हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी 2025 के त्यौहार को बहुत ही शुभ माना जाता है| इस दिन भारत देश में ऋषियों के सम्मान के रूप में मनाया जाता है|
ऋषि पंचमी 2025 का यह पावन त्यौहार हिन्दू धर्म में सर्वज्ञानी सप्तऋषियों को समर्पित किया गया है| इसमें ऋषि शब्द सप्त ऋषियों के लिए और पंचमी का दिन पांचवें दिन से है|
ऋषि पंचमी के शुभ अवसर पर भारत देश के महान महान ऋषियों को याद किया जाता है| ‘ऋषि पंचमी’ का यह त्यौहार भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है|

इस दिन देश के महान सप्तर्षियों के सम्मान उपवास भी रखा जाता है| ऋषि पंचमी का यह त्यौहार गणेश चतुर्थी के अगले दिन तथा हरतालिका तीज के दो दिन बाद मनाया जाता है|
यह त्योहार सप्तऋषियों को ही समर्पित किया है| इन सप्त ऋषियों ने मानव जाति के कल्याण के लिए अपने प्राणों को त्याग किया था|
यह सप्त ऋषि अत्यंत ही सिद्धांतवादी थे| हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए संतों और अपने शिष्यों की सहायता से इस देश के लोगों को सच्चाई और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी|
ऐसा माना जाता है कि वह सभी ऋषि चाहते थे कि इस धरती पर सभी लोग दान, मानवता और ज्ञान के मार्ग का पालन करें|
उनका मानना था कि जब लोग यहाँ एक दुसरे की सहायता के लिए हमेशा तत्पर होंगे तो इससे मानवता का विकास होता है|
एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के जरूरत के समय काम आएगा| हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है|
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ऋषि पंचमी तिथि प्रारंभ – ऋषि पंचमी 2025 तिथि, 27 अगस्त 2025 बुधवार , दोपहर 03:44 से शुरू
पंचमी तिथि समाप्त – 28 अगस्त 2025 गुरूवार, रात्रि 07:58 पर समाप्त
तिथि – ऋषि पंचमी वर्ष 2025 में 28 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी|
ऋषि पंचमी 2025 पूजा मुहूर्त – 28 अगस्त 2025 को सुबह 11 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक रहेगा|
हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह व्रत किया जाता है| इस दिन व्रत करके सप्तऋषियों की पूजा की जाती है|
यह त्यौहार ख़ास इसलिए भी है क्योंकि इस दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करके सुख – शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करती है|
हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी के दिन व्रत के साथ व्रत कथा को पढ़ने मात्र से ही सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है| इस दिन माहेश्वरी समाज के लोग राखी का त्यौहार मनाते है|
ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर सप्तऋषि की पूजा करने से अत्यंत पुण्य की प्राप्ति होती है| हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन सप्तऋषियों का पारम्परिक तरीके से पूजन करने की प्रथा है|
इन सप्त ऋषियों के नाम निम्न है – कश्यप ऋषि, भारद्वाज ऋषि, अत्रि ऋषि, ऋषि विश्वामित्र, गौतम ऋषि, ऋषि जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि |
सभी सप्तऋषियों ने मानवता और समाज के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किये है| इसी कारण ऋषि पंचमी के दिन इन सातों ऋषियों की पूजा की जाती है|
