Shri Narayana Ashtakam Lyrics: श्री नारायण अष्टकम अर्थ सहित

Narayana Ashtakam Lyrics: नारायण अष्टकम भगवान विष्णु को समर्पित श्लोक है। अष्टकम का अर्थ 8 श्लोकों के समूह से होता है, जिसका पाठ करने से भगवान प्रसन्न होते हैं तथा मनोकामना पूर्ण करते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार हर देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग स्तोत्र, अष्टकम, श्लोक आदि लिखे गए हैं, जिनका प्रतिदिन पाठ करने से मानव जीवन की कई समस्याओं का समाधान होता है। और भगवान उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

आज के इस लेख में हम जानेंगे एक ऐसे महान अष्टकम के बारे में जो भगवान विष्णु को समर्पित है। नारायण अष्टकम से भगवान विष्णु का अनुसरण किया जाता है तथा अष्टकम का प्रतिदिन पाठ करने से भगवान विष्णु आपको अपनी शरण में लेते हैं। भगवान विष्णु को अनेकों नामों से जाना जाता है जैसे श्री हरि, श्री नारायण, विष्णु, लक्ष्मीनारायण, शेषनारायण, आदि।

श्री नारायण अष्टकम

99Pandit के साथ चलिए जानते हैं श्री नारायण अष्टकम की महिमा साथ ही इसके लाभ, इसका पाठ कब करें, तथा नारायण अष्टकम लिरिक्स (Narayana Ashtakam Lyrics)।

नारायण अष्टकम क्या है?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्री नारायण अष्टकम का नियमित पाठ करने से जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं तथा भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मनुष्य नारायण अष्टकम का पाठ करता है।

वेदों और पुराणों में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार कहा गया है। मानव जीवन से जुड़े सुख-दुख का चक्र श्री नारायण के हाथों में है। भगवान की आराधना में इस अष्टकम का पाठ बहुत महत्वपूर्ण है। इस स्तोत्र में लक्ष्मीपति ने एक हजार नाम बताए हैं।

यह अष्टकम भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है तथा बहुत सरल पाठ है, जिससे हर कोई लाभ उठा सकता है। यह भगवान विष्णु के शक्तिशाली अष्टकम में से एक है जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। अष्टकम का नियमित पाठ करने से सुखी और शांतिपूर्ण जीवन जीने में मदद मिलती है।

नारायण अष्टकम् लिरिक्स – Narayana Ashtakam Lyrics

|| श्री नारायण अष्टकम् ||

वात्सल्यादभयप्रदानसमयादार्तार्तिनिर्वाणा
दौदार्यादघशोषणादगणितश्रेय: पदप्रापणात् ।
सेव्य: श्रीपतिरेक एव जगतामेतेऽभवन्साक्षिण:
प्रहलादश्च विभीषणश्च करिराट् पांचाल्यहल्या ध्रुव” ।।1।।

प्रहलादास्ति यदीश्वरो वद हरि: सर्वत्र मे दर्शय
स्तम्भे चैवमिति ब्रुवन्तमसुरं तत्राविरासीद्धरि: ।
वक्षस्तस्य विदारयन्निजनखैर्वात्सल्यमापाद
यन्नार्तत्राणपरायण: स भगवान्नारायणो मे गति: ।।2।।

श्रीरामात्र विभीषणोऽयमनघो रक्षोभयादागत:
सुग्रीवानय पालयैनमधुना पौलस्त्यमेवागतम् ।
इत्युक्त्वाभयमस्य सर्वविदितं यो राघवो
दत्तवानार्त सभगवान्नारायणो मे गतिः।।3।।

नक्रग्रस्तपदं समुद्धतकरं ब्रह्मादयो भो सुरा:
पाल्यन्तामिति दीनवाक्यकरिणं देवेश्वशक्तेषु य: ।
मा भैषीरिति यस्य नक्रहनने चक्रायुध: श्रीधर ।
आर्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः ।।4।।

भो कृष्णाच्युत भो कृपालय हरे भो पाण्डवानां सखे
क्वासि क्वासि सुयोधनादपह्रतां भो रक्ष मामातुराम् ।
इत्युक्तोऽक्षयवस्त्रसंभृततनुं योऽपालयद्द्रौपदी
मार्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः ।।5।।

यत्पादाब्जनखोदकं त्रिजगतां पापौघविध्वंसनं
यन्नामामृतपूरकं च पिबतां संसारसंतारकम् ।
पाषाणोऽपि यद्न्घ्रिपद्मरजसा शापान्मुनेर्मोचित ।
आर्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः ।।6।।

पित्रा भ्रातरमुत्तमासनगतं चौत्तानपादिर्ध्रुवो दृष्ट्वा
तत्सममारूरुक्षुरधृतो मात्रावमानं गत: ।
यं गत्वा शरणं यदाप तपसा हेमाद्रिसिंहासन
मार्तत्राणपरायणः सभगवान्नारायणो मे गतिः ।।7।।

आर्ता विषन्णा: शिथिलाश्च भीता
घोरेषु च व्याधिषु वर्तमाना: ।
संकीत्र्य नारायणशब्दमात्रं
विमुक्तदु:खा: सुखिनो भवन्ति ।।8।।

॥ इति श्रीनारायणाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

नारायण अष्टकम का हिंदी अर्थ – Narayana Ashtakam Lyrics with Hindi Meaning

अति वात्सल्यमय होने के कारण, भयभीतों को अभयदान देने का स्वभाव होने के कारण, दुःखी पुरुषों का दुःख हरने के कारण, अति उदार और पापनाशक होने के कारण और अन्य अगणित कल्याणमय पदों (श्रेयों) की प्राप्ति करा देने के कारण सारे जगत् के लिये भगवान् लक्ष्मीपति ही सेवनीय हैं; क्योंकि प्रह्लाद, विभीषण, गजराज, द्रौपदी, अहल्या और ध्रुव-ये (क्रम से) इन कार्यों में साक्षी हैं ॥१॥

‘अरे प्रह्लाद ! यदि तू कहता है कि ईश्वर सर्वत्र है तो मुझे खम्भे में दिखा दैत्य हिरण्यकशिपु के ऐसा कहते ही वहाँ भगवान् आविर्भूत हो गये और अपने नखों से उसके वक्षःस्थल को विदीर्ण करके अपना वात्सल्य प्रकट किया। ऐसे दीनरक्षक भगवान् नारायण ही मेरी एकमात्र गति हैं ॥२॥

‘हे श्रीरामजी! यह निष्पाप विभीषण राक्षस रावण के भय से आया है- यह सुनते ही सुग्रीवा उस पुलस्त्य-ऋषि के पौत्र को तुरंत ले आओ और उसकी रक्षा करो-ऐसा कहकर जैसा अभयदान श्रीरघुनाथजी ने उसे दिया वह सबको विदित ही है: वेही दीनरक्षक भगवान् नारायण मेरी एकमात्र गति हैं॥ ३॥

श्री नारायण अष्टकम

ग्राहद्वारा पाँव पकड़ लिये जाने पर सूंड़ उठाकर ‘हे ब्रह्मा आदि देवगण। मेरी रक्षा करो।’- इस प्रकार दीनवाणी से पुकारते हुए गजेन्द्र की रक्षा में देवताओं को असमर्थ देखकर ‘मत डर’ ऐसा कहकर जिन श्रीधर ने ग्राह का वध करने के लिये सुदर्शन चक्र उठा लिया, वे ही दीनरक्षक भगवान् नारायण मेरी एकमात्र गति हैं ॥४॥

‘हे कृष्ण!, हे अच्युत!, हे कृपालो!, हे हरे! हे पाण्डवसखे! तुम कहाँ हो? कहाँ हो? दुर्योधन द्वारा लूटी गयी मुझ आतुरा की रक्षा करो! रक्षा करो !! इस प्रकार प्रार्थना करने पर जिसने अक्षयवस्त्र से द्रौपदी का शरीर ढककर उसकी रक्षा की, वह दुःखियों का उद्धार करने में तत्पर भगवान् नारायण मेरी गति हैं॥ ५ ॥

जिनके चरणकमलों के नखों की धोवन श्रीगंगाजी त्रिलोकी के पापसमूह को ध्वंस करने वाली हैं, जिनका नामामृतसमूह पान करने वालों को संसारसागर से पार करने वाला है तथा जिनके पादपद्मों की रज से पाषाण भी मुनिशाप से मुक्त हो गया, वे दीनरक्षक भगवान् नारायण ही मेरी एकमात्र गति हैं॥६॥

अपने भाई को पिता के साथ उत्तम राजसिंहासन पर बैठा देख उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव ने जब स्वयं ही उस पर चढ़ना चाहा तो पिता ने उसे अंक में नहीं लिया और विमाता ने भी उसका अनादर किया, उस समय जिनकी शरण जाकर उसने तप के द्वारा सुमेरुगिरि के राजसिंहासन की प्राप्ति की, वे ही दीनरक्षक भगवान् नारायण मेरी एकमात्र गति हैं॥७॥

जो पीड़ित हैं, विषादयुक्त हैं, शिथिल (निराश) हैं, भयभीत हैं अथवा किसी भी घोर आपत्ति में पड़े हुए हैं, वे नारायण शब्द के संकीर्तन मात्र से दुःख से मुक्त होकर सुखी हो जाते हैं॥ ८॥

नारायण अष्टकम का पाठ करने की विधि

श्री नारायण अष्टकम का पाठ करने के लिए एक विशेष विधि का पालन किया जाता है। इसका पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है. लेकिन शुभ मुहूर्त में इसका पाठ करना अधिक फलदायी होता है।

दिन

नारायण अष्टकम का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन एकादशी, पूर्णिमा या किसी विशेष त्यौहार के दिन, जैसे वैकुंठ एकादशी, पर इसका पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है।

अवधि

नारायण अष्टकम का पाठ नियमित रूप से 41 दिनों तक किया जाता है। इस दौरान सात्विक जीवनशैली का पालन करना चाहिए और पूजा में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

शुभ मुहूर्त

प्रातः ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक) में इसका पाठ करना बहुत फलदायी होता है।

नारायण अष्टकम पाठ के लाभ

  1. यह पाठ जीवन के कष्टों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है।
  2. नारायण अष्टकम के पाठ प्रतिदिन करने से पापों का नाश होता है।
  3. भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है।
  4. यह पाठ भय और चिंता को दूर कर साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
  5. श्री नारायण अष्टकम का नियमित पाठ मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, समृद्ध और समृद्ध बनाता है।
  6. श्री नारायण अष्टकम का पाठ करने से भक्ति कई गुना बढ़ जाती है। हमें ऐसा महसूस होता है कि हम एक पहाड़ को कदम दर कदम पार कर रहे हैं और वहां से भौतिक दुनिया बहुत अप्रासंगिक लगने लगती है और जप अपने आप में ही अपना उद्देश्य बन जाता है।
  7. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री नारायण अष्टकम का नियमित जाप भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है।

नारायण अष्टकम का जाप कैसे करें?

