Bajrang Baan Path Lyrics: श्री बजरंग बाण पाठ हिंदी लिरिक्स

बजरंग बाण पाठ: हिन्दू धर्म मे सप्ताहों के सातो दिनों को ग्रहों के हिसाब से रखा गया है| ज्योतिषियों का कहना है कि सप्ताह के सातो दिन अलग – अलग भगवान को समर्पित है|

यदि इन दिनों के हिसाब के भगवानो की पूजा की जाए तो आपको उनके आशीर्वाद के साथ ही उनकी असीम कृपा भी प्राप्त होगी|

हिन्दू धर्म के सबसे बलशाली के नाम से प्रसिद्ध भगवान हनुमान जी है| आज हम हनुमान जी के सबसे शक्तिशाली पाठ के बारे में यानी बजरंग बाण पाठ के बारे में बात करेंगे|

हनुमान जी की पूजा के लिए जो दिन निश्चित किया गया है वो मंगलवार रखा गया है और मान्यता यह है कि जो भी भक्त इस दिन हनुमान जी के मंदिर जाता है और हनुमान चालीसा का पाठ करता है| उनपर हनुमान जी की विशेष कृपा होती है|

बजरंग बाण पाठ

इस पाठ को मंगलवार या शनिवार के दिन करना काफी शुभ माना जाता है| जिस भी व्यक्ति के जीवन में संकट हो और वह उससे बाहर नहीं निकल पा रहा हो तो उसे यह पाठ करना चाहिए|

हिन्दू धर्म में बजरंग बाण का बहुत महत्व है| इस पाठ को करने से हनुमान जी अपने भक्तों को सारी परेशानियों और कष्टों से मुक्त करते है|

बजरंग बाण का पाठ आपके अंदर के भय को समाप्त कर देता है| हनुमानजी का आशीर्वाद पाने के लिए बजरंग बाण के साथ ही हनुमान चालीसा का भी पाठ करे| आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएँगे कि यह पाठ कब और कैसे करना चाहिए|

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बजरंग बाण पाठ – Bajrang Baan Lyrics in Hindi

|| दोहा ||

निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
बिनय करें सनमान |
तेहि के कारक सकल शुभ,
सिद्ध करें हनुमान ||

|| चौपाई ||

जय हनुमंत संत हितकारी |
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ||

जन के काज बिलंब न कीजै |
आतुर दौरि महा सुख दीजे ||

जैसे कूदि सिंधु महिपारा |
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ||

आगे जाय लंकिनी रोका |
मारेहु लात गई सुरलोका ||

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा |
सीता निरखि परमपद लीन्हा ||

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा |
अति आतुर जमकातर तौरा ||

अक्षय कुमार मारि संहारा |
लूम लपेटी लंक को जारा ||

लाह समान लंक जरि गई |
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ||

अब बिलंब केहि कारन स्वामी |
कृपा करहु उर अन्तरयामी ||

जय जय लखन प्रान के दाता |
आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता ||

जै हनुमान जयति बल – सागर |
सुर – समूह – समरथ भट – नागर ||

ॐ हनुं हनुं हनुं हनुमंत हठीले |
बैरिही मारू ब्रज की कीले ||

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीशा |
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीशा ||

जय अंजनि कुमार बलवंता |
शंकर स्वयं बीर हनुमंता ||

बदन कराल काल – कुल – घालक |
राम सहाय सदा प्रतिपालक ||

भुत, प्रेत, पिशाच निशाचर |
अगिन बेताल काल मारी मर ||

इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की |
राखु नाथ मरजाद नाम की |

सत्य होहु हरि सपथ पाई  कै |
राम दूत धरु धाई  कै ||

जय जय जय हनुमंत अगाधा |
दुःख पावत जन केहि अपराधा ||

पूजा जप तप नेम अचारा |
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ||

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं |
तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ||

जनकसुता हरि दास कहावौ |
ताकी सपथ बिलंब न लावौ ||

जै जै जै धुनि होत अकासा |
सुमिरत होय दुसह दुःख नासा ||

चरन पकरि, कर जोरि मानवौ |
यहि औसर अब केहि गोहरावौ ||

उठु, उठु,,चलु तोहि राम दुहाई |
पायँ परों, कर जोरि मनाई ||

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता |
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ||

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता |
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ||

ॐ हं हं हॉंक देत कपि चंचल |
ॐ सं सं सहमि पराने खल – दल ||

अपने जन को तुरत उबारौ |
सुमिरत होय आनंद हमारौ ||

यह बजरंग बाण जेहि मारै |
ताहि कहौ फिरि कवन उबारै ||

पाठ करै बजरंग – बाण की
हनुमत रक्षा करै प्रान की ||

यह बजरंग बाण जो जापैं |
तासों भूत – प्रेत सब काँपैं ||

धूप देय जो जपैं हमेसा |
ताकें मन नहीं रहै कलेसा ||

|| दोहा ||

उर प्रतीति दृढ़ सरन ह्वै
पाठ करै धरि ध्यान |
बाधा सब हर,
करै सब काम सफल हनुमान ||

बजरंग बाण की रचना – Creation of Bajrang Baan Path

श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है| उन्होंने रामचरितमानस को लिखने से पहले हनुमान चालीसा की रचना की थी जब अकबर ने इन्हें कारावास में बंद कर दिया था|

तब कारावास में ही उन्होंने हनुमान चालीसा की रचना की थी| कहते है कि गोस्वामी तुलसीदास ने ही बजरंग बाण की भी रचना की थी|

ऐसा कहा जाता है कि जब तुलसीदास काशी में थे| तब उनपर किसी तांत्रिक के द्वारा मारण मंत्र का उपयोग किया गया था जिससे उनके शरीर पर फोड़े निकल आये थे| तब उन्होंने बजरंग बाण का पाठ किया और हनुमान जी से सहायता के लिए प्रार्थना की|

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कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ करने के कुछ क्षण पश्चात ही तुलसीदास जी के शरीर पर से सभी फोड़े गायब हो गए थे|

तब से माना जाता है कि बजरंग बाण का पाठ शत्रुओ पर काफी ज्यादा असरदार है और अचूक वार करता है|

बजरंग बाण पाठ करने की विधि – Procedure of reciting Bajrang Baan Path

बजरंग बाण का पाठ करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के कार्यों के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कीजिये| मंगलवार का दिन शिव जी के रूद्र अवतार हनुमान जी को समर्पित किया गया है जो कि भगवान श्री राम के परम भक्त है|

सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद सूर्य भगवान को जल अर्पित करें तथा भगवान हनुमान जी की पूजा करें| पूजा के बाद में हनुमान जी को लाल फुल, अक्षत, मिठाई, फल और चंदन अर्पित करते है| फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें|

बजरंग बाण पाठ

यदि आप मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा के साथ बजरंग बाण का पाठ करते है तो आपको हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है और आपके सभी संकट दूर होते जाएंगे|

  • बजरंग बाण का पाठ करने से पहले सिद्धि विनायक गणेश जी की पूजा करते है|
  • इसके बाद आँख बंद करके भगवान राम और माँ सीता का मन ही मन स्मरण करें|
  • ध्यान करने के बाद हनुमान जी से आपका अनुरोध स्वीकार करने के लिए कहे|
  • इसके बाद बजरंग बाण का पाठ करने का संकल्प लीजिए|
  • निर्णय लेते समय लाल रंग के आसन पर बैठे और बजरंग बाण का पाठ करें|
  • सबसे पहले हनुमान जी की पूजा करे और फूल,धूप और दिया जलाएं|
  • यदि आपने बजरंग बाण का पाठ करने का निर्णय लिया है तो जितनी भी बार इसे दोहरा सकते है दोहराए|
  • जितनी भी बार अपने पाठ करने का निर्णय लिया हो, गिनती को ध्यान में रखकर पाठ करें|
  • बजरंग बाण का पाठ करते समय शब्दों के सही उच्चारण पर जरूर ध्यान दे|
  • पूजा करते समय हनुमान जी को चूरमा व गुड – चने का प्रसाद चढ़ाए|

बजरंग बाण पाठ से होने वाले लाभ – Benefit of Reciting Bajrang Baan Path

हिन्दू धर्म में मंगलवार और शनिवार दो दिन हनुमान जी को समर्पित है| इनकी पूजा करने के लिए किसी भी नियम की आवश्यकता नहीं है|

जब भी आप हनुमान जी के मंदिर जाए तो हनुमान जी को लाल कपड़ा अवश्य चढ़ाए| इससे आपको काफी लाभ मिलेगा|

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  •  बजरंग बाण का पाठ करने वाले व्यक्ति को सभी चिंताओं, बीमारियों तथा समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है|
  • कहा जाता है कि बजरंग बाण का पाठ करना  बहुत फायदेमंद है| खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन बहुत शुभ माना जाता है|
  • हनुमान चालीसा और बजरंग बाण को एक साथ पढ़ना बहुत ही शुभ माना जाता है|
  • बजरंग बाण का पाठ करने से घर में सुख – समृद्धि बनी रहती है और कभी धन की कमी नहीं होती है|
  • यदि आप बजरंग बाण का पाठ करते हो तो आप के मन से डर पूर्णत: ख़त्म हो जाएगा और हनुमान जी बुरी शक्तियों से आपकी रक्षा करेंगे|
  • बजरंग बाण का पाठ करने से आपके सभी रुके हुए कार्य फिर से सही से चलने लग जाएँगे| हनुमान जी आपके सभी कार्यो को सिद्ध करेंगे|

बजरंग बाण का पाठ करते समय ध्यान देने योग्य बातें – Things to Keep in Mind While Reciting Bajrang Baan Path

  • जब भी आप पूजा के लिए बैठे तो लाल रंग के कपड़े जरूर पहने|
  • जब तक भी आप बजरंग बाण का संकल्प लेते है| तब तक के लिए आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए|
  • ध्यान रखें कि बजरंग बाण का पाठ करते समय शब्दों का सही उच्चारण आवश्यक है|
  • बजरंग बाण का पाठ रोजाना नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें हनुमान जी को श्री राम की कसम दी जाती है|
  • संकल्प के दौरान आपको नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए|
  • आपकी जो भी मन्नत है उसे संकल्प लेते समय हनुमान जी कहे और प्रार्थना करें|

बजरंग बाण से सिद्ध होने वाले काम

विवाह में किसी भी तरह की कठिनाइयाँ आ रही हो तो कदली के पेड़ के नीचे बैठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए| इससे हनुमान जी का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन संतुष्ट होगा|

आपकी कुंडली ने किसी तरह का ग्रह या दोष हो तो सुबह जल्दी उठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए और आटे से बनी चीजों को जलाना चाइये| इससे आपकी कुंडली के सारे दोष ख़त्म हो जाएँगे|

बजरंग बाण पाठ

यदि आप किसी भी गंभीर बीमारी से परेशान है तो आपको राहुकाल में 21 पान के पत्तो की माला हनुमान जी को चढ़ानी चाहिए और बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए|

यदि आपको आपके कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह की परेशानी आ रही है तो मंगलवार का व्रत करके हनुमान जी की पूजा करने के बाद बजरंग बाण का पाठ करे और लाल रंग के कपड़े में नारियल श्री हनुमान जी को चढ़ाए|

बजरंग बाण पाठ का महत्व – Importance of Bajrang Baan Path

बजरंग बाण पाठ भगवान हनुमान जी की एक बहुत ही शक्तिशाली प्रार्थना है जिसकी मदद से हम हनुमान जी से हमारी सभी मुश्किलो को दूर करने के लिए प्रार्थना करते है और हमें सभी कठिनाईयो से बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते है।

इस मंत्र को प्रभावी बनाने के लिए, इसे करने वाले व्यक्ति को भगवान राम, जो हनुमान जी के गुरु हैं, में भी विश्वास होना अवश्य जरुरी है। यदि आप भगवान राम पर विश्वास नहीं करते हैं, तो हनुमान जी आपकी सहायता नहीं कर पाएंगे।

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यह जप उस व्यक्ति को करना चाहिए जो किसी समस्या, बीमारी या अलौकिक समस्या से पीड़ित है। कलियुग में हनुमान जी ही सबसे प्रसिद्ध, कुशल और शीघ्र फल देने वाले हैं। हनुमान जी की पूजा करते समय दिशानिर्देशों का पालन करना और संयम रखना काफी महत्वपूर्ण है।

आपको स्वयं पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि यदि आप नियम तोड़ेंगे तो हनुमान आपको दंड देंगे, इसलिए जब आप हनुमान जी की पूजा करें तो सावधान रहें।

हनुमान जी कई प्रकार से संकट दूर करते हैं। बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए बजरंग बाण का पाठ करें।

निष्कर्ष – Conclusion

बजरंग बाण पाठ हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, खासकर जब इसका पाठ मंगलवार या शनिवार को किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी इस शक्तिशाली पाठ को करने से आपके जीवन के सभी दुःख और पीड़ा समाप्त हो जाएंगी और आपकी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।

परोपकारी देवता भगवान हनुमान अपने भक्तों के जीवन से बाधाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए जाने जाते हैं।

आज के इस लेख में बजरंग बाण पाठ का पालन करते समय भगवान राम में विश्वास के महत्व और वांछित लाभ प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया गया है|

वास्तविकता में यह पाठ भगवान हनुमान जी का आशीर्वाद और सुरक्षा पाने का एक शक्तिशाली साधन है, जिन्हें शक्ति और सांत्वना का स्रोत माना जाता है।

इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते है।

इसके अलावा अगर आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे सुंदरकांड, अखंड रामायण, गृहप्रवेश और विवाह के लिए भी आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित  बहुत आसानी से बुक कर सकते है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – Frequently Asked Questions

Q.बजरंग बाण पाठ का पाठ क्यों करें?

A.बजरंग बाण पाठ भगवान हनुमान जी से जुड़ने के लिए एक बहुत ही शक्तिशाली पाठ है जो उनसे जीवन में सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है और हमें किसी भी नुकसान से बचाने के लिए कहता है। इस मंत्र को प्रभावी बनाने के लिए इसे करने वाले व्यक्ति को भगवान राम, जो कि हनुमान जी के गुरु हैं, में भी विश्वास होना चाहिए।

Q.बजरंग बाण पाठ कैसे करें?

A.सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं और हनुमान जी की पूजा करें। बाद में भगवान को लाल फूल, अक्षत, गंध, मिठाई, फल और चंदन आदि चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का जाप करें।

Q.बजरंग बाण का निर्माण कैसे हुआ?

