Shiv Tandav Stotram Lyrics in Hindi: शिव तांडव स्तोत्रम हिंदी अर्थ सहित

शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram Lyrics in Hindi) का जाप भगवान शिव को प्रसन्न करने का बहुत ही अच्छा साधन माना जाता है

कहा जाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों से बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है जो भी शिव भक्त इस शिव तांडव स्तोत्रम का जाप करता है भगवान शिव उसके जीवन समस्त विपदाओं को दूर कर देते है

शिव तांडव स्तोत्रम

शिव तांडव स्तोत्रम भगवान शंकर को बहुत ही प्रिय है पौराणिक कथाओं के अनुसार इस शिव तांडव स्तोत्रम की रचना लंकापति रावण के द्वारा की गई थी

शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram Lyrics in Hindi) पाठ के द्वारा मनुष्य अपनी किसी भी समस्या से छुटकारा पा सकता है आइये जानते है क्या है भगवान शिव के प्रिय शिव तांडव स्तोत्रम का हिंदी अर्थ

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शिव तांडव स्तोत्रम हिंदी अर्थ सहित – Shiv Tandav Stotram Lyrics in Hindi With Meaning

जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥1॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव के बालों के बहने वाले जल के कारण उनका कंठ अत्यंत पवित्र है| उनके गले में जो सर्प है, वह सदैव हार की भांति उनके गले में लटका रहता है एवं उनके डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है| भगवान शंकर शुभ तांडव नृत्य कर रहे है, वह हमे संपन्नता प्रदान करें|

जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥2॥

हिंदी अर्थ – मेरी भगवान शिव में बहुत ही गहरी रूचि है| जिनका मस्तक अलौकिक गंगा नदी की बहती पवित्र धाराओं से सुशोभित है| जो उनके बालों की उलझी हुई जटाओं से उमड़ रही है| जिनके मस्तक पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित रहती है तथा जो अपने सर पर आभूषण के रूप में अर्ध-चंद्रमा को धारण किये हुए है|

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

हिंदी अर्थ – मैं अपने मन की ख़ुशी भगवान शिव में खोज रहा हूँ| इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के सभी प्राणी जिनके मन में वास करते है| जिनकी धर्मपत्नी पर्वत राज की पुत्री माता पार्वती है| जो अपनी करुणामयी दृष्टि से असाधारण समस्याओं को नियंत्रित करते है| जो इन दिव्य लोकों को अपनी पोशाक के रूप में धारण करते है|

जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥4॥

हिंदी अर्थ – जो सम्पूर्ण जीवन के रक्षक है, मुझे उन भगवान शिव में अद्भुद सुख प्राप्त होता है| उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा रंग का है व उसकी मणि भी चमक रही है| यह समस्त दिशाओं की देवियों पर विभिन्न रंगों को बिखेर रहा है एवं जो एक हाथी की खाल से बने दुशाले से ढंका हुआ है|

सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥5॥

हिंदी अर्थ – जिनका मुकुट चंद्रमा है, वह भगवान शिव हमे संपन्नता प्रदान करे| जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हुए है| जिनका पायदान फूलों की धुल बहने के कारण गहरे रंग का हो गया है जो कि विष्णु, इंद्र तथा समस्त देवताओं के सिर से गिरती है|

ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥6॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव की उलझी हुई जटाओं से हम सिद्धि रूपी दौलत को प्राप्त करें| जिन्होंने अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिंगारी मात्र से ही कामदेव को नष्ट कर दिया था| जो समस्त दैवीय लोकों के स्वामियों के द्वारा आदरणीय है तथा जो अर्ध-चंद्रमा से सुसज्जित है|

करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥7॥

हिंदी अर्थ – जिनके तीन नेत्र है, मेरी रूचि उन भगवान शिव में है| जिनके द्वारा शक्तिशाली कामदेव को अग्नि देव को समर्पित किया गया था| उनके मस्तक की सतह डगद् डगद् की ध्वनि के समान जलती है| वह एकमात्र ऐसे कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती (यहाँ पार्वती प्रकृति हैं, तथा चित्रकारी सृजन है) के स्तन की नोंक पर सजावटी रेखाएं खींचने में सक्षम है|

नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव ही इस सम्पूर्ण संसार का भार उठाते है| जिनकी शोभा चंद्रमा के समान है| जिनके समक्ष आलौकिक गंगा नदी है| जिनकी गर्दन बादलों की परतो से ढकी अमावस्या की अर्धरात्रि के समान काली है|

प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

हिंदी अर्थ – मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूँ , जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा हुआ है| पूर्ण रूप से खिले हुए नीले कमलो की गरिमा से लटका हुआ है| जो इस ब्रह्माण्ड की कालिमा सा प्रतीत होता है| जो कामदेव को मारने वाले है तथा जिन्होंने त्रिपुर का अंत हुआ था| जिनके द्वारा सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया गया| जिन्होंने बलि की प्रथा का अंत किया| जिन्होंने अंधक नामक दैत्य का वध किया| जिन्होंने मृत्यु के देवता को परास्त किया था|

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

हिंदी अर्थ – जो कल्याणमयी, समस्त कलाओं के रस का आस्वादन करने वाले है, जो कामदेव को भस्म करने वाले है| त्रिपुरासुर तथा गजासुर के संहारक तथा स्वयं यमराज के लिए भी यमस्वरूप है| मैं उन शिव को भजता हूँ|

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

हिंदी अर्थ – अत्यंत तीव्र गति से भ्रमण कर रहे सर्पों की फुफकार से क्रमश: मस्तक में बढ़ी हुई प्रचंड आग के मध्य मृदंग की मंगलकारी उच्च धिम-धिम की ध्वनि के साथ में लीन शिव जी सर्व प्रकार से सुशोभित हो रहे है|

दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

हिंदी अर्थ – कठोर पत्थर व कोमल शय्या, सर्प व मोतियों की माला, बहुमूल्य रत्न व मिट्टी के टुकड़े, कमल तथा तिनको पर समान दृष्टि रखने वाले शिव को मैं भजता हूँ|

शिव तांडव स्तोत्रम

कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

हिंदी अर्थ – कब मैं गंगा जी के कछारगुञ में निवास करता हुआ, निष्कपट हो, अपने सिर पर अंजलि धारण कर चंचल नेत्रों वाले शिव जी का मंत्रोच्चार करते हुए अक्षय सुख को प्राप्त करूँगा|

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

हिंदी अर्थ – देवांगनाओं के सिर में गुंथे पुष्पों की मालाओं से झड़ते हुए सुगंधमय राग से मनोहर परम शोभा के धाम महादेव जी के अंगों की सुन्दरता परम आनंद युक्त हमारे मन की प्रसन्नता को हमेशा बढाती है|

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

हिंदी अर्थ – प्रचंड वडवानल की ही भांति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अष्टमहासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली कन्याओं से शिव विवाह समय गान की मंगल ध्वनि सभी मंत्रों में से सबसे श्रेष्ठ शिव जी के मंत्र से पूरित, संसारिक दुखों पर विजय पाए|

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥16॥

हिंदी अर्थ – इस शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) जो भी व्यक्ति पढता है, याद करता है तथा सुनाता है| वह सदैव के लिए ही पवित्र हो जाता है तथा भगवान शिव की भक्ति पाता है| इस भक्ति का कोई अन्य उपाय नहीं है| केवल भगवान शिव का विचार इस भ्रम को दूर कर देता है|

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मिंं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

हिंदी अर्थ – प्रदोष काल में शिवपूजन के अंतिम समय में इस रावणकृत शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) के गान से लक्ष्मी स्थिर रहती है| तथा वो भक्त सदैव ही रथ, गज, घोड़े आदि से सर्वदा युक्त होता है|

॥ इति श्रीरावणकृतं शिव ताण्डवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Shri Shani Stotra in Hindi: श्री शनि स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

Shri Shani Stotra in Hindi: श्री शनि स्तोत्र का जाप करने से भक्तों को शनि देव की असीम कृपा प्राप्त होती है। आपको बता दे कि श्री शनि स्तोत्र एक ऐसा संस्कृत मंत्र है जो कि भगवान शनिदेव की शक्तियों, महिमा तथा उनके गुणों के बारे में व्याख्या करता है।

माना जाता है कि श्री शनि स्तोत्र का जाप करने से भगवान शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। शनि ग्रह का अच्छा प्रभाव पाने के लिए भी श्री शनि स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

Shri Shani Stotra in Hindi

शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों तथा शनि दोषों का निवारण करने में भी श्री शनि स्तोत्र का जाप बहुत सहायक होता है।

इस स्तोत्र का जाप करने से मनुष्य को आत्म-विकास, तथा मानसिक शांति की भी प्राप्ति होती है। तो आइये पाठ करते है इस अद्भुत श्री शनि स्तोत्र का हिंदी अर्थ सहित।

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श्री शनि स्तोत्र पाठ हिंदी अर्थ सहित – Shri Shani Stotra Lyrics with Hindi Meaning

|| श्री शनि स्तोत्र ||

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥

अर्थ – जिनका शरीर भगवान शंकर के समान कृष्ण तथा नीले रंग का है। उन शनि देव को मेरा प्रणाम है। इस सम्पूर्ण संसार के लिए कालाग्नि तथा कृतांत रूप श्री शनैश्चर को मेरा पुनः पुनः प्रणाम है।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥

अर्थ – जिनका शरीर कंकाल के समान मांस-हीन एवं जटाएं व दाढ़ी-मूंछ बड़ी हुई है। उन शनिदेव को मेरा प्रणाम है। जिनके नेत्र बड़े-बड़े, पीठ से सटा हुआ पेट एवं भयानक आकार वाले भगवान शनि देव को मेरा प्रणाम है।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते॥

अर्थ – जिनका शरीर दीर्घ है, रोएँ मोटे है, जो लम्बे-चौड़े लेकिन जर्जर शरीर वाले है एवं जिनकी दाढे कालरूप है। उन भगवान शनि देव को मेरा पुनः पुनः प्रणाम है।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥

अर्थ – हे भगवान शनि देव ! आपके नयन कोटर की भांति गहरे है, आपकी ओर देखना बहुत ही कठिन है, आपका रूप भीषण, रौद्र तथा बहुत ही विकराल है। आपको मेरा प्रणाम है।

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च॥

अर्थ – अभय प्रदान करने वाले देवता, भास्कर पुत्र, सूर्यनंदन, आप सब कुछ भक्षण करने वाले है। ऐसे भगवान शनि देव को मेरा प्रणाम है।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते॥

अर्थ – आपकी दृष्टि अधोमुखी है, आप मंद गति से चलने वाले एवं जिसका प्रतीक तलवार के समान है। उन भगवान शनि देव को मेरा पुनः पुनः प्रणाम है।

तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:॥

अर्थ – आपने तपस्या के माध्यम से अपने शरीर को दग्ध कर लिया है, आप हमेशा योगाभ्यास में तत्पर, भूख से आतुर व अतृप्त रहते है। आपको सदा मेरा प्रणाम है।

Shri Shani Stotra in Hindi

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्॥

अर्थ – जिनके नेत्र ही ज्ञान है, काश्यपनंदन सूर्य पुत्र शनि देव को मेरा प्रणाम है। आप जिस व्यक्ति से संतुष्ट हो उसे राज्य दे देते है एवं रुष्ट होने पर उसे क्षीण भी लेते है।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:॥

अर्थ – मनुष्य, देवता, असुर, विद्याधर, सिद्ध एवं नाग – यह सब आपकी दृष्टि पड़ने मात्र से ही नष्ट हो जाते है। ऐसे भगवान शनि देव को मेरा प्रणाम है।

प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:॥

अर्थ – आप मुझपर प्रसन्न होए। मैं वर पाने के योग्य हूँ तथा आपकी शरण में आया हूँ।

॥ इति श्री शनि स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

Shiv Stuti Lyrics in Hindi: शिव स्तुति हिंदी अर्थ सहित

Shiv Stuti Lyrics in Hindi: ‘शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर’ भगवान शिव के विभिन्न गुणों और रूपों की प्रशंसा करने वाला एक भक्ति भजन है। भगवान शिव हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में से एक है। उन्हें हिंदू धर्म में सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है।

जिस प्रकार भगवान ब्रह्मा को ब्रह्मांड के निर्माता कहा जाता है, भगवान विष्णु को ब्रह्मांड के संरक्षक कहा जाता है, उसी प्रकार भगवान शिव को ब्रह्मांड के विनाशक कहा जाता है। उच्चतम स्तर पर, शिव को निराकार, असीम, पारलौकिक और अपरिवर्तनीय माना जाता है।

भगवान शिव के नाम का अर्थ है “शुभ व्यक्ति“। भगवान शिव के कई दयालु और डरावने चित्रण है। देवों के देव महादेव को योग, ध्यान और कलाओं का संरक्षक देवता भी माना जाता है। भगवान शिव को पशुपति, भैरव, विश्वनाथ, भोले नाथ, शंभू और शंकर जैसे कई नामो से जाना जाता है।

शिव स्तुति

आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम भगवान शिव की सबसे प्रमुख स्तुति (Shiv Stuti Lyrics in Hindi) के बारे में जानेंगे।

इसके साथ ही इस स्तुति का प्रतिदिन पाठ करने से इसके मनुष्य पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है उसके बारे में भी बात करेंगे। तो चलिए बिना किसी देरी के 99Pandit के साथ भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं।

शिव स्तुति का महत्व क्या है? – What is the Significance of Shiv Stuti?

भगवान शिव एक ही समय में विनाश और सृजन के देवता हैं और दया और कृपा के प्रतीक हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करने के कई तरीके हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना बहुत आसान है।

उनके लिए समर्पित ‘शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर‘, कुछ अनुष्ठान, और पूजाएँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें विभिन्न मंत्रों का जाप शामिल होता है, जिसके माध्यम से भक्त जीवन में सफल होते हैं।

‘शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर’, भक्ति पूजा, आह्वान, प्रार्थना, स्तुति, आराधना, ध्यान और प्रत्यक्ष, अनुभवात्मक संवाद का एक रूप है।

शिव स्तुति

शिव स्तुति के नियमित जाप से व्यक्ति अंदर से बेहद मजबूत हो जाता है और उसकी आत्मा लोहे की मुट्ठी की तरह बन जाती है, जिसे कोई भी दुर्घटना तोड़ नहीं सकती।

जो लोग शुद्ध आत्मा के साथ शिव मंत्रों का जाप करते हैं, वे जीवन में किसी भी परेशानियों से लड़ सकते हैं और एक बेहतर और मजबूत व्यक्ति बनकर बाहर आ सकते हैं।

ये मंत्र व्यक्ति के अंदर या उसके आस-पास मौजूद किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को शरीर और आत्मा से शुद्ध करने में भी मदद करते हैं और उनके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं।

शिव ब्रह्मांडीय नर्तक हैं और उन्हें नटराज, नर्तकों के देवता के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू भगवान शिव को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है।

शिव स्तुति लिरिक्स इन हिंदी – Shiv Stuti Lyrics in Hindi

आशुतोष शशांक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा।।

निर्विकार ओमकार अविनाशी,
तुम्ही देवाधि देव,
जगत सर्जक प्रलय करता,
शिवम सत्यम सुंदरा।।

निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
महा योगीश्वरा,
दयानिधि दानिश्वर जय,
जटाधार अभयंकरा।।

शूल पानी त्रिशूल धारी,
औगड़ी बाघम्बरी,
जय महेश त्रिलोचनाय,
विश्वनाथ विशम्भरा।।

नाथ नागेश्वर हरो हर,
पाप साप अभिशाप तम,
महादेव महान भोले,
सदा शिव शिव संकरा।।

जगत पति अनुरकती भक्ति,
सदैव तेरे चरण हो,
क्षमा हो अपराध सब,
जय जयति जगदीश्वरा।।

जनम जीवन जगत का,
संताप ताप मिटे सभी,
ओम नमः शिवाय मन,
जपता रहे पञ्चाक्षरा।।

आशुतोष शशांक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ।।

कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..
कोटि नमन दिगम्बरा..

शिव स्तुति लिरिक्स इन इंग्लिश – Shiv Stuti Lyrics in English

Ashutosh Shashank Shekhar,
Chandra Mauli Chidambara,
Koti Koti Pranam Shambhu.
Koti Naman Digambara II

Nirvikar Omkar Avinashi,
Tumhi Devadhi Dev,
Jagat Sarjak Pralay Karta,
Shivam Satyam Sundara II

Nirankar Swaroop Kaleshwar,
Maha Yogeeshwara,
Dayanidhi Danishwar Jay,
Jatadhar Abhayankara II

Shool Pani Trishul Dhari,
Augadi Baghambari,
Jay Mahesh Trilochanay,
Vishwanath Vishambhara II

Nath Nageshwar Haro Har,
Paap Saap Abhishaap Tam,
Mahadev Mahan Bhole,
Sada Shiv Shiv Shankara

Jagat Pati Anurakati Bhakti,
Sadaiv Tere Charan Ho.
Kshama Ho Aparadh Sab,
Jay Jayati Jagadishwara II

Janam Jeevan Jagat Ka,
Santaap Taap Mite Sabhi,
Om Namah Shivaay Man,
Japta Rahe Panchakshara II
Ashutosh Shashank Shekhar,
Chandra Mauli Chidambara,
Koti Koti Pranaam Shambhoo.
Koti Naman Digambara II

Koti Naman Digambara….
Koti Naman Digambara…..
Koti Naman Digambara….

शिव स्तुति

शिव स्तुति का हिंदी अर्थ – Shiv Stuti Meaning in Hindi

आशुतोष शशांक शेखर
चंद्र मौली चिदंबरा
शंभू कोटि कोटि प्रणाम
दिगंबरा को कोटि प्रणाम

आप निर्विकार (अपरिवर्तनशील),
ओंकार (आदि ध्वनि) और अविनाशी हैं
आप सभी देवताओं के स्वामी हैं

दुनिया के निर्माता और संहारक
शिव परम सत्य और सुंदरता के अवतार हैं

निराकार, काल के स्वरूप,
महान योगी,
करुणा के सागर और वरदान देने वाले,
जटाधारी और निर्भयता के स्रोत, आपकी जय हो।

त्रिशूल धारण करने वाला,
बाघ की खाल से सुशोभित,
तीन नेत्रों वाले महेश की जय,

ब्रह्मांड का स्वामी, सर्वव्यापी
हे नागों (सर्पों) के स्वामी,
पापों और शापों को दूर करने वाले
महान ईश्वर, दयालु और सरल,
सनातन शिव, मंगलमय, सदा शिव, कल्याणकारी!

