Bhairav Ji Ki Aarti Lyrics: श्री भैरव जी की आरती

भगवान भैरवनाथ जी को प्रसन्न करने के लिए इस भैरव जी की आरती (Bhairav Ji Ki Aarti) का जाप किया जाता है| आपको बता दे कि श्री काल भैरव को भगवान शंकर का ही अवतार माना जाता है एवं पूर्ण श्रद्धा से भैरव जी की आरती (Bhairav Ji Ki Aarti) जाप करने से भगवान काल भैरव अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होते है|

मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अष्टमी तिथि को भैरव जयंती का त्यौहार मनाया जाता है| इस शुभ अवसर पर भैरव जी की आरती (Bhairav Ji Ki Aarti) का जाप करना जातकों के लिए बहुत ही लाभदायक माना जाता है| तो आइए जाप करते है भैरव जी की आरती का|

भैरव जी की आरती

इसी के साथ यदि आप लिंगाष्टकम मंत्र [Lingashtakam Lyrics], खाटू श्याम जी की आरती [Khatu Shyam Aarti Lyrics], या बजरंग बाण [Bajrang Baan Lyrics] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है|

इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

काल भैरव जी की आरती हिंदी में – Bhairav Ji Ki Aarti in Hindi

|| काल भैरव जी की आरती ||

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा ।
जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक ।
भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे ।
चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी ।
कृपा कीजिये भैरव, करिए नहीं देरी ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दम्कावत ।
बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे ।
कहे धरनी धर नर मनवांछित फल पावे ॥
॥ जय भैरव देवा…॥

भैरव जी की आरती

Bhairav Ji Ki Aarti Lyrics in English – जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा

|| Bhairav Ji Ki Aarti ||

Jai Bhairav Deva, Prabhu Jai Bhairav Deva.
Jai Kali aur Gaur Devi krit seva.
Jai Bhairav Deva…

Tumhi paap uddharak, dukh sindhu taarak.
Bhakto ke sukh kaarak, bheeshan vapu dhaarak.
Jai Bhairav Deva…

Vahan shwaan viraajat, kar trishool dhaari.
Mahima amit tumhaari, Jai Jai Bhayahari.
Jai Bhairav Deva…

Tum bin deva seva, safal nahi hove.
Chaumukh deepak darshan, Dukh khove.
Jai Bhairav Deva…

Tel Chataki Dadhi Mishrit Bhashavali teri.
Kripa kijiye Bhairav, kariye nahi deri.
Jai Bhairav Deva…

Paanv ghungroo bajat, aru damru damkavat.
Batuknath ban balak, jal man harshavat.
Jai Bhairav Deva…

Batuknath ji ki aarti jo koi nar gaave.
Kahe dharni dhar nar, manvaanchhit fal paave.
Jai Bhairav Deva…

Lingashtakam Lyrics in Sanskrit: लिंगाष्टकम – ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं

लिंगाष्टकम (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) एक ऐसा छ: छंदों वाला मंत्र है, जिसका जाप शिवलिंग की पूजा करते समय किया जाता है| जो भी भगवान शिव का भक्त उनकी पूजा करते समय इस लिंगाष्टकम (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) का जाप करता है तो उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है|

मन की शांति के लिए भी लिंगाष्टकम (Lingashtakam Lyrics) मंत्र का निरंतर जाप बहुत ही लाभदायक होता है| इस मंत्र का जाप करने से मनुष्य की समस्त बुरी आदतें धीरे – धीरे दूर होने लगती है| कई विद्वानों का यह मानना है कि इस लिंगाष्टकम (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) मंत्र का जाप करने से मनुष्य शिवलोक को प्राप्त होता है तो आइये जाप करते है लिंगाष्टकम (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) मंत्र का|

लिंगाष्टकम

इसी के साथ हम आपको एक ऐसी वेबसाइट में बता रहे है, जिसकी सहायता से ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), रुद्राभिषेक पूजा (Rudrabhishek Puja) एवं काल सर्प दोष पूजा (Kaal Sarp Dosh Puja) के लिए बहुत ही आसानी से पंडितजी बुक कर सकते है| इसी के साथ 99Pandit से जुड़ने के लिए आप Whatsapp पर भी हमसे संपर्क कर सकते है|

लिंगाष्टकम मंत्र के लिरिक्स संस्कृत में – Lingashtakam Lyrics in Sanskrit

|| लिंगाष्टकम ||

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं
निर्मलभासित शोभित लिंगम् |
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 1 ‖

देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं
कामदहन करुणाकर लिंगम् |
रावण दर्प विनाशन लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 2 ‖

सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं
बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् |
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 3 ‖

कनक महामणि भूषित लिंगं
फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् |
दक्षसुयज्ञ विनाशन लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 4 ‖

कुंकुम चंदन लेपित लिंगं
पंकज हार सुशोभित लिंगम् |
संचित पाप विनाशन लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 5 ‖

देवगणार्चित सेवित लिंगं
भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् |
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 6 ‖

अष्टदळोपरिवेष्टित लिंगं
सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् |
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 7 ‖

सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं
सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् |
परमपदं परमात्मक लिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 8 ‖

लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖

|| इति श्री लिंगाष्टकम् ||

Lingashtakam Lyrics in Sanskrit

Lingashtakam Lyrics in Englsih – ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं

|| Lingashtakam ||

Brahmamurari surarchit lingam
Nirmalabhasit shobhit lingam |
Janmaja dukh vinashak lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 1 ‖

Devamuni pravarachit lingam
Kamdahan karunakara lingam |
Ravana darp vinashan lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 2 ‖

Sarva sugandh sulepit lingam
Buddhi vivardhan karan lingam |
Siddha surasur vandit lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 3 ‖

Kanak mahamani bhushit lingam
Phanipati veshtit shobhit lingam |
Dakshasuyajna vinashan lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 4 ‖

Kunkuma chandan lepit lingam
Pankaja haar sushobhit lingam |
Sanchit paap vinashan lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 5 ‖

Devaganaarchit sevit lingam
Bhavair-bhaktibhireva ch lingam |
Dinakar koti prabhakar lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 6 ‖

