Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi: ॐ जय जगदीश हरे आरती

‘ॐ जय जगदीश हरे ’ (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics) आरती का उच्चारण हिन्दू धर्म के प्रत्येक घर में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के बाद किया जाता है|

पिछले 150 साल से यह ‘ॐ जय जगदीश हरे’ की सभी पूजा तथा अनुष्ठान का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है|

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi
भगवान विष्णु की सबसे ज्यादा प्रचलित आरती ‘ॐ जय जगदीश हरे’ (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics) की रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी के द्वारा की गई थी|

जिसकी रचना आज से लगभग 150 वर्ष पूर्व सन् 1870 ईस्वी में की गई थी| भगवान विष्णु की इस आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी का जन्म 30 सितंबर 1837 में पंजाब के लुधियाना में फुल्लौरी नामक एक गाँव में हुआ तथा उनका निधन 24 जून 1881 में हुआ था|

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार होने के साथ साथ सनातन धर्म के प्रचारक व स्वतंत्रता सेनानी भी थे| अब हम इस लेख के माध्यम से हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे|

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ॐ जय जगदीश हरे आरती: Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi 

|| ॐ जय जगदीश हरे आरती ||

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम्ही सब के स्वामी ॥॥ॐ जय….॥

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥ ॥ ॐ जय….॥

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥ ॥ ॐ जय….॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥ ॥ ॐ जय….॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वामी पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥ ॥ ॐ जय….॥

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in Hindi

Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics in English: भगवान विष्णु जी की आरती

|| Om Jai Jagdish Hare ||

Om Jai Jagdish Hare
Swami jai jagdish hare
Bhakta janon ke sankat
Daas janon ke sankat
Shan me door kare
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Jo dhyave phal paave
Dukh bin se man ka
Swami dukh bin se man ka |
Sukh sampatti ghar aave
Sukh sampatti ghar aave
Kasht mite tan ka
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Mat pita tum mere
Sharan gahun me kiski
Swami sharan gahun me kiski |
Tum bin aur na dooja
Prabhu bin aur na dooja
Aas karu me jiski
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum pooran parmatma
Tum antaryami
Swami Tum Antaryami |
Para Brahma Parameshwara
Para Brahma Parameshwara
Tum sab ke swami
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum karuna ke sagar
Tum palan karta
Swami tum palan karta |
Main moorakh khal kami
Main sevak tum swami
Kripa karo bharta
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Tum ho ek agochar
Sab ke pranpati
Swami sab ke pranpati |
Kis vidhi miloon dayamaya
Kis vidhi miloon dayamaya
Tumko main kumati
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Deen Bandhu dukh harta
Thakur tum mere
Swami rakshak tum mere |
Apne hath uthao
Apni sharan lagao
Dawar pada main tere
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Vishay vikar mitao
Paap haro deva
Swami paap haro deva |
Shraddha bhakti badhao
Shraddha bhakti badhao
Santan ki seva
|| Om Jai Jagdish Hare ||

Om Jai Jagdish Hare
Swami jai jagdish hare
Bhakta janon ke sankat
Daas janon ke sankat
Shan me door kare

Saraswati Vandana Lyrics in Hindi: सरस्वती वंदना – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला

सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) का गान माता सरस्वती की आराधना करते समय किया जाता है| माता सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है| उन्हें प्रसन्न करने के लिए ही सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) का जाप किया जाता है| यह सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) कई कार्यस्थलों तथा स्कूलों में की जाती है|

माना जाता कि यह सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) विद्यार्थियों के बहुत ही लाभदायक होती है| जो भी भक्त इस वंदना को नियमित रूप से करता है, उसे माता सरस्वती का आशीर्वाद तथा माता की कृपा प्राप्त होती है| तो आइये जानते है सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) हिंदी अर्थ सहित|

सरस्वती वंदना

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सरस्वती वंदना हिंदी अर्थ सहित | Saraswati Vandana Lyrics with Hindi Meaning

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

हिंदी अर्थ – जो विद्या की देवी माता सरस्वती कुंद के फूल, चंद्रमा, हिमराशि तथा मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है| जिनके हाथ में वीणा शोभायमान है, जिन्होंने स्वेट कमल पर अपना आसन ग्रहण कर किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु तथा भगवान शंकर के द्वारा जो सदा पूजित है| वही सम्पूर्ण जड़ता तथा अज्ञानता को दूर करने वाली देवी माता सरस्वती हमारी रक्षा करे|

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥

हिंदी अर्थ – शुक्लवर्ण वाली, पूरे संसार में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों में भयदान देने वाली, अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक धारण करने वाली तथा पद्मासन पर विराजमान, बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत माता शारदा देवी की मैं वंदना करता हूँ|

सरस्वती वंदना

Saraswati Vandana Lyrics in English | या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

Ya kundendu tushaarahara dhavala, ya shubhra vashtraavritaa,
Ya veena varadanda manditakaraa, ya shvet padmaasanaa.
Ya brahmaachyuta shankara Prabhritibhir Devaih sadaa vanditaa,
Saa maan paatu Saraswati Bhagavati nihshesha jaadyaapahaa.

Shuklaam Brahmavichaar Saar Paramaam Aadyaam Jagadvyapinim
Veena-Pustak-Dhaarinim Abhayadaam Jaadyaandhakaaraapahaam.
Haste Sphatikamaalikaam Vidhadhateem Padmaasane Sthitaam
Vande Taam Parameshwariim Bhagavatiim Buddhipradaam Shaaradaam॥

Aarti Kije Hanuman Lala Ki Lyrics: हनुमान जी की आरती

ऐसे तो हनुमान जी की आरती – Aarti Kije Hanuman Lala Ki को प्रतिदिन किया जा सकता है लेकिन धार्मिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti) को मंगलवार तथा शनिवार के दिन करना भक्तों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है|

हनुमान जी की आरती को  Sunderkand Path एवं Akhand Ramayan Path के पूर्ण होने के बाद भी किया जाता है| इस आरती  का जाप करने से आपको जीवन में सुख, शांति व आरोग्य की प्राप्ति होती है|  माना जाता है कि इस सुप्रसिद्ध हनुमान जी की आरती की रचना महाकवि तुलसीदास जी के द्वारा 15 वी सदी में की गई थी|

हनुमान जी की आरती

Hanuman Chalisa Path तथा हनुमान जी की आरती (Aarti Kije Hanuman Lala Ki Lyrics) शक्तिशाली पवित्र ग्रंथो में से एक है जो लोगो को बुरी व नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखने और संकट को दूर करने में सहायता करते है|

हनुमान जी आरती का जप करने से भगवान हनुमान जी अपने भक्तों से प्रसन्न होते है तथा उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान करते है| लोगों का मानना है कि हनुमान जी आज भी इस धरती पर जीवित है और भगवान राम की भक्ति कर रहे है|

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हनुमान जी की आरती – Aarti Kije Hanuman Lala Ki Lyrics in Hindi

|| हनुमान जी की आरती ||

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झांके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
लाए संजीवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जय जय जय हनुमान उचारे ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमान जी की आरती गावे ।
बसि बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किए रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ इति संपूर्णम् ॥

