Maha Mrityunjaya Jaap Puja Samagri: महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री

महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री: भारतीय संस्कृति में पूजा और जाप प्राचीनकाल से ही एक महत्वपूर्ण प्रथा रही है। जाप एक आध्यात्मिक प्रयास है जिसमें मन संकल्पित मन्त्रों की अवरोध-मुक्त ध्वनि में अवश्यंभावी ध्यान को स्थापित करता है अर्थांत जाप का  तात्पर्य किसी सिद्धमंत्र के द्वारा बार बार उच्चारण करना होता है।

किसी भी पूजा या जाप में पूजन सामग्री का विशेष महत्व होता है| महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री का ज्ञान होने पर आप जाप के दौरान होने वाले विधन या रूकावट को रोक सकते हो जिससे की जाप का सीधा फल आपको मिलता है|

महामृत्युंजय जाप में प्रयुक्त मंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” इसका मतलब है कि हम उस भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो हर प्राणी  में जीवन शक्ति का संचार करते हैं और पूरी जगत का पालन-पोषण करते हैं।

महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री

महामृत्युंजय जाप एक ऐसा जाप है जिसे लोग जीवन की विपदाओं, बीमारियों और मृत्यु के खतरों से बचने के लिए करते हैं।

आप 99पंडित के ऑनलाइन प्लेटफार्म द्वारा महामृत्युंजय जाप कर आने हेतु ऑनलाइन पंडित बुक कर सकते है|

99पंडित अनुभवी व पेशेवर पंडितो की एक ऐसी टीम है जो आपको महामृत्युंजय जाप के दौरान होने वाले असंगत, खर्चे  को कम करते है साथ में वैदिक – विधि  जो ऋग्वेद से लेकर यजुर्वेद में वर्णित है के अनुसार पूर्ण करवाने का  वास्तविक अनुभव आपको प्रदान करवाते है|

हम 99पंडित किसी भी धार्मिक कार्य को शास्त्रानुसार करवाने की सहभागिता निभाते है, जिससे की यजमान के द्वारा करवाया गया महामृत्युंजय जाप निष्फल न हो और घर – परिवार के सदस्यों को महामृत्युंजय जाप का शत- प्रतिशत लाभ मिलें|

इस ब्लॉग द्वारा हमारा यानि 99Pandit का उद्देश्य आपको महामृत्युंजय जाप की पूजन सामग्री के बारे सही व सटीक जानकारी देना है जिससे की आपको जाप के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े|

क्यों की कई बार यह देखा गया है की सामग्री की व्यवस्थता अगर सही-ढंग से नहीं की जाती है तो जाप शुरू होने के बाद सामग्री की व्यवस्थता करने में भागम- भाग रहती है जिससे की यजमान को जाप का फल नहीं मिलता व मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो पति है|

अतः हम 99पंडित इस बात का महत्व समझते हैं और भगतों को सामग्री के लिए होने वाली इस असमंजस से निकलने का हर संभव प्रयास करते है|

इस पूजा में सामग्री को सत्य, पवित्रता, और भक्ति के साथ उपयोग करें और अपने आध्यात्मिक अनुभव को गहराई दें।

महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री सूची

99Pandit द्वारा निचे दी गयी सूचि आपके महामृत्युंजय जाप के दौरान आपके लिए उपयोगी साबित होगी, ऐसी हम 99पंडित कामना करते है| सूची इस प्रकार से है|

सामग्री मात्रा
रोली  50 ग्राम 
हल्दी  50 ग्राम 
सिन्दूर  5 नग 
लौंग  1 पैकेट 
इलायची  1 पैकेट 
सुपारी  25 ग्राम 
शहद  50 ग्राम 
इत्र  100 ग्राम 
गंगाजल  1 नग 
सुगंधित तेल  1 बोतल 
केवड़ा जल  1 बोतल 
गरिगोला   8 नग 
पंचमेवा  250 ग्राम 
धुप बत्ती  5 पैकेट 
माचिस  1 नग 
रुई बत्ती  1 पैकेट 
देशी घृत  सवा किलो  
कलश मिट्टी का  7 नग 
कलश धातु का  1 नग 
सकोरा  10 नग 
दियाळी  25 नग 
यज्ञोपर्वात  15 नग 
दोना  1 पैकेट 
अबीर  1 पैकेट 
गुलाल 1 पैकेट
अभ्रक  1 पैकेट 
लाल चन्दन  1 पैकेट 
अष्टगंध चन्दन  1 पैकेट 
हरिदर्शन चन्दन  1 डिब्बी 
महाराजा चन्दन  1 पैकेट 
पीला कुमकुम  1 पैकेट 
कपूर  100 ग्राम 
पानी वाला नारियल  2 नग 
भस्म  1 पैकेट 
कमलगट्टा 200 ग्राम 
सप्तमृतिका  1 पैकेट 
सप्तधान्य  1 पैकेट 
सर्वोषधि  1 पैकेट 
पंचरत्न  1 पैकेट 
पीली सरसों  50  ग्राम 
पीला कपड़ा वेदी के लिए  5 मीटर 
लाल कपडा  2 मीटर 
श्वेत कपडा  सवा मीटर 
हरा कपडा  आधा मीटर 
काला कपडा  आधा मीटर 
नीला कपड़ा  आधा मीटर 
हनुमान जी वाला झंडा , माध्यम साइज  1 नग 
चावल (साबुत वाले )  11 किलो 
रंग लाल हरा, पीला, काला,  5 + 5 पैकेट  
महामृत्युंजय यंत्र  1 नग 
रुद्राक्ष  की माला  2 नग 
ब्रह्म पूर्णपात्र भगोना या डिब्बा  सात किलो साइज
चांदी का सिक्का (देवता विहीन ) 2 नग 
साड़ी देवियो के श्रृंगार सहित   2 सेट 
चौड़ी पट्टी की धोती देवताओ के लिए  3 सेट 
चौकी  1  तीन बाई तीन , 4 दो बाई दो
पीढ़ी चौकोर वाला  4 नग 
शिव पार्वती जी का चित्र (दो  बाई तीन) 1 नग 
लक्ष्मी की मूर्ति  1 नग 
राम दरबार की प्रतिमा  1 नग 
कृष्ण दरबार की प्रतिमा  1 नग 
हनुमान जी महाराज की प्रतिमा  1 नग 
दुर्गा माता की प्रतिमा  1 नग 
जौ  500 ग्राम 
फल एवं मिठाई ,दूध एवं दही आवश्यकतानुसार 
फूल 500 ग्राम 
फूल माला  10 मीटर
पान  11 नग 
आम का पल्लव  10  नग 
हरी -हरी दूर्वा घास 
बेलपत्र, बेल फल, धतूरा, समी, भांग प्रतिदिन 
बालू जौ बोने  के लिए   लगभग आधी बोरी 
आटा 500 ग्राम
चीनी 500 ग्राम
थाली 7 पीस
लोटे 2 पीस
गिलास 9 पीस
चम्मच 11 पीस
परात 4 पीस
गाय का गोबर
बिछाने का आसन

इसके अलावा आपको पंडित वरण सामग्री,  माला , गोमुखी , पंचपात्र , आमचनी, झण्डे के लिए एक बांस की छड़ी भी आदि आवश्यकता रहेगी|

महामृत्युंजय जाप के मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” है।

भगतों को बता दे की महामृत्युंजय मंत्र के कुल ३२ शब्दो का प्रयोग हुआ है यदि हम “ॐ” को इसमें सम्मिलित शब्दो की सख्या “३३” हो जाती है|

यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और मृत्युंजय से सम्बंधित है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप शिव जी की कृपा, सुख, शांति और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह मंत्र रोगों से बचाव और उनके उपचार में भी मददगार साबित होता है।

महामृत्युंजय जाप की उपयोगिता व महत्व

महामृत्युंजय जाप एक प्राचीन और प्रभावी पूजा पद्धति है जो शिव की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने में सहायता करती है।

इस पूजा की सामग्री और उपयोगिता आपके भाग्य में नया सवेरा, आपके स्वास्थ्य में सुधार और घर में सुख- समृद्धि को बढ़ाने में मदद करती है।

महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री

जब आप महामृत्युंजय जाप करते हैं, तो ध्यान दें कि आपकी मनस्थिति शुद्ध होनी चाहिए और पूजा के विधानों का पालन करें।

इसके अलावा महामृत्युंजय जाप आपकी आध्यात्मिक साधना में स्थिरता और शक्ति लाने का एक महान उपाय है।

महामृत्युंजय जाप का उद्देश्य

महामृत्युंजय मंत्र के जाप नियमित रुप  से करने से व्यक्ति को असाध्य रोग जैसे कैंसर आदि से पीड़ित रोग से छुटकारा मिलता है|

यदि कोई ऐसा बीमार व्यक्ति जो असहनीय रोग से ग्रस्त हो और जीवन और मृत्यु के बीच में अंतर दिखाई देने लगे उसके लिए महामृत्युंजय जाप आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है|

यदि व्यक्ति द्वारा महा मृत्युंजय मंत्र का  ११००० बार जाप करने से सम्भावना है कि उसकी पीड़ा शांत हो जाये नहीं तो पीड़ित व्यक्ति अपनी पीड़ा से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है|

इस मंत्र के नियमित जाप से मनुष्य को सभी प्रकार से भय  रोग, दोष और पाप आदि से मुक्ति मिलती है| महामृत्युंजय मंत्र के जाप से व्यक्ति समस्त सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है|

महामृत्युंजय जाप के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

अगर आप घर पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर रहे है तो आपको निम्न बातों का पता होना आवश्यक होता है|

  • सबसे पहले आपके लिए महत्वपूर्ण यह है की महामृत्युंजय जाप हेतु उचित दिशा का ज्ञान होना चाहिए, आप हमेशा मंत्र का जाप पूर्व दिशा के मुख की और करके करे तो हमेशा कुशा के आशन पर बैठकर करे|
  • महामृत्युंजय मंत्र एक निश्चित सख्या में करना बहुत जरुरी है| पूर्व के दिन मे किया गया जाप आगामी दिन में किये गए जाप की सख्या के साथ न जोड़े| इससे इसका फल नहीं मिल पता है|
  • यह भी ध्यान रखे की मंत्रो का उच्चारण शुद्ध हो, साथ ही किसी मंत्र का उच्चारण होठों  के बहार ना हो|
  • जपकाल के दौरान कभी स्त्रीभोग न किया जाये इसका भी विशेष ध्यान रखे इससे आप अपने मार्ग से भटक सकते है|
  • मंत्रो का जाप हमेशा रुद्राक्ष की माला के साथ करें व जिस स्थान पर आप जाप कर रहे है वहाँ धूप- दीपक आदि की व्यवस्था हों|
  • जपकाल के दौरान मांस – मदिरा का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित करें|

यदि आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप के दौरान इन सब बातों का ध्यान रखते हो तो आपको मोक्ष की प्राप्ति होने से कोई नहीं रोक सकता | 

निष्कर्ष

महामृत्युंजय जाप आप पूर्ण वैदिक विधि से करते है तो इसके द्वारा आप हर संभव मनोकामना पूर्ण कर सकते हो|

99पंडित महामृत्युंजय जाप जैसे आयोजन  के लिए आपको सिद्ध पंडित उपलब्ध करवाता है जो यह महामृत्युंजय जाप के लिए सर्वश्रेष्ठ है|

ऑनलाइन पंडित बुकिंग के लिए आपको 99पंडित की आधिकारिक साइट पर जाकर “ बुक ए पंडित” पर क्लिक करना होगा|

क्लिक करने के बाद आपको अपनी सामान्य जानकारी दर्ज करनी होगी जैसे नाम, जीमेल, पूजा का चयन ,और फ़ोन नंबर का विवरण प्रदान कर आप अपनी पूजा की पुष्टि प्राप्त कर सकते हो|

महामृत्युंजय जाप पूजन सामग्री के अतिरिक्त आप 99Pandit के माध्यम से रामकथा पूजन सामग्री, श्रीमद् भागवत महापुराण कथा सामग्री, अखंड रामायण पाठ सामग्री, व अन्य धार्मिक आयोजन संपन्न करवाने हेतु सामग्री का विवरण प्राप्त कर सकते है व इन आयोजनों हेतु अपना पंडित बुक कर सकते है|

अधिक जानकारी के लिए आप हमें 8005663275 पर कॉल करके महामृत्युंजय जाप का आयोजन करवाने हेतु अपना पंडित बुक कर सकते हो| 99Pandit आपके द्वारा करवाए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान में आपका सार्थी रहेगा|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.महामृत्युंजय जाप क्या है?