Ashtadalo pariveshtit lingam
Sarvasamudbhav karan lingam |
Ashtadaridra vinashan lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 7 ‖

Suraguru survar pujit lingam
Survana pushp sadarchit lingam |
Paramapadam parmaatmak lingam
Tatpranamami Sadashiva lingam ‖ 8 ‖

Lingashtakam idam punyam yah pathet Shiva sannidhau |
Shivalokam avapnoti Shiven sah modate ‖

|| Iti Shree Lingashtakam ||

Khatu Shyam Ji Chalisa Lyrics: खाटू श्याम जी चालीसा

खाटू श्याम जी चालीसा (Khatu Shyam Ji Chalisa) का जाप करने से भगवान खाटू श्याम जी जिन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है, वह अपने भक्तों से प्रसन्न होते है तथा भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है| सभी भक्तजन अपने जीवन में सुख समृद्धि पाने के लिए खाटू श्याम जी चालीसा (Khatu Shyam Ji Chalisa) का जाप करते है|

इस घोर कलयुग के समय में सभी भक्त अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए भगवान खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते है तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए खाटू श्याम जी चालीसा (Khatu Shyam Ji Chalisa) का भी जाप करते हैं|

खाटू श्याम जी चालीसा

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे बगलामुखी चालीसा [Baglamukhi Chalisa], या जया एकादशी व्रत कथा [Jaya Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है|

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खाटू श्याम जी चालीसा लिरिक्स हिंदी में | Khatu Shyam Chalisa Lyrics in Hindi

|| खाटू श्याम चालीसा ||

॥ दोहा॥

श्री गुरु चरणन ध्यान धर,
सुमीर सच्चिदानंद ।
श्याम चालीसा भजत हूँ,
रच चौपाई छंद ।

॥ चौपाई ॥

श्याम-श्याम भजि बारंबारा ।
सहज ही हो भवसागर पारा ॥

इन सम देव न दूजा कोई ।
दिन दयालु न दाता होई ॥

भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया ।
कही भीम का पौत्र कहलाया ॥

यह सब कथा कही कल्पांतर ।
तनिक न मानो इसमें अंतर ॥

बर्बरीक विष्णु अवतारा ।
भक्तन हेतु मनुज तन धारा ॥

बासुदेव देवकी प्यारे ।
जसुमति मैया नंद दुलारे ॥

मधुसूदन गोपाल मुरारी ।
वृजकिशोर गोवर्धन धारी ॥

सियाराम श्री हरि गोबिंदा ।
दिनपाल श्री बाल मुकुंदा ॥

दामोदर रण छोड़ बिहारी ।
नाथ द्वारिकाधीश खरारी ॥

राधाबल्लभ रुक्मणि कंता ।
गोपी बल्लभ कंस हनंता ॥

मनमोहन चित चोर कहाए ।
माखन चोरि-चारि कर खाए ॥

मुरलीधर यदुपति घनश्यामा ।
कृष्ण पतित पावन अभिरामा ॥

मायापति लक्ष्मीपति ईशा ।
पुरुषोत्तम केशव जगदीशा ॥

विश्वपति जय भुवन पसारा ।
दीनबंधु भक्तन रखवारा ॥

प्रभु का भेद न कोई पाया ।
शेष महेश थके मुनिराया ॥

नारद शारद ऋषि योगिंदरर ।
श्याम-श्याम सब रटत निरंतर ॥

कवि कोदी करी कनन गिनंता ।
नाम अपार अथाह अनंता ॥

हर सृष्टी हर सुग में भाई ।
ये अवतार भक्त सुखदाई ॥

ह्रदय माहि करि देखु विचारा ।
श्याम भजे तो हो निस्तारा ॥

कौर पढ़ावत गणिका तारी ।
भीलनी की भक्ति बलिहारी ॥

सती अहिल्या गौतम नारी ।
भई श्रापवश शिला दुलारी ॥

श्याम चरण रज चित लाई ।
पहुंची पति लोक में जाही ॥

अजामिल अरु सदन कसाई ।
नाम प्रताप परम गति पाई ॥

जाके श्याम नाम अधारा ।
सुख लहहि दुःख दूर हो सारा ॥

श्याम सलोवन है अति सुंदर ।
मोर मुकुट सिर तन पीतांबर ॥

गले बैजंती माल सुहाई ।
छवि अनूप भक्तन मान भाई ॥

श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती ।
श्याम दुपहरि कर परभाती ॥

श्याम सारथी जिस रथ के ।
रोड़े दूर होए उस पथ के ॥

श्याम भक्त न कही पर हारा ।
भीर परि तब श्याम पुकारा ॥

रसना श्याम नाम रस पी ले ।
जी ले श्याम नाम के ही ले ॥

संसारी सुख भोग मिलेगा ।
अंत श्याम सुख योग मिलेगा ॥

श्याम प्रभु हैं तन के काले ।
मन के गोरे भोले-भाले ॥

श्याम संत भक्तन हितकारी ।
रोग-दोष अध नाशे भारी ॥

प्रेम सहित जब नाम पुकारा ।
भक्त लगत श्याम को प्यारा ॥

खाटू में हैं मथुरावासी ।
पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी ॥

सुधा तान भरि मुरली बजाई ।
चहु दिशि जहां सुनी पाई ॥

वृद्ध-बाल जेते नारि नर ।
मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर ॥

हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई ।
खाटू में जहां श्याम कन्हाई ॥

जिसने श्याम स्वरूप निहारा ।
भव भय से पाया छुटकारा ॥

॥ दोहा ॥

श्याम सलोने संवारे,
बर्बरीक तनुधार ।
इच्छा पूर्ण भक्त की,
करो न लाओ बार

॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा ॥

खाटू श्याम जी आरती

Khatu Shyam Ji Chalisa Lyrics in English | श्याम-श्याम भजि बारंबारा

|| Khatu Shyam Chalisa ||

॥ Doha ॥

Shri Gurucharanan dhyaan dhar,
Sumir sachchidaanand.
Shyaam chaalisa bhajat hoon,
Rach chaupaai chhand.