हनुमान जी की आरती

Aarti Kije Hanuman Lala Ki Lyrics in English – आरती कीजै हनुमान लला की

|| Hanuman Ji Ki Aarti ||

|| Shree Hanuman Stuti ||

Manojavam Maaruta Tulyavegam,
Jitendriyam Buddhimatam Varishtham ||
Vatatmajam Vanaryuth Mukhyam,
Shriramdutam Sharanam Prapadye ||

|| Aarti ||

Aarti Kije Hanuman Lala Ki |
Dusht Dalan Raghunath Kala Ki ||

Jake Bal Se Girivar Kaanpe |
Rog dosh Jake Nikat Na Jhanke ||
Anjani Putra Maha Baldai |
Santan Ke Prabhu Sada Sahay ||
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

De Beera Raghunath Pathae |
Lanka Jaari Siya Sudhi Laye ||
Lanka So Kot Samundra Si Khai |
Jaat Pavansut Baar Na Laai ||
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

Lanka Jaari Asur Sab Maare |
Siya Ram Ji Ke Kaaj Sanvare ||
Lakshman Murchit Pade Sakare |
Aan Sanjeevan Pran Ubare ||
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

Paithi Pataal Tori Jamkare |
Ahiravan Ki Bhuja Ukhare ||
Baayen Bhuja Asur Dal Mare |
Dahine Bhuja Santjan Tare ||
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

Surnar Munijan Aarti Utare |
Jai Jai Jai Hanuman Uchare ||
Kanchan Thaar Kapoor Lo Chaai |
Aarti Karat Anjna Mai ||
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

Jo Hanuman Ji Ki Aarti Gaave |
Basi Baikunth Param Padh Pave ||
Lanka Vidhvans Kiye Raghurai |
Tulsidas Swami Kirti Gaaie
Aarti Kije Hanuman Lala Ki….||

Aarti Kije Hanuman Lala Ki |
Dusht Dalan Raghunath Kala Ki ||

॥ Eti Sampuarnam ॥

Gayatri Mata Chalisa Lyrics: श्री गायत्री चालीसा

Gayatri Mata Chalisa Lyrics: गायत्री चालीसा का जाप ज्ञान की देवी माता गायत्री को प्रसन्न करने तथा उनकी कृपा पाने के लिए किया जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गायत्री देवी एक ऐसी शक्ति है जिसकी कृपा यदि किसी मनुष्य के ऊपर हो तो वह अपनी जिंदगी में हमेशा सफलता को प्राप्त करता है|

गायत्री चालीसा

इस गायत्री चालीसा का जाप करने से मनुष्य को सद्बुद्धि की प्रेरणा मिलती है| जो भी मनुष्य गायत्री माता की शरण में आता है| उस व्यक्ति के जीवन में सदैव के लिए अंधकार मिट जाता है| आइये जानते है गायत्री चालीसा के बारे में|

माता गायत्री चालीसा का पाठ – Gayatri Chalisa Lyrics in Hindi

|| गायत्री चालीसा ||

|| दोहा ||

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड ।
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥
जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम ।
प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम ॥

|| चौपाई ||

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।
गायत्री नित कलिमल दहनी ॥

अक्षर चौबिस परम पुनीता ।
इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता ॥

शाश्वत सतोगुणी सतरुपा ।
सत्य सनातन सुधा अनूपा ॥

हंसारुढ़ सितम्बर धारी ।
स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी ॥

पुस्तक पुष्प कमंडलु माला ।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥

ध्यान धरत पुलकित हिय होई ।
सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई ॥

कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।
निराकार की अदभुत माया ॥

तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।
तरै सकल संकट सों सोई ॥

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥

तुम्हरी महिमा पारन पावें ।
जो शारद शत मुख गुण गावें ॥

चार वेद की मातु पुनीता ।
तुम ब्रहमाणी गौरी सीता ॥

महामंत्र जितने जग माहीं ।
कोऊ गायत्री सम नाहीं ॥

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।
आलस पाप अविघा नासै ॥

सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।
काल रात्रि वरदा कल्यानी ॥

ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते ।
तुम सों पावें सुरता तेते ॥

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे ।
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥

महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।
जै जै जै त्रिपदा भय हारी ॥

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।
तुम सम अधिक न जग में आना ॥

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा ॥

जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई ।
पारस परसि कुधातु सुहाई ॥

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।
माता तुम सब ठौर समाई ॥

ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे ।
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥

सकलसृष्टि की प्राण विधाता ।
पालक पोषक नाशक त्राता ॥

मातेश्वरी दया व्रत धारी ।
तुम सन तरे पतकी भारी ॥

जापर कृपा तुम्हारी होई ।
तापर कृपा करें सब कोई ॥

मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें ।
रोगी रोग रहित है जावें ॥

दारिद मिटै कटै सब पीरा ।
नाशै दुःख हरै भव भीरा ॥

गृह कलेश चित चिंता भारी ।
नासै गायत्री भय हारी ॥

संतिति हीन सुसंतति पावें ।
सुख संपत्ति युत मोद मनावें ॥

भूत पिशाच सबै भय खावें ।
यम के दूत निकट नहिं आवें ॥

जो सधवा सुमिरें चित लाई ।
अछत सुहाग सदा सुखदाई ॥

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।
विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥

जयति जयति जगदम्ब भवानी ।
तुम सम और दयालु न दानी ॥

जो सदगुरु सों दीक्षा पावें ।
सो साधन को सफल बनावें ॥

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी ।
लहैं मनोरथ गृही विरागी ॥

अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता ।
सब समर्थ गायत्री माता ॥

ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी ।
आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी ॥

जो जो शरण तुम्हारी आवें ।
सो सो मन वांछित फल पावें ॥

बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ ।
धन वैभव यश तेज उछाऊ ॥

सकल बढ़ें उपजे सुख नाना ।
जो यह पाठ करै धरि ध्याना ॥

|| दोहा ||

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय ।
तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ॥

गायत्री चालीसा

Shri Gayatri Chalisa Lyrics in English – भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी

|| Gayatri Chalisa ||

|| Doha ||

He Shreem, Kleem, Medha, Prabha, Jeevan Jyoti Prachand.
Shanti, Kranti, Jagriti, Pragati, Rachna Shakti Akhand.
Jagat Janani, Mangal Karani, Gayatri Sukh Dhaam.
Pranavom Savitri, Swadha, Swaha, Purna Kaam.

|| Chaupai ||

Bhurbhuvah Swah, Om Yut Janani,
Gayatri Nit Kalimal Dahani.

Akshar Chaubis Param Punita,
Inmein Basen Shastra, Shruti, Geeta.

Shashwat Satoguni Saturupa,
Satya Sanatan Sudha Anupa.

Hansarudh Sitambar Dhari,
Swarnakanti Shuchi Gagan Bihari.

Pustak Pushp Kamandalu Mala,
Shubhra Varn Tanu Nayan Vishala.

Dhyan Dharat Pulakit Hiya Hoi,
Sukh Upjat, Dukh Durmati Khoi.

Kamadhenu Tum Sur Taru Chhaya,
Nirakar Ki Adbhut Maya.

Tumhari Sharan Gahai Jo Koi,
Tarai Sakal Sankat Son Soi.

Saraswati Lakshmi Tum Kali,
Dipai Tumhari Jyoti Nirali.

Tumhari Mahima Paran Pave,
Jo Sharad Shat Mukh Gun Gave.

Char Ved Ki Matu Punita,
Tum Brahmani Gauri Sita.

Mahamantra Jitne Jag Mahin,
Ko’u Gayatri Sam Nahin.

