaj.

॥ Chaupai ॥

Jay jay jay shri bagla mata,
Aadishakti sab jag ki traata.

Bagla sam tab aanan mata,
Ehi te bhayau naam vikhyata.

Shashi lalat kundal chhavi nyaari,
Asatuti karhin dev nar-naari.

Peetavasan tan par tav raajai,
Haathhin mudgar gada virajai.

Teen nayan gal champak maala,
Amit tej prakat hai bhaala.

Ratn-jatit sinhasan sohai,
Shobha nirakhi sakal jan mohai.

Aasan peetvarn maharani,
Bhaktan ki tum ho vardani.

Peetabhooshan peetahin Chandan,
Sur nar naag karat sab vandan.

Ehi vidhi dhyan hriday mein rakhe,
Ved puran sant as bhakhe.

Ab pooja vidhi karun prakasha,
Jaake kiye hot dukh-naasha.

Prathamhin peet Dhvaja fahravai,
Peetavasan devi pahiravai.

Kunkum akshat modak besan,
Abir gulaal supari chandan.

Malya haridra aru phal paana,
Sabahin chadhai dharai ur dhyaana.

Dhoop deep karpoor ki baati,
Prem-sahit tab karai aarti.

Astuti karai haath dou jore,
Purvahu matu manorath more.

Matu bhagati tab sab sukh khani,
Karhun kripa mopar jan jaani.

Trividh taap sab dukh nashaavahu,
Timir mitaakar gyaan badhaavahu.

Bar-bar main binavahun tohi,
Aviral bhagati gyaan do mohee.

Poojanaant mein havan karaavai,
Saa nar manovaanchhit phal paavai.

Sarshap hom Karai jo koi,
Taake vash Sacharachar hoi.

Til tandul sang ksheer miraavai,
Bhakti prem se havan karaavai.

Dukh daridra vyaapai nahin soi,
Nishchay sukh-sampatti sab hoi.

Phool ashok havan jo karai,
Taake grih sukh-sampatti bharai.

Phal semar ka hom karijai,
Nishchay vaako ripu sab chhijai.

Guggul ghrit homai jo koi,
Te hi ke vash mein raaja hoi.

Guggul til sang hom karaavai,
Taako sakal bandh kat jaavai.

Beelaakshar ka paath jo karahi,
Beej mantra tumharo uchcharahi.

Ek maas nisi jo kar jaapa,
Te hi kar mitat sakal santaapa.

Ghar ki shuddh bhoomi jah hoee,
Saadhka jaap karai tah soee.

Sei ichhit phal nishchay paavai,
Yaamai nahin kadu sanshay laavai.

Athavaa teer nadi ke jaai,
Saadhak jaap karai man laai.

Das sahasra jap karai jo koi,
Sak kaaj tehi kar sidhi hoi.

Jaap karai jo lakhahin baara,
Taakar hoy suyashvistaara.

Jo tav naam japai man laai,
Alpakaal mahan ripuhin nasai.

Saptaraatri jo paapahin naama,
Vaako pooran ho sab kaama.

Nav din jaap kare jo koi,
Vyaadhi rahit taakar tan hoi.

Dhyaan karai jo bandhya naari,
Paavai putraadik phal chaari.

Pratah saayam aru madhyaana,
Dhare dhyaan hovaikalyaana.

Kaham lagi mahima kahoun tihaari,
Naam sada shubh mangalkaari.

Paath karai jo nitya chalisa,
Te hi par kripa karahin gaurisha.

॥ Doha ॥

Santasharan ko tanay hoon,
Kulpati mishra sunaam.
Haridwar mandal basoon,
Dhaam haripur gram.

Unnis sau pichaanbe san ki,
Shravan shukla maas.
Chalisa rachna kiyau,
Tav charanan ko daas.

Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo Lyrics: शाकुम्भरी माता की आरती

शाकुम्भरी माता की आरती (Shakumbhari Mata Ki Aarti) का जाप माता शाकुम्भरी का आशीर्वाद पाने तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| माता शाकुम्भरी को देवी दुर्गा का ही रूप माना जाता है| इसलिए शाकुम्भरी देवी की पूजा नवरात्रि के समय करना बहुत लाभदायक माना जाता है| शाकुम्भरी देवी की पूजा के साथ-साथ शाकुम्भरी माता की आरती (Shakumbhari Mata Ki Aarti) का जाप करना भी जातकों के लिए बहुत शुभ होता है| कहा जाता है कि जो भी भक्त शाकुम्भरी माता की आरती (Shakumbhari Mata Ki Aarti) का जाप करते लोगों की सभी परेशानियां दूर होती है तथा उन्हें माता शाकुम्भरी की कृपा भी प्राप्त होती है तो आइये पढ़ते है शाकुम्भरी माता की आरती (Shakumbhari Mata Ki Aarti)|

