Shri Badrinath Ji Ki Aarti Lyrics: श्री बद्रीनाथ जी की आरती

श्री बद्रीनाथ जी की आरती (Badrinath Ji Ki Aarti) बद्री नारायण रूपी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए की जाती है| भगवान बद्रीनाथ जी भक्त वत्सल है तथा उनकी महिमा भी अपार है| माना जाता है कि भगवान बद्रीनाथ जी आरती का गान करने से सभी कष्ट दूर होते है तथा भगवान बद्रीनाथ जी की कृपा भी प्राप्त की जाती है| बद्रिकाश्रम में भगवान बद्रीनाथ जी इस सम्पूर्ण जगत के कल्याण के विराजमान है| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको श्री बद्रीनाथ जी की आरती (Badrinath Ji Ki Aarti) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे|

बद्रीनाथ जी की आरती

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श्री बद्रीनाथ जी की आरती लिरिक्स हिंदी में | Badrinath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| बद्रीनाथ जी की आरती ||

पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मंदिर शोभितम् ।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥

शेष सुमिरन करत निशदिन,
धरत ध्यान महेश्वरम् ।
वेद ब्रह्मा करत स्तुति,
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

शक्ति गौरी गणेश शारद,
नारद मुनि उच्चारणम् ।
जोग ध्यान अपार लीला,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर,
धूप दीप प्रकाशितम् ।
सिद्ध मुनिजन करत जय जय,
बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

यक्ष किन्नर करत कौतुक,
ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम् ।
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

कैलाश में एक देव निरंजन,
शैल शिखर महेश्वरम् ।
राजयुधिष्ठिर करत स्तुति,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

श्री बद्रजी के पंच रत्न,
पढ्त पाप विनाशनम् ।
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य,
प्राप्यते फलदायकम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मंदिर शोभितम् ।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥

बद्रीनाथ जी की आरती

Badrinath Ji Ki Aarti Lyrics in English | श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्

|| Badrinath Ji Ki Aarti ||

Pawan mand sugandh shital,
Hem mandir shobhitam.
Nikat Ganga baht nirmal,
Shri Badrinath Vishvam bharam.

Shesh Sumiran Karat Nishadin,
Dharat dhyan Maheshwaram.
Ved Brahma karat stuti,
Shri Badrinath Vishvambharam.
Pawan mand sugandh shital…

Shakti Gauri Ganesh Sharad,
Narad muni ucharanam.
Jog dhyan apar leela,
Shri Badrinath Vishvambharam.
Pawan mand sugandh shital…

Indra Chandra Kubera dhuni kar,
Dhoop deep prakashitam.
Siddh munijan karat jay jay,
Badrinath Vishvambharam.
Pawan mand sugandh shital…

Yaksh kinnar karat kautuk,
Gyan Gandharv prakashitam.
Shri Lakshmi Kamala chavardol,
Shri Badrinath Vishvambharam.
Pawan mand sugandh shital…

Kailash mein ek dev niranjana,
Shail shikhar Maheshwaram.
Rajyudhishthir karat stuti,
Shri Badrinath Vishvambharam.
Pawan mand sugandh shital…

Shri Badraji ke panch ratna,
Padht pap vinashanam.
Koti tirth bhavet punya,
Prapyate phaladayakam.
Pawan mand sugandh shital…

Pawan mand sugandh shital,
Hem mandir shobhitam.
Nikat Ganga baht nirmal,
Shri Badrinath Vishvambharam.

Parvati Mata Ji Ki Aarti Lyrics: पार्वती जी की आरती

पार्वती जी की आरती (Parvati Ji Ki Aarti) का जाप करने से भक्तों की सभी परेशानियां दूर हो जाती है| माता पार्वती को भगवान शिव की पत्नी के रूप में जाना जाता है| भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ माता पार्वती जी की पूजा व पार्वती जी की आरती (Parvati Ji Ki Aarti) का जाप करने से भक्तों को बहुत लाभ होता है| जो महिला प्रतिदिन माता पार्वती जी की आरती (Parvati Ji Ki Aarti) का जाप करती है, उनके पति को लम्बी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है| सावन के समय भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती जी की आरती (Parvati Ji Ki Aarti) करने का विधान माना जाता है|

पार्वती जी की आरती

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जय पार्वती माता आरती | Parvati Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| पार्वती जी की आरती ||

जय पार्वती माता,
जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

अरिकुल कंटक नासनि,
निज सेवक त्राता,
जगजननी जगदम्बा,
हरिहर गुण गाता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

सिंह को वहान साजे,
कुंडल है साथा,
देव वधू जस गावत,
नृत्य करत ता था ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