Sumirat Hiya Mein Gyan Prakasai,
Aalas Pap Avigha Nasai.

Srishti Beej Jag Janani Bhavani,
Kaala Ratri Varada Kalyani.

Brahma Vishnu Rudra Sur Jete,
Tum Son Pave Surata Tete.

Tum Bhaktan Ki Bhakt Tumhare,
Jananihin Putra Pran Te Pyare.

Mahima Aparampar Tumhari,
Jai Jai Jai Tripada Bhay Haari.

Purit Sakal Gyan Vigyana,
Tum Sam Adhik Na Jag Mein Aana.

Tumhin Janat Kachu Rahai Na Shesha,
Tumhin Pay Kachu Rahai Na Klesha.

Janat Tumhin, Tumhin Hai Jai,
Paras Parasi Kudhatu Suhaai.

Tumhari Shakti Dipai Sab Thaai,
Mata Tum Sab Thaur Samaai.

Grah Nakshatra Brahmanda Ghanere,
Sab Gativaan Tumhare Prere.

Sakal Srishti Ki Pran Vidhata,
Palak Poshak Nashak Traata.

Mateeshwari Daya Vrat Dhari,
Tum San Tare Pataki Bhari.

Jaapar Kripa Tumhari Hoi,
Taapar Kripa Karen Sab Koi.

Mand Budh Te Budhi Bal Pave,
Rogi Rog Rahit Hai Jave.

Darid Mitai Katai Sab Peera,
Nashai Dukh Harai Bhav Bheera.

Griha Kalesh Chit Chinta Bhari,
Nasai Gayatri Bhay Haari.

Santiti Hain Susantati Pave,
Sukh Sampatti Yut Mod Manaave.

Bhoot Pishach Sabai Bhay Khaave,
Yam Ke Doot Nikat Nahin Aave.

Jo Sadhava Sumiren Chit Laai,
Achhat Suhag Sada Sukhdaai.

Ghar Var Sukh Prad Lahain Kumari,
Vidhwa Rahein Satya Vrat Dhari.

Jayati Jayati Jagadamba Bhavani,
Tum Sam Aur Dayalu Na Dani.

Jo Sadguru Son Diksha Pave,
So Sadhan Ko Safal Banaave.

Sumiran Karen Suruchi Badbhagi,
Lahain Manorath Grihi Viragi.

Asht Siddhi Navnidhi Ki Data,
Sab Samarth Gayatri Mata.

Rishi, Muni, Yati, Tapasvi, Yogi,
Aarat, Arthi, Chintit, Bhogi.

Jo Jo Sharan Tumhari Aave,
So So Man Vanchit Phal Paave.

Bal, Budhi, Vigya, Shil Swabhav,
Dhan Vaibhav Yash Tej Uchaav.

Sakal Badhein Upje Sukh Nana,
Jo Yeh Paath Karai Dhari Dhyaana.

|| Doha ||

Yeh chaalisa bhaktiyut, paath kare jo koye.
Taapar kripa prasannata, Gayatri ki hoye

Shree Kuber Chalisa Lyrics in Hindi: श्री कुबेर चालीसा पाठ

Kuber Chalisa Lyrics: कुबेर चालीसा का पाठ धन के देवता भगवान कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का पाठ स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करके करने से भक्त को धन से संबंधित सभी समस्याओं से राहत मिलती है तथा सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होती है|

कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ के साथ – साथ ही यदि आप लक्ष्मी जी की आरती का जाप करने माता लक्ष्मी भी उनसे प्रसन्न होती है व उनके घर में धन की वर्षा भी करती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ एक धार्मिक भक्ति भजन है जो भगवान कुबेर को समर्पित किया गया है|

कुबेर चालीसा

इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ का जाप धन को आकर्षित करने तथा वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए भी किया जाता है| ऐसा माना जाता है कि इस कुबेर चालीसा का जाप करने से भगवान कुबेर प्रसन्न होते है तथा इसके बदले वह अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करते है|

जिससे भक्तों को धन संबंधी सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है|


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कुबेर चालीसा पाठ – Shree Kuber Chalisa Lyrics in Hindi

|| कुबेर चालीसा ||

|| दोहा ||

जैसे अटल हिमालय,
और जैसे अडिग सुमेर ।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे,
अविचल खडे कुबेर ॥

विघ्न हरण मंगल करण,
सुनो शरणागत की टेर ।
भक्त हेतु वितरण करो,
धन माया के ढेर ॥

|| चौपाई ||

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥

यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥

सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥

विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥

शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥

पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥

शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि-सिद्धि नित भोग लगावैं ॥

दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥

पुरुषों में जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥

नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥

स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर-दूर तक होए उजाला ॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ॥

बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥

कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥

यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥

रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥

कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥

रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥

कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥

चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥

जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥

उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥

प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥

॥ दोहा ॥

शिव भक्तों में अग्रणी,
श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,
कर दो दूर अंधेर ॥

कर दो दूर अंधेर अब,
जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी,
दया की दृष्टि फेर ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

कुबेर चालीसा

Shree Kuber Chalisa Lyrics in English – जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी

|| Kuber Chalisa ||

|| Doha ||

Jaise Atal Himalaya,
Aur jaise Adig Sumer.
Aise hi Swarg Dwar pe,
Avichal khade Kuber.

Vighn haran mangal karan,
Suno sharnagat ki ter.
Bhakt hetu vitran karo,
Dhan maya ke dher.

|| Chaupai ||

Jai Jai Jai Shri Kuber Bhandari.
Dhan maya ke tum adhikari.

Tap tej punj nirbhay bhay hari.
Pavan veg sam sam tanu baladhari.

Swarg dwar ki karen pehre dari.
Sevak Indra Dev ke aagyakari.

Yaksha yakshini ki hai sena bhari.
Senapati bane yuddh mein dhanudhari.

Maha yoddha ban shastra dharein.
Yuddh karein shatru ko maarein.

Sada vijayi kabhi na haarein.
Bhagat jano ke sankat tarein.

Prapitamah hain swayam vidhata.
Pulista vansh ke janm vikhyata.

Vishrava pita Idvija ji mata.
Vibhishan bhagat aapke bhrata.

Shiv charano mein jab dhyan lagaya.
Ghor tapasya kari tan ko sukhaya.

Shiv vardan mile devtya paya.
Amrit paan kari amar hui kaya.

Dharm dhvaja sada liye haath mein.
Devi devta sab firai saath mein.

Pitambar vastra pahne gat mein.
Bal shakti puri yaksh jaat mein.

Swarn sinhasan aap virajein.
Trishul gada hath mein saajein.

Shankh mridang nagare bajayein.
Gandharv raag madhur swar gaayein.

Chausath yogini mangal gaavein.
Riddhi-siddhi nit bhog lagavein.

Daas daasani sir chatra phiraavein.
Yaksh yakshani mil chavar dhulaavein.

Rishiyo mein jaise Parashuram bali hain.
Devan hain jaise Hanuman bali hain.

Purusho mein jaise Bhima bali hain.
Yaksho mein aise hi Kubera bali hain.

Bhagato mein jaise Prahlad bade hain.
Pakshiyon mein jaise Garud bade hain.

Nago mein jaise Shesh bade hain.
Vaise hi bhagat Kubera bade hain.

Kandhe dhanush hath mein bhala.
Gale phoolon ki pahni mala.

