Shri Chitragupt Ji Ki Aarti : श्री चित्रगुप्त आरती लिरिक्स

चित्रगुप्त जी की आरती का जाप भगवान चित्रगुप्त को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है| भगवान चित्रगुप्त जी को पुण्य तथा पाप के लेखक के रूप में भी जाना जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा भाई दूज के दिन पंचामृत स्नान, शृंगार, हवन तथा आरती के साथ की जाती है| माना जाता कि यदि आपके पास भगवान चित्रगुप्त जी की कोई प्रतिमा नहीं हो तो आप कलश को ही भगवान चित्रगुप्त का स्वरुप मानकर उसकी पूजा कर सकते है| भगवान चित्रगुप्त की पूजा तथा आरती करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है|

चित्रगुप्त जी की आरती

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चित्रगुप्त जी की आरती | Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi

|| श्री चित्रगुप्त आरती ||

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फलको पूर्ण करे॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता,
सन्तनसुखदायी ।
भक्तों के प्रतिपालक,
त्रिभुवनयश छायी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत,
पीताम्बरराजै ।
मातु इरावती, दक्षिणा,
वामअंग साजै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक,
प्रभुअंतर्यामी ।
सृष्टि सम्हारन, जन दु:ख हारन,
प्रकटभये स्वामी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कलम, दवात, शंख, पत्रिका,
करमें अति सोहै ।
वैजयन्ती वनमाला,
त्रिभुवनमन मोहै ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला,
ब्रम्हाहर्षाये ।
कोटि कोटि देवता तुम्हारे,
चरणनमें धाये ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

नृप सुदास अरू भीष्म पितामह,
यादतुम्हें कीन्हा ।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं,
इच्छितफल दीन्हा ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

दारा, सुत, भगिनी,
सबअपने स्वास्थ के कर्ता ।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी,
तुमतज मैं भर्ता ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी,
शरणगहूँ किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
आसकरूँ जिसकी ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती,
प्रेम सहित गावैं ।
चौरासी से निश्चित छूटैं,
इच्छित फल पावैं ॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

न्यायाधीश बैंकुंठ निवासी,
पापपुण्य लिखते ।
‘नानक’ शरण तिहारे,
आसन दूजी करते ॥

ॐ जय चित्रगुप्त हरे,
स्वामीजय चित्रगुप्त हरे ।
भक्तजनों के इच्छित,
फलको पूर्ण करे ॥

चित्रगुप्त जी की आरती

Shri Chitragupt Aarti Lyrics In English | ॐ जय चित्रगुप्त हरे

|| Shri Chitragupt Aarti ||

Om Jai Chitragupta Hare,
Swamiji Jai Chitragupta Hare.
Bhakto ke Ichhit,
Falko poorn kare.

Vighna vinashak mangalkarta,
Santan sukhadayi.
Bhakton ke pratipalak,
Tribhuvanayash chhayi.
Om Jai Chitragupta Hare…

Roop chaturbhuj, shyamal moorti,
Peetambararajai.
Maa Iravati, Dakshina,
Vamang sajai.
Om Jai Chitragupta Hare…

Kasht nivarak, dushth sanharak,
Prabhuantaryami.
Srishti samharan, jan du:kha haran,
Prakatbhaye Swami.
Om Jai Chitragupta Hare…

Kalam, davat, shankh, patrika,
Karmen ati sohai.
Vaijayanti vanamala,
Tribhuvanaman mohai.
Om Jai Chitragupta Hare…

Vishwa nyay ka kary Sambhala,
Brahmarshaye.
Koti koti devta tumhare,
Charan mein dhaye.
Om Jai Chitragupta Hare…

Nrip Sudas aur Bheeshm Pitamah,
Yad tumhein kinha.
Veg, vilamb na kinha,
Ichhit phal diya.
Om Jai Chitragupta Hare…

Dara, sut, bhagini,
Sab apne swasth ke karta.
Jao kahan sharan mein kiski,
Tumtaj main bharta.
Om Jai Chitragupta Hare…

Bandhu, pita tum Swami,
Sharan gahun kiski.
Tum bin aur na duja,
Aaskarun jiski.
Om Jai Chitragupta Hare…

Jo jan Chitragupta Ji ki aarti,
Prem sahit gaave.
Chaurasi se nischit chhute,
Ichhit phal paave.
Om Jai Chitragupta Hare…

Nyayadhish Bankunth nivasi,
Paap-punya likhte.
‘Nanak’ sharan tihare,
Aasan dooji karte.