श्री नारायण अष्टकम का जाप करने से पहले, यहाँ कुछ पारंपरिक अभ्यास दिए गए हैं जिनका पालन करके भक्त अधिक केंद्रित और सार्थक अनुभव के लिए तैयारी कर सकते हैं:

  1. शारीरिक रूप से स्वच्छ महसूस करने के लिए स्नान करें या अपने हाथ और चेहरा धोएँ। यह आंतरिक शुद्धि का भी प्रतीक हो सकता है। 
  2. ध्यान न भटकाने वाली कोई शांत, साफ जगह ढूँढ़ें जहाँ आप जाप पर ध्यान केंद्रित कर सकें। 
  3. आरामदायक और साफ कपड़े पहनें जिससे आप आराम से बैठ सकें। 
  4. भगवान नारायण के प्रति श्रद्धा और भक्ति के साथ जाप करें। अपने जाप के लिए एक इरादा तय करें, चाहे वह सुरक्षा, शांति या आध्यात्मिक विकास की तलाश हो। 
  5. आप जाप करने से पहले भगवान नारायण से एक छोटी प्रार्थना कर सकते हैं, अपना आभार व्यक्त कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद मांग सकते हैं।

नारायण अष्टकम का पाठ करते समय सावधानियां

श्री नारायण अष्टकम का पाठ करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:

  1. सात्विक आहार: पाठ के दौरान शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करें। मांसाहारी भोजन और नशीले पदार्थों से दूर रहें। 
  2. ब्रह्मचर्य: पाठ के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें। 
  3. अधूरी साधनाः साधना को अधूरा न छोड़ें। इसे नियमित रूप से 41 दिनों तक करें। 
  4. समय की पाबंदी: नियमित समय पर पाठ करें ताकि मन एकाग्र रहे।
  5. मन की पवित्रताः पाठ के दौरान अपने मन को शांत और पवित्र रखें, नकारात्मक विचारों से बचें।

भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र – Important Mantras of Lord Vishnu

हिंदू धर्म के अनुरूप, भगवान विष्णु को सबसे महत्वपूर्ण देवता में से एक माना जाता है। भगवान नारायण को समस्त ब्रह्माण्ड का संरक्षक या रक्षक कहा जाता है।

श्री नारायण अष्टकम

श्री हरि के भक्त उनको प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र कुछ इस प्रकार है:

1. विष्णु मूल मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय॥

Om Namoh Narayanaya॥

2. विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

Om Namoh Bhagawate Vasudevaya॥

3. विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ श्री विष्णुवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

Om Shri Vishnave Cha Vidmahe Vasudevaya Dhimahi।
Tanno Vishnuh Prachodayat॥

4. विष्णु शांताकारम मंत्र

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगीभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham
Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam।
Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam
Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham॥

5. मंगलम भगवान विष्णु मंत्र

मंगलम् भगवान विष्णुः, मंगलम् गरुड़ध्वजः।
मंगलम् पुण्डरी कक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥

Mangalam Bhagwan Vishnuh, Mangalam Garudadhwajah।
Mangalam Pundari Kakshah, Mangalaya Tano Harih॥

निष्कर्ष – Conclusion

नारायण अष्टकम केवल एक भजन नहीं है, यह एक गहन आध्यात्मिक अभ्यास है जो दुनिया भर में भगवान विष्णु के भक्तों के दिलों को छूता है। बहुत से लोग अपने गुरु ग्रह को मजबूत करने, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए बृहस्पतिवार का व्रत करते हैं।

गुरुवार का व्रत रखते हैं, तो पूरे विधि-विधान से पूजा करें और फिर कथा पढ़ने के बाद नारायण अष्टकम का पाठ करने से मनुष्य को बहुत से लाभ मिलते हैं। हमें आशा है हमारा आज का लेख “नारायण अष्टकम” आपको पढ़कर अच्छा लगा होगा। आगे और भी ऐसे लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ।

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Dattachi Aarti Lyrics: भगवान दत्ताची जी की आरती

भगवान दत्ताची जी को प्रसन्न करने के लिए दत्ताची जी की आरती (Dattachi Aarti Lyrics) का जाप किया जाता है| माना जाता है कि जो भी भक्त इस दत्ताची जी की आरती का जाप करता है, उससे नकारात्मक शक्तियां दूर रहती है|

भगवान दत्ताची जी की आरती का सच्ची श्रद्धा से जाप करने से भक्तों को तत्काल रूप से फल की प्राप्ति होती है| भगवान दत्ताची जी की यह मराठी भाषा में है| इस आरती का नियमित रूप से जाप करने पर परिवार में सुख – समृद्धि बनी रहती है तथा भक्तों को पाप, रोग – दोषों से भी मुक्ति मिलती है तो आइये जाप करते है भगवान दत्ताची जी की आरती का|

दत्ताची जी की आरती

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भगवान दत्ताची जी की आरती मराठी में – Dattachi Aarti Lyrics in Marathi

|| दत्ताची जी की आरती ||

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।
त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।
नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥
सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥

जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।
आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥

सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।
अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥
पराही परतली तेथे कैचा हेत ।
जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥

दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।
भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥
प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।
जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥

दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।
हरपले मन झाले उन्मन ॥
मी तू पणाची झाली बोळवण ।
एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

दत्ताची जी की आरती

Dattachi Aarti Lyrics in English – जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता

|| Dattachi Aarti ||

Trigunatmak traimurtee Datt ha jaana.
Triguni avatar trailokya raana.
Netti netti shabd na ye anumana.
Survar munijan yogi samaadhi na ye dhyaana.

Jai dev jai dev jai Shri Gurudatta.
Aarati ovaalita harli bhavchinta.

Sabaahya abhyantar tu ek Datta,
Abhaagyaasi kaichi kalel hi maat.
Paraahi partali tethe kaicha het,
Janmamaranaachaahi purlase ant.

Datt yeuniya ubha thakla,
Bhaave saashtaangesi pranipaata kela.
Prasann hooni aashirvaad didhla,
Janmamaranaacha fera chukavila.

Datt datt aise lagale dhyaan.
Harpale man Jhaale unman.
Mi tu panaachi jhaali bolwana.
Eka janaardhani Shri Dattadhyaan.

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा हिंदी भजन लिरिक्स

Lagan Tumse Laga baithe, Jo Hoga Dekha Jayega Hindi Bhajan Lyrics: यूं तो श्री कृष्ण को खुश करने के कई माध्यम हैं पर लड्डू गोपाल यानी कृष्ण को रिझाने के लिए सबसे सरल है उनकी भजनों की सहायता से स्तुति और उपासना करना। भजन लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा (Lagan Tumse Laga baithe, Jo Hoga Dekha Jayega) एक ऐसा भजन है जो भगवान श्री कृष्ण के भक्त उनकी स्तुति या वंदना करने के लिए गाते हैं।

“लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा” भजन को अपनी सुरीली आज में संत श्री प्रेम भूषण जी महाराज ने गाया है। संत श्री प्रेम भूषण जी महाराज ने श्री कृष्ण पर कई भजन लिखे और गाये हैं लेकिन यह भजन सबसे अधिक लोकप्रिय है।

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा

इस भजन में संत श्री प्रेम भूषण जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्तों की भक्ति को दर्शाया है। तो आइए “लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा” भजन में लीन होकर प्रभु श्री कृष्ण को स्मरण करें।

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लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा भजन लिरिक्स हिंदी में

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा ॥

कभी दुनिया से डरते थे, छुप छुप याद करते थे,
लो अब परदा उठा बैठे, जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठें, जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा ॥

कभी यह ख्याल था दुनिया, हमें बदनाम कर देगी,
शर्म अब बेच खा बैठे, जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठें, जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हे अपने बना बैठे,जो होगा देखा जाएगा ॥

दीवाने बन गए तेरे तो फिर, दुनिया से क्या मतलब,
तेरी गलियो में आ बैठे, जो होगा देखा जाएगा।
लगन तुमसे लगा बैठें, जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा ॥

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा,
तुम्हे अपने बना बैठे, जो होगा देखा जाएगा ॥

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा भजन लिरिक्स इन इंग्लिश

Lagan tumse laga baithe, Jo hoga dekha jayega,
Tumhe apne bana baithe, Jo hoga dekha jayega ॥

Kabhi duniya se darte the, Chhup-chhup yaad karte the,
Lo ab parda utha baithe, Jo hoga dekha jayega ॥
Lagan tumse laga baithe, Jo hoga dekha jayega,
Tumhe apne bana baithe, Jo hoga dekha jayega ॥

Kabhi yah khayal tha duniya, Hum badnaam kar degi,
Sharm ab bech kha baithe, Jo hoga dekha jayega ॥
Lagan tumse laga baithe, Jo hoga dekha jayega,
Tumhe apne bana baithe, Jo hoga dekha jayega ॥

Deevane ban gaye tere to fir, Duniya se kya Matlab,
Teri galiyon me aa baithe, Jo hoga dekha jayega ॥
Lagan tumse laga baithe, Jo hoga dekha jayega,
Tumhe apne bana baithe, Jo hoga dekha jayega ॥

Lagan tumse laga baithe, Jo hoga dekha jayega,
Tumhe apne bana baithe, Jo hoga dekha jayega ॥

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा भजन का भावार्थ

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा भजन में समर्पण और प्रेम की भावना को बहुत सी सार्थक तरीके से बताया गया है। भगवान कृष्ण के भक्त दुनिया की परवाह की बिना ही अपनी लगन भगवान से लगायी गयी है।

उनके भक्तों को इस बात की कोई चिंता ही नहीं है कि समाज और लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे और किस तरह से उनकी भक्ति को देखेंगे। इस भजन के माध्यम से कवि ने यह संदेश दिया गया है कि जब भक्ति और प्रेम का रिश्ता भगवान से जुड़ जाता है, तब सभी समस्याएं छोटी लगती हैं।

लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा

भक्त को पहले तो संसार से और लोगों से डर लगता था और अपने आराध्य यानी श्री कृष्ण को छिप-छिपकर देखता था और याद किया करता था, परंतु अब उसने अपने प्रेम का परदा उठा दिया है। अब भक्त को समाज की बातें और बदनामी से डर नहीं लगता क्योंकि उसने अपना समर्पण पूरी तरह से भगवान के चरणों में कर दिया है।