A.श्री रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है | उन्होंने रामचरित मानस को लिखने से हनुमान चालीसा की रचना की थी जब अकबर ने उन्हें कारावास में बंद कर दिया था | तब कारावास में ही उन्होने हनुमान चालीसा की रचना की थी | कहते है कि गोस्वामी तुलसीदास ने ही बजरंग बाण की भी रचना की थी|


Ram Raksha Stotra in Hindi: राम रक्षा स्तोत्र संस्कृत तथा हिंदी में

Ram Raksha Stotra in Hindi: क्या आप भगवान श्री राम के सबसे प्रिय स्तोत्र राम रक्षा स्तोत्र के बारे में जानते है? आज हम इस लेख के माध्यम से भगवान श्री राम के इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) के बारे में जानेंगे| “श्री राम रक्षा स्तोत्र का अर्थ – भगवान श्री राम के द्वारा सुरक्षा है|”

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) की रचना ऋषि बुध कौशिक के द्वारा की गई थी|

मान्यता है कि एक दिन भगवान श्री राम ऋषि बुध के सपने में आये तथा उनके साथ मिलकर राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) गाया|

इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) में कुल 38 श्लोक है तथा ऐसा माना जाता है कि इस राम रक्षा स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक का प्रत्येक शब्द हमारे जीवन के सभी पापों को नष्ट कर सकता है|

राम रक्षा स्तोत्र

राम रक्षा स्तोत्र को सबसे पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है| इस राम रक्षा स्तोत्र में ऐसी शक्तियां है जो भगवान श्री राम के भक्तों को बुराई से मुक्ति दिलाती है|

जब इस स्तोत्र को 1,300 बार पढ़ा जाता है तो यह व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी कष्टों तथा समस्याओं को दूर करता है|

नवजात शिशु तथा नई माँ के लिए भी इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) को बहुत ही अच्छा माना जाता है|

आइये इस लेख के द्वारा जानते है राम रक्षा स्तोत्र के बारे में हिंदी अर्थ के साथ| इस राम रक्षा स्तोत्र के साथ ही हम आपको बताते है 99Pandit के बारे में|

यदि आप हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी तरह की पूजा जैसे  त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा, नवरात्रि पूजा करवाना चाहते है तो 99Pandit आपके लिए एक बहुत ही अच्छा विकल्प होगा|

श्री राम रक्षा स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित – Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi

॥ अथ ध्यानम् ॥

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं ।
पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥
वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं ।
नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥

अर्थ – जिन्होंने धनुष धारण कर रखा है| जो बद्ध पद्मासन में विराजित है तथा पीताम्बर धारण किये हुए है| जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ी के समान सुन्दर है, जो बहुत ही प्रसन्नचित्त है| जिनके बाएँ ओर माता सीता विराजमान है जिनका मुख कमल के फुल के समान सुशोभित है| जिनका रंग बादलों की भांति श्यामवर्णीय है, विभिन्न आभूषणों से सुसज्जित मैं भगवान श्री राम का वंदन करता हूँ| 

॥ इति ध्यानम् ॥

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥

अर्थ – भगवान श्री राम के चरित्र को सौ करोड़ विस्तार के समान माना गया है| उनका एक – एक अक्षर महापातकों को नष्ट करने वाला माना जाता है| 

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌ ।
जानकीलक्ष्मणॊपेतं जटामुकुटमण्डितम्‌ ॥२॥ 

अर्थ – जिनके नेत्र कमल के समान है, नील कमल के समान श्याम वर्ण वाले, जो जटाओं के मुकुट से सुशोभित है, मैं जानकी तथा लक्ष्मण सहित ऐसे भगवान श्री राम का स्मरण करके,

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्‌ ।
स्वलीलया जगन्नातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥३॥ 

अर्थ – जो अजन्मे हो अर्थात जिनका जन्म ना हुआ हो एवं सर्वव्यापक, अपने हाथों में तलवार, तुणीर तथा धनुष – बाण धारण किये हुए तथा अपनी लीलाओं के माध्यम से जगत की रक्षा हेतु अवतरित हुए ऐसे प्रभु श्री राम को स्मरण करके, 

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः॥४॥

अर्थ – मैं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले तथा सभी पापों को नष्ट करने वाले राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता हूँ| हे दशरथ पुत्र राघव मेरे ललाट की रक्षा करें| 

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ।।५।।

अर्थ – हे कौशल्या नंदन आप मेरे नेत्रों की, ऋषि विश्वामित्र के सबसे प्रिय मेरे कानों की, यज्ञ के रक्षक मेरे नाक की, तथा सुमित्रा के वत्सल मेरे मुख की रक्षा करें| 

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कंठ भरतवंदितः।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः।।६।।

अर्थ – हे विधानिधि मेरी जिह्वा की रक्षा करें, भरत वन्दित मेरे कंठ की रक्षा करें, दिव्यायुध मेरे कन्धों की और भगवान महादेव का धनुष तोड़ने वाले प्रभु श्री राम मेरे भुजाओं को रक्षा करें|

करौ सीतपति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌ ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥

अर्थ – सीता पति श्री राम मेरे हाथों की रक्षा करेंगे, परशुराम जी को जीतने वाले मेरे हृदय की तथा नाभि की जांबवान के आश्रयदाता रक्षा करें| 

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु: ।
ऊरू रघुत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्‌ ॥८॥

अर्थ – सुग्रीव के स्वामी मेरे कमर की, हनुमान जी के प्रभु हड्डियों की और सभी रघुओं में उत्तम तथा सम्पूर्ण राक्षस कुल का संहार करने वाले भगवान श्री राम जांघों की रक्षा करें| 

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्‌घे दशमुखान्तक: ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥९॥

अर्थ – सेतु का निर्माण करने वाले मेरे घुटनों की, दशानन (रावण) का वध करने वाले मेरी अग्रजंघा, विभीषण को ऐश्वर्य देने वाले प्रभु श्री राम मेरे चरणों तथा सम्पूर्ण शरीर की रक्षा करें| 

राम रक्षा स्तोत्र

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌ ॥१०॥

अर्थ – शुभ कार्य करने वाला जो भक्त पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा के साथ रामबल से संयुक्त होकर इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता है| वह व्यक्ति दीर्घायु, सुखी, विनयशील, पुत्रवान और विजयी हो जाता है| 

पातालभूतलव्योम चारिणश्छद्‌मचारिण: ।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि: ॥११॥ 

अर्थ – जो भी जीव आकाश, पाताल तथा पृथ्वी पर भ्रमण करते रहते है अथवा अपना वेश बदल कर कर घूमते रहते है| वह राम नाम से सुरक्षित व्यक्तियों को देख भी नहीं पाते है|

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्‌ ।
नरो न लिप्यते पापै भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥१२॥

अर्थ – राम, रामभद्र तथा रामचंद्र जैसे नाम का स्मरण करने वाले राम भक्त पापों से लिप्त नहीं होते है तथा वह व्यक्ति निश्चित रूप से भक्ति तथा मोक्ष को प्राप्त करता है|

जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्‌ ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥१३॥

अर्थ – जो इस राम नाम से सुरक्षित जगत पर विजय पाने वाले इस राम रक्षा स्तोत्र(Ram Raksha Stotra) को अपने कंठ में धारण करता है| उस व्यक्ति को संपूर्ण सिद्धियां प्राप्त होती है|

वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌ ।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। ॥१४॥

अर्थ – जो भी मनुष्य वज्रपंजर इस राम कवच का स्मरण करता है| माना जाता है कि कहीं भी उस व्यक्ति की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया जाता है तथा उस व्यक्ति को हमेशा विजय एवं मंगल की ही प्राप्ति होती है| 

आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर: ।
तथा लिखितवान्‌ प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक: ॥१५॥

अर्थ – ऋषि बुद्ध कौशिक को स्वप्न के माध्यम से भगवान राम का आदेश होने पर ऋषि बुद्ध कौशिक ने प्रात: उठकर इस राम रक्षा स्तोत्र की रचना की| 

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्‌ ।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान्‌ स न: प्रभु: ॥१६॥

अर्थ – जो कल्पवृक्ष के बगीचे के समान आराम देने वाले, जो सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने वाले है तथा जो तीनों लोकों में सबसे सुन्दर है, वही हमारे प्रभु श्री राम है| 

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥

अर्थ – जो युवा महाबली, सुन्दर, सुकुमार तथा कमल के समान नेत्रों वाले है, मुनियों की भांति वस्त्र तथा काले हिरण का चर्म धारण करते है| 

फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

अर्थ – जो कंद तथा फल का भोजन ग्रहण करते है, जो तपस्वी तथा ब्रह्मचारी है| हे दशरथ पुत्र राम और लक्ष्मण दोनों भाई हमारी रक्षा करें| 

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌ ।
रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ ॥१९॥

अर्थ – ऐसे महाबली रघु श्रेष्ठ मर्यादा पुरुषोत्तम समस्त प्राणियों के शरणदाता, सभी धनुर्धारियों में सबसे श्रेष्ठ, संपूर्ण राक्षसकुलों का सर्वनाश करने वाले भगवान श्री राम हमारी रक्षा करें| 

आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशा वक्षया शुगनिषङ्ग संगिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा वग्रत: पथि सदैव गच्छताम्‌ ॥२०॥

अर्थ – संघान किये, धनुष धारण किये हुए, बाण को स्पर्श कर रहे है, अक्षय बाणों से स्थित तूणीर धारण किये हुए राम और लक्ष्मण मेरे रक्षा के लिए आगे चले| 

संनद्ध: कवची खड्‌गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन् मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥२१॥

अर्थ – हमेशा तत्पर, हाथ में तलवार, कवचधारी, धनुष बाण धारण किए हुए भगवान श्री राम सहित लक्ष्मण हमारे आगे – आगे चलकर रक्षा करें| 

रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघुत्तम: ॥२२॥

अर्थ – भगवान शिव का कथन है कि श्री राम, दशरथी, शूर, लक्ष्मनाचुर, बली, काकुत्स्थ, पुरुष, पूर्ण, कौसल्येय, रघुत्तम,

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम: ।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेय पराक्रम: ॥२३॥

अर्थ – वेदांतवेद्यं, यज्ञेश, पुराण, पुरुषोत्तम, जानकी वल्लभ, श्रीमान तथा श्री अपरिमेय पराक्रम

इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्‌भक्त: श्रद्धयान्वित: ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं संप्राप्नोति न संशय: ॥२४॥

अर्थ – इत्यादि नामों का नियमित रूप से जप करने से अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक फल प्राप्त होता है| इस बात में किसी भी प्रकार कोई संशय नहीं है|  

रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
स्तुवन्ति नामिभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणौ नरः ॥२५॥

अर्थ – दूर्वादल के समान श्याम वर्ण, कमल नयन तथा पिताम्बरधारी भगवान श्री राम के सभी दिव्य नामों की स्तुति करने वाला व्यक्ति संसार चक्र में नहीं पड़ता है| 

रामं लक्ष्मण पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं ।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ॥
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्‌ ।
वन्दे लोकभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌ ॥२६॥

अर्थ – लक्ष्मण जी के बड़े भाई, सीता माता के पति, काकुत्स्थ राजा के वंशज, करुणा के सागर, ब्राह्मणों के प्रिय, परम धार्मिक, सत्यनिष्ठ, राजा दशरथ के पुत्र, श्यामवर्ण, सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर, रघुकुल तिलक, रावण के शत्रु भगवान राम मैं वंदना करता हौं| 

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥२७॥

अर्थ – भगवान श्री राम, रामभद्राय, रामचन्द्राय, विधात स्वरूप, रघुनाथ प्रभु तथा सीता माता के स्वामी भगवान श्री राम की मैं वंदना करता हूँ| 

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥

अर्थ – हे रघुनंदन श्री राम! हे भरत के बड़े भाई भगवान राम! हे रणधीर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम! कृपया मुझे शरण प्रदान कीजिये| 

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥

अर्थ – मैं अपने सम्पूर्ण एकाग्र मन से भगवान श्री राम से चरणों का स्मरण करता हूँ और भगवान श्री राम के चरणों का वाणी से गुणगान करता हूँ| मैं वाणी के द्वारा तथा सम्पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान श्री राम के चरणों को प्रणाम करता हूँ तथा उनकी शरण लेता हूँ| 

माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥ 

अर्थ – भगवान श्री राम मेरे माता, मेरे पिता, मेरे सखा तथा मेरे स्वामी है| इसी प्रकार भगवान श्री राम मेरे सर्वस्व है| भगवान श्री राम के अलावा में किसी अन्य को नहीं जानता हूँ|

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम्‌ ॥३१॥

अर्थ – जिनके दक्षिण की ओर माता लक्ष्मी, बाईं ओर माता जानकी तथा सामने हनुमान जी विराजमान है, मैं उन रघुनाथ जी की वंदना करता हूँ| 

लोकाभिरामं रनरङ्‌गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्‌ ।
कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये ॥३२॥

अर्थ – मैं संपूर्ण लोकों में सबसे सुन्दर तथा युद्ध कला में धीर, कमल के समान नयन वाले, करुणा की मूर्ति तथा करुणा के भंडार भगवान श्री राम की शरण ग्रहण करता हूँ| 

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌ ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥

अर्थ – मन के समान गति तथा वायु के समान वेग वाले, जो परम जितेंद्रिय तथा बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ है, वायु के पुत्र, वानर दल के अधिनायक तथा भगवान श्री राम के दूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ| 

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌ ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥३४॥

अर्थ – मैं इस कवितामयी डाली पर बैठकर इस मधुर अक्षरों वाले राम – राम नाम को जपते हुए वाल्मीकि रूपी कोयल की वंदना करता हूँ| 

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्‌ ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥३५॥

अर्थ – मैं इन सभी लोकों में सबसे सुन्दर भगवान श्री राम को बार बार प्रणाम करता हूँ| जो सभी आपदाओं को दूर करने वाले तथा सुख संपत्ति प्रदान करने वाले है| 

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम्‌ ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्‌ ॥३६॥

अर्थ – ‘राम – राम’ जप करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते है| वह व्यक्ति सुख सम्पति तथा ऐश्वर्य प्राप्त करता है| राम नाम की गर्जना से यमदूत भयभीत रहते है| 

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे ।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम् ।
रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥३७॥

अर्थ – राजाओं में सबसे श्रेष्ठ भगवान श्री राम सदा विजय को ही प्राप्त करते है| मैं लक्ष्मी पति श्री राम का भजन करता हूँ| पूरी राक्षस सेना का अंत करने वाले भगवान श्री राम को मैं नमस्कार करता हूँ| भगवान श्री राम के अलावा कोई आश्रय दाता नहीं है| मैं हमेशा ही भगवान राम में लीन रहूँ| हे प्रभु श्रीराम! आप मेरा उद्धार करें| 

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥

अर्थ – हे सुमुखी! भगवान श्री राम का नाम भगवान विष्णु के एक हजार नाम लेने के समान माना गया है| मैं सदा भगवान श्री राम का स्तवन करता हूँ तथा हमेशा ही भगवान श्री राम के नाम में ही रमण रहता हूँ| 

इति श्रीबुद्धकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रम संपूर्णम्‌ ॥

राम रक्षा स्तोत्र का जप किस प्रकार करेंHow To Chant Ram Raksha Stotra

भगवान श्री राम को प्रसन्न करने के लिए किया जाने वाला रामरक्षा स्तोत्र बहुत सरल है| इस राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra) का जप करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना होता है| जिसके बारे में हम आपको इस लेख के माध्यम से ही बताएंगे|