॥ Chaupaai ॥

Shyaam-shyaam bhaji baarambaara.
Sahaj hi ho bhavsaagar paara.

Inn sam dev na duja koi.
Din dayaalu na daata hoi.

Bheem sputra ahilaavaatee jaaya.
Kaheen Bheem ka pautra kahalaaya.

Yeh sab katha kahi kalpaantar.
Tanik na maano ismein antar.

Barbareek Vishnu avataara.
Bhakton hetu manuj tan dhaara.

Basudev Devaki pyaare.
Jasumati maiyya Nand dhulaare.

Madhusudan Gopal Muraari.
Vrjkishor Govardhan dhari.

Siyaaram Shri Hari Govinda.
Dinpaal Shri Baal Mukunda.

Damodar ran Chhod Bihari.
Naath Dwarikadheesh kharaari.

RadhaBallabh Rukmani Kanta.
Gopi Ballabh Kans hanta.

Manmohan chit chor Kahaaye.
Maakhan chori-chhaari kar khaaye.

MurliDhar Yadupati Ghanashyama.
Krishna patit paavan Abhirama.

Mayapati Lakshmipati Ishaa.
Purushottam Keshav Jagadisha.

Vishwapati jai bhuvan pasaara.
Deenabandhu bhakton rakhvaara.

Prabhu ka bhed na koi paaya.
Shesh Mahesh thake Muniraaya.

Narad Shaarad Rishi Yogindrar.
Shyaam-shyaam sab ratat nirantar.

Kavi kodi kari kanan gintaa.
Naam apaar athaah anantaa.

Har srishti har sug mein bhaai.
Ye avataar bhakt sukhdaai.

Hriday maahi kari dekhu vichaara.
Shyaam bhaje to ho nistaara.

Kaur padhavat ganika taari.
Bheelani ki bhakti balihari.

Sati Ahilya Gautam naari.
Bhai shraapvash shila dhulaari.

Shyaam charan raj chit laai.
Pahunchi pati lok mein jaahi.

Ajamil aru sadan kasaai.
Naam prataap param gati paai.

Jaake Shyaam naam adhaara.
Sukh lahai dukh door ho saara.

Shyaam salovan hai ati sundar.
Mor mukut sir tan peetaambar.

Gale baijanti maal suhaai.
Chhavi anoop bhakton maan bhaai.

Shyaam-shyaam sumirahu din-raati.
Shyaam dupahari kar prabhaati.

Shyaam saarthi jis rath ke.
Rode door hoye us path ke.

Shyaam bhakt na kahee par haara.
Bheer pari tab Shyaam pukaara.

Rasna Shyaam naam ras pee le.
Jee le Shyaam naam ke hi le.

Sansaari sukh bhog milega.
Ant Shyaam sukh yog milega.

Shyaam prabhu hain tan ke kaale.
Man ke gore bhole-bhaale.

Shyaam sant bhakton hitkaari.
Rog-dosh adh nashe bhaari.

Prem sahit jab naam pukaara.
Bhakt lagat Shyaam ko pyaara.

Khaatu mein hain Mathura vaasi.
Parbrahm poorn avinaashi.

Sudha taan bhari murli bajaai.
Chahu dishi jahaan suni paai.

Vridh-baal jete naari nar.
Mugdh bhaye suni bansi swar.

Hadbad kar sab pahunchi jaai.
Khaatu mein jahaan Shyaam Kanhai.

Jisne Shyaam swaroop nihaara.
Bhav bhay se paaya chhutkaara.

॥ Doha ॥

Shyaam salon ne sanvaare,
Barbareek tanudhaar.
Ichha poorn bhakt ki,
Karo na laao baar.

॥ Iti Shri Khatu Shyam Chalisa ॥

Guru Paduka Stotram Lyrics in Sanskrit: गुरु पादुका स्तोत्रम

सनातन धर्म के समस्त पवित्र ग्रंथों में गुरु के भगवान से भी बड़ा दर्जा प्रदान किया गया है| इस कारण अपने गुरु देव की उपासना करने हेतु ही गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) का जाप किया जाता है|

केवल गुरु ही होते है जो किसी व्यक्ति को सत्य का मार्ग दिखाते है| अपने गुरुओं की पूजा तथा उपासना करने हेतु हिन्दू धर्म में बहुत सारे मंत्र तथा स्तोत्र है किन्तु गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) की एक अलग ही महिमा है|

इस प्रसिद्ध गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) की रचना धर्म प्रवर्तक श्री आदि शंकराचार्य जी ने की थी| ऐसा माना जाता है कि जो भी इस गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) का प्रतिदिन नियमित रूप से पाठ करता है, उससे गुरु बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते है एवं शिष्यों को आशीर्वाद भी प्रदान करते है|

गुरु पादुका स्तोत्रम

सभी पढ़ाई करने वाले बच्चों को इस गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) का जाप अवश्य ही करना चाहिए तो आइये जानते है इस गुरु पादुका स्तोत्रम (Guru Paduka Stotram Lyrics) के बारे में|

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Guru Paduka Stotram Lyrics with Hindi Meaning – गुरु पादुका स्तोत्रम हिंदी अर्थ सहित

अनंतसंसार समुद्रतार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्याम् ।
वैराग्यसाम्राज्यदपूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 1 ॥

हिंदी अर्थ – मेरे गुरु की चरण पादुकाओं को मेरा नमन, जो कि एक नाव की भांति है| जो मुझे इस जीवन के अनंत सागर को पार करने में सहायता करती है, जो मुझे मेरे गुरु के प्रति समर्पण की भावना प्रदान करती है तथा जिनकी पूजा करने से मुझे त्याग का प्रभुत्व प्राप्त होता है|

कवित्ववाराशिनिशाकराभ्यां दौर्भाग्यदावां बुदमालिकाभ्याम् ।
दूरिकृतानम्र विपत्ततिभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 2 ॥

हिंदी अर्थ – मेरे गुरु देव की पादुकाओं को प्रणाम, जो कि ज्ञान का सागर है| पूर्णिमा के चंद्रमा के समान है, जो जल है, जो कि दुर्भाग्य की अग्नि को बुझा देता है एवं उनके सामने झुकने वाले व्यक्ति के समस्त संकट को दूर कर देते है|