Om Jai Chitragupta Hare,
Swamiji Jai Chitragupta Hare.
Bhakto ke ichhit,
Falko poorn kare

Annapurna Mata Aarti Lyrics : अन्नपूर्णा आरती

अन्नपूर्णा आरती हिन्दू धर्म की ही एक मान्य देवी अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है| यह माता अन्नपूर्णा माँ जगदम्बा का ही रूप मानी जाती है| हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि माता जगदम्बा के रूप (अन्नपूर्णा माता) के कारण ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भरण पोषण होता है| अन्नपूर्णा शब्द का अर्थ है – अन्न की अधिष्ठात्री देवी यानी अन्न प्रदान करने वाली| माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अन्नपूर्णा आरती का पूर्ण भक्ति भाव से जाप करता है| उस व्यक्ति पर हमेशा ही माता अन्नपूर्णा की कृपा बना रहती है| तो आइये जानते है माँ अन्नपूर्णा आरती के लिरिक्स के बारे में|

अन्नपूर्णा आरती

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माँ अन्नपूर्णा आरती लिरिक्स | Annapurna Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| अन्नपूर्णा आरती ||

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
कहां उसे विश्राम ।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
लेत होत सब काम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
कालान्तर तक नाम ।
सुर सुरों की रचना करती,
कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
चारु चक्रधर श्याम ।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
शोभा लखहि ललाम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

देवि देव! दयनीय दशा में,
दया-दया तब नाम ।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
शरण रूप तब धाम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
श्री क्लीं कमला काम ।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
वर दे तू निष्काम ॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥

अन्नपूर्णा आरती

Annapurna Aarti Lyrics In English | बारम्बार प्रणाम

|| Annapurna Aarti ||

Baaram baaram pranam,
Maiya baaram baaram pranam.

Jo nahi Dhyaave tumhe Ambike,
Kahaan use vishram.
Annapurna Devi naam tiharo,
Let hot sab kaam.

Baaram baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Pralay yugaantar aur janmaantar,
Kaalantar tak naam.
Sur suro ki rachna karti,
Kahaan Krishna kahaan Ram.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Chumahi charan chatur chaturaanan,
Charu chakradhar shyam.
Chandrachood chandraanan chakar,
Shobha lakhahi lalaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Devi Dev! Dayaniya dasha mein,
Daya-daya tab naam.
Trahitrahi sharanagat vatsal,
Sharan roop tab dhaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Shreem, Hreem Shradhaa Shree A Vidya,
Shree Kleem Kamala Kaam.
Kaanti, Bhraantimayi, Kaanti Shaantimayi,
Var de tu nishkaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

|| Mata Annapurna ki jai ||

सूर्य देव की आरती : Om Jai Surya Bhagwan

सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का जाप भगवान सूर्य को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म में भगवान सूर्य देव को रविवार का दिन समर्पित किया गया है| इस सूर्य देव की पूजा करके सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का जाप करना सूर्य भगवान अर्घ्य देना बहुत ही शुभ माना जाता है| सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] करने से जातक को कई प्रकार के लाभ होते है| सूर्य देव को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है| इसलिए जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य बलवान होता है| उस व्यक्ति के सभी बिगड़े काम सुधरने लगते है व उसके उन्नति के सभी द्वार खुलने लगते है|

सूर्य देव की आरती

सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] का पूर्ण श्रद्धा के साथ जाप करने से आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति मजबूत होती है| सूर्य देव की पूजा तथा आरती करने से सभी प्रकार की बीमारियों का नाश होता है| सूर्य ग्रह की स्थिति कुंडली में मजबूत होने पर व्यक्ति को नौकरी तथा व्यवसाय में भी सफलता प्राप्त होती है| सूर्य देव की आरती [Surya Dev Ki Aarti] करने से भक्त का भाग्य उज्जवल होता है| इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव की उपासना तथा आरती करना चाहिए|

