अगर आप श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा आयोजन के बारे में सोच रहे है तो आपको श्रीमद् भागवत महापुराण पूजन सामग्री की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक होता है क्यों की किसी भी विधि- विधान को सुचारु रूप से चलने के लिए पंडित जी के साथ -साथ पूजन सामग्री का भी होना ही आवश्यक होता है | अतः पूजन सामग्री किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में एक विशेष महत्त्व है |
श्रीमद् भागवत महापुराण जो की हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है और इसे प्रेमभक्ति, भक्ति और देवी-देवताओं की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रीमद् भागवत महापुराण श्री नारद जी की प्रेरणा से महर्षि वेद व्यास जी द्वारा रचित ग्रन्थ है जिसमें 18000 श्लोक तथा 12 स्कंध हैं। श्रीमद् भागवत महापुराण श्री कृष्णा की महिमा का वर्णन करता है |
इस ब्लॉग के माध्यम से हमारा यानि 99पंडित का उद्देश्य यह है की आपको श्रीमद् भागवत महापुराण पूजन सामग्री के बारे सही व सटीक जानकारी आप तक पहुँचे |

मुख्यतया: श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन हमारे यानि 99पंडित के अनुसार भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीष, आषाढ़ और श्रावण के महीने अनुकूल या श्रेष्ठ माने जाते है। इन महीनो में कथा सुनने से मोक्ष की प्राप्ति आसान हो जाती है।
इसके अतिरिक्त श्रीमद् भागवत कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायिनी है तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है। श्रीमद् भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है, इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित कराना चाहिए। इसके अलावा रोग-शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है।
यदि आप श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा की आयोजन करवाने का सोच रहे है तो 99पंडित का चयन आपके लिए मोक्ष का द्वार है क्यों की यहाँ पर श्रीमद् भागवत महापुराण सम्पूर्ण वैदिक- क्रिया द्वारा संपन्न करवाते है जिससे आपके भाग्य परिवर्तन संभव है |
हम 99पंडित ऐसी धार्मिक गतिविधि को करने के लिए अनुभवी/पेशेवर पंडितो को नियुक्त करने से के साथ- साथ आपकी सभी जरूरतों का ख्याल रखते है।
ऑनलाइन पंडित बुक करने के लिए आपको 99पंडित के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर “बुक अ पंडित” बटन पर क्लिक करना होगा | और हमारे साथ अपना विवरण दर्ज करना होगा: पूरा नाम, आपका ई-मेल पता, मोबाइल नंबर, पूजा की तारीख, पूजा का प्रकार और स्थान का पता। यह प्रकिया बहुत ही आसान है |
इसके अतिरिक्त आप श्रीमद् भागवत महापुराण के लिए व्हाट्सएप, मेल या 8005663275 नम्बर पर कॉल करके भी पंडित अपना पंडित बुक करवा सकते है |
अब हम इसी क्रम में श्रीमद् भागवत महापुराण आयोजन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की चर्चा कर लेते है जिससे की हम इस धार्मिक अनुष्ठान को बिना किसी व्यवधान के पूर्ण करवा जा सके | क्यों की कई बार इसा देखा गया है की अगर सामग्री का चयन यदि सही ढ़ग से नहीं हो पता है तो कथा में विराम लग जाता है जो कि शास्त्रानुसार सही नहीं होता है और इसका दुष्परिणाम यह होता है की शतप्रतिशत फल की प्राप्ति पूर्ण रूप से यजमान को नहीं हो पाती |
चूँकि श्रीमद् भागवत महापुराण कथा साप्ताहिक होती है तो आपको सामग्री की व्यवस्था भी उसी अनुरूप करनी होती है |
यहाँ हम 99पंडित आपको श्रीमद् भागवत महापुराण की सप्ताह पूजा के लिए प्रयुक्त होने वाली सामग्री के बारे में बता रहे है जिससे की आपको बाद में आपको परेशानी का सामना न करना पड़े |