Swarn mukut aru deh vishaala.
Door-door tak hoye ujala.

Kubera dev ko jo man mein dhare.
Sada vijay ho kabhi na haare.

Bigde kaam ban jaayein saare.
Ann dhan ke rahein bhare bhandare.

Kubera gareeb ko aap ubhara.
Kubera karj ko shighra utara.

Kubera bhagat ke sankat tara.
Kubera shatru ko kshan mein maare.

Shighra dhani jo hona chahe.
Kyun nahi Yaksh Kubera manaye.

Yah paath jo padhe padhaaye.
Din dugna vyaapar badhaaye.

Bhoot pret ko Kubera bhagaave.
Ade kaam ko Kubera banaave.

Rog shok ko Kubera nashaave.
Kalank kodh ko Kubera hataave.

Kubera chadhe ko aur chadhade.
Kubera gire ko pun: utha de.

Kubera bhagy ko turant jaga de.
Kubera bhule ko raah bata de.

Pyaase ki pyaas Kubera bujha de.
Bhookhe ki bhook Kubera mita de.

Rogi ka rog Kubera ghata de.
Dukhiya ka dukh Kubera chhuta de.

Baanh ki god Kubera bhara de.
Kaarobar ko Kubera Badha de.

Kaaraagaar se Kubera chhuda de.
Chor thagon se Kubera bacha de.

Court case mein Kubera jitavae.
Jo Kubera ko man mein dhyaavae.

Chunav mein jeet Kubera karaae.
Mantri pad par Kubera bithaave.

Paath kare jo nit man laai.
Uski kala ho sada savaai.

Jispe prasann Kubera ki maai.
Uska jeevan chale sukhdaai.

Jo Kubera ka paath karaave.
Uska beda paar lagaave.

Ujade ghar ko pun: basaave.
Shatru ko bhi mitr banaave.

Sahasr pustak jo daan karaai.
Sab sukh bhog padaarth paai.

Pran tyag kar swarg mein jaai.
Manas parivaar Kubera keerti gaai.

|| Doha ||

Shiv bhakton mein agrani,
Shri Yaksharaj Kuber.
Hriday mein gyan prakash bhar,
Kar do door andher.

Kar do door andher ab,
Jara karo na der.
Sharan pada hoon aapki,
Daya ki drishti pher.

Nitt nem kar pratah hi, paath karoun chalisa.
Tum meri manokamana, purn karo Jagadish.

Magsar Chhathi Hemant Rutu, Samvat Chausath Jaan.
Astuti chaalisa Shivahi, poorn kiye kalyan

Ye Chamak Ye Damak Bhajan Lyrics: ये चमक ये दमक भजन लिरिक्स

ये चमक ये दमक भजन (Ye Chamak Ye Damak Lyrics) एक ऐसा मधुर भजन है जो भगवान श्री राम के बाल रूप अर्थात राम लला को समर्पित किया गया है। इस भजन में भगवान श्री राम की व्याख्या करते हुए संगीतकर ने अपने मन के भाव रखे हैं।

ये चमक ये दमक भजन प्रसिद्ध संगीतकार सुधीर व्यास ने गाया है। सुधीर व्यास कहते हैं कि यह भजन उनको खुद ने नहीं लिखा बल्कि उन्हें भजन के बोल कहीं से सुना था। इसके बाद उन्होंने इसके बोल को अपने भाव में ढाला है और इस भजन को एक नया रूप दिया है।

ये चमक ये दमक भजन

ये चमक ये दमक भजन (Ye Chamak Ye Damak Hindi Lyrics) को आज केवल भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस भजन को सुनकर पूरा देश इस भजन के साथ भगवान राम की भक्ति में डूब जाता है।

आज 99Pandit के साथ इस लेख के माध्यम से हम सुधीर व्यास द्वार रचित ये चमक, ये दमक भजन (Ye Chamak Ye Damak Bhajan hindi lyrics) को जानेंगे…

ये चमक ये दमक भजन हिंदी लिरिक्स – Ye Chamak Ye Damak Bhajan Lyrics in Hindi

ये चमक, ये दमक, फूलवन मा महक
सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

इठला के पवन चूमे सैयाँ के चरण
बगियन मा बहार तुम्हई से है
(बगियन मा बहार तुम्हई से है)

मेरे सुख-दुख की रखते हो खबर
मेरे सर पर साया तुम्हारा है
(मेरे सर पर साया तुम्हारा है)

मेरे सुख-दुख की रखते हो खबर
मेरे सर पर साया तुम्हारा है
मेरी नैया के खेवनहार तुम्ही
मेरी नैया के खेवनहार तुम्ही
मेरा बेड़ा पार तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

मैं तो भूल गई कुछ भी कहना
तोरी प्रीत में रोवत है नैना
(तोरी प्रीत में रोवत है नैना)

मैं तो भूल गई कुछ भी कहना
तोरी प्रीत में रोवत है नैना
रग-रग में बसी है प्रीत तोरी
रग-रग में बसी है प्रीत तोरी
अँखियन में ख़ुमार तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

मेरा दिल ले लो, मेरी जाँ ले लो
मेरा तन ले लो, मेरा मन ले लो
(मेरा तन ले लो, मेरा मन ले लो)

मेरा दिल ले लो, मेरी जाँ ले लो
मेरा तन ले लो, मेरा मन ले लो
मेरे इश्क़ को निस्बत है तुमसे
मेरे इश्क़ को निस्बत है तुमसे
जीवन शृंगार तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

मैं तो भूल गई सब सुख-चैना
मोरे जब से लड़े तुम संग नैना
(मोरे जब से लड़े तुम संग नैना)

मैं तो भूल गई सब सुख-चैना
मोरे जब से लड़े तुम संग नैना
मेरी नस-नस में है प्रीत तोरी
मेरी नस-नस में है प्रीत तोरी
मेरा सब आधार तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

मेरा कोई नहीं है दुनिया में
मेरा कौल-करार तुम्हई से है
(मेरा कौल-करार तुम्हई से है)

मेरा कोई नहीं है दुनिया में
मेरा कौल-करार तुम्हई से है
मैं कहाँ जा कर सौदा बेचूँ?
मैं कहाँ जा कर सौदा बेचूँ?
मेरा सब व्यापार तुम्हई से है
(सब कुछ, सरकार, तुम्हई से है)

ये चमक ये दमक भजन

ये चमक ये दमक भजन इंग्लिश लिरिक्स – Ye Chamak Ye Damak Bhajan Lyrics in English

Ye chamak, ye damak, phoolvan ma mahak
Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

Ithla ke pawan choome sainyan ke charan
Bagiyan ma bahaar tumhai se hai
(Bagiyan ma bahaar tumhai se hai)

Mere sukh-dukh ki rakhte ho khabar
Mere sar par saaya tumhara hai
(Mere sar par saaya tumhara hai)

Mere sukh-dukh ki rakhte ho khabar
Mere sar par saaya tumhara hai
Meri naiya ke khevnahar tumhi
Meri naiya ke khevnahar tumhi
Mera beda paar tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

Main to bhool gayi kuch bhi kehna
Tori preet mein rovat hai naina
(Tori preet mein rovat hai naina)

Main to bhool gayi kuch bhi kehna
Tori preet mein rovat hai naina
Rag-rag mein basi hai preet tori
Rag-rag mein basi hai preet tori
Ankhiyan mein khumaar tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