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सूर्य देव की आरती | Surya Dev Ki Aarti Lyrics In Hindi

|| सूर्य देव की आरती ||

ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी ॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे ।
तुम हो देव महान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते ॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा ।
करे सब तब गुणगान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में,
हर घर हर आंगन में ।
हो तव महिमा गान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते ॥
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी ।
दे नव जीवनदान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार ।
महिमा तब अपरम्पार ॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते ।
बल बृद्धि और ज्ञान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने ।
तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

पूजन करती दिशाएं,
पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी ।
शुभकारी अंशुमान ॥
॥ ॐ जय सूर्य भगवान..॥

ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान ॥

सूर्य देव की आरती

Surya Dev Ki Aarti Lyrics In English | ॐ जय सूर्य भगवान

|| Surya Dev Ki Aarti ||

Om Jai Surya Bhagwan,
Jai Ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netra swaroopa,
Tum ho trigun swaroopa.
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Saarthi Arun hain Prabhu tum,
Shwet Kamaldhari.
Tum chaar bhujadhari.
Ashwa hain saat tumhare,
Koti kirana pasaare.
Tum ho Dev Mahan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Usha kaal mein jab tum,
Udayachal aate.
Sab tab darshan Paate.
Phailate ujiyara,
Jagata tab jag saara.
Kare sab tab gun gaana.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Sandhya mein Bhuvaneshwar,
Astachal Jaate.
Godhan tab ghar aate.
Godhuli bela mein,
Har ghar har aangan mein.
Ho taw mahima gaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Dev danuj nar naari,
Rishi munivar bhajate.
Aditya hriday japate.
Strot ye mangalkari,
Iski hai rachna nyaari.
De nav Jeevanadaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Tum ho trikaal rachiyata,
Tum jag ke aadhaar.
Mahima tab aparmpaar.
Pranon ka sinchan karke,
Bhakton ko apne dete.
Bal vridhi aur gyaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Bhoochar jal char khechar,
Sab ke ho praan tumhi.
Sab jeevon ke praan tumhi.
Ved puran bakhaane,
Dharm sabhi tumhe maane.
Tum hi sarv shaktimaan.
Om Jai Surya Bhagwan.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Poojan karti dishaayein,
Pooje dash dikpaal.
Tum bhuvanon ke pratipaal.
Rituyen tumhari daasi,
Tum shashwat avinaashi.
Shubhkaari Anshuman.
Om Jai Surya Bhagwan…||

Om Jai Surya Bhagwan,
Jai Ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netr roop,
Tum ho trigun swaroop.
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan.

Sita Mata Aarti Lyrics : सीता माता आरती

सीता माता आरती का जाप माता जानकी की कृपा पाने तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| माना जाता है कि जानकी माता की पूर्ण श्रद्धा से पूजा – अर्चना करने से सीता माता की अपार कृपा प्राप्त होती है| सीता माता की पूजा करते समय सीता माता आरती का जप करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है| बिना आरती का जाप किये सीता माता की पूजा भी अधूरी मानी जाती है| हिन्दू धर्म में सीता माता को भगवान श्री राम जी धर्मपत्नी के रूप में जाना जाता है|

सीता माता आरती

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सीता माता जी की आरती | Sita Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| सीता माता आरती ||

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सीता माता आरती

Sita Mata Aarti Lyrics In English | आरती श्री जनक दुलारी की

|| Sita Mata Aarti ||

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Jagat Janani Jag Ki Vistarin,
Nitya Satya Saaket Vihaarini,
Param Dayamayi Dinodharini,
Sita Maiya Bhakton Hitkaari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Sati Shromani Pati Hit Kaarini,
Pati Seva Vitta Van Charini,
Pati Hit Pati Viyog Sveekaarini,
Tyag Dharma Moorti Dhari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Vimal Kirti Sab Lokan Chhaai,
Naam Let Pavan Mati Aayi,
Sumirat Kaatat Kasht Dukh Daai,
Sharanagat Jan Bhay Hari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Jai Santoshi Mata Aarti Lyrics : सन्तोषी माता आरती