श्रीमद् भागवत महापुराण पूजन सामग्री: सप्ताह पूजा के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
| सामग्री | मात्रा |
| रोली | 50 ग्राम |
| कलावा (मौली ) | 2 नग |
| सिन्दूर | 50 ग्राम |
| लौंग | 25 ग्राम |
| इलायची | 25 ग्राम |
| सुपारी | 500 ग्राम |
| हल्दी | 50 ग्राम |
| अबीर | 50 ग्राम |
| गुलाल | 50 ग्राम |
| अभ्रक | 50 ग्राम |
| गंगाजल | 1 लीटर |
| गुलाबजल | 1 बोतल |
| इत्र बडी | 1 शीशी |
| शहद | 250 ग्राम |
| धूपबती | 10 पैकेट |
| रूईबती गोल | 2 पैकेट |
| रूईबती बण्डल | 1 पैकेट |
| जनैऊ | 1 बण्डल |
| पीली सरसों | 100 ग्राम |
| देशी घी | ढाई किलों |
| कपूर | 200 ग्राम |
| माचिस | 1 पैकेट |
| जौ | एक किलों |
| दोना बड़ा साइज | 5 गडडी |
| पंचमेवा | सवा किलों |
| श्वेत चन्दन | 50 ग्राम |
| अष्टगंध चन्दन | 50 ग्राम |
| गरी गोला | ग्यारह पीस |
| चावल | ग्यारह किलो |
| मिट्टी की पियाली | 15 |
| दियाली | 40 |
| मिट्टी की कलश | 04 |
| पानी का नारीयल | 02 पीस |
| लाल, हरा, पीला, काला रंग | 10 + 10 ग्राम |
| सप्तम्रतिका | 1 पैकेट |
| सर्वोषधि | 1 पैकेट |
| सप्तधान्य | 100 ग्राम |
| पंचरत्न | 1 डिब्बी |
| मिश्री | 500 ग्राम |
| चीनी | सवा किलो |
| वेदी निर्माण हेतु चौकी | ढाई बाई ढाई की एक |
| दो बाई दो की चार चौकी | – |
| पीढ़ी चार | – |
| एक हरा बांस लम्बे साइज में झंडा लगाने हेतु | – |
| हनुमान जी का झंडा बड़ा लाल वर्ण | – |
| धुंधकारी का काला झंडा अथवा काला कपडा (काला झंडा ऐसे बने की मोटे बांस में लगाया जा सके) | – |
| बालू की व्यवस्था (जो बोने के लिए) | – |
| तुलसी का पौधा हरा भरा गमला सहित | – |
| शुक्रदेव सवरूप तोता पिंजरा सहित | – |
| लड्डू गोपाल अथवा लक्ष्मीनारायण की मूर्ति एक | – |
| चित्रपट में – राधाकृष्ण, रामदरबार, शिवपरिवार, व दुर्गा का स्वरूप | – |
इसके अलावा पीला कपडा पांच मीटर सूती ,लाल कपडा तीन मीटर, सफेद कपडा तीन मीटर, हरा कपडा तथा काला कपडा 2 + 2 मीटर की जरुरत होगी |

विशेष :- शोभायात्रा में कलश और नारियल तथा झंडा -झण्डियां आदि की व्यवस्था भीड़ के अनुसार करे |
इसके अतिरिक्त हमें श्रीमद् भागवत महापुराण की सप्ताह पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :
- गाय का दूध पञ्चमृत हेतु
- ताजा दही
- सवा किलो मिष्ठान
- पाँच प्रकार के फल
- हरी दूब घास (दूर्वा )
- पान पते – पंद्रह
- साथ या दस मीटर गेंदा की लड़ी
- पोथी एव व्यास जी हेतु दो माला विशेष
- सवा किलो गेंदा एवं गुलाब के फूल
- बेलपत्र एवं तुलसीपत्र
- आम का पल्लव सात नग प्रथम दिन मात्र
पूजन में प्रयोग होने वाले नवीन पत्र
- थाली पांच , कटोरी -दस , लोटा -दो
- आचमनी पंचपात्र ,चम्मच दो
- एक ताम्बे या पीतल का कलश दक्कन सहित बड़ा साइज
- अखण्ड दीपक शीशा वाला मध्यम साइज एक
- चांदी के सिक्के दो जिसमे कोई देवता आकृति न हो |
वस्त्र की व्यवस्थता पृथक दिन के अनुसार व्यवस्था करें
- दो पगड़ी अलग – अलग कलर में एक पगड़ी कृष्ण जन्म में दूसरी रुक्मणि विवाह के लिए
- कृष्ण जन्म वाले दिन के लिए लड्डू गोपाल के लिए पोशाक एवं सम्पूर्ण परिधान मुकुट वंशी आदि अगर संभव बन पाये व्यास जी के लिए स्वर्ण मुद्रिका अवश्य लाये |
- रुक्मणि के विवाह के लिए सुन्दर वस्त्र चढ़ाये , जैसे धोती- कुर्ता साडी तथा कोई आभूषण अवश्य लाये |
- कृष्ण जन्म में दिव्य सजावट एवं भोग में माखन मिश्री तथा पञ्चामृत का निर्माण |
- विभिन्न प्रकार के खिलोने , टॉफ़िया , बिस्कुट आदि |
- रुक्मणि विवाह में पैर पूजने हेतु परिवार में सभी को शामिल होना चाहिये , वस्त्र -पात्र – आभूषण आदि श्रद्धानुसार अर्पित करे |
इसके अतिरिक्त पाँचवे दिन गोवर्धन पूजा में छप्पन भोग की तैयारी , खीर , हलवा ,पूरी , कढ़ी – चावल आदि घर में निर्माण करवाए ,व अन्य पकवान बाज़ार से मँगवा सकते है |