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा भजन में भक्त भगवान की गलियों में आकर निवास कर रहा है, और उसके लिए अब कोई चिंता या डर शेष नहीं है।

निष्कर्ष

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा भजन श्री कृष्ण का सबसे प्रिय और बहुत अधिक गया जाने वाला भजन है। इस “लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा” भजन का गान करने से भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों से खुश होते हैं और अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों की सभी परेशानियों को हल करने में भी सहायता करते हैं।

लगन तुमसे लगा बैठे, जो होगा देखा जाएगा एक बहुत ही अद्भुत एवं मनमोहक भजन है। क्या भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जब भक्ति और प्रेम का रिश्ता भगवान से जुड़ जाता है, तब सभी समस्याएं छोटी लगती हैं।

इसके साथ अलविदा दोस्तों हमफिर मिलेंगे ऐसे ही एक नए भजन के साथ, इसके साथ ही आप हमारे 99Pandit की वेबसाइट पर आरती, कथा, या भजन पढ़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप किसी भी प्रकार की पूजा के लिए पंडित से भी जानकारी ले सकते हैं। इसी के साथ आप व्हाट्सएप के माध्यम से भी हमसे संपर्क कर सकते हैं।

Anjaneya Karya Siddhi Mantra: आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र हिंदी अर्थ सहित

Anjaneya Karya Siddhi Mantra: आंजनेय का अर्थ – अंजना के पुत्र यानि भगवान हनुमान जी से हैं। आज के लेख में हम जानेंगे “आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र” (Anjaneya Karya Siddhi Mantra) के बारे में। हिंदू धर्म में पूजे जाने वाले सबसे अधिक लोकप्रिय और समर्पित देवताओं में से एक हैं संकट मोचन हनुमान।

भगवान हनुमान जी को भगवान श्रीराम के भक्त के रूप में पूजा जाता है और साथ ही उनकी वीरता और दयालु स्वभाव के लिए भी। भगवान हनुमान भगवान श्रीराम की सेनाओं के प्रमुख थे और इस प्रकार उनके जीवन और महाकाव्यों में उनका बहुत महत्व है।

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र

हिंदू ग्रंथो के अनुसार, हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति सही नियम और सच्ची भक्ति के साथ भगवान हनुमान की पूजा अर्चना करता है, वह सभी संकटों से मुक्ति प्राप्त करता है, इसीलिये भगवान हनुमान को संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है सच्चे मन से भगवान श्री राम का नाम लेना और उनकी आराधना करना।

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आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र क्या है? – What is Anjaneya Karya Siddhi Mantra?

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र में ‘कार्य’ शब्द का अर्थ है प्रयास और ‘सिद्धि’ का अर्थ है पूर्णता या सफलता। जब आप अपने दिल के किसी प्रिय कार्य में सफल होना चाहते हैं, तो इस मंत्र का जाप आपको सफलता के करीब ले जाएगा।

अगर आपको कोई काम करने का तरीका नहीं सूझ रहा है और आपका कोई काम अटका हुआ है और इसकी वजह आप नहीं हैं (जैसे कोर्ट केस), तो ऐसी स्थिति में भी कार्य सिद्धि हनुमान मंत्र आपके काम आता है।

आंजनेय भगवान हनुमान का दूसरा नाम है, और भगवान हनुमान के इस नाम से जुड़ा एक समर्पित मंत्र है। ज्योतिषियों के अनुसार, आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करना कामकाजी लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह उनकी बुद्धि में रचनात्मकता जोड़ता है।

यह मंत्र आपके लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से देखने में भी मदद करता है और आपको उनके अनुसार काम करने के लिए प्रेरित करता है। आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप जीवन में धन और सफलता को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। इस मंत्र का जाप करके कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी तरह की देरी को रोक सकता है।

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र संस्कृत में

त्वमस्मिन कार्य निर्योगे प्रमाणं हरिसत्तमा |
हनुमान यात्नमास्ताया दु:ख क्षय करोभाव ||

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र इंग्लिश में

Tvamasmin Karya Niryoge Pramanam Hari Sattama।
Hanuman Yatna Masthaya Dukha Kshaya Karo Bhava॥

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र: हिंदी अर्थ

हे वानरों में श्रेष्ठ हनुमान! आप इस कार्य को पूरा करने में सक्षम हैं ।
हे हनुमान! आप मेरे दुर्भाग्य को दूर करने वाले बनो ॥

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र: इंग्लिश अर्थ

Oh Hanuman, the best among monkeys! You are capable of fulfilling this task.
Oh, Hanuman! Become the one who can remove my misfortunes.

भगवान हनुमान जी के अन्य प्रभावी मंत्र

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र के अलावा हनुमान जी के और भी मंत्र हैं जिनका प्रतिदिन जाप करने से व्यक्ति के जीवन की सभी दुविधाएं और परेशानियां दूर हो जाती हैं। हनुमान जी के अन्य प्रभावशाली मंत्र इस प्रकार हैं:

1. The Hanuman Beej Mantra is:

|| ॐ ऐं भ्रीम हनुमते,
श्री राम दूताय नम: ||

Aum Aeem Bhreem Hanumate।
Shree Ram Dootaaya Namaha॥

हिंदी अर्थ – मैं भगवान हनुमान के सामने झुकता हूं, जो भगवान श्री राम के सबसे महान सेवक और दूत हैं।

English Meaning – I bow in front of Lord Hanuman, who is the greatest server and messenger of the Lord Sri Rama.

2. The Hanuman Moola Mantra is:

|| ॐ श्री हनुमते नमः ||

Om Shri Hanumate Namah।

हिंदी अर्थ – मैं भगवान हनुमान के सामने झुकता हूं।

English Meaning – I bow in front of Lord Hanuman.

3. The Hanuman Gayatri Mantra is:

|| ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ||

Om Anjaneyaya Vidmahe Vayuputraya Dhimahi।
Tanno Hanumat Prachodayat॥

हिंदी अर्थ – हम देवी अंजनी के पुत्र और पवन पुत्र से प्रार्थना करते हैं। भगवान हनुमान हमारी बुद्धि को बुद्धिमत्ता और ज्ञान की ओर ले जाएं।

English Meaning – We pray to the son of Goddess Anjani and the son of the Wind. May Lord Hanuman guide our minds toward brilliance and learning.

4. The Manojavam Maarutatulyavegam Mantra is:

|| मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्।
वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ||

Manojavam Marutatulyavegam Jitendriyam Buddhimatam Varishtham।
Vatatmajam Vanarayuthamukhyam Shriramadutam Sharanam Prapadye॥

हिंदी अर्थ – हम उनसे प्रार्थना करते हैं जो विचार के समान तेज़ हैं (मनोजवम), जो हवा से भी अधिक शक्तिशाली हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है, जो सभी बुद्धिमान प्राणियों में सर्वोच्च हैं, जो पवन देवता के पुत्र हैं। वन प्राणियों की सेना के सेनापति, मुझे भगवान राम के दूत, अतुलनीय भगवान हनुमान की शरण मिलें। कृपया मुझे और मेरी प्रार्थनाओं को अपने चरणों में स्वीकार करें।

English Meaning – We pray to the one who is fast as thought (Manojavam), the one who is stronger than the wind, the one who has overpowered his senses, the one who is leading among all intelligent beings, the son of the wind god (Vayu Dev), the chief of the army of forest creatures, Let me find shelter in Lord Rama’s Messenger, the greatest Lord Hanuman. Please carry me and my prayers at your feet.

5. Anjaneya Mantra

ॐ श्री वज्रदेहाय रामभक्ताय वायुपुत्राय नमोsस्तुते।

Om Shree Vajradehaya Ramabhakthaya Vayuputhraya Namosthuthe।

हिंदी अर्थ – मैं भगवान हनुमान को प्रणाम करता हूं जिनका शरीर वज्र से बना है, जो भगवान राम के भक्त और पवन (वायु) के पुत्र हैं।

English Meaning – I bow before Lord Hanuman who has a body made of the vajra, who is a devotee of Lord Ram and the son of wind (Vayu).

6. Hanuman Bhakta Mantra

अंजनी गर्भ संभूत कपिन्द्र सचिवोत्तम।
राम प्रिया नमस्तुभ्यं हनुमान रक्ष सर्वदा॥

Anjani Garbha Sambhoota Kapeendra Sachivottama।
Rama Priya Namastubhyam Hanuman Raksh Sarvadaa॥

हिंदी अर्थ – मैं हनुमान की शरण लेता हूँ जो माता अंजनी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे और जो राजा सुग्रीव के सबसे श्रेष्ठ मंत्री थे। जो श्री राम को अत्यंत प्रिय हैं; हे हनुमान, मैं आपको प्रणाम करता हूं, कृपया सदैव मेरी रक्षा करें।

English Meaning – I take refuge in Hanuman, who was born from Mother Anjani’s womb and was the most excellent minister of the King of Sugriva. Who is especially dear to Shri Rama; I Bow to You, O Hanuman, Please Watch me Always.

7. Hanuman Mantra

ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।

Om Namo Bhagvate Aanjaneyaay Mahaabalaay Swaahaa।

हिंदी अर्थ – मैं भगवान हनुमान को नमन करता हूं और समर्पण करता हूं, वह जो अंजना के पुत्र हैं।

English Meaning – I bow down and surrender to Lord Hanuman, he who is the son of the powerful Anjana.

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करने के लाभ

  • हनुमान मंत्र का जाप करने से आपको अपनी परेशानियों और समस्याओं पर काबू पाने के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की शक्ति प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • हनुमान मंत्र जातक के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करते हैं और आपके शत्रुओं की किसी भी गलत चाल से लड़ने में आपकी सहायता करते हैं।
  • यदि आप नियमित रूप से हनुमान मंत्रों का जाप करते हैं, तो यह अधिक संभावना है कि आप अपनी अधिकांश कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर लेंगे।
  • हनुमान मंत्र आपको अपने डर का डटकर सामना करने और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बहादुरी से लड़ने का साहस देता है।
  • हनुमान मंत्रों का जाप करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, विशेषकर अवसाद और तनाव से संबंधित समस्याओं में भी सहायता मिलती है।
  • हनुमान मंत्र का जाप करने से जातक के आस-पास से बुरी आत्माओं या भूत-प्रेतों के प्रभाव को दूर करने में मदद मिलती है।
  • कई खिलाड़ी अपनी किसी भी प्रतियोगिता से पहले हनुमान मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। हनुमान मंत्र उन्हें अपने प्रयास में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सहनशक्ति, साहस और शक्ति प्रदान करता है।
  • भगवान हनुमान न केवल शारीरिक शक्ति के प्रतीक हैं; वे मानसिक शक्ति के भी प्रतीक हैं।
  • हनुमान मंत्र का जाप करने से जातक को जीवन के सभी पहलुओं में सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।
  • भगवान हनुमान एक दाता के रूप में उस जातक के लिए सफलता सुनिश्चित करते हैं जो पूरी ईमानदारी और भक्ति के साथ हनुमान मंत्र का अभ्यास करता है।
  • हनुमान मंत्र का जाप करने से कर्ज या असफल विवाह जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप कैसे करें?