राम रक्षा स्तोत्र

  • इस रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर पीठ करके बैठना चाहिए| आप इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किसी नजदीकी राम मंदिर में, अपने कक्ष में तथा भगवान श्री राम की छवि के सामने भी कर सकते है|
  • माना जाता है कि रामरक्षा स्तोत्र का पाठ कभी भी खाली जमीन पर बैठकर नहीं करना चाहिए| इसके लिए आप किसी भी आसन का इस्तेमाल कर सकते है| जिस पर आप सहज महसूस कर सके| ज्यादातर पूजा – पाठ करने के लिए कुशा घास से बना हुआ आसन पसंद किया जाता है| 
  • विद्वानों के द्वारा बताया गया है कि इस श्री रामरक्षा स्तोत्र का पाठ यदि ब्रह्म मुहूर्त में किया जाएँ तो यह जातक के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है| इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने की सलाह नित्यकर्म से मुक्त होकर ही करने की सलाह दी जाती है| 
  • इस रामरक्षा स्तोत्र को करने से पूर्व अनुलोम – विलोम व्यायाम करने की सलाह दी जाती है| इस व्यायाम को कम से कम 3 बार करने के लिए बताया जाता है| इसके पश्चात रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए|
  • इस पाठ को शुरू करने से पहले भगवान शंकर, श्री गणेश, माता पार्वती या हनुमान जी में से किसी एक भगवान की पूजा करना अनिवार्य माना जाता है| राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से पहले आप भगवान श्री राम के प्रिय भक्त हनुमान जी की हनुमान चालीसा का जाप भी कर सकते है| 

राम रक्षा स्तोत्र पाठ करने के लाभ – Benefits of Ram Raksha Stotra in Hindi

  • यह रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति हमेशा ही सभी प्रकार के संकट से दूर रहता है| 
  • इस पाठ को किसी भी तरह की बीमारी या किसी आपदा के दुष्परिणाम को रोकने के लिए किया जाता है| 
  • इस राम रक्षा स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के सभी दुःख दूर होते है| 
  • इसका पाठ करने से जातक की कुंडली में शनि तथा मंगल का कुप्रभाव कम होता है| 
  • राम रक्षा स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के मन से भय दूर हो जाता है| 
  • माना जाता है कि राम रक्षा स्तोत्र (Ram Raksha Stotra In Hindi) का जाप करने से व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण हो जाता है| 

निष्कर्ष – Conclusion

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99Pandit के साथ|

यह सबसे बेहतरीन प्लेटफार्म है जिससे आप किसी पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक कर सकते है| इसके अलावा वर्तमान में ऐसे बहुत से लोग जिन्हें अपने ग्रंथो के बारे में कुछ भी नहीं पता है| 

हालांकि, किसी भी समय भगवान की पूजा करना आपको कठिनाइयों, समस्याओं, तनाव और नकारात्मक ऊर्जाओं से हमेंशा बचाता है। जैसा कि आज आपने इस लेख के माध्यम से रामरक्षा स्तोत्र पाठ के हिंदी अर्थ तथा लाभ के बारे में जाना| 

इसके अलावा अगर आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे नवरात्रि (Navratri),नारायण बलि पूजा (Narayan Bali Puja), पितृ दोष पूजा (Pitru Dosh Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित  बहुत आसानी से बुक कर सकते है|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

A.इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन 11 बार करना चाहिए|

Q.राम रक्षा स्तोत्र पाठ करने से क्या होता है?

A.इसका पाठ करने से मनुष्य भय रहित हो जाता है|

Q.राम रक्षा स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

A.इस राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने की सलाह नित्यकर्म से मुक्त होकर ही करने की सलाह दी जाती है|

Q.राम रक्षा स्तोत्र को कैसे सिद्ध करें?

A.नवरात्रि के समय प्रतिदिन 11 बार इस स्तोत्र का जप करके इस राम रक्षा स्तोत्र को सिद्ध किया जा सकता है|

Vindheshwari Chalisa Lyrics in Hindi: श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा हिंदी में

श्री विंधेश्वरी चालीसा देवी दुर्गा के अवतार माँ विंध्येश्वरी को समर्पित है। देवी विंध्येश्वरी को विंध्यवासिनी नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ मां विंधेश्वरी चालीसा का पाठ करता है उसके जीवन की सभी कठिनाइयां दूर हो जाती हैं।

विंध्यवासिनी देवी (विंध्येश्वरी देवी) हिंदू देवी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे विंध्य में निवास करती हैं। विंध्यवासिनी देवी तीन देवताओं या “देवियों” से बनी हैं। पहली स्वयं विंध्यवासिनी हैं, दूसरी काली हैं, और तीसरी अष्टभुजा “आठ भुजा वाली” हैं।

विन्ध्येश्वरी चालीसा

देवी विंध्येश्वरी को समर्पित चालीसा (श्री विंध्येश्वरी देवी चालीसा) बहुत शक्तिशाली हैं और ऐसी मान्यता है कि जो भी इसे नियमित रूप से पाठ करता है, उसे मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

साथ ही मां विंध्यवासिनी की पूजा और साधना का बहुत प्रचलन है। उनकी साधना तुरंत ही फलित होती है।

आइये, 99Pandit के साथ जाने इस महत्वपूर्ण चालीसा के बारे में। साथ ही जानेंगे कि इसका पाठ करने के लिए क्या नियम है।

इसके अलावा आप हमारी वेबसाइट 99Pandit के माध्यम से इस चालीसा का पाठ करने के लिए किसी पंडित को बुक कर सकते हैं, और आसानी से अपने घर या मंदिर में पाठ करा सकते हैं।

देवी विंध्येश्वरी कौन है?

देवी विंध्येश्वरी को माँ दुर्गा का रूप कहा जाता है। उन्हें कई नमो से जाना जाता है जैसे- विंध्यवासिनी, जगदम्ब, आदिशक्ति, विन्ध्याचल रानी, योगमाया, आदी। देवी विंध्येश्वरी निशुम्भ और शुम्भ नामक दो बहुत क्रूर राक्षसों का नाश करने वाली हैं।

विंध्येश्वरी माता अपने भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाने और उन्हें चुनौतियों से पार पाने के लिए शक्ति और साहस प्रदान करने के लिए जानी जाती हैं।

विंध्यवासिनी देवी हिंदू देवी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे विंध्य में निवास करती हैं। विंध्यवासिनी देवी तीन देवताओं या “देवियों” से बनी हैं। पहली स्वयं विंध्यवासिनी हैं, दूसरी काली हैं, और तीसरी अष्टभुजा “आठ भुजा वाली” हैं।

विंध्यवासिनी देवी को अक्सर सबसे शक्तिशाली हिंदू देवताओं में से एक माना जाता है क्योंकि देवी महात्मा के अनुसार उन्होंने मंदिशा नामक बैल राक्षस को हराया था। उन्हें आदि पराशक्ति के रूप में पहचाना जाता है।

श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा – Shree Vindheshwari Chalisa Lyrics in Hindi

चौपाई – 1

नमो नमो विन्ध्येश्वरी नमो नमो जगदंबे।
संतजनो के काज में मां करती नहीं विलंभ॥

अर्थ– मैं श्री विंध्येश्वरी को नमस्कार करता हूँ, मैं श्री जगदम्बा को नमस्कार करता हूँ जो सज्जनों की इच्छा पूरी करने में कभी देरी नहीं करतीं

चौपाई – 2

जय जय जय विन्ध्याचल रानी।
आदि शक्ति जग विदित भवानी॥

अर्थ– जय हो, जय हो, जय हो श्री विंध्याचल रानी की जो आदिशक्ति हैं तथा संसार में भवानी के नाम से विख्यात हैं।

चौपाई – 3

सिंहवाहिनी जै जग माता।
जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥

अर्थ– जय हो जगत जननी की जिनका वाहन सिंह है। जय हो उस माता की जो सम्पूर्ण जगत को शांति प्रदान करती हैं।

चौपाई – 4

कष्ट निवारिनी जय जग देवी।
जय जय जय जय असुरासुर सेवी॥

अर्थ– जय हो जगत की देवी की जो सभी बाधाओं को दूर करती हैं। जय हो उस माँ की जो सदैव दानवों और देवताओं द्वारा समान रूप से पूजित हैं।

चौपाई – 5

महिमा अमित अपार तुम्हारी ।
शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥

अर्थ– आपकी महिमा अपार है, जिसका वर्णन करना असंभव है। आप शेष नाग के समान हजार फनों वाले हैं।

चौपाई – 6

दीनन के दुःख हरत भवानी ।
नहिं देख्यो तुम सम कोई दानी ॥

अर्थ– हे भवानी! दुःखी मनुष्य के दुःख दूर करने वाली! मैंने उनसे अधिक दानशील स्वभाव वाली कोई नहीं देखी।

चौपाई – 7

सब कर मनसा पुरवत माता ।
महिमा अमित जगत विख्याता ॥

अर्थ– हे माँ! आप अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और इसके लिए आप पूरे संसार में प्रसिद्ध हैं।

चौपाई – 8

जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।
सो तुरतहि वांछित फल पावै ॥

अर्थ– जो व्यक्ति अनन्य भाव से आपकी पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं तुरंत पूरी हो जाती हैं।

चौपाई – 9

तू ही वैष्णवी तू ही रुद्राणी ।
तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी ॥

अर्थ– आप देवी वैष्णवी हैं। आप रुद्राणी भी हैं। आप देवी शारदा हैं और आप ब्रह्माणी भी हैं।

चौपाई – 10

रमा राधिका शामा काली ।
तू ही मात सन्तन प्रतिपाली ॥

अर्थ- राम, राधिका और काली – वास्तव में आपके विभिन्न रूप हैं। हे माँ, आप अच्छाई की रक्षा और संरक्षण भी करती हैं।

चौपाई – 11

उमा माधवी चण्डी ज्वाला ।
बेगि मोहि पर होहु दयाला ॥

अर्थ- उमा, माधवी, चण्डी और ज्वाला। कृपया मुझ पर शीघ्र ही अपनी कृपा बरसाइये।

चौपाई – 12

तू ही हिंगलाज महारानी ।
तू ही शीतला अरु विज्ञानी ॥

अर्थ- आप हिमगंगा की महारानी हैं। आप माता शीतला और ज्ञान की देवी हैं।

चौपाई – 13

दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता ।
तू ही लक्श्मी जग सुखदाता ॥

अर्थ- तुम देवी लक्ष्मी के रूप में संसार को सुख दे रही हो। तुम बुराइयों का नाश करने वाली दुर्गा माता हो!

चौपाई – 14

तू ही जान्हवी अरु उत्रानी ।
हेमावती अम्बे निर्वानी ॥

अर्थ- आप जान्हवी हैं, आप उन्नावनी हैं, आप अम्बा हैं और आप आत्माओं को मोक्ष प्रदान करने के लिए यहां हैं!

चौपाई – 15

अष्टभुजी वाराहिनी देवी ।
करत विष्णु शिव जाकर सेवी ॥

अर्थ– आप आठ भुजाओं वाली वराहणी देवी हैं जिनकी स्तुति विष्णु और शिव करते हैं।

चौपाई – 16

चोंसट्ठी देवी कल्यानी ।
गौरी मंगला सब गुण खानी ॥

अर्थ- आप देवी के 64 रूप हैं जो कल्याण सुनिश्चित करते हैं। आप गौरी हैं और सभी कल्याण करने वाली हैं!

चौपाई – 17

पाटन मुम्बा दन्त कुमारी ।
भद्रकाली सुन विनय हमारी ॥

अर्थ- हे भद्रकाली, जो पाटन मुंबा और दंता कुमारी के नाम से प्रसिद्ध हैं, कृपया मेरी प्रार्थना पर ध्यान दें!

चौपाई – 18

वज्रधारिणी शोक नाशिनी ।
आयु रक्शिणी विन्ध्यवासिनी ॥

अर्थ- हे वज्रधारी और सभी दुखों का नाश करने वाली। हे विंध्यवासिनी देवी, हमारी रक्षा करो।

चौपाई – 19

जया और विजया बैताली।
मातु सुगन्धा अरु विकराली॥

अर्थ-  जया, विजया, बैतालि, संकटि और विक्रालि!

चौपाई – 20

नाम अनन्त तुम्हार भवानी ।
बरनैं किमि मानुष अज्ञानी ॥

अर्थ-  हे भवानी! आपके नाम अनंत हैं। मुझ जैसा अज्ञानी मनुष्य उन सबका वर्णन कैसे कर सकता है?

चौपाई – 21

जा पर कृपा मातु तव होई ।
तो वह करै चहै मन जोई ॥

अर्थ- हे माँ ! आपकी कृपा से भक्त कुछ भी प्राप्त कर सकता है।

चौपाई – 22

कृपा करहु मो पर महारानी ।
सिद्धि करिय अम्बे मम बानी ॥

अर्थ- हे देवी रानी! मुझ पर अपनी कृपा बरसाओ और मेरी अभिलाषा पूरी करो।

चौपाई – 23

जो नर धरै मातु कर ध्याना ।
ताकर सदा होय कल्याना ॥

अर्थ- जो भी व्यक्ति भक्ति भाव से माता की पूजा करता है वह सदैव सुखी और समृद्ध रहता है।

चौपाई – 24

विपत्ति ताहि सपनेहु नहिं आवै।
जो देवी कर जाप करावै ॥

अर्थ- जो देवी का नाम जपता है, उसे स्वप्न में भी कभी कोई परेशानी नहीं होती!