Mera dil le lo, meri jaan le lo
Mera tan le lo, mera man le lo
(Mera tan le lo, mera man le lo)

Mera dil le lo, meri jaan le lo
Mera tan le lo, mera man le lo
Mere ishq ko nisbat hai tumse
Mere ishq ko nisbat hai tumse
Jeevan Shringar tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

Main to bhool gayi sab sukh-chaina
More jab se lade tum sang naina
(More jab se lade tum sang naina)

Main to bhool gayi sab sukh-chaina
More jab se lade tum sang naina
Meri nas-nas mein hai preet tori
Meri nas-nas mein hai preet tori
Mera sab adhaar tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

Mera koi nahi hai duniya mein
Mera kaul-karaar tumhai se hai
(Mera kaul-karaar tumhai se hai)

Mera koi nahi hai duniya mein
Mera kaul-karaar tumhai se hai
Main kahaan ja kar sauda bechun?
Main kahaan ja kar sauda bechun?
Mera sab vyapaar tumhai se hai
(Sab kuch, Sarkar, tumhai se hai)

निष्कर्ष

ये चमक ये दमक भजन (ye chamak ye damak lyrics) सुनकर मन को शांति ही नहीं बल्कि आस-पास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचलन हो जाता है। यह भजन एक भक्तिपूर्ण और भावात्मक गीत है जो उच्च शक्ति, प्रेम और निर्भरता व्यक्त करता है।

ये चमक ये दमक भजन (ye chamak ye damak bhajan) को यूट्यूब पर जनवरी में पोस्ट किया गया था और अभी इस भजन पर 3 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले हैं।

इसके साथ ही आप 99Pandit के साथ अपने घर, मंदिर, और ऑफिस में किसी भी प्रकार की पूजा हमारी वेबसाइट से पंडित को अपना घर बुला कर करा सकते हैं।

पंडित को अपने घर बुलाने के लिए आपको 99Pandit की वेबसाइट पर जाकर “Book a Pandit” पर क्लिक करना होगा, उसके बाद जरूरी जानकारी बता कर आप पंडित बुक कर सकते हैं। आगे ऐसे ही भजन के बोल, आरती, और कहानी पढ़ने के लिए जुड़े रहे 99Pandit के साथ।

Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi: संकटमोचन हनुमानाष्टक

Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi: संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ भगवान श्री राम के प्रिय हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| कहा जाता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने का सही मार्ग भगवान श्री राम की भक्ति ही है| यदि आप पर किसी प्रकार का संकट है तो आप भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए इस संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ कर सकते है| आइये जानते है क्या है हनुमानाष्टक पाठ|

संकटमोचन हनुमानाष्टक

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संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र – Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi

|| हनुमान अष्टक ||

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ 

अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ 

रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ 

बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ 

रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो 
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥

काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो ॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥

संकटमोचन हनुमानाष्टक

Sankatmochan Hanuman Ashtak Lyrics in English – बाल समय रवि भक्षी लियो तब

|| Hanuman Ashtak ||

Bal samay Ravi bhakshi liyo tab,
Teenhu lok bhayo andhiyaron.
Tahi son trasa bhayo jag ko,
Yeh sankat kahu son jaat na taaro.
Devan aani kari binti tab,
Chhaadi diyo Ravi kasht nivaaro.
Ko nahin jaanat hai jag mein kapi,
Sankatmochan naam tiharo ||

Bali ki trasa kapis basain giri,
Jaat mahaprabhu panth nihaaro.
Chauki mahamuni saap diyo tab,
Chaahie kaun bichaar bichaaro.
Kaidvij roop livaay mahaprabhu,
So tum daas ke sok nivaaro ||

Angad ke sang len gaye siya,
Khoj kapis yah bain uchaaro.
Jeevat na bachihau hum so ju,
Bina sudhi laaye ihaan pagu dhaaro.
Hari thake tat sindhu sab tab,
Laaye Siya-sudhi pran ubaaro ||

Ravan trasa dai Siya ko sab,
Raakshasi son kahi sok nivaaro.
Tahi samay Hanuman Mahaprabhu,
Jaaye maha rajnichar maaro.
Chaahat Siya Asok so aagi su,
Dai prabhu Mudrika sok nivaaro ||

Baana lago ur Lachhiman ke tab,
Pran taje sut Ravan maaro.
Lai griha baidya Susheen samet,
Tabai giri dron su bir upaaro.
Aani sajeevan haath dai tab,
Lachhiman ke tum pran ubaaro ||

Ravan yudh ajaan kiyo tab,
Naag ki phaas sabai sir daaro.
Shri Ramchandra samet sabai dal,
Moh bhayo yeh sankat bhaaro.
Aani khages tabai Hanuman ju,
Bandhan kaati sutraas nivaaro ||

Bandhu samet jabai Ahiravan,
Lai Ragunath pataal sidhaaro.
Debihin pooji bhali vidhi son bali,
Deu sabai mili mantra vichaaro.
Jai sahaay bhayo tab hi,
Ahiravan sena samet sanhaaro ||

Kaaj kiye bada devan ke tum,
Bir mahaprabhu dekhi bichaaro.
Kaun so sankat mor gareeb ko,
Jo tumse nahin jaat hai taaro.
Begi haro Hanuman Mahaprabhu,
Jo kachu sankat hoye hamaaro ||

|| Doha ||

Laal deh laali lase,
Aru dhari laal langur.
Vajra deh daanav dalan,
Jai jai jai kapi soor

Shree Ram Chalisa Lyrics in Hindi: राम चालीसा पाठ हिंदी में

Ram Chalisa Lyrics in Hindi: प्रभु श्री राम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है| भगवान श्री राम को प्रसन्न करने के लिए तुलसीदास जी के द्वारा रचित राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का जप किया जाता है| राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का जप करने से प्रभु श्री राम अपने भक्तों से बहुत ही प्रसन्न होते है तथा भक्तों पर अपनी कृपा भी बनाए रखते है|

ऐसा माना जाता है कि इस जीवन रूपी भवसागर को पार करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से राम चालीसा का पाठ करना चाहिए| राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होने लगती है|

राम चालीसा

पौराणिक कथाओं के अनुसार राम चालीसा का जप किये बिना भगवान श्री राम की पूजा अधूरी मानी जाती है| राम चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है| माना जाता है कि राम चालीसा (Ram Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ नियमित तथा पूर्ण भक्ति भाव से करने पर भक्त को दीर्घायु की भी प्राप्ति होती है|

अब हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे| 99Pandit एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है जिसकी सहायता से आप हिन्दू धर्म से संबंधित किसी भी पूजा जैसे – महालक्ष्मी पूजा [Mahalakshmi Puja], गोवर्धन पूजा [Govardhan Puja] तथा धनतेरस पूजा [Dhanteras Puja] के लिए ऑनलाइन पंडित बुक कर सकते है|

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श्री राम चालीसा पाठ हिंदी में – Ram Chalisa Lyrics in Hindi

|| राम चालीसा ||

|| दोहा ||

आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं

बाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम्
पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामायणं

|| चौपाई ||

श्री रघुबीर भक्त हितकारी । सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई । ता सम भक्त और नहिं होई ॥

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं । ब्रह्मा इन्द्र पार नहिं पाहीं ॥