भगवान हनुमान को बहुत सारे नाम से जाना जाता है साथ ही उनकी आराधना करने के लिए कई सारे मंत्र भी हैं। उनमें से प्रत्येक मंत्र का एक निश्चित समय और दिन होता है जब आपको उन्हें पढ़ना चाहिए।

हालाँकि, हनुमान मंत्र पढ़ते समय आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इस बारे में नीचे बताया गया है:

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र

  • आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र जाप करने के लिए सबसे अच्छा दिन शनिवार का होता है। हालाँकि, बाकि हनुमान मंत्रों का जाप अन्य दिनों में भी किया जा सकता है।
  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  • हनुमान जी की मूर्ति को अपने सामने रखें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप जप और ध्यान को बेहतर बनाने के लिए ताजे फूलों और धूपबत्ती का उपयोग करें।
  • हनुमान मंत्र का जाप करते समय जल का बर्तन और कुमकुम रखना भी लाभकारी होगा।
  • सुनिश्चित करें कि आपका मन किसी भी विचार से मुक्त हो, और आप जो पढ़ रहे हैं उस पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
  • भगवान हनुमान की पूजा अर्चना करते समय उन्हें गुड़-चने का प्रसाद, नारियल, इमरती चढ़ाएं।

आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

1. शांत मन

यदि आपका मन अन्य विचारों में व्यस्त है तो आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र जाप करने के लिए बैठने का कोई मतलब नहीं है। इसके लिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप अपनी ऊर्जा बिना किसी व्यवधान के केवल मंत्र जाप पर केंद्रित करें..!!

2. बहुत ऊंचे स्वर में न बोलें

बहुत से लोग आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप जोर-जोर से करते हैं, लेकिन ऐसा करने का यह कोई आदर्श तरीका नहीं है। मंत्र जाप करने का आदर्श तरीका मंत्र जाप की मात्रा को धीमा करना है ताकि आप केवल इसे सुन सकें।

3. निरंतर बने रहें

शक्तिशाली और शक्तिशाली बनने के लिए कई मंत्रों का कई बार जाप करना पड़ता है। संख्याएँ 7, 9, 51, 108 और 1008 के बीच भिन्न-भिन्न होती हैं। आपको तब तक मंत्र का जाप करते रहना चाहिए जब तक आपको सर्वोत्तम परिणाम दिखाई न देने लगें।

4. जप के दौरान बंद आंखे

वैसे तो आप आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप खुली आंखों से भी कर सकते हैं, लेकिन आंखें बंद करके करने पर इसका प्रभाव अधिक होता है। ऐसा करने से न केवल आपको बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी बल्कि आपको अपने पूरे शरीर में उस विशेष मंत्र के कंपन को महसूस करने में भी मदद मिलेगी।

5. सही उच्चारण

जब भी आप आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करें, तो सुनिश्चित करें कि आप सुसंगत और सही शब्दों का उपयोग करके मंत्र का जाप करें। गलत उच्चारण आपको फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आप कठिन शब्दों को लेकर भ्रमित हैं तो किसी बुजुर्ग से सही उच्चारण में मदद करने के लिए कहें।

निष्कर्ष

ज्योतिष के अनुसार, भगवान हनुमान की पूजा करने के कई तरीके हैं और आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करना उन तरीकों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप करने से न केवल आपके भीतर की कंपन शांत होती है बल्कि व्यक्ति को अपने भीतर और अपने आस-पास से सभी प्रकार की समस्याओं, भय और नकारात्मक ऊर्जाओं से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है।

यदि आप आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र को विधि और संपूर्ण श्रद्धा के साथ करना चाहते हैं और आपको पता नहीं है कि इसकी शुरुआत कैसे हो तो आप निश्चिंत हो जाएं क्योंकि इसमें आपकी मदद के लिए 99Pandit आपके साथ हैं। 99Pandit की मदद से आप वैदिक पंडित को अपने घर बुला कर विधि पूर्व आंजनेय कार्य सिद्धि मंत्र का जाप कर सकते हैं।

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Shiva Panchakshara Stotram Lyrics: शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित

Shiva Panchakshara Stotram Lyrics: ऊँ नमः शिवाय ! भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। जो भी भक्त महाकाल यानि भगवान शिव की आराधना करता है उसे जीवन भर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता न ही उसको जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यूं तो भगवान शिव के कई मंत्र हैं तथा स्तोत्र हैं, लेकिन शिव पंचाक्षर स्तोत्रम की अलग महिमा है।

इस शिव पंचाक्षर स्तोत्रम (Shiva Panchakshara Stotram Lyrics) से भगवान शिव की शक्ति और उनकी स्तुति की जाती है। माना जाता है कि इसे नियमपूर्वक पढ़ने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को जीवन के सभी पहलुओं में सफलता प्रदान करते हैं।

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम

आज हम इस लेख के माध्यम से भगवान शिव के प्रमुख स्तोत्र शिव पंचाक्षर स्तोत्र (Shiva Panchakshara Stotram Lyrics) के बारे में जानेंगे। साथ ही शिव पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व, लाभ, या स्तोत्र करने का सही तरीका भी जानेंगे।

इसके साथ ही अगर आपको अपने घर, कार्यालय, और मंदिर में किसी भी प्रकार की पूजा के लिए पंडित की जरूरत है तो आप हमारी 99Pandit की वेबसाइट से सत्यनारायण पूजा, गृह प्रवेश पूजा, नवग्रह शांति पूजा, आदि के लिए पंडित बुक कर सकते हैं।

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् क्या है? – What is Shiva Panchakshara Stotram?

भगवान शिव की आराधना के लिए पवित्र शब्द मंत्र पांच अक्षरों से बना है और इसे लोकप्रिय रूप से शिव पंचाक्षर मंत्र कहा जाता है- “न मा सि वा या”। शिव पंचाक्षर स्तोत्र जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव पर एक सुंदर स्तोत्र है। पंचाक्षरी मंत्र [नमः शिवाय] वेदों के ठीक मध्य में आता है।

पंचाक्षर- न, म, शि, वा, और य। हिंदू परंपराओं के अनुसार, मानव शरीर को पांच तत्वों से बना माना जाता है और ये पवित्र अक्षर इन तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ना पृथ्वी तत्व (पृथ्वी तत्व) को सक्रिय करता है, मा जल तत्व (जल कारक) के साथ भी ऐसा ही करता है, शि अग्नि तत्व (अग्नि तत्व) को सक्रिय करता है, वा वायु तत्व (वायु कारक) को सक्रिय करता है और अंत में हां आकाश तत्व (आकाश/अंतरिक्ष तत्व) को सक्रिय करता है।

इस लोकप्रिय स्तोत्र में, इनमें से प्रत्येक पवित्र अक्षर को शिव का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है और इस स्तोत्र में भगवान शिव के महान गुणों की प्रशंसा की जाती है। शिव पंचाक्षर मंत्र का भक्ति के साथ जप करने से इसकी दिव्य ऊर्जा अधिक बढ़ जाती है। इस मंत्र का जाप करने से आशीर्वाद मिलता है, उपचार होता है और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् संस्कृत में – Shiva Panchakshar Stotram in Sanskrit

|| शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् ||

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय

शिवाय गौरीवदनाब्जबृंदा
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय

वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्र देवार्चिता शेखराय ।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै वकाराय नमः शिवाय

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।
शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् इंग्लिश में – Shiva Panchakshar Stotram in English

|| Shiva Panchakshar Stotram ||

Nagendraharaya Trilochanaya
Bhasmangaragaya Mahesvaraya
Nityaya Suddhaya Digambaraya
Tasmai Na Karaya Namah Shivaya

Mandakini Salila Chandana Charchitaya
Nandisvara Pramathanatha Mahesvaraya
Mandara Pushpa Bahupushpa Supujitaya
Tasmai Ma Maraya Namah Shivaya

Shivaya Gauri Vadanabja Brnda
Suryaya Dakshadhvara Nashakaya
Sri Nilakanthaya Vrshadhvajaya
Tasmai Shi Karaya Namah Shivaya

Vashistha Kumbhodbhava Gautamarya
Munindra Devarchita Shekharaya
Chandrarka Vaishvanara Lochanaya
Tasmai Va Karaya Namah Shivaya

Yagna Svarupaya Jatadharaya
Pinaka Hastaya Sanatanaya
Divyaya Devaya Digambaraya
Tasmai Ya Karaya Namah Shivaya

Panchaksharamidam Punyam Yah Pathechchiva
Sannidhau Shivalokamavapnoti Sivena Saha Modate

शिव पंचाक्षर स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित – Shiva Panchakshar Stotram Meaning in Hindi

भगवान शिव को नमस्कार,
जो साँपों के स्वामी नागेन्द्र को अपने गले में धारण करता है;
तीन आंखों वाले भगवान, जिनका शरीर पवित्र राख से सुशोभित है;
शुद्ध एक; वह शाश्वत प्रभु जो आकाश को अपने वस्त्र के रूप में धारण करता है।
मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं, जो ‘न’ शब्द का रूप धारण करते हैं।

प्रभु को नमस्कार,
जिसके शरीर पर गंगाजल और चंदन का लेप लगा हो;
जो नंदी, दिव्य बैल के भगवान हैं, और जिनके परिचारक प्रमथ हैं;
जिनकी पूजा मंदार वृक्ष सहित असंख्य फूलों से की जाती है।
मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो ‘म’ शब्द का रूप धारण करते हैं।

भगवान शिव को नमस्कार,
सूर्य जो गौरी के उज्ज्वल चेहरे को कमल के बगीचे की तरह खिलता है;
दक्ष के यज्ञ का विध्वंसक;
दीप्तिमान नीले गले वाला व्यक्ति जिसके ध्वज पर बैल का चिह्न अंकित है।
मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं, जो ‘शि’ शब्द का रूप धारण करते हैं।

देवों के देव को नमस्कार है,
जिनकी पूजा भगवान इंद्र और अन्य देवताओं के साथ-साथ महान ऋषि वशिष्ठ, अगस्त्य और गौतम द्वारा की जाती है;
जिनकी आंखें सूर्य, चंद्रमा और अग्नि हैं।
मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं, जो ‘वा’ अक्षर का रूप धारण करते हैं।

प्रभु को नमस्कार है
जिसने यक्ष का रूप धारण किया था;
जिसके बाल लंबे और उलझे हुए हैं और जो हाथ में त्रिशूल पकड़ता है;
शाश्वत और दिव्य एक के लिए, आकाश में लिपटा हुआ।
मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूं, जो ‘य’ शब्द का रूप धारण करते हैं।

जो कोई भी भगवान शिव की उपस्थिति में इस मेधावी पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करता है, वह उनके लोक को प्राप्त करेगा और भगवान के साथ वहां आनंद मनाएगा।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का इंग्लिश में अर्थ – Shiva Panchakshar Stotram Meaning in English

Salutations to Lord Shiva,
Who carries Nagendra, the lord of snakes, around his neck;
The three-eyed Lord, whose body is adorned with holy ash;
The pure one; the eternal Lord who wears the sky as his garment.
I offer my salutations to Lord Shiva, who takes the form of the syllable na.