सतयुग रूप शील अतिसुंदर,
नाम सती कहलाता,
हेमाचंल घर जन्मी,
सखियाँ संगराता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे,
हेमाचंल स्थाता,
सहस्त्र भुजा तनु धरिके,
चक्र लियो हाथा ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

सृष्टि रूप तुही है जननी,
शिव संग रंगराता,
नन्दी भृंगी बीन लही,
सारा जग मदमाता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

देवन अरज करत हम,
चरण ध्यान लाता,
तेरी कृपा रहे तो,
मन नहीं भरमाता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

मैया जी की आरती,
भक्ति भाव से जो नर गाता,
नित्य सुखी रह करके,
सुख संपत्ति पाता ।
॥ जय पार्वती माता… ॥

जय पार्वती माता,
जय पार्वती माता,
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता ।

जय पार्वती माता,
जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी,
शुभ फल की दाता ।

पार्वती जी की आरती

Parvati Ji Ki Aarti Lyrics in English | पार्वती माता जी की आरती

|| Parvati Ji Ki Aarti ||

Jai Parvati Mata,
Jai Parvati Mata
Brahma Sanatan Devi,
Shubh Phal ki Data.
|| Jai Parvati Mata… ||

Arikul Kantak Nasani,
Nij Sevak Traata,
Jagjanani Jagdamba,
Harihar Gun Gaata.
|| Jai Parvati Mata… ||

Singh ko vahan saje,
Kundal hai saatha,
Dev Vadhu jas gavat,
Nritya karat tha.
|| Jai Parvati Mata… ||

Satyug Roop Shil atisundar,
Naam Sati kahlata,
Hemachal ghar janmi,
Sakhiyaan sang rata.
|| Jai Parvati Mata… ||

Shumbh Nishumbh vidaare,
Hemachal sthata,
Sahasra bhujaa tanu dharike,
Chakra liyo haatha.
|| Jai Parvati Mata… ||

Srishti Roop tuhi hai Janani,
Shiv sang rangrata,
Nandi bhringi been lahi,
Sara jag madmata.
|| Jai Parvati Mata… ||

Devan araj karat hum,
Charan dhyan laata,
Teri kripa rahe to,
Man nahi bharmata.
|| Jai Parvati Mata… ||

Maiya Ji ki Aarti,
Bhakti bhav se jo nar gaata,
Nitya sukhi rah karke,
Sukh sampatti paata.
|| Jai Parvati Mata… ||
Jai Parvati Mata,
Jai Parvati Mata,
Brahma Sanatan Devi,
Shubh Phal ki Data.

Jai Parvati Mata,
Jai Parvati Mata
Brahma Sanatan Devi,
Shubh Phal ki Data.

Aarti Yugal Kishoreki Kije Lyrics: श्रीकृष्ण जी की आरती

श्रीकृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Ji Ki Aarti) का जाप करने से भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होते है| श्रीकृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Ji Ki Aarti) का गान मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस अर्थात जन्माष्टमी पर किया जाता है| भगवान श्री कृष्ण इस सम्पूर्ण सृष्टि के रचियता भगवान विष्णु के ही अवतार है| भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के पश्चात श्रीकृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Ji Ki Aarti) का जाप करना अनिवार्य होता है| बिना श्रीकृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Ji Ki Aarti) का गान किये भगवान श्रीकृष्ण की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है| श्रीकृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Ji Ki Aarti) का जाप करने से व्यक्ति का मन शांत होता है|

श्रीकृष्ण जी की आरती

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आरती युगल किशोर जी की | Shri Krishna Aarti Lyrics in Hindi

|| श्रीकृष्ण जी की आरती ||

आरती युगलकिशोर की कीजै ।
तन मन धन न्योछावर कीजै ॥

गौरश्याम मुख निरखन लीजै ।
हरि का रूप नयन भरि पीजै ॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा ।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा ॥

ओढ़े नील पीत पट सारी ।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी ॥

फूलन सेज फूल की माला ।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला ॥

कंचन थार कपूर की बाती ।
हरि आए निर्मल भई छाती ॥

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी ।
आरती करें सकल नर नारी ॥

नंदनंदन बृजभान किशोरी ।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी ॥

श्रीकृष्ण जी की आरती

Shri Krishna Ji Ki Aarti Lyrics in English | श्रीकृष्ण जी की आरती

|| Shri Krishna Ji Ki Aarti ||

Aarti yugal-kishor ki kijiye,
Tan man dhan nyochhavar kijiye.

Gaurshyam mukh nirkhan lijiye,
Hari ka roop nayan bhari peejiye.

Ravi shashi koti badan ki shobha,
Tahi nirkhi mero man lobha.

Odhe neel peet pat saari,
Kunj-bihari girivar-dhari.