नता ययोः श्रीपतितां समीयुः कदाचिदप्याशु दरिद्रवर्याः।
मूकाश्र्च वाचस्पतितां हि ताभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 3 ॥

हिंदी अर्थ – मेरे गुरुदेव की चरण पादुकाओं को मेरा प्रणाम, जो उसके समक्ष झुकने वाले व्यक्ति को धन का स्वामी बना देती है| भले वह कितने भी गरीब क्यों न हो| यह गूंगे व्यक्ति को भी महान वक्ता बना देती है|

नालीकनीकाश पदाहृताभ्यां नानाविमोहादि निवारिकाभ्यां ।
नमज्जनाभीष्टततिप्रदाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 4 ॥

हिंदी अर्थ – मेरे गुरु की पादुकाओं को नमस्कार, जो हमे हमारे गुरु के कमल समान चरणों की ओर आकर्षित करती है| जो हमे अवांछित इच्छाओं से मुक्ति प्रदान करती है तथा प्रणाम करने वालों की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने में सहायता करती है|

नृपालि मौलिव्रजरत्नकांति सरिद्विराजत् झषकन्यकाभ्यां ।
नृपत्वदाभ्यां नतलोकपंकते: नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 5 ॥

हिंदी अर्थ – जो राजा के मुकुट में स्थित रत्नों की भांति चमकते है, जो मगरमच्छों से भरे झरने में दासी भी भांति प्रतीत होते है और जो भक्तों को राजा का दर्जा प्रदान करवाते है| मेरे गुरु की उन पादुकाओं को मेरा प्रणाम|

गुरु पादुका स्तोत्रम

पापांधकारार्क परंपराभ्यां तापत्रयाहींद्र खगेश्र्वराभ्यां ।
जाड्याब्धि संशोषण वाडवाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 6 ॥

हिंदी अर्थ – जो सूर्य की श्रृंखला के समान है व अंधकारमय समस्त पापों को दूर कर रही है| जो बाजों के राजा की भांति है, जो दुखों के नागों को दूर कर रहे है और जो अग्नि के समान अज्ञान के सागर को सुखा रहे है| मेरे गुरु के ऐसे चरण पादुकाओं को मेरा नमस्कार|

शमादिषट्क प्रदवैभवाभ्यां समाधिदान व्रतदीक्षिताभ्यां ।
रमाधवांध्रिस्थिरभक्तिदाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 7 ॥

हिंदी अर्थ – जो हमें शम की भांति छ: गुणों से संपन्न करती है| जो छात्रों को शाश्वत समाधि में जाने की क्षमता प्रदान करती है तथा जो भगवान विष्णु के चरणों में भक्ति प्राप्त करने में सहायता करती है| मेरे गुरु की चरण पादुकाओं को मेरा नमन है|

स्वार्चापराणां अखिलेष्टदाभ्यां स्वाहासहायाक्षधुरंधराभ्यां ।
स्वांताच्छभावप्रदपूजनाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 8 ॥

हिंदी अर्थ – मेरे गुरु की चरण पादुकाओं को नमस्कार है जो सेवा हेतु शिष्यों की सभी इच्छाएं पूर्ण करती है| जो सदा सेवा का बोझ उठाने में शामिल होती है एवं साधकों को प्राप्ति स्थिति में मदद करती है|

कामादिसर्प व्रजगारुडाभ्यां विवेकवैराग्य निधिप्रदाभ्यां ।
बोधप्रदाभ्यां दृतमोक्षदाभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ॥ 9 ॥

हिंदी अर्थ – जो गरुड़ है, जो जूनून के सांप को दूर भगाती है| जो ज्ञान एवं त्याग का खजाना प्राप्त करते है| जो व्यक्ति को प्रबुद्ध ज्ञान का आशीर्वाद प्रदान करते है| मेरे गुरु की ऐसी पादुकाओं को मेरा प्रणाम है|

Ganga Mata ki Aarti Lyrics: श्री गंगा मैय्या जी की आरती

गंगा मैय्या जी की आरती (Ganga Mata ki Aarti) का जाप गंगा माता की प्रार्थना करने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है| भक्तों के द्वारा गंगा मैय्या को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा की जाती है एवं गंगा मैय्या जी की आरती (Ganga Mata ki Aarti) का जाप किया जाता है| कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते है| तो आइये जानते है गंगा मैय्या की आरती के लिरिक्स|

गंगा मैय्या जी की आरती

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गंगा मैय्या जी की आरती हिंदी में – Ganga Mata ki Aarti Lyrics in Hindi

|| गंगा मैय्या जी की आरती ||

नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्,
सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं,
भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥

हर हर गंगे, जय माँ गंगे,
हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥

ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥

चंद्र सी जोत तुम्हारी,
जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी,
सो नर तर जाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

पुत्र सगर के तारे,
सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी,
त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

एक ही बार जो तेरी,
शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर,
परमगति पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

आरती मात तुम्हारी,
जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में,
मुक्त्ति को पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥

ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।

गंगा मैय्या जी की आरती

Ganga Mata ki Aarti Lyrics in English – ॐ जय गंगे माता

|| Ganga Mata ki Aarti ||

Har Har Gange, Jai Maa Gange,
Har Har Gange, Jai Maa Gange.

Om Jai Gange Maata,
Shri Jai Gange Maata.
Jo nar tumko dhyaata,
Manvaanchhit phal paata.

Chandr si jyot tumhaari,
Jal nirmal aata.
Sharan paden jo teri,
So nar tar jaata.
Om Jai Gange Maata…

Putra Sagar ke taare,
Sab jag ko gyaata.
Kripa drishti tumhaari,
Tribhuvan sukh daata.
Om Jai Gange Maata…

Ek hi baar jo teri,
Sharanagati aata.
Yam ki traas mita kar,
Parmagati paata.
Om Jai Gange Maata…

Aarti Maa tumhaari,
Jo jan nitya gaata.
Daas wahi sahaj mein,
Mukti ko paata.
Om Jai Gange Maata…

Om Jai Gange Maata,
Shri Jai Gange Maata.
Jo nar tumko dhyaata,
Manvaanchhit phal paata.