A.महामृत्युंजय जाप एक प्राचीन हिन्दू पूजा प्रथा है जिसमें महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और मृत्यु के प्रभाव से रक्षा करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

Q.महा मृत्युंजय मंत्र कौनसा है?

A.महामृत्युंजय मंत्र अथर्ववेद से लिया गया है और इसका जाप मृत्यु और रोगों से बचाव और उनके निवारण के लिए किया जाता है। यह मंत्र निम्न है:
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्”॥

Q.महामृत्युंजय जाप कितने दिन करना चाहिए? 

A.महामृत्युंजय जाप को नियमित रूप से करने के लिए कोई निश्चित संख्या नहीं है। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में यह कहा जाता है कि आप महामृत्युंजय जाप को दैनिक, साप्ताहिक या मासिक आयोजन में शामिल कर सकते हैं। आप अपनी सामर्थ्य और समय के अनुसार इसे निर्धारित कर सकते हैं।
महामृत्युंजय जाप का नियमित अभ्यास करने से आपको मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है।

Q.महा मृत्युंजय मंत्र कितनी बार करना चाहिए?

A.महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का कोई निश्चित नियम नहीं है, लेकिन अधिकांश धार्मिक प्रथाएं इस मंत्र का यथासंभव अधिक से अधिक जाप करने की सलाह देती हैं। यह मंत्र हिंदू धर्म में महादेव भगवान शिव को समर्पित है और मृत्यु, स्वास्थ्य, खुशी और लंबे जीवन के भय को दूर करने के लिए इसका जाप किया जाता है।
मान्यता के अनुसार, सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली विधियों में से एक है महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना। इस अंक को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और अधिक सकारात्मक प्रभाव के लिए ऐसा किया जाता है।

Sunderkand Puja Samagri List: सुंदरकाण्ड पाठ पूजन सामग्री

सनातन धर्म में सुंदरकाण्ड पाठ का एक विशेष महत्व है| सुंदरकाण्ड पाठ हमारे जीवन में सुख और समृद्धि लाता है|  इस पाठ के आयोजन होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है| इस ब्लॉग के माध्यम से है हमारा यानि 99Pandit का उद्देश्य सुंदरकाण्ड पाठ पूजन सामग्री के बारे में आपको विस्तृत जानकारी प्रदान करवाना है|

मुख्यत: सुंदरकाण्ड पाठ रामायण का पांचवां अध्याय है, जो मुख्य रूप से हनुमान की उस यात्रा वर्तान्त पर केंद्रित है, जब वे लंका में सीता की खोज कर रहे थे। सबसे महत्वपूर्ण बात इस पाठ की यह है की इस पाठ को आप रोजना भी कर सकते हो|

सुन्दरकांड पाठ पूजन सामग्री

सुंदरकाण्ड पाठ की सम्पूर्ण जानकारी आप हमारी 99पंडित की बुक ए पंडित सेवा के माध्यम से अपने पंडित से विचार विमर्श कर के भी प्राप्त कर सकते हो| यह बहुत आसान है बस आपको बुकिंग के दौरान पूछे जाने वाली समस्त जानकारी का ब्यौरा देना  होगा जैसे आपका नाम, आपकी जगह, शहर, फ़ोन नंबर, मेल पता, और आपके द्वारा की जाने वाली पूजा का नाम, और बुकिंग कन्फर्म करके अपना पंडित स्वयं बुक कर सकते हो|

हम 99पंडित कुशल व् प्रशिक्षित तथा अनुभवी पंडितो का एक ऐसा समूह है जो आपको  “सुंदरकाण्ड पाठ” में होने वाली समस्त समस्याओं का उचित निवारण करता है| हमारा हर संभव प्रयास  रहता है की कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हम बिना किसी व्यवधान के सम्पन करा सके इस हेतु हम सदैव अग्रणीय रहते है जिससे की हम पुण्य के भागीदार बन सके| 

सुंदरकाण्ड पाठ पूजन सामग्री का विवरण निम्न  प्रकार से  है:-

सामग्री मात्रा
रोली एक पैकेट
कलावा (मौली)  दो पैकेट
सिंदूर एक पैकेट
इलायची एक पैकेट
सुपारी गयारह
पानी वाला नारियल एक
लाल कपड़ा सवा मीटर
जनेऊ चार
माचिस एक
बंदन पीला एक पैकेट
चावल आधा किलो
शहद एक शीशी
इत्र एक शीशी
गंगा जल एक शीशी
पंचमेवा दो सो ग्राम
धूपबत्ती एक पैकेट
रूईबत्ती गोल वाली मध्यम साइज एक पैकेट
देशी घी दही सो ग्राम
दोना एक गड्डी
राम दरबार फोटो फ्रेम बड़ा साइज
हनुमान जी फोटो फ्रेम बड़ा साइज
सुंदरकांड पुस्तकें ( अगर आपके घर आने वाले टीम के पास न हो तो व्यवस्थता करे झॉंकि की व्यवस्था पहले से सजा कर रखे)| 
फल आवश्यकतानुसार
पान सात नग
फूल + फूलमाता + आम का पल्लव + कलश धातु का घर वाला रखे (नए की जरूरत नहीं)

विशेष – “सुंदरकाण्ड पाठ  में हवन निषेध होता है”

सुंदरकाण्ड  पाठ करने का सही तरीका

यहाँ हम आपको सुंदरकाण्ड पाठ को करने का सही तरीका बता रहे है, अगर आप बताये गए तरीके के अनुसार पाठ का आयोजन करते है तो आपके सुख- समृद्धि के मार्ग में आने वाली बाधायें दूर होगी |

सुन्दरकांड पाठ पूजन सामग्री

  • सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन करने से पहले साफ सफाई का विशेष ध्यान रखे |  
  • अगर आप किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति हेतु सूंदर काण्ड पाठ का आयोजन कर रहे है तो इसकी शुरुवात मंगलवार के दिन से या शनिवार के दिन से कर सकते है क्यों की ये दोनों दिन इस पाठ के लिए शुभ माने जाते है | 
  • सर्वप्रथम गणेश वंदना द्वारा सुंदरकाण्ड पाठ की शुरुवात करे | 
  • तदोपरांत  हनुमान जी पूजा करे | यह अत्यंत आवश्यक है की हनुमान जी के साथ साथ राम और सीता माता की मुर्तिया या चित्र भी हनुमान जी के पास रखे | 
  • यह भी ध्यान रहे की हनुमान जी की पूजा फल -फूल मिठाई और सिंदूर से की जाने चाहिए |  
  • सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन करते समय तुलसीदस द्वारा रचित रामचरितमानस की भी पूजा करनी चाहिए| 

सुंदरकाण्ड पाठ के लाभ

यदि आप उपर दर्शाये हुए तरीके से सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन करते है तो आप अनगिनत लाभ के भागीदार बन सकते है जैसे- 

  • इस बात का मनोवैज्ञानिक पुष्टिकरण हो चूका है की यह हमारे आत्मविश्वास व् इच्छाशक्ति  बढ़ता है |  सुंदरकाण्ड पाठ  में लिखी हुई पंक्तिया हमें आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करती है | यह भी देखा गया है की अगर इस पाठ का आयोजन बच्चों की परीक्षा से पहले किया जाये तो परीक्षा के परिणामो पर इसका असर पड़ता है | 
  • सुंदरकाण्ड पाठ के आयोजन से घर में वित्तीय स्थिति में सुधार होता है |
  • अगर आप किसी नौकरी हेतु प्रयत्नशील है तो सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन आपके लिए उपयोगी सिद्ध होता है | 
  • अगर किसी व्यक्ति के जीवन में शनि, राहु, और मगल के दुष्प्रभाव  है तो यह उसके  प्रभाव को काम करता है | 
  • यह मन और आत्मा में शांति व् सुख- समृद्धि में बढ़ावा करता है | 
  • यह जीवन में नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को भी कम करता है |  
  • सुंदरकाण्ड पाठ के आयोजन से कर्ज और रोग से छुटकारा मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.सुंदरकाण्ड पाठ कितने घंटे का होता है?

A.यह आमतौर पर पूछा जाने वाले  सवालो में से एक है अगर आपको सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन संपन्न करवाना है तो आपको काम से कम एक से डेढ़ घंटे का समय चाहिए |

Q.सुंदरकाण्ड पाठ कितने दिन तक पढ़ना चाहिए?

A.सुंदरकाण्ड पाठ हेतु वैसे तो को दिनों की समय सिमा निर्धारित नहीं है फिर भी इस पाठ का आयोजन 11, 21, या 31 दिनों तक करना चाहिए जिससे इसका लाभ अधिक मिलता है |

Q.सुंदरकाण्ड पाठ की कौन सी चौपाई को शुरू करना होता है?

A.सुंदरकाण्ड पाठ  शुरुवात हमें “प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥ गरल सुधा रिपु करहिं मिताई “|  चौपाई से करनी चाहिए |

Q.सुंदरकाण्ड पाठ के लिए कौन सा दिन अच्छा है?

A.सुंदरकाण्ड पाठ करने के लिए मंगलवार  और शनिवार का दिन श्रेष्ठ मन जाता है  क्यों की यह दोनों दिन हनुमान जी से संबंधित माने जाते हैं| सामान्यतया : सुंदरकाण्ड पाठ भी हनुमानजी जी के बल प्रताप को दर्शाता है इस लिए सुंदरकाण्ड पाठ का पढ़ना हनुमानजी जी की स्तुति करना समझा जाता है। यह दो विशेष दिन भी हनुमान जी को समर्पित है।

Q.सुंदरकाण्ड पाठ  सुबह व शाम को कितने बजे करना चाहिए?

A.सुंदरकाण्ड पाठ हमें सुबह ब्रम्ह्महूर्त 4:00 बजे से 6 :00 बजे के बीच करनी चाहिए | क्यों की हिन्दू धर्म दर्शन के अनुसार यह समय देव उपासना हेतु अच्छा माना जाता है | यदि आप समूह के लोगो को आमंत्रित कर सुंदरकाण्ड पाठ कर रहे हैं तो शाम को 7 बजे के बाद का समय उचित रहेगा |

Simantonnayana Sanskar: सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री: हिंदू धर्म के अनुसार, मनुष्य के जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार किये जाते हैं। यह 16 संस्कार मानव जीवन चक्र की संपूर्ण यात्रा को समाहित करते हैं। नवजात शिशु के जन्म से पहले 4 संस्कार होते हैं, उसके जीवन के दौरान 11 संस्कार होते हैं और आत्मा के शरीर छोड़ने के बाद 1 संस्कार होता है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन इन्ही 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जो नवजात शिशु के जन्म से पहले किया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार, इस धरती पर जन्म लेने वाले हर मनुष्य को सोलह संस्कार करने चाहिए। भगवान कृष्ण, भगवान राम और कई प्रसिद्ध ऋषियों ने भी इन सोलह संस्कारों का पालन किया है। मनुष्य के जीवन में इन सभी सोलह संस्कारों का अपना महत्व है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री

इस पूजन को करने से पहले पुंसवन संस्कार पूजन भी किया जाता है। जिससे शिशु के मस्तिष्क का विकास होता है। आज के इस लेख में हम जानेंगे सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन तथा सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री के बारे में।

साथ ही आपको बताएँगे कि इस संस्कार को क्या कहा जाता है, इसका क्या महत्व है, तथा इस पूजन को करने के लिए क्या सामग्री (सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री) प्राप्त करनी पड़ती है। तो आइए इन सोलह महत्वपूर्ण संस्कारों में से तीसरे संस्कार सीमन्तोन्नयन संस्कार के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

सोलह संस्कार क्या हैं? – What are the 16 Sanskar?