Phoolan sej phool ki mala,
Ratna sinhasan baithe Nandalala.

Kanchan thar kapoor ki baati,
Hari aaye nirmal bhai chaati.

Shri Purushottam Girivar-dhari,
Aarti karein sakal nar-nari.

Nand-nandan brij-bhan kishori,
Paramanand swami avichal jori.

Ganpati Ji Ki Aarti Lyrics: गणपति जी की आरती

गणपति जी की आरती (Ganpati Ji Ki Aarti) किसी भी प्रकार के शुभ कार्य को प्रारंभ करने से पहले से की जाती है| गणपति जी की आरती (Ganpati Ji Ki Aarti) का जाप करने भगवान गणेश जी महाराज अपने भक्तों से बहुत प्रसन्न होते है| गणपति जी की आरती (Ganpati Ji Ki Aarti) के बहुत ही सारे संस्करण है| जिनकी रचना अलग – अलग कवियों तथा भक्तों के द्वारा की गई है| गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है| किसी भी प्रकार का कार्य या कोई भी पूजा गणपति जी की आरती (Ganpati Ji Ki Aarti) के बिना अधूरी मानी जाती है| गणपति जी की आरती (Ganpati Ji Ki Aarti) को प्रेम तथा भक्ति के भाव से गाने से यह भक्त को दिव्य आनंद की अनुभूति करवाती है|

गणपति जी की आरती

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गणपति की सेवा मंगल मेवा | Ganpati Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| गणपति जी की आरती ||

गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं।

तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

रिद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजें,अरु आनन्द सों चमर करैं।

धूप-दीप अरू लिए आरतीभक्त खड़े जयकार करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

गुड़ के मोदक भोग लगत हैंमूषक वाहन चढ्या सरैं।

सौम्य रूप को देख गणपति केविघ्न भाग जा दूर परैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

भादो मास अरु शुक्ल चतुर्थीदिन दोपारा दूर परैं।

लियो जन्म गणपति प्रभु जीदुर्गा मन आनन्द भरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

अद्भुत बाजा बजा इन्द्र कादेव बंधु सब गान करैं।

श्री शंकर के आनन्द उपज्यानाम सुन्यो सब विघ्न टरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

आनि विधाता बैठे आसन,इन्द्र अप्सरा नृत्य करैं।

देख वेद ब्रह्मा जी जाकोविघ्न विनाशक नाम धरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

एकदन्त गजवदन विनायकत्रिनयन रूप अनूप धरैं।

पगथंभा सा उदर पुष्ट हैदेव चन्द्रमा हास्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

दे शराप श्री चन्द्रदेव कोकलाहीन तत्काल करैं।

चौदह लोक में फिरें गणपतितीन लोक में राज्य करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

उठि प्रभात जप करैंध्यान कोई ताके कारज सर्व सरैं

पूजा काल आरती गावैं।ताके शिर यश छत्र फिरैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

गणपति की पूजा पहले करने सेकाम सभी निर्विघ्न सरैं।

सभी भक्त गणपति जी केहाथ जोड़कर स्तुति करैं॥

गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥

गणपति जी की आरती

Ganpati Ji Ki Aarti Lyrics in English | गणपति जी की आरती

|| Ganpati Ji Ki Aarti ||

Ganpati ki seva mangal meva, seva se sab vighn tarain.

Teen lok ke sakal devta, dwar khade nit arj karain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Riddhi-siddhi dakshin vaam viraje, aru anand so chamara karain.

Dhoop-deep aru liye aarti, bhakt khade jaykaar karain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Gud ke modak bhog lagta hai, mooshak vahan chadhya sarain.

Saumya roop ko dekh Ganpati, vighn bhag ja door parain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Bhado maas aru shukla chaturthi, din dopahara door parain.

Liyo janam Ganpati Prabhu ji, Durga man aanand bharain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Adbhut baza baja Indra ka dev, sab gaan karain.

Shri Shankar ke aanand upajyanam, sunyo sab vighn tarain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Aani vidhata baithe aasan, Indra apsara nritya karain.

Dekh Ved Brahma ji, jako vighn vinashak naam dharaain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Ekadant gajvadan Vinayak, trinayan roop anoop dharaain.

Pagthamba sa udar pusht hai, dev chandra-ma hasya karain.

Ganpati ki seva mangal meva…

De shraap Shri Chandradev ko, kalahin tatkal karain.

Chaudah lok mein fire Ganpati, teen lok mein rajya karain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Uthi prabhat jap karain, dhyan koi take kaaraj sarain.

Puja kaal aarti gaavain, take shir yash chatra phirain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Ganpati ki pooja pehle karne se, kaam sabhi nirvighn sarain.

Sabhi bhakt Ganpati ji ke saath jodkar stuti karain.