चौपाई – 25

जो नर कहं ऋण होय अपारा।
सो नर पाठ करै शत बारा ॥

अर्थ- जो व्यक्ति भारी कर्ज में डूबा हो उसे देवी का नाम सौ बार जपना चाहिए।

चौपाई – 26

निश्चय ऋण मोचन होई जाई।
जो नर पाठ करै मन लाई॥

अर्थ– जो व्यक्ति एकनिष्ठ भक्ति के साथ देवी का नाम जपता है, उसके सारे ऋण समाप्त हो जाते हैं।

चौपाई – 27

अस्तुति जो नर पढ़े पढ़ावे।
या जग में सो बहु सुख पावै॥

अर्थ- जो इन स्तोत्रों को भक्तिपूर्वक पढ़ता है तथा दूसरों को भी पढ़वाता है, उसे इस लोक में शांति मिलती है।

चौपाई – 28

जाको व्याधि सतावै भाई।
जाप करत सब दूरि पराई॥

अर्थ– जब कोई बीमार पड़ता है तो देवी का नाम जपने से वह ठीक हो जाता है।

चौपाई – 29

जो नर अति बन्दी महं होई।
बार हजार पाठ कर सोई॥

अर्थ– यदि कोई व्यक्ति किसी बंधन (शारीरिक या मानसिक) में हो तो उसे मुक्ति पाने के लिए देवी का नाम एक हजार बार जपना चाहिए।

चौपाई – 30

निश्चय बन्दी ते छुटि जाई।
सत्य बचन मम मानहु भाई॥

अर्थ– वह अवश्य ही सभी बंधनों से मुक्त हो जायेगा। हे भाई! मेरी बात को सत्य समझो।

चौपाई – 31

जा पर जो कछु संकट होई।
निश्चय देबिहि सुमिरै सोई॥

अर्थ– यदि किसी को कोई परेशानी हो तो उसे भक्ति भाव से देवी की स्तुति करनी चाहिए।

चौपाई – 32

जो नर पुत्र होय नहिं भाई।
सो नर या विधि करे उपाई॥

अर्थ– यदि किसी दम्पति को कोई पुरुष समस्या न हो तो उन्हें यह विधि अवश्य अपनानी चाहिए।

चौपाई – 33

पांच वर्ष सो पाठ करावै।
नौरातर में विप्र जिमावै॥

अर्थ– दम्पति को लगातार पांच वर्षों तक देवी की पूजा करनी चाहिए तथा नवरात्रि के दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।

चौपाई – 34

निश्चय होय प्रसन्न भवानी।
पुत्र देहि ताकहं गुण खानी॥

अर्थ– यदि कोई व्यक्ति अनुष्ठान सही ढंग से करता है तो देवी प्रसन्न होंगी और दम्पति की इच्छा पूरी करेंगी।

चौपाई – 35

ध्वजा नारियल आनि चढ़ावै।
विधि समेत पूजन करवावै॥

अर्थ– वह भक्त पुत्र प्राप्ति के पश्चात् भगवान के पास आये। मंदिर काविंध्यवासिनी देवीऔर नारियल का गोला चढ़ाएं, झंडा फहराएं और अनुष्ठानिक पूजा करें।

चौपाई – 36

नित प्रति पाठ करै मन लाई।
प्रेम सहित नहिं आन उपाई॥

अर्थ- प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धा के साथ देवी की पूजा करने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं है।

चौपाई – 37

यह श्री विन्ध्याचल चालीसा।
रंक पढ़त होवे अवनीसा॥

अर्थ– यदि कोई दरिद्र भी देवी के इन स्तोत्रों को पढ़े तो वह भी राजा के समान बन सकता है।

चौपाई – 38

यह जनि अचरज मानहु भाई।
कृपा दृष्टि तापर होई जाई॥

अर्थ– कृपया आश्चर्यचकित न हों, लेकिन यदि देवी प्रसन्न हो जाएं तो असंभव से असंभव कार्य भी आसान हो जाता है।

चौपाई – 39

जय जय जय जगमातु भवानी।
कृपा करहु मो पर जन जानी॥

अर्थ- हे भवानी ! आपकी जय हो !! हे जगत जननी ! कृपया मुझे अपनी कृपा प्रदान करें।

चौपाई – 40

यह चालीसा जो कोई गावे
सब सुख भोग परमपद पावे

अर्थ– जो मनुष्य देवी की महिमा को समर्पित इन चालीस दोहों का गायन करता है, वह संसार में शांति का आनंद लेता है और परमगति को प्राप्त करता है।

विन्ध्येश्वरी चालीसा

श्री विंधेश्वरी चालीसा – Shree Vindheshwari Chalisa Lyrics in English

Chaupai – 1

Namo Namo Vindhyeshwari Namo Namo Jagdamba
Sant janon ke kaj men karati nahin vilamh

Meaning: I proudly salute Shree Vindhyeshwari and Shree Jagdamba, who unwaveringly fulfill the desires of noble individuals without hesitation.

Chaupai – 2

Jai Jai Jai Vindhyachal rani
Adi Shakti jad vidita Bhavani

Meaning: Victory to Shree Vindhyachal Rani, who is the Primal Power and known in the world by the name of Bhavani

Chaupai – 3

Sinha Vahini Jai Jag Mata
Jai Jai Jai Tribhuvan sukhdata

Meaning: Victory to the Mother of the World, whose vehicle is the lion. Victory to the Mother provides solace to the entire world.

Chaupai – 4

Kasht nivarani Jai Jag Devi
Jai Jai Jai Asurasur sevi

Meaning: Attainment to the Goddess of the World who clears all the barriers. Victory to the Mother ever serviced by the demon and gods alike.

Chaupai – 5

Mahima amita apar tumhari
Shesh sahas mukh varnat hari

Meaning: Endless is the praise, whose description is beyond capacity. Like serpent Shesh, you have a thousand hoods.

Chaupai – 6

Deenan ke dukh harat Bhavani
Nahin dekhyo tum sam kou dani

Meaning: O Bhavani! The savior of the distressed person’s sufferings. I have not seen anyone having a more unselfish nature.

Chaupai – 7

Sab kar mansa purvat mata
Mahima amita jagat vikhyata

Meaning: O Mother! You fulfill your devotees’ wishes, and for this, you are famous worldwide.

Chaupai – 8

Jo jan dhyan tumharo lave
So turatahi wanchhita phal pave

Meaning: Anyone who worships you with single-minded devotion instantly has all his ambitions fulfilled.

Chaupai – 9

Tu hi Vaishnavi Aru Rudrani
Tu Hi Sharada aru Brahmani

Meaning: You are Goddess Vaishnavi. You are also Rudrani. You are Goddess Sharada, and you are Brahmani.

Chaupai – 10

Rama Radhika Shyama Kali
Tu hi Matu Santan pratipali

Meaning: Rama, Radhika, and Kali are your different forms. O Mother, you also protect and preserve goodness.

Chaupai – 11

Uma Madhavi Chandi Jwala
Begi mohi par hou dayala

Meaning: Uma, Madhavi, Chandi and Jwala. Kindly shower your favor upon me soon.

Chaupai – 12

Tum hi Hingalaj Maharani
Tum hi Sheetala aru Vigyani

Meaning: You are Maharani of Himgalaj. You are Mother Sheetala and Goddess of knowledge and wisdom.

Chaupai – 13

Tum hi Lakshmi jag sukhdata
Durga durg vinashani Mata

Meaning: You are offering happiness to the world in the form of Goddess Lakshmi. You are Durga Mata, who destroys evil!

Chaupai – 14

Tum hi Janhavi aru Unnani
Hemavati Ambe Nirvani

Meaning: You are Janhavi, and you are Unnani, and you are Amba and are here to provide salvation to the souls!

Chaupai – 15

Ashthabhuja Varahini Devi
Karat Vishnu Shiv ja kar sevi

Meaning: You are the eight-armed Varahani Devi whom Lord Vishnu and Lord Shiva praise.

Chaupai – 16

Chausatti Devi Kalyani
Gauri Mangala sab gun khani

Meaning: You are the 64 forms of Goddess providing welfare. You are Gauri and the doer of all good!

Chaupai – 17

Patan Mumba Dant Kumari
Bhadrakali sun vinay hamari

Meaning: O Bhadrakali, well-known by the names of Patan Mumba and Danta Kumari, please heed my supplication!

Chaupai – 18

Vajra dharani shoka Nashini
Ayurakshani Vindhyavasini

Meaning: O Wielder of the Thunderbolt and Destroyer of all sorrow. O Vindhyavasini Devi, protect us.

Chaupai – 19

Jaya aur Vijaya Baitali
Matu Sankati aru Vikrali

Meaning: Jaya, Vijaya, Baitali, Sankati and Vikrali!

Chaupai – 20

Naam ananta tumhar Bhavani
Barane kim manush agyani

Meaning: O Bhavani! Infinite are your names. How can an ignorant man like me describe them all?

Chaupai – 21

Ja par kripa Matu tav hoi
Tau waha kare chahe man joi

Meaning: O Mother! With your favor, a devotee can achieve anything.

Chaupai – 22

Kripa karahu mo par Maharani
Siddh karau Ambe mum bani

Meaning: O Queen of Goddess! Shower thy favor on me and fulfill my ambition.

Chaupai – 23

Jo nar dhare Matu kar dhyana
Ta kar sada hoya Kalyana

Meaning: Whoever prays to Mata with devotion is always joyful and prosperous.

Chaupai – 24

Vipati tahi sapnehu nahi ave
Jo Devi kau Jap karave

Meaning: Anyone who recites the name of the Goddess never experiences any problem, even in dreams!

Chaupai – 25

Jo nar kahan rina hoya apara
So nar path karey shatvara

Meaning: Whoever is indebted heavily should recite the name of the Goddess a hundred times.

Chaupai – 26

Nishchaya rina Mochan hui Jayi
Jo nar path kare man Layi

Meaning: Whoever chants the name of the Goddess with undivided devotion will pay off all his debts.

Chaupai – 27

Astuti jo nar Padhe Padhave
Ya jag men so bahu sukh pave

Meaning: Whoever reads these hymns devotedly and also causes others to read achieves peace in the world.

Chaupai – 28

Jaka Vyadhi Satave bhai
Jap karati sab door parai

Meaning: When anybody is ill, he will get well by reciting the name of the Goddess.

Chaupai – 29

Jo nar ati bandhan men hoi
Bar hazar Path kar soi

Meaning: If a man is in bondage (physical or mental), he has to recite the goddess’s name a thousand times to gain liberation.

Chaupai – 30

Nishchaya bandhan se chhuti jai
Satya vachan mum manahu bhai

Meaning: He will be released from all bondages. O brother! Consider my word to be true.

Chaupai – 31

Jo par jo kachhu sankat hoi
Nishchaya Devihi sumire soi

Meaning: If anyone is facing any trouble, he should chant the Goddess’s praises with devotion.

Chaupai – 32

Ja kahan putra hoya nahin bhayi
So nar ya vidhi kare upayi

Meaning: If the couple has no son, then they should adopt this Vidhi

Chaupai – 33

Pancha baras so path karave
Nauratan mahan vipra jimave

Meaning: The couple should perform the worship of the Goddess incessantly for five years and feed the Brahmans during Navratra.

Chaupai – 34

Nishchaya honya prasanna Bhavani
Putra dehin takanha gun khani

Meaning: If one performs the ritual correctly, Devi will be pleased and will grant the desire of the married couple.

Chaupai – 35

Dhwaja Nariyal ani chadhave
Vidhi sameta poojan karvave

Meaning: That devotee, having obtained the son, should approach the Temple of Vindhyavasini Devi and give a coconut shell, hoist a flag, and perform the ritual worship ceremonially.

Chaupai – 36

Nita prati path kare man layi
Prem sahita nahin ani upayi

Meaning: Every day, there is no other go but worshipping the Goddess with all devotion.

Chaupai – 37

Yaha Shree Vindhyachal Chalisa
Rank padhat hove avaneesa

Meaning: If even a poor man reads these Goddess’s hymns, then he can even become a king.

Chaupai – 38

Yaha jani acharaj manahu bhai
Kripa drishtihi ja par hoi jai

Meaning: Please don’t be shocked, but if the Goddess is pleased, the most impossible work seems to be possible.

Chaupai – 39

Jai Jai Jai Jag Matu Bhavani
Karahu kripa mo par jan jani

Meaning: O Bhavani! Victory to Mother of the World! Please grant me your grace.

Chaupai – 40

Yaha Chalisa jo koi gave
Sab sukh bhog parampad pave

Meaning: Anyone who chants these forty couplets devoted to the glory of the Goddess enjoys peace in the world and attains the Highest State.

निष्कर्ष

विंधेश्वरी चालीसा देवी विंध्येश्वरी या विंध्यवासिनी की 40 पद्यीय प्रार्थना है। हिंदू धर्म में प्रतिदिन विंधेश्वरी चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

ऐसा माना जाता है जो कोई भी इस चालीसा का पाठ करता है उसके जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं तथा यह मनोकामनाओं को पूरा करने वाला चालीसा है।

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार देवी का ये नाम उनको विंध्य पर्वत से मिला हुआ है। माता के इस रूप का अर्थ है- विंध्य में निवास करने वाली।

इस चालीसा के नियमित पाठ से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विंधेश्वरी चालीसा को देवी दुर्गा की पूजा के दौरान भजन के रूप में गाया जा सकता है।

इसी के साथ आज के ब्लॉग में इतना ही। ऐसे ब्लॉग पढ़ने के लिए जुड़े रहिए 99Pandit के साथ। आप विंधेश्वरी चालीसा के लिए हमारी 99Pandit वेबसाइट की मदद से पंडित को बुक करवा सकते हैं। तो आज ही 99Pandit के साथ पंडित बुक करें।

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi: शिव चालीसा का लाभ तथा महत्व

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi: हिन्दू धर्म में अनेकों देवी – देवताओं की पूजा की जाती है| सभी लोग अपनी श्रद्धा व आस्था के अनुसार अलग – अलग देवी – देवताओं को मानते है| उनसे प्रार्थना करने के लिए कई सारे पूजा – पाठ, चालीसा, आरतियाँ और अन्य कई ऐसे बहुत सी चीज़े है|

आज हम जिनकी चालीसा के बारे में बात करेंगे वो है इस संसार के पालक भगवान शिव| जिसे शिव चालीसा के नाम से भी जाना जाता है|

माना जाता है कि भगवान केवल एक दीपक जलने मात्र से ही अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते है| भगवान को प्रसन्न करने के लिए अनेकों आरतियों और चालीसा और मंत्रो का निर्माण किया गया जिनका नियमित रूप से जप करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है तथा सभी कष्टों का निवारण होता है|

शिव चालीसा

भगवान शिव की इस शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) को उनके प्रिय ग्रंथ शिव पुराण से लिया गया है|

शिव पुराण की रचना महर्षि वेदव्यास जी के द्वारा की गयी है| इसलिए शिव चालीसा के रचयिता भी महर्षि वेदव्यास जी ही है| शिव पुराण एक बहुत ही पवित्र ग्रन्थ है|

जिसे देववाणी संस्कृत में लिखा गया है| इस शिव पुराण में 24 हजार श्लोक है| शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) का यह पाठ भगवान शंकर को प्रसन्न करने एक बहुत ही अच्छा साधन है|

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार शिव चालीसा का पाठ करने से भक्तों को बहुत जल्द लाभ की प्राप्ति होती है|

शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ कुछ जरुरी नियम को अपनाकर करने से महादेव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है और उनके सभी दुःख व कष्टों को भी दूर करते है| शिव चालीसा  में “चालीस” चौपाईयां है| जिनमे भगवान शिव की स्तुति का गुणगान किया गया है|

शिव चालीसा पाठ चौपाई – Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

|| दोहा ||

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

|| चौपाई ||

जय गिरिजा पति दीन दयाला, सदा करत सन्तन प्रतिपाला ।
भाल चन्द्रमा सोहत नीके, कानन कुण्डल नागफनी के ॥ 

अंग गौर शिर गंग बहाये, मुण्डमाल तन क्षार लगाए ।
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे, छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी, बाम अंग सोहत छवि न्यारी ।
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी, करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे, सागर मध्य कमल हैं जैसे |
कार्तिक श्याम और गणराऊ, या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा, तब ही दुख प्रभु आप निवारा ।
किया उपद्रव तारक भारी, देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ, लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ।
आप जलंधर असुर संहारा, सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई, सबहिं कृपा कर लीन बचाई |
किया तपहिं भागीरथ भारी, पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥ 

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं, सेवक स्तुति करत सदाहीं |
वेद नाम महिमा तव गाई, अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला, जरत सुरासुर भए विहाला |
कीन्ही दया तहं करी सहाई, नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥ 

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा, जीत के लंक विभीषण दीन्हा |
सहस कमल में हो रहे धारी, कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई, कमल नयन पूजन चहं सोई |
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर, भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी, करत कृपा सब के घटवासी |
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै, भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

मात-पिता भ्राता सब होई, संकट में पूछत नहिं कोई |
स्वामी एक है आस तुम्हारी, आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं, जो कोई जांचे सो फल पाहीं |
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी, क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥ 

शंकर हो संकट के नाशन, मंगल कारण विघ्न विनाशन |
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं, शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय, सुर ब्रह्मादिक पार न पाय |
जो यह पाठ करे मन लाई, ता पर होत है शम्भु सहाई ॥ 

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी, पाठ करे सो पावन हारी |
पुत्र हीन कर इच्छा जोई, निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे, ध्यान पूर्वक होम करावे |
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा, ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे, शंकर सम्मुख पाठ सुनावे |
जन्म जन्म के पाप नसावे, अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी, जानि सकल दुःख हरहु हमारी |

|| दोहा ||

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

Shiv Chalisa Lyrics in English – जय गिरिजा पति दीन दयाला

|| Doha ||

Jay Ganesh Girija Suvan,
Mangal Mool Sujan.
Kahat Ayodhya Das Tum,
Dehu Abhay Varadan.

|| Chaupai ||

Jay Girija Pati Deen Dayala, Sada Karat Santan Pratipala.
Bhaal Chandrama Sohat Nike, Kaanan Kundal Naagphani Ke.