विशेष :- विश्राम दिवस में पोथी पूजन होता है उस दिन विदाई निर्मित जो आपको विशेष दक्षिणा, विशेष वस्त्र, विशेष गिफ्ट, अर्थांत कुछ विशेष भेट करना होता है जो आप अपनी सामर्थ्य और श्रद्धानुसार पंडित जी समर्पण कर सकते हो |
श्रीमद् भागवत हेतु हवन सामग्री व्यवस्था
श्रीमद् भागवत हेतु हवन सामग्री हेतु हमें मुख्यता निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी –
| सामग्री | मात्रा |
| काला तिल | सवा किलो |
| धूप लकड़ी | आधा किलो |
| सुगंधबाला | 100 ग्राम |
| कमल बीज | 100 ग्राम |
| बेलगुड़ी | 100 ग्राम |
| नागरमोथा | 100 ग्राम |
| जटामासी | 100 ग्राम |
| अगर-अगर | 100 ग्राम |
| सतावर | 100 ग्राम |
| गुर्च | 100 ग्राम |
| भोजपत्र | 1 पैकेट |
| गुड़ | एक किलो |
| हवन सामग्री | एक किलो |
| आम की समिधा | सात किलो |
| नवग्रह समिधा | एक पैकेट |
| काला उड़द | पचास ग्राम (दस दिग्पाल बलिदान हेतु) |
| मूग का पापड़ | एक पैकेट |
ब्रह्म पूर्णपात्र व्यवस्था
“ब्रह्मपूर्णपात्र ” की व्यवस्था आपकी मनोकामना पूर्ण हेतु की जाती है अत इसलिए :-
- “ब्रह्म पूर्णपात्र ” एक बड़ा पात्र दक्कन सहित जिसमे सात किलो चावल भर जाये |
- सात किलो चावल जो चावल खंडित बिलकुल न हो ,संभव हो तो बासमती चावल की व्यवस्था करे |

नोट :- अगर छेत्रपाल बलि निकालने की व्यवस्थता हो तो पंडित के निर्देशनुसार सामग्री की व्यवस्थता सुनश्चित करे |
श्रीमद् भागवत महापुराण का महत्व
श्रीमद् भागवत महापुराण हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है और इसका महत्व अत्यंत महान् है। यह पुराण महाभारत के महाभागवत ध्यान पर आधारित है और श्रीकृष्ण के अवतार, उनकी लीलाएं, उपदेश और महिमा को संकलित करता है।
ईश्वर के अवतार की महिमा
यह पुराण भगवान श्रीकृष्ण के अवतार की महिमा, बाललीला, किशोरलीला और महारासलीला आदि का वर्णन करता है। इसके माध्यम से लोग भगवान की महिमा का अनुभव करते हैं और उनके प्रति भक्ति एवं समर्पण विकसित होता है।
भक्ति का मार्ग
श्रीमद् भागवत महापुराण भक्ति और साधना का मार्ग प्रदर्शित करता है। इसके अनुसार, भगवान के नाम का जाप, कीर्तन, सत्संग, श्रवण, स्मरण, वंदन आदि भक्ति के आठ रसों में से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
धर्म और नैतिकता
श्रीमद् भागवत महापुराण में जीवन के नैतिक मूल्यों का विस्तारपूर्वक वर्णन होता है। यह ब्रह्मचर्य, सत्य, अहिंसा, त्याग, दया, सेवा, धर्म, अर्पण, सत्कर्म आदि को प्रमाणित करता है।
समाज सेवा: इस पुराण में लोगों को समाज सेवा, दान-धर्म, गौसेवा, परमेश्वर की प्रतिमा के प्रति सम्मान आदि के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है।
मोक्ष का साधना
श्रीमद् भागवत महापुराण में मोक्ष की प्राप्ति के लिए उपायों का वर्णन किया गया है। यह मोक्ष के साधन भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सेवा, समर्पण आदि की महिमा को बताता है और व्यक्ति को उच्चतर आदर्शों की ओर प्रेरित करता है।
इस प्रकार, श्रीमद् भागवत महापुराण आपके जीवन में स्वर्ग के दरवाजे खोलने का काम करती है |
श्रीमद् भागवत महापुराण का लाभ
श्रीमद् भागवत महापुराण भक्ति और प्रेम के विकास को प्रोत्साहित करता है। इसे पढ़ने और सुनने से मानसिक शांति, आनंद और संतुष्टि की अनुभूति होती है। यह मन को शुद्ध करके उच्च स्तर की आध्यात्मिक अनुभव के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
श्रीमद् भागवत महापुराण में विद्या, ज्ञान और दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांत सम्मिलित होते हैं। इसे पढ़ने से आप अपने पाठकों को आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ज्ञान का आदान कर सकते हैं।