Ganpati ki seva mangal meva…

Aarti Kije Shri Ramlala Ki Lyrics: रामलला की आरती

रामलला की आरती (Ramlala Ki Aarti) का पाठ करने से भगवान श्री राम प्रसन्न होते है| जैसा आप सभी लोग जानते ही है कि 500 वर्ष के कठोर संघर्ष के पश्चात अयोध्या में हमारे प्रभु श्री राम के मंदिर का उद्घाटन हो चूका है| जिसके चलते सम्पूर्ण भारत देश में भक्ति का माहौल हो गया है| भगवान श्रीराम की उपासना करने के पश्चात उनकी कृपा पाने के लिए रामलला की आरती (Ramlala Ki Aarti) का गान किया जाता है| श्री रामलला की पूजा बिना रामलला की आरती (Ramlala Ki Aarti) के पूर्ण नहीं मानी जाती है|

रामलला की आरती

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श्री रामचंद्र जी की आरती | Ramlala Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| रामलला की आरती ||

आरती कीजे श्रीरामलला की ।
पूण निपुण धनुवेद कला की ॥

धनुष वान कर सोहत नीके ।
शोभा कोटि मदन मद फीके ॥

सुभग सिंहासन आप बिराजैं ।
वाम भाग वैदेही राजैं ॥

कर जोरे रिपुहन हनुमाना ।
भरत लखन सेवत बिधि नाना ॥

शिव अज नारद गुन गन गावैं ।
निगम नेति कह पार न पावैं ॥

नाम प्रभाव सकल जग जानैं ।
शेष महेश गनेस बखानैं ॥

भगत कामतरु पूरणकामा ।
दया क्षमा करुना गुन धामा ॥

सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा ।
राज विभीषन को प्रभु दीन्हा ॥

खेल खेल महु सिंधु बधाये ।
लोक सकल अनुपम यश छाये ॥

दुर्गम गढ़ लंका पति मारे ।
सुर नर मुनि सबके भय टारे ॥

देवन थापि सुजस विस्तारे ।
कोटिक दीन मलीन उधारे ॥

कपि केवट खग निसचर केरे ।
करि करुना दुःख दोष निवेरे ॥

देत सदा दासन्ह को माना ।
जगतपूज भे कपि हनुमाना ॥

आरत दीन सदा सत्कारे ।
तिहुपुर होत राम जयकारे ॥

कौसल्यादि सकल महतारी ।
दशरथ आदि भगत प्रभु झारी ॥

सुर नर मुनि प्रभु गुन गन गाई ।
आरति करत बहुत सुख पाई ॥

धूप दीप चन्दन नैवेदा ।
मन दृढ़ करि नहि कवनव भेदा ॥

राम लला की आरती गावै ।
राम कृपा अभिमत फल पावै ॥

रामलला की आरती

Shri Ramchandra Aarti Lyrics in English | रामलला जी की आरती

|| Ramlala Aarti ||

Aarti kijiye Shri Ram Lala ki.
Poon nipun dhanurved kala ki.

Dhanush vaan kar sohat neeke.
Shobha koti madan mad feeke.

Subhag sinhasan aap birajein.
Vaam bhag Vaidehi rajein.

Kar jore ripuhan Hanumana.
Bharat Lakhna sevat vidhi nana.

Shiv aj Narad gun gan gaavein.
Nigam neti kah paar na paavein.

Naam prabhav sakal jag jaanein.
Shesh Mahesh Ganesh bakhanein.

Bhagat kamtaru pooran kama.
Daya kshama karuna gun dhaama.

Sugreevahun ko kapipati keenha.
Raj Vibhishan ko Prabhu deenha.

Khel khel mahu Sindhu badhaye.
Lok sakal anupam yash chhaye.

Durgam garh Lanka pati maare.
Sur nar muni sabke bhay taare.

Devan thapi sujas vistaare.
Kotik deen maleen udaare.

Kapi kevat khag nisachar kare.
Kari karuna dukh dosh nivere.

Det sada dasan ko maana.
Jagatpooj bhe kapil Hanumana.

Aarat deen sada satkaare.
Tihupur hot Ram Jayakare.

Kausalayaadi sakal mahataari.
Dasharath aadi bhagat Prabhu jhaari.

Sur nar muni Prabhu gun gan gaai.
Aarti karat bahu sukh paai.

Dhoop deep chandan naiveda.
Man dridh kari nahi kavan bheda.