ऋषि पंचमी के इस पावन अवसर पर कोई भी व्यक्ति खासकर महिलाएं जो सप्त ऋषियों का पूजन करते है| उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है|
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को रजस्वला दोष लगता है| ऋषि पंचमी के पूजन से इस पाप से छुटकारा मिलता है|
इस दिन सप्तऋषियों की पूजा करने से महिलाओं के द्वारा मासिक धर्म के समय अनजाने में किये पाप या गलती से मुक्ति मिल जाती है|
ऋषि पंचमी 2025 का त्यौहार सभी के लिए बहुत लाभदायक है| लेकिन इस यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है|
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हमारे देश में सभी धर्मों की अलग – अलग विशेषता है| हिन्दू धर्म में पवित्रता को सर्वोत्तम महत्व दिया जाता है| हिन्दू धर्म में मासिक धर्म से समय महिलाओं को अशुद्ध माना जाता है|
ऐसा भी कहा जाता है कि इस समय यदि कोई भी महिला धार्मिक कार्यों में भाग लेती है तो उसे रजस्वला दोष लग जाता है|
इसलिए इस दोष से पीड़ित महिलाओं को ऋषि पंचमी 2025 के दिन व्रत रखकर सप्त ऋषियों की पूजा करने की सलाह दी जाती है|

मान्यता है नेपाली हिन्दुओं के द्वारा ऋषि पंचमी के इस त्यौहार को बहुत ही अधिक उत्साह से मनाया जाता है| ऋषियों को वेदों का मूल सम्प्रदाय माना जाता है|
जैन धर्म में भी ऋषि पंचमी के त्यौहार को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है| जैन धर्म में ऋषि पंचमी के दिन जैनों के धर्म गुरु और संतों को याद किया जाता है|
जिन्होंने इस पूरी दुनिया को काफी महत्वपूर्ण संदेश दिए है| हिन्दू धर्म और जैन धर्म दोनों में ही ऋषि पंचमी के त्यौहार को सम्पूर्ण भक्ति के भाव से मनाया जाता है|
ऋषि पंचमी का यह त्यौहार मानवता और ज्ञान के मार्ग पर चलने वाले सप्तऋषियों की स्मृति में मनाया जाता है| सप्तर्षि मंडल के प्रथम सदस्य ऋषि वशिष्ठ थे जो कि राजा दशरथ के कुल गुरु थे|
ऋषि वशिष्ठ ने उनके द्वारा रचित सौ सूक्तों की रचना सरस्वती नदी के किनारे की थी| दुसरे सप्तर्षि ऋषि होने से पूर्व एक राजा थे|
माना जाता है कि उन्होंने कामधेनु गाय के लिए ऋषि वशिष्ठ से भी युद्ध किया| लेकिन इस युद्ध में हार जाने के बाद वे ऋषि बन गए| इसी भांति सभी सात ऋषियों की अलग – अलग कहानी है|
हिन्दू और जैन धर्म में ऋषि पंचमी के त्योहार को बहुत ही भक्ति भाव और धार्मिक परंपरा के अनुसार मनाया जाता है|
इस दिन व्रत व सप्तर्षियों की पारम्परिक तरीके से पूजा करने पर भक्तों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है| इस दिन शास्त्रों में बताए गए सप्तर्षियों की पूजा की जाती है|
आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानेंगे कि ऋषि पंचमी के दिन सात ऋषियों की पूजा किस प्रकार की जाती है|
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ऋषि पंचमी के सम्बंधित कई सारी कथाएँ प्रचलित है| आज हम आपको उन्ही में से एक कथा के बारे में बताने वाले है|
सतयुग काल में श्येनजित नाम का एक राजा था| उसके राज्य में एक सुमित्र नाम का ब्राह्मण रहता था जो वेदों का प्रकांड विद्वान् था|
सुमित्र खेती के माध्यम से ही अपने परिवार के सदस्यों का पालन – पोषण करता था| सुमित्र की पत्नी का नाम जयश्री सती था जो कि एक साध्वी थी|
वह भी अपने पति के साथ खेत के सभी कामों में उसकी सहायता करती थी| इस बार जयश्री ने रजस्वला अवस्था में घर के सभी काम कर लिए और उसी के साथ अपने पति को भी स्पर्श कर लिया|