Om Jai Gange Maata,
Shri Jai Gange Maata.

Sai Baba Ki Aarti Lyrics: जाप करे श्री साईं बाबा की आरती का

साईं बाबा की आरती (Sai Baba Ki Aarti) का जाप भक्तों के द्वारा उनकी उपासना करने हेतु किया जाता है| गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है व इसी दिन साईं बाबा की पूजा तथा साईं बाबा की आरती (Sai Baba Ki Aarti) का जाप करना भक्तों के लिए अत्यधिक फलदायी होता है| इस दिन भक्तों के द्वारा साईं बाबा की उपासना हेतु उपवास भी रखा जाता है|

गुरुवार के दिन जो भी भक्त साईं बाबा की पूजा तथा साईं बाबा की आरती (Sai Baba Ki Aarti) का जाप करता है, उसके सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते है| साईं बाबा की आरती (Sai Baba Ki Aarti) का जाप करने से भक्तों के सभी संकट भी दूर होते है तो आइये जानते है साईं बाबा की आरती (Sai Baba Ki Aarti) के लिरिक्स|

साईं बाबा की आरती

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शिरडी साईं बाबा की आरती हिंदी में – Sai Baba Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| साईं बाबा की आरती ||

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥

शिरडी में अवतरे, ॐ जय साईं हरे॥ ॐ जय…॥

दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे।

फूलों की गल माला राजे, कफनी, शैला सुन्दर साजे॥

कारज सब के करें, ॐ जय साईं हरे ॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

काकड़ आरत भक्तन गावें, गुरु शयन को चावड़ी जावे

सब रोगों को उदी भगावे, गुरु फकीरा हमको भावे॥

भक्तन भक्ति करें, ॐ जय साईं हरे ॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाई, बौद्ध जैन सब भाई भाई।

रक्षा करते बाबा साईं, शरण गहे जब द्वारिकामाई॥

अविरल धूनि जरे, ॐ जय साईं हरे ॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

भक्तों में प्रिय शामा भावे, हेमडजी से चरित लिखावे।

गुरुवार की संध्या आवे, शिव, साईं के दोहे गावे॥

अंखियन प्रेम झरे, ॐ जय साईं हरे ॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

शिरडी साईं हरे, बाबा ॐ जय साईं हरे॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।

भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥

साईं बाबा की आरती

Sai Baba Ki Aarti Lyrics in English – ॐ जय साईं हरे

|| Sai Baba Ki Aarti ||

Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Bhaktajano ke karan, unke kasht nivaran.
Shirdi mein avatar, Om Jai Sai Ram.

Dukhiyon ke sab kashtan kaaje, Shirdi mein Prabhu aap viraje.
Phoolon ki gal mala raaje, kafni, shaila sundar saje.
Kaaryan sab ke karein, Om Jai Sai Ram.

Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Kaakad aarat bhakton gaavein, guru shayan ko chavdi jaave.
Sab rogo ko udi Bhagave, guru fakira hamko bhavaye.
Bhakton bhakti karein, Om Jai Sai Ram.

Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Hindu, Muslim, Sikh, Isaai, Baudh Jain sab bhai bhai.
Raksha karte Baba Sai, sharan gahe jab Dwarika Mai.
Aviral dhuni jale, Om Jai Sai Ram.

Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Bhakton mein priy shama Bhavaye, Hemadji se charit likhaave.
Guruvaar ki sandhya aave, Shiv, Sai ke dohe gaave.
Ankhiyan prem jhare, Om Jai Sai Ram.

Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Shirdi Sai Ram, Baba Om Jai Sai Ram.
Om Jai Sai Ram, Baba Shirdi Sai Ram.
Bhaktajano ke karan, unke kasht nivaran.

Annapoorna Stotram Lyrics: पाठ करे अन्नपूर्णा स्तोत्र का संस्कृत में

अन्नपूर्णा स्तोत्र (Annapoorna Stotram) का जाप अन्नपूर्णा माता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| अन्नपूर्णा माता को माँ जगदम्बा का ही एक एक रूप माना जाता है, जो भी भक्त माता अन्नपूर्णा की सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा करता है एवं इस अन्नपूर्णा स्तोत्र (Annapoorna Stotram) का जाप करता है|

उसे सदा माता अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त होता है| हिन्दू धर्म में बताया गया है कि माता अन्नपूर्णा ही इस सम्पूर्ण संसार का भरण – पोषण करती है| इस अन्नपूर्णा स्तोत्र (Annapoorna Stotram) की रचना गुरु आदि शंकराचार्य जी के द्वारा की गई थी| आइये जानते है अन्नपूर्णा स्तोत्र (Annapoorna Stotram) के लिरिक्स के बारे में|

अन्नपूर्णा स्तोत्र

इसी के साथ यदि आप शिव तांडव स्तोत्रम [Shiv Tandav Stotram], सरस्वती जी की आरती [Saraswati Aarti], या कनकधारा स्तोत्र [Kanakdhara Stotra] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है|

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माता अन्नपूर्णा स्तोत्र संस्कृत में – Annapoorna Stotram Lyrics in Sanskrit

|| अन्नपूर्णा स्तोत्र ||

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।
काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥२॥

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।
सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥३॥

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी ।
मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥४॥

दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥५॥

उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरी
वेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी ।
सर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥६॥

आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी
काश्मीरात्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी ।
कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥७॥

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी
वामं स्वादुपयोधरप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥८॥

चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी
चन्द्रार्काग्निसमानकुन्तलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी ।
मालापुस्तकपाशासाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥९॥

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी
साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरी ।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१०॥

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥११॥

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥१२॥

श्री शङ्कराचार्य कृतं

अन्नपूर्णा स्तोत्र

Annapoorna Stotram Lyrics in English – नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी

|| Annapoorna Stotram ||

Nitya nandakari vara bhayakari saundarya ratnakari
Nirdhoot akhil Ghora Pavankari Pratyakshamaheeshwari.
Praleyachalvamshapavankari kashipuradhishwari
Bhikshaam Dehi kripa Avalambana Kari Maata annapoorneshwari॥1॥