Ram Lala ki aarti gaavai.
Ram kripa abhimat phal paavai

Jayati Jay Jay Bajrang Bala: सालासर बालाजी की आरती

सालासर बालाजी की आरती का जाप करने बालाजी अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होता है| भगवान हनुमान जी को ही सालासर बालाजी के नाम से जाना जाता है| यह बालाजी का मंदिर राजस्थान के सालासर नामक गाँव में स्थित है| माना जाता है कि इस मंदिर में बालाजी की प्रतिमा दाढ़ी – मुछों के साथ स्थित है| कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी ने मोहनदास को इसी रूप में दर्शन प्रदान किये थे| यह मंदिर राजस्थान का सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है| इस मंदिर में भक्तों के द्वारा विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान किये जाते है तो आइये जानते है सालासर बालाजी की आरती के बारे में|

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सालासर बालाजी की आरती

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सालासर बालाजी की आरती हिंदी में | Salasar Balaji Aarti Lyrics in Hindi

|| सालासर बालाजी आरती ||

जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन ख़ुशी मन में ।

प्रकट भय सुर वानर तन में, विदित यस विक्रम त्रिभुवन में ॥

दूध पीवत स्तन मात के, नजर गई नभ ओर ।

तब जननी की गोद से पहुंचे, उदयाचल पर भोर ॥

॥ अरुण फल लखि रवि मुख डाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

तिमिर भूमण्डल में छाई, चिबुक पर इन्द्र बज बाए ।

तभी से हनुमत कहलाए, द्वय हनुमान नाम पाये ॥

उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास ।

इधर हो गयो अन्धकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास ॥

॥ भये ब्रह्मादिक बेहाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

देव सब आये तुम्हारे आगे, सकल मिल विनय करन लागे ।

पवन कू भी लाए सागे, क्रोध सब पवन तना भागे ॥

सभी देवता वर दियो, अरज करी कर जोड़ ।

सुनके सबकी अरज गरज, लखि दिया रवि को छोड़ ॥

॥ हो गया जगमें उजियाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

रहे सुग्रीव पास जाई, आ गये बनमें रघुराई ।

हरिरावणसीतामाई, विकलफिरतेदोनों भाई ॥

विप्ररूप धरि राम को, कहा आप सब हाल ।

कपि पति से करवाई मित्रता, मार दिया कपि बाल ॥

॥ दुःख सुग्रीव तना टाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

आज्ञा ले रघुपति की धाया, लंक में सिन्धु लाँघ आया ।

हाल सीता का लख पाया, मुद्रिका दे बनफल खाया ॥

बन विध्वंस दशकंध सुत, वध कर लंक जलाया।

चूड़ामणि सन्देश त्रिया का, दिया राम को आय ॥

॥ हुए खुश त्रिभुवन भूपाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

जोड़ कपि दल रघुवर चाला, कटक हित सिन्धु बांध डाला ।

युद्ध रच दीन्हा विकराला, कियो राक्षस कुल पैमाला ॥

लक्ष्मण को शक्ति लगी, लायौ गिरी उठाय।

देई संजीवन लखन जियाये, रघुवर हर्ष सवाय ॥

॥ गरब सब रावन का गाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

रची अहिरावन ने माया, सोवते राम लखन लाया ।

बने वहाँ देवी की काया, करने को अपना चित चाया ॥

अहिरावन रावन हत्यौ, फेर हाथ को हाथ ।

मन्त्र विभीषण पाय आप को, हो गयो लंका नाथ ॥

॥ खुल गया करमा का ताला, कृपा कर सालासर वाला ॥

अयोध्या राम राज्य कीना, आपको दास बना लीना ।

अतुल बल घृत सिन्दूर दीना, लसत तन रूप रंग भीना ॥

चिरंजीव प्रभु ने कियो, जग में दियो पुजाय।

जो कोई निश्चय कर के ध्यावै, ताकी करो सहाय ॥

॥ कष्ट सब भक्तन का टाला, कृपा कर सालासर वाला ॥

भक्तजन चरण कमल सेवे, जात आय सालासर देवे ।

ध्वजा नारियल भोग देवे, मनोरथ सिद्धि कर लेवे ॥

कारज सारो भक्त के, सदा करो कल्यान ।

विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के, बालकृष्ण धर ध्यान ॥

॥ नाम की जपे सदा माला, कृपा कर सालासर वाला ॥

सालासर बालाजी की आरती

Salasar Balaji Aarti Lyrics In English | जयति जय जय बजरंग बाला

|| Salasar Balaji Aarti ||

Jai Jai Bajrang Bala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Chait Sudhi Poonam Ko Janme, Anjani Pavan Khushi Man Mein।

Prakat Bhay Sur Vanar Tan Mein, Vidit Yash Vikram Tribhuvan Mein॥

Doodh Peevat Stan Maat Ke, Nazar Gayi Nabhoor।

Tab Janani Ki God Se Pahunchhe, Udayachal Par Bhor॥

॥ Arun Phal Lakhi Ravi Mukh Daala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Timir Bhoomandal Mein Chhaai, Chibuk Par Indra Bajaye।