श्रीमद् भागवत महापुराण में धार्मिक तत्त्वों, मौलिक सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों, कर्म के सिद्धांतों, धार्मिक नियमों और जीवन के उद्देश्य के बारे में व्यापक ज्ञान मिलता है। इसे अपने ब्लॉग में समाविष्ट करके आप अपने पाठकों को धार्मिकता के महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में समझ सकते हैं।
श्रीकृष्ण के चरित्र और उनकी उपासना से इस पुराण में आदर्श व्यक्तित्व के मार्गदर्शन के उदाहरण मिलते हैं। आप अपने ब्लॉग के माध्यम से अपने पाठकों को सच्चे मानवीय गुणों, दया, करुणा, धैर्य, और साधारण जीवन के नियमों के प्रेरणास्रोत प्रदान कर सकते हैं।
निष्कर्ष
99पंडित से आप घर बैठे श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन करवाने के लिए हमारी ऑनलाइन पंडित सेवा द्वारा अपना पंडित बुक करवा सकते हो, इसके अतिरिक्त आप रामकथा पाठ, सुन्दरकांड पाठ, ग्रहप्रवेश, आदि धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन हेतु भी अपना पंडित ऑनलाइन बुक कर सकते है | 99पंडित द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण पूजन सामग्री हेतु दी गयी जानकारी आपके कथा – पूजन में उपयोगी साबित होगी, ऐसी हम कामना करते है |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q.भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण पहलू क्या हैं?
A.भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में कई महत्वपूर्ण पहलू हैं। वे योगेश्वर हैं, अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश देने के माध्यम से मानवता के लिए ज्ञान का संदेश देते हैं। उनकी बाललीलाएं और गोपियों के संग वास उनके भक्तों के लिए प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। उनकी लीलाएं, मक्के की छोड़ी और वृंदावन में किए गए आनंदमय खेल उनके भक्तों को परम आनंद का अनुभव कराते हैं।
Q.श्रीमद् भागवत पुराण में कितने अध्याय हैं और उनका संक्षेपिक सारांश क्या है?
A.श्रीमद् भागवत पुराण में कुल 12 स्कंध (अध्याय) हैं। यहां उनका संक्षेपिक सारांश दिया जा रहा है:
- प्रथम स्कंध: भगवान के अवतारों की कथाएं, सृष्टि का वर्णन
- द्वितीय स्कंध: कृष्ण की बाललीलाएं, गोपियों का प्रेम
- तृतीय स्कंध: ब्रह्माजी के प्रश्नों का उत्तर, उद्धव गीता
- चतुर्थ स्कंध: पृथु राजा का उद्धव से संवाद
- पांचवा स्कंध: प्रह्लाद कथा, हिरण्यकशिपु के वध का वर्णन
- छठा स्कंध: गजेंद्र मोक्ष, भगवान के महिमा गान का वर्णन
- सातवा स्कंध: प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु के संवाद
- आठवा स्कंध: गोपीयों का प्रेम, रासलीला का वर्णन
- नवम स्कंध: कृष्ण के बचपन का वर्णन, वासुदेव और देवकी के जीवन की कथा
- दशम स्कंध: कृष्ण और बालराम के युद्ध, भगवान के जीवन की कथा
- एकादश स्कंध: कृष्ण के वृंदावन के विहार, गोपियों का प्रेम
- द्वादश स्कंध: भगवान के वनवास, शुकदेव जी का प्रवचन
- त्रयोदश स्कंध: भगवान का प्रयोग, प्रबुद्ध जीवों का उद्धार
Q.श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित भक्ति और धर्म के सिद्धांत क्या हैं?
A.श्रीमद् भागवत पुराण में भक्ति और धर्म के सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन है। इस पुराण में बताया जाता है कि श्रीकृष्ण भगवान को भक्ति और प्रेम की प्राथमिकता देनी चाहिए। धर्म के सिद्धांतों में नैतिकता, सच्चाई, अहिंसा, सेवा, ध्यान, स्वाध्याय, तपस्या, वैराग्य, समर्पण आदि को महत्व दिया जाता है। इसके अलावा, पुराण में ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, कर्म और मोक्ष के मार्ग पर विचार किया जाता है।