  1. गर्भाधान संस्कार – यह संस्कार बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है।
  2. पुंसवना संस्कार (भ्रूण सुरक्षा के लिए प्रार्थना) – यह संस्कार गर्भावस्था के तीसरे या चौथे महीने में किया जाता है।
  3. सीमन्तोन्नयन संस्कार – गर्भावस्था के सातवें महीने में किया जाने वाला यह संस्कार मातृत्व का जश्न मनाता है और जल्द ही माँ बनने वाली महिला में सकारात्मक भावनाओं को प्रोत्साहित करता है।
  4. जातकर्म संस्कार (जन्म संस्कार)- यह प्रसवोत्तर संस्कार बच्चे के जन्म के 6वें दिन किया जाता है। यह अनुष्ठान माता-पिता बनने की खुशी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करने का एक शानदार तरीका है।
  5. नामकरण संस्कार (नाम देने की रस्म) – नाम व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चे के जन्म के बाद उसका नामकरण संस्कार (Namkaran Ceremony) किया जाता है।
  6. निष्क्रमण संस्कार (बच्चे को बाहरी दुनिया से परिचित कराना) – संस्कार के अनुसार, माता-पिता बच्चे को पहली बार बाहर ले जाते हैं और उसे पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से परिचित कराते हैं।
  7. अन्नप्राशन संस्कार (बच्चे को उसका पहला ठोस भोजन खिलाना) – यह संस्कार बच्चे के जन्म के 6वें महीने में किया जाता है। यह संस्कार तब बहुत हर्षोल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है जब बच्चे को पहली बार ठोस आहार दिया जाता है।
  8. चूड़ाकरण संस्कार (बच्चे का सिर मुंडवाना) – चूड़ाकरण संस्कार या मुंडन संस्कार बच्चे को व्यक्तिगत स्वच्छता से परिचित कराने का प्रतीक है। यह समारोह व्यक्ति के जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
  9. विद्यारम्भ संस्कार (शिक्षा का प्रारम्भ) – इस संस्कार के माध्यम से बालक को शिक्षा के प्रारम्भिक स्तर से परिचित कराया जाता है। इससे बच्चे के दिल में ज्ञान और कला के प्रति गहरा सम्मान विकसित होता है।
  10. कर्णवेध संस्कार (कान छेदन)  – एक और महत्वपूर्ण क्षण, बच्चे के कान का छेदन नौवें संस्कार द्वारा मनाया जाता है।
  11. उपनयन संस्कार (पवित्र धागा) – पहले उपनयन संस्कार बच्चे की औपचारिक शिक्षा शुरू होने से पहले किया जाता था।  इसमें जनेऊ धारण कराया जाता है। इस दिन बच्चे को जीवन के नियमों, अनुशासन और कर्तव्यों से परिचित कराया जाता था।
  12. वेदारम्भ संस्कार (वेदों और अन्य प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन) – इस शुभ दिन को एक यज्ञ के साथ मनाया जाता है, जिसमें बच्चे को वेदों का अध्ययन करने की अनुमति दी जाती है। माता-पिता अभी भी अपने बच्चों को वैदिक ज्ञान देने के लिए इस नियम का पालन करते हैं।
  13. केशांता और ऋतुशुद्धि संस्कार (यौवन के आगमन का उत्सव) – इस संस्कार का उद्देश्य बालक को शिक्षा क्षेत्र से निकाल कर सामाजिक क्षेत्र से जोडऩा है। गृहस्थाश्रम में प्रवेश का यह प्रथम चरण है। बच्चे का समाज और कर्म क्षेत्र की परेशानियों से अवगत कराने, आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य यह संस्कार करता है।  
  14. समावर्तन संस्कार (स्नातक) – गुरुकुल से विदाई के पूर्व यह संस्कार किया जाता है। हमारे पूर्वज भी शिक्षा के अंत का जश्न समावर्तन संस्कार के रूप में मनाते थे।
  15. विवाह संस्कार – निस्संदेह, विवाह किसी के भी जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसे दुनिया भर में विभिन्न संस्कृतियों के आधार पर मनाया जाता है।
  16. अन्त्येष्टि संस्कार (अंतिम संस्कार ) – यह किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद किया जाने वाला अंतिम संस्कार (Antim Sanskar) है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन क्या हैं?

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन गर्भ के चौथे, छठे और आठवें महीने में किया जाता है। इस समय बच्चा गर्भ में बढ़ता है और सीखने योग्य बनता है। अच्छे गुण, स्वभाव और कर्मों का ज्ञान कराने के लिए माता जैसा आचरण, व्यवहार और आचरण करती है, वैसा ही व्यवहार माता करती है। इस दौरान माता को शांत और प्रसन्न रहकर अध्ययन करना चाहिए।

इस पूजन में पति अपनी पत्नी के ‘बालों को अलग करता है’ यह संस्कार माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए किया जाता है। यह संस्कार आधुनिक बेबी शॉवर (Baby Shower) के समान है जहाँ जोड़े के रिश्तेदार मिठाई, नमकीन और ऐसी चीजें उपहार में देते हैं जिनकी बच्चे को जन्म के बाद ज़रूरत हो सकती है। इस सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन को गोद भराई तथा बेबी शॉवर के नाम से भी जाना जाता है।

इस संस्कार में परिवार के करीबी सदस्यों और दोस्तों को शामिल किया जाता है जो माँ को उपहार देकर और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को आशीर्वाद देकर विशेष महसूस कराते हैं। चूँकि गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने बहुत कठिन होते हैं, इसलिए यह अनुष्ठान उसे उसकी चिंताओं से मुक्त करता है और उसे आराम करने व आनंद लेने का समय देता है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन का समारोह

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन को आम भाषा में गोदभराई भी कहा जाता है। इस संस्कार में घर की महिलाओं के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन के लिए एकत्रित होते हैं। एक पूजा का आयोजन किया जाता है और सभी लोग बच्चे और माँ के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।

समारोह में शामिल होने वाले मेहमान और रिश्तेदार गर्भवती माँ के लिए उपहार लाते हैं। सभी लोग अच्छे आचरण और महान गुणों वाले बच्चे को जन्म देने के लिए माँ को आशीर्वाद देते हैं।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन करने के लिए सर्वोत्तम समय और दिन क्या है?

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन करने के लिए सुबह से दोपहर तक का समय सर्वोत्तम होता है। सीमन्तोन्नयन संस्कार शुक्ल पक्ष में ही करना चाहिए क्योंकि यह समय इस संस्कार के लिए शुभ माना जाता है। सीमन्तोन्नयन संस्कार कभी भी राहु काल में नहीं करना चाहिए। सीमंतोन्नयन संस्कार के लिए मृगशिरा, पुष्य, श्रवण, हस्त, उत्तरा, रोहिणी और रेवती नक्षत्र सर्वोत्तम माने जाते हैं।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री

सप्ताह के दिनों की बात करें तो गुरुवार, रविवार और मंगलवार को सीमन्तोन्नयन संस्कार करने के लिए शुभ माना जाता है। प्रथमा, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशही और त्रोदशी तिथियाँ इस संस्कार के लिए सर्वोत्तम तिथियाँ मानी जाती हैं।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन विधि

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन गर्भवती माँ की मानसिक भलाई सुनिश्चित करने के इरादे से किया जाता है। इसके अलावा, यह शारीरिक लाभ भी साबित हुआ है जो माँ और बच्चे को समग्र सहायता और खुशी के साथ सुरक्षा की भावना देता है।

तैयारी

यह समारोह गर्भवती माँ को आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देने के लिए आयोजित किया जाता है। घर को साफ-सुथरा करके समारोह की तरह सजाया जाता है और अच्छे अनुष्ठानों का पालन करने के लिए माहौल तैयार किया जाता है।

पूजा

पुजारी देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस प्रकार की पूजा करते हैं। भगवान को फल, मिठाई, फूल और बहुत कुछ जैसे कई सामान अर्पित किए जाते हैं। पुजारी विकासशील बच्चे के लिए एक भजन सुनाना पसंद करते हैं और विकृति के साथ पैदा हुए बच्चे को आशीर्वाद देते हैं। दंपत्ति मिलकर भगवान ब्रह्मा और सोम की प्रार्थना करते हैं।

यहाँ अग्नि को आमंत्रित करने के लिए कई मंत्रों का जाप किया जाता है ताकि बच्चे को मृत्यु के भय से मुक्ति मिले। दंपत्ति द्वारा तीक्ष्ण, बौद्धिक और दानशील चरित्र वाले पुत्र की प्राप्ति की इच्छा को पूरा करने के लिए विशेष रूप से भगवान रक्खा का जाप किया जाता है।

बालों को अलग करना

इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य पति द्वारा पत्नी के बालों को अलग करना है। यह दोनों के बीच प्रेम और देखभाल को दर्शाने के लिए किया जाता है। सीमन्तोन्नयन संस्कार से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए ये सभी क्रियाएँ दिव्य मंत्र का जाप करते हुए की जाती हैं।

मंत्र और आशीर्वाद

स्वस्थ शिशु की कामना के साथ भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। साथ ही, परिवार के बड़े सदस्य और अन्य रिश्तेदार भी गर्भवती माँ को आशीर्वाद और शुभकामनाएँ देते हैं।

उपहार और भोजन

गर्भवती माँ को कुछ नए कपड़े और गहने दिए जाते हैं। माँ के लिए एक विशेष प्रकार का भोजन तैयार किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से वे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जो गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होते हैं।

सामाजिक समारोह

यह समारोह रिश्तेदारों, दोस्तों आदि को सामाजिक रूप से एकत्रित होने का अवसर प्रदान करता है। यह निश्चित रूप से बच्चे के आगमन का अवसर प्रदान करता है। यह वास्तव में माँ के लिए एक सहायक वातावरण तैयार करेगा।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री

  • गणेश जी की मूर्ति
  • पूजा चौकी
  • पूजा चौकी के लिए कपड़ा
  • कलश, आचमनी
  • हवन कुंड
  • हवन के लिए घी
  • पके हुए चावल
  • दूर्वा
  • फूलों की 2 मालाएं
  • सिक्के
  • सिंदूर
  • रंगोली
  • पान के पत्ते
  • हल्दी पाउडर
  • बादाम
  • तेल का दीपक
  • कपूर
  • तुलसी के पत्ते
  • दिवाली की धानी
  • हाथ में बांधने के लिए पंचरंगी धागा
  • गूलर के फल से माला बनाने के लिए भीगा हुआ गेहूं
  • आसन
  • तांबे की थाली
  • छोटा गिलास
  • हवन के लिए लकड़ी और गोबर
  • आम के पत्ते
  • नारियल
  • 5 प्रकार के फल
  • अष्टगंध
  • सफेद रूमाल
  • सुपारी
  • पीले सूखे खजूर
  • बेल पत्र
  • घी का दीपक
  • धूपबत्ती

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन का महत्व

इस पूजा का महत्व शिशु और माँ के स्वस्थ और सुरक्षित विकास की कामना करना है। सीमन्तोन्नयन संस्कार का वर्णन अनेक गृहस्थ ग्रंथों में मिलता है।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन गर्भावस्था के छठे से आठवें महीने के बीच किया जाता है। इस संस्कार को करने से पहले यह अवश्य जांच लें कि आप गर्भावस्था के किस महीने में हैं । इस दौरान गर्भ में पल रहा शिशु माँ के गर्भ में शारीरिक और मानसिक रूप से विकसित हो रहा होता है।

दोनों में सबसे आम तत्व है पति-पत्नी, दोस्तों और परिवार के साथ मिलना-जुलना। यहां पति अपनी पत्नी के बालों को कम से कम तीन बार बांटता है। लेकिन आज के समय में लोग इन रीति-रिवाजों का पालन कम ही करते नजर आते हैं।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन सामग्री

वर्तमान समय में इसे गोद भराई तथा बेबी शॉवर के नाम से जाना जाता है और यह गर्भावस्था के आठवें महीने के आसपास किया जाता है। गर्भावस्था के अंतिम चरण के लिए गर्भवती माँ को फल, फूल आदि अर्पित किए जाते हैं। इस अनुष्ठान का बहुत महत्व है और यह शिशु स्नान की तुलना में समान विशेषताओं का पालन करता है।