Tabhi Se Hanumat Kahlaaye, Dvay Hanuman Naam Paaye॥

Us Avsar Mein Ruk Gayo, Pavan Sarv Unchaas।

Idhar Ho Gayo Andhkaar, Ut Rukyo Vishv Ko Shwaas॥

॥ Bhaye Brahmaadik Behaala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Dev Sab Aaye Tumhare Aage, Sakal Mil Vinay Karan Lage।

Pavan Ko Bhi Laaye Saage, Krodh Sab Pavan Tana Bhage॥

Sabhi Devta Var Diyo, Arj Kari Kar Jod।

Sunke Sabki Arj Garj, Lakhi Diya Ravi Ko Chhod॥

॥ Ho Gaya Jag Mein Ujiyala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Rahe Sugreev Paas Jaai, Aa Gaye Ban Mein Raghu Rai।

Hari Raavan Sitaamai, Vikal Firte Dono Bhai॥

Vipraroop Dhari Ram Ko, Kaha Aap Sab Haal।

Kapi Pati Se Karvai Mitra, Maar Diya Kapi Baal॥

॥ Dukh Sugreev Tana Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Aajna Le Raghu Pati Ki Dhaaya, Lank Mein Sindhu Laangh Aaya।

Haal Sita Ka Lakh Paaya, Mudrika De Banphal Khaya॥

Ban Vidhvans Dashakandh Sut, Vadha Kar Lank Jalaaya।

Choodamani Sandesh Triya Ka, Diya Ram Ko Aaya॥

॥ Huye Khush Tribhuvan Bhupala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Jod Kapi Dal Raghuvar Chala, Katak Hit Sindhu Baandh Daala।

Yudh Rach Diinha Vikrala, Kiyo Raakshas Kul Paimaala॥

Lakshman Ko Shakti Lagi, Laayo Giri Uthaaya।

Dei Sanjeevan Lakhan Jiye, Raghuvar Harsha Svaaya॥

॥ Garb Sab Raavan Ka Gaala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Rachi Ahiravan Ne Maya, Sovate Ram Lakhan Laaya।

Bane Waha Devi Ki Kaaya, Karne Ko Apna Chit Chaaya॥

Ahiravan Raavan Hatyau, Pher Haath Ko Haath।

Mantra Vibhishan Paaye Aap Ko, Ho Gayo Lankanaath॥

॥ Khul Gaya Karama Ka Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Ayodhya Ram Rajya Keena, Aapko Daas Bana Leena।

Atul Bal Ghrit Sindoor Deena, Lasat Tan Roop Rang Bheena॥

Chiranjivi Prabhu Ne Kiyo, Jag Mein Diyo Pujaya।

Jo Koi Nishchay Kar Ke Dhyaave, Taaki Karo Sahaay॥

॥ Kasht Sab Bhaktan Ka Taala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Bhaktjan Charan Kamal Seve, Jaat Aaya Salasar Deve।

Dhwaja Nariyal Bhog Deve, Manorath Siddhi Kar Leve॥

Kaary Saro Bhakt Ke, Sada Karo Kalyan।

Vipra Nivaasi Lakshman Gad Ke, Balakrishna Dhar Dhyaan॥

॥ Naam Ki Jape Sada Mala, Kripa Kar Salasar Wala॥

Aarti Harji Nandan Ki Lyrics: दादाजी की आरती

दादाजी की आरती का जाप प्रतिदिन लाखों भक्तों के द्वारा किया जाता है| दादाजी हिन्दू धर्म के दाधिच समाज में पूजे जाने वाले बहुत ही प्रसिद्ध देवता है| माना जाता है कि दादाजी हनुमान जी के बहुत ही बड़े भक्त थे| दादाजी का जन्म राजस्थान के चुरू जिले में दाधिच ब्राह्मण श्री हरजीराम जी के घर में हुआ था| इनका नाम अखाराम जी था| कहा जाता था कि इनके चिमटे के स्पर्श करने तथा इनकी धुनी की भभूती मिलाने से जो कलवानी तैयार होती है| उसे अमृत के समान माना जाता है| इस दादाजी की आरती का जाप करने दादाजी अखाराम जी अपने भक्तों से बहुत प्रसन्न होते है तो आइये पढ़ते है दादाजी अखाराम जी यह पवित्र आरती |

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दादाजी की आरती

दादाजी की आरती | Dadaji Aarti Lyrics In Hindi

|| दादाजी की आरती ||

आरती हरजी नंदन की,
दधीचि कुल गौरव संतन की ||

गले में तुलसी की माला |
चिमटा रतन जडित वाला |
भाल पर तिलक गंध आला |
खडाऊ चन्दन, काटते फंदन, करे हम वंदन,
पितामह कष्टनिकंदन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||1 ||