देवयोग के कारण दोनों पति – पत्नी ने अपना शरीर का एक साथ ही त्याग किया| रजस्वला अवस्था में स्पर्श का ध्यान नहीं रखने पर पति को बैल और पत्नी को कुतिया की योनि प्राप्त हुई|
परंतु पिछले जन्म में किया हुए कुछ अच्छे कर्मों के कारण उनका ज्ञान व स्मृति बनी रही| संयोग से वे दोनों पुनः अपने ही घर में अपने पुत्र और पुत्रवधू के साथ ही रह रहे थे|
ब्राह्मण के पुत्र का नाम सुमति था| सुमति भी अपने पिता की भांति वेदों का सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता था| पितृपक्ष में उसने अपने माता – पिता का श्राद्ध करने के विचार से अपनी पत्नी खीर बनवाई थी| तथा ब्राह्मणों को भोजन के लिए आमंत्रण भी दिया|
किन्तु उसी समय एक जहरीले सांप ने आकर खीर को जहरीला कर दिया| कुतिया बनी ब्राह्मणी ने यह देख लिया उसने सोचा यदि यह जहरीली खीर ब्राह्मण खाएंगे तो खीर में जहर होने की वजह से वह मर जाएंगे और उनके पुत्र सुमति को इससे पाप लगेगा|
इस वजह से उसने सुमति की पत्नी के सामने ही खीर को छु लिया| लेकिन इस वजह से सुमति की पत्नी को गुस्सा आ गया और उसने चूल्हे में से जलती हुई लकड़ी निकाल कर कुतिया की पिटाई कर दी| और उसे इस दिन खाने के लिए भी कुछ नहीं दिया| रात होते ही बैल को कुतिया ने सारी बात बताई|
बैल ने भी कहा कि आज उसे भी खाने के लिए नहीं दिया गया| बल्कि पुरे दिनभर मुझे काम भी करवाया गया| उसने कहा कि सुमति ने हमारे लिए ही श्राद्ध का आयोजन किया था लेकिन हमे ही भूखा रख रखा है| अगर ऐसा ही रहा तो उसका श्राद्ध करना व्यर्थ हो जाएगा|
यह बात दरवाजे पर लेटे हुए सुमति ने सुन ली| सुमति पशुओं की भाषा भली – भांति समझता था| उसे यह बात जानकर अत्यंत दुःख हुआ कि उसके माता – पिता इन पशुओं की योनियों में पड़े हुए है|
वह दोड़ता हुआ एक ऋषि के पास गया और उनसे पूछा कि उसके माता-पिता पशुओं की योनि में क्यों पड़े है और उन्हें इससे मुक्त कैसे किया जा सकता है|
तब ऋषि ने अपने तप और योगबल की शक्ति से इसका कारण जान लिया और सुमति को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली ऋषि पंचमी का व्रत करने की सलाह दी|
इस दिन उसे बैल के द्वारा जोता गया अनाज खाने से मना कर दिया| ऋषि ने सुमति से कहा कि इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे माता – पिता को इस पशु योनि से मुक्ति मिल जाएगी|
उन्होंने बिल्कुल वैसा ही किया जैसा कि ऋषि ने उनसे करने के लिए कहा था| इससे सुमति के द्वारा किये गए व्रत के प्रभाव से उसके माता – पिता इस पशु योनि से मुक्ति मिल गयी|
इस दिन ऋषि पंचमी 2025 की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान देना आवश्यक है| जो हम आपको बताने वाले है –
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वर्ष 2025 में ऋषि पंचमी का त्यौहार 28 अगस्त 2025 का है|
इस दिन हल से जोते हुआ किसी भी प्रकार का भोजन नहीं करना चाहिए|
यह त्यौहार भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है|
इस दिन प्रातकाल: जल्दी उठकर किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए| इसके बाद धरती पर किसी भी जगह को गंगाजल को छिड़कर उसे पवित्र करे| फिर इस जगह पर हल्दी की सहायता से चोकोर मंडल बनाए| मंडल के बीच में सप्तऋषि को स्थापित करें|