सन्तोषी माता आरती [Santoshi Mata Aarti] का जाप करने के शुक्रवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है| माना जाता है कि सन्तोषी माता की पूजा करने तथा सन्तोषी माता आरती [Santoshi Mata Aarti] का जाप करने से व्यक्ति को धन संबंधित सभी परेशानियों से राहत मिलती है| माता सन्तोषी का व्रत करने तथा सन्तोषी माता आरती [Santoshi Mata Aarti] का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश जी तथा माता रिद्धि – सिद्धि को माँ सन्तोषी के माता – पिता के रूप में जाना जाता है| कहा जाता है कि सन्तोषी माता की पूजा करने के पश्चात उनकी आरती उतारने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है|

सन्तोषी माता आरती

जो भी सच्चे मन व पूर्ण श्रद्धा के साथ माँ सन्तोषी का व्रत करता है व उनकी सन्तोषी माता आरती [Santoshi Mata Aarti] का भी जाप करता है, उस व्यक्ति पर हमेशा सन्तोषी माता की कृपा बनी रहती है| यदि आप सन्तोषी माता का व्रत करते है तो आपको इस बात अवश्य ध्यान रखना है कि इस दिन आपको खट्टी चीजों का सेवन करने से बचना है| सन्तोषी माता की पूजा करने के पश्चात आरी बहुत ही श्रद्धापूर्वक भाव से जाप करें|

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सन्तोषी माता की आरती | Santoshi Mata Aarti Lyrics In Hindi

|| सन्तोषी माता आरती ||

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ।
अपने सेवक जन की,
सुख संपति दाता ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

सुन्दर चीर सुनहरी,
मां धारण कीन्हो ।
हीरा पन्ना दमके,
तन श्रृंगार लीन्हो ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

गेरू लाल छटा छबि,
बदन कमल सोहे ।
मंद हंसत करुणामयी,
त्रिभुवन जन मोहे ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी,
चंवर दुरे प्यारे ।
धूप, दीप, मधु, मेवा,
भोज धरे न्यारे ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

गुड़ अरु चना परम प्रिय,
तामें संतोष कियो ।
सन्तोषी कहलाई,
भक्तन वैभव दियो ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

शुक्रवार प्रिय मानत,
आज दिवस सोही ।
भक्त मंडली छाई,
कथा सुनत मोही ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

मंदिर जग मग ज्योति,
मंगल ध्वनि छाई ।
विनय करें हम सेवक,
चरनन सिर नाई ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

भक्ति भावमय पूजा,
अंगीकृत कीजै ।
जो मन बसे हमारे,
इच्छित फल दीजै ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

दुखी दारिद्री रोगी,
संकट मुक्त किए ।
बहु धन धान्य भरे घर,
सुख सौभाग्य दिए ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

ध्यान धरे जो तेरा,
वांछित फल पायो ।
पूजा कथा श्रवण कर,
घर आनन्द आयो ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

चरण गहे की लज्जा,
रखियो जगदम्बे ।
संकट तू ही निवारे,
दयामयी अम्बे ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ॥

सन्तोषी माता की आरती,
जो कोई जन गावे ।
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति,
जी भर के पावे ॥

जय सन्तोषी माता,
मैया जय सन्तोषी माता ।
अपने सेवक जन की,
सुख सम्पति दाता ॥

सन्तोषी माता आरती

Santoshi Mata Aarti Lyrics In English | जय सन्तोषी माता

|| Santoshi Mata Aarti ||

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.
Apne sevak jan ki,
Sukh Sampati Data.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Sundar cheera sunehri,
Maa dharaṇ kinho.
Heera panna damke,
Tan shringar leenho.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Geru laal chhata chhavi,
Badan kamal sohe.
Mand hansat karunamayi,
Tribhuvan jan mohe.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Swarn sinhasan baithee,
Chamvar dure pyare.
Dhoop, deep, Madhu, meva,
Bhoj dhare nyare.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Gudh aru chana param priya,
Tame santosh kiyo.
Santoshi kahlaai,
Bhaktan vaibhav diyo.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Shukravar priya manat,
Aaj divas sohi.
Bhakt mandali chhaai,
Katha sunat mohe.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Mandir jag mag Jyoti,
Mangal dhvani chhaai.
Vinay kareṁ ham sevak,
Charanan sir naai.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Bhakti bhavmay puja,
Angikrit kijai.
Jo man base hamare,
Ichchhit phal dijai.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Dukhi daridri rogi,
Sankat mukt kiye.
Bahu dhan dhanya bhare ghar,
Sukh saubhagya diye.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Dhyan dhare jo tera,
Vaanchhit phal paayo.
Puja katha shravan kar,
Ghar aanand aayo.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Charan gahe ki lajja,
Rakhiyo Jagdamba.
Sankat tu hi nivaare,
Dayamayi Ambe.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.