Ang Gaur Shir Gang Bahaye, Mundamal Tan Kshar Lagaye.
Vastr Khaal Baghambar Sohe, Chhavi Ko Dekhi Naag Man Mohe.

Maina Matu Ki Have Dulari, Baam Ang Sohat Chhavi Nyari.
Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari, Karat Sada Shatrun Kshayakari.

Nandi Ganesh Sohai Tah Kaise, Saagar Madhya Kamal Hain Jaise.
Kartik Shyam Aur Ganraau, Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau.

Devan Jabahi Jaay Pukaara, Tab Hi Dukh Prabhu Aap Nivaara.
Kiya Upadrav Tarak Bhari, Devan Sab Mili Tumhin Juhaari.

Turat Shadanan Aap Pathaayau, Lavanimansh Maham Mari Girayau.
Aap Jalandhar Asur Sanhaara, Suyash Tumhaar Vidit Sansara.

Tripurasur San Yudh Machaai, Sabahin Kripa Kar Leen Bachaai.
Kiya Tapihin Bhagirath Bhari, Purab Pratijna Taasu Puraari.

Danin Mahin Tum Sam Koi Naahi, Sevak Stuti Karat Sadaahi.
Ved Naam Mahima Tav Gaai, Akath Anadi Bhed Nahi Paai.

Prakati Udadh Manthan Mein Jwaala, Jarat Surasur Bhae Vihaala.
Keenhi Daya Tahan Kari Sahaai, Neelakanth Tab Naam Kahaai.

Poojan Ramchandra Jab Keenha, Jeet Ke Lank Vibhishan Deenha.
Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari, Keenhi Pariksha Tabahin Puraari.

Ek Kamal Prabhu Raakheu Joi, Kamal Nayan Poojan Chahan Soi.
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar, Bhae Prasann Diye Ichhit Var.

Jay Jay Jay Anant Avinaashi, Karat Kripa Sab Ke Ghatvaasi.
Dusht Sakal Nit Mohi Sataavai, Bhramat Rahoun Mohi Chain Na Aavai.

Maat-Pita Bhrata Sab Hoi, Sankat Mein Poochat Nahi Koi.
Swami Ek Hai Aas Tumhaari, Aay Harahu Mam Sankat Bhari.

Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi, Jo Koi Jaanche So Phal Paahi.
Astuti Kehi Vidhi Karain Tumhaari, Kshamahu Nath Ab Chook Hamaari.

Shankar Ho Sankat Ke Nashan, Mangal Kaaran Vighna Vinaashan.
Yogi Yati Muni Dhyaan Lagaavain, Sharad Narad Shish Navaavain.

Namo Namo Jay Namah Shivaya, Sur Brahmaadik Paar Na Paai.
Jo Yeh Paath Kare Man Laai, Ta Par Hot Hai Shambhu Sahaai.

Riniyaan Jo Koi Ho Adhikaari, Paath Kare So Paavan Haari.
Putr Heen Kar Ichha Joi, Nishchay Shiv Prasad Tehi Hoi.

Pandit Trayodashi Ko Laave, Dhyaan Poorvak Hom Karaave.
Trayodashi Vrat Karai Hamesha, Taake Tan Nahin Rahai Kalesha.

Dhoop Deep Naivedya Chadhaave, Shankar Sammukh Paath Sunaave.
Janam Janam Ke Paap Nasaave, Ant Dhaam Shivapur Mein Paave.

Kahain Ayodhya Das Aas Tumhaari, Jaani Sakal Dukh Harahu Hamaari.

|| Doha ||

Nitt Nem Kar Praatah Hi, Paath Karau Chalisa.
Tum Meri Manokamana, Purn Karo Jagadish.

Magasar Chhati Hemant Ritu, Samvat Chausath Jaan.
Astuti Chalisa Shivahi, Purn Kin Kalyan.

शिव चालीसा क्या है ?

भगवान शिव अपने भक्तों से एक लोटा जल चढ़ाने मात्र से ही बहुत प्रसन्न हो जाते है| सभी देवों में से महादेव ही एकमात्र ऐसे जो अपने भक्तो के बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है| महादेव अपनी सरल प्रकृति के साथ ही अपने रौद्र रूप के लिए भी जाने जाते है| भगवान शिव का व्यवहार अत्यंत ही भोला है| इसलिए उन्हें भोले नाथ के नाम से भी जाना जाता है|

भगवान महादेव को प्रसन्न करने के लिए ही शिव चालीसा का निर्माण किया गया था| जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इस शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) प्रत्येक को सोमवार के दिन पढता है| भगवान शिव के द्वारा उसे मनचाहे फल की प्राप्ति होती है|

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

वेदों के अनुसार शिव चालीसा का पाठ अधिकतर तब किया जाता है| जब किसी भक्त पर कोई परेशानी या संकट आया हो| शिव चालीसा ही एक मात्र ऐसा उपाय है जिसकी सहायता से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के सभी दुःख – दर्द दूर हो जाते है| हिन्दू धर्म में भगवान शिव के भक्तों के लिए शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) का बहुत ही बड़ा महत्व माना गया है|

शिव चालीसा में महर्षि वेद व्यास जी के द्वारा लिखे आसान शब्दों की सहायता से भगवान शिव को बहुत ही जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है| शिव चालीसा से कठिन से कठिन कार्यों को भी किया जा सकता है| शिव चालीसा में उपस्थित चालीस पंक्तियों के भीतर भगवान शिव की महिमा का बखान किया गया है|

भगवान शिव जितने ही स्वभाव के अच्छे है| उतना ही उनका क्रोध भी भयानक है| हनुमान जी को भगवान शंकर के ही 11 वे रूद्र अवतार में जाना जाता है| हनुमान चालीसा के बारे में भी यदि आप कुछ जानना चाहते है तो हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर देख सकते है|

भगवान शिव के बारे में विवरण

सनातन धर्म में  भगवान शिव अनेकों नामों से जाना जाता है| जैसे – शंकर भगवान, महादेव, आदिनाथ, भोलेनाथ, आदि ऐसे ही कई नामो से जाना जाता है| एक ब्रह्माण्ड में जिस तरह से ब्रह्मा जी को इस सृष्टि का रचनाकार, विष्णु भगवान को पालनकर्ता|

उसी प्रकार ही भगवान शिव को इस सृष्टि के संहारक के रूप में भी जाना जाता है| हमारे महादेव का रहन – सहन और उनकी वेशभूषा बिल्कुल ही अलग है| महादेव का यही रूप इनके भक्तों को बहुत ही भाता है| आज हम आपको कैलाश पर्वत के अधिपति भगवान शंकर व उनके जीवन से जुड़ी हुई कई सारी बातों के बारे में जानेंगे|

इस धरती पर सबसे पहले भगवान शंकर ने ही जीवन के प्रचार और प्रसार के लिए कोशिश की थी| इसके भोलेनाथ तो आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है| भगवान शिव के अनेकों शस्त्र है| जैसे – धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु तथा सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है जो की महादेव के द्वारा ही बनाए गए है|

इसके अलावा भगवान शिव के गले में जो नाग लिपटा हुआ रहता है उनका नाम वासुकी है जो कि शेषनाग के छोटे भाई है| भगवान शिव की पहले पत्नी सती माँ ने ही पार्वती जी के रूप में दोबारा जन्म लिया था| उन्हें उमा, उर्मि कहा जाता है| माता पार्वती और भगवान शिव के कुल 6 पुत्र है| जिनके नाम – गणेश जी, कार्तिकेय जी, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा है|

भगवान शिव के बहुत सारे गण है जिनमे से सबसे प्रमुख भैरव, वीरभद्र, चंदिस, श्रृंगी, नंदी, भृगिरिटी, घंटाकर्ण, जय और अजय है| और इन सबके अलावा पिशाच, राक्षस, नाग – नागिन और पशु और पक्षियों को भी भगवान शिव का ही गण माना गया है|

शिव चालीसा पाठ करने का नियम

भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता है जो अपने भक्तों से बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है| महादेव के कई सारे भक्त उनकी पूजा करते है और शिव चालीसा का पाठ करते है| लेकिन उन लोगों को इसका पूर्ण रूप से लाभ नहीं मिल पाता है| इसके कई कारण हो सकते है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि कही ना कही हम लोगों से शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ करने के जो नियम है, उनमे चूक हो जाती है|

शिव चालीसा

बहुत से लोग है जिनको शिव चालीसा पाठ के नियमों के बारे कुछ भी पता नहीं है| यदि आपको शिव चालीसा पाठ का सम्पूर्ण लाभ चाहिए तो आपको शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi) से सम्बंधित नियम और विधि के बारे में ज्ञान होना आवश्यक है| तो आइये जानते है कि वह क्या नियम और विधि है जिनका हमे शिव चालीसा पढ़ते समय ध्यान रखना होता है|

महत्वपूर्ण नियम –

  • भगवान शिव की इस पवित्र शिव चालीसा का पाठ करने के लिए हिन्दू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त बताया गया| इसलिए हो सके तो शिव चालीसा का पाठ ब्रह्म मुहूर्त में किया जाना चाहिए|  
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ़ वस्त्रों को धारण करना चाहिए| भगवान शिव को हल्के रंग के काफी ज्यादा पसंद है तो इस दिन गहरे रंग की अपेक्षा हल्के रंग के कपड़े ही धारण करे| 
  • भगवान की वंदना या चालीसा पढ़ते समय फिर चाहे वो किसी भी भगवान की हो, हमेशा साफ़ सुथरा आसन बिछाकर ही करे| जमीन पर बैठकर शिव चालीसा नही पढनी चाहिए|
  • भगवान शिव को चढाने के लिए बतासे या मिश्री का उपयोग अधिकतर किया जाता है| आप पत्थर वाली मिश्री का भी उपयोग कर सकते है लेकिन उसमें अशुद्धता नहीं होनी चाहिए| इसके अलावा आपको बता दे कि भगवान को सफ़ेद चीनी का भोग लगाना वर्जित है| 
  • जब आप शिव चालीसा का पाठ करने वाले उससे पहले भगवान शिव के समीप एक गाय के घी का दीपक जरूर जलाये| उसके पश्चात एक लोटे में जल भरकर भगवान के सामने रख दीजिये| 
  • इसके पश्चात अपने हाथ में थोड़े अक्षत (चावल),  फूल और जल लेकर स्वयं का नाम और अपने गौत्र का नाम बोलकर संकल्प लेवे| आपने अपनी श्रद्धा के अनुसार कितने भी दिन का संकल्प ले सकते है| 
  • अब आप सबसे पहले गणेश जी को नमन कीजिये| उसके बाद में यदि आपके पास शिवलिंग है तो उस शिवलिंग का जल से अभिषेक करें 
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि शिव चालीसा का पाठ विषम संख्या के रूप में भी किया जाता है| जैसे – 3,5,11 | कम से कम 3 बार तो शिव चालीसा का पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है|

शिव चालीसा पाठ के लाभ  

  • इस शिव चालीसा का प्रतिदिन नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के मन में साहस बहुत ही अधिक बढ़ता है और शक्ति का संचार होता है| जिसकी सहायता से वह हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है| 
  • यदि आप किसी इसे रोग से पीड़ित है, जिसका उपचार काफी समय से नहीं हो पा रहा है| तो उस व्यक्ति जल्द से जल्द ही भगवान शिव की उपसना करना शुरू कर देना चाहिए| सनातन धर्म में इस बात का उल्लेख है कि शिव चालीसा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना गया है| 
  • शिव चालीसा का पाठ करने मात्र से ही व्यक्ति के सभी दुख व दर्द दूर होने लगते है| 
  • यदि आप के जीवन में धन सम्बंधित समस्या चल रही है तो शिव चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से धीरे – धीरे आपकी आर्थिक संबंधी समस्या दूर होने लगेगी|
  • मान्यता के अनुसार शिव चालीसा का विधिवत रूप से पाठ करने से मनचाहे जीवन साथी की भी प्राप्ति होती है|  

निष्कर्ष

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है| जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99Pandit के साथ|

यह सबसे बेहतरीन प्लेटफार्म है जिससे आप किसी पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक कर सकते है| इसके अलावा वर्तमान में ऐसे बहुत से लोग जिन्हें अपने ग्रंथो के बारे में कुछ भी नहीं पता है, यदि आप हनुमान चालीसा  या श्री रामचरितमानस के बारे में जानकारी लेनी हो या किसी पूजा के लिए पंडित जी की तलाश कर रहे है तो हम आपको आज एक ऐसी वेबसाइट के बारे में बताने जा रहे है|

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.शिव चालीसा का पाठ कैसे किया जाता है ?

A.सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ़ वस्त्रों को धारण करना चाहिए| भगवान शिव को हल्के रंग के काफी ज्यादा पसंद है तो इस दिन गहरे रंग की अपेक्षा हल्के रंग के कपड़े ही धारण करे| भगवान की वंदना या चालीसा पढ़ते समय फिर चाहे वो किसी भी भगवान की हो, हमेशा साफ़ सुथरा आसन बिछाकर ही करे|

Q.शिव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए ?

A.सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ़ वस्त्रों को धारण करना चाहिए इसके पश्चात ही शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए|

Q.शिव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ है ? 

A.इस शिव चालीसा का प्रतिदिन नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के मन में साहस बहुत ही अधिक बढ़ता है और शक्ति का संचार होता है| जिसकी सहायता से वह हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है|

Q.भोलेनाथ (भगवान शिव) को सर्वाधिक प्रिय क्या है ?