हे जगत के स्वामी, जो भक्ति के स्रोत हैं,
सदैव आपके चरणों में, मैं सभी अपराधों के लिए क्षमा मांगता हूं,
जगत के स्वामी की जय हो, जय हो
इस जीवन और संसार में,
सभी दुख और कष्ट दूर हो जाएं

ओम नमः शिवाय
पंचाक्षर (पांच अक्षर वाला मंत्र) का सदैव जाप किया जाए

आशुतोष शशांक शेखर
चंद्र मौली चिदंबरा
शंभु को कोटि-कोटि प्रणाम
दिगंबरा
को कोटि-कोटि प्रणाम
दिगंबरा को कोटि-कोटि प्रणाम

शिव स्तुति के जाप के लाभ – Benefits of Chanting Shiv Stuti

माना जाता है कि शिव स्तुति या भगवान शिव की प्रार्थना से मानसिक शांति, नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा और आध्यात्मिक विकास सहित कई लाभ मिलते हैं। शिव स्तुति का पाठ करने के निम्नलिखित लाभ हैं:

  1. इन मंत्रों का नियमित जाप करने से सद्भाव और खुशहाली की भावना पैदा हो सकती है, साथ ही तनाव, चिंता और शारीरिक बीमारियों से राहत मिल सकती है।
  2. शिव मंत्रों का जाप करने से अधिक सकारात्मक और सामंजस्यपूर्ण वातावरण बनता है, जिससे मन की शांति और खुशहाली की भावना बढ़ती है।
  3. नियमित जाप करने से तनाव और चिंता कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे मन शांत और संतुलित रहता है।
  4. शिव मंत्र व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरे प्रभावों से बचाते हैं।
  5. कुछ लोगों का मानना ​​है कि शिव स्तुति का जाप करने से व्यक्ति को पिछले पापों और नकारात्मक कर्मों से छुटकारा मिल सकता है, जिससे आध्यात्मिक मुक्ति मिलती है।
  6. भगवान शिव की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  7. कुछ पारंपरिक मान्यताएँ बताती हैं कि शिव मंत्र कुछ बीमारियों को कम करने और उपचार को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
  8. शिव स्तुति से भक्त भगवान शिव को नमन करते हैं। यहाँ शिव सर्वोच्च वास्तविकता या आंतरिक आत्मा हैं। इसलिए इस मंत्र का जाप आंतरिक आत्मा को प्रदान करना और उसके लिए प्रार्थना करना है।
  9. जो लोग अपना आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते हैं और अपना नाम बनाना चाहते हैं, उन्हें ‘शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर’ का जाप करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करने से आंतरिक क्षमता और शक्ति बढ़ती है।
  10. अगर कोई व्यक्ति अपने आस-पास के माहौल को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है और सुरक्षा चाहता है, तो इस मंत्र का जाप करने से उसे सुरक्षा का अहसास होगा। व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा से घिरा रहेगा।

शिव स्तुति का पाठ कैसे करें? – How to recite Shiv Stuti

  1. अधिकांश मंत्रों की तरह शिव स्तुति मंत्रों का जाप भी सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनकर करना चाहिए।
  2. शिव स्तुति का जाप दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय शिव मंत्रों का जाप करना सर्वोत्तम होता है।
  3. अगर कोई शिव स्तुति जप करने का सही समय भूल भी जाता है, तो ऐसा माना जाता है कि शिव मंत्रों का जप दिन के किसी भी प्रहर या समय में किया जा सकता है।
  4. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन शिव स्तुति मंत्रों का जाप और प्रार्थना करना बहुत लाभकारी होता है, क्योंकि सोमवार के दिन भगवान शिव आसानी से प्रसन्न होते हैं।
  5. सर्वोत्तम परिणामों के लिए शिव स्तुति का जाप भगवान शिव की पूजा करने तथा उन्हें प्रार्थना अर्पित करने के बाद शुरू करना चाहिए।
  6. शिव मंत्रों का एक बार में 108 बार जाप करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है क्योंकि इससे सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं। शिव मंत्रों का जाप जोर से या मन में किया जा सकता है।

निष्कर्ष

‘शिव स्तुति – आशुतोष शशांक शेखर’, भक्ति पूजा, आह्वान, प्रार्थना, स्तुति, आराधना, ध्यान और प्रत्यक्ष, अनुभवात्मक संवाद का एक रूप है। भगवान शिव को सनातन धर्म में सृष्टि के संघारक के रूप में जाना और पूजा जाता है।

यूं तो भगवान शिव के कई नाम हैं परंतु ज्ञान और सभी प्रकार की विधाओं का सृजन होने से भगवान शिव का एक नाम आदियोगी भी है।

ऐसा माना जाता है भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तप करने की आवश्यकता नहीं होती, भगवान शिव अपने भक्तों द्वारा जल और बेलपत्र चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं।

इसके अलावा, भगवान शिव अर्थार्थ देवों के देव महादेव की उपासना करने के लिए यह शिव स्तुति- आशुतोष शशांक शेखर भी बहुत उपयोगी मानी जाती है।

शिव स्तुति का जाप करने से हर मनोकामना पूरी होती है, क्योंकि भगवान शिव हिंदू धर्म के सबसे दयालु देवता माने जाते हैं और उन्हें प्रसन्न करना बहुत आसान है।

इन मंत्रों का जाप करने से आस-पास की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और बाहर और भीतर सब कुछ शांत और मौन हो जाता है। यह आत्मा को शांत करता है और आंतरिक चेतना को खोलता है।

आशा है आपका यह ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगेगा। आगे और भी ऐसे लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें 99Pandit के साथ। 99Pandit पर आप अपने घर, मंदिर, या कार्यालय पूजा के लिए पंडित आसानी से बुक कर सकते हैं।

Parvati Vallabha Ashtakam: पार्वती वल्लभ अष्टकम का पाठ और महत्व

पार्वती वल्लभ अष्टकम भगवान शिव को समर्पित है, जो माँ पार्वती के पति हैं। माँ पार्वती को हिंदू धर्म में एक देवी के रूप में पूजा जाता है। माँ पार्वती पर्वतराज हिमाचल और रानी मैना की पुत्री हैं। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण उनका नाम पार्वती पड़ा।

यह पार्वती अष्टकम 8 छंदों की एक काव्य रचना है। इस अष्टकम का पाठ करके भक्त पार्वती पति, भगवान शिव को नमन करते हैं।

इसमें शिव के विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है, जिन्हें ऋषियों और वेदों द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है और जिन्हें आशीर्वाद के देवता के रूप में भी जाना जाता है, जिन्हें शैतानों और भूतों के साथ-साथ सबसे सुंदर प्राणी के रूप में वर्णित किया जाता है।

पार्वती वल्लभ अष्टकम

श्री पार्वती वल्लभ अष्टकम। इसे देवी पार्वती की पत्नी के रूप में भगवान शिव की एक प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। भगवान शिव और पार्वती की कृपा के लिए भक्त भक्ति भाव से इस अष्टकम का जाप करते हैं।

आज इस ब्लॉग के माध्यम से हम श्री पार्वती वल्लभ अष्टकम पाठ के महत्व के साथ-साथ इसके लिरिक्स भी जानेंगे। इतना ही नहीं, हम 99Pandit से यह भी जानेंगे कि इस पाठ पर को करने से व्यक्ति को क्या लाभ मिलता है।

Parvati Vallabha Ashtakam Lyrics in Hindi – पार्वती वल्लभ अष्टकम लिरिक्स हिंदी में

नमो भूतनाथं नमो देवदेवं
नमः कालकालं नमो दिव्यतेजः । (दिव्यतेजम्)
नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ १॥

सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं
सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम् ।
सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ २॥

श्मशाने शयानं महास्थानवासं (श्मशानं भयानं)
शरीरं गजानं सदा चर्मवेष्टम् ।
पिशाचादिनाथं पशूनां प्रतिष्ठं (पिशाचं निशोचं पशूनां)
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ३॥

फणीनागकण्ठे भुजङ्गाद्यनेकं (फणीनागकण्ठं, भुजङ्गाङ्गभूषं)
गले रुण्डमालं महावीर शूरम् ।
कटिव्याघ्रचर्मं चिताभस्मलेपं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ४॥

शिरश्शुद्धगङ्गा शिवावामभागं
बृहद्दीर्घकेशं सदा मां त्रिनेत्रम् । (वियद्दीर्घकेशं, बृहद्दिव्यकेशं सहोमं)
फणीनागकर्णं सदा भालचन्द्रं (बालचन्द्रं)
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ५॥

करे शूलधारं महाकष्टनाशं
सुरेशं परेशं महेशं जनेशम् । (वरेशं महेशं)
धनेशस्तुतेशं ध्वजेशं गिरीशं (धने चारु ईशं, धनेशस्य मित्रं)
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ६॥

उदानं सुदासं सुकैलासवासं (उदासं)
धरा निर्धरं संस्थितं ह्यादिदेवम् । (धरानिर्झरे)
अजं हेमकल्पद्रुमं कल्पसेव्यं
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ७॥

मुनीनां वरेण्यं गुणं रूपवर्णं
द्विजानं पठन्तं शिवं वेदशास्त्रम् । (द्विजा सम्पठन्तं, द्विजैः स्तूयमानं, वेदशात्रैः)
अहो दीनवत्सं कृपालुं शिवं तं (शिवं हि)
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ८॥

सदा भावनाथं सदा सेव्यमानं
सदा भक्तिदेवं सदा पूज्यमानम् ।
मया तीर्थवासं सदा सेव्यमेकं (महातीर्थवासम्)
भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ९॥

इति पार्वतीवल्लभनीलकण्ठाष्टकं सम्पूर्णम् ।

Parvati Vallabha Ashtakam Meaning in Hindi – पार्वती वल्लभ अष्टकम हिंदी अर्थ

समस्त प्राणियों के स्वामी भगवान शिव को नमस्कार है, देवों के देव महादेव को नमस्कार है, मृत्यु के देवता महाकाल को नमस्कार है, महान ज्योति को नमस्कार है, उनको नमस्कार है जिन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया, उनको नमस्कार है जो स्वभाव से शांत हैं, पार्वती के वल्लभ अर्थात प्रिय, नीलकंठ को नमस्कार है।

सदैव तीर्थों में सिद्धि प्रदान करने वाले, अपने भक्तों के पक्ष में सदैव उपस्थित, शैवों द्वारा पूजित, पवित्र भस्म धारण करने वाले, सदैव ध्यान की मुद्रा में रहने वाले, ज्ञान में सदैव रुचि रखने वाले, सदैव ज्ञान सैय्या पर शयन करने वाले नीलकंठ पार्वती वल्लभ को नमस्कार है।

जो अत्यन्त भयंकर श्मशान भूमि में निवास करता है , जो सदैव हाथी की खाल से अपना शरीर ढका रहता है, पिशाच, भूत प्रेत, पशुओं, आदि के स्वामी नीली गर्दन वाले पार्वती-वल्लभ को नमस्कार है।

जिसने अपने गले में अनेकों विषधर सर्पों को धारण किये है, वह मुंडों की माला पहनता है और वह महान पराक्रमी है, वह मरे हुए व्याघ्र की खाल पहनता है और अपने शरीर पर दाह की भस्मलगाने वाले, नीलकंठ पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

जिनके सिर पर शुद्ध गंगा और बाईं ओर पार्वती विराजती हैं, उनके सिर पर बड़ी जटाएं हैं और उनकी तीन आंखें हैं, वे अपने कानों पर फन वाला सांप पहनते हैं और हमेशा युवा चंद्रमा को अपने पास रखते हैं। ऐसे ​नीलकंठ पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

उनके हाथों में त्रिशूल है, वे भक्तों के संकटों का नाश करते हैं, वे देवों के स्वामी हैं, वर प्रदान करने वाले, महेश, मनुष्यों के स्वामी, वे सुंदर हमारे शरीर के भगवान हैं, ध्वजाओं के स्वामी और पहाड़ों के स्वामी हैं, नीलकंठ पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

वह अपने रूप के प्रति बहुत विशेष नहीं है, उसके महान सेवक हैं, वह महान कैलास में वास करते हैं,, वह अतीत को नियंत्रित करने वाला महान देवता है, उसकी सेवा अजेय स्वर्णिम इच्छा देने वाले वृक्ष द्वारा की जाती है और साथ ही कल्पों द्वारा भी की जाती है, नीलकंठ पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

वे चरित्र, रूप और शिष्टता के कारण महान ऋषियों द्वारा पूजे जाते हैं, वे द्विजों का उचित मार्गदर्शन करते हैं, वे वेदों के शिव हैं , वे दीन-दुखियों से प्रेम करते हैं तथा दया और शांति के भंडार हैं, जिनकी गर्दन नीली है, उन पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

वे सदैव जन्म और मृत्यु के स्वामी हैं, वे सदैव सभी के द्वारा सेवित हैं, वे सदैव अपने सभी भक्तों के स्वामी हैं, वे पूजनीय भगवान हैं, मेरे द्वारा सभी देवताओं में पूज्य, नीलकंठ पार्वती-वल्लभ को मैं नमस्कार करता हूं।

Parvati Vallabha Ashtakam Lyrics in English – पार्वती वल्लभ अष्टकम इंग्लिश लिरिक्स

Namo Bhoothanadham Namo Deva Devam,
Nama Kala Kalam Namo Divya Thejam,
Nama Kama Asmam, Nama Santha Seelam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Sada Theerthasidham, Sadha Bhakta Paksham,
Sada Shaiva Poojyam, Sada Shura Bhasmam,
Sada Dhyana Yuktham, Sada Jnana Dalpam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Smasanam Bhayanam Maha Sthaana Vasam,
Sareeram Gajaanaam Sada Charma Veshtam,
Pisacham Nisesa Sama Pasoonaam Prathishtam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Phani Naga Kande, Bhjuangahd Anekam,
Gale Runda Malam, Maha Veera Sooram,
Kadi Vyagra Sarmam., Chitha Basma Lepam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Siraad Shuddha Ganga, Shiva Vama Bhagam,
Viyad Deerga Kesam Sadaa Maam Trinetram,
Phanee Naga Karnaam Sada Bala Chandram,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Kare Soola Dharam Maha Kashta Nasam,
Suresam Varesam Mahesam Janesam,
Thane Charueesam, Dwajesam, Gireesam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Udhasam Sudhasam, Sukailasa Vasam,
Dara Nirdhram Sasmsidhi Tham Hyathi Devam,
Aja Hema Kalpadhruma Kalpa Sevyam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Munenam Varenyam, Gunam Roopa Varnam,
Dwija Sampadastham Shivam Veda Sasthram,
Aho Dheena Vathsam Krupalum Shivam,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

Sada Bhava Nadham, Sada Sevya Manam,
Sada Bhakthi Devam, Sada Poojyamanam,
Maya Theertha Vasam, Sada Sevyamekham,
Bhaje Parvati Vallabham Neelakantham.

पार्वती वल्लभ अष्टकम

Parvati Vallabha Ashtakam Meaning in English – पार्वती वल्लभ अष्टकम इंग्लिश अर्थ

Salutations to Lord Shiva, the master of all living beings, salutations to Mahadev, the God of gods, salutations to Mahakaal, the time of times, salutations to the divine brilliance, salutations to the one who burnt down Kamadeva, salutations to the calm and gentle form of Shiva, salutations to Parvati’s beloved, Neelkanth.

Salutations to Neelkanth Parvati Vallabh, who always provides siddhi in pilgrimages, always protects the devotees, always worshipped by Shiva devotees, always coated with white ashes, always engrossed in meditation and always sleeps on the bed of knowledge.

I salute Neelkanth Parvati-vallabh, who sleeps in the crematorium, rules the great place, i.e. Kailash, always wears elephant skin, and is the lord of ghosts, spirits, animals, etc.

I salute Neelkanth Parvati-vallabh, who has many poisonous snakes in his throat, who wears a garland of skulls around his neck, who is a great warrior and who wears tiger skin around his waist and who applies the ashes of the funeral pyre on his body.

I salute the Neelkanth Parvati-vallabh, on whose head there is Ganga and on whose left side Shiva, i.e., Parvati sits, whose hair has long matted locks, who has three eyes, whose ears are adorned with poisonous snakes, whose head is always adorned with the moon.

I salute the one who holds the trident in his hands, who takes away the sufferings of his devotees, who is the best among gods, who bestows boons, Mahesh, the lord of men, the lord of wealth, the lord of flags, the lord of mountains, Neelkanth Parvati-vallabh.

I salute Neelkanth Parvati-vallabh, who is the servant of his devotees, who resides in Kailash, due to whom this universe exists, who is the primordial god, self-created divine, who is worshipped for thousands of years.

I salute the one who is worthy of worship for the sages, whose form, qualities, colours, etc. are praised by the Dwijas, and who has been mentioned in the Vedas, the kind and merciful, Mahesh, Neelkanth, Parvati-vallabh.

I salute the Lord of all living beings, the one who is always to be served, the one who is to be worshipped, the one whom I worship among all the gods, Neelkanth Parvati-vallabh.