Santoshi Mata ki aarti,
Jo koi jan gaave.
Riddhi Siddhi Sukh Sampati,
Ji bhar ke paave.

Jai Santoshi Mata,
Maiya Jai Santoshi Mata.
Apne sevak jan ki,
Sukh Sampati Data.

Vishwakarma Ji Ki Aarti : विश्वकर्मा जी की आरती

विश्वकर्मा जी की आरती [Vishwakarma Ji Ki Aarti] भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के बाद गाई जाती है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि रावण की लंका, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान श्री कृष्ण की द्वारका नगरी तथा हस्तिनापुर नगरी का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा ही किया गया था| भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा इस पृथ्वी पर सृष्टि के सृजन कर्ता के रूप में की जाती है| भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के बाद विश्वकर्मा जी की आरती [Vishwakarma Ji Ki Aarti] अवश्य रूप से की जाती है| बिना आरती के विश्वकर्मा जी की पूजा अधूरी मानी जाती है|

विश्वकर्मा जी की आरती

जांगिड ब्राह्मण समाज के लोग विश्वकर्मा भगवान को बहुत मानते है तथा इनकी पूजा करते है| विश्वकर्मा जी की आरती [Vishwakarma Ji Ki Aarti] का जाप करने से आपके व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी| सर्वाधिक कारखानों व बड़े – बड़े उद्योगों वाले व्यक्ति भगवान विश्वकर्मा जी की आरती [Vishwakarma Ji Ki Aarti] तथा उनकी पूजा करते है| विश्वकर्मा जी आरती का जप करने भगवान विश्वकर्मा प्रसन्न होते है, जिन्हें इस सम्पूर्ण सृष्टि का पहला वास्तुकार माना जाता है|

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विश्वकर्मा जी की आरती | Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics In Hindi

|| विश्वकर्मा जी की आरती ||

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

विश्वकर्मा जी की आरती

Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics In English | Jai Shree Vishwakarma Prabhu

|| Vishwakarma Ji Ki Aarti ||

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.
Sakal srishti ke karta,
Rakshak stuti dharma.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Aadi srishti mein vidhi ko,
Shruti Updesh diya.
Jeev maatra ka jag mein,
Gyaan vikas kiya.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Rishi Angira tap se,
Shaanti nahin paayi.
Dhyaan kiya jab Prabhu ka,
Sakal siddhi aayi.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Rog Grasht raja ne,
Jab aashray liya.
Sankat mochan bankar,
Door dukhaa kina.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Jab rathakar dampati,
Tumhaari ter kari.
Sunkar deen prarthana,
Vipat sagari hari.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Ekaanan chaturaanan,
Panchanan raaje.
Tribhuj Chaturbhuj dashabhuj,
Sakal roop saaje.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Dhyaan dhare tab pad ka,
Sakal siddhi aave.
Man dvividha mit jaave,
Atal shakti paave.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Shri Vishwakarma ki aarti,
Jo koi gaave.
Bhajat Gajaanand Swami,
Sukh sampati paave.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.
Sakal srishti ke karta,
Rakshak stuti dharma

Jai Vaishnavi Mata Aarti Lyrics : वैष्णो माता आरती

वैष्णो माता आरती [Vaishno Mata Aarti] का जाप माँ वैष्णो देवी को प्रसन्न करने के लिए कहा जाता है| वैष्णो देवी का मंदिर हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है जो कि भारत के जम्मू और कश्मीर के त्रिकुट पर्वत पर स्थित है| वैष्णो माता जी को वैष्णवी नाम से भी जाना जाता है| वैष्णो माता आरती [Vaishno Mata Aarti] का जाप करने से भक्तों पर माता वैष्णो देवी की कृपा प्राप्त होती है| इस आरती का जाप करने से माता वैष्णो देवी अपने भक्तों से प्रसन्न होती है तथा उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती है|