Naanaa ratna vichitra bhushanakari hema ambara dambhari
Muktaa haara vilambamaana vilasad vakshoja kumbha antari.
Kaashmira agaru vaasita angaruchire kashi pura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalam banakari maata annapoorneshwari॥2॥

Yogaa nandakari ripu kshayakari dharm artha nishtaakari
Chandra arka anala bhaasamaana lahrari trailokya rakshaakari.
Sarvaishvarya Samasta Vaanchhitakari kashi pura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥3॥

Kailaas achala kandaara layakari gauri uma shankari
Kaumaari nigama artha gocharakari omkaara beeja akshari.
Moksha dvaara kapaata paatankari kashipura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥4॥

Drishya adrishya vibhooti vaahanakari brahmaanda bhaandodari
Leelaa naataka sootra bhedaanakari vijnaana deepa ankuri.
Shrivishweshamanahprasaadnakari kashipuradhishwari
Bhikshaam dehi kripaavalambanakari maataannapoorneshwari॥5॥

Urvi Sharva Janeswari Bhagavati Maata Annapoorneshwari
Veeni Neela samaana Kunta lahari Nitya annaadaaneshwari.
Sarvaa nandakari sadaa shubhakari kashipuradhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥6॥

Aadiksha anta samasta varnanakari shambho strivibhaa vakari
Kaashmiraa trijaleshwari trilahari nityaankura sharvari.
Kaamaa kaankshakari janodayakari kashipura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥7॥

Devi sarva vichitra ratna rachitaa daakshaayanee sundari
Vaamam svaadu payo dhara priyakari saubhaagya maaheshwari.
Bhakta abheeshṭakari sadaa shubhakari kashipura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥8॥

Chandra arka anala koti koti sadrusha chandra amshubimba adhari
Chandra arka agni samaana kuntaladhari chandra arka varneshwari.
Maalaa pustaka paashaas ankushadhari kashipura adhishwari
Bhikshaam dehi kripa avalambanakari maata annapoorneshwari॥9॥

Kshatra traanakari maha’bhyakari maata kripaasaagari
Saakshaan mokshakari sadaa shivakari vishweshwara shreedhari.
Dakshaa krandakari niraamayakari kashipura adhishwari
Bhikshaam Dehi Kripaavalam Banakari Maata annapoorneshwari॥10॥

Annapoorne Sadaa Poorne shankara Praana vallabhe।
Gyaana vairaagya siddhyartham bhikshaam dehi cha paarvati॥11॥

Maata cha Parvati devi Pitaa devo maheshwarah।
Baandhavaah Shiva Bhaktaashcha Swadesho bhuvanatrayam॥12॥

Shree Shankaracharya Krutam

Narasimha Kavacham Lyrics: श्री नरसिम्हा कवच मंत्र

नरसिम्हा कवच मंत्र (Narasimha Kavacham Lyrics) का पाठ भगवान नरसिम्हा से प्रार्थना करने के लिए किया जाता है| भगवान नरसिम्हा को विष्णु जी का अवतार माना जाता है| साथ ही भगवान नरसिम्हा को विष्णु जी के सभी अवतारों में सबसे शक्तिशाली अवतार माना जाता था| जिनका आधा शरीर सिंह का तथा आधा शरीर मनुष्य था|

नरसिम्हा कवच मंत्र (Narasimha Kavacham Lyrics) का जाप करने से मनुष्य सभी संकट दूर हो जाते है| नरसिम्हा कवच जाप करने जातक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना देता है| इस नरसिम्हा कवच (Narasimha Kavacham Lyrics) का जाप करने नकारात्मकता दूर होती है|

Narasimha Kavacham Lyrics

साथ ही जो भी भक्त नरसिम्हा कवच मंत्र (Narasimha Kavacham Lyrics) का जाप प्रतिदिन करता है, उसे भगवान नरसिम्हा की आशीर्वाद प्राप्त होता है तो आइये जानते है श्री नरसिम्हा कवच मंत्र (Narasimha Kavacham Lyrics) के बारे में|

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श्री नरसिम्हा कवच मंत्र लिरिक्स हिंदी में – Narasimha Kavacham Lyrics in Hindi

|| नरसिम्हा कवच मंत्र ||

नृसिंह कवचम वक्ष्येऽ प्रह्लादनोदितं पुरा ।
सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रवनाशनं ॥
सर्वसंपत्करं चैव स्वर्गमोक्षप्रदायकम ।
ध्यात्वा नृसिंहं देवेशं हेमसिंहासनस्थितं॥

विवृतास्यं त्रिनयनं शरदिंदुसमप्रभं ।
लक्ष्म्यालिंगितवामांगम विभूतिभिरुपाश्रितं ॥

चतुर्भुजं कोमलांगम स्वर्णकुण्डलशोभितं ।
ऊरोजशोभितोरस्कं रत्नकेयूरमुद्रितं ॥

तप्तकांचनसंकाशं पीतनिर्मलवासनं ।
इंद्रादिसुरमौलिस्थस्फुरन्माणिक्यदीप्तिभि: ॥

विराजितपदद्वंद्वं शंखचक्रादिहेतिभि:।
गरुत्मता च विनयात स्तूयमानं मुदान्वितं ॥

स्वहृतकमलसंवासम कृत्वा तु कवचम पठेत
नृसिंहो मे शिर: पातु लोकरक्षात्मसंभव:।
सर्वगोऽपि स्तंभवास: फालं मे रक्षतु ध्वनन ।
नरसिंहो मे दृशौ पातु सोमसूर्याग्निलोचन: ॥

शृती मे पातु नरहरिर्मुनिवर्यस्तुतिप्रिय: ।
नासां मे सिंहनासास्तु मुखं लक्ष्मिमुखप्रिय: ॥

सर्वविद्याधिप: पातु नृसिंहो रसनां मम ।
वक्त्रं पात्विंदुवदन: सदा प्रह्लादवंदित:॥

नृसिंह: पातु मे कण्ठं स्कंधौ भूभरणांतकृत ।
दिव्यास्त्रशोभितभुजो नृसिंह: पातु मे भुजौ ॥