A.हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र बहुत अधिक प्रिय है| यदि भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाया जाए तो भगवान शिव इससे बहुत ही प्रसन्न होते है और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाए पूर्ण करते है|


Shree Kuber Chalisa Lyrics in Hindi: श्री कुबेर चालीसा पाठ

Kuber Chalisa Lyrics: कुबेर चालीसा का पाठ धन के देवता भगवान कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का पाठ स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करके करने से भक्त को धन से संबंधित सभी समस्याओं से राहत मिलती है तथा सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होती है|

कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ के साथ – साथ ही यदि आप लक्ष्मी जी की आरती का जाप करने माता लक्ष्मी भी उनसे प्रसन्न होती है व उनके घर में धन की वर्षा भी करती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ एक धार्मिक भक्ति भजन है जो भगवान कुबेर को समर्पित किया गया है|

कुबेर चालीसा

इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ का जाप धन को आकर्षित करने तथा वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए भी किया जाता है| ऐसा माना जाता है कि इस कुबेर चालीसा का जाप करने से भगवान कुबेर प्रसन्न होते है तथा इसके बदले वह अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करते है|

जिससे भक्तों को धन संबंधी सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है|


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कुबेर चालीसा पाठ – Shree Kuber Chalisa Lyrics in Hindi

|| कुबेर चालीसा ||

|| दोहा ||

जैसे अटल हिमालय,
और जैसे अडिग सुमेर ।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे,
अविचल खडे कुबेर ॥

विघ्न हरण मंगल करण,
सुनो शरणागत की टेर ।
भक्त हेतु वितरण करो,
धन माया के ढेर ॥

|| चौपाई ||

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥

यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥

सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥

विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥

शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥

पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥

शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि-सिद्धि नित भोग लगावैं ॥

दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥

पुरुषों में जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥

नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥

स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर-दूर तक होए उजाला ॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ॥

बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥

कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥

यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥

रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥

कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥

रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥

कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥

चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥

जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥

उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥

प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥

॥ दोहा ॥

शिव भक्तों में अग्रणी,
श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,
कर दो दूर अंधेर ॥

कर दो दूर अंधेर अब,
जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी,
दया की दृष्टि फेर ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

कुबेर चालीसा

Shree Kuber Chalisa Lyrics in English – जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी

|| Kuber Chalisa ||

|| Doha ||

Jaise Atal Himalaya,
Aur jaise Adig Sumer.
Aise hi Swarg Dwar pe,
Avichal khade Kuber.

Vighn haran mangal karan,
Suno sharnagat ki ter.
Bhakt hetu vitran karo,
Dhan maya ke dher.

|| Chaupai ||

Jai Jai Jai Shri Kuber Bhandari.
Dhan maya ke tum adhikari.

Tap tej punj nirbhay bhay hari.
Pavan veg sam sam tanu baladhari.

Swarg dwar ki karen pehre dari.
Sevak Indra Dev ke aagyakari.

Yaksha yakshini ki hai sena bhari.
Senapati bane yuddh mein dhanudhari.

Maha yoddha ban shastra dharein.
Yuddh karein shatru ko maarein.

Sada vijayi kabhi na haarein.
Bhagat jano ke sankat tarein.

Prapitamah hain swayam vidhata.
Pulista vansh ke janm vikhyata.

Vishrava pita Idvija ji mata.
Vibhishan bhagat aapke bhrata.

Shiv charano mein jab dhyan lagaya.
Ghor tapasya kari tan ko sukhaya.

Shiv vardan mile devtya paya.
Amrit paan kari amar hui kaya.

Dharm dhvaja sada liye haath mein.
Devi devta sab firai saath mein.

Pitambar vastra pahne gat mein.
Bal shakti puri yaksh jaat mein.

Swarn sinhasan aap virajein.
Trishul gada hath mein saajein.

Shankh mridang nagare bajayein.
Gandharv raag madhur swar gaayein.

Chausath yogini mangal gaavein.
Riddhi-siddhi nit bhog lagavein.

Daas daasani sir chatra phiraavein.
Yaksh yakshani mil chavar dhulaavein.

Rishiyo mein jaise Parashuram bali hain.
Devan hain jaise Hanuman bali hain.

Purusho mein jaise Bhima bali hain.
Yaksho mein aise hi Kubera bali hain.

Bhagato mein jaise Prahlad bade hain.
Pakshiyon mein jaise Garud bade hain.

Nago mein jaise Shesh bade hain.
Vaise hi bhagat Kubera bade hain.

Kandhe dhanush hath mein bhala.
Gale phoolon ki pahni mala.

Swarn mukut aru deh vishaala.
Door-door tak hoye ujala.

Kubera dev ko jo man mein dhare.
Sada vijay ho kabhi na haare.

Bigde kaam ban jaayein saare.
Ann dhan ke rahein bhare bhandare.

Kubera gareeb ko aap ubhara.
Kubera karj ko shighra utara.

Kubera bhagat ke sankat tara.
Kubera shatru ko kshan mein maare.

Shighra dhani jo hona chahe.
Kyun nahi Yaksh Kubera manaye.

Yah paath jo padhe padhaaye.
Din dugna vyaapar badhaaye.

Bhoot pret ko Kubera bhagaave.
Ade kaam ko Kubera banaave.

Rog shok ko Kubera nashaave.
Kalank kodh ko Kubera hataave.

Kubera chadhe ko aur chadhade.
Kubera gire ko pun: utha de.

Kubera bhagy ko turant jaga de.
Kubera bhule ko raah bata de.

Pyaase ki pyaas Kubera bujha de.
Bhookhe ki bhook Kubera mita de.

Rogi ka rog Kubera ghata de.
Dukhiya ka dukh Kubera chhuta de.

Baanh ki god Kubera bhara de.
Kaarobar ko Kubera Badha de.

Kaaraagaar se Kubera chhuda de.
Chor thagon se Kubera bacha de.

Court case mein Kubera jitavae.
Jo Kubera ko man mein dhyaavae.

Chunav mein jeet Kubera karaae.
Mantri pad par Kubera bithaave.

Paath kare jo nit man laai.
Uski kala ho sada savaai.

Jispe prasann Kubera ki maai.
Uska jeevan chale sukhdaai.

Jo Kubera ka paath karaave.
Uska beda paar lagaave.

Ujade ghar ko pun: basaave.
Shatru ko bhi mitr banaave.

Sahasr pustak jo daan karaai.
Sab sukh bhog padaarth paai.

Pran tyag kar swarg mein jaai.
Manas parivaar Kubera keerti gaai.

|| Doha ||

Shiv bhakton mein agrani,
Shri Yaksharaj Kuber.
Hriday mein gyan prakash bhar,
Kar do door andher.

Kar do door andher ab,
Jara karo na der.
Sharan pada hoon aapki,
Daya ki drishti pher.

Nitt nem kar pratah hi, paath karoun chalisa.
Tum meri manokamana, purn karo Jagadish.

Magsar Chhathi Hemant Rutu, Samvat Chausath Jaan.
Astuti chaalisa Shivahi, poorn kiye kalyan

Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi: संकटमोचन हनुमानाष्टक

Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi: संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ भगवान श्री राम के प्रिय हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| कहा जाता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने का सही मार्ग भगवान श्री राम की भक्ति ही है| यदि आप पर किसी प्रकार का संकट है तो आप भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए इस संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ कर सकते है| आइये जानते है क्या है हनुमानाष्टक पाठ|

संकटमोचन हनुमानाष्टक

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संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र – Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi

|| हनुमान अष्टक ||

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ 

अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ 

रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ 

बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ 

रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो 
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो ॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥

संकटमोचन हनुमानाष्टक

Sankatmochan Hanuman Ashtak Lyrics in English – बाल समय रवि भक्षी लियो तब

|| Hanuman Ashtak ||

Bal samay Ravi bhakshi liyo tab,
Teenhu lok bhayo andhiyaron.
Tahi son trasa bhayo jag ko,
Yeh sankat kahu son jaat na taaro.
Devan aani kari binti tab,
Chhaadi diyo Ravi kasht nivaaro.
Ko nahin jaanat hai jag mein kapi,
Sankatmochan naam tiharo ||

Bali ki trasa kapis basain giri,
Jaat mahaprabhu panth nihaaro.
Chauki mahamuni saap diyo tab,
Chaahie kaun bichaar bichaaro.
Kaidvij roop livaay mahaprabhu,
So tum daas ke sok nivaaro ||

Angad ke sang len gaye siya,
Khoj kapis yah bain uchaaro.
Jeevat na bachihau hum so ju,
Bina sudhi laaye ihaan pagu dhaaro.
Hari thake tat sindhu sab tab,
Laaye Siya-sudhi pran ubaaro ||

Ravan trasa dai Siya ko sab,
Raakshasi son kahi sok nivaaro.
Tahi samay Hanuman Mahaprabhu,
Jaaye maha rajnichar maaro.
Chaahat Siya Asok so aagi su,
Dai prabhu Mudrika sok nivaaro ||

Baana lago ur Lachhiman ke tab,
Pran taje sut Ravan maaro.
Lai griha baidya Susheen samet,
Tabai giri dron su bir upaaro.
Aani sajeevan haath dai tab,
Lachhiman ke tum pran ubaaro ||

Ravan yudh ajaan kiyo tab,
Naag ki phaas sabai sir daaro.
Shri Ramchandra samet sabai dal,
Moh bhayo yeh sankat bhaaro.
Aani khages tabai Hanuman ju,
Bandhan kaati sutraas nivaaro ||

Bandhu samet jabai Ahiravan,
Lai Ragunath pataal sidhaaro.
Debihin pooji bhali vidhi son bali,
Deu sabai mili mantra vichaaro.
Jai sahaay bhayo tab hi,
Ahiravan sena samet sanhaaro ||

Kaaj kiye bada devan ke tum,
Bir mahaprabhu dekhi bichaaro.
Kaun so sankat mor gareeb ko,
Jo tumse nahin jaat hai taaro.
Begi haro Hanuman Mahaprabhu,
Jo kachu sankat hoye hamaaro ||

|| Doha ||

Laal deh laali lase,
Aru dhari laal langur.
Vajra deh daanav dalan,
Jai jai jai kapi soor

Shree Ram Chalisa Lyrics in Hindi: राम चालीसा पाठ हिंदी में

Ram Chalisa Lyrics in Hindi: प्रभु श्री राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है| भगवान श्री राम को प्रसन्न करने के लिए तुलसीदास जी के द्वारा रचित राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का जप किया जाता है| राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का जप करने से प्रभु श्री राम अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होते है तथा भक्तों पर अपनी कृपा भी बनाए रखते है|

ऐसा माना जाता है कि इस जीवन रूपी भवसागर को पार करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से राम चालीसा का पाठ करना चाहिए| राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होने लगती है|

राम चालीसा

पौराणिक कथाओं के अनुसार राम चालीसा का जप किये बिना भगवान श्री राम की पूजा अधूरी मानी जाती है| राम चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है| माना जाता है कि राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ नियमित तथा पूर्ण भक्ति भाव से करने पर भक्त को दीर्घायु की भी प्राप्ति होती है|

अब हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे| 99Pandit एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है जिसकी सहायता से आप हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी पूजा जैसे – महालक्ष्मी पूजा [Mahalakshmi Puja], गोवर्धन पूजा [Govardhan Puja] तथा धनतेरस पूजा [Dhanteras Puja] के लिए ऑनलाइन पंडित बुक कर सकते है|

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श्री राम चालीसा पाठ हिंदी में – Ram Chalisa Lyrics in Hindi

|| राम चालीसा ||

|| दोहा ||

आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं

बाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम्
पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं

|| चौपाई ||

श्री रघुबीर भक्त हितकारी । सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई । ता सम भक्त और नहिं होई ॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं । ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं ॥

जय जय जय रघुनाथ कृपाला । सदा करो सन्तन प्रतिपाला ॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना । जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना ॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला । रावण मारि सुरन प्रतिपाला ॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाई । दीनन के हो सदा सहाई ॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं । सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी । तुम भक्तन की लज्जा राखी ॥

गुण गावत शारद मन माहीं । सुरपति ताको पार न पाहीं ॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई । ता सम धन्य और नहिं होई ॥

राम नाम है अपरम्पारा । चारिहु वेदन जाहि पुकारा ॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो । तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों ॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा । महि को भार शीश पर धारा ॥

फूल समान रहत सो भारा । पावत कोउ न तुम्हरो पारा ॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो । तासों कबहुँ न रण में हारो ॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा । सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ॥

लषन तुम्हारे आज्ञाकारी । सदा करत सन्तन रखवारी ॥

ताते रण जीते नहिं कोई । युद्ध जुरे यमहूँ किन होई ॥

महा लक्ष्मी धर अवतारा । सब विधि करत पाप को छारा ॥

सीता राम पुनीता गायो । भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ॥

घट सों प्रकट भई सो आई । जाको देखत चन्द्र लजाई ॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत । नवो निद्धि चरणन में लोटत ॥

सिद्धि अठारह मंगल कारी । सो तुम पर जावै बलिहारी ॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई । सो सीतापति तुमहिं बनाई ॥

इच्छा ते कोटिन संसारा । रचत न लागत पल की बारा ॥

जो तुम्हरे चरनन चित लावै । ताको मुक्ति अवसि हो जावै ॥

सुनहु राम तुम तात हमारे । तुमहिं भरत कुल- पूज्य प्रचारे ॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे । तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ॥

जो कुछ हो सो तुमहीं राजा । जय जय जय प्रभु राखो लाजा ॥

रामा आत्मा पोषण हारे । जय जय जय दशरथ के प्यारे ॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा । निगुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ॥

सत्य सत्य जय सत्य- ब्रत स्वामी । सत्य सनातन अन्तर्यामी ॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै । सो निश्चय चारों फल पावै ॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं । तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं ॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा । नमो नमो जय जापति भूपा ॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा । नाम तुम्हार हरत संतापा ॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया । बजी दुन्दुभी शंख बजाया ॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन । तुमहीं हो हमरे तन मन धन ॥

याको पाठ करे जो कोई । ज्ञान प्रकट ताके उर होई ॥

आवागमन मिटै तिहि केरा । सत्य वचन माने शिव मेरा ॥

और आस मन में जो ल्यावै । तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै ॥

साग पत्र सो भोग लगावै । सो नर सकल सिद्धता पावै ॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥

श्री हरि दास कहै अरु गावै । सो वैकुण्ठ धाम को पावै ॥

|| दोहा ||

सात दिवस जो नेम कर पाठ करे चित लाय ।
हरिदास हरिकृपा से अवसि भक्ति को पाय ॥

राम चालीसा जो पढ़े रामचरण चित लाय ।
जो इच्छा मन में करै सकल सिद्ध हो जाय ॥

राम चालीसा

Ram Chalisa Lyrics In English – श्री रघुबीर भक्त हितकारी

|| Ram Chalisa ||

|| Doha ||

Aado Ram Tapovanaadi Gamanam Htvaah Mriga Kaanchan,
Vaidehi Haran Jatayu Maranam Sugreeva Sambhashanam,
Bali Nirdalam Samudra Taranam Lankapuri Dahanam,
Paschdravanam Kumbhakarna Hananam Etadhi Ramayanam

|| Chaupai ||

Shri Raghubir Bhakt Hitkari | Suni Lijai Prabhu Araj Hamari ||

Nishi Din Dhyan Dharai Jo Koi | Ta Sam Bhakt Aur Nahin Hoi ||

Dhyan Dhare Shivaji Man Mahin | Brahma Indr Paar Nahin Pahin ||

Jai Jai Jai Raghunath Kripaka | Sada Karo Santan Pratipala ||

Dut Tumhaar Veer Hanumana | Jaasu Prabhav Tihun Pur Jana ||

Tuv Bhujchand Prachand Kripala | Ravana Maari Suran Pratipala ||

Tum Anaath Ke Naath Gosai | Dinan Ke Ho Sada Sahai ||

Brahmadik Tav Paar Na Paave | Sada Ish Tumharo Yash Gaave ||

Chaariu Ved Bharat Hai Saakhi | Tum Bhaktan Ki Lajja Raakhi ||

Gun Gaavat Shaarad Man Maahi | Surpati Taako Paar Na Paahin ||

Naam Tumhaar Let Jo Koi | Ta Sam Dhanya Aur Nahin Hoi ||

Ram Naam Hai Aprampara | Chaarihu Vedan Jaahi Pukara ||

Ganpati Naam Tumhaaro Linhon | Tinko Pratham Pujya Tum Kinhon ||

Shesh Ratat Nit Naam Tumhara | Mahi Ko Bhaar Shish Par Dhara ||

Ful Saman Rahat So Bhara | Paavat Kou Na Tumharo Para ||

Bharat Naam Tumharo Ur Dhaaro | Taaso Kabahu Na Ran Me Haaro ||

Naam Shatruhan Hridya Prakasha | Sumirat Hot Shatru Kar Nasha ||

Lashan Tumhare Aagyakari | Sada Karat Santan Rakhvari ||

Taate Ran Jite Nahin Koi | Yuddha Jure Yamahun Kin Hoi ||

Mahalakshmi Dhar Avataara | Sab Vidhi Karat Paap Ko Chhara ||

Sita Ram Punita Gaayo | Bhuvneshwari Prabhaav Dikhaayo ||

Ghat Sau Prakat Bhyi Sau Aayi | Jaako Dekhat Chandra Lajaai ||

Sau Tumare Nit Paanv Palotat | Navo Niddhi Charnan Me Lautat ||

Siddhi Attahrah Mangalkari | Sau Tum Par Jaave Balihaari ||

Aurahu Jo Anek Prabhutai | Sau Sitapati Tumahin Banai ||

Iccha Te Kotin Sansara | Rachat Na laagat Pal Ki Baara ||

Jo Tumhare Charnan Chit Laave | Taako Mukti Avasi Ho Jaave ||

Sunahun Ram Tum Taat Humaare | Tumahin Bharat Kul – Pujya Prachaare ||

Tumahin Dev Kul Dev Humaare | Tum Gurudev Praan Ke Pyaare ||

Jo Kuch Ho So Tumhin Raja | Jai Jai Jai Prabhu Raakh Laaja ||

Rama Aatma Poshan Haare | Jai Jai Jai Dashrath Ke Pyaare ||

Jai Jai Jai Prabhu Jyoti Swropa | Nigun Brahm Akhand Anupa ||

Satya Satya Jai Satya – Brat Swami | Satya Sanatan Antaryami ||

Satya Bhajan Tumharo Jo Gaave | Sau Nischay Chaaron Fal Paave ||

Satya Shapath Gauripath Kinhi | Tumne Bhakthin Sab SIddhi Dinhin ||

Gyaan Hridya Do Gyaan Swaroopa | Namo Namo Jai Jaapati Bhupa ||

Dhanya Dhanya Tum Dhanya Pratapa | Naam Tumhaar Harat Santapa ||

Satya Shuddh Devan Mukh Gaaya | Baji Dundubhi Shankh Bajaya ||

Satya Satya Tum Satya Sanatn | Tumhi Ho Humre Tan Man Dhan ||

Yaako Paath Kare Jo Koi | Gyan Prakat Taake Ur Hoi ||

Aavagaman Mite Tihi Kera | Satya Vachan Maane Shiv Mera ||

Aur Aas Man Me Jo Lyaave | Tulsi Dal Aru Phul Chadhave ||

Saag Patr Sau Bhog Lagave | Sau Nar Sakal Siddhta Paave ||

Ant Samay Raghubar Pur Jaai | Jahan Janam Hari Bhakt Kahai ||

Shree Hari Daas Kahe Aru Gaaev | Sau Vaikunth Dhaam Ko Paave ||

|| Doha ||

Saath Diwas Jo Nem Kar Paath Kare Chit Laay |
Haridaas Harikripa Se Avasi Bhakti Ko Paay ||

Ram Chalisa Jo Padhe Ram Charan Chit Laay |
Jo Iccha Man Me Kare Sakal Siddh Ho Jaaye ||

Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi: सरस्वती चालीसा – जय श्री सकल बुद्धि बलरासी

माता सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का जाप किया जाता है| माना जाता है कि ब्रह्मा जी के मुख से ही माता सरस्वती का जन्म हुआ था| माता सरस्वती (वीणावादिनी) को समर्पित इस सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का नित्य रूप से पाठ करने पर व्यक्ति अंधकार से बाहर निकलकर ज्ञानवान बनता है|

प्रतिदिन सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का पाठ भक्तों को बहुत लाभ देता है| सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का पाठ करने से व्यक्ति ज्ञान तथा एकाग्रता की ओर आगे बढ़ता है|

सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का पाठ जातक / जातिका की कुंडली बुध ग्रह की दशा को सुधारता है| बुध ग्रह संगीत, व्यापार, बुद्धि तथा वाणी को दर्शाता है| अत: सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का पाठ प्रतिदिन करने से जातक का बुध ग्रह मजबूत होता है|

सरस्वती चालीसा

इस सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] का पाठ करने से व्यक्ति में तेज बढ़ता है| जिस वजह से व्यक्ति हर क्षेत्र में यश व ऐश्वर्य हासिल करता है| इस सरस्वती चालीसा [Saraswati Chalisa] पूर्ण श्रद्धा के साथ जाप करने से व्यक्ति के अन्दर से अहंकार खत्म होता है तथा व्यक्ति सच्चाई को प्राप्त करता है|

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सरस्वती चालीसा हिंदी में – Saraswati Chalisa Lyrics In Hindi

|| सरस्वती चालीसा ||

|| दोहा ||

जनक जननि पद्मरज,
निज मस्तक पर धरि ।
बन्दौं मातु सरस्वती,
बुद्धि बल दे दातारि ॥

पूर्ण जगत में व्याप्त तव,
महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को,
मातु तु ही अब हन्तु ॥

|| चौपाई ||

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी ।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥

जय जय जय वीणाकर धारी ।
करती सदा सुहंस सवारी ॥

रूप चतुर्भुज धारी माता ।
सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥

जग में पाप बुद्धि जब होती ।
तब ही धर्म की फीकी ज्योति ॥

तब ही मातु का निज अवतारी ।
पाप हीन करती महतारी ॥

वाल्मीकिजी थे हत्यारा ।
तव प्रसाद जानै संसारा ॥

रामचरित जो रचे बनाई ।
आदि कवि की पदवी पाई ॥

कालिदास जो भये विख्याता ।
तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥

तुलसी सूर आदि विद्वाना ।
भये और जो ज्ञानी नाना ॥

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।
केव कृपा आपकी अम्बा ॥

करहु कृपा सोइ मातु भवानी ।
दुखित दीन निज दासहि जानी ॥

पुत्र करहिं अपराध बहूता ।
तेहि न धरई चित माता ॥

राखु लाज जननि अब मेरी ।
विनय करउं भांति बहु तेरी ॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।
कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥

मधुकैटभ जो अति बलवाना ।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥

समर हजार पाँच में घोरा ।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ॥

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥

चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।
क्षण महु संहारे उन माता ॥

रक्त बीज से समरथ पापी ।
सुरमुनि हदय धरा सब काँपी ॥

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा ।
बारबार बिन वउं जगदंबा ॥

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।
क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥

भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।
रामचन्द्र बनवास कराई ॥

एहिविधि रावण वध तू कीन्हा ।
सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा ॥

को समरथ तव यश गुन गाना ।
निगम अनादि अनंत बखाना ॥

विष्णु रुद्र जस कहिन मारी ।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥

रक्त दन्तिका और शताक्षी ।
नाम अपार है दानव भक्षी ॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥

दुर्ग आदि हरनी तू माता ।
कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥

नृप कोपित को मारन चाहे ।
कानन में घेरे मृग नाहे ॥

सागर मध्य पोत के भंजे ।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में ।
हो दरिद्र अथवा संकट में ॥

नाम जपे मंगल सब होई ।
संशय इसमें करई न कोई ॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई ।
सबै छांड़ि पूजें एहि भाई ॥

करै पाठ नित यह चालीसा ।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥

धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै ।
संकट रहित अवश्य हो जावै ॥

भक्ति मातु की करैं हमेशा ।
निकट न आवै ताहि कलेशा ॥

बंदी पाठ करें सत बारा ।
बंदी पाश दूर हो सारा ॥

रामसागर बाँधि हेतु भवानी ।
कीजै कृपा दास निज जानी ॥

॥दोहा॥

मातु सूर्य कान्ति तव,
अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु,
परूँ न मैं भव कूप ॥

बलबुद्धि विद्या देहु मोहि,
सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को,
आश्रय तू ही देदातु ॥

सरस्वती चालीसा

Saraswati Chalisa Lyrics In English | जय श्री सकल बुद्धि बलरासी

|| Saraswati Chalisa ||

|| Doha ||

Janak Janani Padmaraj,
Nij mastak par dhari.
Bandau maatu Saraswati,
Buddhi bal de daataari.

Purna jagat mein vyapt tava,
Mahima amit anantu.
Dushjano ke paap ko,
Maatu tu hi ab hantu.

|| Chaupai ||

Jai Shri Sakal Buddhi Balarasi.
Jay Sarvgyan Amar Avinaashi.

Jai Jai Jai Veenakar Dhari.
Karti sada suhans savaari.

Roop chaturbhuj dhari maata.
Sakal vishv andar vikhyata.

Jag mein paap buddhi jab hoti.
Tab hi dharma ki feeki jyoti.

Tab hi maatu ka nij avataari.
Paap heen karti mahataari.

Valmikiji the hatyaara.
Tava prasaad jaanai sansaara.

Ramcharit jo rache banaai.
Aadi kavi ki padvi paai.

Kalidas jo bhaye vikhyata.
Teri krupa drishti se maata.

Tulsi Sur adi vidwaana.
Bhaye aur jo gyaani naana.

Tinh na aur raheu avalambaa.
Keval krupa aapki ambaa.

Karahu krupa soi maatu bhavani.
Dukhit deen nij daasahi jaani.

Putra karahin aparadh bahoota.
Tehi na dharei chit maata.

Raakhu laaj janan ab meri.
Vinay karau bhaanti bahu teri.

Main anaath teri avalambaa.
Krpa karau jai jai Jagadambaa.

Madhukaitabh jo ati balwana.
Bahuyuddh Vishnu se thaana.

Samar hajaar paanch mein ghoraa.
Phir bhi mukh unse nahin moraa.

Maatu sahaay kiin tehikalaa.
Buddhi vipreet bhai khalahaalaa.

Tehi te Mrityu bhai khal keri.
Purvahu maatu manorath meri.

Chand Mund jo the Vikhyata.
Kshan mahu sanhaare un maata.

Rakt beej se samarth paapi.
Suramuni haday dhara sab kaapi.

Kaateu sir jimi kadali khamba.
Barbaar bin vaun Jagadambaa.

Jagprasiddh jo Shumbh Nishumbha.
Kshan mein baandhe taahi tu ambaa.

Bharatmaatu buddhi Phereu jaai.
Ramchandra banvaas karaai.

Ehividi Ravan Vadhu tu kiinha.
Sur nar muni sabko sukh deinha.

Ko samarth tava yash gun gaana.
Nigam anadi anant bakhaana.

Vishnu Rudra jas kahin mari.
Jinki ho tum raksha kaari.

Rakt dantika aur Shatakshi.
Naam apaar hai daanav bhakshi.

Durgam kaaj dhara par kiinha.
Durga naam sakal jag leinha.

Durg aadi harani tu maata.
Krpa karahu jab jab sukhdaata.

Nrip kopit ko maaran chahe.
Kaanan mein ghere mrig naahe.

Saagar madhy pot ke bhanje.
Ati toofaan nahin koou sange.

Bhoot pret baadha ya Dukh mein.
Ho daridra athava sankat mein.

Naam jape mangal sab hoi.
Sanshay ismein karai na koee.

Putrahin jo aatur bhai.
Sabai chaandi pujen ehi bhai.

Karai paath nit yah chaaleesa.
Hoy putra sundar gun eeshaa.

Dhoopadik Naivedya Chadhaave.
Sankat rahit avashya ho jaave.

Bhakti maatu ki karai hamesha.
Nikat na aavai taahi kaalesha.

Bandi paath karen sat bara.
Bandi paash door ho saara.

Ram Sagar baandhi hetu bhavaani.
Keejai krupa daas nij jaani.

|| Doha ||

Maatu soorya kanti tava,
Andhakaar mam roop.
Dooban se raksha karahu,
Paroon na main bhav koop.

Bal buddhi vidya dehu mohi,
Sunahu Saraswati maatu.
Ram Sagar adham ko,
Aashray tu hi dedaatu

Kanakdhara Strot: जाने कनकधारा स्तोत्र का हिंदी अर्थ व महत्व

कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) एक ऐसे प्रार्थना है जो कि माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है| आज के समय में सभी लोग अपनी आर्थिक तंगी को लेकर बहुत ही अधिक परेशान रहते है तथा धन प्राप्त करने का हर संभव उपाय करना चाहता है|

आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए, धन प्राप्ति तथा धन का संचय करने के लिए माँ लक्ष्मी की प्रार्थना कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) का जाप करना जातक के लिए बहुत ही लाभकारी माना गया है|

हिन्दू धर्म में बहुत ही सारे मंत्र अथवा प्रार्थना ऐसी है जिन्हें करने के लिए उचित समय, विशेष माला, उचित पूजन विधि की आवश्यकता होती है लेकिन कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) को बिना किसी विधि विधान के केवल प्रतिदिन पढ़ना ही काफी होता है| इस कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) का जाप करने के साथ जातक को कनकधारा यंत्र की दीपक व अगरबत्ती लगाकर पूजा करना भी आवश्यक होता है|

कनकधारा स्त्रोत

यदि आप किसी दिन कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) पढ़ने के पश्चात कनकधारा यंत्र की पूजा करना भूल जाते है तो इससे आपको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है क्योंकि कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) सिद्ध मंत्र होने के कारण चैतन्य माना जाता है| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी व हिंदी अर्थ सहित बताएँगे|

अगर आपको 99Pandit के माध्यम से कनकधारा पूजा हेतु पंडित बुक करना है तो आपको 99Pandit की अधिकारित वेबसाइट पर जाकर “Book a Pandit” बटन पर क्लिक करना होगा |

इसके बाद अपना सामान्य विवरण जैसे नाम, जीमेल , फ़ोन नंबर ,निवास स्थान, करवायी जाने वाली पूजा का चयन कर आपको पंडित “Submit” बटन पर क्लिक करना होगा | यह प्रक्रिया बहुत आसान है | आप पूजा की जानकारी हमारे साथ Whatsapp के माध्यम से भी शेयर कर सकते है|

कनकधारा स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित – Kanakdhara Strot With Hindi Meaning

अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया: || 1 ||

हिंदी अर्थ – जिस भांति भ्रमरी आधे खिले हुए पुष्पों से सुशोभित तमाल-तरु का आसरा लेती है| उसी भांति जो प्रकाश भगवान श्रीहरि के रोमांच से सुसज्जित श्री अंगों पर पड़ता है| जिसके भीतर सम्पूर्ण ऐश्वर्य निवास करती है| सम्पूर्ण मंगलों की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी की वह दिव्य दृष्टि मेरे लिए मंगलकारी हो|

मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया: || 2 ||

हिंदी अर्थ – जिस प्रकार भ्रमरी महान कमल की पंखुड़ियों पर मंडराती रहती है| उसी प्रकार से जो भगवान श्रीहरि के मुखारविंद की ओर प्रेमपूर्वक जाती है तथा पुनः लज्जा के कारण लौट आती है| माता लक्ष्मी की वह मनोहर मुग्ध दृष्टिमाला मुझे धन संपत्ति प्रदान कीजिये|

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय: || 3 ||

हिंदी अर्थ – जो सभी देवताओं के अधिपति देवराज इंद्र के पद का वैभव-विलास प्रदान करने में सक्षम है| मधुहंता भगवान श्रीहरि को भी अत्यधिक आनंद प्रदान करने वाली है तथा जो कि नीलकमल के भीतरी भाग के समाग मनोहर ज्ञात होती है| उन माता लक्ष्मीजी के अधखुले नयनों की दृष्टि कुछ समय के लिए मुझ पर अवश्य पड़े|

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया: || 4 ||

हिंदी अर्थ – वैकुंठ स्वामी भगवान विष्णु जी की धर्मपत्नी माता लक्ष्मीजी के नयन हमे ऐश्वर्य व धन संपत्ति प्रदान करने वाले हो| जिनकी पुतली तथा बरौनियाँ अनंग के वशीभूत हो, लेकिन साथ ही अपलक नयनों से देखने वाले श्री मुकुंद जी को अपने समीप पाकर थोड़ी तिरछी हो जाती है|

बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया: || 5 ||

हिंदी अर्थ – जो भगवान विष्णु के कौस्तुभमणि मंडित वक्षस्थल में इंद्रनीलम हरावली की भांति सुशोभित होती है तथा उनके मन में भी प्रेम का संचार करने वाली है| वह कमल कुंजवासिनी की कटाक्षमाला मेरा कल्याण करें|

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया: || 6 ||

हिंदी अर्थ – जिस प्रकार बादलों की घटा में बिजली चमकती है| उसी प्रकार से कैटभ शत्रु भगवान श्री विष्णु की काली मेघमाला के श्यामसुंदर वक्षस्थल पर प्रकाशित होती है| जिन्होंने अपने अवतरण से भृगुवंश को आनंदित किया है तथा जो सम्पूर्ण जगत की जननी है| वह भगवती लक्ष्मी माता की प्रतिमा मुझे कल्याण प्रदान करे|

प्राप्तं पदं प्रथमत: किल यत्प्रभावान्मांगल्य भाजि: मधुमायनि मन्मथेन।
मध्यापतेत दिह मन्थर मीक्षणार्द्ध मन्दालसं च मकरालयकन्यकाया: || 7 ||

हिंदी अर्थ – समुन्द्र कन्या मात लक्ष्मी की बह मंद, अलस व मंथर दृष्टि, जिसके प्रभाव से कामदेव ने मंगलमय भगवान श्रीहरि के हृदय में पहली बार स्थान प्राप्त किया था|, वह मुझ पर भी पड़े|

दद्याद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम स्मिभकिंचन विहंग शिशौ विषण्ण।
दुष्कर्मधर्ममपनीय चिराय दूरं नारायण प्रणयिनी नयनाम्बुवाह: || 8 ||

हिंदी अर्थ – भगवान विष्णु जी सबसे प्रिय माता लक्ष्मी का नेत्र रूपी मेघ दयारूपी वायु से प्रेरित होकर दुष्कर्म रूपी धाम को चिरकाल के लिए दूर करके विषाद रूपी धर्मजन्य ताप के द्वारा पीड़ित चातक पर धनरूपी जलधारा की वर्षा करे|

इष्टा विशिष्टमतयो पि यथा ययार्द्रदृष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लभंते।
दृष्टि: प्रहूष्टकमलोदर दीप्ति रिष्टां पुष्टि कृषीष्ट मम पुष्कर विष्टराया:|| 9 ||

हिंदी अर्थ – विशिष्ट बुद्धि वाले मनुष्य जिनके प्रीति पात्र होकर जिस दया दृष्टि के प्रभाव से स्वर्ग के पद को आसानी से प्राप्त कर लेते है, पद्मासन माता लक्ष्मी जी की वह विकसित कमल के गर्भ के समान आपकी यह कांतिमय दृष्टि मुझे मनोवांछित फल प्रदान करे|

कनकधारा स्त्रोत

गीर्देवतैति गरुड़ध्वज भामिनीति शाकम्भरीति शशिशेखर वल्लभेति।
सृष्टि स्थिति प्रलय केलिषु संस्थितायै तस्यै ‍नमस्त्रि भुवनैक गुरोस्तरूण्यै:|| 10 ||हिंदी अर्थ – जो सृष्टि लीला के समय वाग्देवता के रूप में विराजमान होती है तथा प्रलय लीला के समय में शाकम्भरी अथवा चंद्रशेखर वल्लभा पार्वती के रूप में विराजमान होती है| इस सम्पूर्ण जगत के एकमात्र पिता भगवान श्री विष्णु जी की उन नित्य यौवना प्रिय श्री लक्ष्मी जी को नमस्कार है|

श्रुत्यै नमोस्तु शुभकर्मफल प्रसूत्यै रत्यै नमोस्तु रमणीय गुणार्णवायै।
शक्तयै नमोस्तु शतपात्र निकेतानायै पुष्टयै नमोस्तु पुरूषोत्तम वल्लभायै:|| 11 ||

हिंदी अर्थ – हे शुभ कर्मों का फल देने वाली माता लक्ष्मी श्रुति के रूप में आपको प्रणाम है| रमणीय गुणों की सिंधु रूपा रति के रूप में आपको नमस्कार है| कमल वन में निवास करने वाली शक्ति स्वरूप माता लक्ष्मी को नमस्कार है व पुष्टि रूपा पुरुषोत्तम प्रिया को नमस्कार है|

नमोस्तु नालीक निभाननायै नमोस्तु दुग्धौदधि जन्म भूत्यै ।
नमोस्तु सोमामृत सोदरायै नमोस्तु नारायण वल्लभायै:|| 12 ||

हिंदी अर्थ – कमल वदना माता लक्ष्मी को नमस्कार है| क्षीर सिन्धु सभ्यता श्रीदेवी को नमस्कार है| सुधा व चंद्रमा की सगी बहन को नमस्कार है| भगवान श्री नारायण की वल्लभा को प्रणाम है|

सम्पतकराणि सकलेन्द्रिय नन्दानि साम्राज्यदान विभवानि सरोरूहाक्षि।
त्व द्वंदनानि दुरिता हरणाद्यतानि मामेव मातर निशं कलयन्तु नान्यम्:|| 13 ||

हिंदी अर्थ – कमल के समान नयनो वाली माता लक्ष्मी ! आपके चरणों में किये गए प्रणाम संपत्ति प्रदान करने वाले, सम्पूर्ण इन्द्रियों को आनंद प्रदान करने वाले, साम्राज्य देने में सक्षम तथा सम्पूर्ण पापों को कर लेने के लिए हमेशा उद्यत है| वे सदा मुझे अवलंबन प्रदान करे|

यत्कटाक्षसमुपासना विधि: सेवकस्य कलार्थ सम्पद:।
संतनोति वचनांगमानसंसत्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे:|| 14 ||

हिंदी अर्थ – जिनकी कृपा कटाक्ष के लिए गई उपासना उपासक के लिए सम्पूर्ण मनोरथ तथा धनसंपत्ति का विस्तार करती है, भगवान श्रीहरि की हृदयेश्वरी माता लक्ष्मी का मैं मन, वाणी तथा शरीर से भजता हूँ|

सरसिजनिलये सरोज हस्ते धवलमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्:|| 15 ||

हिंदी अर्थ – हे भगवती महालक्ष्मी ! आप कमल वन में निवास करने वाली हो, आपको हाथों में नीला कमल सुशोभित है| आप अत्यंत ही उज्जवल वस्त्र, गंध एवं माला से सुसज्जित है| आपकी झांकी बड़ी ही मनोरम व सुकून प्रदान करने वाली है| हे त्रिभुवन का ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देव, आप मुझ पर प्रसन्न हो जाइये|

दग्धिस्तिमि: कनकुंभमुखा व सृष्टिस्वर्वाहिनी विमलचारू जल प्लुतांगीम।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथ गृहिणी ममृताब्धिपुत्रीम्:|| 16 ||

हिंदी अर्थ – बड़े दिग्गजों के द्वारा स्वर्ण कलश से गिराए गए आकाश गंगा के समान निर्मल एवं मनोहर से जिनके श्री अंगों का अभिषेक संपादित होता है| सम्पूर्ण लोकों के पालनकर्ता भगवान विष्णु की गृहणी व क्षीरसागर की पुत्री माता लक्ष्मी को मैं प्रातकाल: प्रणाम करता हूँ|

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरां गतैरपाड़ंगै:।
अवलोकय माम किंचनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयाया :|| 17 ||

हिंदी अर्थ – कमल नयन केशव की कमनीय कामिनी कमले ! मैं दिन-हिन मनुष्यों में अग्रगण्य हूँ| अत: आपकी कृपा का स्वाभाविक पात्र हूँ| आप उमड़ती हुई करुणा की बाढ़ की तरह नयनों द्वारा मेरी ओर देखो|

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिर भूमिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते बुधभाविताया :|| 18 ||

हिंदी अर्थ – जो भी मनुष्य प्रतिदिन इन स्तुतियों के द्वारा वेदत्रयी स्वरुप भगवती माता लक्ष्मी जी की स्तुति करते है| वह लोग इस सम्पूर्ण धरा पर महान गुणवान और सौभाग्यशाली होते है| तथा बड़े से बड़े विद्वान पुरुष भी उनके मन में चल रहे भावो को जानने के लिए उत्सुक रहते है|

कनकधारा स्त्रोत की पौराणिक कथा – Mythology Of Kanakdhara Stotra

बहुत ही प्राचीन समय की बात है एक बार शंकराचार्य जी भिक्षा मांगने हेतु भ्रमण करते हुए एक गरीब ब्राह्मण की कुटिया पर पहुंचे और बोले “भिक्षां देहि” परन्तु संयोग से आये इन तेजस्वी अतिथि शंकराचार्य जी को देखकर उस ब्राह्मण की पत्नी अत्यंत लज्जित हो गई क्योंकि उन्हें दान में देने के लिए उनके पास एक अन्न का दाना भी नहीं था|

अपने घर आए अतिथि को कुछ ना दे पाने के कारण उस पतिव्रता स्त्री को अपनी दुर्दशा पर रोना आ गया| इसके पश्चात वह आखों में आंसुओं के साथ भीतर से कुछ आंवले लेकर आई| बहुत ही संकोच के साथ उसने वह सूखे हुए आंवले शंकराचार्य जी को भिक्षा में दिए|

कनकधारा स्त्रोत

साक्षात् शंकर स्वरुप शंकराचार्य जी को उनकी इस दशा पर तरस आ गया| इसके पश्चात उन्होंने तुरंत ही ऐश्वर्य देने वाला, दशविध लक्ष्मी देने वाली, अधिष्ठात्री, करुणामयी भगवान नारायण की पत्नी महालक्ष्मी को संबोधित करते हुए कोमलकांत पद्यावली से एक स्तोत्र की रचना की जो स्तोत्र “कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra)” के नाम से प्रसिद्ध हुआ|

कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra) की इस अद्भुत रचना से भगवती माता लक्ष्मी त्रिभुवन में आचार्य जी के सामने प्रकट हो गई एवं उनसे बहुत ही मधुर वाणी में पूछा कि हे आचार्यवर अकारण ही मेरा स्मरण क्यों किया| जिस पर आचार्य शंकराचार्य जी ने उन्हें उस ब्राह्मण की दरिद्र अवस्था के बारे में बताया एवं उन्हें सबल व धनवान बनाने के लिए प्रार्थना की|

इस पर माता लक्ष्मी ने कहा कि इस व्यक्ति के पिछले जन्म में किये गए पापों की वजह से उसे इस जन्म में लक्ष्मी प्राप्त होना बिल्कुल भी संभव नहीं है| आचार्य शंकराचार्य जी गद्गदित भाव से कहा कि मुझ याचक के द्वारा इस स्त्रोत की रचना के पश्चात भी यह संभव नहीं है?

इसके बाद उस ब्राह्मण के जीवन में कनक की वर्षा अर्थात सोने की वर्षा हुई तथा उसकी सम्पूर्ण दरिद्रता नष्ट हो गयी| इसलिए ऐसा माना जाता है कि इस कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra) का जाप रंक को भी राजा बना देता है|

निष्कर्ष – Conclusion

यह कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) माता लक्ष्मी जी को समर्पित किया गया है| यह कनकधारा शब्द दो शब्द कनकम व धारा से मिलकर बना है| इसमें कनकम का अर्थ – “सोने या स्वास्थ्य” तथा धारा का अर्थ – “संभाल कर रखने वाले” से होता है| जो भी व्यक्ति कनकधारा स्त्रोत (Kanakdhara Strot) का नियमित रूप से जाप करता है|

उसके घर में सदैव ही माता लक्ष्मी जी का निवास होता है| अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा व साथ ही कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra) का जाप करना करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है| इस दिन माँ लक्ष्मी जी के साथ कुबेर, भगवान गणेश तथा भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है|

इसी के साथ आप आर्थिक समस्या (Financial Problem) को दूर करने के आप कनकधारा पूजा के लिए 99Pandit के द्वारा अनुभवी पंडितजी को बुक कर सकते है| इसके आलवा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), विवाह पूजा (Marriage Puja), तथा ऑफिस उद्घाटन पूजा (Office Opening Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| इसी के साथ हमसे जुड़ने के लिए आप हमारे Whatsapp पर भी हमसे संपर्क कर सकते है|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.कनकधारा स्तोत्र का जाप करने से क्या होता है?

A.इस कनकधारा स्तोत्र (Kanakdhara Stotra) का जाप करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है तथा जातक को धन की प्राप्ति भी होती है|

Q.कनकधारा स्तोत्र का जाप कब करना चाहिए?

A.इस स्त्रोत का जाप मुख्यतः शुक्रवार, पूर्णिमा के दिन, दिवाली व हो सके तो प्रतिदिन करना चाहिए|

Q.कनकधारा स्त्रोत का पाठ कितनी बार करना उचित है?

A.इस स्त्रोत का जाप प्रतिदिन एक बार अवश्य करना चाहिए|

Q.कनकधारा स्तोत्र किसके द्वारा लिखा गया है?

A.इस स्रोत को आचार्य शंकराचार्य जी के द्वारा संस्कृत भाषा में लिखा गया था|