रेशमी पीताम्बर सोहे |
इंदु सम मुख मंडल मोहे |
कमल सम नेत्र धनुष भोंहे |
प्रभु का भजन, ध्यान में मगन, मरुत सुत लगन,
पवन सुत किंकर संतन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||2 ||

शोभित ब्रह्मसूत्र दाता |
नाम अखाराम सुखदाता |
स्मरण से नवनिधिया पाता |
जीवू के भ्रात, सुमिरते प्रात, आप पितुमात,
तुम्हारे सेवक भक्तन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||3 ||

परसाने सिगड़ी ज्योत दादा |
कटे विष भुत प्रेत व्याधा |
कलवाणी अमृत जो पाता |
तांती है नीकी, बभूति अमीसी, प्राण में रमीसी,
काटती भवभय बंघन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||4 ||

पंचमी कृष्ण पक्ष सेवे |
मिठाई श्री फल ध्वजा मेवे |
झडूला युगल जात देवे |
हुकम का तनय, चंपा करे विनय, पौत्र की सुनिए,
श्री राम के पूजन वंदन की |
दधीचि कुल गौरव संतन की ||5 ||

दादाजी की आरती

Dadaji Aarti Lyrics In English | आरती हरजी नंदन की

|| Dadaji Ki Aarti ||

Aarti Harji Nandan Ki,
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||

Gale Mein Tulsi Ki Mala |
Chimta Ratan Jaddit Wala |
Bhaal Par Tilak Gandh Ala |
Khadau Chandan, Kaatte Fandan, Kare Hum Vandana,
Pitamah Kasht Nikandan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||1 ||

Reshami Peetambar Sohe |
Indu Sam Mukh Mandal Mohe |
Kamal Sam Netra Dhanush Bhonkhe |
Prabhu Ka Bhajan, Dhyan Mein Magn, Marut Sut Lagan,
Pavan Sut Kinkar Santan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||2 ||

Shobhit Brahmasutra Data |
Naam Akhaaram Sukhdata |
Smran Se Navanidhiya Pata |
Jeevu Ke Bhrat, Sumirate Praat, Aap Pitumaat,
Tumhare Sevak Bhaktan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||3 ||

Parasane Sigri Jyot Dada |
Kate Vish Bhoot Pret Vyadha |
Kalvani Amrit Jo Pata |
Taanti Hai Neeki, Babhooti Ameesi, Pran Mein Ramesi,
Kaatti Bhavbhay Banghan Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||4 ||

Panchami Krishna Paksha Seve |
Mithai Shri Phal Dhvaja Meve |
Jhadoola Yugala Jaat Deve |
Hukam Ka Tanay, Champa Kare Vinay, Pautr Ki Suniye,
Shri Ram Ke Pujan Vandana Ki |
Dadhichi Kul Gaurav Santan Ki ||5 ||

Gayatri Mata Ji Ki Aarti Lyrics : गायत्री माता आरती

गायत्री माता आरती का जाप ज्ञान की देवी माता गायत्री को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गायत्री देवी एक ऐसी शक्ति है जिसकी कृपा यदि किसी मनुष्य के ऊपर हो तो वह अपनी जिंदगी में हमेशा सफलता को प्राप्त करता है| इस गायत्री माता चालीसा का जाप करने से मनुष्य को सद्बुद्धि की प्रेरणा मिलती है| जो भी मनुष्य गायत्री माता की शरण में आता है| उस व्यक्ति के जीवन में सदैव के लिए अंधकार मिट जाता है| आइये जानते है गायत्री माता आरती के बारे में |

गायत्री माता आरती

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माँ गायत्री जी की आरती | Gayatri Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| गायत्री माता आरती ||

जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक क‌र्त्री ।
दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।
भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।
अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।
सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।
जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।
विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥
॥ जयति जय गायत्री माता..॥

जयति जय गायत्री माता,
जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ,
जो है सुखदाता ॥

गायत्री माता आरती

Gayatri Mata Aarti Lyrics In English | जयति जय गायत्री माता

|| Gayatri Mata Aarti ||

Jayati Jay Gayatri Mata,
Jayati Jay Gayatri Mata.
Sat marg par hamein chalao,
Jo hai sukhadata.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Aadi Shakti tum alakh niranjan jagpalak kartri,
Dukh shok, bhay, klesh kalash daridra dainya hatri.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Brahm rupini, pranaat paalin jagat dhatra ambe,
Bhav bhayahari, jan-hitkari, sukhda jagadambe.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Bhay haarini, bhavtarini, anagheaj anand rashi,
Avikari, akhahari, avichalit, amale, avinashi.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Kaamdhenu satchit anand Jay Ganga Gita,
Savita ki shasvati, shakti tum savitri sita.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Ṛig, Yaju saam, Atharva pranyani, pranav mahamahime,
kundalini sahastra sudhuman shobha guna garime.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Swaha, swadha, shachi brahmani radha rudrani,
Jay satrupa, vaani, vidhya, kamla kalyani.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Janani ham hain din-hin, dukh-daridra ke ghere,
Yadapi kutila, kapati kaput tau balak hain tere.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Snehasani karunamay mata charan sharan dije,
Vilakh rahe ham shisu sut tere daya drishti kije.
Jayati Jay Gayatri Mata.