जय जय जय रघुनाथ कृपाला । सदा करो सन्तन प्रतिपाला ॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना । जासु प्रभाव तिहूँ पुर जाना ॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला । रावण मारि सुरन प्रतिपाला ॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाई । दीनन के हो सदा सहाई ॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं । सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी । तुम भक्तन की लज्जा राखी ॥

गुण गावत शारद मन माहीं । सुरपति ताको पार न पाहीं ॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई । ता सम धन्य और नहिं होई ॥

राम नाम है अपरम्पारा । चारिहु वेदन जाहि पुकारा ॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो । तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हों ॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा । महि को भार शीश पर धारा ॥

फूल समान रहत सो भारा । पावत कोउ न तुम्हरो पारा ॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो । तासों कबहुँ न रण में हारो ॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा । सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ॥

लषन तुम्हारे आज्ञाकारी । सदा करत सन्तन रखवारी ॥

ताते रण जीते नहिं कोई । युद्ध जुरे यमहूँ किन होई ॥

महा लक्ष्मी धर अवतारा । सब विधि करत पाप को छारा ॥

सीता राम पुनीता गायो । भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ॥

घट सों प्रकट भई सो आई । जाको देखत चन्द्र लजाई ॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत । नवो निद्धि चरणन में लोटत ॥

सिद्धि अठारह मंगल कारी । सो तुम पर जावै बलिहारी ॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई । सो सीतापति तुमहिं बनाई ॥

इच्छा ते कोटिन संसारा । रचत न लागत पल की बारा ॥

जो तुम्हरे चरनन चित लावै । ताको मुक्ति अवसि हो जावै ॥

सुनहु राम तुम तात हमारे । तुमहिं भरत कुल- पूज्य प्रचारे ॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे । तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ॥

जो कुछ हो सो तुमहीं राजा । जय जय जय प्रभु राखो लाजा ॥

रामा आत्मा पोषण हारे । जय जय जय दशरथ के प्यारे ॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा । निगुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा ॥

सत्य सत्य जय सत्य- ब्रत स्वामी । सत्य सनातन अन्तर्यामी ॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै । सो निश्चय चारों फल पावै ॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं । तुमने भक्तहिं सब सिद्धि दीन्हीं ॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा । नमो नमो जय जापति भूपा ॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा । नाम तुम्हार हरत संतापा ॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया । बजी दुन्दुभी शंख बजाया ॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन । तुमहीं हो हमरे तन मन धन ॥

याको पाठ करे जो कोई । ज्ञान प्रकट ताके उर होई ॥

आवागमन मिटै तिहि केरा । सत्य वचन माने शिव मेरा ॥

और आस मन में जो ल्यावै । तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै ॥

साग पत्र सो भोग लगावै । सो नर सकल सिद्धता पावै ॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥

श्री हरि दास कहै अरु गावै । सो वैकुण्ठ धाम को पावै ॥

|| दोहा ||

सात दिवस जो नेम कर पाठ करे चित लाय ।
हरिदास हरिकृपा से अवसि भक्ति को पाय ॥

राम चालीसा जो पढ़े रामचरण चित लाय ।
जो इच्छा मन में करै सकल सिद्ध हो जाय ॥

राम चालीसा

Ram Chalisa Lyrics In English – श्री रघुबीर भक्त हितकारी

|| Ram Chalisa ||

|| Doha ||

Aado Ram Tapovanaadi Gamanam Htvaah Mriga Kaanchan,
Vaidehi Haran Jatayu Maranam Sugreeva Sambhashanam,
Bali Nirdalam Samudra Taranam Lankapuri Dahanam,
Paschdravanam Kumbhakarna Hananam Etadhi Ramayanam

|| Chaupai ||

Shri Raghubir Bhakt Hitkari | Suni Lijai Prabhu Araj Hamari ||

Nishi Din Dhyan Dharai Jo Koi | Ta Sam Bhakt Aur Nahin Hoi ||

Dhyan Dhare Shivaji Man Mahin | Brahma Indr Paar Nahin Pahin ||

Jai Jai Jai Raghunath Kripaka | Sada Karo Santan Pratipala ||

Dut Tumhaar Veer Hanumana | Jaasu Prabhav Tihun Pur Jana ||

Tuv Bhujchand Prachand Kripala | Ravana Maari Suran Pratipala ||

Tum Anaath Ke Naath Gosai | Dinan Ke Ho Sada Sahai ||

Brahmadik Tav Paar Na Paave | Sada Ish Tumharo Yash Gaave ||

Chaariu Ved Bharat Hai Saakhi | Tum Bhaktan Ki Lajja Raakhi ||

Gun Gaavat Shaarad Man Maahi | Surpati Taako Paar Na Paahin ||

Naam Tumhaar Let Jo Koi | Ta Sam Dhanya Aur Nahin Hoi ||

Ram Naam Hai Aprampara | Chaarihu Vedan Jaahi Pukara ||

Ganpati Naam Tumhaaro Linhon | Tinko Pratham Pujya Tum Kinhon ||

Shesh Ratat Nit Naam Tumhara | Mahi Ko Bhaar Shish Par Dhara ||

Ful Saman Rahat So Bhara | Paavat Kou Na Tumharo Para ||

Bharat Naam Tumharo Ur Dhaaro | Taaso Kabahu Na Ran Me Haaro ||

Naam Shatruhan Hridya Prakasha | Sumirat Hot Shatru Kar Nasha ||

Lashan Tumhare Aagyakari | Sada Karat Santan Rakhvari ||

Taate Ran Jite Nahin Koi | Yuddha Jure Yamahun Kin Hoi ||

Mahalakshmi Dhar Avataara | Sab Vidhi Karat Paap Ko Chhara ||

Sita Ram Punita Gaayo | Bhuvneshwari Prabhaav Dikhaayo ||

Ghat Sau Prakat Bhyi Sau Aayi | Jaako Dekhat Chandra Lajaai ||

Sau Tumare Nit Paanv Palotat | Navo Niddhi Charnan Me Lautat ||

Siddhi Attahrah Mangalkari | Sau Tum Par Jaave Balihaari ||

Aurahu Jo Anek Prabhutai | Sau Sitapati Tumahin Banai ||

Iccha Te Kotin Sansara | Rachat Na laagat Pal Ki Baara ||

Jo Tumhare Charnan Chit Laave | Taako Mukti Avasi Ho Jaave ||

Sunahun Ram Tum Taat Humaare | Tumahin Bharat Kul – Pujya Prachaare ||

Tumahin Dev Kul Dev Humaare | Tum Gurudev Praan Ke Pyaare ||

Jo Kuch Ho So Tumhin Raja | Jai Jai Jai Prabhu Raakh Laaja ||

Rama Aatma Poshan Haare | Jai Jai Jai Dashrath Ke Pyaare ||

Jai Jai Jai Prabhu Jyoti Swropa | Nigun Brahm Akhand Anupa ||

Satya Satya Jai Satya – Brat Swami | Satya Sanatan Antaryami ||

Satya Bhajan Tumharo Jo Gaave | Sau Nischay Chaaron Fal Paave ||

Satya Shapath Gauripath Kinhi | Tumne Bhakthin Sab SIddhi Dinhin ||

Gyaan Hridya Do Gyaan Swaroopa | Namo Namo Jai Jaapati Bhupa ||

Dhanya Dhanya Tum Dhanya Pratapa | Naam Tumhaar Harat Santapa ||

Satya Shuddh Devan Mukh Gaaya | Baji Dundubhi Shankh Bajaya ||

Satya Satya Tum Satya Sanatn | Tumhi Ho Humre Tan Man Dhan ||

Yaako Paath Kare Jo Koi | Gyan Prakat Taake Ur Hoi ||

Aavagaman Mite Tihi Kera | Satya Vachan Maane Shiv Mera ||

Aur Aas Man Me Jo Lyaave | Tulsi Dal Aru Phul Chadhave ||

Saag Patr Sau Bhog Lagave | Sau Nar Sakal Siddhta Paave ||

Ant Samay Raghubar Pur Jaai | Jahan Janam Hari Bhakt Kahai ||

Shree Hari Daas Kahe Aru Gaaev | Sau Vaikunth Dhaam Ko Paave ||

|| Doha ||

Saath Diwas Jo Nem Kar Paath Kare Chit Laay |
Haridaas Harikripa Se Avasi Bhakti Ko Paay ||