परिवार के सदस्य और रिश्तेदार गर्भवती माताओं की भोजन संबंधी सभी इच्छाओं को स्वीकार करते हैं और उन्हें संतुष्ट करते हैं। साथ ही, वे गर्भावस्था के 8वें महीने में मां के साथ-साथ बच्चे को भी उपहार देते हैं। यह गर्भवती महिलाओं की सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए सिद्ध और अनुशंसित है जो बच्चे के स्वस्थ विकास को बढ़ावा देता है।

साथ ही, सकारात्मक दृष्टिकोण और प्रसन्न मन गर्भपात की संभावनाओं को रोक सकता है। इन अनुष्ठानों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे भगवान भारती, वल्लिकप्पेन, सीमांत और भी बहुत कुछ।

सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन के लाभ

सीमन्तोन्नयन संस्कार को हिंदू परंपरा में वर्णित सोलह संस्कारों में से सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। गर्भावस्था के आठवें महीने तक किसी भी समय प्रतीक्षित मां के लिए अनुष्ठान की योजना बनाई जाती है। आइए निम्नलिखित सीमन्तोन्नयन संस्कार से प्रतीक्षित माँ और बच्चे को मिलने वाले विशेष लाभों की जाँच करें।

माँ और बच्चे की सुरक्षा

ऐसा माना जाता है कि इससे मां के साथ-साथ बच्चे को भी दैवीय आशीर्वाद और सुरक्षा मिलती है। इसके अतिरिक्त, ये अनुष्ठान माँ को किसी भी बुरी आत्माओं या नकारात्मक प्रभावों से बचाने में सबसे अच्छा काम करते हैं।

मानसिक और भावनात्मक समर्थन

अनुष्ठान स्वाभाविक रूप से माँ को बच्चे को बेहतर तरीके से पालने के लिए भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह अनुष्ठान मां के उचित मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए परिवार और समुदाय को एक साथ लाता है।

सकारात्मक वातावरण

यह समारोह माँ के लिए एक खुश और शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करने पर मुख्य ध्यान देने के साथ किया जाता है। इससे माँ और बच्चे दोनों के मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक वृद्धि होगी।

स्वास्थ्य और अच्छाई

इस प्राचीन अनुष्ठान में कई प्रार्थनाएँ शामिल होती हैं जो समारोह में की जाती हैं। यह माँ और बच्चे के स्वस्थ स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है।

पारिवारिक संबंधों को मजबूत करना

यह समारोह परिवार को माँ के लिए नैतिक समर्थन प्राप्त करने के लिए एकजुट होने के लिए मजबूत बनाता है। यह प्रक्रिया वास्तव में माँ को उसकी गर्भावस्था यात्रा के दौरान पोषित और प्यार का एहसास कराएगी।

आध्यात्मिक विकास

इन अनुष्ठानों का उद्देश्य शिशु के आध्यात्मिक विकास को निर्देशित करना है। यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए आध्यात्मिकता की भावना और मूल्यों को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका है।

निष्कर्ष – Conclusion

गर्भावस्था के दौरान माँ अपने आस-पास से जो कुछ भी ग्रहण करती है और जिस तरह से व्यवहार करती है, उसका सीधा असर बच्चे के व्यवहार और आचरण पर पड़ता है। कहा जाता है की सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु ने महाभारत के चक्रव्यूह को भेदना अपनी माँ के गर्भ में ही सीख लिया था। अष्टावक्र ने भी गर्भ में ही शिक्षा प्राप्त कर ली थी। भक्त प्रह्लाद ने जन्म से पहले ही भगवान विष्णु की पूजा शुरू कर दी थी।

हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है कि सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन के समय तक गर्भ में पल रहा शिशु सीखने और जानकारी को ग्रहण करने में सक्षम हो जाता है। इसलिए माँ के लिए अपने आचरण और वाणी पर संयम रखना ज़रूरी है। सीमन्तोन्नयन संस्कार करने से गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ रहता है।

यदि आप सीमन्तोन्नयन संस्कार पूजन को करने के इच्छुक हैं और आपको नहीं पता कि इसे कैसे करना है। तो हमारी 99Pandit की टीम आपकी मदद करेगी।

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Top 10 Online Platforms for Purchasing Pooja Samagri or Products

Online Platforms for Purchasing Pooja Samagri or Products: In India, pooja items are in great demand since they are going to be used for both personal and community worship. Pooja samagri is also termed a religious offering that is inseparable from Hindu rituals and worship practices.

These items are put into use in several ceremonies, festivals, and daily prayers for the sake of honouring deities and blessings. Puja-related service providers like 99Pandit e-commerce platforms became a gateway for more convenient and accessible purchase of pooja samagri that includes everything from incense sticks, diya lamps, idols, and holy books to ritual accessories.

Online Platforms for Pooja Products

For millions of Indians, pooja, or worship, is the most integral part of their lives. From daily rituals to festival celebrations, pooja samagri forms an essential part of these spiritual practices.

In this article with 99Pandit, we talk to you about the “Top 10 Online Platforms for Purchasing Pooja Samagri or Products” in India, from where you can buy pooja samagri and religious products to easily maintain your spiritual practice.

Top 10 Online Platforms for Purchasing Pooja Samagri or Products

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3. Flipkart

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They sell readymade pooja kits that are specific to a particular festival, like Diwali, Ganesh Chaturthi and Navratri, among others. Flipkart goes great on festival sales campaigns and sells those pooja-related items at a pretty good discount.

4. Shubh Pooja

ShubhPooja is a niche-based site providing all pooja samagri and services available in the market. This website caters to worshippers who make poojas for themselves as well as others who need professional pooja services.

It has offerings such as customized pooja kits for different rituals, festivals, and religious ceremonies. You can order priests from ShubhPooja to conduct pooja ceremonies or homams either online or offline.

It provides an array of authentic, high-quality pooja items sourced from traditional manufacturers. ShubhPooja also includes a vast collection of deities’ idols and statues in brass, silver, and marble.

5. Pooja Shop

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PoojaShop also offers pooja kits pre-packed by time and festivals. It indeed ships products across the world, thereby catering to devotees who stay abroad with it, hassle-free returns and exchanges for a seamless shopping experience.

6. Vedic Pooja

VedicPooja is an online niche selling spiritual products that revolve around the Vedic and tantric processes. The site specializes in pooja samagri and sacred offerings used during the traditional Hindu worship process.

Important features include puja samagri & rituals, products such as incense, herbs, camphor, dhoop sticks, and Vedic yajna materials.

Various gods, such as Lord Vishnu, Shiva, and Lakshmi, are made of brass and copper. VedicPooja offers customized puja services through homes, pujas, and spiritual rituals on the platform after booking. For VedicPooja, pure products from trusted suppliers are an absolute necessity.

7. Rudra Centre

Rudra Centre is an e-shop appearing as pooja samagri and spiritual products like rudraksha, beads, gemstones, and yantras. The website serves customers seeking sacred products linked to their spiritual pursuits.

Rudra Centre offers a unique collection of spiritual jewellery, including rudraksha malas, energizing gemstones, and yantras. In addition, there is an extensive range of Pooja thalis, incense, diya lamps, and ritual items such as sacred powders and oils.

Book online poojas and homas performed by trained priests are also available for various occasions. This platform is traditional and authentic, focusing more on high-quality traditional products that are according to Vedic customs.

8. Gita Press

Gita Press is a very renowned name in Hindu spirituality because it is mainly known for printing sacred texts. Although this establishment primarily deals with spiritual books, it also offers pooja samagri besides religious articles.

Gita Press is commonly known for its various publications, including the Bhagavad Gita and Ramayana. The website also caters to the most essential pooja samagri, including incense sticks, pooja thalis, and other valid dhaan.

It is a site that offers books, pooja items, and spiritual products that are related to Hinduism. Gita Press sells the respective products at economical price ranges. They are cheap compared to other websites. It is another portal through which one can easily get the wanted product.

9. Matrushakti

Matrushakti is a unique platform offering pooja samagri, spiritual items, and services related to the worship of the Goddess Durga, Lakshmi, and other deities. The website provides pooja kits, idols, and accessories dedicated to goddesses such as Durga, Lakshmi, and Saraswati.

Matrushakti is an online portal that provides personalized pooja and homa services for all those devotees who wish to experience the divine feminine energy. The service has ensured that all products sold are genuine and traditional, as they were sourced from prominent manufacturers.

10. Sri Diya

Sri Diya is one of the online shops that deals in a wide variety of pooja products. There, many pooja accessories can be observed. It’s a user-friendly online shop with a reasonable price.

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Conclusion

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Vivah Pujan Samagri List: विवाह पूजन सामग्री लिस्ट

विवाह एक पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है जो हमारे समाज का मूल आधार है। हिन्दू धर्म में विवाह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे विभिन्न रस्मों और पूजाओं के साथ सम्पन्न किया जाता है। इसके अंतर्गत, कन्या पक्ष विवाह पूजन महत्वपूर्ण अवसर है जिसमें परिवार के लोग कन्या के विवाह की पूजा करते हैं और उसे आशीर्वाद देते हैं। पूजन हेतु विवाह पूजन सामग्री की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है

विवाह पूजन (Marriage Puja) संस्कार हिन्दू धर्म में अपनाया जाने वाला महत्वपूर्ण संस्कार है | इस पूजन में, विवाह वाले दिन के पहले वाले  दिन, वर का पूजन किया जाता है| वर  पूजन में विवाहीत मंत्रों के साथ, सामग्री का महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

विवाह पूजन सामग्री

विवाह पूजन सामग्री का चयन पूजा के सफलतापूर्वक पूरा होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सामग्री भक्ति और पूजन के दौरान उपयोग की जाती है और विवाह में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का संकेत है।

यह भी ज्ञात रहे की विवाह पूजन सामग्री को पंडित जी के माध्यम से तैयार करना आवश्यक होता है। पूजा के पहले ध्यान से सभी सामग्री को सजाएं और विवाह के दिन आवश्यकतानुसार उपयोग करें । पूजा के बाद, इन सामग्रियों को एक सुरक्षित स्थान पर संग्रहीत करें या उन्हें धर्मिक उपयोग के लिए बचाएं।

हम 99पंडित विवाह पूजन सामग्री की व्यवस्था के इस महत्व को भली- भांति समझते है| साथ में विवाह या शादी के बारे में सटीक जानकारी रखते है जिससे की विवाह जैसे महात्याग (वर व वधु के लिए) में उचित सामग्री प्रबंधन हो सके जिससे विवाह को वैदिक- विधि से सम्पन्न कराये तो उसमे कोई वैवधान ना आये|

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हम 99 पंडित पेशेवर और अनुभवी पंडितो की ऐसी टीम है जो कन्या पक्ष विवाह पूजन के लिए आपको पंडित सेवा का मौका देते  है , साथ ही इस पूजन में पूजन का वास्तविक अनुभव प्रदान करता है|

99पंडित प्लेटफार्म के माध्यम से आप आसानी से अपना पंडित घर बैठे बुक कर सकते है इसके लिए आपको “बुक ए पंडित” विकल्प का चयन करना होगा | अपनी सामान्य  जानकारी का विवरण , जैसे नाम, मेल, फ़ोन नंबर , तिथि , तथा पूजा का चयन कर आप अपना पंडित आसानी से बुक कर सकते है|

आप हमें व्हाट्सप्प के माध्यम से भी पंडित बुकिंग सम्बंधित समस्त जानकारी ले सकते है इसके लिए हमारा संपर्क नंबर 8005663275 रहेगा | इस ब्लॉग का हमारा यानी 99 पंडित का उद्देश्य आपको  विवाह पूजन सामग्री हेतु आपको सही व सटीक जानकारी देना है |