शाकुम्भरी माता की आरती

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे हनुमान चालीसा [Hanuman Chalisa], खाटूश्याम जी की आरती [Khatu Shyam Ji Ki Aarti], या जया एकादशी व्रत कथा [Jaya Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के अध्यायों को हिंदी अर्थ सहित समझाया गया है|

शाकुम्भरी देवी की आरती लिरिक्स हिंदी में | Shakumbhari Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| शाकुम्भरी माता की आरती ||

हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजो
एसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजो

शताक्षी दयालू की आरती किजो
तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,

सब घट तुम आप भखनी माँ
शकुंभारी अंबा जी की आरती किजो

तुम्ही हो शाकुम्भर,
तुम ही हो सताक्षी माँ

शिवमूर्ति माया प्रकाशी माँ
शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँ
इच्छा पूरण किजो,

शाकुम्भर दर्शन पावे माँ
शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ,
जो नर आरती सुनावे माँ

बस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावे
शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

शाकुम्भरी माता की आरती

Shakumbhari Mata Ki Aarti Lyrics in English | शाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

|| Shakumbhari Mata Ki Aarti ||

Hari Om Shri Shakumbhari Amba Ji ki aarti kijiye,
Aisi adbhut roop hriday dhar lijiye.

Shatakshi Dayalu ki aarti kijiye,
Tum paripurna Adi Bhawani Maa,

Sab ghat tum aap bhakni Maa,
Shakumbhari Amba Ji ki aarti kijiye.

Tum hi ho Shakumbhar,
Tum hi ho Shatakshi Maa.

Shivamurti Maya Prakashi Maa,
Shakumbhari Amba Ji ki aarti kijiye.

Nit jo nar nari Ambe aarti gaave Maa,
Ichha puran kijiye,

Shakumbhar darshan paave Maa,
Shakumbhari Amba Ji ki aarti kijiye.

Jo nar aarti padhe padhave Maa,
Jo nar aarti sunaave Maa.

Bas Vaikunth Shakumbhar darshan paave,
Shakumbhari Amba Ji ki aarti kijiye.

Jai Jai Tulsi Mata Aarti Lyrics: तुलसी जी की आरती

तुलसी जी की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti) मुख्यतः प्रत्येक वर्ष तुलसी पूजन के शुभ अवसर पर माता तुलसी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है| माना जाता है कि जो भी भक्त तुलसी माता की पूजा करने के पश्चात तुलसी जी की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti) का जाप करता है उस भक्त के जीवन से कठिनाइयां दूर हो जाती है|

तुलसी जी की आरती

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता को दरिद्रता नाश करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है| इसलिए यदि आप प्रतिदिन तुलसी जी की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti) का जाप करते है तो आपको आर्थिक तंगी से भी राहत मिलती है| नियमित रूप से तुलसी माता की पूजा व साथ ही तुलसी जी की आरती (Tulsi Ji Ki Aarti) का गान करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है व जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है|

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तुलसी जी की आरती लिरिक्स हिंदी में | Tulsi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| तुलसी जी की आरती ||

जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

सब योगों से ऊपर,
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके,
सबकी भव त्राता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

बटु पुत्री है श्यामा,
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,
सो नर तर जाता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

हरि के शीश विराजत,
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी,
तुम हो विख्याता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

लेकर जन्म विजन में,
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से,
सुख-संपति पाता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

हरि को तुम अति प्यारी,
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका,
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम,
कृपा करो माता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥

तुलसी जी की आरती

Tulsi Ji ki Aarti Lyrics in English | जय जय तुलसी माता

|| Tulsi Ji Ki Aarti ||

Jay Jay Tulsi Mata,
Maiya Jay Tulsi Mata.
Sab jag ki sukh data,
Sabki var Mata.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Sab yogon se upar,
Sab rogon se upar.
Raj se Raksha karke,
Sabki bhav tratha.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Batu putri hai Shyama,
Sura bali hai gramya.
Vishnupriya jo nar tumko seve,
So nar tar jata.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Hari ke sheesh virajat,
Tribhuvan se ho vandit.
Patit jano ki tarini,
Tum ho vikhyata.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Lekar janm vijan mein,
Aayi divya bhavan mein.
Manav lok tumhi se,
Sukh-sampati pata.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Hari ko tum ati pyari,
Shyam varn sukumari.
Prem ajab hai unka,
Tumse kaisa nata.
Hamari vipad haro tum,
Kripa karo Mata.
॥ Jay Tulsi Mata…॥

Jay Jay Tulsi Mata,
Maiya Jay Tulsi Mata.
Sab jag ki sukh data,
Sabki var Mata.