Ram Chalisa Jo Padhe Ram Charan Chit Laay |
Jo Iccha Man Me Kare Sakal Siddh Ho Jaaye ||

Jeev Ashtakam Lyrics in Hindi: जीव अष्टकम हिंदी अर्थ सहित

हरे कृष्ण ! जीव अष्टकम आठ संस्कृत छंदों (अष्ट = आठ, काम = छंद) का एक सेट है, जिसे अक्सर वैष्णव परंपरा में भक्ति साहित्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, जो भगवान कृष्ण और व्यक्तिगत आत्मा (जीव) के साथ उनके संबंध पर केंद्रित है।

शब्द “जीव अष्टकम” को शास्त्रीय या मुख्यधारा के ग्रंथों के हिस्से के रूप में सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन यह आध्यात्मिक मुक्ति और आनंद के लिए कृष्ण पर आत्मा की निर्भरता पर जोर देने वाले एक भक्ति भजन को दर्शाता है।

जीव अष्टकम

इस ब्लॉग की सहायता से हम जीव अष्टकम के बारे में गहन ज्ञान प्राप्त करेंगे। साथ ही 99Panditकी सहायता से किसी भी प्रकार की पूजा कर सकते हैं। अगर आप सही तरीके से पूजा करना चाहते हैं, तो 99Pandit से पिंडदान, गृह शांति पूजा, विवाह पूजा, मंगल पूजा, कुजा पूजा, आदि के लिए पंडित को बुक करने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञ आपको हर चरण में पूजा करने के लिए मार्गदर्शन करते हैं और आपकी भाषा में मंत्र या अनुष्ठान समझाते हैं। तो आइये 99Pandit के साथ जानते हैं जीव अष्टकम के बारे में।

जीव अष्टकम् क्या है? – What is Jeev Ashtakam?

जीव अष्टकम एक ऐसा स्तोत्र है जो आत्मा (जीव) और भगवान श्री कृष्ण के बीच के शाश्वत और प्रेमपूर्ण संबंध को समझने में मदद करता है। यह हमें सिखाता है कि हमारी आत्मा का असली स्वभाव भौतिक संसार की सीमाओं से परे है और हमारी अंतिम पूर्ति भगवान कृष्ण की सेवा में है।

इस स्तोत्र के छंद बताते हैं कि आत्मा भौतिक दुनिया (जन्म और मृत्यु के चक्र) में उलझी हुई हो सकती है, लेकिन उसका असली उद्देश्य कृष्ण के प्रति भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करना है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी असली पहचान भगवान के शाश्वत सेवक के रूप में है।

  • आत्मा भौतिक संसार में उलझी रहती है, लेकिन इसका असली स्वरूप दिव्य और शाश्वत है।
  • भगवान कृष्ण ही हर दिल में रहते हैं और पूरे सृजन का स्रोत हैं।
  • आत्मा की सबसे बड़ी खुशी और शांति भगवान की प्रेमपूर्ण सेवा में है।

यह स्तोत्र हमें प्रेरित करता है कि हम भौतिक संसार की उलझनों से ऊपर उठें, अपने असली स्वरूप को पहचानें और भगवान कृष्ण के साथ अपने शाश्वत संबंध को मजबूत करें। यह हमें सिखाता है कि भगवान की सेवा ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।

जीव अष्टकम् लिरिक्स हिंदी अर्थ के साथ – Jeev Ashtakam Lyrics with Hindi Meaning

छंद- 1

अहम् अचिन्त्यः अमरः नित्यरूपः
अहं सत्यः सत्यांशः सत्यस्वरूपः
अहम् अक्लेद्यश्च अदाह्यः अशोष्यः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||१ ||

हिंदी अर्थ – मैं अचिन्त्य हूँ, मेरा स्वरूप शाश्वत है/ मैं शाश्वत हूँ। मैं परम सत्य का अंश हूँ , इसलिए मैं सत्य हूँ और मेरा स्वरूप भी परम सत्य के समान ही है। मुझे न तो भिगोया जा सकता है, न जलाया जा सकता है और न ही सुखाया जा सकता है। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

छंद- 2

नाहं ब्रह्मा विष्णु च रुद्र: बसोबः
नाहम् आदित्यो मरुतः यक्षः देवः
नाहं बालः बृद्धश्च नारी पुरुषः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||२ ||

हिंदी अर्थ – मैं ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र या वसु में से कोई नहीं हूँ। मैं आदित्य , मरुत , यक्ष या देवता में से कोई नहीं हूँ । मैं न तो बच्चा हूँ, न बूढ़ा, न स्त्री, न ही पुरुष। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

छंद- 3

अहम् अजन्मा अब्ययः मुक्त सत्यः
अहं कूटस्थाचल पुरुषः नित्यः
अहं कृष्णांशः कृष्णदेवस्य अंशः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||३ ||

हिंदी अर्थ – मैं कभी जन्म नहीं लेता (इसलिए मैं कभी मरता नहीं), मैं कभी खर्च नहीं होता,
मैं स्वतंत्र हूँ और मैं सत्य हूँ। मैं अछूता, स्थिर और शाश्वत हूँ।
मैं श्री कृष्ण का अंश हूँ, मैं उनका सेवक हूँ।

छंद- 4

नाहम् एतत् देहश्च ना तस्य अंगः
नाहं कस्य संगश्च नाहम् असंगः
नाहं पंचप्राणः नाहं पंचकोषः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||४ ||

हिंदी अर्थ – मैं यह शरीर नहीं हूँ और न ही मैं शरीर का कोई अंग हूँ।
चूँकि मैं किसी से या किसी चीज़ से आसक्त नहीं हूँ, इसलिए
मैं किसी से या किसी चीज़ से अलग भी नहीं हूँ।
मैं पाँच प्राण और पाँच कोश नहीं हूँ जिनसे शरीर बना है। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

जीव अष्टकम

छंद- 5

अहं गुणातीतः अहं कालातीतः
अहं आनन्दोशिब स्वरूपः सत्यः
अहं चिदानन्दोsहं कृष्णस्य दासः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||५ ||

हिंदी अर्थ – मैं प्रकृति के तीनों गुणों से परे हूँ, मैं काल से परे हूँ।
मैं आनन्द हूँ, मैं सम्पूर्ण मंगल हूँ और मैं सत्य का स्वरूप हूँ।
मैं सदा आनन्दमय हूँ और भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

छंद- 6

अहं तेन सह एकत्वं संबन्धम्
अहं तेन सह संबम्धं पृथकम्
अहं तदभेदाभेदश्च अचिन्त्यम्
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||६ ||