Salutations to the Lord,
Whose body is anointed with water from the Ganges and sandalwood paste;
Who is the Lord of Nandi, the divine bull, and whose attendants are the Pramathas;
Who is worshipped with innumerable flowers, including those from the Mandara tree.
I offer my salutations to Lord Shiva, who takes the form of the syllable ma.

Salutations to Lord Shiva,
The sun, which makes the radiant face of Gauri blossom like a garden of lotuses;
The destroyer of Daksha’s sacrifice;
The radiant blue-throated one whose flag bears the emblem of a bull.
I offer my salutations to Lord Shiva, who takes the form of the syllable śi.

Salutations to the God of the gods,
Who is worshipped by Lord Indra and the other deities, as well as the noble sages Vasishtha, Agastya, and Gautama;
Whose eyes are the sun, moon, and fire?
I offer my salutations to Lord Shiva, who takes the form of the syllable va.

Salutations to the Lord
Who adopted the form of a yaksha;
Whose hair is long and matted and who clasps a trident in his hand;
To the eternal and divine One, robed in the sky.
I offer my salutations to Lord Shiva, who takes the form of the syllable ya.

One who recites this meritorious five-syllable mantra in the presence of Lord Shiva will attain his realm and rejoice there with the Lord.

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम के लाभ – Benefits of Shiva Panchakshar Stotram

सफलता और समृद्धि के लिए

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम एक बहुत ही फलदायी मंत्र है जो भक्तों को जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए सही मार्ग या दिशा खोजने में सहायता प्रदान करता है। जब भी कोई व्यक्ति अटका हुआ महसूस करता है, तो उसे मानसिक रुकावट को दूर करने और सही रास्ते पर आने के लिए इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।

तनाव और परेशानी पर काबू पाएं

यह मंत्र एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है जो किसी के दिल और दिमाग को शांत करने में मदद करने के लिए जाना जाता है। इसलिए, जब कोई व्यक्ति तनावग्रस्त और चिंतित होता है तो यह मंत्र उसके लिए बहुत मददगार होता है। यह उस व्यक्ति को सकारात्मक और आरामदेह एहसास देता है।

यह खोई हुई आंतरिक ऊर्जा को बहाल करने और नए सिरे से शुरुआत करने में भी मदद करता है। प्राचीन युग के ऋषियों का मानना ​​है कि इस मंत्र के पवित्र अक्षरों का जाप शरीर और मन के लिए ध्वनि चिकित्सा और आत्मा के लिए अमृत की तरह है।

व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करता है

यह मंत्र आस-पास सकारात्मकता लाता है और भक्तों को बुरी नज़र या नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है। यह मंत्र मुश्किल समय में लोगों के लिए उम्मीद का स्रोत भी बनता है। यह व्यक्ति को हार मानने से रोकता है और अधिक प्रयास करने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाता है।

सभी मनोकामनाओं की पूर्ति

अक्सर कहा जाता है कि भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन पंचाक्षर स्तोत्रम मंत्र का जाप करना सबसे अच्छा तरीका है। इसमें भक्तों को भगवान शिव को प्रसन्न करके उनकी सभी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने की शक्ति है।

मोक्ष प्राप्ति

इस स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति की भक्ति भावना बढ़ती है और भक्तों को भगवान शिव के निवास तक एक सुंदर आध्यात्मिक यात्रा करने में मदद मिलती है। यह भक्तों को जीवन और मृत्यु के चक्र से भी मुक्त करता है और मोक्ष या मुक्ति की प्राप्ति में मदद करता है।

स्थिरता और कल्याण

इस स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति के कार्य और व्यवहार पवित्र होते हैं और उसमें जीवंत ऊर्जा आती है। यह हमारे मानस को भी बेहतर बनाता है और हमारे शरीर में कुछ चक्रों (ऊर्जा केंद्रों) को सक्रिय करता है जो हमारी चेतना को उत्तेजित करने में मदद करते हैं। यह बदले में व्यक्ति को शांत, स्थिर रखने में मदद करता है और व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक भलाई भी सुनिश्चित करता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का जाप करने से पहले या करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

  • अपने शरीर को साफ़ व नहाने के बाद इस मंत्र का जाप करें।
  • इस मंत्र का जाप करने से पहले मांसाहारी भोजन या शराब का सेवन करने से बचें। 
  • इस मंत्र का जाप करते समय दूसरों का बुरा न चाहें, अन्यथा इसका उल्टा असर हो सकता है।
  • सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए प्रत्येक शब्द का सही उच्चारण करने का प्रयास करें।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का जाप करने का सही तरीका

इस शिव पंचाक्षर स्तोत्रम (Shiva Panchakshara Stotram Lyrics) का जाप करना एक गहन आध्यात्मिक अभ्यास है, और इसे घर पर करने से इस अभ्यास से आपका जुड़ाव बढ़ता है। मंत्रों का प्रभावी ढंग से जाप करने में आपकी मदद करने के लिए यहां कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं:

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम

1. शांत स्थान चुनें

अपने घर में एक शांतिपूर्ण जगह खोजें जहाँ आपको कोई परेशान न करे। यह एक समर्पित ध्यान स्थान, आपके कमरे का एक कोना या यहाँ तक कि बाहर भी हो सकता है।

2. माहौल तैयार करें

आप चाहें तो मोमबत्ती या धूपबत्ती जला सकते हैं, हल्का संगीत बजा सकते हैं या शांत वातावरण बनाने के लिए सिंगिंग बाउल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपको ध्यान केंद्रित करने और अपने अभ्यास के लिए मूड सेट करने में मदद मिल सकती है।

3. आसन

आराम से ऐसी स्थिति में बैठें जिससे आप तनावमुक्त होने के साथ-साथ सतर्क भी रहें। आम मुद्राओं में फर्श पर, कुशन पर या कुर्सी पर पैर मोड़कर बैठना शामिल है, जिसमें आपके पैर ज़मीन पर सपाट हों।

4. सांस पर ध्यान केंद्रित करें

मंत्रोच्चार शुरू करने से पहले, कुछ देर गहरी सांस लें। अपनी नाक से सांस लें, कुछ देर के लिए रोककर रखें और मुंह से सांस छोड़ें। इससे आपके मन को केंद्रित करने और मंत्रोच्चार के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।

5. जप तकनीक

  • उच्चारण : मंत्र के सही उच्चारण पर ध्यान दें। इससे उसका प्रभाव बढ़ सकता है।
  • आवाज़ : आप अपनी सुविधा और वातावरण के अनुसार, धीरे से, या ऊंची आवाज़ में जप कर सकते हैं।
  • पुनरावृत्ति : मंत्र को एक निश्चित संख्या में दोहराएं (जैसे, 108 बार, अक्सर माला के साथ) या एक निश्चित अवधि के लिए दोहराएं।

6. नियमित अभ्यास

निरंतरता महत्वपूर्ण है। समय के साथ अपने अभ्यास और जुड़ाव को गहरा करने के लिए मंत्र जप को अपनी दैनिक या साप्ताहिक दिनचर्या में शामिल करने का प्रयास करें।

इन दिशानिर्देशों का पालन करके आप घर पर ही एक सार्थक और समृद्ध शिव पंचाक्षर स्तोत्रम जप अभ्यास बना सकते हैं।

निष्कर्ष – Conclusion

मुझे आशा है आपको हमारा ये लेख “Shiva Panchakshara Stotram Lyrics” पसंद आया होगा। यह मंत्र भगवान शिव को समझने और उनके महत्व को जानने के लिए है, खासकर भक्तों के लिए। ऐसा कहा जाता है कि शिव पंचाक्षर स्तोत्रम भक्तों में भक्ति भावना को बढ़ाने में मदद करता है और उन्हें भगवान शिव के करीब ले जाता है।

ऋषियों का भी मानना ​​है कि यह मंत्र आपको परम प्रकृति में ले जाता है और इसके शब्द मूलतः आत्मा, मन और शरीर के लिए ध्वनि चिकित्सा है। शिव पंचाक्षर स्तोत्रम मंत्र मानव जाति के लिए सबसे शक्तिशाली उपहार हैं और वे इतने शक्तिशाली हैं कि वे आपके जीवन के वर्तमान परिदृश्य को बदलने और आपके सभी दुखों को दूर करने की क्षमता रखते हैं।

ये शिव पंचाक्षर स्तोत्रम इतना दिव्य और जादुई है और इसे भजन या प्रार्थना के रूप में गाया जा सकता है। अगर आप भी भगवान शिव का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो आपको पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ करना चाहिए।

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम आपको आशीर्वाद देने, आपको ठीक करने और महादेव की कृपा से जो कुछ भी आप चाहते हैं उसे पाने के लिए जाना जाता है। क्या आपने इस मंत्र का जप करने की कोशिश की है? दिव्य मंत्रों और उनके वास्तविक अर्थों के बारे में अधिक जानने के लिए जुड़े रहे 99Pandit के साथ।

हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है भजन हिंदी लिरिक्स

Hara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai Bhajan Lyrics: भजन “हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है” बाबा खाटू श्याम जी के भक्तों का प्रिय भजन है। यह भजन बाबा खाटू श्याम को समर्पित है तथा भगवान खाटू श्याम की स्तुति करने या उनको रिझाने के लिए प्रयोग किया जाता है। ये मधुर भजन को कन्हैया मित्तल ने अपनी सुरीली आवाज़ में गाया है। कोई भी धार्मिक उत्सव या पर्व भजन (हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है) के बिना अधूरा है।

खाटू श्याम जी को भगवान श्री कृष्ण का ही रूप माना जाता है। अपने भक्तों के दिलों में खास जगह प्रकट करने वाले देव हैं भगवान खाटू श्याम। भगवान खाटू श्याम को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है- जैसे खाटू नरेश, बाबा श्याम, हारे का सहारा, मोरवी नंदन, शीश के दानी, कलयुग के अवतारी, आदि।

हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है

उन्हें त्याग, करुणा या चमत्कारी आशीर्वाद के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनका मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है और देश भर से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

आज 99Pandit के साथ जानते हैं खाटू श्याम जी के इस मधुर भजन (हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है) के बारे में मेरे साथ ही ऐसे और भजन सुनने के लिए अभी विजिट करें, 99Pandit की वेबसाइट जिस पर आपको पूजा एवं पंडित संबंधित सभी जानकारी मिलेगी। तो बिना किसी देर के जानते हैं क्या है “हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है गीत”

हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है भजन – Hara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai Bhajan Lyrics in Hindi

|| हारा हु बाबा भजन ||

हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

मेरे मांझी बन जाओ मेरी नाव चला जाओ
बेटे को बाबा श्याम गले लगा जाओ
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

मैंने सुना है तू दुखड़े मिटाता
बिन बोले भक्तों की बिगड़ी बनाता
मिलता ना किनारा है ना कोई और सहारा है
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

तुमसे ही जीवन मेरा ओ मेरे बाबा
कैसे चलेगा समझ ना आता
तुम धीर बंधाते हो तो साँसें चलती हैं
मुझे समझ ना आता है मेरी क्या गलती है
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

परिवार मेरा तेरे गुण है गाता
दोषी तो मैं हूँ उन्हें क्यों सताता
उनको भी भरोसा है तूने पाला पोसा है
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

मेरे मांझी बन जाओ मेरी नाव चला जाओ
बेटे को बाबा श्याम गले लगा जाओ
हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है
जीतूंगा एक दिन मेरा दिल ये कहता है

Hara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai Bhajan Lyrics in English – हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है भजन लिरिक्स

|| Haara Hoon Baba Bhajan ||

Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

Mere Maajhi Ban Jaao, Meri Naav chala Jaao
Bete Ko Baba Shyam Gale Laga Jaao
Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

Maine Suna Hai Tu Dukhde MItata
Bin Bole Bhakton Ki Bigdi Banata
Milta Naa Kinara Hai Na Koi Aur Sahara Hai
Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

Tumse Hi Jeevan Mera O Mere Baba
Kaise Chalge Samajh Naa Aata
Tum Dheer Bandhaate Ho To Saansein Chalti Hain
Mujhe Samajh Naa Aata Hai Meri Kya Galti Hai
Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

Parivaar Mera Tere Gun Hai Gaata
Doshi To Main Hoon Unhe Kyun Satata
Unko Bhi Bharosa Hai Tune Paala Posa Hai
Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

Mere Maajhi Ban Jaao Meri Naav chala Jaao
Bete Ko Baba Shyam Gale Laga Jaao
Haara Hoon Baba Par Tujhpe Bharosa Hai
Jeetunga Ek Din Mera Dil Ye Kehta Hai

खाटू श्याम की कथा

खाटू श्याम की कहानी का उल्लेख हिंदू धर्म के सबसे महान महाकाव्यों में से एक महाभारत में मिलता है। किंवदंतियों के अनुसार, खाटू श्याम भीम (पांडव भाइयों में से एक) के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक का पुनर्जन्म है। छोटी उम्र से ही बाबरीक एक असाधारण योद्धा थे।

उन्होंने तीन बाण धारी का नाम भी अर्जित किया, जिसका अर्थ है “तीन बाणों का वाहक”, जो उन्होंने भगवान शिव से प्राप्त किया था। प्रत्येक बाण में दिव्य शक्ति थी – एक लक्ष्य को चिह्नित कर सकता था, दूसरा दुश्मनों से सहयोगियों की पहचान कर सकता था, और तीसरा सभी चिह्नित लक्ष्यों को नष्ट कर सकता था।

हारा हूँ बाबा पर तुझपे भरोसा है

कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले, एक गुणी क्षत्रिय के रूप में, बर्बरीक ने उस पक्ष के लिए लड़ने की कसम खाई जो उसे कमज़ोर लगे। पांडवों के सलाहकार भगवान कृष्ण बर्बरीक की क्षमताओं और शक्ति से अवगत थे। उन्होंने बर्बरीक का परीक्षण किया और बाद में बर्बरीक की कसम के निहितार्थों को समझाते हुए अपना असली रूप प्रकट किया।

कृष्ण ने महसूस किया कि बर्बरीक की निष्ठा लगातार इस आधार पर बदलती रहेगी कि कौन हार रहा है, जो विरोधाभासी रूप से एक अंतहीन चक्र की ओर ले जाएगा और संभावित रूप से सभी शक्तियों के विनाश का परिणाम होगा।

शीश के दानी- बर्बरीक

कृष्ण उस संभावना से बचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बर्बरीक से बलि देने के लिए कहा। बर्बरीक परम भक्ति के संकेत के रूप में अपना सिर अर्पित करने के लिए सहमत हो गए। निस्वार्थता और आध्यात्मिक अनुशासन के इस कार्य ने भगवान कृष्ण को प्रभावित किया। उन्होंने बर्बरीक को आशीर्वाद दिया और वादा किया कि उनका नाम और कहानी विशेष रूप से कलियुग (हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार वर्तमान युग) में याद और पूजनीय रहेगी।

भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को अमरता का भी वादा किया और उसे आश्वासन दिया कि जो कोई भी उसके पास आएगा उसकी इच्छा पूरी होगी। बर्बरीक का सिर तब एक पहाड़ी पर रखा गया था, जहाँ उसने कुरुक्षेत्र की पूरी लड़ाई देखी थी। किंवदंती है कि बर्बरीक की आत्मा ने खाटू श्याम का रूप धारण किया, जो कृष्ण के सबसे दयालु और सुलभ रूपों में से एक है।

खाटू श्याम को कलियुग का देवता माना जाता है, वर्तमान युग जहाँ नैतिक पतन और पीड़ा प्रचलित है। खाटू श्याम की किंवदंती के कई संस्करण हैं, लेकिन प्रत्येक संस्करण में, उनकी भक्ति साबित करने के लिए उनका अंतिम बलिदान स्थिर है।

हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है भजन गाने/सुनने के फायदे

भजन गायन या भजन सुनने से कई फायदे होते हैं। अगर आप “हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है” जैसे भजन गाते हैं या सुनते हैं तो इसके खास फायदे कुछ इस प्रकार नीचे दिए गए हैं:

  • जब हम भजन गाते या सुनते हैं, तो हम सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर सकते हैं। 
  • भक्ति गायन, जिसे भजन या कीर्तन के रूप में जाना जाता है, मन को शांत करने में मदद कर सकता हैं। 
  • जब हम तनाव, चिंता या अन्य मनोवैज्ञानिक मुद्दों से गुज़र रहे होते हैं, तो हम भजन सुन सकते हैं या गा सकते हैं। जब हम ऐसा करते हैं, तो यह हमारे दिमाग को शांत और सुकून देने में मदद करता है।
  • गायक और श्रोता दोनों ही भजनों से लाभ उठा सकते हैं। वे हमें अपनी भक्ति पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकते हैं।
  • जब हम ध्यान करते हुए भजन गाते या गाते हैं, तो वे हमारी एकाग्रता और ध्यान में सुधार कर सकते हैं। यह हमारी आत्मा से जुड़ने का एक शानदार तरीका भी है।
  • जन हमारे विश्लेषणात्मक कौशल में सुधार कर सकते हैं और हमें अधिक चौकस बना सकते हैं।
  • जब हम भजन गाते हैं, तो यह डोपामाइन के स्राव में सहायता कर सकता है। इसे फील-गुड हार्मोन के रूप में भी जाना जाता है।

निष्कर्ष

मुझे आशा है हमारा लेख “हारा हूं बाबा पर तुझपे भरोसा है भजन लिरिक्स” को पढ़कर अच्छा एहसास हुआ होगा। हमारी 99Pandit की टीम आगे भी आपके लिए ऐसा या मधुर गीत और भजन के लिरिक्स पेश करेगी।

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Damodar Ashtakam Lyrics in Hindi: दामोदर अष्टकम भजन हिंदी में

Damodar Ashtakam Lyrics in Hindi: दामोदर अष्टकम भगवान श्री कृष्ण का एक भजन से जो कृष्ण की बाल लीलाओं को बताता है। दामोदर अष्टकम दो शब्दों से मिलकल बना है जिसका अर्थ- दामोदर मतलब भगवान श्री कृष्ण का नाम और अष्टकम अर्थात आठ भागों वाली रचना।

पद्म पुराण में पाया जाने वाला दामोदर अष्टकम एक ऐसा ही प्रार्थना-गीत है। यह गीत महान ऋषि सत्यव्रत मुनि द्वारा रचित है। यह भगवान श्री कृष्ण के बारे में है, जिनके पेट ( उदार ) को रस्सी ( दामा ) से बांधा गया था और इसलिए उन्हें दामोदर के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक मास भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का सबसे प्रिय महीना माना जाता है।

दामोदर अष्टकम

जो भी व्यक्ति कार्तिक मास में भजन का पाठ करता है उसके जीवन में सदा ही सुख शांति और वैभव की प्राप्ति होती है। उसको जीवन में कभी भी किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि भगवान श्री कृष्ण हर परिस्थिती में उसके साथ रहते हैं।

शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि दामोदर अष्टकम का पाठ करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह गीत एक सहज काव्यात्मक प्रवाह में वर्णन और व्याख्या को एकीकृत करता है। इसके साथ ही हर रोज़ तुलसी जी के समक्ष दीप दान भी जरूर करना चाहिए। भगवान की कृपा पाने के लिए आज हम आपको दामोदर अष्टकम पाठ के बारे में बताने जा रहे हैं।

दामोदर अष्टकम क्या है? – What is the Damodar Ashtakam?