Kam, krodh, mad, lobh, dambha, durbhav dvesha hariye,
Suddha buddhi nishpap hriday mana ko pavitra kariye.

Jayati Jay Gayatri Mata,
Jayati Jay Gayatri Mata.
Sat marg par hamein chalao,
Jo hai sukhdata.

Narmada Aarti Lyrics : नर्मदा आरती

नर्मदा आरती का जाप करने से माता नर्मदा अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होती है| नर्मदा नदी मध्यप्रदेश राज्य की सबसे पवित्र नदी के रूप में जाना जाता है| हिन्दू धर्म के लोगो के द्वारा इस नदी को पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजा जाता है तथा नर्मदा चालीसा का भी जाप किया जाता है| जिससे माता नर्मदा आशीर्वाद उन्हें मिल सके| मान्यताओ के अनुसार सम्पूर्ण भारत में ऐसी बहुत सी धार्मिक नदियाँ है लेकिन सबसे नदी गंगा व नर्मदा को ही माना जाता है| आइये जानते है इस नर्मदा आरती के लिरिक्स के बारे में |

नर्मदा आरती

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नर्मदा जी की आरती | Narmada Aarti Lyrics In Hindi

|| नर्मदा आरती ||

ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी नारद सारद तुम वरदायक,
अभिनव पदण्डी ।
सुर नर मुनि जन सेवत,
सुर नर मुनि…
शारद पदवाचन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी धूमक वाहन राजत,
वीणा वाद्यन्ती।
झुमकत-झुमकत-झुमकत,
झननन झमकत रमती राजन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी बाजत ताल मृदंगा,
सुर मण्डल रमती ।
तोड़ीतान-तोड़ीतान-तोड़ीतान,
तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत,
निशदिन आनन्दी ।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा
शंकर तुम भट मेटन्ती ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैयाजी को कंचन थार विराजत,
अगर कपूर बाती ।
अमर कंठ में विराजत,
घाटन घाट बिराजत,
कोटि रतन ज्योति ।
॥ ॐ जय जगदानन्दी..॥

मैयाजी की आरती,
निशदिन पढ़ गा‍वरि,
हो रेवा जुग-जुग नरगावे,
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हर‍ि नंद स्वामी मनवांछित पावे।

ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनंद कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा
शिव हर‍ि शंकर, रुद्रौ पालन्ती ॥

नर्मदा आरती

Narmada Aarti Lyrics In English | ॐ जय जगदानन्दी

|| Narmada Aarti ||

Om Jay Jagdanandi,
Maiya Jay Anand Kandi.
Brahma Harihar Shankar, Reva
Shiv Hari Shankar, Rudrao Palanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Narad Sarad Tum Varadayak,
Abhinav Padandi.
Sur Nar Muni Jan Sevat,
Sur Nar Muni…
Sharad Padavachanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Dhoomak Vahan Rajat,
Veena Vadyanti.
Jhumakat-Jhumakat-Jhumakat,
Jhannan Jhamakat Ramati Rajanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Bajat Taal Mridanga,
Sur Mandal Ramati.
Toditan-Toditan-Toditan,
Turadan Ramati Suravanti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Devi Sakal Bhuvan Par Aap Virajat,
Nishadin Anandi.
Gavat Ganga Shankar, Sevat Reva
Shankar Tum Bhat Metanti.
॥ Om Jay Jagdanandi…॥

Maiyaji Ko Kanchan Thar Virajat,
Agar Kapoor Bati.
Amar Kanth Mein Virajat,
Ghatan Ghat Birajat,
Koti Ratan Jyoti.
॥ Om Jay Jagdanandi..॥

Maiyaji Ki Aarti,
Nishadin Padh Gavari,
Ho Reva Jug-Jug Nargaave,
Bhajat Shivanand Swami
Japat Hari Nand Swami Manvaanchit Paave.

Om Jay Jagdanandi,
Maiya Jay Anand Kandi.
Brahma Harihar Shankar, Reva
Shiv Hari Shankar, Rudrao Palanti