करौ मे देववरदो नृसिंह: पातु सर्वत: ।
हृदयं योगिसाध्यश्च निवासं पातु मे हरि: ॥

मध्यं पातु हिरण्याक्षवक्ष:कुक्षिविदारण: ।
नाभिं मे पातु नृहरि: स्वनाभिब्रह्मसंस्तुत: ॥

ब्रह्माण्डकोटय: कट्यां यस्यासौ पातु मे कटिं ।
गुह्यं मे पातु गुह्यानां मंत्राणां गुह्यरुपधृत ॥

ऊरु मनोभव: पातु जानुनी नररूपधृत ।
जंघे पातु धराभारहर्ता योऽसौ नृकेसरी ॥

सुरराज्यप्रद: पातु पादौ मे नृहरीश्वर: ।
सहस्रशीर्षा पुरुष: पातु मे सर्वशस्तनुं ॥

महोग्र: पूर्वत: पातु महावीराग्रजोऽग्नित:।
महाविष्णुर्दक्षिणे तु महाज्वालस्तु निर्रुतौ ॥

पश्चिमे पातु सर्वेशो दिशि मे सर्वतोमुख: ।
नृसिंह: पातु वायव्यां सौम्यां भूषणविग्रह: ॥

ईशान्यां पातु भद्रो मे सर्वमंगलदायक: ।
संसारभयद: पातु मृत्यूर्मृत्युर्नृकेसरी ॥

इदं नृसिंहकवचं प्रह्लादमुखमंडितं ।
भक्तिमान्य: पठेन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ॥

पुत्रवान धनवान लोके दीर्घायुर्उपजायते ।
यंयं कामयते कामं तंतं प्रप्नोत्यसंशयं ॥

सर्वत्र जयवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत ।
भुम्यंतरिक्षदिवानां ग्रहाणां विनिवारणं ॥

वृश्चिकोरगसंभूतविषापहरणं परं ।
ब्रह्मराक्षसयक्षाणां दूरोत्सारणकारणं ॥

भूर्जे वा तालपत्रे वा कवचं लिखितं शुभं ।
करमूले धृतं येन सिद्ध्येयु: कर्मसिद्धय: ॥

देवासुरमनुष्येशु स्वं स्वमेव जयं लभेत ।
एकसंध्यं त्रिसंध्यं वा य: पठेन्नियतो नर: ॥

सर्वमंगलमांगल्यंभुक्तिं मुक्तिं च विंदति ।
द्वात्रिंशतिसहस्राणि पाठाच्छुद्धात्मभिर्नृभि: ।
कवचस्यास्य मंत्रस्य मंत्रसिद्धि: प्रजायते।
आनेन मंत्रराजेन कृत्वा भस्माभिमंत्रणम ॥

तिलकं बिभृयाद्यस्तु तस्य गृहभयं हरेत।
त्रिवारं जपमानस्तु दत्तं वार्यभिमंत्र्य च ॥

प्राशयेद्यं नरं मंत्रं नृसिंहध्यानमाचरेत ।
तस्य रोगा: प्रणश्यंति ये च स्यु: कुक्षिसंभवा: ॥

किमत्र बहुनोक्तेन नृसिंहसदृशो भवेत ।
मनसा चिंतितं यस्तु स तच्चाऽप्नोत्यसंशयं ॥

गर्जंतं गर्जयंतं निजभुजपटलं स्फोटयंतं
हरंतं दीप्यंतं तापयंतं दिवि भुवि दितिजं क्षेपयंतं रसंतं ।
कृंदंतं रोषयंतं दिशिदिशि सततं संभरंतं हरंतं ।
विक्षंतं घूर्णयंतं करनिकरशतैर्दिव्यसिंहं नमामि ॥

॥ इति प्रह्लादप्रोक्तं नरसिंहकवचं संपूर्णंम ॥

Narasimha Kavacham Lyrics

Narasimha Kavacham Lyrics in English – नृसिंह कवचम वक्ष्येऽ प्रह्लादनोदितं पुरा

|| Narasimha Kavacham Lyrics ||

Narasingha Kavacham vakshye prahladanoditam pura.
Sarvarakshakaram punyam sarvopadravanashanam.
Sarvasampatkaram chaiv svargamokshapradayakam.
Dhyatva Narasimham Devesham Hema-Singhasanasthitam.

Vivritasyam trinayanam sharadindusamaprabham.
Lakshmyalingitavamangam vibhutibhirupashritam.

Chaturbhujam komalamgam svarnakundalashobhitam.
Urojashobhitoraskam ratnakeyuramuditam.

Taptakanchanasankasham pitanirmalavasanam.
Indradsuramaulisthasphuranmanikyadiptibhih.

Virajitapadadvandvam shankhachakradihetibhih.
Garutmata cha vinayat stuoyamanam mudanvitam.

Svahritakamalasamvasam kritva tu kavacham pathet.
Narasingho me shirah patu Lokarakshatmasambhavah.
Sarvago’pi Stambhavasah Phalam me Rakshatu dhvanan.
Narasimho me Drishau patu somasuryagnilocanah.

Shriti me patu narhari munivaryastutipriyah.
Nasam me sinhinasastu mukham lakshmimukhapriyah.

Sarvavidyadhipah patu Narasimho rasanam mama.
Vaktram patvinduvadanah sada prahladavanditah.

Narasimho patu me kantham skandhau bhuharanantakrit.
Divyashtrashobhitabhujo narasimho patu me Bhujau.

Karau me devavarado narasimho patu sarvatah.
Hridayam Yogisadhyastr Nivasam patu me hari.

Madhyam patu hiranyakshavakshakukshividarana.
Nabhim me patu nrihari svanabhivramhasamstutah.

Brahmandakotayeh katyam yasyasau patu me katim.
Guhyam me patu guhyanam mantranam guhyarupadhrut.

Uru manobhavah patu januni nararupadhrut.
Janghe patu dharabharaharta yo’sau nrikesari.

Surarajyapradah patu padau me nriharieshvarah.
Sahasrasirsha purushah patu me sarvashastanum.

Mahograhpurvatah patu Mahaviragrajo’gnitah.
Mahavishnurdakshine tu mahajwalastu nirrutau.