दामोदर अष्टकम भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं के बारे में एक सुंदर भजन है। पदम पुराण में वर्णित दामोदर अष्टकम की रचना सत्यव्रत मुनि ने की है । उनका आकर्षक नाम दामोदर उनकी “लीला” या नाटकों में से एक का उदाहरण है। दामोदर अष्टकम में भगवान कृष्ण के अपनी माँ यशोदा के साथ शरारती व्यवहार को दर्शाया गया है।

यह भजन भगवान कृष्ण की अपनी माँ से भागने की प्रारंभिक प्रवृत्ति की कहानी बताता है जब वह वृंदावन की गोपियों से मक्खन चुराने के लिए उन्हें दंडित करना चाहती थी। कार्तिक के पवित्र महीने में हर दिन, दुनिया भर में भगवान कृष्ण के भक्त इस प्रार्थना का पाठ करते हैं और भगवान को घी के दीपक भेंट करते हैं। हर पंक्ति में भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है। इस लीला में, भगवान कृष्ण अपने भक्तों की आराधना के आगे आत्मसमर्पण कर देते हैं।

दामोदर अष्टकम भजन – Damodar Ashtakam Lyrics in Hindi

नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं
लस्तकुंडलं गोकुले ब्रजमानं
यशोदाभियोलुखलाधावमानं
परमृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या ॥ 1 ॥

रुदन्तं मुहुर्नेत्र युग्मं मृजन्तम्
कर्मभोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्
मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठ
स्थित-ग्रेवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ 2 ॥

इतिदृक् स्वलीलाभिरानंद कुंडे
स्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्
तदियेशितज्ञेषु भक्तिर्जित्वम्
पुनः प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे ॥ 3 ॥

वरं देव! मोक्षं न मोक्षपूर्णं वा
न चान्यं वृनेऽहं वरेषादपीह
इदं ते पूर्णनाथ गोपाल बालं
सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः ॥ 4 ॥

इदं ते मुखमभोजम् अत्यंत-नीलैः
वृत्तं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश्च गोप्य
मुहुशुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मे
मनस्याविरास्तमलं लक्षलाभैः ॥ 5 ॥

नमो देव दामोदरनन्त विष्णो
प्रभो दुःख-जलाब्धि-मग्नम्
कृपा-दृष्टि-वृष्टिति-दिनंनु
गृहाणेष मामज्ञमेध्यक्षिदर्शकः ॥ 6 ॥

कुबेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्
त्वया मोचितौ भक्ति-भजौ कृतौ च
तथा प्रेम-भक्तिं स्वकं मे प्रयच्छ
न मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेः॥ 7 ॥

नमस्तेऽस्तु दम्ने स्फुर्द-दीप्ति-धाम्ने
त्वदियोदरायथ विश्वस्य धम्ने
नमो राधायै त्वदीय-प्रियायै
नमोऽनन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ 8 ॥

दामोदर अष्टकम भजन का हिंदी अर्थ – Meaning of Damodar Ashtakam in Hindi

1. मैं उन भगवान को नमन करता हूँ जो परम आनंद के साक्षात स्वरूप हैं, जिनके कानों के कुंडल उनके गालों को छूते हैं, जिनका निवास गोकुल है और जिन्होंने गोपियों द्वारा छिपाकर रखे गए माखन को चुरा लिया है। माँ यशोदा उनसे बहुत क्रोधित हैं क्योंकि उन्होंने माखन की मटकी तोड़ दी है। माँ यशोदा से डरकर वह तेजी से कूदकर भागा, लेकिन अंततः माँ यशोदा ने उसे पकड़ लिया।

2. अपनी माता को कोड़े मारते देखकर वह भय के मारे रोने लगता है और बार-बार अपने कमल जैसे हाथों से अपनी आँखें मलता है। उसकी आँखें भय से भरी हुई हैं और वह तेजी से साँस ले रहा है, जिससे उसके त्रिशूलयुक्त गले में मोतियों की माला हिल रही है। मैं उन परमेश्वर को प्रणाम करता हूँ, जिनके पेट को माता यशोदा ने प्रेम की रस्सी से बाँध रखा है।

Damodar Ashtakam Lyrics in Hindi

3. भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को देखकर गोकुल के सभी निवासी आनंद में डूबे हुए हैं। जो भक्त केवल वैकुंठ में नारायण के भव्य स्वरूप की ओर आकर्षित होते हैं, उनके लिए भगवान यहाँ प्रकट करते हैं: “मैं शुद्ध प्रेममय भक्ति से अभिभूत हूँ।” परम प्रभु दामोदर को मेरा शत-शत प्रणाम।

4. हे प्रभु, यद्यपि आप सभी प्रकार के वरदान दे सकते हैं, परन्तु मुझे आपसे सांसारिक जीवन से मुक्ति की आशा नहीं है, न ही मुझे आपके दिव्य धाम वैकुंठ में स्थान चाहिए, न ही किसी आशीर्वाद की, हे प्रभु, मैं तो केवल यही प्रार्थना करता हूँ कि आपके बाल रूप के दर्शन सदैव मेरे हृदय में रहें। इसके अतिरिक्त मेरी कोई अन्य इच्छा नहीं है।

5. हे प्रभु! घुंघराले बालों से घिरा आपका श्यामवर्णी कमल मुख, माता यशोदा के चुम्बनों से बिम्ब फल के समान लाल हो गया है। मुझे किसी सांसारिक सुख की आवश्यकता नहीं है, केवल यह दर्शन ही मेरे मन में सदैव बना रहे।

6. हे प्रेम के सागर! दामोदर! हे अनंत विष्णु! मुझ पर प्रसन्न होइए! मैं दुःख के सागर के बीच में डूबा हुआ हूँ। कृपया मुझ पर अपना आशीर्वाद बरसाइए और मुझ क्षुद्र पर अपनी दयापूर्ण अमृत दृष्टि डालिए।

7. हे दामोदर! जब माता यशोदा ने आपको चक्की में बाँध दिया था, तब आपने कुबेर के पुत्रों (मणिग्रीव और नलकुवर) को नारद मुनि के वनवास से मुक्ति दिलाई थी। वे वृक्ष होने के शाप से मुक्त हो गए और आपकी प्रेममयी भक्ति के कारण आपकी शरण में आए। जैसे आपने कुबेर के पुत्रों को आशीर्वाद दिया, वैसे ही मुझ पर भी अपनी कृपा बरसाइए। मुझे किसी प्रकार की मुक्ति की इच्छा नहीं है।

8. हे प्रभु, मैं उस महान रस्सी को अपनी विनम्र श्रद्धा अर्पित करता हूँ जिसने आपके उदर को बाँधा था जहाँ से भगवान ब्रह्मा, जिन्होंने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया था, का जन्म हुआ था। मैं आपकी प्रिय राधारानी के चरण कमलों को बार-बार प्रणाम करता हूँ। और आपके अनंत आनंद स्वरूपों को प्रणाम करता हूँ।

कार्तिक मास में दामोदर अष्टकम जाप करने का महत्व

कार्तिक वह महीना है जब कृष्ण भक्त भगवान कृष्ण की शरारती बचपन की लीलाओं को याद करते हैं। दामोदर अष्टकम में माता यशोदा द्वारा कृष्ण को प्रेम के बंधन में बांधने की कहानी है। कार्तिक के शुभ महीने के दौरान दामोदर अष्टकम का पाठ भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को गहरा करता है।

स्कंद पुराण में कार्तिक मास की महिमा का वर्णन किया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है, गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है, तथा कार्तिक के समान कोई मास नहीं है।

यह महिना भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय महीना है और उनके भक्तों के लिए सबसे पवित्र महीना है। यह महीना पूजा-पाठ, दान और संयम के लिए बहुत अच्छा है, जो व्यक्ति को स्वस्थ, धनवान, दीर्घायु और सुखी बनाता है।

यह महीना तपस्या के लिए अच्छा है, जो ज्ञान और शांति प्रदान करता है। कार्तिक महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से पिछले जन्मों के कई पाप दूर हो जाते हैं क्योंकि इस महीने भगवान हरि जल में निवास करते हैं।

भक्तों के लिए घी का दीपक अर्पित करना बहुत लाभकारी होता है क्योंकि इससे कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ती है। दामोदर अष्टकम का गायन और घी का दीपक अर्पित करने से पिछले जन्मों के संचित पाप और क्लेश पल भर में नष्ट हो जाते हैं।

दामोदर अष्टकम से सम्बंधित कथा – Story Related to Damodar Ashtakam

भगवान कृष्ण अपनी हमेशा की शरारतों में से एक कर रहे थे। उन्होंने मक्खन की एक मटकी तोड़ दी और उसे बंदरों को खिलाने लगे। उनकी माँ यशोदा ने उन्हें पकड़ लिया और तय किया कि अब उन्हें सज़ा देने का समय आ गया है। उन्होंने रस्सी से उन्हें चक्की के ओखली से बाँधने की कोशिश की। हालाँकि, चाहे वह कितनी भी रस्सी का इस्तेमाल करें, वह हमेशा दो इंच कम ही पड़ती।

यह तब तक चलता रहा जब तक माता यशोदा थक नहीं गईं। अंत में , उनके प्रयासों और प्रेम को देखते हुए, श्री कृष्ण ने खुद को बंधन में बंधने दिया। रस्सी हमेशा दो इंच छोटी रहती थी, जो यह दर्शाती है कि भगवान को बांधने के लिए भक्ति और प्रयास की आवश्यकता होती है। एक इंच भक्त के सच्चे प्रयास का प्रतीक है और दूसरा इंच भगवान की दया का। जब दोनों एक साथ आते हैं, तो भगवान प्रेम से बंध जाते हैं।

दामोदर अष्टकम

माता यशोदा ने भगवान कृष्ण को ओखली से बांध दिया और अपना काम करने लगीं। नन्दभवन के बाहर यमलार्जुन के दो वृक्ष थे। एक का नाम था नलकुबेर और दूसरे का नाम था मणिग्रीव, जिसे नारद जी ने श्राप दिया था।

भगवान श्री कृष्ण को उन्हें भी मुक्त करना था। श्री कृष्ण ओखली को खींचकर नंदभवन से बाहर आ गए और ओखली को दोनों पेड़ों के बीच फ़सा दिया और जोर से खींचा। दोनों वृक्ष गिरे और उनमें से दो दिव्य पुरुष प्रकट हुए।

नलकुबेर और मणिग्रीव ने अपने पिछले जन्मों में बहुत नुकसान और विनाश किया था। नारद जी के श्राप के कारण उन दोनों को नंदबाबा के आँगन में वृक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को देखकर वे दोनों श्राप से मुक्त हो गये।

श्री कृष्ण से आशीर्वाद मांगा- Blessings from Shri Krishna

  • आज के बाद हमारे मुख से केवल श्री कृष्ण का नाम, दामोदर अष्टकम पाठ, और उनकी कहानियाँ ही निकलें।
  • यदि मैं अपने कानों से कुछ सुनूं तो वह आपकी स्तुति, आपकी कथा और आपका कीर्तन हो।
  • यदि हम अपने हाथों से कोई काम करते हैं तो वह आपकी सेवा है, संतों की सेवा है, मंदिर की सेवा है।
  • आप सदैव हमारे मन में विद्यमान रहें।
  • सभी का अभिवादन करने के लिए हमारा सिर झुका रहना चाहिए क्योंकि आप सभी लोगों के बीच मौजूद हैं।
  • हमारी आँखें सदैव तुम्हें देखती रहें, ऐसा आशीर्वाद हमें दो। भगवान श्री कृष्ण ने उन सभी को वरदान दिया और नलकुबेर और मणिग्रीव भगवान के पास चले गए।