वर पक्ष हेतु विवाह पूजन सामग्री

सामग्री  मात्रा
रोली  50 ग्राम 
कलावा (मौली)  4 पैकेट 
सिंदूर  1 पैकेट 
लौंग  1 पैकेट 
इलायची  1 पैकेट 
सुपारी   20 नग 
हल्दी खड़ी  11 नग 
हल्दी पीसी  150 ग्राम 
गंगाजल  1 बोत्तल 
शहद  1 शीशी 
इत्र  1 शीशी 
गरिगोला  1 शीशी 
लाल कपडा  1 मीटर 
पीला कपडा  1 मीटर 
सरसो का तेल  1 लिटर 
गाय  का घी  500 ग्राम 
धूपबत्ती  1 पैकेट 
कपूर  100 ग्राम 
रूईबत्ती गोल वाली  1 पैकेट 
रुई बत्ती लम्बी  1 पैकेट 
जनेऊ  5 नग 
पञ्चमेवा  200 ग्राम 
हवन सामग्री  500 ग्राम 
नवग्रह चावल  1 पैकेट  
नवग्रह समिधा  1 पैकेट 
बताशा  200 ग्राम 
कोहबर चार्ट  1 नग 
कंकन  1 नग 
आम की सविधा  2 किलो 
दोना  1 गड्डी 
पीला, या गुलाबी दुप्पटा,(गठबंदन हेतु )   1 नग 
जौ (कलश गोठने के लिए )  100 ग्राम 
कलश सजा हुआ बड़े साइज का  1 नग 
कलशी देव पितृ निमंत्रण हेतु  4 नग 
सकोरा  5 नग 
दियाळी  20 नग 
खम्भ सजा हुआ  1 नग 
डीवट एवं माईमोरी (कुशा बण्डल )   1 नग 
सजा हुआ कनस्तर (खम्भ गाड़ने वाला ) 1 नग 
बांस की छड़ी  1 नग 
धान का लावा (खिल ) 250 ग्राम 
लोहे  के छल्ले 
उड़द की दाल  500 ग्राम 
डाल सजी हुई 
सिंधौरा -सिन्धोरि एवं माँग भरने हेतु 
सिन्दूर लाल रंग या पिले रंग का  (जो आपके यहाँ चलता हो )  
चौकी या पीढा वर के लिए  1 नग 
तांग -पाट (चाँदी या श्वर्ण या फिर साधारण )
मोरि वधु के लिए  1 नग 
घुंघरू वाला रक्षा सूत्र (सील पोहं के समय महिलाओ को बांधने हेतु )
बालू खम्भ गाड़ने के लिए 
मिटटी के चूल्हे  2 नग 
आम का पल्लव  1 नग 
पान का पत्ता  11 नग 
फूल पत्ते  4 नग 
फूल माला  500 ग्राम 
फूल  500 ग्राम 
फल एवं मिष्ठान आवश्यकतानुसार 
दूध व् दही (सत्यनारायण भगवन की कथा सुन्न्नी हो तो ) 
हरी दुब घास 
तेल (चढ़ाने हेतु ) 

विशेष :- शेष दाल दलना , धान कूटना ,उभटन लगाना, व लोकाचार हेतु आपके लिए पंडित जी से राय लेना भी उचित रहेगा|

Vivah Pujan Samagri

कन्या पक्ष हेतु विवाह सामग्री

सामग्री  मात्रा
रोली  1 पैकेट
कलावा  3 पैकेट 
सिंदूर  1 पैकेट
लौंग 1 पैकेट
इलायची  1 पैकेट
सुपारी  11 नग 
गरिगोला  3  नग
शहद  1 शीशी 
इत्र  1 शीशी 
गंगाजल  1 शीशी 
पीला कपड़ा  सवा मीटर 
लाल कपडा  आधा मीटर 
धूपबत्ती  1 पैकेट 
कपूर  50  ग्राम 
देशी घृत  500 ग्राम 
नवग्रह चावल  1 पैकेट 
हल्दी खड़ी  7 नग 
हल्दी पीसी  100 ग्राम 
जनेऊ  7 नग 
सकोरा  5 नग 
मिट्टी के दिये  20 नग 
पीली सरसों  50  ग्राम 
हवन सामग्री  500 ग्राम  
आम की लकड़ी  2 किलो 
पंचमेवा  200  ग्राम  
जौ 50 ग्राम 
सरसो का तेल  500 ग्राम 
बताशा 250 ग्राम 
कोहबर चार्ट  1 नग 
कंकन 1 नग 
गुड़  200 ग्राम 
हवन कुण्ड  1 नग 
कलश सजा हुआ बड़े साइज का  1 नग 
कलशी देव पितृ निमंत्रण हेतु  4 नग 
खम्भ सजाया हुआ  1 नग 
डीवट एवं माई मोरी (कुशा बंडल ) 1 नग 
कनस्तर सजा हुआ (खम्भ गाड़ने वाला ) 1 नग 
धान का लावा (खिल ) 200 ग्राम 
लोहे  के छल्ले 7 नग 
चौकी सजी हुई वर एवं वधु के लिए  2 नग 
लोटा एवं थाली धातू की पैर पूजने के समय  1 नग 
आम का पल्लव  5 नग 
फूल एवं फूल माला  5 नग 
पान के पत्ते  11 के पते 
हरी-हरी दूर्वा (घास) 
बालू खम्भ गाड़ने के लिए  15 किलो 
कथा अगर हो तो पंचामृत और पंजीरी की व्यवस्था 
सिल पोहन हेतु धूलि उड़द  500 ग्राम 
फल एवं मिठाई आवश्यकतानुसार 

कन्या पक्ष हेतु तिलक समारोह में आवश्यक विवाह पूजन सामग्री 

लगन पत्रिका , जटावाला सूखा नारियल , बड़ा थाल, बड़ी वाली सुपाड़ी , खड़ी हल्दी ,पीला कलर किया हुआ चावल ,चन्दन लकड़ी , सात मीटर श्वेत कपडा थाल लगाने वाला |

विशेष:- कन्या पक्ष विवाह पूजन सामग्री को ध्यान में रखते हुए इसे संगठित और सुन्दर रूप में तैयार किया जाना चाहिए। यह पूजन सामग्री किसी पंडित जी की सलाह लेकर तैयार की जाती है। 

विवाह पूजन व  विवाह पूजन सामाग्री का महत्व

विवाह पूजन हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसमें विवाहित जोड़े भगवान के आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं और उनके विवाहित जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। यह पूजन उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है।

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परिवारिक महत्व

विवाह पूजन एक परिवारिक आयोजन है जो परिवार के सभी सदस्यों को एकता और सम्बंधों की आपस में जोड़ता है। इस आयोजन से  परिवार के लोगों को भाग लेने का अवसर मिलता है और वे एकजुट होकर विवाहित जोड़े के भविष्य की मंगलकामनाएं करते हैं। 

सामाजिक महत्व

विवाह पूजन सामाजिक महत्वपूर्णता रखता है क्योंकि इसमें परिवार के सदस्यों, दोस्तों और समुदाय के लोगों को एकत्रित करने का अवसर मिलता है। विवाह समारोह के दौरान वर पक्ष विवाह पूजन आयोजित किया जाता है और इसका महत्वपूर्ण अंग होता है। इससे सामाजिक बंधन बनते हैं और समुदाय में एकता और सद्भाव का संदेश दिया जाता है।

आध्यात्मिक महत्व

विवाह पूजन आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसमें विवाहित जोड़े भगवान की कृपा और आशीर्वाद का आह्वान करते हैं। यह पूजा उन्हें धार्मिक आदर्शों को स्वीकार करने, धार्मिक साधनाओं को अपनाने और ध्यान को स्थिर करने की प्रेरणा देती है। विवाह पूजन सामग्री का महत्व और भी अधिक हो जाता  है जब आप पूजन जैसी क्रिया को पूर्ण अध्यत्मिता व श्रद्धा के साथ करवाते हो| 

पंडित बुक कैसे करे 

99Pandit की ऑनलाइन पंडित सेवा के माध्यम से आप अपना पंडित घर बैठे बुक कर सकते है | जिसके लिए आपको वेबसाइट के “बुक ए पंडित” बटन (Option) का चयन करना होगा जहाँ पर आपको अपनी पूजा के चयन से सबन्धित सामान्य जानकारी का विवरण  जैसे आपका नाम, आपकी जीमेल, आपका फ़ोन नंबर, तिथि, आपका निवास स्थान जहाँ  पूजा को संपन्न करवाना है का चयन करके अपना पंडित ऑनलाइन बुक कर सकते है| 

99पंडित अनुभवी व् पेशेवर पंडितो की एक ऐसी टीम है जो आपको किसी भी धार्मिक- अनुष्ठान को संपन्न करवाने का वास्तविक अनुभव प्रदान करवाते है| अतः आप विवाह पूजन सामग्री की व्यवस्था 99पंडित पर मौजूद पंडित के साथ विचार- विमर्श करके भी कर सकते है|  

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.विवाह क्या है ?

A.शास्त्रों के अनुसार विवाह अथवा शादी दो लोगो के बीच का परिवारीक , सामजिक, व अध्यात्मीक मिलन है|

Q.विवाह का मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

A.वैदिक शास्त्रों के अनुसार विवाह के मुख्यत ३ उद्देश्य है विवाह का पहला उद्देश्य पति व पत्नी का साहचर्य के साथ रहना , दूसरा उद्देश्य संतानोत्पति व अंतिम उद्देश्य पति – पत्नी ईश्वर की योजना के प्रति प्रतिबद्ध  होते है व ईश्वर को साथी मानते हुए, एक दूसरे के प्रति पाप- पुर्ण्य का लेखा – जोखा रखते हुए, मोक्ष को प्राप्त  करना है|

Q.विवाह का मंत्र क्या है?

A.‘ॐ सृष्टिकर्ता मम विवाह कुरु कुरु स्वाहा” मन्त्र द्वारा विवाह की शुरुवाती पूजा सम्पन्न करवाई जाती है|

Q.विवाह कितने प्रकार का होता है ?

A.शास्त्रों में हमें ब्रह्म, दैव, आर्य, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच विवाह के 8  प्रकार बताये गए है|

Diwali Puja Samagri List: दीपावली पूजन सामग्री की सम्पूर्ण सूची

सनातन धर्म संस्कृति की बात की जाये तो इसमें दीपावली सबसे प्रमुख त्योहार है | दीपावली के दिन भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी की पूजा घर में की जाती है | यह त्यौहार हिन्दू मास के कार्तिक महीने की अमावस्या को बड़ी – धूम -धाम के साथ मनाया जाता है | पूजन क्रिया में दीपावली पूजन सामग्री का बहुत महत्व है|

दीपावली भगवान श्री राम के आयोध्या के सकुशल घर वापिस लौटने से जुड़ा हुआ त्योहार है | इस दिन भगवान राम की स्तुति घरो, मंदिरो, आदि में की जाती है | तथा मिठाई, दुग्ध  का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है|

इसमें दीपावली पूजन सामग्री का प्रयोग पंडित जी के निर्देशानुसार किया जाये, व हवन सामग्री पूर्ण शुद्ध व पवित्र हो इस बात का भी विशेष ध्यान यजमान द्वारा रखा जाता है|

दिवाली पूजन सामग्री

अगर आप चाहते है की लक्ष्मी जी के साथ – साथ भगवान कुबेर का आशीर्वाद आपके घर में बना रहे तो इसके लिए आपको इस धार्मिक – अनुष्ठान को पुरे रीती- रिवाज के साथ करना चाहिए| इसका लाभ यह होता है की पूजन से आपके घर में आर्थिक मंदी का जो प्रभाव पड़ रहा है वो कम हो जायेगा और आपको शीघ्र धन की प्राप्ति सम्भव है|

चलो,  हम बिना देरी के अपने भक्तों को दीपावली पूजन सामग्री के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते है, जो आपके पूजन संपन्न कराने में काम में आएगी|

दीपावली पूजन सामग्री की सूची

निम्नलिखित तालिका में दीपावली पूजन सामग्री की वस्तुओं के नाम एवं मात्रा दी गई है जो आपको पूजन करने पर चाहिए होती है| यह सूची इस प्रकार से है :-