वैष्णो माता आरती

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वैष्णो माता आरती | Vaishno Devi Aarti Lyrics In Hindi

|| वैष्णो माता आरती ||

जय वैष्णवी माता,
मैया जय वैष्णवी माता ।
हाथ जोड़ तेरे आगे,
आरती मैं गाता ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

शीश पे छत्र विराजे,
मूरतिया प्यारी ।
गंगा बहती चरनन,
ज्योति जगे न्यारी ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे,
शंकर ध्यान धरे ।
सेवक चंवर डुलावत,
नारद नृत्य करे ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

सुन्दर गुफा तुम्हारी,
मन को अति भावे ।
बार-बार देखन को,
ऐ माँ मन चावे ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

भवन पे झण्डे झूलें,
घंटा ध्वनि बाजे ।
ऊँचा पर्वत तेरा,
माता प्रिय लागे ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल,
भेंट पुष्प मेवा ।
दास खड़े चरणों में,
दर्शन दो देवा ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

जो जन निश्चय करके,
द्वार तेरे आवे ।
उसकी इच्छा पूरण,
माता हो जावे ॥
॥ जय वैष्णवी माता..॥

इतनी स्तुति निश-दिन,
जो नर भी गावे ।
कहते सेवक ध्यानू,
सुख सम्पत्ति पावे ॥

जय वैष्णवी माता,
मैया जय वैष्णवी माता ।
हाथ जोड़ तेरे आगे,
आरती मैं गाता ॥

वैष्णो माता आरती

Vaishno Devi Aarti Lyrics In English | जय वैष्णवी माता

|| Vaishno Mata Aarti ||

Jai Vaishnavi Mata,
Maiya Jai Vaishnavi Mata.
Haath jod tere aage,
Aarti main gaata.
Jai Vaishnavi Mata.

Sheesh pe chatra viraje,
Murtiya pyaari.
Ganga bahti charanan,
Jyoti jage nyaari.
Jai Vaishnavi Mata.

Brahma Ved padhe nit dwaare,
Shankar dhyaan dhare.
Sevak chavar dulavat,
Narad nritya kare.
Jai Vaishnavi Mata.

Sundar gufa tumhaari,
Man ko ati bhaave.
Baar-baar dekhan ko,
Ai Maa man chaave.
Jai Vaishnavi Mata.

Bhavan pe jhande jhule,
Ghanta dhvani baaje.
Ooncha parvat tera,
Mata priya laage.
Jai Vaishnavi Mata.

Paan supari dhvaja nariyal,
Bhent pushp mewa.
Daas khade charanon mein,
Darshan do deva.
Jai Vaishnavi Mata.

Jo Jan Nishchay Karke,
Dwaar Tere Aave.
Uski ichha pooran,
Mata ho jaave.
Jai Vaishnavi Mata.

Itni Stuti Nish-Din,
Jo nar bhi gaave.
Kahte sevak dhyanu,
Sukh sampatti paave.

Jai Vaishnavi Mata,
Maiya Jai Vaishnavi Mata.
Haath jod tere aage,
Aarti main gaata.

Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti : बृहस्पति देव आरती

बृहस्पति देव आरती का जाप भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान बृहस्पति को सभी देवताओं का गुरु माना जाता है| बृहस्पति भगवान की पूजा करने तथा बृहस्पति देव आरती के लिए सबसे शुभ दिन गुरूवार माना जाता है| कहा जाता है कि जो भी भक्त गुरूवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा या बृहस्पति देव आरती का जाप करता है| उसके सभी कष्ट दूर हो जाते है| गुरूवार के दिन व्रत करते समय बृहस्पति देव आरती करने का विधान माना जाता है|

बृहस्पति देव आरती

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बृहस्पति देव जी की आरती | Brihaspati Dev Aarti Lyrics In Hindi

|| बृहस्पति देव आरती ||

जय बृहस्पति देवा,
ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगा‌ऊँ,
कदली फल मेवा ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर,
तुम सबके स्वामी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल,
सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक,
कृपा करो भर्ता ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर,
जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर,
आकर द्घार खड़े ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि,
भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता,
भव बंधन हारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक,
सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटा‌ओ,
संतन सुखकारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