Importance of Parvati Vallabha Ashtakam – पार्वती वल्लभ अष्टकम का महत्व

श्री पार्वती वल्लभ अष्टकम में भगवान शिव के गुणों का वर्णन करने वाले नौ श्लोक हैं। पार्वती वल्लभ अष्टकम माता पार्वती और उनके भगवान शिव को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

इसमें भगवान शिव की विभिन्न विशेषताओं का वर्णन है। यह सारा संसार शिव की क्रीड़ास्थली है और वेद भी उनका गुणगान करते नहीं थकते। जो भगवान शिव विष को पचा सकते हैं और भूत-प्रेत आदि के भी स्वामी हैं, उनकी कृपा से क्या नहीं हो सकता।

यह पार्वती वल्लभ अष्टकम भक्त तो सही मार्ग दिखाने और नकारात्मक विचार त्यागने में महत्वपूर्ण है। इस अष्टकम में माता पार्वती, और भगवान शिव को नमन किया गया है।

पार्वती वल्लभ अष्टकम

पार्वती वल्लभ अष्टकम में देवों के देव महादेव की विविध खसियत तथा उनके रूप के बारे में वर्णन किया गया है।

भगवान शिव का गुनगान साधारण मनुष्य के साथ बाकी देवता भी करते हैं। भगवान शिव की आराधना को उनके आशीर्वाद के समान जाना जाता है।

Benefits of Chanting Parvati Vallabha Ashtakam – पार्वती वल्लभ अष्टकम का जाप करने के लाभ

पार्वती वल्लभ अष्टकम प्राचीन ऋषि आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक भजन है, जिसमें देवी पार्वती के पति भगवान शिव की स्तुति की गई है। ऐसा माना जाता है कि इस भजन को पढ़ने या सुनने से भक्तों को कई लाभ मिलते हैं:

1. दैवीय सुरक्षा: ऐसा माना जाता है कि यह भजन इसे गाने या सुनने वालों को बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जाओं और प्रतिकूलताओं से दैवीय सुरक्षा प्रदान करता है।

2. आंतरिक शांति: भजन में व्यक्त लयबद्ध छंद और हार्दिक भक्ति मन और हृदय पर शांत प्रभाव डालती है, तथा आंतरिक शांति, स्थिरता और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देती है।

3. दिव्य प्रेम का आशीर्वाद: यह भजन भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच प्रेम का गुणगान करता है, तथा भक्तों को दिव्य स्नेह और साहचर्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अपने रिश्तों में प्रेम, भक्ति और सद्भाव विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

4. आध्यात्मिक उत्थान: “पार्वती वल्लभ अष्टकम” एक आध्यात्मिक ग्रन्थ है जिसका उपयोग भक्तों द्वारा ईश्वर के साथ अपने संबंध को बढ़ाने तथा अपने आध्यात्मिक विकास और आत्म-साक्षात्कार में सहायता के लिए किया जाता है।

5. पापों और नकारात्मकता का निवारण: ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से भक्तों पर शुद्धिकरण प्रभाव पड़ता है, उन्हें पिछले पापों, नकारात्मक कर्मों और अशुद्धियों से मुक्त होने में मदद मिलती है, तथा उन्हें आध्यात्मिक शुद्धता और मुक्ति की ओर मार्गदर्शन मिलता है।

6. इच्छाओं की पूर्ति: भक्तजन अक्सर इस स्तोत्र का जाप करते हुए भगवान शिव और देवी पार्वती से भक्तिपूर्वक प्रार्थना करते हैं तथा अपनी इच्छाओं, आकांक्षाओं और महान प्रयासों की पूर्ति के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

7. पार्वती वल्लभ अष्टकम का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

Conclusion

संक्षेप में, श्री पार्वती वल्लभ अष्टकम ऋषि आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक भजन है। इस अष्टकम का पाठ प्रतिदिन करने से मन को शांति, धन, समृद्धि और यश में वृद्धि होती है।

ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस अष्टकम का पाठ करता है, तो उसके दुख और समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

यह भी कहा जाता है कि इस दिव्य स्तोत्र का पाठ करने से देवी पार्वती और भगवान शिव की दिव्य कृपा प्राप्त होती है।

अगर आप घर में सुख-समृद्धि बनाए रखना चाहते हैं, तो रोजाना पाठ करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

श्री पार्वती वल्लभ अष्टकम देवी पार्वती के पति के रूप में भगवान शिव की एक प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। भगवान शिव और पार्वती की कृपा के लिए भक्त भक्ति भाव से इस अष्टकम का जाप करते हैं।

इसे दिव्य कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने, आध्यात्मिक उत्थान लाने और भक्तों के जीवन को शांति, प्रेम और आध्यात्मिक पूर्णता से समृद्ध करने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

Swasti Vachan Mantra: स्वस्ति वाचन मंत्र अर्थ सहित

Swasti Vachan Mantra: हिंदू धर्म में मंत्रो का बहुत महत्व है। किसी भी शुभ काम से पहले भगवान को याद किया जाता है जिसके लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। यूं तो हिंदू धर्म में अनगिनत मंत्र है, लेकिन स्वस्ति वाचन मंत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र को स्वस्तिक मंत्र भी कहा जाता है। हिंदू धर्म को सभी धर्मों से प्राचीन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अमर वेदों और मंत्रों का उच्चारण करने से दिव्य शक्तियों की प्राप्ति होती है।

स्वस्ति वाचन मंत्र

स्वस्ति वाचन मंत्र का उच्चारण करने से मन को शांति प्राप्त होती है, और हम किसी भी कार्य में ध्यान लगा सकते हैं।

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे इसी महत्वपूर्ण मंत्र के बारे में। स्वस्तिवाचन मंत्र के लिरिक्स (Swasti Vachan Mantra Lyrics with Meaning) के साथ इसका हिंदी अर्थ भी जानेंगे। इसी के साथ बिना किसी देरी के 99Pandit के साथ जानते हैं इस प्राचीन मंत्र के बारे में।

What is Swasti Vachan Mantra? – स्वस्ति वाचन मंत्र क्या है?

स्वस्ति वाचन मंत्र जिसे स्वस्ति वाचन भी कहा जाता है, वैदिक मंत्रों का एक समूह है जिसे आमतौर पर किसी भी धार्मिक समारोह की शुरुआत में समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हुए गाया जाता है। सु+अस्ति=स्वस्ति का अर्थ है कल्याण।

इस मंत्र का उच्चारण शांति पाठ के 11 मंत्रों के साथ किया जाता है। इस सेट के मंत्रों का उच्चारण हाथ के इशारों से किया जाता है। इस मंत्र का उच्चारण करने से मन अत्यंत शांत, स्थिर और स्थिर हो जाता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र

किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, शगुन आदि के आरंभ में पवित्र वेदों से स्वस्तिवाचन का उच्चारण पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है।

साथ ही हम जब भी कोई शुभ कार्य करते हैं, तो वैदिक स्वस्तिवाचन का उच्चारण करने की परंपरा रही है। यह एक गहन विज्ञान है जिसे समझना आवश्यक है।

Swasti Vachan Mantra lyrics

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अर्थ: महान कीर्ति वाले इन्द्र हमारा कल्याण करो, विश्व के ज्ञानस्वरूप पूषादेव हमारा कल्याण करो। जिसका हथियार अटूट है, ऐसे गरुड़ भगवान हमारा मंगल करो। बृहस्पति हमारा मंगल करो।

संपूर्ण स्वस्ति वाचन मंत्र अर्थ सहित /शांति पाठ मंत्र सहित

मंत्र 1

ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद्वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे-दिवे॥ (1)

अर्थ – हमारे समीप चारों ओर से ऐसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न प्रभावित हों, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रगति को न बाधित करने वाले तथा सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिये तत्पर रहें।

मंत्र 2

ॐ देवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवानां रातिरभि नो निवर्तताम्।
देवानां सख्यमुपसेदिमा वयं देवा न आयुः प्रतिरन्तु जीवसे॥ (2)

अर्थ – यजमान की इच्छा रखने वाले देवताओं की कल्याणकारिणी श्रेष्ठ बुद्धि सदा हमारे सम्मुख रहे, देवताओं का दान हमें प्राप्त हो, हम देवताओं की मित्रता प्राप्त करें, देवता हमारी आयु में जीवन के निमित्त वृद्धि करें।

मंत्र 3

ॐ तान् पूर्वया निविदा हूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम्।
अर्यमणं वरुणं सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत्॥ (3)

अर्थ – हम वेदरुप सनातन वाणी के द्वारा अच्युतरुप भग, मित्र, अदिति, प्रजापति, अर्यमण, वरुण, चन्द्रमा एवं अश्विनीकुमारों का आवाहन करते हैं। ऐश्वर्यमयी सरस्वती महावाणी हमें सभी प्रकार का सुख प्रदान करें।

मंत्र 4

ॐ तन्नो वातो मयो भुवातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः।
तद् ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम्॥ (4)

अर्थ – वायुदेवता हमें सुखकारी औषधियाँ प्राप्त करायें। माता पृथ्वी एवं पिता स्वर्ग भी हमें सुखकारी औषधियाँ प्रदान करें। सोम का अभिषव करने वाले सुखदाता ग्रावा उस औषधरुप अदृष्ट को प्रकट करें। हे अश्विनी-कुमारों! आप दोनों सभी के आधार हैं, हमारी प्रार्थना स्वीकार करें।

मंत्र 5

ॐ तमीशानं जगतस्तस्थुषस्पतिं धियञ्जिन्वमवसे हूमहे वयम्।
पूषा नो यथा वेदसामसद् वृधे रक्षिता पायुरदब्धः स्वस्तये॥ (5)

अर्थ – हम स्थावर-जंगम के स्वामी, बुद्धि को सन्तोष प्रदान करने वाले रुद्रदेवता का रक्षा के निमित्त आवाहन करते हैं। वैदिक ज्ञान एवं धन की रक्षा करने वाले, पुत्र आदि के पालक, अविनाशी पुष्टि-कर्ता देवता हमारी वृद्धि एवं कल्याण के निमित्त हों।

मंत्र 6

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ (6)

अर्थ – महती कीर्ति वाले ऐश्वर्यशाली इन्द्र हमारा कल्याण करें, जिसको संसार का ज्ञान है तथा जिसका सब पदार्थों में स्मरण है, समस्त प्राणियों के पोषणकर्ता वे पूषा (सूर्य) हमारा कल्याण करें। जिनकी चक्रधारा के समान गति को कोई रोक नहीं सकता, वे गरुड़देव हमारा कल्याण करें। वेदवाणी के स्वामी बृहस्पति हमारा कल्याण करें।

मंत्र 7

ॐ पृषदश्वा मरुतः पृश्निमातरः शुभं यावानो विदथेषु जग्मयः।
अग्निजिह्वा मनवः सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसा गमन्निह॥ (7)

अर्थ – चितकबरे वर्ण के घोड़ों वाले, अदिति माता से उत्पन्न, सभी का कल्याण करने वाले, यज्ञशालाओं में जाने वाले, अग्निरुपी जिह्वा वाले, सर्वज्ञ, सूर्यरुप नेत्र वाले मरुद्गण एवं विश्वेदेव देवता हविरुप अन्न को ग्रहण करने के लिये हमारे इस यज्ञ में पधारें।

मंत्र 8

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागं सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥ (8)

अर्थ – हे यजमान के रक्षक देवताओं! हम दृढ़ अङ्गों वाले शरीर से पुत्र आदि के साथ मिलकर आपकी स्तुति करते हुये कानों से कल्याणपूर्ण वचनों का श्रवण करें, नेत्रों से कल्याणमयी वस्तुओं का दर्शन करें, देवताओं की उपासना-योग्य आयु को प्राप्त करें।

मंत्र 9

ॐ शतमिन्नु शरदो अन्ति देवा यत्रा नश्चक्राजरसं तनूनां।
पुत्रासो यत्र पितरो भवन्ति मानो मध्यारीरिषतायुर्गन्तोः॥ (9)

अर्थ – हे देवताओं! आप सौ वर्ष की आयु-पर्यन्त हमारे समीप रहें, जिस आयु में हमारे शरीर को जरावस्था प्राप्त हो, जिस आयु में हमारे पुत्र पिता अर्थात् पुत्रवान् बन जायें, हमारी उस गमनशील आयु को आप लोग मध्य में खण्डित न होने दें।

मंत्र 10

ॐ अदितिर्द्यौरदितिरन्तरिक्षमदितिर्माता स पिता स पुत्रः।
विश्वेदेवा अदितिः पञ्च जना अदितिर्जातमदितिर्जनित्वम्॥ (10)

अर्थ – अखण्डित पराशक्ति स्वर्ग है, वही अन्तरिक्ष-रुप है, वही पराशक्ति माता-पिता एवं पुत्र भी है। समस्त देवता पराशक्ति के ही स्वरुप हैं, अन्त्यज सहित चारों वर्णों के सभी मनुष्य पराशक्तिमय हैं, जो उत्पन्न हो चुका है तथा जो उत्पन्न होगा, सब पराशक्ति के ही स्वरुप हैं।

मंत्र 11

पृथिवी शान्तिरन्तरिक्षगं शान्तिर्द्यौश्शान्तिर्दिशः शान्तिरवान्तरदिशाश्शान्तिरग्निश्शान्तिर्वायुः
शान्तिरादित्यश्शान्तिश्चन्द्रमाश्शान्तिर्नक्षत्राणि शान्तिरापश्शान्तिरोषधयश्शान्तिर्वनस्पतयश्शान्तिर्गौः
शान्तिरजा शान्तिरश्वश्शान्तिः पुरुषश्शान्तिर्ब्रह्म शान्तिर्ब्राह्मणश्शान्तिः शान्तिरेव शान्तिश्शान्तिर्मे अस्तु शान्तिः। (11)

अर्थ – पृथ्वीलोक शान्तिदायक हो, अन्तरिक्षलोक शान्तिदायक हो, द्युलोक शान्तिदायक हो। समस्त दिशायें शान्तिदायक हों, अग्नि एवं वायु शान्तिदायक हो। सूर्य, चन्द्र एवं सम्पूर्ण नक्षत्र मण्डल शान्तिदायक हो, जल, औषधियाँ एवं वनस्पतियाँ शान्तिदायक हों। गौ, अश्व आदि पशु शान्तिदायक हों। पुरुष शान्तिदायक हो। ब्रह्म अर्थात् महान परमेश्वर हमें शान्ति प्रदान करने वाले हों। ब्राह्मण शान्तिदायक हों, उनका दिया हुआ ज्ञान एवं वेद शान्ति प्रदान करने वाले हों। सम्पूर्ण चराचर जगत शान्ति पूर्ण हो अर्थात् सर्वत्र शान्ति ही शान्ति हो। ऐसी शान्ति मुझे प्राप्त हो तथा उसमें सदा वृद्धि ही होती रहे। अभिप्राय यह है कि सृष्टि का कण-कण हमें शान्ति प्रदान करने वाला हो। समस्त पर्यावरण ही सुखद व शान्तिप्रद हो।

स्वस्ति वाचन मंत्र

Complete Swasti Vachan Mantra in English – संपूर्ण स्वस्ति वाचन मंत्र अंग्रेजी में

Mantra 1

Om Aa No Bhadrah Kratavo Yantu Vishvatoadabdhaso Aparitasa Udbhidah।
Deva No Yatha Sadamidvridhe Asannaprayuvo Rakshitaro Dive-Dive॥ (1)

Meaning – May powers auspicious come to us from every side, never deceived, unhindered, and victorious. The Gods may ever be with us for our gain, our guardians day by day, unceasing in their care.

Mantra 2

Om Devanam Bhadra Sumatirrijuyatam Devanam Ratirabhi No Nivartatam।
Devanam Sakhyamupasedima Vayam Deva Na Ayuh Pratirantu Jivase॥ (2)

Meaning: May the auspicious favor of the Gods be ours. On us descends the bounty of the righteous Gods. We have devoutly sought the friendship of the Gods, so may the Gods extend our lives that we may live.

Mantra 3

Om Tan Purvaya Nivida Humahe Vayam Bhagam Mitramaditim Dakshamasridham।
Aryamanam Varunam Somamashvina Saraswati Nah Subhaga Mayaskarat॥ (3)

Meaning– We call them hither with a hymn of olden time, Bhaga, the friendly Daksha, Mitra, Aditi, Aryaman, Varuna, Soma, and the Ashvins. May Saraswati, auspicious, grant felicity.

Mantra 4

Om Tanno Vato Mayo Bhuvatu Bheshajam Tanmata Prithivi Tatpita Dyauh।
Tad Gravanah Somasuto Mayobhuvastadashvina Shrinutam Dhishnya Yuvam॥ (4)

Meaning – May Vayu waft to us the felicitous medicament, May Mother Earth, Father Heaven, bring it; May the felicitous Stones distilling Soma secure it. May ye Ashvins, with understanding, hearken to our prayers.

Mantra 5

Om Tamishanam Jagatastasthushaspatim Dhiyanjinvamavase Humahe Vayam।
Pusha No Yatha Vedasamasad Vridhe Rakshita Payuradabdhah Swastaye॥ (5)

Meaning – We worship Him, the Lord of the universe of the inanimate and animate creation, for He is the blesser of our intellect and our protector. He dispenses life and good among all. Him do we worship, for as He is our preserver and benefactor, so is He our way to bliss and happiness also.

Mantra 6

Om Swasti Na Indro Vriddhashravah Swasti Nah Pusha Vishwavedah।
Swasti Nastarkshyo Arishtanemih Swasti No Brihaspatirdadhatu॥ (6)

Meaning – May Indra, who is provided with great speed, do well to us; May Pushan, the knower of the world, do good to us, and May Tarkshya, who devastates enemies, do good to us! May Brihaspati, the Lord of the Vedic knowledge or speech, give us spiritual delight from the light of knowledge and wisdom.

Mantra 7

Om Prishadashva Marutah Prishnimatarah Shubham Yavano Vidatheshu Jagmayah।
Agnijihva Manavah Surachakshaso Vishve No Deva Avasa Gamanniha॥ (7)

Meaning – The Maruts, sons of Prishni, with spotted steeds, of happy gait, frequenters of sacrifices, the Gods whose tongue is Agni, knowers, radiant as the Sun, May all come hither for our protection.

Mantra 8

Om Bhadram Karnebhih Shrinuyama Devah Bhadram Pashyemakshabhiryajatrah।
Sthirairangaistushtuva Sastanubhirvyashema Devahitam Yadayuh॥ (8)

Meaning – Gods, May we with our ears listen to what is good, and with our eyes see what is good, ye Holy Ones. With firm limbs and bodies, May we extol you to attain the term of life appointed by the Gods.

Mantra 9

Om Shataminnu Sharado Anti Deva Yatra Nashchakrajarasam Tanunam।
Putraso Yatra Pitaro Bhavanti Mano Madhyaririshatayurgantoh॥ (9)

Meaning – A hundred autumns stand before us, O ye Gods, within whose space ye bring our bodies to decay; Within whose space our sons become fathers in turn. Break ye not in the midst our course of fleeting life.

Mantra 10

Om Aditirdyauraditirantarikshamaditirmata Sa Pita Sa Putrah।
Vishvedeva Aditih Pancha Jana Aditirjatamaditirjanitvam॥ (10)

Meaning: Aditi is Heaven; Aditi is mid-air; Aditi is the Mother, the Father, and the Son. She is all the Gods, she is the five-classed men, and Aditi is all that hath been born and shall be born.