Jai Jai Shree Baglamukhi Mata Aarti Lyrics: बगलामुखी आरती लिरिक्स

बगलामुखी माता जी की आरती को प्रसन्न करने के लिए बगलामुखी आरती (Baglamukhi Aarti) का जाप किया जाता है| बगलामुखी माता हिन्दू धर्म में पूजनीय देवीयों में से ही एक है| माता के सभी भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए बगलामुखी आरती (Baglamukhi Aarti) का गान करते है| बगलामुखी देवी को युद्ध की देवी के रूप में भी जाना जाता है| इस वजह से मुख्यतः बगलामुखी माता की पूजा तंत्र-मंत्र की विद्या के लिए की जाती है| माना जाता है कि जो भी व्यक्ति बगलामुखी आरती (Baglamukhi Aarti) का जाप सच्चे मन से करता है तो देवी माँ उनके जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानियाँ नहीं आने देती है तो आइये जानते है बगलामुखी आरती (Baglamukhi Aarti) के लिरिक्स|

बगलामुखी आरती

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बगलामुखी आरती लिरिक्स हिंदी में | Baglamukhi Aarti Lyrics in Hindi

|| बगलामुखी आरती ||

जय जय श्री बगलामुखी माता,
आरती करहूँ तुम्हारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता,
आरती करहूँ तुम्हारी |

पीत वसन तन पर तव सोहै,
कुण्डल की छबि न्यारी |

कर कमलों में मुद्गर धारै,
अस्तुति करहिं सकल नर नारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता …………

चम्पक माल गले लहरावे,
सुर नर मुनि जय जयति उचारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता ……………

त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब,
भक्ति सदा तव है सुखकारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता …………….

पालन हरत सृजत तुम जग को,
सब जीवन की हो रखवारी ||

जय जय श्री बगलामुखी माता ………..

मोह निशा में भ्रमत सकल जन,
करहु ह्रदय महँ, तुम उजियारी ||

जय जय श्री बगलामुखी माता ………..

तिमिर नशावहू ज्ञान बढ़ावहु,
अम्बे तुमही हो असुरारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता ………..

सन्तन को सुख देत सदा ही,
सब जन की तुम प्राण प्यारी ||

जय जय श्री बगलामुखी माता ……….

तव चरणन जो ध्यान लगावै,
ताको हो सब भव – भयहारी |

जय जय श्री बगलामुखी माता ………..

प्रेम सहित जो करहिं आरती,
ते नर मोक्षधाम अधिकारी ||

जय जय श्री बगलामुखी माता ………….

|| दोहा ||

बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय |
विनती कुलपति मिश्र की, सुख सम्पति सब होय ||

बगलामुखी आरती

Baglamukhi Aarti Lyrics in English | जय जय श्री बगलामुखी माता

|| Baglamukhi Aarti ||

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata,
Aarti karhu tumhari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata,
Aarti karhu tumhari |

Peet vasan tan par tav sohai,
Kundal ki chhavi nyari |

Kar kamalon mein mudgar dhare,
Astuti karhin sakal nar nari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata …………

Champak maal gale leharave,
Sur nar muni jai jayati uchhari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ……………

Trividh taap miti jaat sakal sab,
Bhakti sada tav hai sukhakaari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata …………….

Palan harat srijat tum jag ko,
Sab jeevan ki ho rakhwaari ||

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ………..

Moh nisha mein bhramat sakal jan,
Karhu hridaya mah, tum ujiyaari ||

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ………..

Timir nashaavahu gyaan badhaavahu,
Ambe tumhi ho asuraari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ………..

Santan ko sukh det sada hi,
Sab jan ki tum praan pyaari ||

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ……….

Tav charanan jo dhyaan lagaavai,
Taako ho sab bhav – bhayahari |

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ………..

Prem sahit jo karhin aarti,
Te nar mokshadhaam adhikaari ||

Jai Jai Shri Baglamukhi Mata ………….

|| Doha ||

Baglamukhi ki aarti, padhai sunai jo koy |
Vinati kulpati Mishra ki, sukh sampati sab hoy ||