जो को‌ई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर,
सो निश्चय पावे ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।
बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय ॥

बृहस्पति देव आरती

Brihaspati Dev Aarti Lyrics In English | ऊँ जय बृहस्पति देवा

|| Brihaspati Dev Aarti ||

Jai Brihaspati Deva,
Om Jai Brihaspati Deva.
Chin chin Bhog Lagaun,
Kadali phal meva.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Tum Poorn Paramatma,
Tum Antaryaami.
Jagatpita Jagadishwar,
Tum sabke swami.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Charanamrit nij nirmal,
Sab paatak harta.
Sakal manorath daayak,
Kripa karo bharta.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Tan, man, dhan arpan kar,
Jo jan sharan pade.
Prabhu prakat tab hokar,
Aakar dhaar khade.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Deendayal dayanidhi,
Bhaktan hitkari.
Paap dosh sab harta,
Bhav bandhan haari.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Sakal manorath daayak,
Sab Sanshay Haaro.
Vishay vikaar mitao,
Santan sukhakari.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Jo koi aarti teri,
Prem sahit gaave.
Jethanand aanandkar,
So nishchay paave.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Sab bolo Vishnu Bhagwan ki Jai.
Bolo Brihaspati Dev Bhagwan ki Jai.

Shree Kuber Aarti: कुबेर जी की आरती

इस कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] पाठ का जाप भगवान कुबेर को प्रसन्न करता है| साथ ही धन को आकर्षित करने तथा वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए भी किया जाता है| ऐसा माना जाता है कि इस कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] का जाप करने से भगवान कुबेर प्रसन्न होते है तथा इसके बदले वह अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करते है| जिससे भक्तों को धन संबंधी सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है| कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है|

कुबेर जी की आरती

कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] का पाठ धन के देवता भगवान कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] का पाठ स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करके करने से भक्त को धन से संबंधित सभी समस्याओं से राहत मिलती है| इस आरती का जाप भगवान कुबेर जी की पूजा तथा कुबेर चालीसा पाठ के पश्चात करना बहुत ही शुभ माना जाता है| कुबेर जी की आरती [Kuber Ji Ki Aarti] का नियमित रूप से जाप करने से भगवान कुबेर जी की असीम कृपा प्राप्त होती है|

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कुबेर जी की आरती | Shri Kuber Aarti Lyrics In Hindi

|| श्री कुबेर आरती ||

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे ।
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले ।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

कुबेर जी की आरती

Kuber Ji Ki Aarti Lyrics In English | ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे

|| Shri Kuber Aarti ||

Om Jai Yaksha Kubera Hare,
Swami Jai Yaksha Jai Yaksha Kubera Hare.
Sharan Pade Bhakton Ke,
Bhandar Kubera Bhare.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Shiv Bhakton Mein Bhakt Kubera Bade,
Swami Bhakt Kubera Bade.
Daitya Danav Manav Se,
Kai-Kai Yudh Lade.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Swarn Sinhasan Baitha,
Sir Par Chatra Phire,
Swami Sir Par Chatra Phire.
Yogini Mangal Gaavain,
Sab Jay Jaykaar Karain.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Gada Trishul Haath Mein,
Shastra Bahut Dhare,
Swami Shastra Bahut Dhare.
Dukh Bhay Sankat Mochan,
Dhanush Tankar Karen.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Bhanti Bhanti Ke Vyanjan Bahut Bane,
Swami Vyanjan Bahut Bane.
Mohan Bhog Lagaavain,
Saath Mein Udad Chane.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Bal Buddhi Vidya Data,
Ham Teri Sharan Pade,
Swami Ham Teri Sharan Pade.
Apne Bhakt Janon Ke,
Saare Kaam Sanvare.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Mukut Mani Ki Shobha,
Motiyan Haar Gale,
Swami Motiyan Haar Gale.
Agar Kapur Ki Baati,
Ghee Ki Jyot Jale.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥

Yaksha Kubera Ji Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaave,
Swami Jo Koi Nar Gaave.
Kahat Premapal Swami,
Manvaanchhit Phal Paave.
॥ Om Jai Yaksha Kubera Hare…॥