Mantra 11

Prithivi Shantirantarikshagam Shantirdyaushshantirdishah
Shantiravantara Dishashshantir Agnishshantirvayuh
Shantiradityashshantish Chandramashshantir Nakshatrani
Shantirapashshantir Oshadhayashshantir Vanaspatayashshantirgauh
Shantiraja Shantirashvashshantih Purushashshantirbrahma
Shantirbrahmanashshantih Shantireva Shantishshantirme Astu Shantih। (11)

Meaning – May the Prithviloka be peaceful, may the Antarikshaloka be peaceful. May the Dyuloka be peaceful. May all directions be peaceful, and may fire and air be peaceful. May the Surya, Chandra, and the entire Nakshatra Mandala provide peace, and may water, medicines, and plants provide peace. Animals like cows, horses, etc., should be peaceful. Men should be peaceful. May Brahma, i.e., the great God, grant us peace. The knowledge given by Brahmins should give peace, and Vedas should give peace. The entire living world should be filled with peace; there should be peace everywhere. May I attain such peace, and may it always increase. The intention is that every particle of the universe should provide us with peace. The entire environment should be pleasant and peaceful.

स्वस्ति वाचन मंत्र के नियम: Rules for Swasti Vachan Mantra

  1. किसी भी पूजा की शुरुआत में स्वस्ति वाचन करना चाहिए।
  2. स्वस्ति वाचन के बाद, पूजा में प्रयुक्त जल या पवित्र जल को दसों दिशाओं में छिड़कना चाहिए।
  3. नए घर में प्रवेश करते समय भी स्वस्ति वाचन करना शुभ होता है।
  4. विवाह समारोह में भी स्वस्ति वाचन का महत्व है।

स्वस्ति वाचन मंत्र के लाभ – Benefits of Swasti Vachan Mantra

  1. व्यापार शुरू करते समय स्वास्तिक मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। इससे व्यापार में आर्थिक लाभ अधिक होता है और नुकसान की संभावना कम होती है।
  2. बच्चे के जन्म के समय भी स्वास्तिक मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे बच्चा स्वस्थ रहता है और उस पर आलौकिक बाधाएं नहीं आती हैं।
  3. घर बनवाते समय, घर की नींव रखते समय या खेत में बीज बोते समय स्वास्तिक मंत्र का जाप किया जाता है। पशुओं को बीमारियों से बचाने और उन्हें समृद्ध बनाने के लिए भी इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है।
  4. किसी भी तरह की यात्रा पर निकलते समय भी स्वास्तिक मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से यात्रा शुभ होती है और किसी तरह की परेशानी नहीं आती।
  5. शरीर की हर तरह की सुरक्षा और घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए स्वास्तिक मंत्र का जाप करना चाहिए।

निष्कर्ष

अंत में, चाहे कोई शुभ कार्य हो, गृह प्रवेश पूजा हो, सत्यनयन पूजा हो, शादी हो या कोई हवन का आयोजन, अपना एक मंत्र जरूर सुना होगा। ऊं स्वस्ति न इंद्रो…, यह मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं है, अपितु इसमें अपार शक्तियां हैं तथा यह शुभ कार्यों में नकारात्मक ऊर्जाओं को प्रवेश करने से रोकता है।

स्वस्ति वाचन मंत्र हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मंत्र है। इसके जाप का सबसे महत्पूर्ण लाभ यह है कि यह इच्छा पूरी करने में मदद करता है।

इसके अलावा किसी भी शुभ कार्य से पहले अगर इस मंत्र का जाप किया जाए तो यह शुभता, सकारात्मकता और लाभ लाता है।

इस विशेष मंत्र के वक्त पंडित और पुरोहित एक अलग ही ऊर्जा के साथ पाठ करते हैं। स्वस्ति वाचन मंत्र को हमारे हिंदू शास्त्र में बहुत ही फलकारी बताया गया है।

जरूरी नहीं कि इस मंत्र का जाप किसी बड़े अनुष्ठान पर किया जाए, आप रोजाना भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं, जिस से आप के घर में हमेशा सुख शांति बनी रहेगी।

आशा है कि आपका आज का यह ब्लॉग पसंद आया होगा। अगर आप भी अपने घर में स्वस्ति वाचन मंत्र या फिर शांति पाठ का जाप करना चाहते हैं तो आज ही 99Pandit से अपने लिए पंडित बुक (Book a Pandit) करें।

Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics: शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी

शिव मानस पूजा स्तोत्र (Shiv Manas Puja Stotra) भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने भगवान शिव की मानसिक पूजा के लिए की थी।

यह स्तोत्र पांच शक्तिशाली श्लोकों का एक समूह है। पांच शक्तिशाली श्लोकों में भगवान शिव की मानसिक पूजा की एक विशेष विधि का विस्तार से वर्णन किया गया है।

ऐसा माना जाता है कि साधारण पूजा जो धूपबत्ती, थाली, आदि बाहरी वास्तुओं का उपयोग करके की जाती है, वह इतनी शक्तिशाली नहीं होती जितनी अपने मन से की जाने वाली पूजा होती है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

यह शिव मानस पूजा स्तोत्र दर्शाता है कि भगवान शिव की पूजा और अर्चना के लिए विश्वास और इरादे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

भगवान शिव को समर्पित इस पूजा स्तोत्र की जानकारी हर किसी को मालूम नहीं होती। इसीलिये 99Pandit पर आज आपको इस पूजा स्तोत्र के बारे में सारी जानकारी प्राप्त होगी।

चलिए फिर 99Pandit के साथ जानते हैं शिव मानस पूजा स्तोत्र की हिंदी लिरिक्स (Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics) तथा, इस स्तोत्र का अर्थ और इसको पढ़ने के लाभ।

What is Shiv Manas Puja Stotra? – शिव मानस पूजा स्तोत्र क्या है?

शिव मानस पूजा स्तोत्र पांच शक्तिशाली श्लोक से मिलकर बना एक अनोखा स्तोत्र है। इन पाँच शक्तिशाली श्लोकों में भगवान शिव की मानसिक पूजा की एक विशेष विधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। श्री आदि शंकराचार्य ने भगवान शिव की मानसिक पूजा के लिए इस स्तोत्र की रचना की थी।

यह स्तोत्र एक भक्त द्वारा की गई प्रार्थना के रूप में है जो अपने मन में पूजा में निर्धारित सभी प्रसाद और अनुष्ठानों की कल्पना करता है और उन्हें विश्वास और भक्ति के साथ भगवान शिव को अर्पित करता है।

यह स्तोत्र उन लोगों के लिए एक आँख खोलने वाला है जो अनुष्ठानों के बारे में कट्टर हैं क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विश्वास और इरादे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

कोई भी साधना अधिक शक्तिशाली होती है यदि उसे करने के लिए उपयोग किए जाने वाले साधन भी अधिक शक्तिशाली हों।

चूँकि मन भौतिक शरीर से बहुत अधिक शक्तिशाली है, इसलिए मानसिक आराधना भी बाह्य आराधना से कहीं अधिक शक्तिशाली है… और इसे कहीं भी, कभी भी किया जा सकता है।

Shiv Manas Puja Stotra Hindi Lyrics – शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी लिरिक्स

रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदांकितं चन्दनम् ।
जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा दीपं देव दयानिधे पशुपते हत्कल्पितं गृहाताम् ।।1।।

सौवर्णे नवरत्नखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम् ।
शाकानामयुतं जलं रूचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु ।।2।।

छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं वीणाभेरिमृदंगकाहल कला गीतं च नृत्यं तथा ।
साष्टांग प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा होतत्समस्तं मया संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ।।3।।

आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः ।
संचारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो यघत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।।4।।

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ।।5।।

शिव मानस पूजा स्तोत्र हिंदी मीनिंग – Shiv Manas Puja Stotra Hindi Meaning

हे देव! हे दया के सागर! मैंने रत्नों से निर्मित आसन,हिमालय के शीतल जल से स्नान, नाना रत्नों से सुशोभित दिव्य वस्त्र, मृगमद कस्तूरी की सुगंध से अंकित चन्दन, चमेली, चमेली, चम्पाक, बिल्वपत्र आदि से पुष्पों की बनाई माला पको अर्पित है। सभी प्रकार की सुगंधित धूप और दीपक मानसिक प्रकार से आपको दर्शित करवा रहा हूं, आप ग्रहण कीजिए। (1)

मैंने भक्तिपूर्वक नवीन स्वर्णपात्र, जिसमें विविध प्रकार के रत्न जड़ित हैं, में खीर, दूध और दही सहित पांच प्रकार के स्वाद वाले व्यंजनों के संग कदलीफल, शर्बत, शाक, कपूर से सुवासित और स्वच्छ किया हुआ मृदु जल एवं ताम्बूल आपको मानसिक भावों द्वारा बनाकर प्रस्तुत किया है। हे कल्याण करने वाले ! मेरी इस भावना को स्वीकार करें। (2)

हे भगवन, आपके ऊपर छत्र लगाकर चंवर और पंखा झल रहा हूँ। निर्मल दर्पण, जिसमें आपका स्वरूप सुंदरतम व भव्य दिखाई दे रहा है, भी प्रस्तुत है। वीणा, भेरी, मृदंग, दुन्दुभि आदि की मधुर ध्वनियां आपको प्रसन्नता के लिए की जा रही हैं। स्तुति का गायन, आपके प्रिय नृत्य को करके मैं आपको साष्टांग प्रणाम करते हुए संकल्प रूप से आपको समर्पित कर रहा हूं। हे सर्वव्यापी और शक्तिशाली (ईश्वर), मैं मानसिक रूप से यह सब आपको अर्पित करता हूँ! हे प्रभु! मेरी पूजा स्वीकार करो! (3)

हे शंकरजी, आप मेरी आत्मा हैं। मेरी बुद्धि आपकी शक्ति पार्वतीजी हैं। मेरे प्राण आपके गण हैं। मेरा यह पंच भौतिक शरीर आपका मंदिर है। संपूर्ण विषय भोग की रचना आपकी पूजा ही है। मैं जो सोता हूं, वह आपकी ध्यान समाधि है। मेरा चलना-फिरना आपकी परिक्रमा है। मेरी वाणी से निकला प्रत्येक उच्चारण आपके स्तोत्र व मंत्र हैं। इस प्रकार मैं आपका भक्त जिन-जिन कर्मों को करता हूं, वह आपकी आराधना ही है। (4)

हे परमेश्वर! मैंने हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण, नेत्र अथवा मन से अभी तक जो भी अपराध किए हैं। वे विहित हों अथवा अविहित, उन सब पर आपकी क्षमापूर्ण दृष्टि प्रदान कीजिए। हे दया के सागर, हे देवों के देव, हे भगवान शंभो, यह सब क्षमा करें, श्री महादेवजी, आपकी जय हो। जय हो। (5)

Shiv Manas Puja Stotra English Lyrics – शिव मानस पूजा स्तोत्र इंग्लिश लिरिक्स

Ratnaih Kalpitam Aasanam Hima Jalaih Snaanam Cha Divya Ambaram
Naanaa Ratna Vibhuussitam Mraga Madaa Moda Angkitam Candanam |
Jaatii Campaka Bilva Patra Rachitam Pusspam Cha Dhuupam Tathaa
Diipam Deva Dayaa Nidhe Pashupate Hrt Kalpitam Grhyataam ||1||

Sauvarnne Nava Ratna Khanndda Racite Paatre Ghrtam Paayasam
Bhakssyam Pancha Vidham Payo Dadhi Yutam Rambhaa Phalam Paanakam |
Shaakaanaam Ayutam Jalam Ruchikaram Karpuura-Khannddoa U]jjvalam
Taambuulam Manasaa Mayaa Viracitam Bhaktyaa Prabho Sviikuru ||2||

Chatram Chaamarayor Yugam Vyajanakam Cha Adarshakam Nirmalam
Viinnaa Bheri Mrdangga Kaahala Kalaa Giitam Cha Nrtyam Tathaa |
Saassttaanggam Prannatih Stutir Bahu Vidhaa Hyetat Samastam Mayaa
Sangkalpena Samarpitam Tava Vibho Puujaam Grhaanna Prabho ||3||

Aatmaa Tvam Girijaa Matih Sahacaraah Praannaah Shariiram Grham
Puujaa Te Vissayopabhoga Rachanaa Nidraa Samaadhi-Sthitih |
Sanchaarah Padayoh Pradakssinna Vidhih Stotraanni Sarvaa Giro
Yadyat Karma Karomi Tat-Tad-Akhilam Shambho Tava Araadhanam ||4||

Kara Charanna Krtam Vaak Kaaya- am Karma Jam Vaa
Shravanna Nayana Jam Vaa Maanasam Va Aparaadham |
Vihitam Avihitam Vaa Sarvam-Etat-Kssamasva
Jaya Jaya Karunna Abdhe Shrii Mahaadeva Shambho ||5||

Shiv Manas Puja Stotra English Meaning – शिव मानस पूजा स्तोत्र इंग्लिश मीनिंग

O Lord! O ocean of mercy! I offer you a seat made of gems, a bath in the cool waters of the Himalayas, divine clothes adorned with various gems, sandalwood imbued with the fragrance of deer musk, and a garland made of flowers such as jasmine, champak, bilvapatra, etc. I am mentally showing you all types of fragrant incense and lamps; please accept them. (1)

I have prepared and presented to you in a new golden vessel studded with various gems five types of dishes, including kheer, mil,k and curd, along with bananas, sherbet, vegetables, and sand oft water purified and scented with camphor and betel leaves, through my mental feelings. O benefactor! Please accept this sentiment of mine. (2)

O Lord, I am placing an umbrella over you and fanning you with a fan. A clean mirror is also presented in which your form appears most beautiful and grand. Sweet sounds of Veena, Bheri, Mridang, Dundubhi, etc., are being played to please you. By singing praises and performing your favourite dance, I am prostrating before you and dedicating myself to you in the form of a resolution. Prabhu! Please accept this worship of my praise in various ways. (3)

O Shankarji, you are my soul. My intellect is your power, Parvatiji. My life is your followers. This five-physical body of mine is your temple. The creation of all sensual pleasures is your worship. The sleep I do is your meditation and samadhi. My walking and moving around is your circumambulation. Every utterance that comes out of my mouth is your hymn and mantra. Thus, whatever I, your devotee, do is your worship. (4)

O God! Whatever sins I have committed till now with my hands, feet, speech, body, deeds, ears, eyes, or mind, whether they are prescribed or not, please bestow your forgiving glance on all of them. O ocean of mercy, O God of gods, O Lord Shambhu, forgive all this, Shri Mahadevji, victory to you. Victory to you. (5)

शिव मानस पूजा स्तोत्र का महत्व हिंदी में

“शिव मानस पूजा स्तोत्र” को एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सुंदर पाठ और पूजा का रूप माना जाता है, जो न केवल योगी को भगवान शिव को समर्पित करने के तरीके का वर्णन और निर्देश देता है, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने के लाभ और अनुभव को भी समझाता है।

यह ईश्वर के करीब जाने और उससे जुड़ने का एक शक्तिशाली तरीका है। ” शिव मनसा पूजा ” के मामले में, योगी जिस देवता से जुड़ रहा है, वह भगवान शिव हैं।

यह सुंदर भावनात्मक स्तुति द्वारा हम मानसिक शांति के साथ-साथ ईश्वर की कृपा बिना किसी साधन संपन्न कर सकते हैं। मानसिक पूजा का शास्त्रों में श्रेष्ठतम पूजा के रूप में वर्णित है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र

इसमें कहा गया है कि एक बार जब भगवान शिव का रूप योगी के हृदय में स्थापित हो जाता है, तो हृदय से यह जुड़ाव बना रहेगा, और शिव के प्रति भक्ति निरंतर जीवंत और अधिक जीवंत होती जाएगी।

यह स्तोत्र, आम तौर पर, पूजा और भक्ति या भक्ति योग का एक मानसिक रूप है। इसे विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि योगी जहाँ भी हो और जो भी कर रहा हो, तुरंत मनसा पूजा शुरू करना संभव है क्योंकि इसके लिए केवल मन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।

चूँकि पूजा मन में एकाग्रता के साथ और भक्त के सामने भगवान की उपस्थिति की भावना के साथ की जाती है, इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण, पवित्र और पावन है।

कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन मानस पूजा करके अपनी इच्छानुसार कुछ भी प्राप्त कर सकता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

शिव मानस पूजा स्तोत्र का जाप करने के लाभ

1. यह शिव मनसा पूजा स्तोत्र भक्ति का प्रत्यक्ष रूप है और यह व्यक्ति को भौतिक प्रसाद के बिना भी भगवान शिव के साथ गहराई से जुड़ने की अनुमति देता है।

2. ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से की गई भगवान शिव की मानसिक पूजा पिछले कर्मों को निष्प्रभावी करने और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है।

3. इसकी रचना अद्वैत वेदांत के समर्थक आदि शंकराचार्य ने की थी, इसलिए यह मन को सूक्ष्मता से अद्वैत बोध और मुक्ति की ओर ले जाता है।

4. यह शिव स्तोत्र उन लोगों के लिए आंख खोलने वाला है जो कर्मकांडों के प्रति कट्टर हैं, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आस्था और इरादे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

5. नियमित शिव मनसा पूजा स्तोत्र का जप करने से एकाग्रता बढ़ती है और मन को अंतर्मुखी होने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो आध्यात्मिक और दैनिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।

6. कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन मानस पूजा करके अपनी इच्छानुसार कुछ भी प्राप्त कर सकता है और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।

7. ये श्लोक भौतिक अर्पण की अपेक्षा भक्ति पर जोर देते हैं, तथा संतोष और वैराग्य विकसित करने में सहायता करते हैं। स्तोत्र सिखाता है कि भौतिक संसाधनों से ज़्यादा दिल की इच्छा और भक्ति मायने रखती है।

8. पांच शक्तिशाली श्लोकों से निर्मित यह स्तोत्र बाधाओं को दूर करता है – किसी मंदिर, पैसे या वस्तुओं की ज़रूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति सिर्फ़ मन से शिव की पूजा कर सकता है।