वस्तु मात्रा
रोली 1 पैकेट
कलावा (मौली)  2 नग
सिंदूर 1 पैकेट
लौंग 1 पैकेट
इलायची 1 पैकेट
सुपारी  4 नग
जनेऊ 4 नग
शहद 1 शीशी
इत्र 1 शीशी
गंगाजल 1 शीशी
पानी वाला नारियल 1 नग
पीला कपडा 2 मीटर
धूपबत्ती 1 पैकेट
रूईबत्ती लम्बी वाली 1 पैकेट
रूईबत्ती गोल बत्ती 1 पैकेट
घी 500 ग्राम
सरसो का तेल 500 ग्राम
दियाळी 1 नग
सकोरा 10 नग
कमल बीज 11 नग
पंचमेवा 200 ग्राम
धान की खील 200 ग्राम
धान का चुरा 200 ग्राम
खील खिलोने 200 ग्राम
लक्ष्मी गणेश प्रतिमा
लक्ष्मी यंत्र 1 नग
भगवान् के वस्त्र एवं आसान
पंचामृत की व्यवस्था पहले से निर्माण करे
माचिस 1 नग
कपूर 1 पैकेट
फल (अनार सरीफा विशेष एवं अन्य फल)
मिष्टान आवश्यकतानुसार
फूलमाला
फूल खुले 20 रूपये
पान पते 5 नग
कमल आवश्यकतानुसार जो वर्षभर  प्रयोग कर सके
नवीं (कॉपी एवं किताब आवश्यकतानुसार)

 

कुबेर की पोटली हेतु  निर्माण सामग्री

वस्तु मात्रा
माचिस 1 पैकेट
गोमती चक्र 5 नग
कोढ़ी 11 नग
खड़ी धनिया 50 ग्राम
सुपाड़ी 11 नग
कमलबीज 11 नग
धुंधची 11 नग
चाँदी अथवा सवर्ण सिक्का 3 नग
पोटली 1 नग

दी गयी सामग्री का उपयोग यदि वैदिक पंडित के परामर्श अनुसार किया जाये तो आपको दीपावली पूजन से होने वाली लाभ से कोई वंचित नहीं कर सकता|

दीपावली पूजन सामग्री के बारे में आप हमारे पंडित के माध्यम से और अधिक जानकारी ले सकते हो, तथा अपने सुझाव भी 99Pandit के साथ साझा कर सकते हो|

दीपावली पूजन का मुहूर्त २०२४ में 

इस वर्ष यानि २०२४ में  दीपावली पूजन अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को  दोपहर 03 :52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानि 01 नवम्बर को शाम के 06:16 तक रहेगी |

दीपावली पूजन सामग्री

चूँकि प्रदोष काल पूजन हेतु शुभ माना जाता है यह इस साल 2024 में 01 नवम्बर को रहेगा और इस दिन दीपावली पूजन करना शुभ रहेगा| प्रदोष काल वर्ष 2024 में 01 नवम्बर को ही शाम के समय समाप्त हो जायेगा| मुहूर्त के समय दीपावली पूजन सामग्री की व्यवस्था एक बार अवश्य सुनिश्चित कर लें|

दीपावली पूजन मंत्र

दीपावली पूजन के दौरान हमें निम्न मंत्र के उच्चारण द्वारा लक्ष्मी जी का आह्वान कर सकते है

|| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

इसके अतिरिक्ति दीपावली के दिन आप यदि निचे दिए हुए मन्त्र का १०८ बार उच्चरण करते है तो यह आपके लिए शुभ होगा| यह मंत्र है –

||  ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः:।।

दीपावली पूजन करने से होने वाले लाभ

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ऐसा समझा जा सकता है की दीपावली पूजन से धन और वैभव प्रदान करने वाली लक्ष्मी जी के साथ साथ धन को स्थायित्व प्रदान करने वाले भगवान कुबेर की कृपा हमें प्राप्त होती है|

दीपावली पूजन सामग्री यदि पूर्ण शुद्ध व पवित्र हो तो इसमें प्रयुक्त होने वाले कपूर के उपयोग से विभिन्न प्रकार के रोगकारक जीवाणुओं का नाश होता है साथ ही वातावरण में शुद्धता का असर दिखाई देता है|

दीपावली पूजन के दौरान ध्यान रखी जाने वाली बातें 

दिवाली पूजन के दौरान हमें निम्न बातो का पता होना चहिये जैसे की –

    • दीपावली पूजन के समय अपना ध्यान केवल भगवान की सच्चे मन की गयी पूजा  उपासना में होना चाहिए तथा जब आप पूजा कर रहे हो तब हल्की से मुस्कान अपने मुख पर रखे|
    • अगर पूजन की दौरान किसी प्रकार की पूजन सम्बन्धित कोई त्रुटि हो जाये तो क्रोधित बिलकुल न होये | ऐसा न करके आप त्रुटि होने पर भगवान से क्षमा – याचना कर सकते है| इससे भगवान आपको क्षमा कर देते है|
    • दीपावली पूजन के दौरान लक्ष्मी पूजन के बाद एकाक्षी नारियल का पूजन करना आपके लिए शुभ होता है, पूजन के बाद इस नारियल की पिले वस्त्र में लपेटकर पूजा स्थल पर रख दें|
    •  दीपावली पूजन के बाद हर कमरे में  शंख बजाना चहिये जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर की चारो दिशाओ में होता है|
    • दीपावली पूजन सामग्री पूर्ण शुद्ध हो यह अति आवश्यक है|

दीपावली पूजन के दौरान मूर्तियों को कैसे बैठाये

दीपावली पूजन के दौरान मूर्तियों के सही तरीके से बैठाने सम्बन्धित अगर प्र्शन आपके मन में है तो हम 99Pandit आपके इस संशय को दूर कर देते है|

सबसे पहले आप लक्ष्मी जी की मूर्ति भगवान गणेश जी के दाहिने और देखती हुई स्थापित करें | साथ में यह भी ध्यान रखे की माँ लक्ष्मी जी का मुख थोड़ा सा गणेश की और देखता हुआ हो|

इसके बाद भगवान विष्णु जी की मूर्ति या चित्र को माँ लक्ष्मी के दायी ओर स्थापित करे| लक्ष्मी के बायीं और श्री गणेश की मूर्ति लगाये|

अर्थांत इसको क्रमशः करने पर हम देखते है की इसमें सबसे पहले विष्णु जी मध्य में विराजमान लक्ष्मी जी और उसके बाद गणेश जी की मूर्ति एक क्रम में लगी रहती है|

निष्कर्ष

अगर आप दीपावली पूजन हेतु पंडित जी की तलाश में व्यस्थ है तो | आपको बता दे की 99Pandit पंडित बुकिंग की सर्वश्रेष्ठ सेवा है जहाँ आप घर बैठे मुहूर्त के हिसाब से अपना पंडित ऑनलाइन आसानी से बुक कर सकते हो|

यहाँ  बुकिंग प्रक्रिया बहुत ही आसान है| बस आपको “Book a Pandit” विकल्प का चुनाव करना होगा और अपनी सामने जानकारी जैसे की अपना नाम , मेल, पूजन स्थान , समय , और पूजा का चयन के माध्यम से आप आपना पंडित बुक कर सकेंगे|

इसके बाद यहाँ मौजूद अनुभवी पंडितो की टीम आपसे जल्द ही सम्पर्क कर लेगी| आप दीपावली पूजन सामग्री के अतिरिक्त विवाह पूजन सामग्री, दश महाविद्या पूजन सामग्री, अखंड रामायण पाठ पूजन सामग्री आदि की जानकारी 99Pandit के ब्लॉग अनुभाग (Section)  के द्वारा ले सकते है|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.दीपावली पूजा का मुल मंत्र क्या है?

A.दीपावली पूजा का मुल मंत्र :- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।। संस्कृत में – ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।।

Q.दीपावली पर लक्ष्मी गणेश की पूजा कैसे करें?

A.दीपावली पर लक्ष्‍मी-गणेश जी की पूजन के ल‍िए की मूर्तियां इस प्रकार रखें क‍ि लक्ष्‍मी के दायीं द‍िशा में गणेश रहें और यह भी ध्यान में रहे की उनका मुख पूर्व द‍िशा की ओर रहे। अब उनके सामने बैठकर चावलों पर कलश को रखे | इस कलश की स्थापना  वरुण के प्रतीक के रूप में कि जाती है अब इस कलश पर एक नार‍ियल को लाल वस्‍त्र में लपेटकर इस प्रकार रखें क‍ि केवल अग्रभाग ( आगे का मुख ) दिखाई दे। इसके अलावा दीपावली पूजन सामग्री में गणेश जी, विष्णु जी, माँ लक्ष्मी चित्र का विशेष ध्यान  रखें|

Q.धन के लिए लक्ष्मी की प्रार्थना कैसे करें?

A.“ ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पतया च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ” | आप इस मंत्र का उच्चारण धन प्राप्ति  हेतु कर सकते है|    

Q.दीवाली कब है ?

A.दीपावली (दिवाली) 12 नवम्बर अर्थांत रविवार को मनाई जाएगी|

Cotton Wick vs Wooden Wick Candles: Which One Is Better?

Cotton Wick vs Wooden Wick: If you have a strong interest in candles, you probably already know about the vast selection of candle types and options available on the market today, whether it is the varied selection of flask types or the option to choose between scented and unscented candles, each with its excellent qualities.

On the other hand, some difficulties occur with burning candles. If not carried out properly, various problems may occur and cause trouble.

Cotton Wick vs Wooden Wick Candles

Candle lovers might not be completely aware of these issues even if they may encounter them frequently. As a result, it is crucial to investigate and resolve these issues thoroughly.

What are Wood Wicks and Cotton Wicks?

Wood wicks are thin strips designed mostly for candlewicks. Depending on the candle’s needs, they can be crafted at variable widths and from various wood types.

On the other hand, our wood wicks are FSC-certified, indicating that they originate from ethically managed forests. We find the crackling sound that wooden wicks make when lit incredible. Like a fireplace, wood wicks are likelier to burn your wax evenly, which is another fantastic feature.

Furthermore, wood wicks produce a horizontal flame that warms your candle more quickly, extending its smell and slowing its burn. A horizontal flame more quickly extends heat to your candle and efficiently creates a strong scent in your space.

Cotton wicks are wax-dipped cotton strands that have been braided. They are far more general than wood wicks because they are easy to light and relight. Cotton wicks work well with all types of wax.

Traditionally, most cotton wicks are dipped in lead to provide a straighter and better throw, but not with our wicks. We utilize nontoxic 100% cotton wax that burns cleanly.

Cotton Wick vs Wooden Wicks

Cotton Wicks candles have always been a favourite among candle lovers. These wicks are made from high-quality cotton strands and are known for burning steadily. If you want to buy Cotton Wick, you can consider visiting shop.99pandit.com. Here are some essential features and advantages of cotton wick candles:

S.N Variety
1. Kesar – Cotton Wicks
2. White – Cotton Wicks
3. Chandan – Cotton Wicks

 

Pros of Cotton Wicks

Cotton wicks are great for candles for a few reasons. First, they burn evenly, keeping a steady flame throughout the candle’s life. This helps the wax melt properly and makes sure the scent spreads well.

Cotton wick candles are easy to find in stores and online, and they come in many colours, sizes, and scents. Trimming cotton wicks is simple and helps keep the flame just right for a smooth burn. Our blog has tips on how to trim your wicks and keep your candle in good shape.

Cotton wicks are also good for the environment. They are made from natural materials and are eco-friendly. They burn cleanly and last long without going out, especially ones like illuminated cotton wicks made entirely from cotton.

These can burn for up to 18 hours and produce no harmful fumes. If you enjoy long-lasting scents from your candles, cotton wicks are a great choice.

Cons of Cotton Wicks:

Cotton-wick candles have problems. One big issue is when carbon builds up on the wick, causing something called “mushrooming.” This makes the flame bigger, and the candle burns unevenly.

To fix this, you should trim the wick often to store too much mushrooming and keep the candle burning cleanly. shop.99pandit.com wicks are the best wicks you have ever seen.

Wooden Wick Candles

Wooden wicks have gained too much popularity among candle enthusiasts in recent years. These wicks are made from flat and thin pieces of wood, often Eco-friendly sourced.

Cotton Wick vs Wooden Wick Candles

The pros and cons of wooden wicks are essential to understand before buying them. So explore the excellent quality and more advantages of wooden wick candles:

Pros of Wooden Wicks

Wooden wicks are attractive for candles because they have several benefits. One crucial part is the soft crackling sound they make as they burn, which can improve the ambience and establish a peaceful mood in any area.

Furthermore, wooden wicks burn more slowly than traditional cotton wicks, extending the candle’s life. This is great for people who enjoy long candle-burning sessions without replacing them frequently.