Paschime patu sarvesho dishi me Sarvatomukhah.
Narasimho patu Vayavyam Saumyam Bhushanavigrahah.

Ishanyam patu bhadro me sarvamangaladayakah.
Samsarabhayadah patu mrityurmrityurnrikesari.

Idam narasimhakavacham prahladamukhamanditam.
Bhaktimanyah pathennityam sarvapapaipramuchyate.

Putravan dhanavan loke dirghayurupajayate.
Yamyam kamayate kamam tamtam prapnotyasanshayam.

Sarvatra Jayavapnoti Sarvatra Vijayibhavet.
Bhuvyantarikshadivanam grahanam vinivarana.

Vrishchikoragasambhutavishapaharanam param.
Brahmarakshasayakshanam durotsaranakaranam.

Bhurje va talapatreve kavacham likhitam shubham.
Karamoole dhrutam yena siddhyet karmasiddhayah.

Devasuramanushyeshu svam Svameva Jayam labheth.
Ekasandhyam trisandhyam va yah pathenniyato narah.

Sarvamangalamangalyam bhuktin muktin cha vindati.
Dvatrimsatisahasrani pathachchuddhatmabhirnribhih.

Kavachasyasya mantrasya mantrasiddhih prajayate.
Anena mantrarajena kritva bhasmabhimantranam.

Tilakam bibhriyad yastu tasya grihabhayam haret.
Trivaram Japamanastu dattam Varyabhimantrya cha.

Prashayed yam Naram Mantram Narasimhadhyanamacharet.
Tasya rogaah pranashyanti ye cha syuh kukshisambhavah.

Kimatra bahunoktena narasimhasadrisho bhavet.
Manasa chintitam yastu sa tachchapnotyasan shayam.

Garjantam garjayantam nijabhujapatalam sphotayantam
Harantam deepyantam tapayantam divi bhuvam diti jankshepayantam rasantam
Krindantam roshayantam dishidishi satatam sambharantam harantam
Vikshantam ghurnayantam karanikarashatairdivyasingham namami.

|| Iti Prahladaprokta Narasimhakavacham Sampurnam ||

Chandi Dhwaja Stotram: श्री चंडी ध्वजा स्तोत्रम हिंदी में

माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों में एक रूप माता चंडी का भी है| चंडी ध्वजा स्तोत्रम (Chandi Dhwaja Stotram) का जाप माता चंडी को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है| जैसा कि आप सभी को ज्ञात है माता चंडी की पूजा उग्र रूप में की जाती है| माँ चण्डी की पूजा करने तथा श्री चंडी ध्वजा स्तोत्रम (Chandi Dhwaja Stotram) का जाप करने से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है|

मुख्यतः इस चंडी ध्वजा स्तोत्रम (Chandi Dhwaja Stotram) का जाप नवरात्रि के समय माँ चंडी की पूजा के बाद किया जाता है| माता चंडी के श्री चंडी ध्वजा स्तोत्रम (Chandi Dhwaja Stotram) पाठ भक्तों सभी प्रकार के दुःख तथा संकटों से मुक्ति प्रदान करता है तो आइये पढ़ते है इस अत्यंत प्रभावशाली चंडी ध्वजा स्तोत्रम (Chandi Dhwaja Stotram) के बारे में|

चंडी ध्वजा स्तोत्रम

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चंडी ध्वजा स्तोत्रम लिरिक्स हिंदी में – Chandi Dhwaja Stotram Lyrics in Hindi

|| चंडी ध्वजा स्तोत्रम ||

॥ विनियोग ॥

अस्य श्री चण्डी-ध्वज स्तोत्र मन्त्रस्य मार्कण्डेय ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः,
श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रां बीजं, श्रीं शक्तिः,
श्रूं कीलकं मम वाञ्छितार्थ फल सिद्धयर्थे विनियोगः.

॥ अंगन्यास ॥

श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः ।

॥ मूल पाठ ॥

ॐ श्रीं नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै भूत्त्यै नमो नमः ।
परमानन्दरुपिण्यै नित्यायै सततं नमः॥१॥

नमस्तेऽस्तु महादेवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा॥२॥

रक्ष मां शरण्ये देवि धन-धान्य-प्रदायिनि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा॥३॥

नमस्तेऽस्तु महाकाली पर-ब्रह्म-स्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा॥४॥

नमस्तेऽस्तु महालक्ष्मी परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा॥५॥

नमस्तेऽस्तु महासरस्वती परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा॥६॥

नमस्तेऽस्तु ब्राह्मी परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥७॥

नमस्तेऽस्तु माहेश्वरी देवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥८॥

नमस्तेऽस्तु च कौमारी परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥९॥

नमस्ते वैष्णवी देवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१०॥

नमस्तेऽस्तु च वाराही परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥११॥

नारसिंही नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१२॥

नमो नमस्ते इन्द्राणी परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१३॥

नमो नमस्ते चामुण्डे परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१४॥

नमो नमस्ते नन्दायै परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१५॥

रक्तदन्ते नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१६॥

नमस्तेऽस्तु महादुर्गे परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१७॥

चंडी ध्वजा स्तोत्रम

शाकम्भरी नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१८॥

शिवदूति नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥१९॥

नमस्ते भ्रामरी देवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२०॥

नमो नवग्रहरुपे परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२१॥

नवकूट महादेवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२२॥

स्वर्णपूर्णे नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२३॥

श्रीसुन्दरी नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२४॥

नमो भगवती देवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२५॥

दिव्ययोगिनी नमस्ते परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२६॥

नमस्तेऽस्तु महादेवि परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२७॥

नमो नमस्ते सावित्री परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२८॥

जयलक्ष्मी नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥२९॥

मोक्षलक्ष्मी नमस्तेऽस्तु परब्रह्मस्वरुपिणि ।
राज्यं देहि धनं देहि साम्राज्यं देहि मे सदा ॥३०॥

चण्डीध्वजमिदं स्तोत्रं सर्वकामफलप्रदम् ।
राजते सर्वजन्तूनां वशीकरण साधनम् ॥३१॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