निष्कर्ष

शिव मानस पूजा स्तोत्र भगवान शिव की आराधना करने के लिए सबसे सुंदर पूजा स्तोत्र हैं। इस भक्तिपूर्ण स्तुति का प्रतिदिन पाठ कर के हम मानसिक शांति के साथ-साथ भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं।

मानसिक पूजा का शास्त्रों में श्रेष्ठतम पूजा के रूप में वर्णित है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिव मानस पूजा स्तोत्र का जाप करने से कई आध्यात्मिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ मिलते हैं।

यह शक्तिशाली स्तोत्र भगवान शिव को एक हार्दिक भेंट है, जो बिना किसी भौतिक अनुष्ठान के भी आपकी भगवान शिव के प्रति भक्ति को दर्शाता है। इस शिव मानस पूजा कृपा का दिव्य साक्षात् प्रसाद मनुष्य को निरंतर ग्रहण करते रहने की आवश्यकता है।

भगवान शिव के इस शक्तिशाली स्तोत्र का उच्चारण प्रति सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में करना बहुत फलदायी माना जाता है। आज के ब्लॉग में बस इतना ही।

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Bhaktamar Stotra in Hindi: श्री भक्तामर स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

भक्तामर स्तोत्र: जैन धर्म एक प्राचीन धर्म है। जैन धर्म के भक्तों को “जैन” के रूप में नामित किया गया है, यह शब्द संस्कृत शब्द जीना (विजेता) से लिया गया है।

नैतिक और गहन जीवन के माध्यम से जीवन के पुनरुत्थान की बाढ़ को पार करने में विजय के मार्ग का महत्व है।

जैन अपने इतिहास का अनुसरण चौबीस विजयी नायकों और प्रशिक्षकों की श्रृंखला के माध्यम से करते हैं जिन्हें तीर्थंकर के नाम से जाना जाता है, जिनमें पहले शासक आदिनाथ या ऋषभ देव थे।

भक्तामर स्तोत्र

भक्तामर स्तोत्र (भक्त + ‘अमर’) जैनियों के बीच एक बहुत लोकप्रिय स्तोत्र है, और इसका पाठ कई परिवारों द्वारा प्रतिदिन किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि इस भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) के प्रत्येक श्लोक में मंत्र की शक्ति है और यह सपनों को साकार करने में सहायक है।

जैन धर्मग्रंथों के अनुसार, जैन मुनि, आचार्य मानतुंगाचार्यजी ने भगवान आदिनाथ की स्तुति (स्तुति) में भक्तामर स्तोत्र लिखा था।

भक्तामर स्तोत्र का प्रत्येक शब्द उनकी ज्ञानवर्धक भक्ति और भगवान के प्रति असीम आस्था को प्रकट करता है।

भक्तामर स्तोत्र का महत्व अवंती के शासक राजा हर्ष के दरबार में बाना और मयूर नामक दो महान विद्वान थे।

आइये, 99Pandit के साथ जानते हैं इस महत्वपूर्ण भक्तामर स्तोत्र लिरिक्स (Bhaktamar Stotra Lyrics) के बारे में।

भक्तामर स्तोत्र क्या है? What is Bhaktamar Stotra?

भक्तामर स्तोत्र एक प्रसिद्ध जैन संस्कृत प्रार्थना है। इसकी रचना आचार्य मानतुंगा (7वीं शताब्दी ई.पू.) द्वारा की गई थी।

भक्तामर नाम दो संस्कृत नामों, “भक्त” और “अमर” के संयोजन से आया है। इस भक्तामर स्तोत्र में, आचार्य मानतुंगा ने 48 सबसे प्रमुख खंडों में इस साहसिक कार्य को चित्रित किया है।

जब आप प्राथमिक शब्द ‘भक्त’ प्रस्तुत करना शुरू करते हैं, तो आप सर्वशक्तिमान की तीव्रता के व्यक्तित्व चित्रण में संलग्न हो जाते हैं।

जब आप अंतिम शब्द, ‘लक्ष्मी’ के साथ समापन करते हैं, तो आपके पूरे शरीर में जीवन शक्ति की एक स्पष्ट सकारात्मक प्रगति होती है।

ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में मंत्र की शक्ति है और यह सपनों को साकार करने में सहायक है।

जैन धर्मग्रंथों के अनुसार, जैन मुनि, आचार्य मानतुंगाचार्यजी ने भगवान आदिनाथ की स्तुति (स्तुति) में भक्तामर स्तोत्र लिखा था।

यह उन्होंने जेल में लिखा था, क्योंकि राजा भोज ने उन्हें अपनी रहस्यवादी शक्तियां न दिखाने के कारण कैद कर लिया था।

उनके भक्तामर श्लोकों की शक्ति ऐसी थी कि, जैसे ही उन्होंने स्तोत्र लिखना पूरा किया, 48 जेल के ताले चमत्कारिक रूप से एक-एक करके खुल गए।

भक्तामर स्तोत्र लिरिक्स – Bhaktamar Stotra Lyrics with Meaning

श्लोक- 1

भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा-
मुद्योतकं दलित-पाप-तमो-वितानम् ।
सम्यक्-प्रणम्य जिन प-पाद-युगं युगादा-
वालम्बनं भव-जले पततां जनानाम् ॥1॥

हिंदी अर्थ – झुके हुए भक्त देवो के मुकुट जड़ित मणियों की प्रथा को प्रकाशित करने वाले, पाप रुपी अंधकार के समुह को नष्ट करने वाले, कर्मयुग के प्रारम्भ में संसार समुन्द्र में डूबते हुए प्राणियों के लिये आलम्बन भूत जिनेन्द्रदेव के चरण युगल को मन वचन कार्य से प्रणाम करके । (मैं मुनि मानतुंग उनकी स्तुति करूँगा)

English Meaning – When the Gods bow down at Bhagavan Rishabhdeva’s feet, the divine glow of his nails increases the shininess of the jewels of their crowns.

The mere touch of his feet absolves beings from sins. He who submits himself at these feet is saved from taking birth again and again.

I offer my reverential salutations at the feet of Bhagavan Rishabhadeva, the first Tirthankar, the propagator of religion at the beginning of this era.

श्लोक- 2

य: संस्तुत: सकल-वां मय-तत्त्व-बोधा-
दुद्भूत-बुद्धि-पटुभि: सुर-लोक-नाथै: ।
स्तोत्रैर्जगत्-त्रितय-चित्त-हरैरुदारै:,
स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ॥2॥

हिंदी अर्थ – सम्पूर्णश्रुतज्ञान से उत्पन्न हुई बुद्धि की कुशलता से इन्द्रों के द्वारा तीन लोक के मन को हरने वाले, गंभीर स्तोत्रों के द्वारा जिनकी स्तुति की गई है उन आदिनाथ जिनेन्द्र की निश्चय ही मैं (मानतुंग) भी स्तुति करूँगा।

English Meaning – Wise celestial lords, who have acquired wisdom from all the canons, have eulogized Bhagavan Adinath with Hymns, bringing joy to the audience of three realms (heaven, earth, and hell).

I(Matungacharya, a humble man with little wisdom) shall be steadfast in my endeavor to eulogize that first Tirthankar.

श्लोक- 3

बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ!
स्तोतुं समुद्यत-मतिर्विगत-त्रपोऽहम् ।
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-
मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम् ॥3॥

हिंदी अर्थ – देवों के द्वारा पूजित हैं सिंहासन जिनका, ऐसे हे जिनेन्द्र मैं बुद्धि रहित होते हुए भी निर्लज्ज होकर स्तुति करने के लिये तत्पर हुआ हूँ क्योंकि जल में स्थित चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को बालक को छोड़कर दूसरा कौन मनुष्य सहसा पकड़ने की इच्छा करेगा? अर्थात् कोई नहीं ।

English Meaning – As an ignorant child takes up the impossible task of grabbing the moon’s reflection in the water out of impudence alone, an uneducated man like me is trying to eulogize a great soul like you.

श्लोक- 4

वक्तुं गुणान्गुण-समुद्र ! शशांक-कान्तान्,
कस्ते क्षम: सुर-गुरु-प्रतिमोऽपि बुद्ध्या ।
कल्पान्त-काल-पवनोद्धत-नक्र-चक्रं ,
को वा तरीतुमलमम्बुनिधिं भुजाभ्याम् ॥4॥

हिंदी अर्थ – हे गुणों के भंडार! आपके चन्द्रमा के समान सुन्दर गुणों को कहने लिये ब्रहस्पति के सद्रश भी कौन पुरुष समर्थ है? अर्थात् कोई नहीं। अथवा प्रलयकाल की वायु के द्वारा प्रचण्ड है मगरमच्छों का समूह जिसमें ऐसे समुद्र को भुजाओं के द्वारा तैरने के लिए कौन समर्थ है
अर्थात् कोई नहीं ।

English Meaning – O Ocean of virtues! Can even Brihaspati, the guruji of gods, with the help of his unlimited wisdom, narrate your virtues as transparent and blissful as the moon? (Certainly not.) Is it possible for a man to swim across the reptile-infested ocean, lashed by gales of deluge? (Certainly not.)

श्लोक- 5

सोऽहं तथापि तव भक्ति-वशान्मुनीश!
कर्तुं स्तवं विगत-शक्ति-रपि प्रवृत्त: ।
प्रीत्यात्म-वीर्य-मविचार्य मृगी मृगेन्द्रम्
नाभ्येति किं निज-शिशो: परिपालनार्थम् ॥5॥

हिंदी अर्थ – हे मुनीश! तथापि-शक्ति रहित होता हुआ भी, मैं- अल्पज्ञ, भक्तिवश, आपकी स्तुति करने को तैयार हुआ हूँ।

हरिणि, अपनी शक्ति का विचार न कर, प्रीतिवश अपने शिशु की रक्षा के लिये, क्या सिंह के सामने नहीं जाती? अर्थात जाती हैं।

English Meaning – O Apostle of apostles! I am incapable of narrating your infinite virtues. Still, inspired by my devotion to you, I intend to compose a hymn in your praise.

It is well known that to protect her fawn, even a doe puts her feet down and faces a lion, forgetting its frailty.

श्लोक- 6

अल्प-श्रुतं श्रुतवतां परिहास-धाम,
त्वद्-भक्तिरेव मुखरी-कुरुते बलान्माम् ।
यत्कोकिल: किल मधौ मधुरं विरौति,
तच्चाम्र-चारु-कलिका-निकरैक-हेतु: ॥6॥

हिंदी अर्थ – विद्वानों की हँसी के पात्र, मुझ अल्पज्ञानी को आपकी भक्ति ही बोलने को विवश करती हैं। बसन्त ऋतु में कोयल जो मधुर शब्द करती है उसमें निश्चय से आम्र कलिका ही एक मात्र कारण हैं ।

English Meaning – O lord! I am such an ignorant that I am an object of ridicule for the wise.

Still, my devotion to you compels me to sing hymns in your praise as the mango sprouts compel the cuckoo during the springtime to produce its melodious coo.

श्लोक- 7

त्वत्संस्तवेन भव-सन्तति-सन्निबद्धं,
पापं क्षणात्क्षयमुपैति शरीरभाजाम् ।
आक्रान्त-लोक-मलि-नील-मशेष-माशु,
सूर्यांशु-भिन्न-मिव शार्वर-मन्धकारम् ॥7॥

हिंदी अर्थ – आपकी स्तुति से, प्राणियों के, अनेक जन्मों में बाँध गये पाप कर्म क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं जैसे सम्पूर्ण लोक में व्याप्त रात्री का अंधकार सूर्य की किरणों से क्षणभर में छिन्न भिन्न हो जाता है।

English Meaning – Just as the bright sun rays remove darkness, the sins accumulated by living beings are wiped out by praying to you.

श्लोक- 8

मत्वेति नाथ! तव संस्तवनं मयेद,-
मारभ्यते तनु-धियापि तव प्रभावात् ।
चेतो हरिष्यति सतां नलिनी-दलेषु,
मुक्ता-फल-द्युति-मुपैति ननूद-बिन्दु: ॥8॥

हिंदी अर्थ – हे स्वामिन्! ऐसा मानकर मुझ मन्दबुद्धि के द्वारा भी आपका यह स्तवन प्रारम्भ किया जाता है, जो आपके प्रभाव से सज्जनों के चित्त को हरेगा। निश्चय से पानी की बूँद कमलिनी के पत्तों पर मोती के समान शोभा को प्राप्त करती हैं।

English Meaning – I compose this panegyric with the belief that, though composed by an ignorant like me, it will certainly please noble people due to your divine influence. Indeed, when on lotus leaves, dew drops gleam like pearls presenting a pleasant sight.

श्लोक – 9

आस्तां तव स्तवन-मस्त-समस्त-दोषं,
त्वत्संकथाऽपि जगतां दुरितानि हन्ति ।
दूरे सहस्रकिरण: कुरुते प्रभैव,
पद्माकरेषु जलजानि विकासभांजि ॥9॥

हिंदी अर्थ – सम्पूर्ण दोषों से रहित आपका स्तवन तो दूर, आपकी पवित्र कथा भी प्राणियों के पापों का नाश कर देती है। जैसे, सूर्य तो दूर, उसकी प्रभा ही सरोवर में कमलों को विकसित कर देती है।

English Meaning – The brilliant sun is far away; still, at dawn its soft glow makes the drooping lotus buds bloom.

Similarly, O Jina! Let alone the immeasurable powers of your eulog, mere utterance of your name with devotion destroys the sins of the mundane beings and purifies them.

श्लोक – 10

नात्यद्-भुतं भुवन-भूषण ! भूूत-नाथ!
भूतैर्गुणैर्भुवि भवन्त-मभिष्टुवन्त: ।
तुल्या भवन्ति भवतो ननु तेन किं वा
भूत्याश्रितं य इह नात्मसमं करोति ॥10॥

हिंदी अर्थ – हे जगत् के भूषण! हे प्राणियों के नाथ! सत्यगुणों के द्वारा आपकी स्तुति करने वाले पुरुष पृथ्वी पर यदि आपके समान हो जाते हैं तो इसमें अधिक आश्चर्य नहीं है।

क्योंकि उस स्वामी से क्या प्रयोजन, जो इस लोक में अपने अधीन पुरुष को सम्पत्ति के द्वारा अपने समान नहीं कर लेता ।

English Meaning – O ornament of the world! O Lord of the living beings! If the men who praise you through true virtues become like you on earth, then there is no surprise in it.

Because what is the use of a master who does not make the man under his control in this world equal to himself through wealth.

श्लोक – 11

दृष्ट्वा भवन्त मनिमेष-विलोकनीयं,
नान्यत्र-तोष-मुपयाति जनस्य चक्षु: ।
पीत्वा पय: शशिकर-द्युति-दुग्ध-सिन्धो:,
क्षारं जलं जलनिधेरसितुं क इच्छेत्?॥11॥

हिंदी अर्थ – हे अभिमेष दर्शनीय प्रभो! आपके दर्शन के पश्चात् मनुष्यों के नेत्र अन्यत्र सन्तोष को प्राप्त नहीं होते। चन्द्रकीर्ति के समान निर्मल क्षीरसमुद्र के जल को पीकर कौन पुरुष समुद्र के खारे पानी को पीना चाहेगा? अर्थात् कोई नहीं ।

English Meaning – O Jina! Your divine magnificence is spell-binding. After looking at your divine form nothing else please the eye.

Obviously, who would like to taste the saline sea water after drinking fresh water of the divine milk-ocean, pure and soothing like moonlight?

भक्तामर स्तोत्र

श्लोक – 12

यै: शान्त-राग-रुचिभि: परमाणुभिस्-त्वं,
निर्मापितस्-त्रि-भुवनैक-ललाम-भूत !
तावन्त एव खलु तेऽप्यणव: पृथिव्यां,
यत्ते समान-मपरं न हि रूप-मस्ति ॥12॥

हिंदी अर्थ – हे त्रिभुवन के एकमात्र आभुषण जिनेन्द्रदेव! जिन रागरहित सुन्दर परमाणुओं के द्वारा आपकी रचना हुई वे परमाणु पृथ्वी पर निश्चय से उतने ही थे क्योंकि आपके समान दूसरा रूप नहीं है ।

English Meaning – O Crown of the three realms! It appears as if the quiescen ce and harmony imparting ultimate particles became extinct after constituting your body, because I do not witness such out of the world magnificience other than yours.

श्लोक – 13

वक्त्रं क्व ते सुर-नरोरग-नेत्र-हारि,
नि:शेष-निर्जित-जगत्त्रितयोपमानम् ।
बिम्बं कलंक-मलिनं क्व निशाकरस्य,
यद्वासरे भवति पाण्डुपलाश-कल्पम् ॥13॥

हिंदी अर्थ – हे प्रभो! सम्पूर्ण रुप से तीनों जगत् की उपमाओं का विजेता, देव मनुष्य तथा धरणेन्द्र के नेत्रों को हरने वाला कहां आपका मुख? और कलंक से मलिन, चन्द्रमा का वह मण्डल कहां? जो दिन में पलाश (ढाक) के पत्ते के समान फीका पड़ जाता ।

English Meaning – Analogy of your face with the moon does not appear proper to me. How can your scintillating face, that please the eyes of gods, angels, humans and other beings alike, be compared with the spotted moon that is dull and pale, during the day, as the autumn leaves. Indeed, even the best available analogy for your face is lowly in comparison.

श्लोक – 14

सम्पूर्ण-मण्डल-शशांक-कला-कलाप-
शुभ्रा गुणास्-त्रि-भुवनं तव लंघयन्ति ।
ये संश्रितास्-त्रि-जगदीश्वरनाथ-मेकं,
कस्तान् निवारयति संचरतो यथेष्टम् ॥14॥

हिंदी अर्थ – पूर्ण चन्द्र की कलाओं के समान उज्ज्वल आपके गुण, तीनों लोको में व्याप्त हैं क्योंकि जो अद्वितीय त्रिजगत् के भी नाथ के आश्रित हैं उन्हें इच्छानुसार घुमते हुए कौन रोक सकता हैं? कोई नहीं ।

English Meaning – O Lord of the three realms! Surpassing the glow of the full moon, your infinite virtues are radiating throughout the universe- even beyond the three realms; the hymns in praise of your virtues can be heard everywhere throughout the universe.

Indeed, who can curb the freedom of movement of devotees of the only omnipotent like you? (Certainly no one is capable of).