The eco-friendly enchantment of wooden wicks is an additional advantage. Because they are frequently constructed from materials that supply responsibility, they are a prominent and healthy option for customers who care about the environment.

When selecting hardwood wicks, you may still enjoy the comforting glow and delightful aroma of candles while helping to lessen your influence on the environment.

Cons of Wooden Wicks

Wooden wick candles have some problems, too:

1. Irregular Buring: Sometimes, wooden wicks burn unevenly, causing the wax to melt unevenly, too. If not managed well, this can waste wax and make the candle burn for a shorter time.

2. Difficulty Getting a full Wax pool: Unlike cotton wicks, wooden ones can require trial and error to get the wax to melt evenly. If the wax does not melt to the edges of the container, it might leave wax along the sides, affecting how it burns.

3. Trimming can be Tricky: Cutting wooden wicks is more complicated than cutting cotton. It would help if you trimmed them precisely to keep them at the right length, or it can affect how well the candle burns.

4. Slight Charring and Ash: Wooden wicks might get a bit charred or from ash while burning, significantly if not appropriately trimmed. It is usually not a big problem, but it can make the candle look less perfect.

5. Not Always Easy to Find: Wooden wicks might not be as easy to find as cotton ones, depending on where you live or what brands you prefer. You should search more or look online to find a good selection of candles with wooden wicks.

Cotton Wick vs Wood Wick: Which One Is a Better Gift?

Choosing the perfect candle gift involves considering several key factors. First, the fragrance quality, complexity, and the type of wax used and its blend should be highlighted. A longer burn time and high production standards are also important factors to consider.

Morden shops are increasingly mindful of their purchases. Gone are the days of purchasing cheap, mass-produced candles with unknown ingredients. Many low-cost candles in big stores are made with inexpensive materials that may include harmful chemicals produced in large automated factories.

Cotton Wick vs Wooden Wick Candles

For those seeking a superior candle gift, look for options like those from shop.99pandit.com. They are known for their commitment to quality and transparency in production. They prioritize using materials like cotton wicks that enhance the burning experience and are open about where their candles are crafted.

Think about opting for a candle with a wooden wick, which adds to the aesthetic and provides a unique flaming experience.

What Makes a Great Candle Gift?

When selecting the ideal candle gift, you should consider the candle’s production quality, burn time, candle wax blend, and overall quality and complexity of scent.

It is cool to shop mindfully—no more cheap candles mass-produced in unidentified factories with mysterious ingredients.

The less-priced candles you could get in mass-proven stores are manufactured using cheaper materials that might include hazardous elements and are produced in large quantities by machines. Our research and conversations with our equally enthusiastic manufacturers have shown that employing cotton wicks also lowers their expenses.

If you are searching for a high-quality candle gift, give shop.99pandit.com some thought. They provide candles from a firm that does not cut corners on production or material quality and is open about where their product is created. Above all, do not forget to consider a wooden wick candle.

Conclusion

Choosing between cotton wicks and wooden wick candles eventually boils down to personal partiality and the particular experience you seek. Cotton wicks offer reliable burns with consistent performance, making them widely accessible and easy to maintain. They are ideal for those who prioritize even melting and steady accent throws. However, they can sometimes face issues like carbon buildup.

On the other hand, wooden wicks provide a unique crackling ambience and longer burn time, appealing to those who enjoy a more rustic and eco-friendly candle experience. Yes, they may require more attention to achieve an even wax pool and can be more problematic to trim correctly.

Navagraha Shanti Puja In Chennai: Cost, Vidhi & Benefits

Pandit performs Navagraha Shanti Puja in Chennai to please all nine planets of one’s horoscope and eliminate the harmful effects of planets in life. These nine planets lead an individual’s life and have the power to change lives in very little time. 

Unfavourable planetary placements in a person’s natal horoscope cause health issues, business failure, professional difficulties, depression, etc.

This unlucky time frame could persist for the duration of the relevant Maha Dasa of the relevant Graha. Navagraha Shanti Puja in Chennai and Navgrah Shanti Homam can help overcome this.

Navagraha Shanti Puja In Chennai

Depending on the culture they are from, pandits in Chennai can speak a variety of Indian languages. You can find a pandit in Chennai who would perform the ceremony in your local dialect. To reserve pandits for Navagraha shanti puja in Chennai, contact us.

Our solar system has nine planets, and Navagraha Homam is a potent ritual to appease them. Perform in Chennai the Navagraha Shanti Puja to offer worship to nine planets and seek their blessings. The puja includes offering Navagrahas and prayers with flowers, fruits, and incense sticks. 

A Hindu priest normally performs it, reciting mantras and engaging in several rites to evoke the blessings of the Navagrahas. The puja is thought to bring prosperity, good health, and happiness to the person or family performing the ceremony.

What Is Navagraha Shanti Puja?

According to Indian Vedic astrology, the term “Navagraha” refers to the nine celestial bodies that govern each person’s horoscope and is derived from the words “Nava,” which means “Nine,” and “Grah,” which means “Planets.” These “Grahas,” including the Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, and Saturn, profoundly impact our karma, emotions, desires, and consequences. 

These nine planets have positive and negative effects on a person’s life. However, it is quite difficult to escape the negative and terrible influences of the planets. But this difficulty can be addressed by doing Navagraha Shanti Homam & Puja according to every planet’s exact criteria.

Everyone has a planetary flaw of some sort, according to astrology. They frequently cannot determine why the storm in their life keeps intensifying rather than passing away. As a result, life is getting more challenging.

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There are numerous issues in life as a result of the unlucky influences of planets. Planetary fury is so perilous that a human can kill himself. The unfavourable effects of the planets may turn your life into a living hell; when a world is positioned in an unfortunate location, it creates negative circumstances in a person’s life.

As a result, a person’s self-confidence begins to wane, and his life becomes stressful and anxious. Worshiping the Navagrahas is the only way to appease the Navagrahas i.e. nine planets.

Navagraha Shanti Puja In Chennai Puja Vidhi

Invocation of the planets comes first in Navagraha worship. After that, they install them. They invoke the worlds while offering akshat with the right hand, holding akshat with the left hand, and chanting mantras.

This fashion establishes and invokes all the planets. Then, while reciting the mantra while holding an Akshat, offer it for honour at the Navagraha Mandal. You are chanting mantras while you now worship the nine planets.

Remember that only an educated Brahmin should do the worship procedure. You can perform puja in the Navagraha temple as well.

You can worship Navagraha and receive their combined blessings, pleasing not only one planet but all nine planets. Perform Navagraha worship if any planet in your horoscope is negatively affected by being in an unfavourable spot. As a result, many issues are occurring in your life. 

The fact that anyone can do Navagraha Pujan is its most unique feature. This worship appeases every flaw in your horoscope. You can perform Navagraha Pujan to gain respect, happiness, and wealth.

Instructions for Navgraha Shanti Puja

People frequently use the phrase “our time is running bad.” Follow these instructions for Navgraha Shanti Puja or Homam to see the results and turn your bad day around:

1: Kalash Sthapana is the first ceremonial action in the Navagraha Puja.

2: Invoke the Navagrahas, the nine planets, before beginning Puja.

3: The person performing the puja should hold water in his right palm and perform a Maha Sankalp or Vachanam, beseeching the Navagrahas for their blessings and for them to grant their wishes.

4: Following the Ganesh Puja and Sthapna of the Navagraha idols, the Navagraha Puja is performed.

5: People pray to all important Kalash deities and recite mantras for every planet.

6: Homam performs to seek the blessings of Navagrahas.

7: Purnahuti offers into havan kund at the end.

8: The last step is to perform aarti to complete the puja.

Benefits Of Navagraha Shanti Puja In Chennai: 99Pandit

The pandit, purohit, or priest is a necessary component of any Hindu religious celebration, and there is an endless list of benefits to the rituals and practices observed in Pune. A priest, who has a thorough knowledge of the Vedas and the Vedas, directs the entire ceremonial ceremony. 

The Navagraha Shanti Puja, Rudrabhishek Puja, Diwali Pooja, Satyanarayan Puja, and Griha Pravesh Puja. For a navagraha puja, you must follow the following processes in Chennai:

Navagraha Shanti Puja In Chennai

Select the puja service that you want to attend. You can reserve pandits in Chennai by selecting your city and state.

However, getting a reliable and sincere priest or pandit could be challenging, particularly in Pune. Here, 99Pandit can help you with straightforward bookings.

Let’s look at the advantages of making a pandit for Navagraha shanti puja in Chennai:

Easy Booking Process

One of the main advantages of hiring a pandit online is that you won’t have to fight to find one during peak season. Pandits for Navagraha shanti puja in Chennai can always be reserved in advance to guarantee availability. Along with conducting puja with all required steps, these will assist you with several services.

Availability of Puja Samagri

A lot of pooja samagri is utilized during Indian rituals and festivals, and our online pandit booking will help you with the checklist required for your preferred service. This puja samagri is simple to locate online or in your local store.

Experienced and Reliable Pandit for Navagraha Shanti Puja in Chennai

99Pandit has licensed, professionally qualified, knowledgeable pandits who are well-versed in all the Vedic and Vedas knowledge and will always help you with rituals. Additionally, they will do your homa or puja with the utmost respect and devotion, enabling you to benefit fully from the process.

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We also have access to the pandit’s complete histories, which we may use to verify their veracity. A thorough check is performed before employment begins using a legitimate identification.

Book Pandit For Navagraha Shanti Puja In Chennai

The Graha Shanti Havan, also known as the Navagraha Havan, aims to appease the nine Grahas and minimize the adverse effects that the planets have on a person’s life. The nine planets have complete control over every aspect of a person’s life and have the power to swiftly and dramatically change its trajectory.

With 99Pandit, finding a Pandit for Navagraha Shanti Puja in Chennai has never been simpler.

By calling on each of the Navagrahas, saying their corresponding mantras, and then performing the Navagraha havan to obtain the blessings of each of the nine grahas individually, the Pandit For Navagraha Shanti Puja in Chennai has carried out the puja.

Navagraha Shanti Puja In Chennai

Choose us and Book a Pandit For Navagraha Shanti Puja in Chennai| Pandit for Navagraha Pooja to guarantee a pleasant and stress-free wedding. Below is a list of further pujas that 99Pandit has performed:

You may book an appointment with a Pandit for Navagraha Shanti Puja in Chennai through 99Pandit for your spiritual needs. The ritualistic practices connected to North Indian pujas and customs are familiar to them.

99Pandit can be trusted to put you in touch with the best Indian Pandit Ji in Chennai, who will see that they carry out your religious ceremonies with great care and devotion.

Our platform satisfies every need that followers have for their religious rites. We’ve made it convenient for you to contact a pandit online for your spiritual requirements. We offer a thorough solution to the puja needs in addition to pandit booking services with our extra services like Online E-Puja, astrology, and other religious services.

Final Summary

You no longer need to be concerned that your god would not bless you because you were unable to locate a Pandit in Chennai for Navagraha Puja.

Finding a pandit and performing the puja the way you want to has never been simpler thanks to 99Pandit in Chennai. So why are you still waiting? You can receive God’s blessings with only one click.

Frequently Asked Questions

Q.What other pujas are performed by 99Pandit?

A.99Pandit has performed the Navagraha Shanti Puja, Rudrabhishek, Diwali Pooja, Satyanarayan Puja, and Griha Pravesh Puja.

Q.What does Navagraha mean?

A.The term “Navagraha” refers to the nine celestial bodies that govern each person’s horoscope and is derived from the words “Nava,” which means “Nine,” and “Grah,” which means “Planets.”

Q.Where to find a reliable Pandit in Chennai?

A.You no longer need to be concerned that your god would God bless you because you could not locate a Pandit in Chennai for Navagraha Puja. Finding a pandit and performing the puja how you want to has never been simpler, thanks to 99Pandit in Chennai.

Q.How to perform Navagraha Shanti Puja in Chennai?

A.Invocation of the planets comes first in Navagraha worship. They are then installed after that. The worlds are then invoked while offering akshat with the right hand, holding akshat in the left hand, and chanting mantras.

Q.Why is Navagraha shanti puja performed in Chennai?

A.This dosha causes health issues, business failure, professional difficulties, depression, etc. This can be overcome with the Navgrah Shanti Puja in Chennai and Navgrah Shanti Homam.