दामोदर अष्टकम का पाठ करने के लाभ – Benefits of Chanting Damodar Ashtakam

1. भक्ति में वृद्धि

दामोदर अष्टकम का जाप भगवान कृष्ण के दामोदर रूप की महिमा करता है, भक्तों को उनकी बचपन की लीलाओं की याद दिलाता है। इससे कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति मजबूत होती है।

2. आध्यात्मिक शुद्धि

कार्तिक मास को आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है, और इस अवधि के दौरान दामोदर अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति का हृदय भौतिक इच्छाओं और पापों से शुद्ध हो जाता है।

3. कृष्ण की कृपा प्राप्त करना

शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक के दौरान दामोदर अष्टकम का पाठ या गायन करते समय घी का दीपक अर्पित करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह उनकी विशेष दया और आशीर्वाद को आकर्षित करता है।

4. इच्छाओं की पूर्ति

दामोदर अष्टकम को ईमानदारी से पढ़ने से आध्यात्मिक इच्छाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है, खासकर कृष्ण के साथ संबंध को गहरा करने में।

5. मुक्ति प्राप्त करना

कहा जाता है कि कार्तिक मास के दौरान दामोदर अष्टकम का पाठ मन को भगवान की लीलाओं और महिमाओं पर केंद्रित करके जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) प्रदान करता है।

6. कार्तिक में विशेष फल

कार्तिक मास को असीमित आध्यात्मिक फल का महीना कहा जाता है। इस महीने में किए गए कार्य, विशेष रूप से दामोदर अष्टकम जैसी प्रार्थनाओं का जाप करने से कई गुना लाभ मिलता है।

निष्कर्ष – Conclusion

निष्कर्ष के तौर पर, मुझे आशा है कि यह लेख “Damodar Ashtakam Lyrics in Hindi” आपकी सभी जरूरतों को पूरा करेगा। दामोदर अष्टकम के बोल भगवान कृष्ण को माता यशोदा द्वारा प्रेम की रस्सी से बांधने के बारे में हैं।

शास्त्रों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति कार्तिक के शुभ महीने में भगवान कृष्ण को घी का दीपक अर्पित करता है और दामोदर अष्टकम (भगवान की महिमा करते हुए 8 छंद) गाता है, उसे अपने पिछले पापों से छुटकारा मिल जाता है और भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति विकसित हो जाती है।

दामोदर अष्टकम, एक भजन है जो भगवान कृष्ण की बचपन की शानदार लीलाओं का वर्णन करता है। यह स्तोत्र पद्म पुराण से लिया गया है। यह सत्यव्रत मुनि ने नारद मुनि और शौनक ऋषि को कहा था। भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में कहा है कि सभी महीनों में से कार्तिक उन्हें सबसे प्रिय है।

यह महीना विशेष है क्योंकि यह भगवान कृष्ण की प्रेमिका श्रीमती राधारानी का प्रतिनिधित्व करता है। दामोदर अष्टकम स्तुति, लालसा और इन गुणों की खोज है ताकि हम मुक्ति और आत्मा के बारे में भी भूल सकें और एक आनंदमय जीवन जी सकें।

हम आपसे अलविदा लेंगे, हम बाद में ऐसे दिलचस्प लेख लेकर आएंगे। पूजा और पंडित सेवाओं के लिए 99Pandit से निसंकोच संपर्क करें।

Ahoi Mata ki Aarti Lyrics: अहोई माता की आरती हिंदी में

Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics: अहोई माता की आरती का जाप अहोई माता को प्रसन्न करने के लिए ही किया जाता है| कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी के रूप में मनाया है| इस तिथि के दिन अहोई माता की पूजा के साथ – साथ उनकी अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics) करना भी जातकों के लिए बहुत ही लाभकारी होता है|

सभी महिलाएं इस दिन उपवास रखकर भगवान शिव तथा माता पार्वती के साथ – साथ अहोई माता की पूजा करते हुए अपने बच्चों की लम्बी उम्र के लिए उनसे प्रार्थना करती है| जो भी महिला इस दिन पूजा करने के पश्चात अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics) का जाप करती है, उन्हें माता की असीम कृपा प्राप्त होती है| आइये जानते है अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics) के बारे में|

अहोई माता की आरती

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अहोई माता की आरती – Ahoi Mata Aarti Lyrics in Hindi

|| अहोई माता की आरती ||

जय अहोई माता,
जय अहोई माता ।
तुमको निसदिन ध्यावत,
हर विष्णु विधाता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला,
तू ही है जगमाता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

माता रूप निरंजन,
सुख-सम्पत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत,
नित मंगल पाता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

तू ही पाताल बसंती,
तू ही है शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक,
जगनिधि से त्राता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

जिस घर थारो वासा,
वाहि में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले,
मन नहीं घबराता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

तुम बिन सुख न होवे,
न कोई पुत्र पाता ।
खान-पान का वैभव,
तुम बिन नहीं आता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता,
क्षीर निधि जाता ।
रतन चतुर्दश तोकू,
कोई नहीं पाता ॥
ॐ जय अहोई माता ॥

श्री अहोई माँ की आरती,
जो कोई गाता ।
उर उमंग अति उपजे,
पाप उतर जाता ॥

ॐ जय अहोई माता,
मैया जय अहोई माता ।

अहोई माता की आरती

Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics in English – ॐ जय अहोई माता

|| Ahoi Mata Ki Aarti ||

Jai Ahoi Mata,
Jai Ahoi Mata.
Tumko nisdin dhyaavat,
Har Vishnu vidhata.
Om Jai Ahoi Mata.

Brahmani, Rudrani, Kamala,
Tu hi hai jagamata.
Surya-chandra dhyaavat,
Narad Rishi gaata.
Om Jai Ahoi Mata.

Mata roop niranjana,
Sukh-sampatti daata.
Jo koi tumko dhyaavat,
Nit mangal paata.
Om Jai Ahoi Mata.

Tu hi paataal basanti,
Tu hi hai shubhdaata.
Karm-prabhav prakaashak,
Jagannidhi se traata.
Om Jai Ahoi Mata.

Jis ghar thaaro vaasa,
Vaahi mein gun aata.
Kar na sake soi kar le,
Man nahin ghabraata.
Om Jai Ahoi Mata.

Tum bin sukh na hove,
Na koi putra paata.
Khaan-paan ka vaibhav,
Tum bin nahin aata.
Om Jai Ahoi Mata.

Shubh gun sundar yukta,
Ksheer nidhi jaata.
Ratan chaturdash toku,
Koi nahin paata.
Om Jai Ahoi Mata.

Shri Ahoi Maa ki aarti,
Jo koi gaata.
Ur umang ati upaje,
Paap utar jaata.

Om Jai Ahoi Mata,
Maiyya Jai Ahoi Mata

Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: माता लक्ष्मी जी की आरती हिंदी में

Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: माता लक्ष्मी को धन – संपत्ति तथा सौभाग्य की देवी माना जाता है| आज हम इन्ही माता लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi) के बारें में जानेंगे| माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी है जो कि इस सम्पूर्ण सृष्टि के पालनकर्ता है| माना जाता है कि माँ लक्ष्मी समुन्द्र मंथन के समय प्रकट हुई थी| भगवान विष्णु को लक्ष्मी माता ने ही स्वयं पति के रूप में चुना था|

माना जाता है कि माता लक्ष्मी की पूजा करने के पश्चात लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi) की जाती है| धार्मिक ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ही इस व्रत तथा त्योहारों के अलावा भी सुबह – शाम माता लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi) करनी चाहिए| यदि प्रतिदिन नहीं को सके तो गुरुवार तथा शुक्रवार के दिन भी माता लक्ष्मी जी की आरती की जा सकती है|

Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

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कैसे करे लक्ष्मी जी की आरती – Lakshmi Ji Ki Aarti Kaise Kare

माना जाता है कि लक्ष्मी जी की आरती में कुल 16 पंक्तियाँ होती है| पौराणिक मान्याताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को शक्ति तत्व माना जाता है| इसलिए लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi) को ऊंची राग के साथ माध्यम स्वर तथा माध्यम वेग में गाने की सलाह दी जाती है|

माँ लक्ष्मी जी की आरती का उच्चारण सही रूप से किया जाना चाहिए| लक्ष्मी जी आरती के लिए  शुद्ध कपास यानि रुई से बनी हुई घी की बत्ती होनी चाहिए| लक्ष्मी जी आरती के समय तेल से बनी हुई बत्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए|

कपूर की सहायता से भी माँ लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi) की जाती है| आरती के लिए बत्तियों की संख्या एक, पांच, नौ, ग्यारह या इक्कीस मानी जाती है| लक्ष्मी जी की आरती को घडी की दिशा में ही सही तरीके से होनी चाहिए|

लक्ष्मी जी की आरती करने से पहले पढ़े यह मंत्र – Mantra Before Lakshmi Ji Ki Aarti

या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।

श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥

लक्ष्मी जी की आरती – Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| लक्ष्मी जी की आरती || 

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥

पद्मालये नमस्तुभ्यं,नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूत हितार्थाय,वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥ 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

Lakshmi Ji Ki Aarti Lyrics in English – ॐ जय लक्ष्मी माता

|| Lakshmi Ji Ki Aarti ||

Mahalaxmi Namastubhyam, Namastubhyam Sureshwari.
Hari priye Namastubhyam, Namastubhyam Dayanidhe.

Padmaalaye namastubhyam, namastubhyam cha sarvade.
Sarvabhoot hitaarthaay, vasu srishtim sada kurun.

Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata.
Tumko nishidin sevat, Hari Vishnu vidhata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Uma, Rama, Brahmani, tum hi jag-maata.
Surya-chandrama dhyavat, Narad rishi gaata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Durga roop niranjani, sukh sampatti data.
Jo koi tumko dhyavat, riddhi-siddhi dhan paata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Tum paatal-nivasini, tum hi shubhdata.
Karma-prabhav-prakashini, bhavanidhi ki traata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Jis ghar mein tum rahti, sab sadgun aata.
Sab sambhav ho jata, man nahi ghabrata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Tum bin yajna na hote, vastra na koi paata.
Khan-paan ka vaibhav, sab tumse aata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Shubh-gun mandir sundar, kshirodadhi-jaata.
Ratna chaturdasha tum bin, koi nahi paata.

Om Jai Lakshmi Mata.

Mahalaxmiji ki aarti, jo koi jan gaata.
Ur anand samata, paap utar jata.

Om Jai Lakshmi Mata.