श्लोक – 15

चित्रं-किमत्र यदि ते त्रिदशांग-नाभिर्-
नीतं मनागपि मनो न विकार-मार्गम् ।
कल्पान्त-काल-मरुता चलिताचलेन,
किं मन्दराद्रिशिखरं चलितं कदाचित् ॥15॥

हिंदी अर्थ – यदि आपका मन देवागंनाओं के द्वारा किंचित् भी विक्रति को प्राप्त नहीं कराया जा सका, तो इस विषय में आश्चर्य ही क्या है? पर्वतों को हिला देने वाली प्रलयकाल की पवन के द्वारा क्या कभी मेरु का शिखर हिल सका है? नहीं ।

English Meaning – O Passionless! Divine nymphs have tried their best to allure you through libid gestures, but it is not surprising that your tranquillity has not been disturbed even fractionally.

Of course, the tremendous gale of the doomsday that moves common hillocks can not disturb even the tip of the great Sumeru mountain.

श्लोक – 16

निर्धूम-वर्ति-रपवर्जित-तैल-पूर:,
कृत्स्नं जगत्त्रय-मिदं प्रकटीकरोषि ।
गम्यो न जातु मरुतां चलिताचलानां,
दीपोऽपरस्त्वमसि नाथ ! जगत्प्रकाश: ॥16॥

हिंदी अर्थ – हे स्वामिन्! आप धूम तथा बाती से रहित, तेल के प्रवाह के बिना भी इस सम्पूर्ण लोक को प्रकट करने वाले अपूर्व जगत् प्रकाशक दीपक हैं जिसे पर्वतों को हिला देने वाली वायु भी कभी बुझा नहीं सकती ।

English Meaning – O Lord! You are an all enlightening divine lamp that needs neither a wick nor oil,and is smokeless, yet enlightens three realms. Even the storm that moves the immovables does not effect it.

श्लोक – 17

नास्तं कदाचिदुपयासि न राहुगम्य:,
स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्-जगन्ति ।
नाम्भोधरोदर-निरुद्ध-महा-प्रभाव:,
सूर्यातिशायि-महिमासि मुनीन्द्र! लोके ॥17॥

हिंदी अर्थ – हे मुनीन्द्र! आप न तो कभी अस्त होते हैं न ही राहु के द्वारा ग्रसे जाते हैं और न आपका महान तेज मेघ से तिरोहित होता है आप एक साथ तीनों लोकों को शीघ्र ही प्रकाशित कर देते हैं अतः आप सूर्य से भी अधिक महिमावन्त हैं ।

English Meaning – O Monk among monks! Your unabounding glory is greater than that of the sun. The sun rises every day but sets as well, but the orb of your omniscience is ever shining; it never sets.

The sun is eclipsed, but you are passionless and infinitely virtuous; as such, no mundane passion or desire eclipses the glory of your virtues.

The sun slowly rises over parts of the world, but the glow of your omniscience reaches every part of the world at once.

Insignificant clouds obstruct the sun’s rays, but there is nothing that can obstruct the radiance of your knowledge.

श्लोक – 18

नित्योदयं दलित-मोह-महान्धकारं,
गम्यं न राहु-वदनस्य न वारिदानाम् ।
विभ्राजते तव मुखाब्ज-मनल्पकान्ति,
विद्योतयज्-जगदपूर्व-शशांक-बिम्बम् ॥18॥

हिंदी अर्थ – हमेशा उदित रहने वाला, मोहरुपी अंधकार को नष्ट करने वाला जिसे न तो राहु ग्रस सकता है, न ही मेघ आच्छादित कर सकते हैं, अत्यधिक कान्तिमान, जगत को प्रकाशित करने वाला आपका मुखकमल रुप अपूर्व चन्द्रमण्डल शोभित होता है ।

English Meaning – O Lord! Your lotus face is a moon par excellence. The moon shines only at night, and that too in a fortnightly cycle, but your face is ever radiant.

While moonlight penetrates darkness only to a limited extent, your face removes the universal darkness of ignorance and desire.

The moon is eclipsed and covered by clouds, but there is nothing that can veil your face.

श्लोक – 19

किं शर्वरीषु शशिनाह्नि विवस्वता वा,
युष्मन्मुखेन्दु-दलितेषु तम:सु नाथ!
निष्पन्न-शालि-वन-शालिनी जीव-लोके,
कार्यं कियज्जल-धरै-र्जल-भार-नमै्र: ॥19॥

हिंदी अर्थ – हे स्वामिन्! जब अंधकार आपके मुख रुपी चन्द्रमा के द्वारा नष्ट हो जाता है तो रात्रि में चन्द्रमा से एवं दिन में सूर्य से क्या प्रयोजन? पके हुए धान्य के खेतों से शोभायमान धरती तल पर पानी के भार से झुके हुए मेघों से फिर क्या प्रयोजन।

English Meaning – O Lord of the Universe! Where is the need for the sun during the day and the moon during the night when your ever-radiant face sweeps away the darkness of the world? Indeed, once the crop is ripe, what is needed for the thundering rain clouds?

श्लोक – 20

ज्ञानं यथा त्वयि विभाति कृतावकाशं,
नैवं तथा हरि-हरादिषु नायकेषु ।
तेजो महा मणिषु याति यथा महत्त्वं,
नैवं तु काच-शकले किरणाकुलेऽपि ॥20॥

हिंदी अर्थ – अवकाश को प्राप्त ज्ञान जिस प्रकार आप में शोभित होता है वैसा विष्णु महेश आदि देवों में नहीं। कान्तिमान मणियों में, तेज जैसे महत्व को प्राप्त होता है वैसे किरणों से व्याप्त भी काँच के टुकड़े में नहीं होता ।

English Meaning – O Lord! The pure, incessant and complete knowledge that you have, can not be found in any other deity in this world.

Indeed, the lustre and light of priceless gems can hardly be seen in the glass pieces glittering in a beam of light.

श्लोक – 21

मन्ये वरं हरि-हरादय एव दृष्टा,
दृष्टेषु येषु हृदयं त्वयि तोषमेति ।
किं वीक्षितेन भवता भुवि येन नान्य:,
कश्चिन्मनो हरति नाथ ! भवान्तरेऽपि ॥21॥

हिंदी अर्थ – हे स्वामिन्। देखे गये विष्णु महादेव ही मैं उत्तम मानता हूँ, जिन्हें देख लेने पर मन आपमें सन्तोष को प्राप्त करता है। किन्तु आपको देखने से क्या लाभ? जिससे कि प्रथ्वी पर कोई दूसरा देव जन्मान्तर में भी चित्त को नहीं हर पाता।

English Meaning – O Supreme Lord! It is good that I have seen other mundane deities before seeing you; because the discontent even after seeing them has been removed by the glimpse of your detached and serene expression.

Now that I have witnessed the ultimate, I can not be satisfied with anything less in this life or the later lives.

श्लोक – 22

स्त्रीणां शतानि शतशो जनयन्ति पुत्रान्,
नान्या सुतं त्वदुपमं जननी प्रसूता ।
सर्वा दिशो दधति भानि सहस्र-रश्मिं,
प्राच्येव दिग्जनयति स्फुरदंशु-जालम् ॥22॥

हिंदी अर्थ – सैकड़ों स्त्रियाँ सैकड़ों पुत्रों को जन्म देती हैं, परन्तु आप जैसे पुत्र को दूसरी माँ उत्पन्न नहीं कर सकी। नक्षत्रों को सभी दिशायें धारण करती हैं परन्तु कान्तिमान् किरण समूह से युक्त सूर्य को पूर्व दिशा ही जन्म देती हैं।

English Meaning – O Unique! Numerous stars and planets can be seen in all directions but the sun rises only in the East.

Similarly innumerable women give birth to sons but an illustrious son like you was born only to one mother; you are unique.

श्लोक- 23

त्वामामनन्ति मुनय: परमं पुमांस-
मादित्य-वर्ण-ममलं तमस: पुरस्तात् ।
त्वामेव सम्य-गुपलभ्य जयन्ति मृत्युं,
नान्य: शिव: शिवपदस्य मुनीन्द्र! पन्था:॥23॥

हिंदी अर्थ – हे मुनीन्द्र! तपस्वीजन आपको सूर्य की तरह तेजस्वी निर्मल और मोहान्धकार से परे रहने वाले परम पुरुष मानते हैं।

वे आपको ही अच्छी तरह से प्राप्त कर म्रत्यु को जीतते हैं। इसके सिवाय मोक्षपद का दूसरा अच्छा रास्ता नहीं है।

English Meaning – O Sage of sages! All sages believe you to be the supreme being beyond the darkness,and brilliant as the sun.

You are free of the malignance of attachment and aversion and beyond the darkness of ignorance.

One gains immortality by perceiving, understanding,and following the path of purity you have shown. There is no other path leading to salvation.

श्लोक – 24

त्वा-मव्ययं विभु-मचिन्त्य-मसंख्य-माद्यं,
ब्रह्माणमीश्वर-मनन्त-मनंग-केतुम् ।
योगीश्वरं विदित-योग-मनेक-मेकं,
ज्ञान-स्वरूप-ममलं प्रवदन्ति सन्त: ॥24॥

हिंदी अर्थ – सज्जन पुरुष आपको शाश्वत, विभु, अचिन्त्य, असंख्य, आद्य, ब्रह्मा, ईश्वर, अनन्त, अनंगकेतु, योगीश्वर, विदितयोग, अनेक, एक ज्ञानस्वरुप और अमल कहते हैं ।

English Meaning – O Lord! Viewing you from different perspectives, sages address you as: Amaranthine(in existence), All-pervading (in knowledge), Unfathomable (in perception), Infinite(in virtues), Progenitor(of philosophy), Perpetually blissful(in-state), Majestic(in spiritual glory), Eternal(in purity), Serene(with respect to sensuality), Lord of ascetics(in meditation), Preceptor of Yoga(in the yoga philosophy), Multidimensional(in perspective), Unique(in identity), Omniscient(in form), and Pure(free from all vices).

श्लोक – 25

बुद्धस्त्वमेव विबुधार्चित-बुद्धि-बोधात्,
त्वं शंकरोऽसि भुवन-त्रय-शंकरत्वात् ।
धातासि धीर! शिव-मार्ग विधेर्विधानाद्,
व्यक्तं त्वमेव भगवन् पुरुषोत्तमोऽसि ॥25॥

हिंदी अर्थ – देव अथवा विद्वानों के द्वारा पूजित ज्ञान वाले होने से आप ही बुद्ध हैं। तीनों लोकों में शान्ति करने के कारण आप ही शंकर हैं।

हे धीर! मोक्षमार्ग की विधि के करने वाले होने से आप ही ब्रह्मा हैं। और हे स्वामिन्! आप ही स्पष्ट रुप से मनुष्यों में उत्तम अथवा नारायण हैं।

English Meaning – O Jina! The wise have eulogized your omniscience, so you are the Buddha. You are the ultimate benefactor of all the beings in the universe, so you are Shamkara.

You are the originator of the codes of conduct (Right faith, right knowledge, and right conduct)leading to Moksha, and you are Brahma.

You are manifest in the thoughts of all the devotees in all the splendor of the ultimate, so you are Vishnu. Hence, you are the supreme of all.

श्लोक – 26

तुभ्यं नमस्-त्रिभुवनार्ति-हराय नाथ!
तुभ्यं नम: क्षिति-तलामल-भूषणाय ।
तुभ्यं नमस्-त्रिजगत: परमेश्वराय,
तुभ्यं नमो जिन! भवोदधि-शोषणाय ॥26॥

हिंदी अर्थ – हे स्वामिन्! तीनों लोकों के दुःख को हरने वाले आपको नमस्कार हो, प्रथ्वीतल के निर्मल आभुषण स्वरुप आपको नमस्कार हो, तीनों जगत् के परमेश्वर आपको नमस्कार हो और संसार समुन्द्र को सुखा देने वाले आपको नमस्कार हो।

English Meaning – O Deliverer from all the miseries of the three realms ! I bow to you. O Virtuous adoration of this world! I bow to you.

O Lord paramount of the three realms! I bow to you. O Terminator of the unending chain of waves of rebirths! I bow to you.

श्लोक – 27

को विस्मयोऽत्र यदि नाम गुणै-रशेषैस्-
त्वं संश्रितो निरवकाशतया मुनीश !
दोषै-रुपात्त-विविधाश्रय-जात-गर्वै:,
स्वप्नान्तरेऽपि न कदाचिदपीक्षितोऽसि ॥27॥

हिंदी अर्थ – हे मुनीश! अन्यत्र स्थान न मिलने के कारण समस्त गुणों ने यदि आपका आश्रय लिया हो तो तथा अन्यत्र अनेक आधारों को प्राप्त होने से अहंकार को प्राप्त दोषों ने कभी स्वप्न में भी आपको न देखा हो तो इसमें क्या आश्चर्य?

English Meaning – O Virtuous! It is not surprising that all the virtues have been drawn and densely fused into you, leaving no scope for vices.

The vices have crept into a multitude of other beings. Elevated by false pride, they drift away and do not approach you, even in dreams.

श्लोक- 28

उच्चै-रशोक-तरु-संश्रितमुन्मयूख-
माभाति रूपममलं भवतो नितान्तम् ।
स्पष्टोल्लसत्-किरण-मस्त-तमो-वितानं,
बिम्बं रवेरिव पयोधर-पाश्र्ववर्ति ॥28॥

हिंदी अर्थ – ऊँचे अशोक वृक्ष के नीचे स्थित, उन्नत किरणों वाला, आपका उज्ज्वल रुप जो स्पष्ट रुप से शोभायमान किरणों से युक्त है, अंधकार समूह के नाशक, मेघों के निकट स्थित सूर्य बिम्ब की तरह अत्यन्त शोभित होता है।

English Meaning – O Tirthankara! Sitting under the Ashoka tree, the aura of your scintillating body radiating, you look as divinely splendid as the orb of the sun amidst dense clouds, piercing the growing darkness with its rays.

श्लोक- 29

सिंहासने मणि-मयूख-शिखा-विचित्रे,
विभ्राजते तव वपु: कनकावदातम् ।
बिम्बं वियद्-विलस-दंशुलता-वितानं
तुंगोदयाद्रि-शिरसीव सहस्र-रश्मे: ॥29॥

हिंदी अर्थ – मणियों की किरण-ज्योति से सुशोभित सिंहासन पर, आपका सुवर्ण कि तरह उज्ज्वल शरीर, उदयाचल के उच्च शिखर पर आकाश में शोभित, किरण रुप लताओं के समूह वाले सूर्य मण्डल की तरह शोभायमान हो रहा है।

English Meaning – O Tirthankara! Sitting on throne with multicoloured hue of gems. Your bright golden body looks resplendent and attractive like the rising sun on the peak of the eastern mountain’s radiating golden rays under the canopy of the blue sky.

श्लोक – 30

कुन्दावदात-चल-चामर-चारु-शोभं,
विभ्राजते तव वपु: कलधौत-कान्तम् ।
उद्यच्छशांक-शुचिनिर्झर-वारि-धार-
मुच्चैस्तटं सुरगिरेरिव शातकौम्भम् ॥30॥

हिंदी अर्थ – कुन्द के पुष्प के समान धवल चॅवरों के द्वारा सुन्दर है शोभा जिसकी, ऐसा आपका स्वर्ण के समान सुन्दर शरीर, सुमेरुपर्वत, जिस पर चन्द्रमा के समान उज्ज्वल झरने के जल की धारा बह रही है, के स्वर्ण निर्मित ऊँचे तट की तरह शोभायमान हो रहा है।

English Meaning – O Tirthankara! The snow white fans of loose fibres (giant whisks) swinging on both sides of your golden body appear like streams of water, pure and glittering as the rising moon, flowing down th sides of the peakof the golden mountain, Sumeru.

श्लोक – 31

छत्रत्रयं-तव-विभाति शशांककान्त,
मुच्चैः स्थितं स्थगित भानुकर-प्रतापम् ।
मुक्ताफल-प्रकरजाल-विवृद्धशोभं,
प्रख्यापयत्त्रिजगतः परमेश्वरत्वम् ॥31॥

हिंदी अर्थ – चन्द्रमा के समान सुन्दर, सूर्य की किरणों के सन्ताप को रोकने वाले, तथा मोतियों के समूहों से बढ़ती हुई शोभा को धारण करने वाले, आपके ऊपर स्थित तीन छत्र, मानो आपके तीन लोक के स्वामित्व को प्रकट करते हुए शोभित हो रहे हैं।

English Meaning – O Tirthankara! A three tier canopy adorns the space over your head. It has the soft white glow of the moon and is decorated with pearl frills.

This canopy has screened the scorching sun rays. Indeed, this three-tier canopy symbolizes your paramountcy over the three realms.

भक्तामर स्तोत्र

श्लोक – 32

गम्भीर-तार-रव-पूरित-दिग्विभागस्-
त्रैलोक्य-लोक-शुभ-संगम-भूति-दक्ष: ।
सद्धर्म-राज-जय-घोषण-घोषक: सन्,
खे दुन्दुभि-ध्र्वनति ते यशस: प्रवादी ॥32॥

हिंदी अर्थ – गम्भीर और उच्च शब्द से दिशाओं को गुञ्जायमान करने वाला, तीन लोक के जीवों को शुभ विभूति प्राप्त कराने में समर्थ और समीचीन जैन धर्म के स्वामी की जय घोषणा करने वाला दुन्दुभि वाद्य आपके यश का गान करता हुआ आकाश में शब्द करता है।

English Meaning – The deep resonant drum beats fill space in all directions as if felicitating your serene presence and giving a call to all the beings of the three realms to join the pious path shown by you. All space is reverberating with this announcement of victory of the true religion. 

श्लोक – 33

मन्दार-सुन्दर-नमेरु-सुपारिजात-
सन्तानकादि-कुसुमोत्कर-वृष्टि-रुद्घा ।
गन्धोद-बिन्दु-शुभ-मन्द-मरुत्प्रपाता,
दिव्या दिव: पतति ते वचसां ततिर्वा ॥33॥

हिंदी अर्थ – सुगंधित जल बिन्दुओं और मन्द सुगन्धित वायु के साथ गिरने वाले श्रेष्ठ मनोहर मन्दार, सुन्दर, नमेरु, पारिजात, सन्तानक आदि कल्पवृक्षों के पुष्पों की वर्षा आपके वचनों की पंक्तियों की तरह आकाश से होती है।

English Meaning – O Tirthankara! The divine spray of perfumes and shower of fragrant flowers, like Mandar, Sundar, Nameru, Parijata, etc., float toward you with the drift of mild breeze.