Satyanarayan Puja Samagri: सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री

सत्यनारायण कथा का आयोजन सामूहिक रूप से करवाया जाये तो आपके साथ- साथ इससे मिलने वाले फल की प्रप्ति श्रवण करने वाले लोगो को भी होती है| सत्यनारायण की कथा में सबसे महत्वपूर्ण सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री का ज्ञान होना होता है| बिना सामग्री के ज्ञान के कथा की दौरान विघ्न उत्पन्न हो सकता है ,अतः आवश्यक है की हमें पूजन सामग्री का महत्व ज्ञात हो जिससे की हमें इस धार्मिक – अनुष्ठान में कोई विघ्न न आये|

सत्यनारायण भगवान विष्णु का ही एक सत्य रूप माना जाता है| इस कथा में भगवान विष्णु के सत्य नारायण रूप की पूजा होती है| भगवान श्री सत्यनारायण की कथा का आयोजन करने से आपके घर में सुख, समृद्धि, का वास होता है|

सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री

इसका तात्पर्य यह होता है की यह हमें एक सत्यनारायण कथा हमें परमात्मा के सत्य छवि की एक दृष्टि प्रदान करवाता है| इस श्रवण के बाद हमें यह महसूस होता है की इस मायावी संसार में सत्य केवल ईश्वर या परमात्मा है बाकि सब दिखावा या मोहमाया है|   

सत्यनारायण कथा मैं विभिन्न्न उदाहरणों के माध्यम से हमें यह समझने का प्रयत्न किया है की सत्यनिष्ठ बनने से व्यक्ति का जीवन सुखमय व् शांतिमय बना रहता है| यह कथा देशभर में लोकप्रिय कथा है| लोगो की श्रद्धा भावना  इस प्रसंग को सुनकर सहज ही उभर आती है|

सत्यनारायण कथा 99पंडित के द्वारा

99पंडित आपको सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री के बारे में सही व् सटीक जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ- साथ आपको सत्यनारायण कथा करवाने हेतु ऑनलाइन पंडित बुकिंग की सुविधा देता है जहा आप अपनी स्थानीय भाषा के अनुरूप अनुभवी और पेशेवर पंडित बुक कर सकते है| 

99पंडित की ऑनलाइन प्लेटफार्म पर मौजूद पंडितो की टीम आपको सत्यनारायण कथा को वैदिक शास्त्रानुसार करवाने की योग्यता रखते है व सत्यनारायण कथा में होने अनावश्यक खर्चे से बचने की सलाह भी  प्रदान करवाते है जिससे की पूजा के दौरान किसी भी प्रकार का व्यवधान ना आये|  

आगे हम 99पंडित  इस ब्लॉग की माध्यम से आपको सत्यनारायण कथा के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे| जिसकी आपको सत्यनारायण कथा के दौरान आवश्यता रहेगी| सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री की सूची निचे दी हुई है भगत दी गयी सूचि का ध्यानपूर्वक अवलोकन करे|  

सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री

सामग्री  मात्रा
रोली  1 पैकेट 
कलावा (मौली)  3 पैकेट  
सिन्दूर  1 पैकेट 
लौग  1 पैकेट 
इलायची 1 पैकेट 
सुपारी   11 नग 
गरिगोला   1 नग 
शहद  1 शीशी 
इत्र 1 शीशी 
गंगाजल  1 शीशी 
लाल कपडा  आधा मीटर 
पीला कपडा एक मीटर 
धुप बत्ती  1 पैकेट 
रूईबत्ती गोल  1 पैकेट 
कपूर 50 ग्राम 
देशी घृत  500 ग्राम 
नावग्रह चावल  1 पैकेट 
हल्दी (पीसी)  1 पैकेट 
यज्ञोपर्वात  5 नग 
सकोरा मिटटी का  3 नग 
दियाळी  10 नग 
नवग्रह समिधा  1 पैकेट 
आम की लकड़ी  1 किलो 
पञ्चमेवा  100 ग्राम 
पानी वाला  नारियल  1 नग 
सप्तमृतिका 1 पैकेट 
सप्तधान्य  1 पैकेट 
पंचरत्न  1 पैकेट 
सर्वोषधि  1 पैकेट 
बताशा  100 ग्राम  
हवन सामग्री  500 ग्राम 
दोना – प्रसाद लगाने के लिए 
पञ्चामृत के लिए गिलास 
भोग लगाने के लिए पंचोरी 
मिष्ठान आवश्यकतानुसार 
फल आवश्यकतानुसार 
पान पते   11 नग 
पञ्चामृत आवश्यकतानुसार बना लें 
दूध , दही , घी , चीनी 
फूल आधा किलो 
फूलमाला  5 नग (छोटे- छोटे ) 
केले के पत्ते  5 नग 
आम का पल्लव  1 नग 
तुलसी के पत्ते भोग हेतु 
ताम्रपत्र घर में उपलब्ध हो तो, नया लेन की जरुरत नहीं है 

 

वर्ष 2024 में सत्यनारायण पूजा-व्रत के लिए तिथि

हिंदू महीना तिथि वार
पौष पूर्णिमा 25 जनवरी, 2024 गुरूवार
माघ पूर्णिमा 24 फरवरी, 2024 शनिवार
फाल्गुन पूर्णिमा 25 मार्च, 2024 सोमवार
चैत्र पूर्णिमा 23 अप्रैल, 2024 मंगलवार
वैशाख पूर्णिमा 23 मई, 2024 गुरूवार
ज्येष्ठ पूर्णिमा 21 जून, 2024 शुक्रवार
आषाढा पूर्णिमा 21 जुलाई, 2024 रविवार
श्रावण पूर्णिमा 19 अगस्त, 2024 सोमवार
भाद्रपद पूर्णिमा 17 सितम्बर, 2024 मंगलवार
आश्विनी पूर्णिमा 17 अक्टूबर, 2024 गुरूवार
कार्तिक पूर्णिमा 15 नवम्बर, 2024 शुक्रवार
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 15 दिसंबर 2024 रविवार

 

सत्यनारायण कथा का महत्व 

ऐसा माना जाता है की सत्यनारायण कथा भगवान नारायण  सभी मनुष्यों से किया गया एक वादा है कि यदि आप सच्चे हैं, और सत्यता के मार्ग ओर चलने के प्रेरणा लेते है तो भगवान सत्यनारायण (विष्णु) आपको जीवन के सभी संकटों और खतरों से बचाएंगे व आपके साथ कभी गलत नहीं होने देंगे|

सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री

सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री शुद्ध व पवित्र हो इसका पूरा ख्याल रखे क्यों की सत्यनारायण कथा मे पूजन सामग्री महत्वपूर्ण होती है | 

  • सत्यनारायण कथा के घर में पाठ करने से घर में सुख शान्ति रहती है | 
  • सत्यनारायण कथा  करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है | 
  • इस कथा का इतना प्रभाव होता है की व्यक्ति के अंदर जीवन में सत्यता का आगमन होता है | 
  • साथ ही सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है | 
  • आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
  • सत्यनारायण कथा हमें बुराई के मार्ग पर चलने से रोकती है व मानसिक रूप से सत्यता की और अग्रसर करवाती है | 

घर पर सत्यनारायण कथा हेतु पूजन विधि 

  • सबसे पहले आप पूजा स्थल को साफ करें और उसे सजाएं। एक शुद्ध कपड़े को पूजा स्थल पर बिछा दें। उसके पश्चात पूजा की थाली पर कपड़ा बिछा दें और उस पर कलश रखें। कलश को जल से पूर्ण करें और उसमें नारियल रखें।
  • कलश के चारों ओर मंगलकमन्दल बनाएं और उसे फूलों से सजाएं।
  • सप्तशती की पुस्तक को खोलें और सत्यनारायण कथा का पाठ शुरू करें। यह कथा पूजा के दौरान पढ़ी जाती है और इसके पश्चात आरती की जाती है।
  • पूजा की थाली पर रोटी, चावल, दही, शहद, घी, शक्कर, फल, नर्मदा जल, पंचामृत, पुष्प, दीप, धूप, बत्ती, अगरबत्ती, कपूर आदि रखें।  

नोट :- आप सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री की व्यवस्था 99पंडित पर बताए अनुसार अनुसार कर सकते है |  

  • पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करें और मन्त्रों के साथ आरती करें।
  • पूजा के बाद, प्रसाद को भगवान को अर्पित करें और उसे बांटें।
  • अंत में, श्रद्धालुओं का भोजन करवाएं और भगवान का आशीर्वाद लें।

सत्यनारायण पूजा के लिए ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें 

99पंडित के ऑनलाइन माध्यम से आप घर बैठे  सत्यनारायण पूजा के लिए आप घर बैठे अपना  बुक कर सकते है | इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आप अपने स्थानीय भाषा के पंडित को आसानी से बुक कर सकते हो | बुकिंग हेतु आपको हमरी 99पंडित की ऑनलाइन वेबसाइट पर जाना होगा | 

  • तत्पश्चात आपको “बुक ए पंडित” पर क्लिक करना होगा 
  • यहाँ अपनी सामान्य जानकारी का ब्योरा देना होगा जैसे आपका नाम, आपका निवास स्थान जहा पर आपको पूजा को संपन्न करवाना है, आपका शहर, फ़ोन नंबर, ईमेल पता, और आपके द्वारा करवाई जाने वाली पूजा का चयन करके आप अपना पंडित आसानी से बुक कर सकते है | 
  • इसके बाद आपको “जमा करना” बटन पर क्लीक  पुष्टि करण करना होगा |  
  • इसके बाद आपको पंडित की पूरी जानकारी के साथ मेल या संदेश के माध्यम से पंडित और पूजा की समस्त  सूचना मिल जाएगी | व आपका पडित आपसे जल्द संपर्क कर पायेगा | 

आप सत्यनारायण कथा पूजन सामग्री के अलावा अगर आप यदि रामकथा पूजन, अखंड रामायण पाठ पूजा, या  श्रीमद् भागवत महापुराण कथा आयोजन के लिए सामग्री के बारे में पता कर रहे हो तो आप हमारी 99Pandit के ब्लॉग सेक्शन से आप  इनकी सामग्री की विस्तृत जानकारी आसानी से  प्राप्त कर सकते है | आपको सत्यनारायण कथा का पूरा लाभ मिले ऎसी हम 99पंडित कामना करते है|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.सत्यनारायण पूजा घर में कब करनी चाहिए?

A.भगवान सत्यनारायण की पूजा हमें एकादशी तिथि अर्थांत हिन्दू चंद्र क्लेंडेर के अनुसार यह चंद्र पखवाड़े का ग्यारवां दिन होता होता है शुभ दिन माना जाता है | इसके अलावा आप अमावस्या या पूर्णिमा के दिन भी सत्यनारायण कथा करवाना भी आदर्श माना जाता है|

Q.नारायण और सत्यनारायण में क्या अंतर है?

A.नारायण शब्द भगवान विष्णु  के लिए प्रयुक्त होता है| सत्यनारायण भगवान  विष्णु का ही एक सत्यता का स्वरूप है जिसके माध्यम  से भगवान विष्णु हमें सत्यता के मार्ग के और बढ़ते रहने की प्रेरणा देते है|

Q.सत्यनारायण पूजा करने से क्या होता है?

A.सत्यनारायण पूजा का आयोजन धन, स्वास्थ्य, समृद्धि, संतान सुख, शुभ समाधान, और कष्टों से मुक्ति के लिए किया जाता है। यह पूजा धार्मिक तथा मानसिक शांति, प्रेम-भक्ति, समाजिक सद्भावना, उच्च आदर्शों को प्रोत्साहित करती है। इसके अलावा, यह पूजा उपासक के जीवन में आनंद, सफलता, और संतुष्टि को लाती है।

Q.सत्यनारायण की कथा कितने बजे करनी चाहिए?

A.सत्यनारायण की कथा को अमावस्या या पूर्णिमा के दिनों पर आदित्य द्वारा विधिपूर्वक की जाती है। इसे ज्यादातर लोग प्रातःकाल या शामकाल में करते हैं, लेकिन कथा को शामकाल का समय उचित माना जाता है। आमतौर पर, इसे शामकाल से शुरू करना अच्छा माना जाता है|