हिंदी अर्थ – मैं परम के समान हूँ फिर भी मैं अलग हूँ।
मैं परम के साथ एक हूँ फिर भी मैं परम नहीं हूँ।
परम के साथ मेरा रिश्ता अकल्पनीय है।
मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

छंद- 7

अहं विस्मृतवान् मम रूपोशुद्धः
अहं माया अनले देहे आबद्धः
अहं शतोशतः आशाया निबद्धः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||७ ||

हिंदी अर्थ – मैं अपने वास्तविक स्वरूप से विमुख हो गया हूँ, जो पूर्णतः शुद्ध है,
क्योंकि मैं इस माया की अग्नि में शरीर रूप में फँसा हुआ हूँ।
मैं सैकड़ों इच्छाओं के दुर्भाग्यपूर्ण बंधनों से बंधा हुआ हूँ, जबकि
मैं वास्तव में भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

छंद- 8

अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः
अहं कृष्णदासः अहं कृष्णदासः ||८ ||

हिंदी अर्थ – मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ । मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ। मैं भगवान श्री कृष्ण का सेवक हूँ।

|| इति श्री कृष्णदासः विरचित जीव अष्टकम् सम्पूर्णम् ||

Jeev Ashtakam Lyrics with Meaning in English

Stanza- 1

Aham achintyah amarah nityaroopah
Aham satyah satyaamshah satyasvaroopah
Aham akledyashcha adaahyah ashoshyah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasa

English Meaning – I am unthinkable, my form is eternal/ I am immortal. I am a part of the supreme.
Therefore, I am the truth and have the same form as the supreme truth.
I can neither be wetted, burnt nor can I be dried.
I am a servant of Lord Shri Krishna.

Stanza- 2

Naaham brahmaa vishnu cha rudrah basobah
Naaham aadityo marutah yakshah devah
Naaham baalah’ vri’ddhashcha naaree purushah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I am not Brahma, Vishnu, Rudra, or any of the Vasus.
I am neither one of‌ the Adityas, Marutas, Yakshas nor even Devas.
I am not a child, an old person a female, or even a male.
I am a servant of Lord Shri Krishna.

Stanza- 3

Aham ajanmaa abyayah mukta satyah
Aham kutasthaachala purushah nityah
Aham krishnaamshah krishnadevasya amshah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I am never born (therefore I never die), I am never spent,
I am free and I am the truth. I am untouched, fixed, and eternal.
I am a part of Shri Krishna, I am His servant.

Stanza- 4

Naaham etat dehashcha naa tasya angah
Naaham kasya sangashcha naaham asangah
Naaham panchapraanah naaham panchakoshah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasa

English Meaning – I am not this body and I am not any of the bodily parts.
Since I am not attached to anyone or anything, therefore,
I am not even detached from anyone or anything.
I am not the Five pranas and the five sheaths that constitute the body.
I am a servant of Lord Shri Krishna.

जीव अष्टकम

Stanza- 5

Aham gunaateetah aham kaalaateetah
Aham aanando shiva svaroopah satyah
Aham chidaanando’ham’ krishnasya daasah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I am beyond the three modes of nature, I am beyond time.
I am bliss, I am all auspiciousness and I am a form of the truth.
I am ever blissful and a servant of Lord Shri Krishna.

Stanza- 6

Aham tena saha ekatvam sambandham
Aham tena saha sambandham prithakam
Aham tada bhedaabhedashcha achintyam
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I am like the supreme yet I am different.
I am one with the supreme yet I am not the supreme.
My relationship with the supreme is unthinkable.
I am a servant of Lord Shri Krishna.

Stanza- 7

Aham vismritavaan mama roopo shuddhah
Aham maayaa anale dehe aapaddhah
Aham shatoshatah aashaayaa nibaddhah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I have become oblivious to my real form which is all pure,
As I am stuck in the‌ form of a body within this fire of illusion.
I am bound by the unfortunate shackles of hundreds of desires whereas,
I am a servant of Lord Shri Krishna.

Stanza- 8

Aham krishnadaasah aham krishnadaasah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah
Aham krishnadaasah aham krishnadaasah

English Meaning – I am a servant of Lord Shri Krishna. I am a servant of‌ Lord Shri Krishna.
I am a servant of Lord Shri Krishna. I am a servant of Lord Shri Krishna.
I am a servant of Lord Shri Krishna. I am a servant of Lord Shri Krishna.
I am a servant of Lord Shri Krishna. I am a servant of Lord Shri Krishna.

|| Iti Jeeva Ashtakam Sampurnam ||

जीव अष्टकम् के आध्यात्मिक लाभ

  • जीव अष्टकम का पाठ करने से भक्ति और भी गहरी होती है साथ ही भगवान कृष्ण से साथ आपके संबंध को मजबूत करता है।
  • यह स्तोत्र आत्मा को शुद्ध करता है और नकारात्मक कर्म संस्कारों को दूर करता है।
  • यह आत्मा को उसके शाश्वत उद्देश्य के साथ जोड़कर मुक्ति (मोक्ष) की ओर ले जाता है।
  • इस स्तोत्र को प्रतिदिन करने से चिंता कम हो जाती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है
  • यह स्तोत्र एकाग्रता, स्पष्टता और दिमागीपन में सुधार करता है।
  • मन की शांति के लिए इस पाठ को अवश्य करना चाहिए यह स्तोत्र मन को शांत करते हुए उपचारात्मक तरंगों से गूंजता है।
  • जीव अष्टकम का पाठ करने से खुशी, सकारात्मकता और भावनात्मक स्थिरता मिलती है
  • यह स्तोत्र चिंताओं को दूर करते हुए, कृष्ण के प्रति समर्पण को प्रोत्साहित करता है।
  • ईश्वरीय मार्गदर्शन में विश्वास और विश्वास को मजबूत करता है यह स्तोत्र।
  • जीव अष्टकम स्तोत्र आत्म-बोध और आत्मा के दिव्य संबंध के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है।
  • कृष्ण की शिक्षाओं के अनुरूप धार्मिक जीवन (धर्म) को प्रेरित करता है।
  • व्यक्तियों को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ता है यह जीव अष्टकम स्तोत्र।

निष्कर्ष

जीव अष्टकम के आरंभिक श्लोक आत्मा की शाश्वत प्रकृति को दर्शाता है, दूसरे श्लोक में आत्मा को सभी भौतिक भूमिका या पहचान से परे बताया है, तीसरा श्लोक आत्मा की अमर प्रकृति के बारे में बताया गया है, चौथे श्लोक में आत्मा की एकमात्र पहचान भगवान कृष्ण की दासता है।, पाँचवाँ श्लोक आत्मा को भौतिक प्रकृति के तीन गुणों से परे बताया गया है।

जीव अष्टकम पाठ के छठे श्लोक में, आत्मा और कृष्ण के बीच के रिश्ते को “अकल्पनीय” बताया गया है। सातवाँ श्लोक आत्मा के अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाने पर हार्दिक चिंतन प्रस्तुत करता है। अंत में, आठवाँ श्लोक एक शक्तिशाली प्रतिज्ञान और प्रार्थना के रूप में कार्य करता है।

हमें आशा है कि आपको जीव अष्टकम स्तोत्र पढ़कर अच्छा अनुभव हुआ होगा। आगे और भी ऐसे लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ। तब तक के लिए जय श्री कृष्ण!