This enchanting scene creates an impression that the pious words you utter have turned into flowers and are floating toward the earthlings.

श्लोक – 34

शुम्भत्-प्रभा-वलय-भूरि-विभा-विभोस्ते,
लोक-त्रये-द्युतिमतां द्युति-माक्षिपन्ती ।
प्रोद्यद्-दिवाकर-निरन्तर-भूरि-संख्या,
दीप्त्या जयत्यपि निशामपि सोमसौम्याम् ॥34॥

हिंदी अर्थ – हे प्रभो! तीनों लोकों के कान्तिमान पदार्थों की प्रभा को तिरस्कृत करती हुई आपके मनोहर भामण्डल की विशाल कान्ति एक साथ उगते हुए अनेक सूर्यों की कान्ति से युक्त होकर भी चन्द्रमा से शोभित रात्रि को भी जीत रही है ।

English Meaning – O Tirthankara! The splendorous halo around you is more brilliant than any other luminous object in the universe.

It dispels darkness of the night and is more dazzling than many suns put together; but still it is as cool and soothing as the bright full moon. 

श्लोक – 35

स्वर्गापवर्ग-गम-मार्ग-विमार्गणेष्ट:,
सद्धर्म-तत्त्व-कथनैक-पटुस्-त्रिलोक्या: ।
दिव्य-ध्वनि-र्भवति ते विशदार्थ-सर्व-
भाषास्वभाव-परिणाम-गुणै: प्रयोज्य: ॥35॥

हिंदी अर्थ – आपकी दिव्यध्वनि स्वर्ग और मोक्षमार्ग की खोज में साधक, तीन लोक के जीवों को समीचीन धर्म का कथन करने में समर्थ, स्पष्ट अर्थ वाली, समस्त भाषाओं में परिवर्तित करने वाले स्वाभाविक गुण से सहित होती है।

English Meaning – O Tirthankara! Your divine voice (discourse) is potent enough to show the path of liberation to all beings.

It has the clarity to reveal the mystery of matter and its trasformation. Profound but candid, it has the astounding capacity of transforming into the language understood by each being of the world.

श्लोक – 36

उन्निद्र-हेम-नव-पंकज-पुंज-कान्ती,
पर्युल्-लसन्-नख-मयूख-शिखाभिरामौ।
पादौ पदानि तव यत्र जिनेन्द्र ! धत्त:,
पद्मानि तत्र विबुधा: परिकल्पयन्ति ॥36॥

हिंदी अर्थ – पुष्पित नव स्वर्ण कमलों के समान शोभायमान नखों की किरण प्रभा से सुन्दर आपके चरण जहाँ पड़ते हैं वहाँ देव गण स्वर्ण कमल रच देते हैं।

English Meaning – O Jina! Your feet are resplendent like fresh golden lotuses. Their nails have a comely glow. Wherever you put your feet the gods create divine golden lotuses.

श्लोक – 37

॥ अन्तरंग-बहिरंग लक्ष्मी के स्वामी मंत्र॥
इत्थं यथा तव विभूति-रभूज्-जिनेन्द्र्र !
धर्मोपदेशन-विधौ न तथा परस्य।
यादृक्-प्र्रभा दिनकृत: प्रहतान्धकारा,
तादृक्-कुतो ग्रहगणस्य विकासिनोऽपि ॥37॥

हिंदी अर्थ – हे जिनेन्द्र! इस प्रकार धर्मोपदेश के कार्य में जैसा आपका ऐश्वर्य था वैसा अन्य किसी का नहीं हुआ अंधकार को नष्ट करने वाली जैसी प्रभा सूर्य की होती है वैसी अन्य प्रकाशमान भी ग्रहों की कैसे हो सकती है?

English Meaning – O lord of ascetics! The height of eloquence, lucidity, and eruditeness evident in your discourse is not seen anywhere else.

Indeed, the darkness-dissipating dazzle of the sun can never be seen in the twinkling stars and planets.

श्लोक – 38

॥ हस्ती भय निवारण मंत्र ॥
श्च्यो-तन्-मदाविल-विलोल-कपोल-मूल,
मत्त-भ्रमद्-भ्रमर-नाद-विवृद्ध-कोपम्।
ऐरावताभमिभ-मुद्धत-मापतन्तं
दृष्ट्वा भयं भवति नो भवदाश्रितानाम् ॥38॥

हिंदी अर्थ – आपके आश्रित मनुष्यों को, झरते हुए मद जल से जिसके गण्डस्थल मलीन, कलुषित तथा चंचल हो रहे है और उन पर उन्मत्त होकर मंडराते हुए काले रंग के भौरे अपने गुजंन से क्रोध बढ़ा रहे हों ऐसे ऐरावत की तरह उद्दण्ड, सामने आते हुए हाथी को देखकर भी भय नहीं होता।

English Meaning – O Jina! The devotees who have submitted to you are not scared even of a mad mammoth with dripping humor and being incessantly goaded by humming bees.

(They are always and everywhere fearless as the quietitude of their deep meditation pacifies even the most oppressive of the beings. 

श्लोक – 39

॥ सिंह-भय-विदूरण मंत्र ॥
भिन्नेभ-कुम्भ-गल-दुज्ज्वल-शोणिताक्त,
मुक्ता-फल-प्रकरभूषित-भूमि-भाग:।
बद्ध-क्रम: क्रम-गतं हरिणाधिपोऽपि,
नाक्रामति क्रम-युगाचल-संश्रितं ते ॥39॥ 

हिंदी अर्थ – सिंह, जिसने हाथी का गण्डस्थल विदीर्ण कर, गिरते हुए उज्ज्वल तथा रक्तमिश्रित गजमुक्ताओं से पृथ्वी तल को विभूषित कर दिया है तथा जो छलांग मारने के लिये तैयार है वह भी अपने पैरों के पास आये हुए ऐसे पुरुष पर आक्रमण नहीं करता जिसने आपके चरण युगल रुप पर्वत का आश्रय ले रखा है।

English Meaning – O Jina! A ferocious lion tears open the temples of elephant and scatters around white bone-pearls made crimson with blood.

Even such angry and roaring lion, ready to leap at its prey, gets pacified and does not attack a devotee who has taken shelter at your secure feet. (In other words, your devotee is free of the fear of ferocious lions.) 

श्लोक – 40

॥ अग्नि भय-शमन मंत्र ॥
कल्पान्त-काल-पवनोद्धत-वह्नि-कल्पं,
दावानलं ज्वलित-मुज्ज्वल-मुत्स्फुलिंगम्।
विश्वं जिघत्सुमिव सम्मुख-मापतन्तं,
त्वन्नाम-कीर्तन-जलं शमयत्यशेषम् ॥40॥

हिंदी अर्थ – आपके नाम यशोगानरुपी जल, प्रलयकाल की वायु से उद्धत, प्रचण्ड अग्नि के समान प्रज्वलित, उज्ज्वल चिनगारियों से युक्त, संसार को भक्षण करने की इच्छा रखने वाले की तरह सामने आती हुई वन की अग्नि को पूर्ण रुप से बुझा देता है।

English Meaning – O Jina! Even the all-consuming forest conflagration, as if kindled by the doomsday tempest and having incandescant sparking flames, is extinguished in no time by the quenching stream of your name laudition. (That is, your devotee has no fear of fire.) 

श्लोक – 41

॥ सर्प-भय-निवारण मंत्र ॥
रक्तेक्षणं समद-कोकिल-कण्ठ-नीलम्,
क्रोधोद्धतं फणिन-मुत्फण-मापतन्तम्।
आक्रामति क्रम-युगेण निरस्त-शंकस्-
त्वन्नाम-नागदमनी हृदि यस्य पुंस: ॥41॥

हिंदी अर्थ – जिस पुरुष के हृदय में नामरुपी-नागदौन नामक औषध मौजूद है, वह पुरुष लाल लाल आँखो वाले, मदयुक्त कोयल के कण्ठ की तरह काले, क्रोध से उद्धत और ऊपर को फण उठाये हुए, सामने आते हुए सर्प को निश्शंक होकर दोनों पैरो से लाँघ जाता है।

English Meaning – O Benevolent! A devotee who has absorbed the anti-toxin of your pious name crosses fearlessly over an extremely venomous and hissing serpent with blood-red eyes, a black body, an obnoxious appearance and a raised hood. (That is, your devotee has no fear of snakes.)

श्लोक – 42

॥ रण-रंगे-शत्रु पराजय मंत्र ॥
वल्गत्-तुरंग-गज-गर्जित-भीमनाद-
माजौ बलं बलवता-मपि-भूपतीनाम्।
उद्यद्-दिवाकर-मयूख-शिखापविद्धं
त्वत्कीर्तनात्तम इवाशु भिदामुपैति: ॥42॥

हिंदी अर्थ – आपके यशोगान से युद्धक्षेत्र में उछलते हुए घोड़े और हाथियों की गर्जना से उत्पन भयंकर कोलाहल से युक्त पराक्रमी राजाओं की भी सेना, उगते हुए सूर्य किरणों की शिखा से वेधे गये अंधकार की तरह शीघ्र ही नाश को प्राप्त हो जाती है।

English Meaning – O Conqueror of vices! As darkness recedes with the rising of the sun, the armies of formidable kings, creating a tumultuous uproar of whinnying horses and trumpeting elephants, retreat when your pious name is chanted. (In other words, your devotee is free of the fear of enemies.)

श्लोक- 43

॥ रणरंग विजय मंत्र ॥
कुन्ताग्र-भिन्न-गज-शोणित-वारिवाह,
वेगावतार-तरणातुर-योध-भीमे।
युद्धे जयं विजित-दुर्जय-जेय-पक्षास्-
त्वत्पाद-पंकज-वनाश्रयिणो लभन्ते: ॥43॥

हिंदी अर्थ – हे भगवन् आपके चरण कमलरुप वन का सहारा लेने वाले पुरुष, भालों की नोकों से छेद गये हाथियों के रक्त रुप जल प्रवाह में पड़े हुए, तथा उसे तैरने के लिये आतुर हुए योद्धाओं से भयानक युद्ध में, दुर्जय शत्रु पक्ष को भी जीत लेते हैं।

English Meaning – O, Vanquisher of the passion! In the fierce battle, where brave warriors are eager to plod over the streams of blood gushing out of the bodies of elephants pierced by sharp spears, the devotee, having sought protection of the garden of your lotus feet, embraces victory ultimately. (In other words, your devotee is always victorious in the end.)

श्लोक – 44

॥ समुद्र उल्लंघन मंत्र ॥
अम्भोनिधौ क्षुभित-भीषण-नक्र-चक्र-
पाठीन-पीठ-भय-दोल्वण-वाडवाग्नौ।
रंगत्तरंग-शिखर-स्थित-यान-पात्रास्-
त्रासं विहाय भवत: स्मरणाद्-व्रजन्ति: ॥44॥

हिंदी अर्थ – क्षोभ को प्राप्त भयंकर मगरमच्छों के समूह और मछलियों के द्वारा भयभीत करने वाले दावानल से युक्त समुद्र में विकराल लहरों के शिखर पर स्थित है जहाज जिनका, ऐसे मनुष्य, आपके स्मरण मात्र से भय छोड़कर पार हो जाते हैं।

English Meaning – O Equanimous! Abroad, a ship caught at the crest of giant waves and surrounded by attacking alligators, giant oceanic creatures, and marine fire, with the help of your name chanting, the devotee surmounts such horrors and crosses the ocean. (That is, your devotees are free of the fear of water.)

श्लोक – 45

॥ रोग-उन्मूलन मंत्र ॥
उद्भूत-भीषण-जलोदर-भार-भुग्ना:,
शोच्यां दशा-मुपगताश्-च्युत-जीविताशा:।
त्वत्पाद-पंकज-रजो-मृत-दिग्ध-देहा:,
मत्र्या भवन्ति मकर-ध्वज-तुल्यरूपा: ॥45॥

हिंदी अर्थ – उत्पन्न हुए भीषण जलोदर रोग के भार से झुके हुए, शोभनीय अवस्था को प्राप्त और नहीं रही है जीवन की आशा जिनके, ऐसे मनुष्य आपके चरण कमलों की रज रुप अम्रत से लिप्त शरीर होते हुए कामदेव के समान रुप वाले हो जाते हैं ।

English Meaning – O Omniscient! An extremely sick person, disfigured due to advanced dropsy and having lost all hopes of recovery and survival, when rubs the nectar-like dust particles taken from your lotus feet, fully recovers and becomes handsome as Adonis.

श्लोक – 46

॥ बन्धन मुक्ति मंत्र ॥
आपाद-कण्ठमुरु-शृंखल-वेष्टितांगा,
गाढं-बृहन्-निगड-कोटि निघृष्ट-जंघा:।
त्वन्-नाम-मन्त्र-मनिशं मनुजा: स्मरन्त:,
सद्य: स्वयं विगत-बन्ध-भया भवन्ति: ॥46॥

हिंदी अर्थ – जिनका शरीर पैर से लेकर कण्ठ पर्यन्त बड़ी-बड़ी सांकलों से जकड़ा हुआ है और विकट सघन बेड़ियों से जिनकी जंघायें अत्यन्त छिल गईं हैं ऐसे मनुष्य निरन्तर आपके नाममंत्र को स्मरण करते हुए शीघ्र ही बन्धन मुक्त हो जाते है।

English Meaning – O Liberated soul! Persons put in prison, tied from head to toe in heavy chains, whose thighs have been bruised by the rough edges of the chain-links, get unshackled and freed from bondage by chanting your name.

श्लोक – 47

॥ सकल भय विनाशन मंत्र ॥
मत्त-द्विपेन्द्र-मृग-राज-दवानलाहि-
संग्राम-वारिधि-महोदर-बन्ध-नोत्थम्।
तस्याशु नाश-मुपयाति भयं भियेव,
यस्तावकं स्तव-मिमं मतिमानधीते: ॥47॥

हिंदी अर्थ – जो बुद्धिमान मनुष्य आपके इस स्तवन को पढ़ता है उसका मत्त हाथी, सिंह, दवानल, युद्ध, समुद्र जलोदर रोग और बन्धन आदि से उत्पन्न भय मानो डरकर शीघ्र ही नाश को प्राप्त हो जाता है। 

English Meaning – O jina! The wise who recites this panegyric with devotion is always free of fears of mad elephants, ferocious lions, forest fire, poisonous snakes tempestuous sea, fatal diseases,and bondage. In fact, fear itself is afraid of him.

श्लोक – 48

॥ जिन-स्तुति-फल मंत्र ॥
स्तोत्र-स्रजं तव जिनेन्द्र गुणैर्निबद्धाम्,
भक्त्या मया विविध-वर्ण-विचित्र-पुष्पाम्।
धत्ते जनो य इह कण्ठ-गता-मजस्रं,
तं मानतुंग-मवशा-समुपैति लक्ष्मी: ॥48॥

हिंदी अर्थ – हे जिनेन्द्र देव! इस जगत् में जो लोग मेरे द्वारा भक्तिपूर्वक (ओज, प्रसाद, माधुर्य आदि) गुणों से रची गई नाना अक्षर रुप, रंग बिरंगे फूलों से युक्त आपकी स्तुति रुप माला को कंठाग्र करता है।

उस उन्नत सम्मान वाले पुरुष को अथवा आचार्य मानतुंग को स्वर्ग मोक्षादि की विभूति अवश्य प्राप्त होती है।

English Meaning – O Jina! With devotion, I have made up this string (panegyric) of your virtues. I have decorated it with charming and multicolored (words) flowers (sentiments).

The devotee who always wears it on the neck (memories and chants) attracts the goddess of success (attracts the highest honor, the goal of liberation).

निष्कर्ष

भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra in Hindi) एक दिव्य एवं चमत्कारिक रूप से प्रभावशाली औषधि है।

इस स्तोत्र को आचार्य मानतुंगा सूरीजी ने लिखा है। भक्ति की इस अविरल धारा का प्रवाह और बल प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के लिए है।

भक्तामर स्तोत्र का प्रत्येक शब्द भगवान के प्रति उनकी ज्ञानवर्धक भक्ति और असीम आस्था को प्रकट करता है। इस स्तोत्र को श्वेतांबर और दिगंबर के दोनों मुख्य संप्रदाय स्वीकार करते हैं।

यह प्रथम जिन, ऋषभनाथ या भगवान ऋषभ को समर्पित है, जिन्हें अक्सर आदिनाथ के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘प्रथम भगवान‘।

यह स्तोत्र संस्कृत में विस्तृत काव्यात्मक शैली में लिखा गया है। भक्तामर-स्तोत्र जिना की विशेषताओं और लक्षणों पर केंद्रित है। सबसे प्रमुख हैं जिना की चमक और पूर्ण शांति, जो उनकी पूर्ण पूर्णता की विशेषताएं हैं।

Om Sarve Bhavantu Sukhinah – In Sanskrit with Meaning

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (Sarve Bhavantu Sukhinah) एक बहुत ही लोकप्रिय संस्कृत श्लोक है। परंतु इस मंत्र की उत्पत्ति कहि इतिहास में खो गई है। इसका उल्लेख आध्यात्मिकता और कल्याण के सन्दर्भ में किया जाता है। प्राचीन संस्कृत मंत्र, ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः, सार्वभौमिक सुख, शांति और कल्याण के लिए एक गहन प्रार्थना है।

इस श्लोक की उत्पत्ति प्राचीन वैदिक ग्रंथों से हुई है और यह भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, विशेषकर सनातन धर्म (हिंदू धर्म) में गहराई से अंतर्निहित है। यह श्लोक केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि सार्वभौमिक प्रेम, करुणा और सामूहिक कल्याण की गहन अभिव्यक्ति है।

Sarve Bhavantu Sukhinah

योग अभ्यासी इस शांति मंत्र का उपयोग जीवन की व्यापक समझ प्राप्त करने की दिशा में मन को प्रभावी ढंग से निर्देशित करने के लिए करते हैं। आज 99Pandit के साथ हम जानेंगे ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (Sarve Bhavantu Sukhinah) श्लोक के बारे में। आइए इस प्राचीन योग मंत्र और इसके अर्थ के बारे में जानें।

इसके अलावा अगर आप अपने घर, मंदिर, और ऑफिस में किसी भी प्रकार की पूजा करवाने की इच्छा रखते हैं और कुशल पंडित की तलाश कर रहे हैं, तो 99Pandit सबसे अच्छा विकल्प है। 99Pandit की सहायता से आप अपने घर पर ही पंडित को बुला कर पूजा करा सकते हैं।

ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र क्या है? What is Om Sarve Bhavantu Sukhinah Mantra?

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः’ श्लोक संस्कृत में एक गहन शांति मंत्र है जिसका उद्देश्य सभी व्यक्तियों के लिए शांति, सद्भाव और इष्टतम कल्याण को बढ़ावा देना है। इस मंत्र का उपयोग योग अभ्यास के दौरान शांत शांति और समग्र कल्याण की स्थिति विकसित करने के लिए किया जाता है।

वैदिक शास्त्रों के ज्ञान में निहित, यह मंत्र निःस्वार्थ प्रेम और करुणा का सार प्रस्तुत करता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे है, सभी प्राणियों के लिए सद्भाव और सामूहिक कल्याण की वकालत करता है।

ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः श्लोक को अक्सर सर्वे भवन्तु सुखिनः शांति मंत्र के रूप में जाना जाता है। हालाँकि मंत्र के मूल घटक ज्यादातर अपरिवर्तित रहते हैं, लेकिन इसे बोलने और लिप्यंतरित करने के तरीके में अंतर हो सकता है।

इसके अलावा, इस मंत्र के लिए वैकल्पिक पदनामों में सार्वभौमिक शांति प्रार्थना या शांति पाठ शामिल हो सकते हैं। इस श्लोक की अर्थपूर्ण व्याख्या अपरिवर्तित रहती है।

Om Sarve Bhavantu Sukhinah Mantra in Sanskrit with Meaning

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Transliteration:
oṃ sarve bhavantu sukhinaḥ
sarve santu nirāmayāḥ
sarve bhadrāṇi paśyantu mā kaścidduḥ khabhāgbhaveta।
oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ॥

हिंदी अनुवाद:
सभी सुखी होवें,
सभी रोगमुक्त रहें,
सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।
ॐ शांति शांति शांति॥

English Translation:
May all sentient beings be at peace,
may no one suffer from illness,
May all see what is auspicious, and may no one suffer.
Om, peace, peace, peace.

सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र का आध्यात्मिक महत्व – Spiritual Significance of Sarve Bhavantu Sukhinah Mantra

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः’ प्रार्थना केवल एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए है। यह सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों (सनातन धार्मिकता) और वसुधैव कुटुंबकम (दुनिया एक परिवार है) के दर्शन की अभिव्यक्ति है।

दार्शनिक और आध्यात्मिक समझ यह मंत्र व्यक्तिगत लाभ के विपरीत सभी की भलाई पर प्रकाश डालता है। यह हमें याद दिलाता है कि खुशी दूसरों को खुश करने और दर्द से मुक्त करने में है।

Sarve Bhavantu Sukhinah

यह विचार बौद्ध, जैन और अन्य आध्यात्मिक दर्शनों के अनुरूप है जो करुणा, निस्वार्थता और दूसरों की सेवा पर जोर देते हैं।

प्रार्थना सेवा, या निःस्वार्थ सेवा के मूल योग दर्शन से भी जुड़ी हुई है। इन शब्दों को कहने और जीने से, वक्ता सभी प्राणियों के बीच करुणा, प्रेम और परस्पर जुड़ाव की भावना विकसित करता है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र के लाभ – Benefits of Sarve Bhavantu Sukhinah Mantra

ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः श्लोक का उच्चारण करने वाले और इसे सुनने वाले व्यक्ति दोनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई लाभ हैं। इस मधुर योग मंत्र को अपने ध्यान अभ्यास में शामिल करके, आप निम्नलिखित जैसे कई लाभों का अनुभव कर सकते हैं:

  1. मानसिक शांति को बढ़ावा देता है

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का नियमित जप तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है, शांत और संतुलित दिमाग को बढ़ावा देता है।

  1. सहानुभूति जगाता है

इस मंत्र के जप से हमारे अंदर प्रेम और करुणा का जो सहज भंडार है, उसे जागृत करने में सहायता मिलती है।

  1. सकारात्मक ऊर्जा को प्रोत्साहित करता है

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः’ मंत्र का कंपन सकारात्मकता को बढ़ाता है, जिससे सौहार्दपूर्ण वातावरण बनता है।

  1. आशावाद को बढ़ावा देता है

यह मंत्र शांति, आशावाद और आनंद के लिए हमारी इच्छा को मजबूत करने में अद्भुत है।

  1. भावनात्मक कल्याण को बढ़ाता है

सार्वभौमिक खुशी पर ध्यान केंद्रित करने से, व्यक्तियों में आंतरिक शांति और संतुष्टि की भावना विकसित होती है।

  1. लोभ और ईर्ष्या को समाप्त करता है

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः’ मंत्र लालच और ईर्ष्या जैसे नकारात्मक विचारों को दबाने में सहायता करता है।

  1. समग्र स्वास्थ्य में सुधार

इस मंत्र का शांत प्रभाव रक्तचाप को कम करने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में सहायता करता है।

  1. आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देता है

‘ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र का जाप व्यक्तियों को उच्च चेतना के साथ जोड़ता है, जिससे उनका आध्यात्मिक संबंध गहरा होता है।

  1. सामाजिक सद्भाव को मजबूत करता है

सामूहिक भलाई को प्रोत्साहित करने से पारस्परिक संबंध और सामाजिक एकता मजबूत होती है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः श्लोक का इतिहास – History of Sarve Bhavantu Sukhinah Shloka

सर्वे भवन्तु सुखिनः श्लोक का व्यापक रूप से आध्यात्मिकता, धर्म, सार्वभौमिकता और कल्याण के संदर्भ में उल्लेख किया जाता है क्योंकि यह सभी के कल्याण की अवधारणा को खूबसूरती से चित्रित करता है।

हालाँकि, यह उल्लेखनीय है कि इस अंश की उत्पत्ति का सटीक उल्लेख करने वाले पाठ्य संदर्भों की कमी है।

कई ऑनलाइन साइटों और यहाँ तक कि कई अकादमिक लेखों में पाया जाने वाला एकमात्र उद्धरण इस कविता को बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.14) से जोड़ता है।

यह दावा पूरी तरह से गलत है, क्योंकि उल्लिखित उपनिषद में किसी भी तरह से यह अंश शामिल नहीं है।

इस प्रसिद्ध श्लोक की उत्पत्ति कहां से हुई?

यह पंक्ति गरुड़ पुराण (2.35.51) और भविष्य पुराण (3.2.35.14) के अंतिम श्लोक में थोड़े बदले हुए रूप में पाई जा सकती है।

यहाँ, प्रारंभिक पंक्ति अपने पारंपरिक उपयोग और समझ से अलग है। हालाँकि, सार लगभग वही रहता है। गरुड़ पुराण में पाई जाने वाली कविता इस प्रकार है:

“सर्वेषां मङ्गलं भूयात् सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग् भवेत्।।”

अर्थ: सब अच्छे हों और सभी स्वस्थ रहें।
सब अच्छे रहें और किसी को कोई कष्ट न हो।

ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः का दैनिक जीवन में उपयोग

आज की भाग-दौड़ भरी और आत्म-केंद्रित दुनिया में, ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः के सार को अपनाना जीवन बदलने वाला हो सकता है। इस मंत्र को दैनिक जीवन में लागू करने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं:

1. माइंडफुलनेस और मेडिटेशन

सुबह और शाम के ध्यान के दौरान ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र का जाप करने से आंतरिक शांति और सार्वभौमिक करुणा की भावना पैदा हो सकती है।

2. दयालुता के कार्य

छोटे कार्य, जैसे पड़ोसी की सहायता करना, गरीबों को खाना खिलाना, या एक दयालु शब्द साझा करना, सकारात्मकता और कल्याण का प्रभाव पैदा कर सकता है।

3. सामुदायिक सेवा

स्वयंसेवा और सामाजिक गतिविधियाँ सामूहिक खुशी और पारस्परिक विकास की भावना को बढ़ावा देती हैं।

4. क्षमा और कृतज्ञता

दूसरों को क्षमा करना और जीवन के आशीर्वाद के लिए आभारी होना भावनात्मक और आध्यात्मिक कल्याण में सुधार करता है।

5. सतत जीवन

ग्रह की देखभाल करना, व्यवसाय में जिम्मेदार होना और समाज के साथ सद्भाव को बढ़ावा देना मंत्र के लोकाचार के साथ गूंजता है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः श्लोक का पाठ क्यों करें? Why recite Sarve Bhavantu Sukhinah verse?

अगर कोई इस मंत्र का अर्थ पूरी तरह समझे बिना भी इसका जाप करता है, तो भी उसे कुछ लाभ अवश्य मिलेंगे। ब्रह्मांड को यह संदेश व्यक्त करने मात्र से ही ऊर्जा का प्रसार होता है।

फिर भी, इन शब्दों के अंतर्निहित महत्व की अधिक गहन समझ प्राप्त करना इस उत्तम प्रार्थना के व्यापक लाभ प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

हालाँकि इस प्रार्थना की उत्पत्ति हिंदू परंपरा में हुई है, लेकिन इन शब्दों के उच्चारण से उत्पन्न ऊर्जा निश्चित रूप से सभी व्यक्तियों के लिए सुलभ है, चाहे उनकी धार्मिक संबद्धता, विश्वास या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। इन मंत्रों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए किसी धार्मिक मान्यता का पालन करना आवश्यक नहीं है।

Sarve Bhavantu Sukhinah

यह प्रार्थना सभी लोगों या चीज़ों पर लागू होती है। यह परोपकार और सहानुभूति के साथ-साथ मन, शरीर और आत्मा की शांति और स्थिरता को बढ़ावा देती है।

हम सभी प्राणियों के लिए सार्वभौमिक कल्याण और आनंद चाहते हैं, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड की हर चीज़ शामिल है।

हम खुद को इस सामूहिक समग्रता के एक अभिन्न अंग के रूप में पहचानते हैं। इस प्रकार, जब आप चाहते हैं कि यह ऊर्जा सभी को और हर चीज़ को मिले, तो आप इसे अपने लिए चाहते हैं, क्योंकि आप सामूहिक समग्रता के एक अभिन्न अंग हैं।

निष्कर्ष

‘ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः’ एक सार्वभौमिक प्रार्थना है. यह दया और करुणा के साथ-साथ मन, शरीर और आत्मा की शांति को बढ़ावा देता है।

हम सभी प्राणियों और वास्तव में, पूरे ब्रह्मांड में मौजूद हर चीज के लिए भलाई और खुशी की मांग कर रहे हैं… संपूर्ण समूह के रूप में सभी चीजें, जिनका हम हिस्सा और संपूर्ण हैं।

इसलिए जब आप इस ऊर्जा की कामना हर किसी और सभी के लिए करते हैं, तो आप इसे अपने लिए भी चाह रहे होते हैं क्योंकि आप हर किसी और सभी का हिस्सा हैं!

ओम सर्वे भवन्तु सुखिनः केवल एक प्रार्थना से कहीं अधिक है; यह जीवन का एक तरीका है। अक्सर मतभेदों से विभाजित दुनिया में, यह मंत्र एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि खुशी और कल्याण एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इसके सार को अपनाकर, व्यक्ति और समुदाय शांति, करुणा और सद्भाव की दुनिया को बढ़ावा दे सकते हैं।

हमें आशा है कि आपका आज का आर्टिकल पसंद आएगा। ऐसे ही ब्लॉग, कहानियां, और पूजा-पाठ से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए जुड़े रहिए 99Pandit के साथ।

आइए हम सभी इस पवित्र प्रार्थना के अनुसार जीने का प्रयास करें और एक बेहतर, अधिक समावेशी दुनिया में योगदान दें।

Karmanye Vadhikaraste ma Phaleshu Kadachana Shloka in Sanskrit Meaning

Karmanye Vadhikaraste ma Phaleshu Kadachana: Srimad Bhagavad Gita is one of the most sacred texts of Hindu philosophy, filled with timeless wisdom that guides us on how to live a meaningful and fulfilling life.

One of the most significant verses is “Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana.” It’s about selfless action and the attitude of nonattachment to the fruits of action.

Chapter 2, Verse 47, advises people to engage themselves in duties seriously without expecting fruits.

Karmanye Vadhikaraste ma Phaleshu Kadachana

While man has a role in performing, he doesn’t have any say in the outcome. This philosophy, if embraced, can lead to a life of peace, perseverance, and true success.

The Srimad Bhagavad Gita has 18 chapters and 700 verses. Its original language is Sanskrit. The Gita is one of the Upanishads, which is why it is also known as the Geetopanishad.

It is an important spiritual text because it establishes a person’s right to ask questions about everything.

All the verses of the Shrimad Bhagwad Gita inspire us to live human lives in the truest sense.

Today, with 99Pandit, let us try to understand the meaning of some popular verses of the Bhagavad gita, such as ‘Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana’ in Sanskrit.

Meaning of Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

Meaning –

In this verse, Lord Krishna is telling Arjun that you have the right only to do your work, not on the fruit of your work.

Therefore, no work should be done for the fruit. Therefore, you should not worry about the fruit of your work and do not get attached to inaction.

This is the 47th verse of the Bhagavad Gita Chapter 2. It is a very famous verse, and most students in Indian schools are familiar with it.

It gives insight into doing work without any selfish motive and is often mentioned when discussing Karma Yoga.

This verse gives four teachings about Karma Yoga:

  1. Perform your duty but do not worry about its results.
  2. The results of your actions are not for your happiness, i.e., you are not the enjoyer of the fruits of your actions.
  3. Do not have any ego even while performing your duty.
  4. Do not be attached to inaction.

Philosophical Significance of Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana Shlok

This verse personifies Karma Yoga, the path of selfless action. Here are a few key takeaways:

1. Focus on Effort, Not Outcomes

We care about the outcome of life, be it success or failure, reward or recognition. This verse reminds us that though we can control effort, outcomes are often out of our control, being determined by many other external factors. Detachment from results reduces anxiety and disappointment.

2. Work Without Expectation

When we act with expectations, we either become too elated by success or too dejected by failure.

Karmanye Vadhikaraste ma Phaleshu Kadachana

Krishna advises Arjuna (and all of us) to work with sincerity and dedication without being obsessed with the rewards. This brings peace and stability.

3. Avoid Laziness and Inaction

The verse promotes no carefree attitude or goal-less attitude; instead, it emphasizes executing duties with the highest commitment without demoralizing failures.

4. Practical Application to Modern Life

In Work and Career: Dedicate your very best at your job without bothering yourself with promotions or salary hikes. Results will automatically result.

In Studying: Succeed in Studies rather than a grade chaser. Knowledge shall be the core of success in the long term.

Benefits of Chanting Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana Shlok

1. Control Mind

The mind of the person who regularly reads Bhagavad Gita’s Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana Shlok always remains calm. He can control his mind even in difficult situations. He can use his mind as he wants.

2. Freedom from Anger

People who study the Bhagavad Gita’s 47th verse daily are freed from the bondage of lust, anger, greed, attachment, illusion, etc. And the person who gets freedom from all this his life passes happily.

3. Transmitting Positive Energy

The person who recites the Bhagavad Gita daily, all the negative energies start going away from his life. And positive energy starts flowing.

Not only this, but by reading the Gita, the self-confidence of the person increases, and the person becomes courageous and moves forward on the path of his duty.

4. Get Relief from Stress

A person who reads the Gita gets the knowledge of truth and lies, God and living beings.

He understands good and bad. By reading the Bhagavad Gita, a person also gets relief from stress.

Other Shlokas of Bhagavad Gita

Shlok: 1

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

Meaning: By thinking about material things, a person gets attached to them. This gives rise to desire for them, and anger is born when desires are obstructed.

Therefore, try to stay away from attachment to anything and remain absorbed in work. Children start insisting on something as soon as they see it.

Soon, they get angry when they do not get it. This shloka is excellent to avoid such a situation.

Shlok: 2

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌॥

Meaning: Whenever there is a decline in religion and an increase in unrighteousness, then I (Shri Krishna) create myself, i.e., take incarnation for the revival of religion.

Shlok: 3

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

Meaning: Anger destroys a person’s intelligence, and when intelligence is destroyed, a person destroys himself. Many children get very angry. This shloka makes them aware of the harm caused by anger.

Karmanye Vadhikaraste ma Phaleshu Kadachana

Shlok: 4

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

Meaning: Whatever conduct or work a great man does, other people also behave in the same way or, say, do the same work.

Whatever example or proof a great man presents, the entire human community starts following that. This shloka tells the benefits of good conduct, which is very useful for children.

Shlok: 5

श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥

Meaning: People who have faith and control over their senses acquire knowledge with readiness, and then, after attaining knowledge, they soon attain supreme peace.

This shloka is very good for children studying. It inspires them to concentrate and focus on their goals.

Shlok: 6

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥

Meaning: Neither weapons can cut the soul, nor fire can burn it. Neither water can wet it, nor wind can dry it. (Here, Lord Shri Krishna has talked about the soul being immortal and eternal).

Shlok: 7

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः॥

Meaning: If you (Arjuna) attain martyrdom in battle, you will attain heaven, and if you are victorious, you will enjoy the happiness of the earth. Therefore arise, O Kaunteya (Arjuna), fights with determination.

(Here, Lord Krishna has discussed the consequences of the present action, meaning that there is nothing better than the present action).

Conclusion

Srimad Bhagavad Gita is considered to be a special book among the Hindu religious texts. It is not just the book, but it is a sermon given thousands of years ago that teaches man the art of living today.

In Srimad Bhagavad Gita, the verse Karmanye Vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana is one of the important Shlok. In this Shlok, Lord Krishna taught Arjuna a lesson.

He told Arjuna, ‘You have the right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to receive the fruits of your actions.

Do not consider yourself the cause of the fruits of your actions, and do not have any attachment to remaining inactive.’

In the Gita, Lord Krishna only inspires us to do Karma. He told Arjuna valuable things.

The knowledge given by Lord Shri Krishna to Arjun is considered to be the best knowledge, which is also called Gita knowledge. Shrimad Bhagwat Gita is a collection of valuable things told by Shri Krishna.